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                <title>Editorial Hindi - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Shah Satnam Ji: कण-कण में हाजिर हजूर&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे सतगुरु, समाज सुधारक, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने समाज, देश और पूरी मानवता पर ऐसे अनगिनत उपकार किए हैं, जिनका वर्णन करना सूर्य को दीपक दिखाना है। नशे और अन्य बुराइयों के कारण जो घर नरक बन चुके थे, उन्हें आपजी ने फिर से खुशियों से भर दिया। राक्षसी प्रवृत्ति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/he-is-present-in-every-single-particle/article-79141"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/shah-satnam-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे सतगुरु, समाज सुधारक, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने समाज, देश और पूरी मानवता पर ऐसे अनगिनत उपकार किए हैं, जिनका वर्णन करना सूर्य को दीपक दिखाना है। नशे और अन्य बुराइयों के कारण जो घर नरक बन चुके थे, उन्हें आपजी ने फिर से खुशियों से भर दिया। राक्षसी प्रवृत्ति वाले लोग आपकी शरण में आकर देवतुल्य बन गए। धर्म और जाति के नाम पर एक-दूसरे के शत्रु बने लोग, सब वैमनस्य छोड़कर आपसी प्रेम और भाईचारे के सूत्र में बंध गए। आपजी ने रूहानियत को इतना सरल और सहज बना दिया कि छोटे-छोटे बच्चे भी भक्ति के मार्ग पर चल पड़े। आपजी की रूहानी शिक्षा का ऐसा प्रकाश फैला कि लोग जादू-टोना, तावीज, भूत-प्रेत जैसे अंधविश्वासों और पाखंडों से दूर हो गए। आपजी ने विभिन्न प्रांतों में गाँव-गाँव, शहर-शहर सत्संग लगाकर परमात्मा के नाम का ऐसा संदेश दिया कि चारों ओर राम-नाम की गूंज उठने लगी। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने यह शिक्षा घर-घर पहुंचाई कि परमात्मा एक है- ओम, राम, अल्लाह, वाहिगुरु, गॉड ये सभी उसी एक परमेश्वर के नाम हैं। संपूर्ण सृष्टि उसकी संतान है। कोई ऊँच-नीच नहीं, सब बराबर हैं। परमात्मा की प्राप्ति के लिए बाहरी आडंबर, पाखंड, पैसे-चढ़ावे या धन की आवश्यकता नहीं, बल्कि सच्ची भावना चाहिए। रूहानियत के इतिहास में आपजी का यह महान परोपकार मील का पत्थर साबित हुआ जब आप जी ने वचन फरमाए कि हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे। सामान्यत: सतगुरु का देह रूप में वियोग शिष्य के लिए सबसे असहनीय होता है, परंतु पूजनीय परम पिता जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘हम जाएंगे ही नहीं, सदैव तुम्हारे (पूजनीय हजूर पिता जी के) रूप में रहेंगे।’ यह पवित्र वचन साध-संगत के लिए महापरोपकार तथा रूहानियत में अद्वितीय उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमएसजी के रूप में ये वचन साकार हुए। पूजनीय बेपरवाह सांईं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परम पिता जी से नाम प्राप्त करने वाले जीव अपने अनुभव बताते हैं कि उन्हें पूज्य हजूर पिता जी में शाह मस्ताना जी महाराज तथा परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के ही दर्शन होते हैं। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 25 जनवरी 1919 को श्री जलालआणा साहिब की पवित्र धरती पर पूजनीय पिता वरियाम सिंह जी और पूजनीय माता आस कौर जी के घर अवतार धारण किया। बचपन से ही आपजी का सामाजिक और धार्मिक जीवन प्रेरणा-स्त्रोत था। आपजी ने अपने सतगुरु शाह मस्ताना जी महाराज के प्रेम, भक्ति और श्रद्धा में महान बलिदान दिया। अपने सतगुरु जी के हुक्मानुसार अपनी बड़ी हवेली गिराकर संपूर्ण सामान सरसा दरबार ले आए। फिर सांईं जी के हुक्म अनुसार सर्द रात में सारा सामान डेरे के बाहर रख दिया। अगले दिन आपजी ने सारा सामान आई हुई साध-संगत में बाँट दिया। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज जी ने इस महान बलिदान को देखकर अपार कृपा से भरपूर वचन फरमाए और समस्त साध-संगत के सम्मुख आपजी को पवित्र गुरगद्दी बख्शिश की। सांईं मस्ताना जी ने आपजी का नाम स. हरबंस सिंह जी से बदलकर सतनाम सिंह जी रख दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने रूहानियत के इतिहास में नई मिसाल कायम करते हुए 23 सितंबर 1990 को पूजनीय गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को गुरगद्दी की बख्शिश की। आप जी सवा साल तक पूजनीय हजूर पिता जी के साथ स्टेज पर विराजमान रहे। पूजनीय परम पिता जी ने साध-संगत पर दया मेहर करते हुए स्पष्ट वचन फरमाए- ‘पूजनीय शाह मस्ताना जी के रूप में व अब इस शरीर में (पूजनीय परम पिता जी के रूप) में हमने ही साध-संगत की संभाल की और आगे भी संत जी (पूजनीय हजूर पिता जी) के रूप में हम ही संभाल करते रहेंगे।’</p>
<p style="text-align:justify;">परंपरा के अनुसार परमात्मा के हुक्म से संत अपना चोला बदलते हैं। 13 दिसंबर 1991 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपना नूरी चोला बदल लिया। किंतु आपजी पूज्य हजूर पिता जी के रूप में साध-संगत की दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी संभाल कर रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत इस महीने को सेवा माह व 3 इन 1 एमएसजी भंडारे के रूप में मनाती है। 12 से 15 दिसंबर तक प्रतिवर्ष आँखों का मुफ्त शिविर लगाया जाता है, जिसने अब तक हजारों लोगों की अंधेरी जिंदगी में प्रकाश ला दिया है। सेवा की यह मशाल पूरे लौ के साथ जल रही है। सच्चे सतगुरु पालनहार को हमारा करोड़ों बार नमन। Shah Satnam Ji</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 09:03:48 +0530</pubDate>
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                <title>Water Management Plan : जल प्रबंधन पर बने प्रभावी योजना</title>
                                    <description><![CDATA[Water Management Plan : मात्र 15 या 20 दिन पहले दिल्ली में पानी की कमी से हाहाकार मची हुई थी। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार हरियाणा पर पानी न देने का आरोप लगा रही थी। भाजपा द्वारा भी दिल्ली में पानी के लिए दिल्ली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे थे वहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/effective-plan-on-water-management/article-59512"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/water-manegement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Water Management Plan : मात्र 15 या 20 दिन पहले दिल्ली में पानी की कमी से हाहाकार मची हुई थी। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार हरियाणा पर पानी न देने का आरोप लगा रही थी। भाजपा द्वारा भी दिल्ली में पानी के लिए दिल्ली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे थे वहीं दिल्ली की जल मंत्री आतिशी पानी की मांग को लेकर खुद अनशन पर बैठ गई थी। यह घटनाक्रम हर वर्ष होता है। मई-जून में पानी की किल्लत फिर जून-जुलाई में मानसून से पानी द्वारा तबाही। यह हाल अकेले दिल्ली का नहीं बल्कि लगभग सभी राज्यों का है।</p>
<h3>मानसून की पहली बारिश में ही दिल्ली अस्त-व्यस्त नजर आई</h3>
<p style="text-align:justify;">मानसून की पहली बारिश में ही दिल्ली अस्त-व्यस्त नजर आई। हरियाणा, पंजाब में भी जहां-जहां मानसून की बारिश हुई। कहीं पर सड़कें नदी का रूप धारण किए हुए थीं, तो कहीं दुकानों, घरों में पानी घूसा, पेड़ गिरे, बिजली के खंभे टूटे। जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ। यही ठीक है कि प्रकृति के आगे किसी का जोर नहीं चलता। लेकिन कुछ सावधानियों व संसाधनों के द्वारा इस प्रकार के नुकसान से बचा जा सकता है। समय रहते पानी निकासी के संसाधन दुरूस्त कर लिए जाएं, पानी निकासी के नालों की सही ढंग से साफ-सफाई हो, बिजली के कमजोर खंभों को समय अनुसार बदला जाए इत्यादि उपायों के द्वारा काफी हद तक आमजन के जीवन को विपरीत परिस्थितियों से बचाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जल संकट एक गंभीर और विश्वव्यापी चिंता का विषय है। इस विषय पर सरकार को विस्तृत योजना बनाने की आवश्यकता है ताकि गर्मियों में पानी का अभाव न हो और मानसून में पानी की वजह से नुकसान न हो। इसके लिए वर्षा के जल का संचयन, नदियों को जोड़ने की योजना इत्यादि पर गंभीरता से योजना बनाकर अमल में लाने की आवश्यकता है। इस प्रकार की योजनाओं से न केवल पानी की कमी से बचा जा सकेगा बल्कि बाढ़ इत्यादि से होने वाले नुकसान से भी काफी हद तक बचा जा सकेगा। Water Management Plan</p>
<p><a title="Income Tax Return: 28 ऐसे बैंक जहां आप 31 जुलाई से पहले भर सकते हैं आईटीआर और इतने समय में रिफंड!" href="http://10.0.0.122:1245/28-such-banks-where-you-can-fill-itr-before-31-july/">Income Tax Return: 28 ऐसे बैंक जहां आप 31 जुलाई से पहले भर सकते हैं आईटीआर और इतने समय में रिफंड!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/effective-plan-on-water-management/article-59512</link>
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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 12:53:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी को बाइज्जत बरी करना, माननीय हाई कोर्ट का सम्मानजनक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[रणजीत हत्या मामले में माननीय पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) ने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां व चार अन्य को निर्दोष साबित कर बरी किया है। खबर सुनते ही डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने खुशी मनाई। सच को जानने वाले व हर एक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">रणजीत हत्या मामले में माननीय पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) ने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां व चार अन्य को निर्दोष साबित कर बरी किया है। खबर सुनते ही डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने खुशी मनाई। सच को जानने वाले व हर एक न्यायप्रिय व्यक्ति ने माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले पर खुशी मनाई। देर से ही सही आखिर सच की जीत हुई। झूठे केसों की आड़ में मीडिया के माध्यम से डेरा सच्चा सौदा के बारे में खूब दुष्प्रचार हुआ। Ram Rahim</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने शारीरिक व मानसिक अत्याचार भी झेले। लेकिन साध-संगत का अपने गुरू पर दृढ़ विश्वास अटल रहा। साध-संगत ने चुपचाप विरोधियों के ताने सहन किए। साध-संगत को अपने गुरू जी की सच्चाई और न्यायपालिका पर भरोसा था। माननीय पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में इस केस पर सुनवाई हुई और आखिरकार सच की जीत हुई। माननीय उच्च न्यायालय के इस निर्णय से करोड़ों लोगों के दिलों में न्यायालय के प्रति विश्वास और दृढ़ हुआ है। किसी ने सही लिखा है सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। Ram Rahim</p>
<p><a title="High Court: सच की हुई जीत, रंजीत मर्डर केस में पूज्य गुरु जी के खिलाफ केस खारिज" href="http://10.0.0.122:1245/case-against-pujya-guru-ji-dismissed-and-acquitted-in-ranjit-murder-case/">High Court: सच की हुई जीत, रंजीत मर्डर केस में पूज्य गुरु जी के खिलाफ केस खारिज</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-honourable-high-court-gave-a-respectable-verdict-to-acquit-pujya-guru-ji/article-58084</link>
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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 10:55:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Stopping Adulteration: त्योहारी सीजन और यह मिलावटखोरी!</title>
                                    <description><![CDATA[Stopping Adulteration: त्योहारी सीजन के मिलावटी नकली घी, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों का बरामद होने की खबरें बेहद चिंताजनक है। यह अच्छी बात है कि स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है और मिलावटखोरों पर नकेल कस रहा है, लेकिन समस्या यह है कि मिलावट पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही। सभी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/festive-season-and-this-adulteration/article-54339"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/adulteration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Stopping Adulteration: त्योहारी सीजन के मिलावटी नकली घी, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों का बरामद होने की खबरें बेहद चिंताजनक है। यह अच्छी बात है कि स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है और मिलावटखोरों पर नकेल कस रहा है, लेकिन समस्या यह है कि मिलावट पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही। सभी मिलावटखोर पकड़े नहीं जा रहे। त्योहारी सीजन में तो बड़े पैमाने पर मिलावट होगी, उसका खामियाजा जनता को भुगतना ही पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार के कारण अधिकतर मामले सामने भी नहीं आते। वास्तव में मिलावटखोरी न केवल गैर-कानूनी है बल्कि मानवता के प्रति जघन्य अत्याचार भी है। आम लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता खो रहे हैं, ऊपर से मिलावटखोरी ‘आग में घी’ डालने वाली बात है। पैसे के लालच में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना धोखा है। मिलावट के लगातार बढ़ते चलन के कारण पिछले कुछ सालों में लोगों का रुझान सूखे मेवों की ओर भी बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि जनता पता होनी चाहिए जो दुकानदार नकली सामान बेचते पकड़े जाते हैं या मिलावट करते हुए या भ्रष्टाचार के कारण नहीं पकड़े जाते, उस दुकान से मिठाइयां न खरीदें। एक समय था जब लोग घर पर ही दूध से बनी मिठाइयां बनाते थे। दुकानदारों को भी समझना चाहिए कि मिलावट के कारण लोगों को ज्यादा समय तक गुमराह नहीं किया जा सकता। वास्तव में खाद्य पदार्थों व मानव जीवन के उपयोग में आने वाली किसी भी चीज के साथ खिलवाड़ करने वाले ये मिलावटखोर बहुत बड़े गुनाहगार हैं, क्योंकि ऐसा करके वो एक-दो नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। Diwali 2023</p>
<p style="text-align:justify;">दुकानदारों को शुद्धता का प्रमाण दिखाकर जनता का विश्वास जीतना चाहिए। नि:संदेह त्योहार खुशियां बांटने के अवसर होते हैं, जो समाज में अच्छा संदेश देते हैं। इसलिए पवित्र त्योहारों के नाम पर गलत तरीके से पैसा कमाने की भावना का त्याग किया जाए। मिलावटखोरी करना त्योहारों की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि त्योहार सामाजिक कल्याण को समर्पित होते हैं। समाज में मान-सम्मान ही सबसे सर्वोत्तम व आवश्यक है। Adulteration</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="DA Hike: सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, डीए-बोनस को मिली मंजूरी!" href="http://10.0.0.122:1245/very-good-news-for-government-employees-da-bonus-approved/">DA Hike: सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, डीए-बोनस को मिली मंजूरी!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 10:24:35 +0530</pubDate>
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                <title>Assembly Election 2023: चुनावों में बढ़ रहे अपराध, किया जा रहा है नजरअंदाज</title>
                                    <description><![CDATA[Assembly Election 2023: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। राजनीतिक दलों ने हर स्तर पर प्रयास करने शुरु कर दिए हैं, वायदों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। तार्किक वादों के साथ-साथ रेवड़ी बांटने का भी चलन जारी है। इस प्रवृत्ति में समाज में बढ़ते अपराधों को पूरी तरह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/crimes-are-increasing-during-elections-they-are-being-ignored/article-54306"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/assembly-elections.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Assembly Election 2023: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। राजनीतिक दलों ने हर स्तर पर प्रयास करने शुरु कर दिए हैं, वायदों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। तार्किक वादों के साथ-साथ रेवड़ी बांटने का भी चलन जारी है। इस प्रवृत्ति में समाज में बढ़ते अपराधों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। समाज में प्रत्येक व्यक्ति खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। लगभग हर राज्य में हत्या, लूट, डकैती की घटनाएं घटित हो रही हैं। ऐसी घटनाओं की राजनीतिक स्तर पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही। Assembly Election 2023</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टियां एक-दूसरे पर घोटाले के आरोप लगाने तक ही सीमित रह गई हैं। विपक्षी दल सरकारों को घेरने के लिए भ्रष्टाचार का मुद्दा जरूर उठाते हैं, लेकिन ये आरोप भी व्यक्ति विशेष पर आरोप बनकर रह जाते हैं। जिस तरह से अपराधियों द्वारा आम जनता को प्रताड़ित किया जा रहा है, उसकी कहीं भी कोई चर्चा नहीं हो रही। आढ़ती से पैसे लेकर जाने वाले किसान को भरोसा नहीं है कि वह सुरक्षित घर पहुंच पाएगा। व्यापारियों की हत्याएं हो रही हैं, गायकों को धमकियां मिल रही हैं। दिनदहाड़े लुटेरे बाजारों में आते हैं और हमला करके लूटपाट कर लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों में कई-कई पुलिस स्टेशन और पुलिस चौकियां हैं, पुलिस स्टेशनों में कैमरे लगे होने के बावजूद लुटेरे भागने में सफल हो रहे हैं। हां, यह सच है कि यदि किसी मंत्री या विधायक की भैंस भी आधी रात को भी चोरी हो जाती है तो फिर पुलिस सूरज निकलने से पहले ही रातों-रात में सब कुछ बरामद कर लेती है। बड़े शहरों में पुलिस दूसरे या तीसरे दिन 25 करोड़ के हीरे ढूंढने में सफल हो जाती है, भले ही चोर हजारों किमी दूर किसी राज्य के जंगल में ही क्यों न छिपा हो। दूसरी तरफ आम जनता को लूटने वाला उसी शहर में रहता हुआ भी नहीं पकड़ा जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">निस्संदेह, वर्तमान समय में कानून व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा है। पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के साथ-साथ अपराधों के सामाजिक पहलुओं पर भी विचार कर अपराधियों को समाज की मुख्य धारा में वापिस लाने के प्रयास किये जाने चाहिए। नशा, बेरोजगारी, फिल्मों और धारावाहिकों में अपराध के तरीकों का चित्रण इत्यादि ऐसे कई कारण हैं जो अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन कारणों पर चर्चा की जरूरत है। राजनीतिक दलों को कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भी आगे आना चाहिए। सुरक्षा के बिना विकास अधूरा है। Assembly Election 2023</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Immunity Booster Remedies: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय, दूर रहेंगी मौसमी बीमारी" href="http://10.0.0.122:1245/try-these-home-remedies-to-increase-immunity-seasonal-diseases-will-stay-away/">Immunity Booster Remedies: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय, दूर रहेंगी मौसमी बीमारी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 09:27:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Commercialization of Education: परीक्षा तैयारी के नाम पर कोचिंग सेंटरों का हो रहा व्यवसायीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[Commercialization of Education: केंद्रीय उपभोक्ता फोरम ने आईएएस परीक्षा की तैयारी कराने वाले दिल्ली के कई कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया है और इन सेंटरों पर परीक्षा के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। दरअसल, कोचिंग को कभी अतिरिक्त मदद के रूप में देखा जाता था। जो छात्र किसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/coaching-centers-are-being-commercialized-in-the-name-of-exam-preparation/article-54148"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/education-commercialization.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Commercialization of Education: केंद्रीय उपभोक्ता फोरम ने आईएएस परीक्षा की तैयारी कराने वाले दिल्ली के कई कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया है और इन सेंटरों पर परीक्षा के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। दरअसल, कोचिंग को कभी अतिरिक्त मदद के रूप में देखा जाता था। जो छात्र किसी कारण से परीक्षा की तैयारी में पिछड़ जाते थे, वे कोचिंग लेकर अपना नुकसान पूरा करते थे, लेकिन जैसे-जैसे शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ती गई, परीक्षा तैयारी के नाम पर कोचिंग सेंटरों को व्यावसायिक रंग दे दिया गया। Coaching Centers</p>
<p style="text-align:justify;">एक समय था जब केवल अनुभवी या सेवानिवृत्त शिक्षकों ही कोचिंग या ट्यूशन देते थे। अब कोचिंग सेंटरों के मालिक वे लोग हैं जिनके पास पैसा है और वे केवल व्यवसाय के लिए कोचिंग सेंटर चला रहे हैं और अध्यापकों को कोचिंग देने के लिए सैलरी पर रखते हैं। जब कोई चीज व्यवसाय या उद्योग का रूप ले लेती है लाभ ही एकमात्र उद्देश्य रह जाता है। इन परिस्थितियों में मिशन खत्म हो जाता है, बस कमीशन ही रह जाता है। आज के दौर में कोचिंग के हालात यह है कि कोचिंग सेंटरों के प्रचार-प्रसार की होड़ इस कद्र बढ़ गई है कि जैसे कंपनियां किसी उत्पाद को बेचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विज्ञापन के तरीके भी ऐसे हो गए हैं कि किसी कोचिंग सेंटर में दाखिला लेना बड़ी सफलता मानी जाती है। कोचिंग सेंटरों की भारी भरकम फीस ने समाज में असमानता की भावना पैदा कर दी है। विज्ञापन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस चलन का सबसे बुरा प्रभाव विद्यार्थियों पर मानसिकता पर पड़ रहा है। कोचिंग सेंटरों में शिक्षा के ज्यादा दबाव के कारण छात्र आत्महत्या भी कर चुके हैं। कोटा शहर इसका उदाहरण है जहां एक माह में करीब दो दर्जन छात्रों ने आत्महत्या कर ली।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में कोचिंग सेंटर शिक्षा और रोजगार के बीच संबंध को बढ़ावा देकर शिक्षा को धुंधला कर रहे हैं। शिक्षा का संबंध रोजगार से तो है लेकिन यह व्यवसाय नहीं। शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास करना है। शिक्षा मनुष्य को मानवता का पाठ पढ़ाती है। यदि कोई आईएएस या आईपीएस नहीं बन सका तो उसका जीवन लक्ष्यहीन नहीं हो जाता। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भी कोचिंग सेंटरों के जाल के प्रति सतर्क रहना होगा। Coaching Centers</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajasthan Election 2023: ”महिलाओं को 500 रुपए में सिलेंडर व हर साल 10 हजार मिलेंगे”" href="http://10.0.0.122:1245/rajasthan-chief-minister-ashok-gehlot-promised/">Rajasthan Election 2023: ”महिलाओं को 500 रुपए में सिलेंडर व हर साल 10 हजार मिलेंगे”</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Oct 2023 10:20:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>India Sends Aid To Palestine: पीड़ित फिलिस्तीनी लोगों के लिए राहत सामग्री भेजना भारत का सही फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[India Sends Aid To Palestine: भारत सरकार ने हमास-इजरायल युद्ध के दौरान पीड़ित फिलिस्तीनी लोगों के लिए 38 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। गाजा में इजरायली हमले से फिलिस्तीनी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार का यह फैसला मानव हितैषी सिद्धांत पर आधारित है। भले ही युद्ध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indias-right-decision-to-send-relief-material-to-the-suffering-palestinian-people/article-54062"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/india-rahat-samgri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India Sends Aid To Palestine: भारत सरकार ने हमास-इजरायल युद्ध के दौरान पीड़ित फिलिस्तीनी लोगों के लिए 38 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। गाजा में इजरायली हमले से फिलिस्तीनी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार का यह फैसला मानव हितैषी सिद्धांत पर आधारित है। भले ही युद्ध के पहले दिन भारत सरकार ने इजराइल का समर्थन किया था, लेकिन मानवता की दृष्टि से फिलिस्तीनी लोगों का कल्याण उचित व अनिवार्य है। वास्तव में, हमास और फिलिस्तीनियों को एक रूप में नहीं देखा जा सकता है। Israel Hamas War Update</p>
<p style="text-align:justify;">हमास की कार्रवाई के लिए आम फिलिस्तिनीयों नागरिकों को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता। युद्ध के दौरान आम लोग किसी के दुश्मन नहीं होते, युद्ध सशस्त्र दलों का होता है। आमजन के पास हथियार नहीं होते और लोग किसी पर हमला नहीं करते, यहां तक ​​कि एक बहादुर सैनिक भी किसी निर्दोष निहत्थे पर हमला नहीं करता। जहां तक भारतीय संस्कृति का संबंध है, शत्रु सेना के असहाय घायलों की सहायता करने की परंपरा रही है। यह अच्छा है कि भारत ने अपनी विरासत बरकरार रखी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने भी इस बात का समर्थन किया कि इजराइल पर हमास के हमलों के लिए फिलीस्तीनियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। फिर यदि गाजावासी निर्दोष हैं तो उनकी सहायता करना सभी का मानवीय कर्तव्य है। पीड़ित फिलिस्तीनियों की मदद के लिए आगे आना जरूरी है। भारत सरकार ने अपनी छवि मजबूत कर ली है कि आतंकवाद का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही भारत ने फिलिस्तिीन व इजराइल के प्रति अपनी निष्पक्षता वाली पुरानी कूटनीति को दोहराया है। भारत के इजरायल और फिलिस्तीन के साथ लंबे समय से समान संबंध रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका से निकटता के बावजूद, भारत ने फिलिस्तीन के साथ अपने संबंध बनाए रखे। हमास-इजराइल युद्ध की शुरूआत हमास के हमलों से हुई थी, इसलिए भारत का इजराइल को समर्थन उचित था, जिससे एक बार संदेश गया कि भारत फिलिस्तीन से हट गया है लेकिन भारत सरकार ने कूटनीतिक अवसर का लाभ उठाकर फिलिस्तीनियों की मदद करके अपनी तटस्थता साबित कर दी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Naye baal kaise ugaye: बाल झड़ते-झड़ते बन गया है खालिस्तान तो… यह तरीका करें इस्तेमाल, तेजी से उगने लगेंगे बाल!" href="http://10.0.0.122:1245/naye-baal-kaise-ugaye-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%9D%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%9D%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9/">Naye baal kaise ugaye: बाल झड़ते-झड़ते बन गया है खालिस्तान तो… यह तरीका करें इस्तेमाल, तेजी से उ…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2023 11:10:03 +0530</pubDate>
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                <title>युद्ध विश्व के लिए दुर्भाग्य, परिणाम हो सकते हैं विनाशकारी</title>
                                    <description><![CDATA[Israel Hamas War Impact: युद्ध का परिणाम विकास नहीं विनाश होता है। युद्ध का नतीजा कभी लाभ से नहीं होता युद्ध हमेशा हानि ही देता है। हानि भी ऐसी जिसकी कभी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। क्या किसी इन्सानी जिंदगी की क्षतिपूर्ति हो सकती है? क्या किसी को दोबारा जीवन दिया जा सकता है? कभी नहीं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/war-is-a-misfortune-for-the-world-the-consequences-can-be-disastrous/article-53703"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/israel-targets-hamas-targets-in-gaza.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Israel Hamas War Impact: युद्ध का परिणाम विकास नहीं विनाश होता है। युद्ध का नतीजा कभी लाभ से नहीं होता युद्ध हमेशा हानि ही देता है। हानि भी ऐसी जिसकी कभी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। क्या किसी इन्सानी जिंदगी की क्षतिपूर्ति हो सकती है? क्या किसी को दोबारा जीवन दिया जा सकता है? कभी नहीं। युद्ध का परिणाम हमेशा विनाश ही होता है। विज्ञान ने जितनी तरक्की की है उसका समस्त उपयोग मानव कल्याण हेतु न होकर उसका काफी उपयोग विनाश के लिए हो रहा है। जो चिंता का विषय है। विश्व शांति व खुशहाल समाज की रचना दुनिया की जरूरत है, लेकिन अहंकार व साम्राज्यवाद की होड़ ने इस जरूरत पर कुठाराघात किया है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं जाति-पाति के नाम पर कहीं धर्म के नाम पर दंगे फसाद व युद्ध हो रहे हैं। जबकि सभी धर्मों में प्रेम व अहिंसा की शिक्षा दी गई है। फिर अगर धर्म को मानते हो तो धर्म के नाम पर झगड़े क्यों? असल में ये सब झगड़े धर्मों के नाम पर राजनीतिक आकाओं की ही देन हैं जो अपनी स्वार्थसिद्धी के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। दुनिया को युद्ध की आग में धकेलने वालों से पूछना होगा कि युद्ध या आतंक से आखिर क्या हासिल होगा जब दुनिया ही नहीं रहेगी तो फिर क्या मुर्दों पर राज करोगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक आकाओं से यह पूछना होगा कि आखिर युद्ध एवम् आतंक की मानसिकता से किसका भला हो रहा है? निर्दोषों की हत्याओं से किसका भला होगा? मासूम बच्चों व महिलाओं से अत्याचार क्या किसी को सुकून दे सकता है? इस प्रकार के कृत्य क्या विश्व शांति के लिए सही है। दो पक्षों की लड़ाई में किसी तीसरे द्वारा आग में घी डालना क्या विनाश को बुलावा देना नहीं? आज यही हो रहा है। इजराइल-हमास युद्ध में अन्य देश कोई शांति प्रयास करने की बजाए अन्दर खाते एक पक्ष के साथ खड़े होकर युद्ध की विभिषिका को बढ़ा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बेघर होते लोग, बिलखते बच्चे, करहाती महिलाएं क्या किसी सभ्य समाज का अंग हो सकता है? लेकिन आज ऐसा हो रहा हैं। आधुनिकता के इस युग में हम असभ्य होते जा रहे हैं। युद्ध से किसी एक देश की जीत हो सकती है लेकिन युद्ध के परिणाम मानवता के लिए घातक ही होंगे जिसकी कभी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। अतीत में हुए दो विश्वयुद्धों से अगर अब तक भी सीख नहीं ले सके तो यह विश्व के लिए दुर्भाग्य है। Israel Hamas War Impact</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Earthquake: फिर आए भूकंप के झटके, सहमे लोग" href="http://10.0.0.122:1245/earthquake-shocks-again-people-scared/">Earthquake: फिर आए भूकंप के झटके, सहमे लोग</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/war-is-a-misfortune-for-the-world-the-consequences-can-be-disastrous/article-53703</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Oct 2023 14:26:12 +0530</pubDate>
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                <title>Deaddiction: ईमानदारी से नशा मुक्ति  के प्रयास होने चाहियें</title>
                                    <description><![CDATA[Deaddiction: जहाँ पंजाब नशे की दलदल से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं नशा तस्करी (drug trafficking) में राजनेताओं के नाम आने गंभीर चिंता का विषय हैं। पंजाब में हर साल अरबों रुपए की ड्रग बरामद हो रही है। पंजाब में प्रतिवर्ष 7500 करोड़ रुपए का ड्रग्स का कारोबार होने का अनुमान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-should-be-honest-efforts-for-de-addiction/article-53057"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/deaddiction.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Deaddiction: जहाँ पंजाब नशे की दलदल से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं नशा तस्करी (drug trafficking) में राजनेताओं के नाम आने गंभीर चिंता का विषय हैं। पंजाब में हर साल अरबों रुपए की ड्रग बरामद हो रही है। पंजाब में प्रतिवर्ष 7500 करोड़ रुपए का ड्रग्स का कारोबार होने का अनुमान है। नशे के कारण गांव के गांव बर्बाद हो रहे हैं। कई गांव तो अनाथों व विधवाओं के गांव के नाम से जाने जाते है। Deaddiction</p>
<p style="text-align:justify;">‘रोड़मैप फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल आॅफ सब्सटेंस एव्यूज इन पंजाब’ नामक इस पुस्तक में पंजाब की 15.4 फीसदी आबादी को नशे की गिरफ्त में दिखाया है जो बहुत ही चिंता का विषय है। नशे की रोकथाम के लिए हर राजनीतिक दल आवाज उठाता रहा है और रोकथाम के लिए प्रयास करता रहा है लेकिन इन सब के बावजूद स्थिति जस की तस है। क्योंकि ये प्रयास दिखावा मात्र ही होते हैं। पंजाब के बड़े-बड़े नेताओं के नाम ड्रग्स के काले धन्धे में आए है। कई बड़े पुलिस अधिकारी भी इस ड्रग्स के कारोबार में संलिप्तता के केस झेल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब बड़े व शक्तिशाली लोगों का नशे के कारोबार में हाथ हो तो फिर निष्पक्ष जांच करना व करवाना बड़ा मुश्किल काम होता है। इसी वजह से बड़ी मछलियां बच निकलती है और जनता घुन की तरह पिसती रहती है। हाल ही में पंजाब कांग्रेस के नेता सुखपाल सिंह खैहरा की भी ड्रग्स तस्करी में गिरफ्तारी हुई है। पंजाब कांग्रेस के नेता इसे आम आदमी पार्टी पर बदले की कार्रवाई का आरोप लगा रहे है। जबकि आम आदमी पार्टी इन आरोपों को सिरे से नकार रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका कहना है कि सुखपाल सिंह खैहरा को एसआईटी की जांच में नशा तस्करी में संलिप्त पाया गया है। इसीलिए खैहरा की गिरफ्तारी हुई है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि उनकी सरकार नशा खोरी व ड्रग्स तस्करी से कोई समझौता नहीं करेगी चाहे इसमें कोई भी क्यों न हो, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। drug trafficking</p>
<p style="text-align:justify;">घरों के घर बर्बाद करने वाले नशे रूपी इस दानव को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने ही चाहिए, लेकिन पूरी ईमानदारी के साथ ताकि कोई निर्दोष भी न फंसे और कोई गुनाहगार भी न बच सके। राजनेताओं को अपने पराए का भेदभाव किए बिना एकजुटता से, गंभीरता और ईमानदारी से प्रयास करने होंगे तभी समाज इस कोढ़ से मुक्त हो सकता है। Deaddiction</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="…जब भेड़ों ने चढ़ा ली भांग तो फिर ऐसा हुआ असर कि…" href="http://10.0.0.122:1245/when-sheep-ate-hemp-this-was-the-effect/">…जब भेड़ों ने चढ़ा ली भांग तो फिर ऐसा हुआ असर कि…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 30 Sep 2023 09:39:33 +0530</pubDate>
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                <title>Economy: अर्थव्यवस्था-गिरती घरेलू बचत एवं बढ़ती महंगाई से त्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[Economy: आगामी लोकसभा (Lok Sabha) एवं विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के मध्यनजर महंगाई का लगातार बढ़ते रहना चिंता का विषय है। घरेलू बचत, महंगाई, बढ़ता व्यक्तिगत कर्ज, बढ़ते व्यक्तिगत खर्चे आदि को लेकर निम्न एवं मध्यम वर्ग परेशान है। इस परेशानी के समाधान की बजाय सत्ता एवं विपक्ष दल एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/economy-suffered-by-falling-domestic-savings-and-rising-inflation/article-52995"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/mehngai.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Economy: आगामी लोकसभा (Lok Sabha) एवं विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के मध्यनजर महंगाई का लगातार बढ़ते रहना चिंता का विषय है। घरेलू बचत, महंगाई, बढ़ता व्यक्तिगत कर्ज, बढ़ते व्यक्तिगत खर्चे आदि को लेकर निम्न एवं मध्यम वर्ग परेशान है। इस परेशानी के समाधान की बजाय सत्ता एवं विपक्ष दल एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मासिक बुलेटिन में माना है कि खाद्य मुद्रास्फीति को काबू करना कठिन साबित हो रहा है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की घरेलू बचत दर वित्त वर्ष 2022-23 में पांच दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गई। 18 सितंबर को जारी इन आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में देश की शुद्ध घरेलू बचत पिछले साल की तुलना में 19 फीसदी कम रही है। 2021-22 में देश की शुद्ध घरेलू बचत जीडीपी के 7.2 फीसदी पर थी जो इस साल और घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 5 दशक के निचले स्तर 5.1 प्रतिशत पर आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनेक मोर्चों पर भारत की तस्वीर आशा का संचार कर रही है, लेकिन आर्थिक मोर्चें पर चिन्ता का सबब लगातार बना हुआ है, हालांकि समूची दुनिया में आर्थिक असंतुलन बना हुआ है, भारत ने फिर भी खुद को काफी संभाले हुए हैं। किसी देश की अर्थव्यवस्था इस पैमाने पर भी आंकी जाती है कि उसकी घरेलू बचत, प्रति व्यक्ति आय और क्रयशक्ति की स्थिति क्या है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत में करीब पचपन फीसद की गिरावट आई और यह सकल घरेलू उत्पाद के 5.1 फीसद पर पहुंच गई। वित्त मंत्रालय ने घरेलू बचत में गिरावट पर सफाई देते हुए कहा है कि लोग अब आवास और वाहन जैसी भौतिक संपत्तियों में अधिक निवेश कर रहे है। इसका असर घरेलू बचत पर पड़ा है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि संकट जैसी कोई बात नहीं है। सरकार ने यह भी कहा है कि पिछले दो साल में परिवारों को दिए गए खुदरा ऋण का 55 फीसद आवास, शिक्षा और वाहन पर खर्च किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवारों के स्तर पर वित्त वर्ष 2020-21 में 22.8 लाख करोड़ की शुद्ध संपत्ति जोड़ी गई थी। 2021-22 में लगभग सत्रह लाख करोड़ और वित्तवर्ष 2022-23 में 13.8 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्तियां बढ़ी हैं। इसका मतलब है कि लोगों ने एक साल पहले और उससे पहले के साल की तुलना में इस साल कम वित्तीय संपत्तियां जोड़ी हैं। सरकार के अनुसार ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वे अब कर्ज लेकर घर और वाहन जैसी भौतिक संपत्तियां खरीद रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो साल में आवास और वाहन ऋण में दोहरे अंक में वृद्धि हुई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महामारी के बाद से लोग काफी सचेत हुए हैं। वे जोखिम वाले निवेश से बच रहे हैं। दूसरी बात बचत खातों पर ब्याज पर दर बहुत आकर्षक नहीं हैं। भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित बी-20 बैठक में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा भी कि ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई नियंत्रित करने की कीमत आर्थिक विकास को चुकानी भारी पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार चाहे जो तर्क दे पर घरेलू बचत गिरना कोई शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। घरेलू बचत सामान्य सरकारी वित्त और गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए कोष जुटाने का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रभावी जरिया होती है। देश की कुल बचत में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने वाली बचत का लगातार गिरना निम्न और मध्यम वर्ग ही नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार महंगाई का बढ़ना भी न केवल आमजन के लिये बल्कि सरकार के लिये चिन्ता का कारण है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुमानों से पता चलता है कि जुलाई (7.4 प्रतिशत) की तुलना में अगस्त में यह घटकर 6.8 फीसदी हो गई है। यहां तक कि खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी जुलाई के उच्चतम स्तर पर 11.5 फीसदी से घटकर अगस्त में 9.94 प्रतिशत हो गई। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">इन संकेतों से भले ही राहत की सांसें मिली हो, बावजूद इसके यह अब भी ज्यादा है। यह गिरावट मुख्यत: सब्जियों की कीमतों में कमी के कारण आई है, जो जुलाई की 37.4 फीसदी की तुलना में अगस्त में 26.1 प्रतिशत थी। हालांकि अनाज और दालों में महंगाई दोहरे अंकों में बनी हुई है, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर गिरावट की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही। आरबीआई ने स्वीकारा है कि खाद्य मुद्रास्फीति को काबू करना कठिन साबित हो रहा है। मगर अधिकारियों को महंगाई कम करने का महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट है कि दबाव और प्रतिबंधों के माध्यम से महंगाई को काबू में करने के प्रयास काफी हद तक नाकाम रहे हैं। घरेलू आपूर्ति में कमी के कारण कई खाद्य वस्तुओं, विशेषकर अनाज व दालों में महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। गेहूं का उत्पादन गरमी और बेमौसम बारिश के कारण प्रभावित है। यही कारण है कि मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया। चावल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। दालों का भी यही हाल है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई अक्सर सत्तापक्ष के लिये राजनीतिक चुनौती बनती रही है, चुनावों में हार-जीत को बहुत गहराई से प्रभावित करने में महंगाई आधार बनती रही है। महंगाई कम करने के लिए हमें वैकल्पिक रास्ते तलाशने होंगे, जो आर्थिक विकास या किसानों के हितों को प्रभावित किए बिना उपभोक्ताओं की रक्षा करे। विकृत एवं असंतुलित बाजार व्यवस्था ने भी अनेक आर्थिक विसंगतियों को जन्म दिया है। एक आदर्श व्यवस्था का चिन्तन ही वर्तमान की आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान सरकार ने गरीबी दूर करने में सफलता पाई है, लेकिन उसकी सोच अमीरी बढ़ाने की भी रही है। छोटे उद्योग, सबके पास अपना काम, हर व्यक्ति के लिये रोजगार की सुनिश्चितता, कोई भी इतना बड़ा न हो कि जब चाहे अपने से निर्बल को दबा सके। एक आदमी के शक्तिशाली होने का मतलब है, कमजोरों पर निरन्तर मंडराता खतरा। एक संतुलन बने। सबसे बड़ी बात है मानवीय अस्तित्व और मानवीय स्वतंत्रता की। इस पर आंच न आये और आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो जाये, ऐसी अर्थव्यवस्था की आज परिकल्पना आवश्यक है। तभी बढ़ती महंगाई, आय असंतुलन एवं घटती बचत पर काबू पाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आय असमानता, महंगाई, बेरोजगारी एक कल्याणकारी राज्य की सबसे बड़ी विडंबना है। यह जब गंभीर रूप से उच्चतम स्तर पर पहुंच जाती है तो उदार आर्थिक सुधारों के लिए सार्वजनिक समर्थन कम हो जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में नव उदारवादी नीतियों से आर्थिक वृद्धि दर को जरूर पंख लगे हैं, लेकिन इससे अमीरों की जितनी अमीरी बढ़ी है, उस दर से गरीबों की गरीबी दूर नहीं हुई है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">परिणामस्वरूप आर्थिक असमानता की खाई साल दर साल चौड़ी होती जा रही है। इसलिए हमारे नीति निर्माताओं तथा योजनाकारों को इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि सर्व समावेशी विकास के लक्ष्य को कैसे हासिल करें? ताकि हाशिये पर छूटे हुए वंचितों, पिछड़ों तथा शोषितों को विकास की मुख्यधारा में लाया जा सके। वर्तमान में आर्थिक असमानता से उबरने का सबसे बेहतर उपाय यही होगा कि वंचित वर्ग को अच्छी शिक्षा, अच्छा रोजगार उपलब्ध कराते हुए सुदूरवर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए सरकार को अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर कहीं ज्यादा खर्च करना होगा। स्वास्थ्य और शिक्षा पर कहीं ज्यादा राशि आवंटित करनी होगी। अभी इन मदों पर हमारा देश बहुत ही कम खर्च करता है। भारत में वह क्षमता है कि वह नागरिकों को एक अधिकारयुक्त जीवन देने के साथ ही समाज में व्याप्त असमानता को दूर कर सकता है। Economy</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग, लेखक, पत्रकार, स्तंभकार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="New Rules From 1st October: बदल रहा है महीना, हो रहे हैं बदलाव एक अक्तूबर से जिंदगी में आएगा नया पड़ाव" href="http://10.0.0.122:1245/the-month-is-changing-changes-are-taking-place-a-new-phase-will-come-in-life-from-october-1st/">New Rules From 1st October: बदल रहा है महीना, हो रहे हैं बदलाव एक अक्तूबर से जिंदगी में आएगा नया पड़ा…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 18:17:20 +0530</pubDate>
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                <title>Nepal-China: नेपाल में चीनी हस्तक्षेप</title>
                                    <description><![CDATA[Nepal-China: चीन ने नेपाल के साथ 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी पर जोर दिया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड चीन के दौरे पर हैं। चीन नेपाल को बहुत उदारतापूर्वक प्रस्ताव दे रहा है। इसे जी-20 शिखर सम्मेलन की चर्चा की पृष्ठभूमि में समझा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chinese-intervention-in-nepal/article-52936"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/nepal-china.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nepal-China: चीन ने नेपाल के साथ 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी पर जोर दिया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड चीन के दौरे पर हैं। चीन नेपाल को बहुत उदारतापूर्वक प्रस्ताव दे रहा है। इसे जी-20 शिखर सम्मेलन की चर्चा की पृष्ठभूमि में समझा जा सकता है। जी-20 शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हिस्सा न लेकर अपने प्रतिनिधि को भेजा। वास्तव में जी-20 सम्मेलन के सफल आयोजन से भारत का कद बढ़ा है क्योंकि भारत संयुक्त घोषणा पत्र जारी करने में सफल रहा। Nepal-China</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह भारत की सिफारिश पर अफ्रीकी संघ को भी जी-20 में शामिल किया गया। भारत के बढ़ते प्रभाव ने कई पड़ोसी देशों को परेशानी में डाल दिया है। भारत के साथ चीन के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। कुछ मुद्दों पर चीन का रवैया भारत विरोधी बना हुआ है। चीन अरुणाचल और सिक्किम पर दावा करता रहा है। लद्दाख में चीनी सेना के हमले में 20 भारतीय जवान भी शहीद हो गए। कई कमांडर स्तर की बैठकों के बावजूद भी मामला पूरी तरह से सुलझ नहीं सका है। चीन हमेशा बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में अपनी पैठ मजबूत कर भारत को घेरने की कोशिश करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने भी चीन के प्रभाव को रोकने के लिए नेपाल सहित अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। नेपाल भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण देश है। यह भारत की कूटनीतिक सफलता है कि तमाम विवादों के बावजूद भारत ने नेपाल के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं। नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड को चीन समर्थक और कामरेड विचारधारा वाला नेता माना जाता था, लेकिन प्रचंड ने इस वर्ष मई-जून में भारत का दौरा कर यह बता दिया था कि नेपाल चीन का पिछलग्गू नहीं है। China-Nepal</p>
<p style="text-align:justify;">प्रचंड की भारत यात्रा जहां भारत के लिए सकारात्मक रही, वहीं चीन ने अपनी पैठ मजबूत करने के लिए नेपाल के साथ 12 नए समझौते किए। इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन नेपाल में भारत के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। ताजा घटनाक्रम भारत के लिए एक नई कूटनीतिक तैयारी की मांग करता है। दरअसल, भारत-नेपाल संबंध केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक भी हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से नेपाल भारत के अधिक निकट है। भारत सरकार को इस पड़ोसी देश के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए कदम उठाने चाहिए। Nepal-China</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Iraq Fire Accident: खुशियों के बीच मौत का मातम, 114 लोग जलकर राख, लोगों में मची दहशत" href="http://10.0.0.122:1245/iraq-fire-accident/">Iraq Fire Accident: खुशियों के बीच मौत का मातम, 114 लोग जलकर राख, लोगों में मची दहशत</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 14:33:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>G20 Summit: जी-20 की मेजबानी और भारत की बढ़ती अहमियत</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: नई दिल्ली में 9 से 10 सितम्बर को जी-20 सम्मेलन हो रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सम्मेलन की मेजबानी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ रही लोकप्रियता का संकेत है। बेशक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति वलादीमीर पुतिन द्वारा इस सम्मेलन में न पहुंचने संबंधी चर्चा ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/g-20-hosting-and-indias-growing-importance/article-52066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: नई दिल्ली में 9 से 10 सितम्बर को जी-20 सम्मेलन हो रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सम्मेलन की मेजबानी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ रही लोकप्रियता का संकेत है। बेशक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति वलादीमीर पुतिन द्वारा इस सम्मेलन में न पहुंचने संबंधी चर्चा ने कई शंकाए खड़ी कर दी थी परंतु अब चीन द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि वह भारत की मेजबानी का समर्थन करता है। जिनपिंग की जगह वहां के प्रधानमंत्री ली कियांग भाग ले रहे हैं और इसी तरह रुस के प्रतिनिधि भी आ रहे हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">चर्चा यह रही है कि शी जिनपिंग ज्यादातर उन सम्मेलनों में ही हिस्सा लेते हैं जहां वह हॉवी रहे सकें और अपना एंजेडा सेट कर सकें। अगर इस चर्चा को भी सही मान लिया जाए तो यह भी भारत के लिए प्राप्ति वाली बात है कि जी-20 जैसे संगठन में भारत का इतना स्थान बन गया है कि भारत विरोधी एंजेडे के लिए कोई और देश अपनी कामयाबी की उम्मीद नहीं रखता। रुस के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति के अपने अर्थ हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर भारत को विकसित पश्चिम देशों के साथ मिलकर चलने का मौका मिलेगा। चीन और रुस के राष्ट्रपति के ना आने के कारण कुछ भी हो परंतु भारत को मेजबानी मिलने का समर्थन मिलना इस बात का सबूत है कि भारत की सिद्धांतक पहुंच और समर्था को हर कोई स्वीकार कर रहा है। बेशक यह सम्मेलन सीधे तौर पर भारत-चीन संबंधों को रेखांकित करने वाला मंच नहीं है। फिर भी इस बात की उम्मीद करनी जरुर बनती है कि चीन के किसी नेता के आने या ना आने से भारत को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन की अनुपस्थिति की वजह यूक्रेन के साथ रुस का युद्ध भी माना जा रहा है। ऐसे हालातों में रुस की भारत से दूरी का कोई मुद्दा नहीं रह जाता है। सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मन सहित कई ताकतवार देश भाग ले रहे हैं। इन हालातों में यह सम्मेलन भारत के लिए काफी उपलब्धियों भरा रहने के आसार हैं। यह भी उम्मीद करनी चाहिए कि भारत द्वारा समेलन के माध्यम से विश्व को नई दिशा देने का प्रयत्न करेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Delhi G20 Summit: 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने में भारत और आसियान में सहयोग जरूरी: पीएम" href="http://10.0.0.122:1245/delhi-g20-summit/">Delhi G20 Summit: 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने में भारत और आसियान में सहयोग जरूरी: पीएम</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 13:28:41 +0530</pubDate>
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