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                <title>अब किसानों को नहीं धान में नमी की टेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[राहत। अनाज मंडियों में धान सुखाने में लाभदायक सिद्ध हो रहा मौसम | Paddy Moisture बठिंडा(अशोक वर्मा) बठिंडा क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से अचानक बढ़ी गर्मी ने खरीद एजेंसियों को (Paddy Moisture) राहत दी है अनाज मंडियों में इस समय जो भी धान की फसल आ रही है उसमें नम की मात्रा काफी अधिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/weather-proving-beneficial-in-paddy-drying-in-cereal-markets/article-10811"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/dhan-ki-nmi.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">राहत। अनाज मंडियों में धान सुखाने में लाभदायक सिद्ध हो रहा मौसम | Paddy Moisture</h1>
<p><strong>बठिंडा(अशोक वर्मा)</strong> बठिंडा क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से अचानक बढ़ी गर्मी ने खरीद एजेंसियों को<strong> (Paddy Moisture)</strong> राहत दी है अनाज मंडियों में इस समय जो भी धान की फसल आ रही है उसमें नम की मात्रा काफी अधिक है यदि लगातार गर्मी पड़ती है तो धान की फसल जल्दी सुकेगी व बोली में आसानी रहेगी। इसके उलट ठंड वाले मौसम दौरान जितनी फसल दिन के समय सुकती है उतनी ही रात के समय उसमें नमी की मात्रा पैदा हो जाती है जोकि अंत को खरीद प्रभावित करती है। हालांकि एक अक्तूबर को मौसम काफी ठंडा हो गया था जिसने अब मोड़ लिया है। बठिंडा जिले में 170 खरीद केंद्र हैं जबकि मानसा जिले के दो खरीद केन्द्रों को भी बठिंडा के साथ जोड़ा हुआ है।</p>
<p>इस समय मुख्य यार्डों, सब यार्डो व खरीद केन्द्रों में जो भी फसल आ रही है। उसे सुखाने के लिए ठंडे मौसम की अपेक्षा कम मुशक्कत करनी पड़ रही है। विवरणों अनुसार इस बार जिला बठिंडा में 13 लाख मीट्रिक टन धान की आमद होने का अनुमान है जबकि पिछले वर्ष जिले में से 13.50 लाख मीट्रिक टन फसल आई थी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आगामी दिनों दौरान मौसम के गर्म रहने की उम्मीद है। बठिंडा पट्टी में धान की पिछेत होती है जिस कारण अगले हफ्ते से खरीद केन्द्रों में धान की आमद में बड़ी तेजी आने की संभावना है। धान में इस बार नमी की मात्रा 17 प्रतिशत प्रवानित है। गीले धान को सुखाने में गुनगुने मौसम का बड़ा योगदान माना जा रहा है।</p>
<h2>किसान मंडियों में सुखा धान लेकर आएं : डीसी | Paddy Moisture</h2>
<p>डिप्टी कमिशनर बी.श्रीनिवासन ने किसानों को मंडियों में धान की फसल पूरी तरह सुखा कर लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई दिक्कत न आए।</p>
<h2>गर्म मौसम लाभप्रद: जिला मंडी अधिकारी | Paddy Moisture</h2>
<ul>
<li><strong>जिला मंडी अधिकारी जशपाल सिंह का कहना था </strong></li>
<li><strong>गर्म मौसम धान की फसल के लिए लाभ वाला है </strong></li>
<li><strong>खास तौर पर जो फसल खेतों में खड़ी सूखती है उसे बेचने में कोई दिक्कत नहीं आती है</strong></li>
<li><strong> उन्होंने बताया कि मौसम में चल रही तपिश के कारण धान की फसल जल्दी सुखेगी</strong></li>
<li><strong>किसान जल्दी खाली हो जाएंगे उन्होंने बताया कि इस के साथ लिफ्टिंग भी आसानी हो जानी है।</strong></li>
</ul>
<h2>बठिंडा जिले का तापमान | Paddy Moisture</h2>
<p>बठिंडा जिले में 8अक्तूबर को अब तक का सबसे न्यूनतम व अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री व न्यूनतम 17.6 डिग्री सेल्शियस रहा। अगले दिन 9अक्तूबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री, न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री व 10 अक्तूबर क्रमवार 32 डिग्री व 18.6 डिग्री सेल्शियस था। तापमान में बड़ा उछाल 11 अक्तूबर को अधिकतम 33.2 डिग्री रहा जबकि न्यूनतम तापमान 18.6 रहा। इस तरह ही 12 को अधिकतम तापमान 33.5 और न्यूनतम तापमान डिग्री,13 को 34 व 19.4 डिग्री और 14 को अधिकतम 34.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19.4 डिग्री सेल्शियस रिकार्ड किया गया है। आज भी बठिंडा में तापमान सोमवार की अपेक्षा अधिक क्रमवार 34.8 और 19.6डिग्री सेल्शियस दर्ज किया गया है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2019 10:35:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टमाटर के लिए फायदेमंद तो बेल वाली फसलों के लिए हानिकारक है गर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ/देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। गर्मी के लगातार बढ़ रहे प्रकोप के चलते जहां टमाटर उत्पादकों को फायदा मिल रहा है, वहीं बेल वाली सब्जी उत्पादकों के लिए पड़ रही भयंकर गर्मी घाटे का सौदा बन रही है। पिछले कई दिनों से हरियाणा में 40 डिग्री से ज्यादा तापमाल चल रहा है। भयंकर गर्मी के कारण जहां आम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/tomato-is-beneficial-to-heat/article-3892"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। </strong>गर्मी के लगातार बढ़ रहे प्रकोप के चलते जहां टमाटर उत्पादकों को फायदा मिल रहा है, वहीं बेल वाली सब्जी उत्पादकों के लिए पड़ रही भयंकर गर्मी घाटे का सौदा बन रही है। पिछले कई दिनों से हरियाणा में 40 डिग्री से ज्यादा तापमाल चल रहा है। भयंकर गर्मी के कारण जहां आम लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है, वहीं किसानों के लिए भी गर्मी मुसीबत बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वक्त बेल वाली सब्जियों का मौसम चला हुआ है, जिसमें घीया व तोरी मुख्य रूप से शामिल हैं। बेल वाली सभी सब्जियों में गर्मी नुकसान दायक साबित हो रही है। वहीं लोबिया, मूली व पालक के लिए भी ज्यादा गर्मी नुकसानदायक है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक व सब्जी विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने दैनिक सच कहूँ से विशेष बातचीत में बताया कि 40 डिग्री से ज्यादा तापमान बेल वाली सब्जयों के लिए हानिकारक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि 40 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर बेलों पर फीमेल फूल नहीं आते, जिसके बाद सिर्फ मेल फूलों से फल बन ही नहीं पाता और बेलें सब्जी रहित रह जाती हैं। गर्मी के मौसम में पौधों की ग्रोथ रूक जाती है। इसका कोई उपचार भी नही है, इसलिए किसान व्यर्थ में किसी पेस्टीसाईड़ का छिड़काव न करेंं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बेवजह भेड़ चाल में न फंसें किसान</h3>
<p style="text-align:justify;">सीबी सिंह ने कहा कि ज्यादातर किसान बगैर किसी बीमारी के भी अपनी फसलों में पेस्टीसाईड का छिड़काव करते रहते हैं, जिस कारण किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि आजकल भिंड़ी की फसल में कोई भी बीमारी नहीं है, इसलिए भिंड़ी में कोई भी पेस्टीसाईड न डालें। वहीं कई किसान ग्रोथ के लिए छिड़काव कर रहे हैं। ग्रोथ करने के लिए कोई भी पेस्टीसाईड कार्य नहीं करता, इसलिए कोई भी स्प्रे न करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टमाटर का बढ़ा है उत्पादन</h3>
<p style="text-align:justify;">इस साल डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि इस वर्ष टमाटर का उत्पादन काफी बढ़ा है, जब तक बरसात का मौसम शुरु नहीं होता, तब तक टमाटर का उत्पादन चलता रहेगा। कुरुक्षेत्र जिले की यदि बात करें तो लाडवा एरिया में सबसे ज्यादा टमाटर का उत्पादन होता है, वहीं शाहबाद एरिया में भी काफी टमाटर उगाया जाता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि टमाटर के भयंकर गर्मी से बचाव के लिए टमाटर में 15-15 दिन के बाद पीसीपीए कैमिकल का छिड़काव करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोजाना सायं के समय दें पानी</h3>
<p style="text-align:justify;">फसल में गर्मी का प्रकोप कम पडे, इसके लिए रोजाना सायं के समय सिंचाई करते रहें। डा. सीबी सिंह ने बताया कि सुबह के समय सिंचाई न करें। सुबह के समय सिंचाई करने से दोपहर के समय पानी गर्मी से उबल जाता है व फसल खराब हो जाती है।</p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jun 2018 11:02:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जीएसटी की लाभदायी शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[जीएसटी बिल संसद में पास किए जाते वक्त विपक्षी दलों ने बहुत हायतौबा मचाई थी। लेकिन जैसे-जैसे कानून विशेषज्ञों, करदाताओं, अर्थशास्त्रियों को जीएसटी बिल की विशेषताओं का पता चलता गया, उसी अंदाज में जीएसटी का विरोध शांत होता गया। अब सभी राज्य एक जुलाई से इस नए कानून को लागू करने के लिए सहमत हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/beneficial-start-of-gst/article-1132"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/gst-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीएसटी बिल संसद में पास किए जाते वक्त विपक्षी दलों ने बहुत हायतौबा मचाई थी। लेकिन जैसे-जैसे कानून विशेषज्ञों, करदाताओं, अर्थशास्त्रियों को जीएसटी बिल की विशेषताओं का पता चलता गया, उसी अंदाज में जीएसटी का विरोध शांत होता गया। अब सभी राज्य एक जुलाई से इस नए कानून को लागू करने के लिए सहमत हो गए हैं। दिए गए भरोसे के अनुसार सरकार आवश्यक वस्तुओं पर से टैक्स घटा रही है, जिससे मंहगाई कम होने के भी अनुमान लग रहे हैं, बशर्ते उत्पादक कम्पनियां वस्तुओं के रेट बढ़ाने का लालच नहीं करे। सरकार की ओर से ट्रेक्टर के पार्ट्स सहित आवश्यक श्रेणी की 66 वस्तुओं पर 10 फीसदी तक टैक्स कटौती की है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूली बैग, इंसुलिन, किताबों सहित बहुत सी वस्तुओं पर 10 फीसदी टैक्स कटौती की गई है। सरकार के इस निर्णय से किसानों व आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। हालांकि विद्यार्थियों को स्कूल बैग पर सात फीसदी कर छूट दी गई है, परंतु अच्छा होता यदि ये कर और कम कर दिए जाते। फिर भी यह भ्रम खत्म हो रहा है कि जीएसटी आर्थिक तूफान लाने वाला है। सरकार के कर ढांचे में बदलाव करने के उद्देश्य के पीछे समाजवादी विचारधारा नजर आ रही है, तभी विलासिता की वस्तुओं पर कर दर ज्यादा रखी गई है। जीएसटी पर पिछले एक दशक से पेश हो रहे आम बजट का काफी प्रभाव पड़ा है। इस कारण सरकार ने आमजन पर ज्यादा कर बोझ लादना ठीक नहीं समझा।</p>
<p style="text-align:justify;">सोने पर टैक्स बढ़ाया गया है। अर्थविशेषज्ञों के नजरिये से सोने का दिखावा इससे घटेगा। नतीजा, लोग सोने पर ज्यादा खर्च नहीं करेंगे। स्पष्ट है कि सोना खरीद करने में देश को जो विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है, उसमें बचत होगी। केन्द्रीय व राज्य स्तर पर एक समान कर प्रणाली से जहां देश की कर से आय बढ़ेगी, वहीं कर चोरी के रास्ते बंद होंगे। कर संग्रहण में फैला भ्रष्टाचार भी खत्म होगा। लोगों में बढ़ रही आर्थिक खाई रूकेगी। अभी देश में जीएसटी को लेकर सारे शक व विरोध मृतप्राय: हो गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी बिल आज दुनिया के करीब 130 देशों में लागू हो चुका है। इतने बड़े स्तर पर इसकी स्वीकार्यता दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था को गति देने, आमजन में आर्थिक विषमता कम करने के लिए अभी इससे ज्यादा प्रभाव कर नीति नहीं है। भारत में जीएसटी को लाने, पास करने व लागू करने में देश के करीब 20 वर्ष बर्बाद हो गए, जोकि बेहद कष्टप्रद हैं। अभी राजग सरकार इसके लिए बधाई की पात्र है, जिसने वोट नीति से ऊपर उठकर सबका विरोध होने के बाद भी जीएसटी को देश हित में लागू करवा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">आमजन को पूंजीवादी साम्राज्यवाद के शोषण से मुक्ति मिले, पूंजी का केन्द्रीकरण नहीं हो, आमजन को उसके जीवन-यापन की तमाम वस्तुएं, सेवाएं, सुविधाएं उसकी आमदनी में ही हासिल हों और कुछ वह भविष्य की चिंताओं के निवारण के लिए भी बचाकर रख सके, यही आर्थिक न्याय का सिद्धांत है, जोकि हर नागरिक का अधिकार भी है। उम्मीद है जीएसटी आर्थिक न्याय के सिद्धांतों पर भी खरा उतरेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 03:29:43 +0530</pubDate>
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