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                <title>1000 Rupee Note - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>1000 Rupee Note: फिर शुरू होंगे 1000, 2000 रुपये के नोट? जानिये मोदी सरकार का क्या है प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[500 Rupee Note: नई दिल्ली (एजेंसी)। अभी हाल ही में शीतकाली सत्र के दौरान राज्यसभा में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आने वाले वक्त में नई वैल्यू वाले करेंसी नोट लॉन्च करने को लेकर बड़ी जानकारी दी थी। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 500 रुपये से ज्यादा वैल्यू वाले करेंसी नोट पेश करने से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/will-500-rupee-notes-be-introduced-again-know-what-is-the-plan-of-modi-government/article-65686"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/1000-rupee-note-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>500 Rupee Note: नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अभी हाल ही में शीतकाली सत्र के दौरान राज्यसभा में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आने वाले वक्त में नई वैल्यू वाले करेंसी नोट लॉन्च करने को लेकर बड़ी जानकारी दी थी। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 500 रुपये से ज्यादा वैल्यू वाले करेंसी नोट पेश करने से जुड़ी कोई योजना नहीं है। मंत्रालय ने राज्य सभा में पूछे गए नए नोटों के लॉन्च से जुड़े एक सवाल के जवाब में दिया है। सांसद घनश्याम तिवारी द्वारा ने सवाल पूछा था कि क्या सरकार 500 रुपये से ज्यादा वैल्यू वाले करेंसी नोट को प्रिंट करने की योजना बना रही है? इस पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, ‘नहीं, सर। उनके इस संक्षिप्त जवाब ने इस तरह की संभावना को सिरे से नकार दिया।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/isro-is-going-to-create-a-new-history-you-will-be-stunned-to-know/#google_vignette">ISRO News: इसरो रचने जा रहा नया इतिहास, जानकर आप रह जाएंगे दंग…</a></p>
<h4 style="text-align:justify;">2000 रुपये के नोट को लेकर सवाल-जवाब | <strong>1000 Rupee Note</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि घनश्याम तिवाली ने वित्त मंत्रालय से 2000 रुपये के नोटों के सकुर्लेशन और ऊंची वैल्यू वाले करेंसी नोटों की प्रटिंग से जुड़े कई सवाल पूछे थे। उन्होंने 2000 रुपये के बैंक नोट के बारे में भी पूछा। उन्होंने जवाब मांगा कि 2000 रुपये के कितने नोट पेश किए गए थे और वापसी के समय सकुर्लेशन में कितने नोट थे? इसके अलावा सकुर्लेशन में कितने नोट अभी बचे हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">उनके सवाल के जवाब में पंकज चौधरी ने कहा कि नवंबर 2016 में रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया एक्ट, 1934 के सेक्शन 24(1) के तहत रिजर्ब बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) ने 2000 रुपये के नोट पेश किए थे। उन्होंने बताया, ‘31 मार्च, 2017 तक 2000 रुपये के कुल 32,850 लाख पीस सकुर्लेशन में थे जिनकी संख्या 31 मार्च 2018 तक बढ़कर 33,632 लाख हो गई। 19 मई 2023 को जब 2000 रुपये के करेंसी नोट को वापस लेने का ऐलान किया गया, उस समय 2000 रुपये के कुल 17,793 लाख पीस थी। वित्त राज्य मंत्री ने कहा, ‘इनमें से 17,477 लाख पीस 15 नवंबर, 2024 तक आरबीआई के पास वापस आ चुके हैं, और 346 लाख पीस अभी भी सकुर्लेशन में हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2000 रुपये के नोट जमा करने का विकल्प</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि 2000 रुपये के बैंक नोट को एक्सचेंज और डिपॉजिट करने के नियम भी सरकार ने बनाए हुए हैं। जिन लोगों के पास 2000 रुपये के नोट बचे हैं, वो आरबीआई के 19 Issue Offices में जाकर इन्हें जमा करा सकते हैं। इसके अलावा, नागरिक इन आॅफिस में नोटों को जमा कराने के लिए India Post सर्विसेज का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। बता दें कि पिछले काफी समय से यह चर्चा थी कि सरकार ज्यादा वैल्यू वाले करेंसी नोट पेश कर सकती है। लेकिन अब वित्त मंत्रालय ने इस तरह की सभी खबरों को खारिज कर दिया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2024 17:01:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Rbi News: 1000 रुपये का नोट Comeback? जानें आरबीआई ने क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[1000 Rupee Note: एक हजार रुपये का नोट पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर इन दिनो फिर से चर्चा चल रही है कि 1000 रुपये का नोट मार्किट में चल सकता है। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं कि क्या ये सच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/1000-rupee-note-comeback/article-54178"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/rbi-news-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1000 Rupee Note: एक हजार रुपये का नोट पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर इन दिनो फिर से चर्चा चल रही है कि 1000 रुपये का नोट मार्किट में चल सकता है। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं कि क्या ये सच में है या कोई अफवाह है। आरबीआई की 1000 रुपये का नोट लाने की कोई योजना नहीं है और न ही वह 1000 रुपये का कोई नया नोट जारी करने के बारे में सोच रहा है। एएनआई ने ट्विटर पर पोस्ट कर जानकारी दी कि आरबीआई की 1000 रुपये वापस लाने की कोई योजना नहीं है। Rbi News</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">RBI is not in consideration of the re-introduction of Rs 1000 note: Sources</p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1715265958594699435?ref_src=twsrc%5Etfw">October 20, 2023</a></p></blockquote>
<p style="text-align:justify;"></p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा था कि बाजार में नकदी का प्रवाह बनाए रखने के लिए सरकार ने 500 रुपये के पर्याप्त नोट छापे हैं, ताकि लोगों को नकदी संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े। वहीं, डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल से लोगों के बीच नकदी की जरूरत कम हो गई है। ऐसे में आरबीआई का कहना है कि 1000 रुपये के नोट लाने की जरूरत नहीं है। आरबीआई ने लोगों को अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2016 में नोटबंदी हुई | RBI Latest News</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2016 में 1000 रुपये और 500 रुपये के पुराने नोट बंद कर दिए थे और उनकी जगह 500 रुपये के नए नोट और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए थे। हालांकि, अब सरकार ने 2000 रुपये के नोट को भी वापस ले लिया है। बैंकों में 2000 रुपये के नोट जमा करने और बदलने की समयसीमा खत्म हो गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यहां से अभी भी 2000 रुपये के नोट बदले जा सकते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, वर्तमान में आप आरबीआई कार्यालयों में 2000 रुपये के नोट बदल और जमा कर सकते हैं। देश में आरबीआई के कुल 19 क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जहां से 2000 रुपये के बैंक नोट बदले जा सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Oct 2023 17:38:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>1000 Rupee Note: 1000 रुपये का नोट Comeback ? जानें आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[1000 रुपये के नोट पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया बड़ा ऐलान | RBI नई दिल्ली। 1000 Rupee Note: पिछले कई दिनों से 1 हजार रुपये के नोट पर बड़ी चर्चा चल रही है कि वो आएगा या नहीं। आज आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने 1 हजार के नोट पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/will-one-thousand-rupee-note-be-returned-know-what-the-rbi-governor-said/article-48608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/1000-rupee-note.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">1000 रुपये के नोट पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया बड़ा ऐलान | RBI</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>1000 Rupee Note: पिछले कई दिनों से 1 हजार रुपये के नोट पर बड़ी चर्चा चल रही है कि वो आएगा या नहीं। आज आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने 1 हजार के नोट पर बड़ा ऐलान कर दिया। 1000 रुपये के नोट पर पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बन गया था कि फिर से यह नोट प्रचलन में आ सकता है। इससे पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह घोषणा करते हुये कहा कि पिछले वर्ष मई से अब तक रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है। फिलहाल इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है लेकिन नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने के बीच समिति ने समयोजन वाले रूख से पीछे हटने का निर्णय लिया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/rbi-news/">RBI News: 2 हजार के नाट पर आया बड़ा अपडेट</a></p>
<h4 style="text-align:justify;">नीतिगत दरें यथावत, किस्तों में नहीं होगी वृद्धि | 1000 Rupee Note</h4>
<p style="text-align:justify;">समिति के इस निर्णय के बाद फिलहाल नीतिगत दरों में बढोतरी नहीं होगी। रेपो दर 6.5 प्रतिशत, स्टैंडर्ड जमा सुविधा दर (एसडीएफआर) 6.25 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग सुविधा दर (एमएसएफआर) 6.75 प्रतिशत, बैंक दर 6.75 प्रतिशत, फिक्स्ड रिजर्व रेपो दर 3.35 प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात 4.50 प्रतिशत, वैधानिक तरलता अनुपात 18 प्रतिशत पर यथावत है।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में विकास दर के 7.2 प्रतिशत पर रहना भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र की वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में आयी सुस्ती के बीच सशक्त और मजबूत होने का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके आधार पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में यह 5.7 प्रतिशत रह सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">1,000 रुपये के नोट पर आरबीआई गवर्नर ने दिया जवाब | 1000 Rupee Note</h3>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई गवर्नर शशिकांत दास से जब सवाल पूछा गया कि क्या 1,000 रुपये के नोट फिर से वापस लॉन्च किया जा सकता है या 500 रुपये के नोट को वापस लिया जा सकता है? आरबीआई गवर्नर शशिकांत ने अपने जवाब में कहा कि मेरे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। ऐसा कहा कि ऐसा कोई विचार भी नहीं है। उन्होंने इस बारे में आम लोगों से इस बारे में अटकलें ना लगाने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2 हजार के नोट पर आई बड़ी जानकारी | 1000 Rupee Note</h3>
<p style="text-align:justify;">2 हजार के नोट पर आरबीआई ने बड़ी जानकारी दी है रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिदास ने बताया कि अब तक 1.18 लाख करोड़ नोट वापस आए है। शुरूआती आंकलन के अनुसार, 85 प्रतिश 2 हजार के नोट बैंकों के खातों आ रहे हैं। शक्तिदास ने ये भी कहा कि 500 के नोट को वापस लेने का विचार नहीं, न ही 1,000 का नोट वापस लाया जाएगा। लोगों से अनुरोध है कि वे इसको लेकर अटकलें नहीं लगाएं। दो हजार रुपये के नोट की वापसी की घोषणा 19 मई को की गई थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 17:21:47 +0530</pubDate>
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                <title>जानिए! भारत में कब-कब हुई नोट बंदी </title>
                                    <description><![CDATA[भारत में पहले चलता था 5 हजार से 10 हजार तक का नोट नोटबंदी से बजाए फायदे के हो गए ये 5  नुकसान जाने नोटबंदी से क्या फायदे होने की थी उम्मीद, और क्या हुआ गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। रिजर्व बैंक ने नोटबंदी (Notebandi) से जुड़े अंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि वि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-many-times-demonetisation-happened-in-india/article-47906"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/notebandi.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">भारत में पहले चलता था 5 हजार से 10 हजार तक का नोट</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>नोटबंदी से बजाए फायदे के हो गए ये 5  नुकसान</li>
<li>जाने नोटबंदी से क्या फायदे होने की थी उम्मीद, और क्या हुआ</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)।</strong> रिजर्व बैंक ने नोटबंदी (Notebandi) से जुड़े अंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि वि मुद्रित मुद्रा में से 10,700 करोड़ रुपये वापस बैंक में नहीं लौटे। इन आंकड़ों के आधार पर साफ है कि इन रुपयों के अलावा देश में मौजूद पूरा काला धन एक बार फिर बैंकिंग में प्रवेश कर चुका है।  लेकिन इसके साथ ही नोटबंदी से इन फायदों पर भी सवाल खड़ा हो गया। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के 8 नवंबर 2016 को लिए गए नोटबंदी के फैसले पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं भी आई। जहां केंद्र सरकार अपने दावे  डटी रही  कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा फायदा मिलने वाला है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="2000 रुपये के नोट बदलने को लेकर आई बड़ी खबर" href="http://10.0.0.122:1245/two-thousand-note/">2000 रुपये के नोट बदलने को लेकर आई बड़ी खबर</a></p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली जुली प्रतिक्रिया के साथ कुछ संस्थाओं ने तीखी आलोचना भी की इस दौरान नोटबंदी के वास्तविक आंकड़े केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास एकत्र होते रहे और रिजर्व बैंक विमुद्रित की गई करेंसी की गिनती करती रही। रिजर्व बैंक ने नोटबंदी (Notebandi) से जुड़े अंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि विमुद्रित मुद्रा में से 10,700 करोड़ रुपये वापस बैंकिंग प्रणाली में नहीं लौटे हैं।  इस धनराशि की जानकारी  आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के आधार पर, आठ नवंबर, 2016 को घोषित नोटबंदी से पूर्व चलन में रहे विमुद्रित नोटों की 15.42 लाख करोड़ रुपये की राशि में से वापस बैंकिंग प्रणाली में लौटी 15.31 लाख करोड़ रुपये की राशि को घटाने के बाद सामने आई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत में 3 बार नोटबंदी हुई !</h3>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई ने जनवरी 1938 में पहली पेपर करेंसी छापी, जो 5 रुपए की नोट थी। इस साल पहले 10 रुपए, 100 रुपए, 1,000 रुपए और 10,000 रुपए के नोट भी छापे गए थे। लेकिन आजादी से पूर्व भारत के वायसराय और गवर्नर जनरल सर आर्चीबाल्ड वेवेल ने 12 जनवरी 1946 को हाई करेंसी वाले बैंक नोटों को डिमॉनेटाइज करने का अध्यादेश लाने का प्रस्ताव दिया और 1000 और 10000 के नोट बंद किए गए। इसके बाद 1954 में फिर से 1000, 5000 और 10000 के नोटों की छपाई हुई। भारत में 5000 से 10000  के नोटों का प्रचलन 1954 से 1978 तक रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि 1978 में जनता पार्टी की सरकार में तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई की सरकार ने 5000 और 10000 के नोटों का सर्कुलेशन रोक दिया। उसके बाद  8 नवंबर 2016 की रात 8 बजे भारत में संपूर्ण नोटबंदी की घोषणा भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया था। उन्होंने 8 नवंबर की रात 8 बजे अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि आज रात आठ बजे के बाद भारत में प्रचलित 500 और 1000 रुपये के नोट प्रचलन से बाहर हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए। और 2000 का नोट जारी किया गया था। लेकिन अब 19 मई 2023 को फिर से अचानक 2000 का नोट बंद करने का ऐलान कर दिया गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) ने 2,000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने की घोषणा कर दी है।  30 सितंबर के बाद यह नोट भी मान्य नहीं होगा। लोग एक बार में 2 हजार रुपये के केवल 10 नोट की बदल  पाएंगे। फिलहाल अब भारत में सबसे बड़ा नोट 500 का प्रचलन  में शायद जारी रहेगा। या भविष्य में भारत सरकार इसको भी बंद करने का एलान कर सकती है!</p>
<h3 style="text-align:justify;">नोटबंदी के क्या हुआ नुकसान और क्या फायदे होने की थी उम्मीद | (Notebandi)</h3>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए अर्थव्यवस्था को ठप किया है और असली काले धन पर कुछ नहीं किया है। काला धन अब भी विदेश जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नोटबंदी से हो गए ये 5 बड़े  नुकसान?</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">लुढ़क गई जीडीपी</li>
<li style="text-align:justify;">बढ़ गई बेरोजगारी</li>
<li style="text-align:justify;">बढ़ गया बैंकों का कर्ज</li>
<li style="text-align:justify;">नहीं बढ़ी सरकार की कमाई</li>
<li style="text-align:justify;">घट गई आम आदमी की सेविंग</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"> नोटबंदी से ये 10  फायदे होने की थी उम्मीद | (Notebandi)</h3>
<h5>1. भ्रष्टाचार पर लगाम लगने की थी उम्मीद</h5>
<p style="text-align:justify;">देश में 500 और 1000 रुपये की प्रतिबंधित करेंसी कुल करेंसी की 85 फीसदी थी।  करीब  यह दोनों करेंसी देश में भ्रष्टाचार की पोशाक भी थी।  नोटबंदी के फैसले के बाद से ही भ्रष्टाचार के लिए इस करेंसी का इस्तेमाल रुक गया।  पुरानी करेंसी की जगह जारी हुई नई करेंसी को सरकार ने धीरे-धीरे और सभी सुरक्षा मापदंडों के सहारे बाजार में संचालित भी किया जिससे दोबारा अर्थव् अर्थव्यवस्था में काला धन एकत्र न होने पाए। लेकिन कोई उपाय काम नहीं आया।</p>
<h5>2. कैशलेस इकोनॉमी प्रचलित होगी</h5>
<p style="text-align:justify;"> कैश इकोनॉमी बनाने के लिए जरूरी था कि देश में ज्यादा से ज्यादा ट्रांजेक्शन  डिजिटल के माध्यमों से किया जाए।  इससे करेंसी पर देश की निर्भरता कम होगी और रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों के साथ-साथ केन्द्र सरकार को करेंसी संचालन में कम खर्च करना पड़ेगा।  कैशलेस इकोनॉमी का फायदा सरकार के रेवेन्यू में इजाफे के साथ-साथ आम आदमी को भी होगा ,क्योंकि उसका पैसा  डिजिटल आदान-प्रदान में ज्यादा सुरक्षित रहेगा।</p>
<h5>3. नकली करेंसी पर लगेगी लगाम</h5>
<p style="text-align:justify;">देश में सीमा पार से नकली करेंसी के प्रवाह की गंभीर समस्या थी।  नकली करेंसी जिसके हाथ पहुंचती थी उसे उतने मूल्य का तुरंत नुकसान उठाएं पड़ता था।<br />
वहीं सरकार को भी इसके रोकथाम के लिए बड़े नेटवर्क का सहारा लेना पड़ता था।  करेंसी का कम इस्तेमा तेल (डिजिटल पेमेंट) और बड़े डिनॉमिनेशन की करेंसी से एक झटके में देश से नकली करेंसी साफ हो चुकी है।  लिहाजा उम्मीद थी कि नई करेंसी के सुरक्षा मानक ज्यादा पुख्ता होने से अगले कई वर्षों तक अर्थव् अर्थव्यवस्था नकली करेंसी से सुरक्षित रहेगी।</p>
<h5>4. रियल एस्टेट सेक्टर पारदर्शी होने की थी उम्मीद</h5>
<p style="text-align:justify;">नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा फायदा रियल एस्टेट सेक्टर में होना था।  बीते कई दशकों से रियल एस्टेट सेक्टर कालेधन के निवेश का सबसे बड़ा जरिया था।  इसके चलते कागजों पर प्रॉपर्टी की खरीद और वास्तविक खरीद में बड़ा अंतर  होना आम बात थी।  इससे जहां सरकार को स्टांप ड्यूटी  में बड़ा नुकसान होता था। वहीं आम आदमी को ब्लैक    न होने के चलते मकान खरीदने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।</p>
<h5>5. उम्मीद थी खत्म होगा काला धन</h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने दावा किया था कि नोटबंदी के फैसले से कालेधन के खिलाफ सामाजिक बदलाव लाने के काम को आसानी से किया जा सकेगा।  यह हकीकत है कि किसी भी अर्थव् अर्थव्यवस्था से कालाधन तब तक नहीं खत्म किया जा सकता जब तक सामाजिक स्तर पर इसका बहिष्कार न होने लगे।  अभी तक काले धन का निवेश प्रॉपर्टी और सोना-चांदी में किया जाता था। जिससे उनकी कीमत वास्तविक कीमत से हमेशा अधिक बनी रहती थी।  लिहाजा, नोटबंदी के बाद इन क्षेत्रों में कालेधन के इस्तेमाल पर रोक लगने की उम्मीद थी। लेकिन नहीं लग सकी।</p>
<h5>6.  उम्मीद थी बंद होगी समानांतर इकोनॉमी</h5>
<h5 style="text-align:justify;">कालेधन और भ्रष्टाचार का सहारा लेकर देश में हमेशा से एक समानांतर इकोनॉमी चलती थी।</h5>
<p style="text-align:justify;">देश में कोयला की खदान से लेकर सड़क किनारे चाय और सब्जी बेचने वाले इस समानांतर अर्थव्यवस्था में शामिल रहते थे। यहां ज्यादातर लोग देश की सकल घरेलू आय को नुकसान पहुंचाते हुए अपनी आर्थिक स्थिति गतिविधियों को चलाते थे. लिहाजा, नोटबंदी से डिजिटल पेमेंट की ओर रुझान और नोटबंदी से खत्म हुए काले धन  के साथ-साथ इस समानांतर इकोनॉमी को मुख्यधारा से  जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद थी।</p>
<h5>7. बढ़ेगा टैक्स बेस</h5>
<p style="text-align:justify;">देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का सबसे बड़ा फायदा होगा कि बड़े से बड़े और छोटे से छोटे ट्रांजैक्शन बैंकों  के पास दर्ज होंगे।  इन ट्रांजेक्शन  पर इनकम टैक्स विभाग की भी लगातार नजर रहेगी।  जब देश में ब्लैक इकोनॉमी का आधार नहीं रहेगा तो जाहिर है ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स का भुगतान करने के बाद ही अपनी खरीद-फरोख्त को पूरा  कर पाएंगे।  लिहाजा, नोटबंदी से उम्मीद थी कि केंद्र और राज्य सरकारों का रेवेन्यू तेजी  से बढ़ेगा।  उसका वित्तीय घाटा कम होगा और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए उसके पास पर्याप्त संसाधन रहेंगे।</p>
<h5>8. फाइनेंशियल सेविंग्स  में होगा इजाफा</h5>
<p style="text-align:justify;">नोटबंदी (Notebandi) के पहले तक देश में लोग अपनी सेविंग्स   को प्रॉपर्टी, सोना और ज्वैलरी में निवेश करते थे। जरूरत पड़ने पर लोग इसे ब्लैक मार्केट में बेचकर एक बार फिर करेंसी में बदल देते थे. नोटबंदी से पहले तक देश के 50 फीसदी से अधिक परिवार अपनी सेविंग्स  को इन्हीं तरीकों से बचाकर रखते थे। यहां निवेश हुआ अधिकांश पैसा  संभावित ब्लैकमेल  भी था।  लिहाजा उम्मीद थी कि नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट और सोना अपेक्षा के मुताबिक रिटर्न नहीं दे पाएंगे और आम आदमी इन माध्यमों में निवेश करने की जगह अपनी सेविंग्स को रखने के लिए एक बार फिर बैंकों  का रुख करेंगे। उम्मीद थी कि लॉन्ग सेविंग्स। बैंक डिमांड ड्राफ्ट और म्यूचयूअलचुफंड जैसे विकल्पों का अधिक सहारा लेंगे और यहां उन्हें सबसे सुरक्षित रिटर्न भी मिलेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बैंकों की कमाई बढ़ने की थी उम्मीद</h3>
<p style="text-align:justify;">नोटबंदी (Notebandi) से कालेधन पर लगाम के साथ-साथ तेजी ते से बढ़ते डिजिटल पेमेंट से नोटबंदी के बाद बैंकों  की कमाई में बड़ा इजाफा देखने की उम्मीद बंधी थी।  माना जा रहा था कि इस इजाफे के सहारे बैंक भी  अपना विस्तार करेंगे और ग्राहकों को लुभाने के लिए आसान और सस्ती बैंकिंग का रास्ता साफ करेंगे।  इसके साथ ही यह भी उम्मीद लगाई गई कि नोटबंदी से बैंकों   के पास एकत्रित हुई अकूत  दौलत उन्हें उनका घाटा पाटने में भी मदद करेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">10 सस्ता होगा कर्ज ये थी उम्मीद</h3>
<p style="text-align:justify;">उम्मीद की जा रही थी कि नोटबंदी (Notebandi) के बाद से बैंकों  को हो रहे फायदे का सीधा असर देश में ब्याज दरों पर पड़ना तय माना  जा रहा था। उम्मीद थी कि वित्तीय जगत में पारदर्शिता  के साथ-साथ बैंक अपना कारोबार फैलाने के लिए ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने की कोशिश करेंगे।  यहां ग्राहकों को लुभाने के लिए वह कर्ज पर लगने वाले ब्याज दरों में बड़ी कटौती का ऐलान कर सकते हैं।  इससे देश में घर खरीदने, कार या स्कूटर खरीदने अथवा कारोबार के लिए कर्ज सस्ते दरों में मिलना शुरू हो जाएंगे। लेकिन सब उल्टा हो गया।</p>
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                <pubDate>Sun, 21 May 2023 15:48:59 +0530</pubDate>
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