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                <title>International Day of Families - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>International Day of Families RSS Feed</description>
                
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                <title>परिवार ही घर को मन्दिर बनाता है</title>
                                    <description><![CDATA[देश एवं दुनिया को परिवार के महत्व को बताने के लिए World Family Day हर साल 15 मई को मनाया जाता है। प्राणी जगत एवं सामाजिक संगठन में परिवार सबसे छोटी इकाई है। परिवार के अभाव में मानव समाज के संचालन की कल्पना भी दुष्कर है। प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी परिवार का सदस्य होकर ही अपनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/family-makes-home-a-temple/article-61759"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/family-day.jpg" alt=""></a><br /><p>देश एवं दुनिया को परिवार के महत्व को बताने के लिए World Family Day हर साल 15 मई को मनाया जाता है। प्राणी जगत एवं सामाजिक संगठन में परिवार सबसे छोटी इकाई है। परिवार के अभाव में मानव समाज के संचालन की कल्पना भी दुष्कर है। प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी परिवार का सदस्य होकर ही अपनी जीवन यात्रा को सुखद, समृद्ध, विकासोन्मुख बना पाता है। उससे अलग होकर उसके अस्तित्व को सोचा नहीं जा सकता है। हमारी संस्कृति और सभ्यता अनेक परिवर्तनों से गुजर कर अपने को परिष्कृत करती रही है, लेकिन परिवार संस्था के अस्तित्व पर कोई भी आंच नहीं आई। वह बने और बन कर भले टूटे हों लेकिन उनके अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है। उसके स्वरूप में परिवर्तन आया और उसके मूल्यों में परिवर्तन हुआ लेकिन उसके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता है।</p>
<h3 class="entry-title td-module-title"><a title="Sirsa News : 76वीं सीनियर वाटर पोलो चैंपियनशिप के लिए चुने गए हरियाणा के जल धुरंधर" href="http://10.0.0.122:1245/trial-of-water-polo-players-concluded-at-msg-bhartiya-khel-gaon/">Sirsa News : 76वीं सीनियर वाटर पोलो चैंपियनशिप के लिए चुने गए हरियाणा के जल धुरंधर</a></h3>
<p>हम चाहे कितनी भी आधुनिक विचारधारा में पल (World Family Day) रहे हों लेकिन अंत में अपने संबंधों को विवाह संस्था से जोड़ कर परिवार में परिवर्तित करने में ही संतुष्टि एवं जीवन की परिपूर्णता-सार्थकता अनुभव करते हैं। परिवार का महत्व न केवल भारत में बल्कि दुनिया में सर्वत्र है, यही कारण है कि अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस परिवार संस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य युवाओं को परिवार के प्रति जागरूक करना है ताकि युवा तथाकथित आधुनिक के प्रवाह में अपने परिवार से दूर न हों। परिवार दो प्रकार के होते हैं- एक एकल परिवार और दूसरा संयुक्त परिवार। एकल परिवार में पापा- मम्मी और बच्चे रहते हैं। संयुक्त परिवार में पापा- मम्मी, बच्चे, दादा दादी, चाचा-चाची, बड़े पापा, बड़ी मम्मी, बुआ इत्यादि रहते हैं।</p>
<p>इस दिवस को मनाने की घोषणा सर्वप्रथम 15 मई 1994 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने की थी। संयुक्त परिवार टूटने एवं बिखरने की त्रासदी को भोग रहे लोगों के लिये यह दिवस बहुत अहमियत रखता है। बढ़ती जवाबदारी और जरूरतों को पूरा कर पाने का भय ही वह मुख्य कारण है जो अब संयुक्त परिवारों के टूटने का कारण बना है। जबकि वास्तव में मानव सभ्यता की अनूठी पहचान है संयुक्त परिवार और वह जहाँ है वहीं स्वर्ग है। रिश्तों और प्यार की अहमियत को छिन्न-भिन्न करने वाले पारिवारिक सदस्यों की हरकतों एवं तथाकथित आधुनिकतावादी सोच से बुढ़ापा कांप उठता है। संयुक्त परिवारों का विघटन और एकल परिवार के उद्भव ने जहां बुजुर्गांे को दर्द दिया है वहीं बच्चों की दुनिया को भी बहुत सारे आयोजनों से बेदखल कर दिया है। दुख सहने और कष्ट झेलने की शक्ति जो संयुक्त परिवारों में देखी जाती है वह एकल रूप से रहने वालो में दूर-दूर तक नही होती है।</p>
<h3>परिवार में रहने से तनावमुक्त व प्रसन्नचित्त रहते हैं | World Family Day</h3>
<p>आज के अत्याधुनिक युग में बढ़ती महंगाई और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए संयुक्त परिवार समय की मांग कहे जा सकते हैं। हम पुराने युगों की बात करें या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर भी बात करें तो आज की ही तरह पहले भी परिवारों का विघटन हुआ करता था। लेकिन आधुनिक समाज में परिवार का विघटन आम बात हो चुकी है और उसने जीवन को जटिल से जटिलतर कर दिया है। ऐसे में परिवार न टूटे इस मिशन एवं विजन के साथ अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। परिवार के बीच में रहने से आप तनावमुक्त व प्रसन्नचित्त रहते हैं, साथ ही आप अकेलेपन या डिप्रेशन के शिकार भी नहीं होते, यही नहीं परिवार के साथ रहने से आप कई सामाजिक बुराइयों से अछूते भी रहते हैं। समाज की परिकल्पना परिवार के बगैर अधूरी है और परिवार बनाने के लिए लोगों का मिलजुल कर रहना व जुड़ना बहुत जरूरी है। हम चाहे कितनी भी आधुनिक विचारधारा में हम पल रहे हों लेकिन अंत में अपने संबंधों को विवाह संस्था से जोड़ कर परिवार में परिवर्तित करने में ही संतुष्टि अनुभव करते हैं।</p>
<p>भारत गांवों का देश है, परिवारों का देश है, शायद यही कारण है कि न चाहते हुए भी आज हम विश्व के सबसे बड़े जनसंख्या वाले राष्ट्र के रूप में उभर चुके हैं और शायद यही कारण है कि आज तक जनसंख्या दबाव से उपजी चुनौतियों के बावजूद, एक ‘परिवार’ के रूप में, जनसंख्या नीति बनाये जाने की जरूरत महसूस नहीं की। ईंट, पत्थर, चूने से बनी दीवारों से घिरा जमीं का एक हिस्सा घर-परिवार कहलाता है जिसके साथ ‘मैं’ और ‘मेरापन’ जुड़ा है। संस्कारों से प्रतिबद्ध संबंधों की संगठनात्मक इकाई उस घर-परिवार का एक-एक सदस्य है। हर सदस्य का सुख-दुख एक-दूसरे के मन को छूता है। प्रियता-अप्रियता के भावों से मन प्रभावित होता है। घर-परिवार जहां हर सुबह रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की जुगाड़ में धूप चढ़ती है और आधी-अधूरी चिंताओं का बोझ ढोती हुई हर शाम घर-परिवार आकर ठहरती है। कभी लाभ, कभी हानि, कभी सुख, कभी दुख, कभी संयोग, कभी वियोग, इन द्वंद्वात्मक परिस्थितियों के बीच जिंदगी का कालचक्र गति करता है। भाग्य और पुरुषार्थ का संघर्ष चलता है।</p>
<h3>घर-परिवार निश्चित रूप से पूजा का मंदिर है</h3>
<p>आदमी की हर कोशिश ‘घर-परिवार’ बनाने की रहती है। सही अर्थों में घर-परिवार वह जगह है जहां स्नेह, सौहार्द, सहयोग, संगठन सुख-दुख की साझेदारी, सबमें सबक होने की स्वीकृति जैसे जीवन-मूल्यों को जीया जाता है। जहां सबको सहने और समझने का पूरा अवकाश है। अनुशासन के साथ रचनात्मक स्वतंत्रता है। निष्ठा के साथ निर्णय का अधिकार है। जहां बचपन सत्संस्कारों में पलता है। युवकत्व सापेक्ष जीवनशैली से जीता है। वृद्धत्व जीए गए अनुभवों को सबके बीच बांटता हुआ सहिष्णु और संतुलित रहता है। ऐसा घर-परिवार निश्चित रूप से पूजा का मंदिर बनता है। संयुक्त परिवारों की परम्परा पर आज धुंधलका छा रहा है, परिवार टूटता है तो दीवारें भी ढहती हैं, आदमी भी टूटता है और समझना चाहिए कि उसका साहस, शक्ति, संकल्प, श्रद्धा, धैर्य, विश्वास बहुत कुछ टूटता/बिखरता है।</p>
<p>क्रांति और विकास की सोच ठंडी पड़ जाती है और जीवन के इसी पड़ाव पर फिर परिवार का महत्व सामने आता है। परिवार ही वह जगह है भाग्य की रेखाएं बदलने का पुरुषार्थी प्रयत्न होता है। जहां समस्याओं की भीड़ नहीं, वैचारिक वैमनस्य का कोलाहल नहीं, संस्कारों के विघटन का प्रदूषण नहीं, तनावों की त्रासदी की घुटन नहीं। कोई इसी परिवाररूपी घेरे के अंधेरे में रोशनी ढूंढ लेता है। बाधाओं के बीच विवेक जमा लेता है। भीड़ में अकेले रह जाता है। दुख में सुख का संवेदन कर लेता है। घर-परिवार को सिर्फ अपनी नियति मानकर नहीं बैठा जा सकता। क्योंकि इसी घर में मंदिर बनता है और कहीं घर ही मंदिर बन जाता है। कहते हैं कि आपका काम, रबड़ की गेंद है, जिस पर जितना जोर देते हैं, वह उतना ऊंचा उठता है। पर आपका परिवार कांच की गेंदें हैं, जो हाथ से छूटती हैं तो टूट ही जाती हैं।</p>
<p>कई बार हम सब भूल जाते हैं कि जीवन में सबसे जरूरी क्या है। हम इधर-उधर की बातों में इतना डूब जाते हैं कि जो सच में जरूरी है, उसे छोड़ देते हैं। हम परिवार की खुशियों के नाम पर सामान तो खरीदने में लगे रहते हैं, पर उन चीजों पर ध्यान नहीं देते जो परिवार में सबको संतुष्टि का एहसास कराती हैं, सबको जोड़ती है। ‘परिवार’ शब्द हम भारतीयों के लिए अत्यंत ही आत्मीय होता है। अपने घर-परिवार में अपने आपका होना ही जीवन का सत्य है। यह प्रतीक्षा का विराम है। यही प्रस्थान का शुभ मुहूर्त है। उम्मीद है जल्द ही समाज में संयुक्त परिवार की अहमियत दुबारा बढ़ने लगेगी और लोगों में जागरूकता फैलेगी कि वह एक साथ एक परिवार में रहें जिसके कई फायदे हैं। इंसानी रिश्तों एवं पारिवारिक परम्परा के नाम पर उठा जिन्दगी का यही कदम एवं संकल्प कल की अगवानी में परिवार के नाम एक नायाब तोहफा होगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Sep 2024 16:40:58 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8216;World Family Day&amp;#8217;&amp;#8230;गुरू जी की शिक्षा सटीक-उपयुक्त, परिवार रहें सदा संयुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिकों ने भी की है स्टडी, संयुक्त परिवार होता ‘रीढ की हड्डी’ ‘परिवार’ एक सुदृढ़ संगठन। कहते हैं एकता में बल होता है। (World Family Day) जैसे हाथ की पांचों अंगुलियोें को इकट्ठा करके बंद कर लें तो एक मुट्ठी बनती है और बंद मुट्ठी लाख की होती है अगर वही मुट्ठी खोल दी जाए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/gurujis-teachings-are-accurate-and-appropriate-families-should-always-remain-united/article-47650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/world-faimly-day.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों ने भी की है स्टडी, संयुक्त परिवार होता ‘रीढ की हड्डी’</h3>
<p style="text-align:justify;">‘परिवार’ एक सुदृढ़ संगठन। कहते हैं एकता में बल होता है। (World Family Day) जैसे हाथ की पांचों अंगुलियोें को इकट्ठा करके बंद कर लें तो एक मुट्ठी बनती है और बंद मुट्ठी लाख की होती है अगर वही मुट्ठी खोल दी जाए तो सब अंगुलियां अलग-थलग पड़ जाएंगी, जिनकी ताकत भी बहुत ही कम हो जाएगी। उसी प्रकार एक परिवार होता है, जो एक सुदृढ़ संगठन की भांति होता है। ‘संयुक्त परिवार’ एक ही छत के नीचे, एक ही घर में चार पीढ़ियों के लोगों के समूह को कहते हैं, जिनकी रसोई, पूजा-पाठ, संपत्ति भी सामूहिक, सांझी होती है। परिवार चाहे कितने भी जटिल और विविध क्यों ना हों, वो बहुत महत्व रखते हैं। हर वर्ष 15 मई को ‘विश्व परिवार दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जोकि समाज की बुनियादी इकाई के रूप में परिवारों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">(World Family Day) के अवसर पर डेरा सच्चा सौदा के संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां परिवार का महत्व सदा समझाते हैं। पूज्य गुरू जी ने डिजीटल दुनिया में टूटते रिश्तों को मजबूत करने के लिए SEED अभियान और सभी परिवार के सदस्य एक साथ खाना खाएं, इसके लिए TEAM अभियान शुरू किए हैं। इसके साथ ही गुरू जी बुजुर्गों की देखभाल पर ध्यान देने पर जोर देते हैं। पूज्य गुरू जी के वचनानुसार अब वैज्ञानिक भी मानते हैं, उनके रिसर्च में बहुत बड़ा खुलासा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडा के शोधाकतार्ओं द्वारा दिए गए रिव्यू के अनुसार, रोज परिवार के साथ डिनर करने से ईटिंग डिस्आॅर्डर से जुड़ी समस्याएं, शराब और अन्य पदार्थ की लत से बचा जा सकता है। ये किशोरों में आक्रामक व्यवहार, डिप्रेशन और आत्महत्या के खतरे को काफी कम करता है।यंग फीमेल प्रतिभागियों को परिवार के साथ खाने से अधिक लाभ मिलते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चलोगे गुरू जी की शिक्षानुसार, तो नहीं टूटेंगे कभी परिवार</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने शुरू करवाया, पूरा परिवार एक साथ बैठकर खाना खाए। परिवार में खुशहाली बनी रहे, इसके लिए प्रतिदिन नहीं तो कम से कम सप्ताह में एक दिन जरूर पूरा परिवार एक साथ बैठकर खाना खाए। आज पूज्य गुरु जी के वचनों अनुसार देश के विभिन्न राज्यों हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्टÑ समेत देश विदेश की साध-संगत परिवार के संगत भोजन ग्रहण करती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">परिवार के साथ खाना खाने के फायदे | World Family Day</h3>
<p style="text-align:justify;">जेएएमए नेटवर्क ओपन की एक स्टडी में सामने आया है कि परिवार के साथ खाने से खासतौर पर किशोर अच्छी डाइट लेते हैं। जो टीनएज बच्चे अपने परिवार के साथ खाते हैं, उनके फास्ट फूड और मीठे बेवरेज खाने की तुलना में फल और सब्जियां खाने की संभावना अधिक होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गंभीर मानसिक समस्याओं से बचाव</h3>
<p style="text-align:justify;">कनाडा के शोधाकर्ताओ द्वारा दिए गए रिव्यू के अनुसार, रोज परिवार के साथ डिनर करने से ईटिंग डिस्आॅर्डर से जुड़ी समस्याएं, शराब और अन्य पदार्थ की लत से बचा जा सकता है। ये किशोरों में आक्रामक व्यवहार, डिप्रेशन और आत्महत्या के खतरे को काफी कम करता है।यंग फीमेल प्रतिभागियों को परिवार के साथ खाने से अधिक लाभ मिलते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मोटापा नहीं होता</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको जानकर हैरानी होगी कि परिवार के साथ खाना खाने से बच्चों एवं किशोंरों में मोटापे और वजन से संबंधित समस्याओं का खतरा कम रहता है। जरनल आॅफ पीडियाट्रिक्स में प्रकाशिक अध्ययन में किशोरों के परिवार के साथ खाने और मोटापे या वजन से जुड़ी समस्याएं 10 साल देरी से आती हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि परिवार को हफ्ते में कम से कम एक या दो बार साथ बैठकर डिनर करना चाहिए। इससे बच्चों को आगे चलकर मोटापे का खतरा कम रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों में बढ़ता है आत्मसम्मान</h3>
<p style="text-align:justify;">स्टैनफोर्ड चिल्ड्रन हैल्थ के विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार के साथ खाना खाने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ने में मदद मिल सकती है। खाने की टेबल पर बच्चों से उनके दिन के बारे में पूछें और उनकी बात सुनें। इससे बच्चों को एहसास होगा कि उनके विचार भी महत्व रखते हैं जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">​कम्युनिकेशन स्किल बेहतर होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">2018 में कनाडा की स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे छोटी उम्र से ही परिवार के साथ खाना खाते हैं, उनमें साल की उम्र से 10 साल की उम्र तक सकारात्मक लाभ देखे गए। परिवार के साथ बातें साझा करने से बच्चों के बीच बेहतर कम्युनिकेशन हो पाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोज 150 ग्राम दाल, बींस का सेवन करें</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि पीएलओएस मेडिसिन का शोध कहता है कि जिन लोगों के भोजन में बींस, दालें और फलियां जैसी चीजें शामिल होती है उन्हें कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है और हार्टअटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज का खतरा भी कम रहता है।</p>
<h3 class="entry-title td-module-title"><a title="मरकर भी इन्सानियत की मिसाल बन गई अमनजोत कौर इन्सां" href="http://10.0.0.122:1245/doctors-had-declared-brain-dead-after-being-injured-in-a-road-accident/">मरकर भी इन्सानियत की मिसाल बन गई अमनजोत कौर इन्सां</a></h3>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/gurujis-teachings-are-accurate-and-appropriate-families-should-always-remain-united/article-47650</link>
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                <pubDate>Mon, 15 May 2023 15:00:53 +0530</pubDate>
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