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                <title>Jobs in Germany: जर्मनी दे रहा नौकरी का शानदार मौका, 42 लाख तक मिलेगी सैलरी, भारतीय भी कर सकते हैं आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[Jobs in Germany: सालभर में लाखों युवा विदेश में नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं, लेकिन विदेश में नौकरी करना आसान नहीं है, वहीं अगर नौकरी मिल भी जाती है, तो बात वर्क वीजा पर आकर अटक जाती है, हालांकि जर्मनी में नौकरी करने के इच्छुक भारतियों को फिलहाल कोई परेशानी नही होगी, क्योंकि जर्मनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/germany-is-giving-a-great-job-opportunity-salary-up-to-forty-two-lakhs/article-63849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/jobs-in-germany.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Jobs in Germany: सालभर में लाखों युवा विदेश में नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं, लेकिन विदेश में नौकरी करना आसान नहीं है, वहीं अगर नौकरी मिल भी जाती है, तो बात वर्क वीजा पर आकर अटक जाती है, हालांकि जर्मनी में नौकरी करने के इच्छुक भारतियों को फिलहाल कोई परेशानी नही होगी, क्योंकि जर्मनी सरकार ने भारतीयों को उनके देश में आकर नौकरी करने के लिए 90 हजार वीजा जारी करने का ऐलान किया हैं, वहां की एक ट्रेन कंपनी ने ड्राइवर यानी लोगो पायलट पद के लिए आवेदन मंगवाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जर्मनी को यूरोप का आर्थिक इंजन कहा जाता हैं, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा समेत कई तरह की इंडस्ट्रीज में जर्मन कंपनियों का दबदबा हैं, हर कोई जानता हैं कि इन दिनों जर्मनी स्किल्ड वर्कर्स की कमी से जूझ रहा हैं, हाल ही में जर्मन सरकार ने ऐलान किया था कि वह भारतीयों के लिए 90 हजार वीजा जारी करने वाले हैं, इसके जरिए हजारों भारतीयों को जर्मनी में नौकरी करने का अवसर मिलेगा, जर्मनी की एक कंपनी ने लोगो पायलट यानी ट्रेन ड्राइवर के लिऐ वैकेंसी निकाली हैं। Jobs in Germany</p>
<h3 style="text-align:justify;">बड़ी कंपनियों में मिलेगी नौकरी</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि जर्मनी की कई कंपनियां वर्कर्स की कमी से जूझ रही हैं, ऐसे में इस देश मे भारतीय लोको पायलट की डिमांड बढ़ गई हैं, जर्मनी की नामी रेल कपनी ‘डॉयचे बान’ अब भारत से ट्रेन ड्राइवरों की नियुक्ति कर रही हैं, ‘डॉयचे बान’ भारतीय ट्रेन ड्राइवर्स को जर्मनी के साथ ही दुनिया के कई अलग-अलग हिस्सों में चल रहे प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका देगी, बता दें कि DB को दुनिया की सबसे बड़ी रेलवे कंपनी के तौर पर जाना जाता हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जर्मनी को भारत में जमानी में धाक | Jobs in Germany</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि डॉयचे बान का नियंत्रण जर्मन सरकार के हाथों में हैं, डॉयचे बान रेलवे कंपनी भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, यह कंपनी भारतीय मेट्रो सेवा के लिए अपनी कन्सल्टेंसी, ऑपरेशन और रख-रखाव जैसी सेवाएं देना चाहती हैं, जानकारी के मुताबित DB इंटरनेशनल ऑपरेशंस के CEO निको वारैनॉफ ने बताया कि जर्मनी में ट्रेन ड्राइवर्स की कमी हैं और हम अपने ग्लोबल प्रोजेक्ट्स के लिए भारतीय कर्मचारियों के स्पेशलाइजेशन का फायदा उठाना चाहते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शुरू हो चुकी हैं ट्रेनिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं डॉयचे बान के अफसरों ने बताया कि DB के लगभग 100 भारतीय कर्मचारियों को ग्लोबल प्रोजेक्ट्स में काम करने की खास ट्रेनिंग दी गई हैं, डॉयचे बन इंटरनेशनल ऑपरेशंस के CEO निको वारबैनॉफ के मुताबित उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के दुहाई और आस-पास के क्षेत्रों के कर्मचारियों को काम पर रखा गया हैं, उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग भी मुहैया कराई गई हैं, इससे उन्हें जर्मनी व अन्य देशों मे काम करने की ट्रेनिंग मिलेगी और वह अपनी स्किल्स का बेस्ट फायदा उठा सकेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डॉयचे बान में नौकरी कैसे मिलेगी?</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉयचे बान अपने ग्लोबल प्रोजेक्ट्स के लिए उन भारतियों को नौकरी देगी, जो पहले से ही कंपनी में काम कर रहे हैं और ट्रेनिंग पूरी कर चुकी हैं, इनके अलावा भी कंपनी कई लोगों को नौकरी पर रखेगी, डॉयचे बान में नौकरी करने के इच्छुक हैं, तो DB,JOBS/EN-EN वेबसाइट पर विजिट करना होगा, यहां आपको उन सभी रोल्स की डिटेल्स मिल जाएंगी, जिनके लिए फिलहाल भर्तियां चल रही हैं, इन नौकरियों के लिए जरूरी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया चेक करके नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। Jobs in Germany</p>
<h3 style="text-align:justify;">डॉयचे बान में ट्रेन ड्राइवर की सैलरी</h3>
<p style="text-align:justify;">यूरोप में काम करने पर भारतियों को अच्छी-खासी सैलरी ऑफर की जाती है, सैलरी का रिकॉर्ड रखने वाली वेबसाइट ग्लासडोर के मुताबित, डॉयचे बान में काम करने वाले ट्रेन ड्राइवर की औसतन सालाना सैलरी 40,000 यूरो (36 लाख रुपये) होती हैं। ट्रेन ड्राइवर को औसतन हर साल 33,000 यूरो ( 29 लाख रुपये) से लेकर 47,000 यूरो (42 लाख रुपये) तक के बीच की सैलरी मिल जाती हैं, आप इसकी वेबसाइट पर जाकर अन्य डिटेलस भी चेक कर सकते हैं, और उनके लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। Jobs in Germany</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Indian Railways: अब रेलवे की दैनिक आय वसूलेगा स्टेट बैंक!" href="http://10.0.0.122:1245/now-state-bank-of-india-will-collect-the-daily-income-of-railways/">Indian Railways: अब रेलवे की दैनिक आय वसूलेगा स्टेट बैंक!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 14:42:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Titanic Of The Sky: सिर्फ 35 सेकेंड और 36 जिंदगियां स्वाहा!</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Titanic Of The Sky: 3 मई 1937 का दिन, जब हिंडनबर्ग का एयरशिप जर्मनी (Germany) (Hindenburg Airship) के फ्रेंकफर्ट से अमेरिका के न्यू जर्सी के लिए उड़ान भरता है, जिसमें 97 यात्री सवार थे। निश्चित समयानुसार यह एयरशिप 5 मई को अपनी मंजिल पर पहुंचना था लेकिन किसी कारणवश लेट हो गया था। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/titanic-of-the-y/article-49760"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/titanic-of-the-sky.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Titanic Of The Sky: 3 मई 1937 का दिन, जब हिंडनबर्ग का एयरशिप जर्मनी (Germany) (Hindenburg Airship) के फ्रेंकफर्ट से अमेरिका के न्यू जर्सी के लिए उड़ान भरता है, जिसमें 97 यात्री सवार थे। निश्चित समयानुसार यह एयरशिप 5 मई को अपनी मंजिल पर पहुंचना था लेकिन किसी कारणवश लेट हो गया था। दोबारा फिर 6 मई 1937 को इसने उड़ान भरी और जब यह न्यू जर्सी पहुंचने वाला था तो अचानक मौसम खराब हो गया तथा पहली बार में ही यह एयरशिप लैंड नहीं कर पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में कंट्रोल रूम ने पायलट को निर्देश दिया कि वह एयरशिप को थोड़ी देर तक तूफान से दूर जाकर आसमान में ही उड़ाए क्योंकि एयरशिप की लैंडिंग करना बहुत मुश्किल था। जैसे-तैसे मौसम ने करवट ली और एयरशिप को लैंडिंग की आज्ञा मिली। आदेश होते ही हिंडनबर्ग एयरशिप ने न्यू जर्सी की लैंडिंग साइट की ओर रूख किया। Titanic Of The Sky</p>
<p style="text-align:justify;">अभी कुछ ही समय हुआ था कि अचानक हवा का रुख हिंडनबर्ग एयरशिप के विपरीत होने लगा। इस दौरान एयरशिप के सामने दो ही रास्ते थे। पहला-हवा के रुख के साथ-साथ धीरे-धीरे लैंडिंग साइट की ओर बढ़ने की कोशिश की जाए जिससे लैंडिंग में ज्यादा देरी होने का अनुमान लगाया गया। ऐसे में कैप्टन ने दूसरा रास्ता चुना और एक तगड़ा टर्न लेते हुए हवा के रुख के विपरीत लैंडिंग साइट पर पहुंचने का फैसला किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जाता है कि इस खतरनाक टर्न के कारण हिंडनबर्ग में लगे स्टील के तारों में से पिछले हिस्से कुछ तार टूट गए, जिनसे एक गैस चैंबर डैमेज हो गया। परिणामस्वरूप उस गैस चैंबर से गैस लीक होनी शुरू हो गई और लैंडिंग साइट के पास पहुंचने से कुछ देर पहले कैप्टन ने नोटिस जारी कर दिया कि एयरशिप का पिछला हिस्सा नीचे की ओर झुक रहा है। Titanic Of The Sky</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि लैंडिंग के समय एयरशिप को संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। कैप्टन ने एयरशिप का संतुलन बनाए रखने के लिए लगभग 3 बार एयरशिप के पिछले हिस्से में पानी गिराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एयरशिप में बैठे बहुत से क्रू मैंबर्स को एयरशिप में आगे आने के लिए कहा गया ताकि पीछे का वजन कम हो और एयरशिप का संतुलन बन सके।<br />
ये सब करने के बाद आखिरकार लैंडिंग का समय आया। Titanic Of The Sky</p>
<p style="text-align:justify;">एयरशिप की लैंडिंग साइट के ऊपर पहुंचकर रुक गया और उसमें से रस्सियाँ नीचे फेंकी गई। एयरशिप की लैंडिंग के लिए उसमें से कुछ रस्सियाँ नीचे फेंकी जाताी थी जिनकी मदद से एयरशिप को नीचे खींचा जाता था। क्रू मैंबर्स रस्सियों के सहारे से एयरशिप को खींच ही रहे थे कि अचानक एयरशिप के पिछले हिस्से में आग लग गई और महज 35 सेकेंड में ही आसमान का टाइटैनिक कहा जाने वाला हिंडनबर्ग जलकर स्वाहा हो गया। क्योंकि एयरशिप में ढेर सारी ज्वलनशील हाइड्रोजन गैस भरी थी, जिसने एक झटके में ही आग पकड़ ली और एयरशिप पल में जलकर राख हो गया साथ ही उसमें सवार 36 जिंदगियां भी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/currency-notes-latest-news/">Currency Notes: करेंसी नोट को लेकर बड़ी अपडेट! 100, 200, 500 रुपये के नोटों को लेकर RBI ने जारी की नई गाइडलाइन</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2023 13:02:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Germany: किसान की बेटी ने जर्मनी में किया देश का नाम रोशन, शूटिंग में जीता मेडल  </title>
                                    <description><![CDATA[Germany में आयोजित इंटरनेशनल अंडर -19 शूटिंग प्रतियोगिता में उर्वा चौधरी ने झटका मेडल गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह )। जर्मनी में आयोजित इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिता मे उर्वा चौधरी (urva chaudhary) ने उत्तम प्रदर्शन कर मेडल हासिल कर, भारत  देश का नाम रोशन किया। यह जानकारी उर्वा चौधरी के चाचा भाकियू के जिला प्रभारी  जयकुमार मालिक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/farmers-daughter-brought-laurels-to-the-country-in-germany-won-a-medal-in-shooting/article-48427"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/urva-chaudhary.jpg" alt=""></a><br /><h3>Germany में आयोजित इंटरनेशनल अंडर -19 शूटिंग प्रतियोगिता में उर्वा चौधरी ने झटका मेडल</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह )।</strong> जर्मनी में आयोजित इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिता मे उर्वा चौधरी (urva chaudhary) ने उत्तम प्रदर्शन कर मेडल हासिल कर, भारत  देश का नाम रोशन किया। यह जानकारी उर्वा चौधरी के चाचा भाकियू के जिला प्रभारी  जयकुमार मालिक ने दी। उन्होंने बताया कि किसान की बेटियां भारत का नाम रोशन कर रही है। हमे गर्व है अपनी बेटियों पर। बताया कि  उर्वा चौधरी के पिता विनय कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद मोदीनगर स्थित गांव नगला मूसा के रहने वाले है। Germany</p>
<p style="text-align:justify;">विनय कुमार सामान्य किसान है और उन्होंने  अपनी  बेटी को शूटिंग सीखने के लिए गाजियाबाद के शास्त्री नगर में हॉकआई शूटिंग एकेडमी  में दाखिल कराया था। उर्वा चौधरी के कोच दविंदर सिंह की अगुवाई में उनको ट्रेनिंग मिली।उसके बाद  उर्वा ने अन्य कई शूटिंग प्रतियोगिताओं में उत्तम  प्रदर्शन किया।    उर्वा चौधरी ने  जर्मनी में आयोजित अंडर  -19  शूटिंग प्रतियोगिता में उत्तम प्रदर्शन करते हुए,सिल्वर मेडल हासिल किया। बता दें  कि जर्मनी में आयोजित इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में  भारत की तीन बेटियां खेलने गई थी। उर्वा  चौधरी सहित  भारत की तीनों  बेटियों ने जर्मनी में आयोजित अंडर -19  शूटिंग प्रतियोगिता में उत्तम प्रदर्शन कर ,भारत देश का नाम रोशन किया ।  Germany</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2023 09:58:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में लूटी गयी नाइजीरिया की 22 कलाकृतियां जर्मनी ने लौटाईं</title>
                                    <description><![CDATA[अबुजा (एजेंसी)। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में लगभग 120 साल से भी अधिक पहले नाइजीरिया से लूट कर यूरोपीय देशों में लायी गईं 22 कलाकृतियों को जर्मन सरकार ने वापस कर दिया है। जर्मन विदेश मामलों की मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार को अपने नाइजीरियाई समकक्ष जेफ्री ओनेमा को 22 लूटी गई कलाकृतियों को सौंपते हुए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/germany-returns-looted-artefacts-to-nigeria/article-41267"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/germany.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अबुजा (एजेंसी)।</strong> ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में लगभग 120 साल से भी अधिक पहले नाइजीरिया से लूट कर यूरोपीय देशों में लायी गईं 22 कलाकृतियों को जर्मन सरकार ने वापस कर दिया है। जर्मन विदेश मामलों की मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार को अपने नाइजीरियाई समकक्ष जेफ्री ओनेमा को 22 लूटी गई कलाकृतियों को सौंपते हुए कहा कि 120 साल पहले ब्रिटिश उपनिवेशवादियों द्वारा इन कांसे की कलाकृतियों को लूटकर गलत किया गया था और इसी कारण इनका वापस किया जाना जरूरी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="न्यायालय ने की अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग ठुकराई" href="http://10.0.0.122:1245/ankita-murder-case-news/">न्यायालय ने की अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग ठुकराई</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">जर्मन अधिकारी ने कहा कि इन लूटी गयी कलाकृतियों को वापस करने की नाइजीरिया की दलील को बहुत लंबे समय तक नजरअंदाज कर दिया गया था। चोरी की कलाकृतियों को वापस करने के फैसले ‘गलत’ बताते हुए इसको ठीक करने के उदेश्य से उठाया गया कदम करार दिया। क्योंकि जर्मनी के अधिकारियों ने एक बार यह जानते हुये इस कांस्य को खरीदा था की वे लूट और चोरी कर लिये गये थे। बेयरबॉक ने कहा कि जर्मनी दक्षिणी नाइजीरियाई राज्य एदो में एक कला मंडप के निर्माण के लिए धन मुहैया कराएगा, जहां बेनिन का ऐतिहासिक साम्राज्य स्थित था। ओन्यामा ने कहा कि जर्मनी और नाइजीरिया ने बाकी दुनिया के लिए एक मानक निर्धारित किया है, यह देखते हुए कि नाइजीरियाई सरकार उन कलाकृतियों को वापस लेने के लिए उत्साहित थी जो वास्तव में सबसे अधिक आबादी वाले अफ्रीकी राष्ट्र से संबंधित हैं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2022 18:10:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जर्मनी में अमेरिकी विमानों का रूस के विरुद्ध नहीं होगा इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस सप्ताह जर्मनी के स्पैंगडाहलेम एयर बेस पर पहुंचने वाले नौसेना के छह ईए-18जी ग्रोलर विमानों का इस्तेमाल यूक्रेन में रूस के विरूध नहीं किया जाएगा। इसका उपयोग नाटो के पूर्वी मोर्चे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने सोमवार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/us-planes-will-not-be-used-against-russia-in-germany/article-31883"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/rafale-is-auspicious-sign-for-indian-air-force-pachauri-2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस सप्ताह जर्मनी के स्पैंगडाहलेम एयर बेस पर पहुंचने वाले नौसेना के छह ईए-18जी ग्रोलर विमानों का इस्तेमाल यूक्रेन में रूस के विरूध नहीं किया जाएगा। इसका उपयोग नाटो के पूर्वी मोर्चे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा,“ उन्हें यूक्रेन में रूस की सेना के विरूध इस्तेमाल के लिए तैनात नहीं किया जा रहा है।” उन्हें पूरी तरह से पूर्वी मोर्चे पर नाटो की प्रतिरोधक क्षमता तथा रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के हमारे प्रयासों को ध्यान में रखते हुए तैनात किया जा रहा है।”</p>
<p style="text-align:justify;">किर्बी ने कहा कि द ग्रोलर यूएस एफ-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट का एक विशेष संस्करण है यह दुश्मन के राडार को चकमा देने वाले जैमिंग सेंसर के एक सेट का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक युद्ध मिशन की उड़ाने के लिए सुसज्जित है। जो कि दुश्मन के वायु रक्षा अभियानों को दबाने की क्षमता में मदद करता है। उन्होंने कहा कि जर्मनी में पायलट और रखरखाव दल के करीब 240 नौसेनिक तैनात रहेंगे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 10:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्मनी ने गैस सौदे का भुगतान रूबल में करने की रूस की घोषणा को नकारा</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन। जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्राकृतिक गैस सौदे का भुगतान रूबल में किए जाने की घोषणा को खारिज कर दिया। स्कोल्ज ने ब्रुसेल्स में ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) नेताओं की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। पुतिन की तरफ से हाल ही में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/germany-denies-russia-announcement-to-pay-for-gas-deal-in-rubles/article-31790"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/gas-russia-germany.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बर्लिन।</strong> जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्राकृतिक गैस सौदे का भुगतान रूबल में किए जाने की घोषणा को खारिज कर दिया। स्कोल्ज ने ब्रुसेल्स में ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) नेताओं की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। पुतिन की तरफ से हाल ही में यह ऐलान किए जाने के बाद कि रूस अब उन देशों को गैस निर्यात के लिए भुगतान सिर्फ रूबल में स्वीकार करेगा, जो मित्र देश नहीं हैं, स्कोल्ज ने कहा कि भुगतान किस मुद्रा में किया जाना है, वह प्रासंगिक अनुबंध का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भुगतान आमतौर पर यूरो या डॉलर में किया जाता है। स्कोल्ज कहते हैं, ”अधिकांश समझौते या संधियों के तहत यह स्पष्ट कर दिया जाता है कि भुगतान किस मुद्रा में किया जायेगा।” रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को सरकार के साथ वीडियो लिंक के माध्यम से आयोजित एक बैठक में कहा कि रूस अब ‘अमित्र देशों’ को गैस निर्यात के लिए भुगतान सिर्फ रूबल में स्वीकार करेगा, न कि यूरो या डॉलर में। इन अमित्र देशों में यूरोपीय संघ के सदस्यों सहित अमेरिका भी शामिल है। रूस कम से कम समय में एक ऐसा नियम लागू करना चाहता है, जिसमें भुगतान की मुद्रा रूबल तय की जाए। इसकी शुरुआत अब प्राकृतिक गैस से हो चुकी है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Mar 2022 12:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्मनी में कोरोना को लेकर लागू पाबंदियों के खिलाफ प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन। जर्मनी के हैम्बर्ग में कोरोना वायरस को लेकर लागू पाबंदियों के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया है। जर्मनी के दैनिक अखबार डाई वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार हैम्बर्ग में शनिवार को हुए इस प्रदर्शन में करीब 3300 लोगों ने हिस्सा लिया। अखबार के मुताबिक इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने फेस मास्क नहीं पहना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/demonstration-against-the-restrictions-imposed-in-germany-due-to-corona/article-30215"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/protest-in-germany.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बर्लिन।</strong> जर्मनी के हैम्बर्ग में कोरोना वायरस को लेकर लागू पाबंदियों के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया है। जर्मनी के दैनिक अखबार डाई वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार हैम्बर्ग में शनिवार को हुए इस प्रदर्शन में करीब 3300 लोगों ने हिस्सा लिया। अखबार के मुताबिक इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने फेस मास्क नहीं पहना था और सामाजिक दूरी के नियमों की अनदेखी कर रहे थे। वे टीकाकरण और क्वारंटीन उपायों के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उल्लेखनीय है कि इससे एक हफ्ते पहले, पूरे जर्मनी में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। फिर, हैम्बर्ग में लगभग 3,000 लोगों ने कोरोना टीकाकरण के पक्ष में प्रदर्शन किया, लेकिन उत्तरी बंदरगाह शहर में एक अवैध वैक्स-विरोधी सभा भी आयोजित की गई थी।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jan 2022 10:18:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>यूरोप परमाणु को लेकर भविष्य में भी अमेरिका पर निर्भर : जर्मनी</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन। जर्मनी सरकार का मानना है कि समस्त यूरोप परमाणु शक्ति को लेकर भविष्य में भी अमेरिका पर निर्भर पूरी तरह है और यदि उसे आत्मनिर्भर होना है तो उन्हें अपना सैन्य बजट दोगुना करना होगा। जर्मन रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ सदस्य थॉमस सिल्बरहॉर्न ने मंगलवार को ‘फ्रेंड्स ऑफ यूरोप’ थिंक टैंक द्वारा आयोजित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/europe-dependent-on-america-in-future-for-nuclear-germany/article-19953"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/germany.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बर्लिन।</strong> जर्मनी सरकार का मानना है कि समस्त यूरोप परमाणु शक्ति को लेकर भविष्य में भी अमेरिका पर निर्भर पूरी तरह है और यदि उसे आत्मनिर्भर होना है तो उन्हें अपना सैन्य बजट दोगुना करना होगा। जर्मन रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ सदस्य थॉमस सिल्बरहॉर्न ने मंगलवार को ‘फ्रेंड्स ऑफ यूरोप’ थिंक टैंक द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में कहा, “यूरोप अमेरिका द्वारा प्रदान की जाने वाली परमाणु और पारंपरिक क्षमताओं पर भविष्य में भी निर्भर रहेगा और अगर हमें आत्मनिर्भर होना है तो हमें पूरी तरह से अलग आधार पर चर्चा करनी होगी जिसके लिए रक्षा बजट को बढ़ाना होगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “हमें अपने जीडीपी के बारे में केवल 2 प्रतिशत ही नहीं बल्कि बहुत अधिक प्रतिशत के बारे में बात करनी होगी। मुझे लगता है कि हमें यथार्थवादी बने रहना चाहिए।” गौरतलब है कि नाटो के यूरोपीय देशों और कनाडा ने सैन्य खर्च में वर्ष 2020 में लगातार छठी बार वृद्धि की है और अक्टूबर में जारी एक नाटो रिपोर्ट के अनुसार नाटो से जुड़े एक तिहाई सदस्य देशों का रक्षा बजट दो प्रतिशत बेंचमार्क तक पहुंच गया है। जर्मनी ने हालांकि अपनी सेना पर सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1.57 प्रतिशत खर्च करना जारी रखा है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Nov 2020 10:53:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस, जर्मनी ने अमेरिका-रूस के बीच जताई नयी परमाणु संधि की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[पेरिस। फ्रांस और जर्मनी ने परमाणु संपन्न विश्व के दो सबसे बड़े देश अमेरिका और रूस के बीच परमाणु शक्तियों के शस्त्रागार को सीमित करने को लेकर जल्द ही एक नयी संधि होने की उम्मीद जताई है। फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे के अनुसार फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन और जर्मनी के विदेश मंत्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/france-germany-hope-for-new-nuclear-treaty-between-us-and-russia/article-19951"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/new-nuclear-treaty.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पेरिस।</strong> फ्रांस और जर्मनी ने परमाणु संपन्न विश्व के दो सबसे बड़े देश अमेरिका और रूस के बीच परमाणु शक्तियों के शस्त्रागार को सीमित करने को लेकर जल्द ही एक नयी संधि होने की उम्मीद जताई है। फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे के अनुसार फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन और जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, “हम उम्मीद जताते है कि मौजूदा परमाणु संधि के अगले वर्ष फरवरी में खत्म होने के बाद अमेरिका और रूस एक नयी परमाणु संधि की शुरुआत करेंगे।” उल्लेखनीय है कि रूस और अमेरिका के बीच पांच फरवरी वर्ष 2011 से परमाणु संधि हुई थी जिसकी अवधि अगले वर्ष फरवरी में समाप्त हो जायेगी। अगर यह संधि विस्तारित नहीं होती है तो दोनों परमाणु महाशक्ति देशों के बीच परमाणु शक्तियों के शस्त्रागार को सीमित करने को लेकर कोई समझौता नहीं होगा।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 18 Nov 2020 10:24:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जर्मनी में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हालत चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन l जर्मनी में कोरोना वायरस संक्रमण में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण हालात चिंताजनक होने के आसार हैं।जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “हम महामारी के दौर से गुजर रहे हैं जोकि बहुत नाजुक है। हम गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/condition-worrisome-due-to-coronavirus-infection-in-germany/article-19233"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/condition-worrisome-due-to-corona-virus-infection-in-germany.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>बर्लिन</strong> l जर्मनी में कोरोना वायरस संक्रमण में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण हालात चिंताजनक होने के आसार हैं।जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “हम महामारी के दौर से गुजर रहे हैं जोकि बहुत नाजुक है। हम गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि संपर्क में आए लोगों की जांच की जाए।”</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कोरोना मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिसकी रोजाना जारी हो रहे डाटा से पुष्टि की जा सकती है।सुश्री मर्केल ने कहा कि आर्थिक कारणों के मद्देनजर जर्मनी में दोबारा लॉकडाउन नहीं लगाया जा सकता। जर्मनी में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 5100 नए मामले सामने आए हैं जिससे कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 334,000 हो गई है। वहीं इस महामारी से अबतक यहां 9677 मौतें हो चुकी हैं।</h6>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Oct 2020 11:19:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाकर 25,000 की जाएगी: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाकर 25,000 की जाएगी। ट्रंप ने इस फैसले के पीछे का कारण जर्मनी का अपर्याप्त रक्षा खर्च बताया है। राष्ट्रपति ने सोमवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा कि जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटकार 25,000 की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/us-troops-in-germany-to-be-reduced-to-25000-trump/article-16129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/america-will-end-relations-with-who-trump.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाकर 25,000 की जाएगी। ट्रंप ने इस फैसले के पीछे का कारण जर्मनी का अपर्याप्त रक्षा खर्च बताया है। राष्ट्रपति ने सोमवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा कि जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटकार 25,000 की जाएगी। उन्होंने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि जर्मनी नाटो को भुगतान करने के मामले में लापरवाह है।” वर्तमान में जर्मनी में करीब 35,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जर्मनी में पूर्व अमेरिकी राजदूत रिचर्ड ग्रेनेल ने पिछले सप्ताह जर्मन मीडिया आउटलेट बिल्ड लाइव से कहा था कि अमेरिकी करदाता अब दूसरे देशों की रक्षा पर बहुत अधिक भुगतान करने के पक्ष में नहीं हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2020 11:24:53 +0530</pubDate>
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                <title>जर्मनी की आर्थिक क्षति से परेशान वित्त मंत्री ने की खुदकुशी</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन (एजेंसी)। जर्मनी में कोरोना वायरस (कोविड19) के संक्रमण के कारण देश की आर्थिक क्षति से परेशान देश के वित्त मंत्री थॉमस शाएफर ने कथित रूप से खुदकुशी कर ली है। शाएफर (54) का शव शनिवार को रेल पटरी पर मिला। उनके आत्महत्या किए जाने की आशंका व्यक्त की गयी है। हेसे प्रांत के मुख्यमंत्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/finance-minister-commits-suicide-due-to-germany-economic-loss/article-13998"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/thomas-schäfer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बर्लिन (एजेंसी)।</strong> जर्मनी में कोरोना वायरस (कोविड19) के संक्रमण के कारण देश की आर्थिक क्षति से परेशान देश के वित्त मंत्री थॉमस शाएफर ने कथित रूप से खुदकुशी कर ली है। शाएफर (54) का शव शनिवार को रेल पटरी पर मिला। उनके आत्महत्या किए जाने की आशंका व्यक्त की गयी है। हेसे प्रांत के मुख्यमंत्री वॉल्कर बॉफियर ने एक बयान में कहा,‘हम स्तब्ध हैं। हमें यकीन नहीं हो रहा है। हम अत्यंत दु:खी हैं। बॉफियर ने कहा कि शाएफर कोरोना की महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से उबरने में कंपनियों एवं कर्मियों की मदद करने के लिए लगातार काम कर रहे थे।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2020 16:04:01 +0530</pubDate>
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