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                <title>NEET - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>NEET RSS Feed</description>
                
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                <title>Tamil Nadu Assembly: भाजपा ने किया तमिलनाडु विधानसभा से वॉकआउट </title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु विधानसभा ने मेडिकल एडमिशन के लिए NEET खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया। भाजपा विधायक ने विरोध करते हुए वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/tamil-nadu-assembly-bjp-walks-out-from-tamil-nadu-assembly/article-89528"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/tamil-nadu-assembly.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Tamil Nadu Assembly: चेन्नई (एजेंसी)। </strong>तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए 'नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट' को खत्म करने की मांग की गई। इस प्रस्ताव के जरिए राज्य ने इस सेंट्रलाइज्ड एंट्रेंस एग्जाम के प्रति अपने लंबे समय से चले आ रहे विरोध को फिर से दोहराया। इस दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली और भाजपा विधायक एम. भोजराजन ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए वोटिंग से ठीक पहले सदन से वॉकआउट कर दिया। Tamil Nadu  News</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण मंत्री केजी अरुणराज ने सदन के पटल पर नीट विरोधी प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह मेडिकल प्रवेश की इस केंद्रीकृत व्यवस्था को तुरंत समाप्त करे। सरकार ने अपने प्रस्ताव में नीट को खत्म करने के मुख्य कारण गिनाए, जिनमें परीक्षा के आयोजन में सामने आई कथित अनियमितताएं, महंगी कोचिंग सेंटरों का तेजी से बढ़ता कारोबार और सबसे दुखद, छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं शामिल थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री अरुणराज ने मांग की है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग अधिनियम 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम 2020 सहित अन्य प्रासंगिक केंद्रीय कानूनों में जरूरी संशोधन करे। सरकार की स्पष्ट मांग है कि पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए, ताकि तमिलनाडु फिर से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश दे सके। Tamil Nadu  News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया गया है कि नीट परीक्षा सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है और यह मेडिकल शिक्षा के मामलों में राज्यों के अधिकारों को भी प्रभावित करती है। तर्क दिया गया कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों पर असमान रूप से बुरा असर डाल रही है। विशेषकर उन छात्रों पर जिन्होंने तमिल माध्यम से पढ़ाई की है और जिनके पास महंगी प्राइवेट कोचिंग लेने के साधन नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि इस प्रणाली ने छात्रों का ध्यान नियमित स्कूली पाठ्यक्रम से हटाकर केवल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी तक सीमित कर दिया है, जिससे कोचिंग सेंटरों को भारी फीस वसूलने का मौका मिल रहा है। बता दें कि तमिलनाडु पहले भी नीट से छूट पाने की कोशिश कर चुका है। वर्ष 2021 में जब डीएमके सत्ता में आई थी, तब भी विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया था। हालांकि, उस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रख लिया गया था और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। अब इस नए प्रस्ताव के जरिए राज्य ने अपनी मांग फिर से दोहराई है। Tamil Nadu  News</p>
<p style="text-align:justify;">सदन में दूसरा विशेष प्रस्ताव एफसीआरए 2026 कानून से जुड़ा था। मंत्री राजमोहन ने इस प्रस्ताव को लेकर कहा, "विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) साल 2010 से ही लागू है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत में आने वाले विदेशी फंड को रेगुलेट करना है ताकि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और संप्रभुता पर कोई प्रभाव न पड़े।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सदन को जानकारी दी कि केंद्र ने संसद में एफसीआरए 2026 संशोधन विधेयक पेश किया है। इसी सिलसिले में बीते कल ही अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। नेताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि वे केंद्र पर इस संशोधन बिल को वापस लेने का दबाव बनाएं, क्योंकि इसका असर शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और अन्य संगठनों पर पड़ सकता है। Tamil Nadu  News</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री राजमोहन ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार को इन संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार को मिलने वाली अतिरिक्त शक्तियों पर सख्त आपत्ति है। राज्य सरकार यह मानती है कि विदेशी चंदे का विनियमन होना चाहिए, लेकिन यह संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि एफसीआरए से जुड़ा कोई भी नया ढांचा ऐसा होना चाहिए जो न्याय, वैध संपत्तियों की सुरक्षा और सबसे बढ़कर संघवाद के सिद्धांतों का मजबूती से सम्मान करे। इसलिए, तमिलनाडु विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से इस संशोधन विधेयक को वापस लेने का आग्रह करती है। Tamil Nadu  News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 15:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Medical Education: भारत में चिकित्सा शिक्षा सुधार की जरूरत! सस्ती मेडिकल पढ़ाई, पारदर्शी प्रवेश और ग्रामीण स्वास्थ्य पर जोर </title>
                                    <description><![CDATA[भारत में चिकित्सा शिक्षा को अधिक सुलभ, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की आवश्यकता है। जानिए मेडिकल कॉलेजों की फीस, NEET परीक्षा, छात्रवृत्ति, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा सुधार से जुड़े प्रमुख मुद्दे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/medical-education-medical-education-in-india-needs-reform-affordable-medical/article-88964"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/medical-education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा का विस्तार आज सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है। बढ़ती आबादी, बदलती जीवनशैली और नई स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच भारत को अधिक संख्या में कुशल चिकित्सकों और विशेषज्ञों की आवश्यकता है। हालांकि चिकित्सा संस्थानों की संख्या में वृद्धि हुई है, फिर भी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार जरूरत के अनुरूप नहीं हो पाया है। दूसरी ओर प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर उठते सवालों ने युवाओं के भरोसे को प्रभावित किया है। Medical Education</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद देश के कई हिस्सों में विद्यार्थियों और संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट किया कि चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की आवश्यकता है। प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए परीक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुधार जरूरी हैं। निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली ही योग्य विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का समान अवसर दे सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान समय में निजी चिकित्सा महाविद्यालय देश में चिकित्सकों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी अधिक फीस और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है। चिकित्सा शिक्षा का खर्च इतना अधिक हो गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थी कई बार पीछे रह जाते हैं। Medical Education</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा को समाज सेवा से जोड़कर देखने की आवश्यकता है, ताकि आर्थिक स्थिति किसी विद्यार्थी के सपनों में बाधा न बने। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की शुल्क व्यवस्था से जुड़े मामले में कहा कि निजी संस्थानों को सरकारी संस्थानों के समान शुल्क लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे अपने संसाधनों से संचालित होते हैं। न्यायालय की यह टिप्पणी निजी संस्थानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा को सुलभ कैसे बनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">कई निजी चिकित्सा संस्थानों को शुरूआत में सरकारों से भूमि और अन्य सुविधाएं रियायती दरों पर मिलती हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शुल्क व्यवस्था और पर्याप्त छात्रवृत्ति की नीति पर गंभीर विचार होना चाहिए। सरकार को यह अध्ययन भी कराना चाहिए कि कमजोर वर्गों से कितने विद्यार्थी चिकित्सक बन पा रहे हैं और निजी संस्थानों की शुल्क संरचना वास्तव में कितनी उचित है। </p>
<p style="text-align:justify;">निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षकों के वेतन, विद्यार्थियों की प्रशिक्षण व्यवस्था और इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाली सुविधाओं की भी नियमित निगरानी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विद्यार्थियों से जुड़े सभी नियमों का ईमानदारी से पालन हो। चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तो विद्यार्थियों और समाज दोनों का विश्वास मजबूत होगा। भारत में चिकित्सा शिक्षा की ऊंची लागत के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी विदेशों का रुख करते हैं। Medical Education</p>
<p style="text-align:justify;">यह स्थिति बताती है कि देश में कम खचीर्ली और बेहतर गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। चिकित्सा संस्थानों की स्थापना में चिकित्सकों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन्हें आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि बड़े औद्योगिक समूह इस क्षेत्र में निवेश करते हैं तो उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी के तहत कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की स्पष्ट योजना बनानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा शिक्षा को सिर्फ आर्थिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। देश को विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में सेवा देने वाले चिकित्सकों की आवश्यकता है। इसलिए डॉक्टरों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जिनसे दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें। ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं को चिकित्सा प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकता है। भारत में चिकित्सकों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन बड़ी चुनौती उनका समान वितरण है। अधिकांश विशेषज्ञ चिकित्सक बड़े शहरों में केंद्रित हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी हुई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक अस्पतालों को मजबूत करने से जिला अस्पतालों पर बढ़ता दबाव कम किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के साथ प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त शिक्षण अस्पतालों की स्थापना की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। केंद्र और राज्यों के सहयोग से ऐसी व्यवस्था तैयार की जा सकती है, जहां हर वर्ग के विद्यार्थियों को अवसर मिले और हर नागरिक को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। चिकित्सा शिक्षा में सुधार ही देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत आधार दे सकता है।<br /><strong>धुर्जती मुखर्जी (यह लेखक के अपने विचार हैं) Medical Education<br /></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:08:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Paper Leak Case: पेपर लीक मामले में कड़े दंड वाले विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा और त्वरित न्याय की व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को मंजूरी दी। विधेयक संसद में पेश होने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/union-cabinet-approves-bill-with-strict-punishment-in-paper-leak/article-88627"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/paper-leak-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Paper Leak Case: नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को ऐसे मामलों में कड़ी सजा और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया का प्रावधान करने वाले प्रस्तावित विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। हाल के महीनों में विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं के बाद छात्रों और अभिभावकों में व्यापक असंतोष देखा गया है। इसी मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में भी लगातार चर्चा और विरोध दर्ज किया जा रहा है। Central Government News</p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार ने पहले ही दिए थे सख्त कार्रवाई के संकेत</h3>
<p style="text-align:justify;">मंत्रिमंडल की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर संकेत दिया था कि सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कठोर कानूनी ढांचा तैयार करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा था कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनके विरुद्ध प्रभावी और कठोर कार्रवाई आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि प्रस्तावित व्यवस्था में ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। Central Government News</p>
<h3 style="text-align:justify;">संसद में पेश होने की संभावना</h3>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद अब इस विधेयक पर संसद की मुहर लगना बाकी है। सूत्रों का कहना है कि अगले सप्ताह इसे संसद के समक्ष विचारार्थ रखा जा सकता है। यदि विधेयक पारित होता है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों के लिए दंडात्मक प्रावधान पहले की तुलना में अधिक कठोर हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किया है। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस पद पर विनीत जोशी का स्थान लिया है। सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ सख्त कानूनी प्रावधान भी आवश्यक हैं। Central Government News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:49:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नीट परीक्षा पेपर लीक मामला: कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन, नारेबाजी</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में चर्चा में चल रहे नीट (NEET) परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर शुक्रवार को कैराना के बाईपास रामड़ा चौराहे और गांव सींगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/neet-exam-paper-leak-case-congress-workers-protest-loudly-raise/article-84888"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/kairana-news-(2)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Kairana News: देशभर में चर्चा में चल रहे नीट (NEET) परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर शुक्रवार को कैराना के बाईपास रामड़ा चौराहे और गांव सींगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। यह प्रदर्शन प्रदेशाध्यक्ष पारस शुक्ला एवं राष्ट्रीय सचिव व पश्चिमी उत्तर-प्रदेश प्रभारी विशाल चौधरी के निर्देशानुसार आयोजित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन का नेतृत्व शामली जिला युवा कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष सलमान राणा, युवा प्रदेश महासचिव अश्विनी शर्मा, पूर्व प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस मुस्तकीम मल्लाह, जिला उपाध्यक्ष नासिर गुर्जर और जिला प्रवक्ता जुनैद चौधरी सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि नीट जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक होना लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और यह एक गंभीर आपराधिक साजिश की ओर संकेत करता है। वक्ताओं ने कहा कि हाल के दिनों में सामने आई जानकारी ने पूरे देश में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी(सीबीआई) इस मामले की जांच कर रही है और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, जांच में यह भी सामने आया है कि एक संगठित गिरोह द्वारा प्रश्न पत्र मोटी रकम लेकर बेचा गया, जिसकी कीमत लाखों रुपये तक बताई जा रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रभावित छात्रों को न्याय दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि नीट-2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों में भारी नाराजगी है, और विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/kairana-news-(2)10.jpg" alt="Kairana News (2)" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:12:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट: सुप्रीम कोर्ट ने विवादित प्रश्न के उत्तर पर मांगी आईआईटी दिल्ली की राय</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने स्नातक स्तर की मेडिकल एवं अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिले से संबंधित पांच मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2024 के एक विवादित प्रश्न का उत्तर जानने के लिए दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के निदेशक को संबंधित विषय के विशेषज्ञों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-sought-iit-delhi-opinion-on-the-answer-to-the-controversial-question/article-60179"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/supreme-court-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने स्नातक स्तर की मेडिकल एवं अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिले से संबंधित पांच मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2024 के एक विवादित प्रश्न का उत्तर जानने के लिए दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के निदेशक को संबंधित विषय के विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय एक कमेटी गठित करने का सोमवार को निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने विवादित प्रश्न का सही विकल्प जानने के लिए आईआईटी के निदेशक को विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करने और उसकी राय मंगलवार 23 जुलाई दिन के 12 बजे तक अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश पारित किया। पीठ ने नीट परीक्षा दोबारा कराने के पक्ष और विपक्ष में घंटों अलग-अलग याचिकाकतार्ओं के कई अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने सुनवाई के दौरान नीट यूजी की पांच मई को आयोजित विवादित परीक्षा के सेट-एस 3 के फिजिक्स भाग के प्रश्न संख्या 19 के चार विकल्पों में दो उत्तर सही घोषित करने वाले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) फैसले पर कुछ याचिकाकतार्ओं की ओर से उठे सवालों पर संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित जारी किया। पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उच्चतम न्यायालय के रजिस्टार जनरल से आईआईटी दिल्ली के निदेशक को अदालत के इस आदेश से तत्काल अवगत कराने को कहा, ताकि आदेश का शीघ्रतापूर्वक पालन किया जा सके। शीर्ष अदालत लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रखेगी। Supreme Court</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पांच दिन से लापता युवक का शव पेड़ से लटका मिला" href="http://10.0.0.122:1245/the-body-of-a-youth-missing-for-five-days-was-found-hanging-from-a-tree/">पांच दिन से लापता युवक का शव पेड़ से लटका मिला</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 19:57:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी के टिप्स व कुशल मार्ग दर्शन से संवरा ‘उदित गर्ग’ का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[मेरी सफलता का श्रेय पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के कुशल मार्गदर्शन को जाता है: उदित गर्ग सरसा (सच कहूँ न्यूज)। बिना कोचिंग के नीट परीक्षा में अपनी काबलियत व बुलंद हौंसलों के बल पर सफलता हासिल करने वाले शाह सतनाम जी ब्वॉयज स्कूल सरसा के छात्र उदित गर्ग ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/udit-garg-qualify-neet-exam-without-coaching/article-40219"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/udit-garg.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>मेरी सफलता का श्रेय पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के कुशल मार्गदर्शन को जाता है: उदित गर्ग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बिना कोचिंग के नीट परीक्षा में अपनी काबलियत व बुलंद हौंसलों के बल पर सफलता हासिल करने वाले शाह सतनाम जी ब्वॉयज स्कूल सरसा के छात्र उदित गर्ग ने पूज्य गुरु जी का पावन आशीर्वाद मिलने पर तहेदिल से आप जी का कोटि-कोटि आभार प्रकट किया है। उदित गर्ग का कहना है कि मेरी सफलता का श्रेय पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के कुशल मार्गदर्शन को जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा से संबंधित पूज्य गुरु जी के दिए टिप्स को फॉलो करते हुए उन्हें बिना कोचिंग के ये मुकाम हासिल किया है। वहीं शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल के प्रशासक डॉ. हरदीप सिंह इन्सां एवं प्रधानाचार्य राकेश धवन इन्सां ने उदित गर्ग को इस सफलता पर हार्दिक बधाई दी और पूज्य गुरु जी का तहेदिल से आभार प्रकट करते हुए उदित गर्ग के माता-पिता, स्कूल स्टाफ तथा प्रबंधकीय कमेटी के सदस्यों का बहुत-बहुत धन्यवाद किया।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 14:19:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईशान पहली बार में ही बने यूपी के NEET टॉपर</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी ईशान अग्रवाल ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा(NEET) में पहली ही बार में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है उन्हें परीक्षा में 99.99 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए है। ईशान की देश में 34 वीं रैंक है। उनके पिता डॉ. पीयूष अग्रवाल बरेली में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ishaan-became-the-first-up-neet-topper/article-37543"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/neet-topper-34-rank.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरेली (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी ईशान अग्रवाल ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा(NEET) में पहली ही बार में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है उन्हें परीक्षा में 99.99 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए है। ईशान की देश में 34 वीं रैंक है। उनके पिता डॉ. पीयूष अग्रवाल बरेली में एक निजी मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोग विशेषज्ञ हैं। मां डॉ. रुचिका गोयल गायनोकोलॉजिस्ट हैं। बड़ी बहन नारायणी अग्रवाल मणिपाल से एमबीबीएस कर रही हैं। ईशान ने हार्टमैन कॉलेज बरेली से इंटर की पढ़ाई की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय प्रशिक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा करायी जाने वाली इस परीक्षा में पहली ही बार में सफलता के कीर्तिमान स्थापित करने वाले ईशान ने बताया कि उसने नीट की परीक्षा की तैयारी कक्षा 10 से ही शुरू कर दी थी। ईशान की सफलता पर पूरा परिवार गदगद है। ईशान ने इंटर का परिणाम आने के दौरान ही कहा था कि उनका सेलेक्शन नीट की परीक्षा में हो जाएगा। उनका एग्जाम बेहतर गया था। उनका लक्ष्य कार्डियोलॉजिस्ट बनना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Sep 2022 12:39:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने नीट-पीजी काउंसलिंग 2021 को दी हरी झंडी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 फीसदी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा-2021 (नीट-पीजी) की काउंसलिंग की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और ए. एस. बोपन्ना की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-gives-green-signal-to-neet-pg-counseling-2021/article-29741"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/neet-pg-counseling-2021.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 फीसदी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा-2021 (नीट-पीजी) की काउंसलिंग की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने अपने आदेश में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण बरकरार रखा, लेकिन कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आठ लाख रुपये प्रति वर्ष की आय मानदंड लंबित याचिकाओं के अंतिम परिणाम के दायरे में होगा। शीर्ष अदालत की पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि उसने इस वर्ष के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आय मानदंड को जारी रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय अजय भूषण पांडे कमेटी की सिफारिश स्वीकार कर ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले शीर्ष अदालत ने गुरुवार को याचिकाकर्ताओं और आरक्षण का समर्थन कर रही केंद्र सरकार का पक्ष विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उच्चतम न्यायालय के आज के आदेश के साथ ही नीट-पीजी-2021 परिणाम के आधार पर नामांकन के लिए शीघ्र काउंसलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बाधाएं दूर हो गई लगती हैं। राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों में अखिल भारतीय कोटे की सीटों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण का मापदंड तय करने को लेकर चल रहे विवाद के कारण काउंसलिंग की प्रक्रिया रुकी हुई थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कमजोर वर्गों के परिवार की आठ लाख रुपए तक की वार्षिक आय की सीमा तय</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के परिवार की आठ लाख रुपए तक की वार्षिक आय की सीमा तय की है। पीठ इस मापदंड तय करने का तौर तरीका जानना चाहता था। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 30 नवंबर 2021 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसने 31 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट दे दी। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों हलफनामा दाखिल कर सर्वोच्च अदालत को बताया था कि ईएसडब्ल्यू अभ्यार्थियों के लिए आठ लाख रुपये की सीमा उचित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बार-बार मापदंड का ‘आधार’ बताने के शीर्ष अदालत के आदेश के बाद सरकार द्वारा स्पष्ट रुख नहीं अपना था। इससे नाराज शीर्ष अदालत की पीठ में 25 अक्टूबर को काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। काउंसलिंग की प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के कारण स्नातकोत्तर कक्षा में नामांकन के अभ्यार्थी डॉक्टर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने बदलते हुए हालात को देखते हुए इस मामले पर शीघ्र सुनवाई के लिए अदालत से अनुरोध किया था। अदालत ने सरकार की गुजारिश स्वीकार करते हुए इस मामले पर सुनवाई की। पीठ ने राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में राष्ट्रीय स्तर अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी और ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण देने के मद्देनजर सरकारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करते हुए कल कहा था, ह्यहम ऐसी स्थिति में हैं, जहां राष्ट्रीय हित में काउंसलिंग शुरू होनी है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि मौजूदा मानदंडों के अनुसार ईडब्ल्यूएस कोटा के लिए सभी पात्र उम्मीदवारों को पंजीकरण के लिए उनके प्रमाण पत्र मिल गए हैं। इसके मद्देनजर सरकारी कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ा दी गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जानें, आज सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ…</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि सरकार ने व्यापक परामर्श एवं हर पहलू पर गौर करने के बाद आरक्षण लागू करने का फैसला किया है तथा इससे सामान्य श्रेणी के छात्र-छात्राओं को कोई नुकसान नहीं होगा। सुनवाई के दौरान मेहता ने यह भी स्पष्ट किया था कि वर्तमान मामले में यदि परिवार में तीन सदस्यों की प्रति वर्ष 3-3 लाख रुपए आए होती हैं, तो ऐसी स्थिति में उनकी आय नौ लाख रुपए मानी जाएगी और वे ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अंतर्गत नहीं आएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार के तमाम स्पष्टीकरण के बावजूद कई याचिकाकतार्ओं का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने तर्क दिया था कि आठ लाख रुपये की आय सीमा तक तय करने के लिए कोई उचित अध्ययन या अभ्यास नहीं किया गया है। नील आॅरेलियो नून्स एवं अन्य ने पीजी पाठ्यक्रमों में मौजूदा शैक्षणिक सत्र से अखिल भारतीय स्तर के कोटे में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने के केंद्र की गत वर्ष 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी थी। अधिसूचना के अनुसार पीजी पाठ्यक्रमों में 50 फीसदी सीटें अखिल भारतीय कोटे से भरने के प्रावधान किए गए हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jan 2022 12:43:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नीट-पीजी: केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट से शीघ्र सुनवाई का अनुरोध</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-पीजी काउंसलिंग मामले की शीघ्र सुनवाई करने अनुरोध किया। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ‘विशेष उल्लेख’ तहत सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नीट- पीजी (ईडब्ल्यूएस) मामले की शीघ्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/neet-pg-central-governments-request-for-early-hearing-from-supreme-court/article-29644"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/neet-pg-2020.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-पीजी काउंसलिंग मामले की शीघ्र सुनवाई करने अनुरोध किया। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ‘विशेष उल्लेख’ तहत सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नीट- पीजी (ईडब्ल्यूएस) मामले की शीघ्र सुनवाई के जाने की जरूरत है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि पूर्व निर्धारित छह जनवरी के बजाय मंगलवार को सुनवाई की जाए। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सरकार के गुहार पर कहा कि पीठ इस मामले में मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की सलाह के बाद कोई फैसला लेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला मेडिकल स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाओं में नामांकन से जुड़ा हुआ है। नामांकन के लिए होने वाली काउंसलिंग में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ( ईडब्ल्यूएस) आरक्षण के लिए वार्षिक आय मानदंड तय करने को लेकर शीर्ष अदालत सुनवाई कर रही है। केंद्र सरकार ने आरक्षण के लिए वार्षिक आय आठ लाख रुपए की सीमा तय की है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से आठ लाख रुपए तय करने के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी देने को कहा था लेकिन सरकार ने पिछली कई तारीखों के दौरान कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाई। इसके बाद पीठ ने नीट- पीजी काउंसलिंग प्रक्रिया पर अस्थाई रोक लगा दी थी। काउंसलिंग नहीं होने के कारण अभ्यार्थी (डॉक्टर) लगातार आंदोलन कर रहे हैं। नामांकन के अभ्यार्थी डॉक्टरों ने पिछले दिनों हड़ताल और सड़कों पर प्रदर्शन किए थे। इस वजह से ही राजधानी दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई थी।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jan 2022 14:44:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुराने पैटर्न पर ही होगी नीट- पीजी सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बताया कि नीट सुपर स्पेशियलिटी डीएम परीक्षा के पैटर्न में इस वर्ष कोई बदलाव नहीं होगा। यह परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही आयोजित होगी। केन्द्र और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि इस वर्ष नीट सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पुराने पैटर्न के अनुसार आयोजित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/neet-pg-super-specialty-exam-will-be-held-on-the-old-pattern-only/article-27470"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/supreme-court-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बताया कि नीट सुपर स्पेशियलिटी डीएम परीक्षा के पैटर्न में इस वर्ष कोई बदलाव नहीं होगा। यह परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही आयोजित होगी। केन्द्र और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि इस वर्ष नीट सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पुराने पैटर्न के अनुसार आयोजित की जाएगी। नया पैटर्न अगले वर्ष से लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने पुराने पैटर्न पर ही नीट-पीजी सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा 2021 कराने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्र ने अदालत को बताया कि ये परीक्षा पुराने प्रश्न पैटर्न के अनुसार होगी। नया पैटर्न अगले सत्र 2022-2023 से लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के प्रस्ताव पर संतुष्टि जताई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा सुपर स्पेशियलिटी (नीट-एसएस) 2021 के पैटर्न में किए गए ‘लास्ट मिनट चेंजेज’ पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Oct 2021 14:19:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जजा विद्यार्थियों के लिए नीट की कोचिंग के लिए आवेदन आमंत्रित</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा जनजाति विद्यार्थियों को मेडिकल परीक्षा पूर्व कोचिंग के लिए आवेदन 8 अक्टूबर तक आमंत्रित किए गए हैं। जनजाति निदेशक डॉ. वृद्धि चन्द्र गर्ग ने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजनातंर्गत मेडिकल परीक्षा पूर्व कोचिंग (नीट) हेतु जनजाति उपयोजना क्षेत्र एवं गैर जनजातीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/application-invited-for-neet-coaching-for-tribal-students/article-27175"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/application-deadline-extend.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा जनजाति विद्यार्थियों को मेडिकल परीक्षा पूर्व कोचिंग के लिए आवेदन 8 अक्टूबर तक आमंत्रित किए गए हैं। जनजाति निदेशक डॉ. वृद्धि चन्द्र गर्ग ने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजनातंर्गत मेडिकल परीक्षा पूर्व कोचिंग (नीट) हेतु जनजाति उपयोजना क्षेत्र एवं गैर जनजातीय क्षेत्र की कक्षा 11 में अध्यनरत 100 छात्राओं, जिनके कक्षा दसवीं में न्यूनतम 70 प्रतिशत प्राप्तांक हो, उन्हें नि:शुल्क कोचिंग माण्किलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान में कराई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">योजना में चयनित छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग, आवास व भोजन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। योजना में जनजाति उपयोजना क्षेत्र की छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी। कोचिंग हेतु इच्छुक छात्राएं अपना आवेदन टीएडी की वेबसाइट पर आठ अक्टूबर तक आॅनलाइन कर सकते हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Sep 2021 09:56:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट परीक्षा 12 सितंबर को</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। नीट परीक्षा की तारीख को बदलने की मांग कर रहे छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद साफ हो गया है कि नीट परीक्षा अब 12 सितंबर को ही होगी। बता दें कि सीबीएसई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> नीट परीक्षा की तारीख को बदलने की मांग कर रहे छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद साफ हो गया है कि नीट परीक्षा अब 12 सितंबर को ही होगी। बता दें कि सीबीएसई परीक्षा में कम्पार्टमेंट लाने वाले और जिन्होंने इम्पूवमेंट के लिए अप्लाई किया हुआ था, उन छात्रों की मांग थी कि नीट परीक्षा की तारीख में बदलाव किया जाए. दरअसल, नीट परीक्षा वाले दिन ही सीबीएसई के इनमें से कुछ पेपर हैं। मतलब दोनों की तारीख क्लैश हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट की तरफ से जस्टिस खानविलकर ने छात्रों को टेस्टिंग एजेंसी या फिर सक्षम प्राधिकारी के सामने अपनी बात रखने को कहा है। इस तरह सीबीएसई और नीट परीक्षाओं की तारीखों में टकराव को देखते हुए नीट परीक्षा टालने की मुहिम को सुप्रीम कोर्ट से निराशा ही मिली है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Sep 2021 16:36:53 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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