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                <title>नोटबंदी में बैंक रखें आमजन की सुविधा का ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[जैसा कि हर किसी को आशंका थी कि (Two Thousand Note) कभी भी बंद हो सकता है। यह आशंका सही साबित हुई। 2016 में अचानक से 1000 और 500 रुपये के नोट बंदी की घोषणा ने पूरे देश में हलचल बढ़ा दी थी। सरकार का तर्क था कि इससे काला धन वापिस आएगा। लेकिन ऐसा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/banks-should-take-care-of-the-convenience-of-the-common-man-in-demonetisation/article-47891"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/bank2.jpg" alt=""></a><br /><p>जैसा कि हर किसी को आशंका थी कि (Two Thousand Note) कभी भी बंद हो सकता है। यह आशंका सही साबित हुई। 2016 में अचानक से 1000 और 500 रुपये के नोट बंदी की घोषणा ने पूरे देश में हलचल बढ़ा दी थी। सरकार का तर्क था कि इससे काला धन वापिस आएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि 1000 और 500 रुपये के नोट सभी ने नई करंसी में बैंकों से बदलवा लिए। उस समय आमजन को यही आशंका थी कि अब काला धन नए 2000 रूपये के नए नोट के रुप में जमा होगा, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर काफी हो-हल्ला मचाया। आमजन की यह आशंका सही भी थी।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नोटबंदी का यह निर्णय बेशक देशहित में था लेकिन इस निर्णय के क्रियान्वयन में कुछ खामियों की वजह से इससे होने वाले लाभ व उद्देश्य की प्राप्ति नहीं हो सकी। नोट बदलवाने में जनता को हालांकि बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा था लेकिन आम जनता ने इन परेशानियों की परवाह नहीं की, केवल इस उम्मीद के साथ कि इससे काला धन बाहर आएगा और देश को लाभ होगा। लेकिन जनता को निराशा हाथ लगी। इस बार (Two Thousand Note) बंद 2016 की नोटबंदी जैसा नहीं है क्योंकि यह नोट सिर्फ चलन से बाहर हुआ है। लेकिन लीगल टेंडर बना रहेगा।</p>
<p>बैकों में अब इस नोट को 30 सितंबर तक बदला जा सकेगा लेकिन खाते में कभी भी जमा किया जा सकता है। जहां तक देश की अर्थव्यवस्था की बात है तो वित्त सचिव टीवी सोमनाथन का कहना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि देश में डिजीटल लेनदेन के बढ़ने की वजह से (Two Thousand Note) का उपयोग कम हुआ है। इलेक्ट्रोनिक लेनदेन की वजह से उच्च मूल्य वर्ग के नोट रखने की आवश्यकता अब नहीं है। वैसे भी नकली करेंसी, डैमेज करेंसी भी इस नोट को बंद करने की एक बड़ी वजह है।</p>
<p>हालांकि मध्यम व निम्न वर्ग के कम ही लोगों के पास यह करेंसी होगी, फिर भी 2016 की तरह लोगों को नोट बदलवाने में कोई परेशानी न आए इसके लिए सरकार को उचित प्रबंध करने चाहिए। आरबीआई ने भी अपने सर्कुलर में कहा है कि बैंकों को सीनियर सिटीजन और विकलांगों के लिए नोट बदलने की खास व्यवस्था करनी चाहिए ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। आम तौर पर सरकारी बैंकों में भीड़ या कर्मचारियों पर काम के बोझ की वजह से ग्राहकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस नोटबंदी की वजह से यह समस्या और बढ़ सकती है इसके लिए आमजन की सुविधा का ध्यान में रखते हुए बैंकों को उचित व्यवस्था करनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
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                <pubDate>Sun, 21 May 2023 09:50:26 +0530</pubDate>
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