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                <title>राजनीतिक स्थिरता जरुरी</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर (Political Instability) समाप्त हो गया है। प्रचार के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर लांछन लगाए। कांग्रेस ने 10 वर्षों के बाद पूर्ण बहुमत के साथ जबरदस्त वापिसी की है। इससे पूर्व भाजपा ही सत्ता में थी। यह राज्य राजनीतिक उथल-पुथल के लिए लंबे समय तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-stability-is-necessary/article-47643"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/bjp-congress.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर (Political Instability) समाप्त हो गया है। प्रचार के दौरान नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर लांछन लगाए। कांग्रेस ने 10 वर्षों के बाद पूर्ण बहुमत के साथ जबरदस्त वापिसी की है। इससे पूर्व भाजपा ही सत्ता में थी। यह राज्य राजनीतिक उथल-पुथल के लिए लंबे समय तक चर्चा में रहा है। पांच वर्षों में तीन मुख्यमंत्रियों को बदला गया। वास्तव में राजनीति स्थिरता किसी भी राज्य के विकास के लिए आवश्यक है। जनता ने स्पष्ट बहुमत देकर कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दे दिया है।</p>
<h3 class="entry-title td-module-title" style="text-align:center;"><a title="पार्टी के हर कार्यकर्ता की बात को पार्टी हाईकमान तक पहुँचाना मेरी पहली प्राथमिकता-राज सिंह दहिया" href="http://10.0.0.122:1245/the-reception-ceremony-of-the-newly-appointed-district-president-raj-singh-dahiya-was-celebrated-with-great-pomp/">पार्टी के हर कार्यकर्ता की बात को पार्टी हाईकमान तक पहुँचाना मेरी पहली प्राथमिकता-राज सिंह दहिया</a></h3>
<p>दरअसल, राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का बड़ा कारण खींचतान भी रहा है। (Political Instability) सत्तापक्ष पार्टी में कई बार गुटबाजी इस स्तर पर बढ़ती रही कि पार्टी को मुख्यमंत्री हटाने तक की नौबत आ गई। पदों से बार-बार हटाने व नियुक्तियां से जनता में अविश्वास की भावना पैदा होती गई। वास्तव में यह बात सत्ताधारी पार्टी पर ही निर्भर करती है कि वे अपने नेता को कैसी राजनीति व संस्कृति की पालना करना सिखाती है। दरअसल, राजनीतिक अस्थिरता को खत्म करने के लिए पार्टियां को इमानदार व अनुभवी नेता का ही चयन करना चाहिए। यह भी अच्छी बात है कि राज्य में एक मजबूत विपक्ष के रूप में भाजपा होगी। विपक्ष के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती।</p>
<p>बेशक जिम्मेवारी बदल गई, लेकिन सबकी भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार की खामियों को उजागर करना व सकारात्मक विरोध सरकार की भूमिका को और सुदृढ़ बनाता है। सरकार व विपक्ष दोनों ही जनहित के लिए हैं। उम्मीद है कि सरकार व विपक्ष नकारात्मक राजनीति को त्याग पूरी जिम्मेवारी, गंभीरता व वचनबद्धता से कार्य करेंगे। जहां तक राज्य के सांस्कृतिक व राजनीतिक इतिहास का संबंध है, जनता से सभी राजनीतिक विचारधाराओं को स्वीकार किया है। दक्षिणी क्षेत्र की जनता ने कट्टरपंथी से मुक्त होकर कभी कांग्रेस व कभी भाजपा को चुना व राज्य की क्षेत्रीय दलों को भी अवसर दिया। तकनीकी शिक्षा व व्यापार के लिए यह राज्य देश के साथ पूरे विश्व में मिसाल बन चुका है। सिलीकॉन सिटी बेंगलुरू सॉफ्टवेयर निर्यात के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है। बेहतर होगा, यदि सभी दल राज्य के विकास के लिए एकजुटता से कार्य करें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 May 2023 10:19:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा नेता ने अपनी ही सरकार के अफसरों पर मढ़े आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- डीसी-डीएमसी बाहर नहीं निकलते हिसार। (सच कहूँ न्यूज)। सिरसा से भाजपा नेता व ऐलनाबाद से विधानसभा चुनाव लड़ चुके Gobind Kanda ने अपनी ही सरकार के अफसरों पर आरोप मढ़े हैं कि सिरसा के डीसी और डीएमसी अपने आॅफिस से बाहर नहीं निकलते। जब तक वो बाहर निरीक्षण करने नहीं आएंगे तब तक ऐसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bjp-leader-accused-the-officers-of-his-own-government/article-46175"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/govind-kanda.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बोले- डीसी-डीएमसी बाहर नहीं निकलते</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार। (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सिरसा से भाजपा नेता व ऐलनाबाद से विधानसभा चुनाव लड़ चुके Gobind Kanda ने अपनी ही सरकार के अफसरों पर आरोप मढ़े हैं कि सिरसा के डीसी और डीएमसी अपने आॅफिस से बाहर नहीं निकलते। जब तक वो बाहर निरीक्षण करने नहीं आएंगे तब तक ऐसे ही घोटाले होते रहेंगे। दरअसल, Gobind Kanda ने शहर के डबवाली बाइपास से लेकर रानियां चुंगी तक सड़क रिपेयरिंग के काम का निरीक्षण किया। इस काम में उन्होंने कमियां होने के आरोप लगाए। कांडा ने कहा कि शहर के बाइपास रोड पर रिपेयर के नाम पर घपला किया जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हरियाणा समेत देश में कोरोना का कहर, 10 हजार से ज्यादा आए नए केस" href="http://10.0.0.122:1245/corona-more-than-ten-thousand-new-cases-came-in-the-country-including-haryana/">हरियाणा समेत देश में कोरोना का कहर, 10 हजार से ज्यादा आए नए केस</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">रिपेयर के नाम पर हो रहा घपला</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हिसार के ठेकेदार कृष्ण कुमार ने टेंडर लिया है। वह रिपेयर के नाम पर घपला कर रहा है। मैंने डीएमसी और डीसी से संपर्क किया कि महीने में एक चक्कर बाहर लगाएं। नगर परिषद बहुत बड़ा घपला करती है। पत्र भेजकर पीली पट्टी और पैच वर्क के पैसे रुकवाए। क्योंकि उसमें भी गड़बड़ की जा रही थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सो रहे अफसर, नहीं हो रही कार्रवाई</h3>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेता Gobind Kanda ने कहा कि सिरसा के मोचीवाली, ताजियाखेडा, शेरपुरा, नारायणखेडा में ठेकेदार बाहर से काम लेते थे, लेकिन काम छोड़कर बाहर चले गए। आज तक किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं हुई। कई बार एससी को लेटर लिखा कि ब्लैकलिस्ट करो, लेकिन अफसर सो रहे हैं। रानियां रोड तक अंडरग्राउंड पाइप डाली गई है। इसकी ठेकेदार को पेमेंट भी हो चुकी है, लेकिन रोड का काम बकाया है। फुटपाथ भी नहीं बनाई। ये सब आॅफिसर मिलजुल कर करते हैं। आफिसर सोए हुए है। सिरसा की ओर ध्यान नहीं दे रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले हो चुका है 1 करोड़ का डस्टबीन घोटाला</h3>
<p style="text-align:justify;">सिरसा नगर परिषद का कार्यकाल करीब 1 साल पहले खत्म हो गया था। नगर परिषद के चेयरमैन पद पर हलोपा की रीना सेठी काबिज थी। जिसका समर्थन भाजपा के पार्षदों ने किया था। रीना सेठी के कार्यकाल में शहर में 1 करोड़ के डस्टबीन घोटाले की विजिलेंस जांच चल रही है। आम आदमी पार्टी ने यह मुद्दा उठाया था। साथ ही गलियों के निर्माण की शिकायतें भी दी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले क्यों नहीं उठाए भ्रष्टाचार के मुद्दे : वीरेंद्र कुमार</h3>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कहा कि जो भाजपा नेता अब अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, उनके नगर परिषद के कार्यकाल में डस्टबीन घोटाला सहित कई घपले हो चुके हैं। जब तक उनकी पार्टी की चेयरपर्सन काबिज थी, तब भ्रष्टाचार के मुद्दे क्यों नहीं उठाए गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मनोहर सरकार समर्थित हैं हलोपा विधायक</h3>
<p style="text-align:justify;">सिरसा के विधायक गोपाल कांडा अपनी खुद की हलोपा पार्टी से विधायक हैं। वे कांग्रेस सरकार में गृह मंत्री रह चुके हैं, लेकिन गीतिका एयरहोस्टेस सुसाइड कांड में उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। अब वह भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। वर्ष 2021 के ऐलनाबाद उपचुनाव में उनके भाई गोविंद कांडा ने भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Apr 2023 18:51:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>दलबदल का दौर</title>
                                    <description><![CDATA[देश में कर्नाटक राज्य की विधानसभा व लोकसभा चुनावों सहित कई अन्य राज्यों में उपचुनाव होने जा रहा है। इस दौरान सबसे चर्चा का विषय दलबदल का है। टिकट लेने के लिए नेता तिकड़मबाजी लड़ा रहे हैं, जिस कारण नेताओं में दलबदल की होड़ भी मची हुई है। कर्नाटक में भाजपा के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सावादी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/round-of-defections/article-46160"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/dalbadal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में कर्नाटक राज्य की विधानसभा व लोकसभा चुनावों सहित कई अन्य राज्यों में उपचुनाव होने जा रहा है। इस दौरान सबसे चर्चा का विषय दलबदल का है। टिकट लेने के लिए नेता तिकड़मबाजी लड़ा रहे हैं, जिस कारण नेताओं में दलबदल की होड़ भी मची हुई है। कर्नाटक में भाजपा के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सावादी को टिकट नहीं मिली तब उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है, यही नहीं पार्टी ने सात मौजूदा विधायकों की टिकट भी काटी है। यही हाल पंजाब का है, जहां अकाली नेता का बेटा भाजपा में शामिल हो गया और अगले ही दिन उसे टिकट मिल गई। इसी तरह आप ने कांग्रेस के एक पूर्व विधायक को पार्टी में शामिल कर उसे अपना प्रत्याशी बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, चुनावों के दिनों में विधायकों की नाराजगी की बात आम हो जाती है। मौजूदा राजनीतिक दौर में ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और यह राजनीति पर एक बदनुमा दाग भी है। इस मामले में पार्टी के अव्वल नेता भी बराबर के दोषी हैं। जहां तक पार्टी के कसूरवार होने की बात है, पार्टियों ने भी केवल सीट जीतने को ही अपना लक्ष्य बना लिया है और सभी दंडभेद लगा भी रही हैं। मौजूदा राजनीतिक गिरावट के दौर में टिकट के दावेदार की योग्यता केवल सीट जिताने तक ही सीमित हो गई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पानीपत के ब्लॉक काबड़ी एल्डिको निवासी कृष्ण कुमार वर्मा इन्सां बने शरीरदानी" href="http://10.0.0.122:1245/body-donation-of-krishna-kumar-insan-for-medical-research/">पानीपत के ब्लॉक काबड़ी एल्डिको निवासी कृष्ण कुमार वर्मा इन्सां बने शरीरदानी</a></p>
<p style="text-align:justify;">उम्मीदवारों में कोई शैक्षिणक योग्यता, अनुभव व क्षेत्र में छवि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बस पार्टियां केवल पैसा लगाने वाला और बुरे हालातों में भी पार्टी को जीत दिलाने वाले चेहरे की तलाश में रहती हैं। जब ऐसे चेहरों को पार्टियां टिकट दे देती हैं, तो पुराने व मेहनती वर्करों को अनदेखा कर दिया जाता है, जिसके बाद पार्टियों में अनुशासन भंग होने लगता है। भले ही प्रत्येक नेता के लिए अनुशासन आवश्यक है लेकिन पार्टी के लिए भी अति आवश्यक है कि वे मेहनती व वफादार नेताओं को अनदेखा न करे।</p>
<p style="text-align:justify;">दलबदल व पार्टी द्वारा नेताओं को केवल मौके का हथियार समझना, दोनों ही लोकतंत्र के रास्ते में बाधक हैं। होना तो यह चाहिए कि टिकट के लिए भी पार्टी चुनाव करवाए। पार्टी के बड़ी संख्या में वर्कर या डेलीगेट्स, जिस नेता के नाम पर मुहर लगाएं, उसे ही टिकट दी जानी चाहिए। यही नहीं उसकी जायदाद, जमा पूंजी या उसकी जाति, बरादरी, धर्म, भाषा, क्षेत्र को न देखा जाए। टिकट देने की योग्यता नेता की शिक्षा, मेहनत, लगन, चरित्र, ईमानदारी, जनसेवा की भावना को देखा जाना चाहिए। पार्टियां को चाहिए वे अपने वर्करों व जनता पर नेता न थोपें बल्कि यह फैसला जनता पर छोड़ देना चाहिए। यदि ऐसा होगा फिर ही दलबदल का चलन रोक पाना संभव होगा।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/round-of-defections/article-46160</link>
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                <pubDate>Sat, 15 Apr 2023 15:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सरकारी रिएक्शन : पूर्व सीएम चन्नी से आज ही पूछताछ</title>
                                    <description><![CDATA[चन्नी ने दिया था सरकार को दलित और सिख विरोधी करार भांजे से मिले 10 करोड़ की भी होगी जांच जालंधर। (सच कहूँ न्यूज)। आय से अधिक मामले में विजिलेंस ने पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के लिए 50 से ज्यादा सवालों की लिस्ट तैयार की है। (Political News) मोहाली स्थित विजिलेंस ब्यूरो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/governments-reaction-questioning-of-former-cm-channi-today-itself/article-46107"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/chief-minister-charanjit-singh-channi.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>चन्नी ने दिया था सरकार को दलित और सिख विरोधी करार</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भांजे से मिले 10 करोड़ की भी होगी जांच</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर। (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आय से अधिक मामले में विजिलेंस ने पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के लिए 50 से ज्यादा सवालों की लिस्ट तैयार की है। (Political News) मोहाली स्थित विजिलेंस ब्यूरो आॅफिस में चन्नी से पूछताछ जारी है। चन्नी से माइनिंग केस में उनके भांजे भूपिंदर हनी से बरामद हुए 10 करोड़ के बारे में भी पूछताछ की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर चन्नी ने जमकर भड़ास निकाली थी। सरकार को दलित और सिख विरोधी करार दिया था। इसके दो घंटे बाद ही सरकार का रिएक्शन आ गया। रिएक्शन विजिलेंस के माध्यम से आया कि वह जांच में 20 अप्रैल को नहीं बल्कि आज ही पेश हों।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुझे कोई डर नहीं: चन्नी | (Political News)</h3>
<p style="text-align:justify;">विजिलेंस आॅफिस के बाहर चन्नी बोले- मुझे कोई डर नहीं है। वह चाहे मुझे गोली मार दें। जिसका घर कुर्की पर लगा हो और हाईकोर्ट से कुर्की की स्टे करवाई है, उसके पास क्या संपत्ति हो सकती है। चन्नी ने कहा कि यह सब राजनीतिक षंड्यंत्र है। चन्नी विजिलेंस आॅफिस में अपने वकीलों के साथ अकेले पहुंचे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="भारत पहुंचा 22 देशों में तबाही मचाने वाला कोरोना वैरिएंट, डब्ल्यूएचओ की चेतावनी" href="http://10.0.0.122:1245/arcturus-covid-corona-variant-causing-havoc-in-22-countries-reached-india/">भारत पहुंचा 22 देशों में तबाही मचाने वाला कोरोना वैरिएंट, डब्ल्यूएचओ की चेतावनी</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">खुद छूट देकर विजिलेंस ने लिया फैसला वापिस</h3>
<p style="text-align:justify;">राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि इतनी भी क्या इमरजेंसी है कि पूर्व मुख्यमंत्री को तुरंत पेश होने के लिए कहा गया। विजिलेंस ने खुद ही 20 तक छूट देकर फिर अपना ही फैसला वापस ले लिया। विजिलेंस की टीम ने यह भी नहीं कि देखा कि अंबेडकर जयंती है और कम से कम उसका ही इंतजार कर लेते। आज जालंधर में सभी ने जयंती मनानी है। बाजवा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इसका विरोध करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ऐसी बौखलाहट की शिकायत चुनाव आयोग से भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को शिकायत भेजने के साथ ही यह रिक्वेस्ट की जाएगी कि जब तक चुनाव है तब तक चन्नी के खिलाफ विजिलेंस जांच को बंद रखा जाए। वहीं कहीं भाग नहीं रहे बल्कि खुद ही विजिलेंस के दफ्तर में गए थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">की जा सकती है मेरी हत्या: चन्नी</h3>
<p style="text-align:justify;">चन्नी बोले- मेरी भी हत्या की जा सकती है:विजिलेंस ने बैसाखी की छुट्टी के दिन भी बुलाया, अत्याचार के लिए तैयार हूं। पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी ने आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप लगाया कि वे मेरी हत्या करवा सकते हैं। चन्नी से आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस को पूछताछ करनी है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/governments-reaction-questioning-of-former-cm-channi-today-itself/article-46107</link>
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                <pubDate>Fri, 14 Apr 2023 15:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीतिक सुधार ही भावी लोकतंत्र की शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[देश में कई राजनीतिक पार्टियां बड़े संकट का सामना कर रही हैं। कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय पार्टियों को भी लोक सभा चुनावों सहित विधान सभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर 23-जी की बयानबाजी के कारण वर्गवादम बनी हुई है। इन पार्टियों में हार का मंथन जारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/political-reform-is-the-power-of-future-democracy/article-31635"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/politics-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में कई राजनीतिक पार्टियां बड़े संकट का सामना कर रही हैं। कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय पार्टियों को भी लोक सभा चुनावों सहित विधान सभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर 23-जी की बयानबाजी के कारण वर्गवादम बनी हुई है। इन पार्टियों में हार का मंथन जारी है और नई नीतियां-रणनीतियां तैयार करने की भी तैयारी चल रही हैं। वास्तव में राजनीति में गिरावट या सुधार को देश या संबंधित राज्यों की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। किसी भी पार्टी का नेता अपने राज्य, क्षेत्र या समाज के प्रभाव से मुक्त नहीं। पूंजीवादी आर्थिक प्रबंधों ने हमारे सामाजिक ताने-बाने को भी बुरी तरह अपने रंग में रंग लिया है, जिसका प्रभाव नकारात्मक ही रहा है। दूसरे क्षेत्रों की तरह राजनीति भी पैसा कमाने, पहुंच बनाने का जरिया बनकर रह गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि राजनीति का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना था किंतु राजनीति के बदलते उद्देश्यों ने लखपतियों को अरबपति बना दिया और जनता की सेवा का विचार बुरी तरह फेल हो गया। सत्तापक्ष सांसद-विधायकों को मिल रहे वेतन/पेंशन और सुविधाओं की बदौलत राजनीति को पांच सालों की नौकरी समझा जाने लगा है। हर हाल में चुनाव जीतने के लिए कई प्रकार के हथकंडे अपनाए जाते हैं, यही कारण है कि अनैतिकता हावी हो गई है। यदि पारंपरिक पार्टियों की बात करें तब इन प्रत्येक का अस्तित्व जनता की सेवा करना ही था। इन पार्टियों के वर्तमान संकट का समाधान भी अपने अतीत को दोबारा जिंदा करने के साथ ही है। शुरूआत और वर्तमान समय को समझने, स्वीकार करने और कमियों को दूर करने के लिए पहल करनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जो नेता या पार्टी देश की पारंपरिक राजनीति को समझकर अपना गया उसके रास्ते आसान हो रहे हैं। भारत महान देश है जिसके राजनीतिक मार्गदर्शकों ने ईमानदारी, जनता की सेवा, त्याग और सादगी वाले राजनीतिक कल्चर का निर्माण किया था। देश के चल बसे राजनीतिज्ञों में जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपायी, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. राधा कृष्णन, राम मनोहर लोहिया, महात्मा गांधी जैसे नेताओं की धाक पूरी दुनिया में थी। समाज में आई कुरीतियों का प्रभाव राजनीतिक लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज में सुधार करने वाली राजनीति करनी चाहिए। ईमानदारी, धार्मिक सम्भाव, समाज में बिना जात-पात, कर्तव्यनिष्ठा का व्यवहार करने जैसे गुणों को धारण कर कोई भी राजनीतिक पार्टी आगे बढ़ सकतीं हैं, जोकि अच्छा व सच्चा लोकतंत्र मजबूत करने के लिए आज की जरूरत है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 09:33:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दल बदल राजनीतिक सिद्धांतों एवं मूल्यों का मजाक</title>
                                    <description><![CDATA[सत्ता का मोह, सत्ता भोगने का लालच, जितने वाले दलों के प्रति आकर्षण, मंत्री पद मिलने के लुभावने वादे- ऐसे कारण हैं जो दलबदल के बाजार को गर्म करते हैं। चुनाव में जिस राजनीतिक दल का पलड़ा भारी दिखता है, उसमें घुसने की होड़ कुछ अधिक देखी जाती है। इनदिनों उत्तर प्रदेश और पंजाब में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/defection-mockery-of-political-principles-and-values/article-30066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/politics-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सत्ता का मोह, सत्ता भोगने का लालच, जितने वाले दलों के प्रति आकर्षण, मंत्री पद मिलने के लुभावने वादे- ऐसे कारण हैं जो दलबदल के बाजार को गर्म करते हैं। चुनाव में जिस राजनीतिक दल का पलड़ा भारी दिखता है, उसमें घुसने की होड़ कुछ अधिक देखी जाती है। इनदिनों उत्तर प्रदेश और पंजाब में जमकर उठापटक हो रही है। स्थिति को देख विभिन्न दलों से नेता एक-दूसरी पार्टी में जा रहे हैं। ऐसा लगता है देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना राजनीतिक दलों एवं नेताओं का लक्ष्य नहीं है। विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में दलबदल का सिलसिला कायम हो जाने पर हैरान होने वाली कोई बात नहीं, यह चुनावी मौसम का बुखार है जो चुनावों के दौरान हर दल के नेताओं को चढ़ता ही है, यह तय है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड से लेकर गोवा, मणिपुर और पंजाब तक में यह सिलसिला और तेज होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दलबदल की इस बीमारी का कोई इलाज नहीं, यह लोकतंत्र को कमजोर एवं अस्वस्थ करने वाली एक महाबीमारी है। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि राजनीतिक दल अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिये खुद इसे बढ़ावा देते हैं। कई बार तो वे दूसरे दलों के नेताओं को अपने दल में इसलिए भी लाते हैं, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि उनके पक्ष में हवा चल रही है। यह बात और है कि इसके आधार पर यह अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि कौन दल बढ़त हासिल करने जा रहा है, क्योंकि अक्सर नेता अपना टिकट कटने के अंदेशे में पाला बदलते हैं। विचारधारा उनके लिए कपड़े की तरह होती है। लोकतंत्र में सत्ता पाने का प्रयत्न एकान्तत: बुरा नहीं है पर लोकतांत्रिक मर्यादा, नैतिकता एवं सिद्धांतवादिता को दूर रखकर सत्ता पाने का प्रयत्न लोकतंत्र का कलंक है। आज की दूषित राजनीति में राष्ट्रहित एवं जनहित की महत्वाकांक्षा व्यक्तिहित एवं पार्टीहित के दबाव के नीचे बैठती एवं दबती जा रही है। सत्ता के स्थान पर स्वार्थ आसीन हो रहा है। दल बदल पुराना नासूर है। वर्ष 1977 और 1989 के दौर में सबसे ज्यादा दलबदल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">जरा याद करिये 1977 में जहां पूर्व कांग्रेसी मोरारजी देसाई केन्द्र में पहले गैर कांग्रेसी सरकार के मुखिया बने, वहीं बाद में विश्वनाथ प्रताप सिंह, चन्द्रशेखर और देवगौड़ा ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व संस्करण भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी भी लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे। दरअसल राजनीतिक ख्वाबों के पीछे भागने की अद्भुत दौड़ है इसीलिये आस्था एवं सिद्धान्तों को बदलने का यह खेल सिर्फ व्यक्तिगत स्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दल भी इस खेल में लगातार शामिल होते रहे हैं। खासकर जब से गठबंधन सरकार का दौर चला है तो छोटे और क्षेत्रीय दलों की चांदी हो गई है। दलबदलुओं का स्वागत टिकटों के तोहफे के साथ होने से ऐसे आसार हैं कि आने वाले महीनों में दल-बदल की तस्वीर उत्तर प्रदेश में और रंगीन होगी। लेकिन यह दलबदल राजनीतिक सिद्धान्तों एवं मूल्यों का बड़ा मजाक है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jan 2022 10:14:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीतिक तिकड़मबाजी और झूठ का जाल</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब की राजनीतिक पार्टियां 2022 के विधान सभा चुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। इस बार चुनाव की रणनीति और परिस्थितियां बिल्कुल बदले हुए है। विगत चुनावों तक बड़ी रैलियों की रणनीति बनाई जाती थी। जो पार्टी सबसे बड़ी रैली करने में सफल रहती थी, तो उन्हें चुनाव जीतने की उम्मीद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/political-gimmicks-and-lies/article-28354"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/political-parties-seeking-their-future-in-the-elections.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब की राजनीतिक पार्टियां 2022 के विधान सभा चुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। इस बार चुनाव की रणनीति और परिस्थितियां बिल्कुल बदले हुए है। विगत चुनावों तक बड़ी रैलियों की रणनीति बनाई जाती थी। जो पार्टी सबसे बड़ी रैली करने में सफल रहती थी, तो उन्हें चुनाव जीतने की उम्मीद बंध जाती थी। भाषणों में खूब वायदों के राजनीतिक शगूफे छोड़े जाते हैं। पहले होता यह रहा है कि जो पार्टी वायदों में चकमा देने में सफल रही, वही सरकार बनाती रही है, आज वायदे पूरे होने की वास्तविक्ता सभी के सामने है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ हटकर है। पार्टियां रैलियां करने या मुद्दों की बात करने की बजाय दूसरे को बदनाम करने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। एक दूसरे पर कीचड़ फेंकने के चलन में तर्कहीन व मनघढ़त कहानियां बनाकर झूठ पर झूठ बोला जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी बातें बनाई जा रही हैं, जिनका कोई सिर-पैर ही नहीं। राजनीति शब्द से नीति शब्द खत्म होकर केवल राज तक सीमित हो गया है। बस उनका केवल एक ही मकसद है कि सत्ता कैसे हासिल की जाए। नीति शब्द अब चाल का रूप धारण कर गया है। चालें चलने के लिए सलाहकार भी नियुक्त किए जाते हैं, वे किसी बात को कहानी बनाने का काम करते हैं, लेकिन बना नहीं पाते क्योंकि सच तो सच ही होता है। इस बार बेअदबी के नाम पर एक दूसरे पर कीचड़ उछाला जा रहा है। बेअदबी की दुखद घटनाओं में भी सत्ता तलाशने की कोशिशें जारी हैं। यह हैवानीयत शैतानियत की मिसाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">झूठ को सच बनाने के लिए झूठ की कहानी बनाने में विशेषज्ञ अधिकारियों की मदद ली जाती है। अब फिर उस पूर्व अधिकारी का नाम सामने आ रहा है जो डेरा श्रद्धालुओं के खिलाफ झूठी कहानी के लिए बदनाम हो चुका है लेकिन इस झूठ के व्यापार में सिवाय बदनामी से कुछ नहीं मिलना, कुछ का पर्दाफाश हो रहा है। यह चलन मर चुकी जमीन और खोखले हो चुके मानवीय शरीर (राजनेताओं) का प्रतीक है, जिस शरीर में सच्चाई, धर्म, नैतिकता के नाम की कोई वस्तु नहीं उनके लिए सत्ता ही धर्म, नैतिकता और जिंदगी है। सत्ता के लिए वह नेकी, भलाई, मानवता का बात करने की कोशिश की जाती है, लेकिन सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Nov 2021 10:00:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती महंगाई और कृषि कानूनों पर सियासी संग्राम</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निकाली बैलगाड़ी व पद यात्रा भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्र द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के अलग-अलग हिस्सों में किसान आंदोलन चल रहा है। इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए भिवानी में रविवार को नेहरू पार्क से लेकर पुराना बस स्टैंड तक कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पैदल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/political-struggle-on-rising-inflation-and-agricultural-laws/article-21936"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/political-struggle-on-rising-inflation-and-agricultural-laws.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निकाली बैलगाड़ी व पद यात्रा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्र द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के अलग-अलग हिस्सों में किसान आंदोलन चल रहा है। इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए भिवानी में रविवार को नेहरू पार्क से लेकर पुराना बस स्टैंड तक कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला। इस दौरान पद यात्रा व बैलगाड़ी पर सवार होकर कांग्रेस पार्टी द्वारा किसान आंदोलन को मजबूत करने का संदेश दिया। कांग्रेस के इस पैदल मार्च में शामिल हुए नेताओं ने कहा कि जब तक केन्द्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती, तब तक किसानों के हक में वे इसी तरह आवाज बुलन्द करते रहेंगे। इस दौरान कांग्रेसी नेता परमजीत मड्डू ने केंद्रीय कृषि कानूनों के साथ ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती दरों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Feb 2021 20:35:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दवा को राजनीतिक रंग न दिया जाए</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना में सरकार के प्रबंध इतने नाकारा साबित हुए कि करोड़ों मजदूरों को सड़कों पर भटकना पड़ा। अस्पतालों में कोरोना परीक्षण, पीपीई किट देने में सरकार से गलतियां हुई होंगी उन्हें भाजपा की कमियां कहा जाना चाहिए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोरोना वैक्सीन को बीजेपी की बताते हुए लगवाने से इन्कार कर दिया है। देश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><span style="color:#000000;">कोरोना में सरकार के प्रबंध इतने नाकारा साबित हुए कि करोड़ों मजदूरों को सड़कों पर भटकना पड़ा। अस्पतालों में कोरोना परीक्षण, पीपीई किट देने में सरकार से गलतियां हुई होंगी उन्हें भाजपा की कमियां कहा जाना चाहिए। </span>सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोरोना वैक्सीन को बीजेपी की बताते हुए लगवाने से इन्कार कर दिया है। देश में शायद यह पहली बार हो रहा है कि दवाओं में भी राजनीति घुसा दी गई है। कोरोना एक जानलेवा वायरस है दुनिया भर में कोरोना से अब तक करीब 18 लाख व भारत में करीब 1.49 लाख लोग मर चुके हैं। (Covid 19)</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं कोरोना से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। इधर भारत दुनिया का एकमात्र देश है जिसके वैज्ञानिकों ने कोरोना से बचाव की चार वैक्सीन तैयार कर ली हैं, जो मंजूरी मिलते ही नागरिकों को मिलने लगेगी। अभी कोविशील्ड वैक्सीन जोकि ऐडस्ट्राजेनेका एवं आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने तैयार की है, की अनुमति हो चुकी है जोकि आपात स्थिति में लगाई जा रही है। कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन भी पूणे का सीरम इंस्टीट्यूट कर रहा है। रोग राजनीतिक रंग देखकर नहीं घेरते, ये अपनी चपेट में हर उस प्राणी को ले लेते हैं जो इनका शिकार हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दवाएं भी राजनीतिक रंगों से ऊपर हैं उनका असर हर मरीज की बीमारी पर होता है जिस बीमारी के लिए उन्हें बनाई जाती है। अखिलेश यादव का यह कहना कि भाजपा पर उन्हें भरोसा नहीं है, ये उनकी व्यक्तिगत सोच एवं निर्णय है। सपा नेता अपनी सरकार आने पर दवा लगवाने का भरोसा दे रहे हैं, ठीक है। लेकिन तब तक कई सौ लोग कोरोना से जान गंवा लेंगे जबकि वैक्सीन उपलब्ध हो रही है। वैक्सीन को भाजपा ने तैयार नहीं किया है, न ही भाजपा के पास दवा बनाने की प्रयोगशाला या फैक्टरी है। वैक्सीन देश के सरकारी संस्थानों से तैयार हो रही है। (Covid 19)</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव राजनीतिक विरोध के लिए भाजपा की खामियां गिना सकते हैं जिस कारण देश में वक्त रहते कोरोना का फैलाव नहीं रोका जा सका। कोरोना के वक्त लॉकडाउन से असुविधा व अर्थव्यवस्था चौपट हुई उसके लिए भाजपा के प्रयासों पर प्रशन हो सकते हैं। अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्टÑीय स्तर के नेता हैं उनके एक-एक शब्द को सुनने वाले व उसको मानने वाले करोड़ों लोग हैं। अत: उनके द्वारा कोरोना वैक्सीन पर भाजपा का ठप्पा लगाने से लोगों में ईलाज से ज्यादा बहस होने लगेगी। कोरोना का वायरस ऐसा है कि इसका प्रसार अभी भी हो रहा है। (Covid 19)</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन में कोरोना का नया रूप सामने आया है, जो पहले के वायरस से 70 गुणा ज्यादा तेजी से फैल रहा है। भारत में कोरोना के नये रूप के एक सप्ताह में ही 50 केस दर्ज हो गए हैं। नया कोरोना वायरस कितना घातक है या उस पर आने वाली वैक्सीन असर करेगी या नहीं जैसे ढेरों सवाल हैं जिन्हें सरकार से पूछा जाना चाहिए। अच्छा हो यदि सपा प्रमुख सरकार पर दबाव बनाएं कि वैक्सीन आ जाने पर भी सरकार लगाने में देरी क्यों कर रही है। ये बात रख सकते हैं कि भाजपा कार्यकर्ताओं का सपा भी सहयोग करेगी ताकि देश में कोरोना से हो रही मौतों को तत्काल प्रभाव से रोका जा सके। अखिलेश यादव युवा नेता हैं उनका भाजपा व उसकी सरकार पर पड़ने वाला दबाव लाखों लोगों का जीवन बचा सकता है। (Covid 19)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jan 2021 09:48:24 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लीबिया में राजनीतिक वार्ता जारी रखने पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। लीबिया में राजनीतिक वार्ता फोरम ने एक सप्ताह के भीतर ऑनलाइन बातचीत शुरू करने पर सहमति जतायी है। लीबिया में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन प्रमुख एवं कार्यवाहक विशेष दूत स्टेफनी विलियम्स ने रविवार की रात संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “ हम इस मसले पर काम जारी रखेंगे। हम अगले सप्ताह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/consent-to-continue-political-dialogue-in-libya/article-19911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/libya.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> लीबिया में राजनीतिक वार्ता फोरम ने एक सप्ताह के भीतर ऑनलाइन बातचीत शुरू करने पर सहमति जतायी है। लीबिया में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन प्रमुख एवं कार्यवाहक विशेष दूत स्टेफनी विलियम्स ने रविवार की रात संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “ हम इस मसले पर काम जारी रखेंगे। हम अगले सप्ताह होने वाली बैठक में इस पर चर्चा करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि सदस्यों के चयन के लिए शीघ्र ही निर्णय ले लिया जाएगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">विलियम्स ने कहा कि अब तक की वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है तथा अगली बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए होगी। उन्होंने कहा, “ हमें अभी भी बहुत काम हैं। हम एक सप्ताह में वर्चुअल बैठक के लिए सहमत हुए हैं। आने वाले दिनों में मैंने फाेरम को चुनाव के लिए संवैधानिक आधार पर एक समिति बनाने के लिए सदस्यों के चयन करने के लिए कहा है।”</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Nov 2020 10:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिलाओं की भावनाओं के साथ राजनीतिक खिलवाड़</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे देश की राजनीति में एक परम्परा और पैंतरेबाजी रही है कि किसी भी घटना पर सत्तापक्ष व विपक्ष अपने-अपने हितों की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक आरोप-प्रत्यारोप लगा सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी ऐसी ब्यानबाजी करते हैं जैसे एक पार्टी ने तो समस्या का समाधान कर दिया और दूसरी पार्टी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/political-play-with-womens-feelings/article-19487"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/nirmala-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमारे देश की राजनीति में एक परम्परा और पैंतरेबाजी रही है कि किसी भी घटना पर सत्तापक्ष व विपक्ष अपने-अपने हितों की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक आरोप-प्रत्यारोप लगा सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी ऐसी ब्यानबाजी करते हैं जैसे एक पार्टी ने तो समस्या का समाधान कर दिया और दूसरी पार्टी उस मामले में बिल्कुल नाकाम रही है। हाथरस व होशियारपुर में घटित दुराचार की घटनाएं कांग्रेस व भाजपा के बीच राजनीतिक जंग का मैदान बन गई हैं। हैरानी की बात यह है कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह ने एक-दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। कांग्रेस हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाने साध रही है और दूसरी तरफ भाजपा ने होशियारपुर में घटित घटना पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को घेरना शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़े दुख की बात है कि महिलाओं व बच्चियों पर अत्याचार की घटनाएं देश में घट रही हैं, कांग्रेस-भाजपा दोनों पार्टियों की सरकारें सत्तापक्ष में हैं, जो शर्मनाक व निंदनीय घटना है। राजनीतिक पार्टियों ने ऐसी गंभीर घटनाओं को विपक्ष पार्टी को नीचा दिखाने का हथकंडा बना लिया है। यह चलन महिलाओं का अपमान है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि दुराचार की घटनाओं पर नेताओं द्वारा अपने स्वार्थ के लिए घटिया बयानबाजी करने से भी परहेज नहीं किया जाता। दरअसल महिलाओं का अपमान किसी भी राज्य में पीड़ितों की पारिवारिक स्थिति के कारण है। यदि पुलिस प्रबंध व प्रशासन स्वतंत्र हो तब दोषियों के खिलाफ सही समय पर कार्रवाई कर उन्हें सजा दिलाई जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक दखलअंदाजी के कारण प्रशासन और पुलिस निष्पक्ष जांच की बजाय सत्तापक्ष के इशारों पर चलते हैं। प्रशासन और पुलिस भी मामले को दबाने और रफा-दफा करने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। यदि देखा जाये तब दुराचार जैसी घटनाएं प्रशासन और पुलिस का विषय है, राजनीति ऐसे मामलों को उलझा देती है। राजनीतिक पार्टियां को ऐसे मामलों में अपने हित साधने की बजाय पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए काम करने की आवश्यकता है। पुलिस को ईमानदारी से निष्पक्षता से काम करने की छूट दी जाए। महिलाओं के अधिकारों की राजनीतिक आवाज उठाने के नाम पर राजनीतिक हितों की पूर्ति करना महिलाओं का अपमान है। नारी अपमान की इस दुष्प्रवृति को रोका जाना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 26 Oct 2020 09:46:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीतिक नेतृत्व के बीच सहमति को जमीन पर लागू करेंगे भारत और चीन</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। भारत और चीन ने अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों की संख्या नहीं बढाने , जमीनी हालात में बदलाव न करने तथा सीमा पर शांति एवं स्थिरता कायम करने वाले कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछले चार महीने से भी अधिक समय से जारी सैन्य गतिरोध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-and-china-will-implement-the-agreement-between-the-political-leadership-on-the-ground/article-18653"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/flag-india-china2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> भारत और चीन ने अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों की संख्या नहीं बढाने , जमीनी हालात में बदलाव न करने तथा सीमा पर शांति एवं स्थिरता कायम करने वाले कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछले चार महीने से भी अधिक समय से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने तथा स्थिति को सामान्य बनाने के तौर तरीकों पर चर्चा के लिए आज चीन के सीमा क्षेत्र चुशूल मोल्डो में कोर कमांडरों के बीच छठे दौर की बातचीत में यह सहमति बनी। लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर ले़ जनरल हरिंदर सिंह ने बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके साथ विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव भी थे। यह पहला मौका था जब सैन्य कमांडरों की बैठक में विदेश मंत्रालय का एक अधिकारी भी शामिल हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">मास्को में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और फिर विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद हुई इस बातचीत में दोनों पक्षों ने उनके राजनीतिक नेतृत्व के बीच बनी सहमति को जमीन पर लागू करने की हामी भरी। बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों पक्ष जमीनी स्तर पर संवाद प्रक्रिया को मजबूत बनाने , गलतफहमी से बचने , अग्रिम मोर्चों पर और सैनिक न भेजने , जमीन पर एकतरफा स्थिति बदलने की कोशिश न करने पर भी राजी हुए । उनका कहना है कि दोनों पक्ष ऐसा कोई कदम नहीं उठायेंगे जिससे स्थिति जटिल बने। दोनों पक्षों के बीच यह भी सहमति बनी कि सैन्य कमांडरों की सातवें दौर की बैठक जल्द ही होगी और दोनों देश सीमा पर शांति तथा स्थिरता बनाये रखने के लिए मिलकर कदम उठायेगी और समस्याओं के समाधान के लिए व्यवहारिक कदम उठायेंगे।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2020 09:48:44 +0530</pubDate>
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