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                <title>Village Nuhianwali - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Sirsa : कभी लगते थे मेले, आज खुद अकेले!</title>
                                    <description><![CDATA[कभी धर्माथी सेठ नानक चंद ने करवाया था कुएं का निर्माण गांव के लोग करीब 30 किलोमीटर दूर रानियां से ऊंटों पर लेकर आते थे पीने का पानी ओढां, (राजू/सच कहूँ )। एक वो समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की (Sirsa News) बेहद किल्लत होती थी। जिसके चलते कुएं, बावड़ी व डिग्गियों सहित अन्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/philanthropist-seth-nanak-chand-got-the-well-constructed/article-47768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/odhan-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कभी धर्माथी सेठ नानक चंद ने करवाया था कुएं का निर्माण</h3>
<ul>
<li><strong>गांव के लोग करीब 30 किलोमीटर दूर रानियां से ऊंटों पर लेकर आते थे पीने का पानी </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां, (राजू/सच कहूँ )।</strong> एक वो समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की (Sirsa News) बेहद किल्लत होती थी। जिसके चलते कुएं, बावड़ी व डिग्गियों सहित अन्य जलस्त्रोतों का निर्माण करवाया जाता था। सांझ-सवेरे इन जलस्त्रोतों पर अच्छी-खासी भीड़ उमड़ती थी और हंसी-ठिठोली का भी खूब दौर चलता था। लेकिन समय के साथ ही सब-कुछ लुप्त हो गया। आज खंडहर के रूप में खड़े ये जलस्त्रोत इतिहास की याद ताजा करवाते हैं, मानों ये कह रहे हैं कि कभी हमारा भी समय था।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="आकाशीय गर्मी से प्रलय का खतरा ज्यादा" href="http://10.0.0.122:1245/there-is-a-high-ri-of-destruction-due-to-celestial-heat/">आकाशीय गर्मी से प्रलय का खतरा ज्यादा</a></p>
<p style="text-align:justify;">पाठकों को आज एक ऐसे एतिहासिक धरोहर से रू-ब-रू करवा रहे हैं जिस पर (Sirsa News) कभी सुबह-शाम मेले लगा करते थे। गांव नुहियांवाली में गांव के बाहरी छोर पर जोहड़ के किनारे खंडहर का रूप धारण किए खड़ा कुआं अपने आप में करीब 216 वर्ष पुराना इतिहास समेटे हुए है। गांव की युवा पीढ़ी भले ही इसके इतिहास से अनभिज्ञ है, लेकिन गांव के बडेÞ बुजुर्ग आज भी इसके इतिहास के बारे में चर्चा करते हैं। बुजुर्गांे के अनुसार गांव बसने के उपरान्त तकरीबन 10-12 साल बाद गांव के एक धर्माथी सेठ नानक चंद ने इसका निर्माण करवाया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गांव में यह इकलौता जलस्त्रोत था कुआं | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव के बड़े बुजुर्गांे के अनुसार गांव बसने के बाद पेयजल किल्लत आड़े आई। ऐसे में गांव के लोग करीब 30 किलोमीटर दूर का सफर तय कर रानियां से ऊंटों पर पानी लाया करते थे। जिसके बाद गांव के धर्माथी सेठ नानक चंद ने धनराशि खर्च की तथा ग्रामीणों ने उसमें भरपूर सहयोग किया। बताया जाता है कि कुएं का जल पीने में मीठा होने के कारण आस-पड़ोस के गांवों के लोग भी यहां से ऊंटों पर मटके लादकर पानी भरने आया करते थे। कुएं से पानी निकालने के लिए बैलों व ऊंटों को जोड़कर चमड़े का बारा प्रयोग में लिया जाता था। बारे से पानी निकालकर बाहर बनाई गई दो बड़ी होद में डाला जाता था। एक बारा में तकरीबन 10 मटके पानी निकलता था। जिसके बाद लोग होद में लगी टूंटियों से पानी भरते।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव के कुछ बुजुर्गाें की मानें तो एक बार यहां गायों के झुंड को पानी नहीं पिलाने दिया गया, जिसके चलते इसका पानी तबदील हो गया। गांव में जलस्त्रोत बनने के बाद लोग धीरे-धीरे कुएं से किनारा करने लगे। इस समय भले ही पेयजल के अनेक संसाधन हैं लेकिन ये ऐतिहासिक कुआं खंडहर अवस्था में खड़ा आज भी अपनी याद ताजा करवा रहा है। गांव में कुछ अप्रिय घटनाओं के बाद इस कुएं को ऊपर से लोहे से सरिये लगाकर बंद कर दिया गया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 12:36:49 +0530</pubDate>
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