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                <title>watermelon - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>watermelon RSS Feed</description>
                
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                <title>Watermelon Farming : तरबूज की मिठास ने खारियां के किसान कृष्ण कालड़ा को बनाया लखपति</title>
                                    <description><![CDATA[किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि फसल की देखरेख, अच्छी पैदावार लेने के लिए उसने पड़ोसी राज्य के जिला फाजिल्कां से बलवंत सिंह व सुनील कुमार को 20 प्रतिशत बटाई पर रखा है, जिन्होंने कृषि विभाग रानियां से एचडीओ प्रोमिला के मार्गदर्शन में तरबूज (Watermelon Farming) की अच्छी पैदावार व गुणवता के लिए समय-समय पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/beneficial-farming-of-watermelon/article-57608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/watermelon-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि फसल की देखरेख, अच्छी पैदावार लेने के लिए उसने पड़ोसी राज्य के जिला फाजिल्कां से बलवंत सिंह व सुनील कुमार को 20 प्रतिशत बटाई पर रखा है, जिन्होंने कृषि विभाग रानियां से एचडीओ प्रोमिला के मार्गदर्शन में तरबूज (Watermelon Farming) की अच्छी पैदावार व गुणवता के लिए समय-समय पर जैविक खाद-उर्वरक, पानी, स्प्रै, निराई-गुड़ाई का कार्य किया। </strong></em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुनील कुमार खारियां। </strong>ग्रीष्म ऋतु के समय में बाजार में तरबूज की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है। ऐसे में गर्मी के मौसम में किसानों के लिए तरबूज की खेती करना काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। जो कम लागत में किसान को कुछ ही समय में लखपति बना सकती है। सरसा जिले के गांव खारियां निवासी कृष्ण कुमार कालड़ा ऐसे किसान हैं जो अल्प समय में तरबूज की खेती से लखपति बन गए।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि कृष्ण कुमार करीब दो वर्ष पूर्व तक एक बिजनेसमैन थे, जो गांव में खुद के पैट्रोल पंप का संचालन करते थे। खुद की जमीन जायदाद के चलते कृष्ण कुमार ने पैट्रोल पंप बेच कर खेती करने की मन में ठानी, लेकिन पिछले वर्षों में कपास में आई गुलाबी सुड़ी ने लाखों रुपये का घाटा पहुंचा दिया। इसके बाद कृष्ण कुमार ने कपास की खेती छोड़कर कुछ अलग करने का मन बना लिया और मात्र छह महीने में तरबूज की खेती से आठ लाख की आमदनी हासिल कर ली।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे आया तरबूज की खेती का आईडिया || Watermelon Farming</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कृष्ण कुमार बताते हैं कि उसके पास कृषि योग्य भूमी काफी है, जिसमें 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी पर भूमिहीन किसानों से खेती का कार्य करवाता है। पिछले साल नरमा व कपास की फसल में आई गुलाबी सुंडी से उसे लाखों का नुकसान उठाना पड़ा। जिससे समाधान के लिए कुछ किसानों एकत्रित होकर एक सामूहिक बैठक में खेती के तरीकों, खर्चों, नए प्रयोगों व नई खेती पर मंथन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी समय उन्हें क्षेत्र के तापमान, मिट्टी, पानी, बाजार की मांग व मौसम को ध्यान में रखते हुए तरबूज की खेती का आईडिया ध्यान में आया। जिसके बाद उसने तरबूज की खेती पर रिसर्च किया और कृषि विभाग रानियां से संपर्क कर खेती के तरीके, लगाने का उचित समय, खर्चा, आमदनी, मेहनत व मार्केट का विश्लेषण कर दो एकड़ में तरबूज की खेती करने का मन बनाया। कृष्ण कुमार के अनुसार, उसने मात्र दो लाख रूपए का रिस्क उठाकर आठ लाख रूपये की आमदनी हासिल की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुछ इस तरह से तैयार होता है तरबूज  </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कृष्ण कुमार ने बताया कि तरबूज की खेती के लिए दोमट मिट्टी, नहर का पानी तथा गर्म मौसम की जरूरत होती है। उसने दो एकड़ में तरबूज की अच्छी पैदावार उठाने के लिए उन्नत किस्म का बीज चुना। दो एकड़ के लिए साढ़े 14 हजार रूपए खर्च कर 12,000 पौधों के बीजों को 40 दिन की क्लटीवेशन के लिए मांगेआना फार्म में रखा। दिसम्बर महीने के प्रथम सप्ताह में भूमि को सिंचाई व निराई-गुड़ाई करके तैयार किया और 4-4 फिट की मेड बनाकर उस पर प्लास्टिक की मलचिंग तथा पौधों को सर्दी से बचाने के लिए करीब 12 इंच ऊंची लॉ टनल बनाई गई, जिस पर 30 हजार रूपए खर्च आया। दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह में पौधों की रोपाई करने के बाद ड्रिप के माध्यम से हर दस दिन बाद पानी व जरूरत अनुसार लिक्विड खुराक देने की प्रक्रिया जारी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">फरवरी के अन्त में बेलों पर फूल व फल की प्रक्रिया शुरू हो गई, जो अगले 20 दिनों में शहद की मिठास से भरपूर, लाल रंग तथा वजन में लगभग 5 से 7 किलोग्राम के फल तैयार होने लगे। किसान ने बताया कि दो एकड़ में लगे तरबूज के इस खेत तैयार करने से लेकर उत्पादन तक जिसमें लेबर, किराया व मंडी की दामी भी शामिल है, करीब 2 लाख रूपए खर्च आया। उसने बताया कि दो एकड़ में लगभग 1400 क्विंटल तरबूज की पैदावार हुई जिससे मार्केट रेट के अनुसार छह महीने में लगभग 8 लाख की आमदनी हुई। हालांकि गांव के नजदीक में बड़ा बाजार या मंडी ना होने के चलते तरबूज की सप्लाई या बिक्री करना बड़ा मुश्किल है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 May 2024 10:03:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Watermelon: गर्मी की दस्तक के साथ बढ़ी तरबूज की बिक्री</title>
                                    <description><![CDATA[Watermelon Health Benefits: हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। गर्मी की दस्तक के साथ ही मौसमी फलों का बाजार में आना शुरू हो गया है। सीकर के तरबूज शहर में पहुंच गए हैं। इससे शहर में जगह-जगह तरबूज की रेहड़ी व स्टालें नजर आने लगी हैं। वहीं कुछ ही समय में पंजाब से भी तरबूज की आवक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/watermelon-sales-increased-with-the-arrival-of-summer/article-57448"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/watermelon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Watermelon Health Benefits: हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गर्मी की दस्तक के साथ ही मौसमी फलों का बाजार में आना शुरू हो गया है। सीकर के तरबूज शहर में पहुंच गए हैं। इससे शहर में जगह-जगह तरबूज की रेहड़ी व स्टालें नजर आने लगी हैं। वहीं कुछ ही समय में पंजाब से भी तरबूज की आवक शुरू हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में भी रेहड़ी वाले बड़ी संख्या में तरबूज लेकर आने शुरू हो गए हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है उसी प्रकार जिले की अधिकांश सडक़ों के किनारे भी तरबूज के बड़े-बड़े ढेर लगे दिखाई देने लगे हैं। तरबूज के साथ खरबूज व नारियल की बिक्री बढ़ गई है। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">कम कीमत में मिलने वाले तरबूज से विभिन्न प्रकार के फायदे हैं। चिकित्सक बताते हैं कि तरबूज का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती। गर्मी के दिनों में डिहाइड्रेशन की परेशानी से तरबूज का सेवन कर बचा जा सकता है। क्योंकि इसमें विटामिन ए, बी, सी तथा आयरन प्रचुर मात्रा में मिलता है। तरबूज विक्रेता अमरदीप ने बताया कि वह सात-आठ साल से यह कार्य कर रहा है। वे सीकर व उत्तर प्रदेश से तरबूज-खरबूज मंगवाते हैं। नामधारी व सेंचुरी तरबूज 20 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेच रहे हैं। Hanumangarh News</p>
<h3>सेंचुरी तरबूज 12 माह चलता है</h3>
<p style="text-align:justify;">तरबूज खाने से शरीर में पानी की पूर्ति होती है। तरबूज विक्रेता विजय कुमार ने बताया कि उसे यह कार्य करते 7-8 साल हो चुके हैं। वह टाउन में सेंट्रल पार्क के सामने तरबूज व खरबूज विक्रय करने का कार्य कर रहा है। गर्मी के मौसम में तरबूज व खरबूज की अच्छी बिक्री हो रही है। वर्तमान में सीकर से आने वाले माल की बिक्री हो रही है। 15 मई के बाद पंजाब के जालंधर क्षेत्र से माल मंगवाया जाएगा। नामधारी तरबूत साल में एक बार आता है जबकि सेंचुरी तरबूज 12 माह चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नारियल विक्रेता राजू ने बताया कि समुद्री इलाके जैसे तमिलनाडू, केरला, आंध्रा, गुजराज, बैंगलोर आदि से नारियल आता है। गर्मी के मौसम में नारियल पानी की अच्छी बिक्री हो रही है। 70 रुपए में एक नारियल बेचा जाता है। दो प्रकार के नारियल आ रहे हैं। इनमें एक में मलाई निकलती है जबकि दूसरा पानी वाला नारियल है। राजू ने बताया कि वह 35-37 साल से यह कार्य कर रहे हैं। कोरोना काल के बाद नारियल पानी की बिक्री में इजाफा हुआ है। Hanumangarh News</p>
<p><a title="Supreme Court: केजरीवाल को सीएम पद से हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!" href="http://10.0.0.122:1245/scs-petition-demanding-removal-of-arvind-kejriwal-from-the-post-of-cm-rejected/">Supreme Court: केजरीवाल को सीएम पद से हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 May 2024 15:08:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पीले रंग के ‘मिश्री’ तरबूज तैयार कर रहा रायपुर का रामचंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[खेत को ही बना रखी है मंडी किसान रामचंद्र बैनीवाल ने अपने खेत में पीले रंग का तरबूज (watermelon) लगाया हुआ है। यह तरबूज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खास बात ये भी है कि खेत से ही लोग तरबूज की खरीद कर रहे हैं। इसका स्वाद भी लोगों को खूब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/ramchandra-of-raipur-preparing-yellow-colored-mishri-watermelon/article-47864"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/watermelon.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">खेत को ही बना रखी है मंडी</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान रामचंद्र बैनीवाल ने अपने खेत में पीले रंग का तरबूज (watermelon) लगाया हुआ है। यह तरबूज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खास बात ये भी है कि खेत से ही लोग तरबूज की खरीद कर रहे हैं। इसका स्वाद भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है। लोगों की सुविधा के लिए खेत के पास ही झोपड़ी बना रोड के समीप तरबूज बेच रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इजरायल के तरबूज से कमा रहा मुनाफा | watermelon</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान रामचंद्र ने बताया कि बीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इसके बाद वर्ष 2016 में खेत के अंदर एक एकड़ में सब्जी लगाकर बेचने का कार्य किया। इसके बाद सब्जी ज्यादा भूमि पर लगाने लगा। इसी बीच गांव ढूकड़ा निवासी मुरलीधर के लगाए गये तरबूज के बारे में पता चला। इस पर वर्ष 2020 में तरबूज लगाने का कार्य शुरू कर दिया। इसके बाद इजराइल के तरबूज किस्म के बारे में पता चला। अब यह किस्म लगाकर मुनाफा कमा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">40 रुपये के हिसाब से बिक रहा है पीले तरबूज</h4>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर तरबूज के भाव अभी दस रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। जबकि इजराइल के तैयार किए गये विशेष किस्म के तरबूज रामचंद्र प्रति किलो 40 रुपये के हिसाब से बेच रहा है। किसान रामचंद्र का कहना है कि लाल रंग के तरबूज के मुकाबले पीले तरबूज का स्वाद ज्यादा बेहतर है और यह ज्यादा मीठा होता है। तरबूज का रंग ऊपर से तो हरा है लेकिन अंदर से पीला और लाल निकलता है। किसान रामचंद्र ने बताया कि पीले तरबूज के साथ-साथ हरी मिर्च, तोरी, ककड़ी, बैंगन, भिंडी, तर व खरबूजा की खेती की हुई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जैविक तरीके से करता है तैयार</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान रामचंद्र ने बताया कि इजराइल के तरबूज जैविक तरीके से तैयार कर रहा है। यह 60 दिन में तैयार होने वाली पीले तरबूज की खेती में गाय के गोबर की खाद डालता है। वहीं स्प्रे नीम, कोड़ तुंबा, आसकंद और जड़ी-बूंटी को मिलाकर तैयार मिश्रण से करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नहीं मिला कोई सहयोग</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान रामचंद्र ने सब्जी व तरबूज से अच्छी आमदनी हो रही है। इससे घर का गुजरा अच्छे तरीके से हो रहा है। वहीं लोगों को अच्छी क्वालिटी का तरबूज खाने को मिल रहा है। मगर सरकार से निराश होकर बताया कि सरकार की तरफ से उन्हे कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। संबधित विभाग के अधिकारी खेत में आते जरूर है लेकिन महज एक खाना पूर्ति कर चले जाते है। किसानों के लिए योजना बहुत लागू करती है लेकिन उस योजना का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 May 2023 15:52:58 +0530</pubDate>
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