<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/punishment/tag-2456" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Punishment - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/2456/rss</link>
                <description>Punishment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पांच हत्याओं के मामले में रामपाल समेत 15 दोषियों को उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[हिसार सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल और उसके बेटे वीरेंद्र समेत 15 दोषियों को अदालत ने मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या मामले में रामपाल समेत 15 लोगों को 11 अक्टूबर को अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत ने दोषी करार दिया था। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hisar-punishment-to-15-convicts-including-rampal-in-murder-case/article-6285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/rampal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल और उसके बेटे वीरेंद्र समेत 15 दोषियों को अदालत ने मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या मामले में रामपाल समेत 15 लोगों को 11 अक्टूबर को अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत ने दोषी करार दिया था। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन ने रामपाल समर्थकों को हिसार में प्रवेश करने से रोकने के लिए नाकेबंदी की है। रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, भांजा जोगेंद्र, बहन पूनम और मौसी सावित्री के अलावा बबीता, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, सतबीर सिंह, सोनू दास, देवेंद्र, जगदीश, सुखवीर सिंह, खुशहाल सिंह, अनिल कुमार को कोर्ट ने दोषी ठहराया था। एक अन्य महिला की हत्या के केस में रामपाल समेत 14 दोषियों को 17 अक्टूबर को सजा सुनाई जा सकती है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">रामपाल समेत 6 लोग दोनों मामलों में दोषी ठहराए गए :</h1>
<p style="text-align:justify;">रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, जोगेंद्र और बबीता दोनों मामलों में दोषी हैं। रामपाल, वीरेंद्र, जोगेंद्र, राजेंद्र और राजकपूर उर्फ प्रीतम पहले से जेल में हैं। बबीता जमानत पर थी। अब उसे भी जेल भेज दिया गया है। संजय और राजबाला भी दोनों मामलों में आरोपी हैं, लेकिन फरार हैं। दोनों मामलों में कुल 23 लोग दोषी ठहराए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुयायियों को ढाल बना लिया था : नवंबर 2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पर पुलिस ने छापा मारा था। पुलिस से बचने के लिए रामपाल ने अपने अनुयायियों को आश्रम के अंदर और बाहर ढाल के रूप में खड़ा कर दिया था। आरोप था कि रामपाल के आदेश पर उसके सहयोगियों और कमांडो ने लोगों को बंधक बनाया था। अनुयायियों की इस भीड़ के बीच दम घुटने से पांच लोगों की मौत हो गई थी।</p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो<strong>।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hisar-punishment-to-15-convicts-including-rampal-in-murder-case/article-6285</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hisar-punishment-to-15-convicts-including-rampal-in-murder-case/article-6285</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 14:31:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-10/rampal.jpg"                         length="34455"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्ची के साथ दुराचार कर हत्या करने वाले दरिन्दे को सुनाई फांसी की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[मई 2016 में गांव आलमपुर मंदरा की बच्ची के साथ घटित हुई थी यह घटना | Rape Accused मानसा(सुखजीत मान)। नाबालिग बच्ची के साथ दुराचार (Rape Accused) करने के बाद उसकी गला घोट कर हत्या करने के एक मामले में आज अतिरिक्त सैशन जज मानसा की माननीय अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। बच्ची के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punishment-for-the-death-to-rape-accused/article-5019"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/rape-accused.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मई 2016 में गांव आलमपुर मंदरा की बच्ची के साथ घटित<br />
हुई थी यह घटना | Rape Accused</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसा(सुखजीत मान)।</strong> नाबालिग बच्ची के साथ दुराचार <strong>(Rape Accused)</strong> करने के बाद उसकी गला घोट कर हत्या करने के एक मामले में आज अतिरिक्त सैशन जज मानसा की माननीय अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। बच्ची के माता-पिता ने इस निर्णय पर संतुष्टि जाहिर की है। बचाव पक्ष के एडवोकेट जसवंत सिंह ग्रेवाल ने बताया कि अतिरिक्त जिला सैशन जज जसपाल वर्मा ने पीड़ित पक्ष की दलीलों के साथ सहमत होते आरोपी काला राम के खिलाफ आरोप तय करते उसको फांसी की सजा सुनाई है। बचाव पक्ष के एडवोकेट जसवंत सिंह ग्रेवाल ने बताया कि मानसा में यह पहला केस है जिसमें नाबालिग के साथ दुराचार कर हत्या करने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है।</p>
<h1 style="text-align:center;">हरियाणा के रूपांवाली गांव का रहने वाला है आरोपी |Rape Accused</h1>
<p style="text-align:justify;">एडवोकेट ने बताया कि इससे पहले उम्र कैद की सजा तो सुनाई गई है परंतु फांसी का मानसा अदालत द्वारा सुनाया गया यह पहला निर्णय है। विवरणों मुताबिक जिले के गांव आलमपुर मंदरा में हरियाणा के गांव रूपों वाली का निवासी काला राम उर्फ काला सिंह (42) अपनी भांजी के शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहुंचा हुआ था यह व्यक्ति 10 मई 2016 की शाम को वहां ही पड़ोस में रहने वाली छह साल की बच्ची को अगवा कर पंजाब -हरियाणा की सीमा के साथ लगते गांव लधूवास ले गया जहां इस हवसी व्यक्ति ने दुराचार के बाद गला घोंटकर बच्ची की हत्या कर दी। देर रात तक बच्ची के घर न पहुंचने से परेशान पारिवारिक सदस्यों ने लड़की की तलाश शुरू की तो पता चला कि काला राम भी घर से गायब है।</p>
<p style="text-align:justify;">काफी समय देखभाल करने के बाद पारिवारिक सदस्यों ने इसकी सूचना बोहा पुलिस को दी। पुलिस ने 11 मई 2016 को गांव लधूवास की ड्रेन में से उक्त बच्ची का शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाया। बोहा पुलिस ने बच्ची के पिता महमा सिंह की शिकायत पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था।</p>
<h2 style="text-align:center;">पुलिस ने लधूवास की ड्रेन से बरामद किया था लड़की का शव | Rape Accused</h2>
<p style="text-align:justify;">थाना बोहा के समकालीन इंचार्ज प्रितपाल सिंह ने बताया कि पारिवारिक सदस्यों की तरफ से शिकायत के दूसरे दिन बाद ही पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते शव को लधूवास की ड्रेन से बरामद कर लिया था। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच दौरान पता चला था कि दिन के समय पर भी काला राम उस बच्ची को साथ लेकर घूम रहता था व घटना वाले दिन भी गांव से बाहर उस बच्ची को ले जाता देखा गया था। बच्ची शव को बरामद करने के बाद ही काला राम को गिरफ़्तार कर लिया था।</p>
<h1 style="text-align:center;">पिता का सपना था बेटी को अधिकारी बनाना | Rape Accused</h1>
<p style="text-align:justify;">अदालती निर्णय सुनने के बाद बच्ची के पिता ने निर्णय पर तसल्ली प्रकट करते कहा कि उसे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। इस निर्णय से उसको व उसकी बच्ची की आत्मा को शान्ति मिली है। बातचीत दौरान उन्होंने बताया कि उसके दो बेटियाँ थी, जिनमें से यह बच्ची बड़ी थी बच्ची पढ़ाई में बहुत होशियार थी जो आदर्श स्कूल में दूसरी कक्षा की छात्रा थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को पढ़ाई करवा कर काबिल अधिकारी बनाना चाहता था परंतु इस दरिन्दे ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punishment-for-the-death-to-rape-accused/article-5019</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punishment-for-the-death-to-rape-accused/article-5019</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Jul 2018 06:45:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/rape-accused.jpg"                         length="63509"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिल्डरों के लोभ की सजा आमजन को</title>
                                    <description><![CDATA[बिल्डर अवैध ढंग से ईमारतें खड़ी कर करोड़ों रूपये कमा लेते हैं लेकिन इन नियमों के उल्ट बनी जब यह ईमारतें गिरती हैं तो लाशें वहां आम लोगों, गरीबों-मजदूरों की उठाई जाती हैं। यह लगभग हर पांचवें-दसवें दिन हो रहा है लेकिन इसे कोई रोकने वाला नहीं। नोएडा के शाहबेरी क्षेत्र में 6 मंजिला दो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-people-of-the-greedy-people-get-the-punishment-of-the-builders/article-4904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/noida-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बिल्डर अवैध ढंग से ईमारतें खड़ी कर करोड़ों रूपये कमा लेते हैं लेकिन इन नियमों के उल्ट बनी जब यह ईमारतें गिरती हैं तो लाशें वहां आम लोगों, गरीबों-मजदूरों की उठाई जाती हैं। यह लगभग हर पांचवें-दसवें दिन हो रहा है लेकिन इसे कोई रोकने वाला नहीं। नोएडा के शाहबेरी क्षेत्र में 6 मंजिला दो ईमारते इस तरह से ढह गई जैसे ताजा-ताजा हवाई हमला हुआ हो। तीन जिंदगियां तो खत्म हो चुकी हैं व मलबे के नीचे दबे 15 के करीब अन्य व्यक्तियों के मारे जाने का डर है। आलम यह है कि शाहबेरी क्षेत्र में अवैध तरीके से नक्शा पास कर कमजोर मटीरियल वाली ईमारतों का निर्माण किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ समाज सेवियों ने अथॉरिटी के अधिकारियों तक अवैध निर्माण रोकने के लिए आवाज भी उठाई लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस भी कार्रवाई की घोषणा कर बात गोलमोल करती रही। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा छाया रहा लेकिन लगता ही नहीं कि कानून को लागू करने वाला कोई है। राजनेताओं को आम लोगों की जरूरत सिर्फ अपनी रैलियों व मार्च कामयाब बनाने तक ही है। इससे दूर आमजन की सलामती की किसी को कोई चिंता नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त मामले में ईमारत के मालिक सहित कुछ अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने का प्रयास किया जाएगा, कुछ दिनों बाद मामला शांत हो जाएगा। फिर कोई न कोई ऐसा हादसा और घटित होगा। पैसे व पहुंच वाले तंत्र में मारे गए व्यक्तियों के परिवारों के लिए अपने बिछुड़े सदस्यों की अंतिम क्रियाएं करने से अधिक कोई चारा नहीं। बीते कुछ महीनों में जीरकपुर(पंजाब) में एक ईमारत गिरी, जिसके मालिकों के खिलाफ एक मंत्री ने खुद थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाई।</p>
<p style="text-align:justify;">महीनोें बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हजारों जिंदगियां दिल्ली सहित अन्य महानगरों में ईमारतें गिरने से मौत के मुंह में जा चुकी हैं। गरीब वर्ग का हाल यह है कि वह महानगरों में अपना सिर छुपाने के लिए अवैध व खस्ताहाल ईमारतों में जीवन-यापन करने को मजबूर हैं। वे चाह कर भी ईमारत का नक्शा पास होने या अन्य किसी सरकारी स्वीकृति संबंधी जानना नहीं चाहते।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीब व मध्यवर्ग की यह मजबूरी बिल्डरों के मुनाफे वाले धंधे की बड़ी वजह है। सत्ता के उच्च पदों पर बैठे राजनेता लोगों को लालची बिल्डरों के रहम पर न छोडेÞं। देश में अवैध ईमारतें गिरने से इतनी बड़ी संख्या में कीमती जिंदगियां मौत के मुंंह में समा चुकी हैं कि इन दुर्घटनाआें का दोहराव होना देश के माथे पर कलंक है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि मलबे नीचे दबे वाले लोग भी देश का हिस्सा हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-people-of-the-greedy-people-get-the-punishment-of-the-builders/article-4904</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-people-of-the-greedy-people-get-the-punishment-of-the-builders/article-4904</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Jul 2018 06:45:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/noida-1.jpg"                         length="216392"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जब जवाबदेही ही तय नहीं, तो फिर सजा किसको?</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में बीते साल किसान आंदोलन के दौरान हुए किसान हत्याकांड की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने आखिरकार अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। हाल ही में सौंपी इस रिपोर्ट में जेके जैन आयोग ने आश्चर्यजनक तरीके से मंदसौर हत्याकांड में न तो किसी को सीधे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/when-accountability-is-not-fixed-then-who-is-the-punishment/article-4399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kisan-andolan-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में बीते साल किसान आंदोलन के दौरान हुए किसान हत्याकांड की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने आखिरकार अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। हाल ही में सौंपी इस रिपोर्ट में जेके जैन आयोग ने आश्चर्यजनक तरीके से मंदसौर हत्याकांड में न तो किसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है और न ही किसी की जवाबदेही तय की गई है। पुलिस और जिला प्रशासन पर सिर्फ यह टिप्पणी भर है कि पुलिस और जिला प्रशासन का सूचना तंत्र कमजोर था।</p>
<p style="text-align:justify;">आपसी सामंजस्य की कमी ने आंदोलन को उग्र होने दिया, जिसका नतीजा ये ‘गोलीकांड’ है। रिपोर्ट कहती है कि भीड़ को तितर-बितर करने और आत्मरक्षा के लिए गोली चलाना ‘नितांत आवश्यक’ और ‘न्यायसंगत’ था। सीआरपीएफ और राज्य पुलिस का गोली चलाना न तो अन्यायपूर्ण है और न ही बदले की भावना से उठाया कदम था।</p>
<p style="text-align:justify;">अलबत्ता रिपोर्ट में यह बात जरूर कही गई है कि गोली चलाने में पुलिस ने नियमों का पालन नहीं किया। पुलिस और सुरक्षा बलों को गोली सीने से नीचे पांवों पर चलानी चाहिए थी। यानी एक तरह से आयोग ने अपनी ओर से पुलिस और सीआरपीएफ दोनों को क्लीन चिट दे दी है। इस बर्बर हत्याकांड में अधिकारियों के बजाय उन पीडित किसानों को ही गुनहगार ठहराने की कोशिश की गई है, जिन पर किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के लिए मामले दर्ज किए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदसौर के पिपल्यामंडी में बीते साल 6 जून को हुई इस दर्दनाक घटना में 5 किसानों की पुलिस और सीआरपीएफ जवानों की गोली से मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे। किसानों के उग्र आंदोलन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच इस कदर झड़प बढ़ गई कि पुलिस ने निहत्थे किसानों पर अपनी बंदूकों से गोलियां चला दीं। इस बर्बर हत्याकांड की जब पूरे देश में निंदा हुई और विपक्ष ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग की, तो राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने हीलाहवाली के बाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जेके जैन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग को अपनी यह रिपोर्ट पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था, लेकिन उसने घटना के 100 दिन बाद जाकर अपनी कार्रवाई शुरू की। जांच समय सीमा में पूरी न होने के चलते, आयोग का कार्यकाल तीन बार बढ़ाया गया। तब जाकर एक साल में यह रिपोर्ट पूरी हुई। जैसे कि यह रिपोर्ट मीडिया में उजागर हुई, उसके मुताबिक रिपोर्ट 13 पेज में है और 54 बिन्दुओं में रिपोर्ट का सारांश दिया गया है। साथ ही, इस दिन की घटना को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में अग्निशामक बंदोबस्त नहीं किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन के पहले असामाजिक तत्वों को पकड़ा जाना था, जिसमें पुलिस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अप्रशिक्षित लोगों से आंसू गैस के गोले चलवाए गए, जो कि कारगर साबित नहीं हुए। जाहिर है कि रिपोर्ट का यह अंश, जिला प्रशासन और पुलिस की पर्याप्त नाकामी को दशार्ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सच बात तो यह है कि मंदसौर में किसानों के इस स्वत: स्फूर्त आंदोलन को न तो जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने गंभीरता से लिया और न ही प्रदेश की बीजेपी सरकार ने उनकी मांगों पर जरा सी भी संजीदगी दिखलाई। आंदोलन को लगातार नजरअंदाज किया गया। जब सरकार ने किसानों के अहिंसक आंदोलन पर कोई ध्यान नहीं दिया, तो वे गुस्से में आ गए। विरोध के तौर पर उन्होंने सड़कों पर हजारों लीटर दूध बहाया, सब्जियां फेंकीं और अनाज को आग लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन ने जब उग्र रुप ले लिया, तो सरकार और उसके वफादार सिपहसालार हरकत में आए। पहले उन्होंने आंदोलन को तोड़ने और उसके कुछ नेताओं को खरीदने की कोशिश की। जब वे अपनी कोशिशों में नाकामयाब हो गए, तो सरकार ने मीडिया के जरिए ये झूठा दावा किया कि ‘‘किसानों की हड़ताल समाप्त हो गई है। सरकार ने किसानों की मांगें मान ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन खत्म होने की घोषणा के बाद भी जो लोग हिंसा कर रहे हैं, वे किसान नहीं, बल्कि असामाजिक तत्व हैं। प्रदेश की विपक्षी पार्टी कांग्रेस एक साजिश के तहत हिंसा को बढ़ा रही है।’’ जबकि इन दावों में जरा सी भी सच्चाई नहीं थी। यही वजह है कि किसानों ने अपना आंदोलन स्थगित नहीं किया, बल्कि ये आंदोलन और भी ज्यादा उग्र होता चला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन से निपटने में ही सरकार ने अदूरदर्शिता और धूर्तता का परिचय नहीं दिया, बल्कि किसानों की मौत पर भी लगातार गलतबयानी की। प्रदेश के गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने शुरू में दावा किया कि पुलिस ने फायरिंग नहीं की है। सरकार की हां में हां जिला प्रशासन ने भी मिलाई और उसने भी यह बात दोहराई कि उसकी और से गोली चलाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों की गोली से ही लोगों की मौत हुई है। जबकि किसानों का इल्जाम था कि सीआरपीएफ और पुलिस ने बिना चेतावनी उनके ऊपर फायरिंग की, जिसकी वजह से इतने सारे लोग मर गए। किसानों की बातों में सच्चाई भी थी। अगर पुलिस की मंदसौर घटना में कोई भूमिका नहीं थी, तो सरकार ने पीड़ित किसानों के परिवार को क्यों एक करोड़ रूपए का मुआवजा दिया? क्यों उसने पीड़ित परिवारों के एक-एक शख्स को नौकरी दी ?</p>
<p style="text-align:justify;">अकेले जैन आयोग ने ही आंदोलनकारी किसानों को असामाजिक तत्व नहीं बतलाया, सरकार की भी ऐसी ही राय थी। यह बात अलग है कि सरकार ने उन्हें मुआवजा भी दिया। किसानों की मौत के मामले में उस वक्त राज्य सरकार का ही शर्मनाक रवैया सामने नहीं आया था, केन्द्र सरकार ने भी इस मामले में गैरजिम्मेवाराना रवैया अख्तियार कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">गोली लगने से पांच किसानों की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन इस वाकिए पर देश के कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कोई बयान नहीं आया। बाकी संवेदनशील मामलों की तरह, इस मामले में भी मोदी सरकार ने अपना सिर शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में छिपा लिया था। जैसे कि कहीं कुुछ हुआ ही न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कहने को मध्य प्रदेश, देश में सबसे अधिक कृषि विकास दर वाला राज्य है और पिछले पाँच सालों से वह लगातार कृषि क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘कृषि कर्मण अवार्ड’ जीतता आ रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान हमेशा अपने भाषणों में कृषि को लाभ का धंधा बनाने की बात कहते हैं। लेकिन राज्य में किसानों के जमीनी हालात क्या हैं ? इसकी हकीकत, हाल के किसान आंदोलनों से पूरे देश के सामने आ गई है। प्रदेश की कृषि विकास दर यदि देश में सबसे अधिक है, तो यहाँ के किसानों को समृद्ध होना चाहिए और उन्हें हर दम शिवराज सरकार का महिमा गान करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बावजूद इसके यहां के किसान, सरकार से अपनी मांगें मनवाने के लिए जब-तब आंदोलनों की राह पकड़ लेते हैं। कभी सड़कों पर सब्जियां फेंक कर, तो कभी दूध बहाकर अपने गुस्से को जाहिर करते हैं। किसान, सरकार से जो भी मांग कर रहे हैं, वे कहीं से भी नाजायज नहीं हैं। अगर किसान, सरकार से अपनी उपज का डेढ़ गुना दाम मांग रहा है और दूध की खरीद के दाम सरकारी डेयरी पर बढ़ाने के लिए इल्तिजा कर रहा है, तो वह कहां तक गलत है ? मंडी का रेट निर्धारण हो, फसलों का उचित समर्थन मूल्य दिया जाए, कर्ज माफ किया जाए</p>
<p style="text-align:justify;">और उन्हें पेंशन दी जाए, इन मांगों में से भला कौन सी मांग गलत है ? बावजूद इसके शिवराज सरकार किसानों की इन जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज करती रही। जब पानी सिर से ऊपर हो गया, तो किसानों को मजबूरन सड़कों पर आना पड़ा। यहां भी उन्हें अपने हक की बजाय गोलियां मिलीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब जबकि यह रिपोर्ट मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंच गई है, तो राज्य सरकार को भी यह रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक करना चाहिए। इसमें बिल्कुल भी देरी नहीं करना चाहिए। 25 जून को मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सरकार को कोशिश करना चाहिए कि इस दरमियान यह रिपोर्ट सदन में पेश हो। ताकि इस पर विस्तृत चर्चा हो सके। जेके जैन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस हत्याकांड के लिए न तो पुलिस, न जिला प्रशासन और न ही सीआरपीएफ को जिम्मेदार ठहराया है। जब किसी को जिम्मेदार ही नहीं ठहराया है, तो फिर सजा किस को मिलेगी ? इंसाफ का तकाजा तो यह कहता है कि जो भी बेगुनाह किसानों की मौत का कसूरवार है, उसे सजा मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार उस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे। मंदसौर किसान हत्याकांड को पूरा एक साल हो गया है, इस हत्याकांड में मारे गए 5 किसानों के परिजनों से किये वायदे तो सरकार ने पूरे कर दिये, मगर किसानों को उपज की सही कीमत देने का वायदा आज भी अधूरा है। फसल की सही कीमत न मिलने से वे अब भी परेशान हैं। तब से लेकर अब तक उनकी हालत में जरा सा भी सुधार नहीं आया है। किसान आंदोलन की बातें और मांगों को मानो सरकार ने बिसरा ही दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों की आर्थिक और सामाजिक हालत सुधारने के लिए गठित ‘एम.एस. स्वामीनाथन किसान आयोग’ ने साल 2007 में अपनी रिपोर्ट तत्कालीन केन्द्र सरकार को सौंपते हुए, उसे 32 सुझाव दिए थे। जिसमें सबसे अहम सिफारिश यह थी कि फसल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज्यादा दाम किसानों को मिले। वहीं बीजेपी ने भी साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जारी अपने घोषणा पत्र में किसानों से वादा किया था कि सŸाा में आते ही वह उनकी उपज का समर्थन मूल्य, लागत से दोगुना कर देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अफसोस ! स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को आए हुए ग्यारह साल और मोदी सरकार को केन्द्र की सŸाा संभाले चार साल हो गए, लेकिन यह वादा अभी भी अधूरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब इसका लक्ष्य बढ़ाकर साल 2022 तय कर दिया है। तब तक किसान अच्छे दिन आने का इंतजार करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-जाहिद खान</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/when-accountability-is-not-fixed-then-who-is-the-punishment/article-4399</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/when-accountability-is-not-fixed-then-who-is-the-punishment/article-4399</guid>
                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 08:15:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/kisan-andolan-1.jpg"                         length="148978"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहले छिपाती थी, अब सजा दिलवाती हैं बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। अब हरियाणा में अपराध नहीं, बल्कि महिलाओं में अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ गई है। यह कहना है महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन का। शुक्रवार को हरियाणा महिला आयोग की टीम ने वैश्य मॉडल स्कूल प्रकरण में धरने पर बैठी महिला शिक्षकों की शिकायत पर संज्ञान लेने भिवानी आई हुई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prior-to-hiding-now-women-get-punishment/article-3909"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/batiya.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। </strong>अब हरियाणा में अपराध नहीं, बल्कि महिलाओं में अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ गई है। यह कहना है महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन का। शुक्रवार को हरियाणा महिला आयोग की टीम ने वैश्य मॉडल स्कूल प्रकरण में धरने पर बैठी महिला शिक्षकों की शिकायत पर संज्ञान लेने भिवानी आई हुई थी। महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन व उपाध्यक्ष प्रीति भारद्वाज व सदस्या इंदु यादव ने बताया कि हरियाणा में अब अपराधों का ग्राफ बढ़ने की बजाए महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका मानना है कि महिला आयोग की भूमिका भी अब सक्रिय तौर पर दिखाई देने लगी है, यही वजह है कि महिलाएं अब बेझिझक होकर महिला थानों में अपने उत्पीड़न सम्बंधी शिकायतों को लेकर पहुंच रही हैं। उनका कहना है कि पहले महिलाएं अपने ऊपर होने वाले उत्पीड़न एवं अत्चायार को छिपाने का प्रयास करती थी, लेकिन अब हमारी बेटी और बहनें अत्चायार को छीपाने की बजाए अपराधियों को सजा दिलवाने का भरसक प्रयास करती हैं। हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन ने बताया कि हरियाणा में हरियाणा के अधिकांश गांवों में पंचायत की बागडोर महिलाओं के हाथों में आ गई हैं। ऐसे में महिला स्वतंत्र होकर अपना काम करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए महिला आयोग आने वाले जुलाई माह के दौरान प्रदेश भर में महिला सरपंचों के लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन करेगा, जिसमें महिला जनप्रतिनिधियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उनका कहना है कि जब महिला सरपंच जागरूक होगी तो उस गांव की हर वो महिला भी जागरूक हो जाएगी, जो कहीं ना कहीं शोषण एवं उत्पीड़न का शिकार हो रही है। इससे पहले महिला आयोग की टीम ने जिला पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे महिला अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपनी तफ्तीश में तेजी लाएं। महिलाओं से जुड़े अपराधों में निष्पक्ष जांच के भी निर्देश दिए गए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prior-to-hiding-now-women-get-punishment/article-3909</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/prior-to-hiding-now-women-get-punishment/article-3909</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Jun 2018 12:14:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/batiya.jpg"                         length="198292"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के पूर्व मुख्य सचिव की सजा घटाई</title>
                                    <description><![CDATA[  नोएडा जमीन घोटाला नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1993-95 में नोएडा में हुए जमीन आवंटन घोटाले में उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव की दोषसिद्धि को बुधवार को बरकरार रखा, लेकिन उन्हें मिली तीन साल कैद की सजा को घटाकर दो साल कर दिया। न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर भानुमति […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-reduced-punishment-of-chief-secretary/article-2811"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sc-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
</p><h1 style="text-align:center;">  नोएडा जमीन घोटाला</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1993-95 में नोएडा में हुए जमीन आवंटन घोटाले में उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव की दोषसिद्धि को बुधवार को बरकरार रखा, लेकिन उन्हें मिली तीन साल कैद की सजा को घटाकर दो साल कर दिया। न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर भानुमति की एक पीठ ने इसी मामले में यह फैसला सुनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">सीबीआई ने आरोप लगाया था कि वर्ष 1971 के बैच की आईएएस अधिकारी नीरा ने नोएडा में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर रहते हुए नियमों का उल्लंघन किया और एक अहम भूखंड एक उद्योगपति को आवंटित कर दिया था। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि नीरा ने गेस्ट हाउस के रूप में प्रयोग करने के लिए तय भूखंड का इस्तेमाल बदलने के लिए वर्ष 1983 के बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। उनपर नियमों का उल्लंघन करके इसका क्षेत्रफल बढ़ाने का भी आरोप है। इस घटनाक्रम के दौरान राजीव उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/"><br />
Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-reduced-punishment-of-chief-secretary/article-2811</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-reduced-punishment-of-chief-secretary/article-2811</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 09:51:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/sc-2.jpg"                         length="26094"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने दिखाया बड़ा दिल , 11 पाकिस्तानी कैदियों को किया रिहा</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के जेलों में बंद हैं 132 भारतीय कैदी नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच अस्ताना में अनौपचारिक मुलाकात के बाद भारत ने 11 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा कर दिया। अधिकारियों ने इस कदम को गुडविल जेस्चर करार दिया, वहीं पाकिस्तान का कहना है कि इन सभी कैदियों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-releases-11-pakistani-prisoners/article-1135"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/indo-pak-flag.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पाकिस्तान के जेलों में बंद हैं 132 भारतीय कैदी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच अस्ताना में अनौपचारिक मुलाकात के बाद भारत ने 11 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा कर दिया। अधिकारियों ने इस कदम को गुडविल जेस्चर करार दिया, वहीं पाकिस्तान का कहना है कि इन सभी कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है इसीलिए भारत उन्हें रिहा कर रहा है। इस साल अप्रैल में पाकिस्तान की मिलिटरी कोर्ट द्वारा भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भारत सरकार का इस तरह का यह पहला फैसला है।</p>
<p style="text-align:justify;">कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुए शंघाई को-आॅपरेशन आॅर्गनाइजेशन शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के पीएम के बीच हुई मुलाकात के बाद कैदियों की रिहाई का फैसला अहम माना जा रहा है। भारत ने बीते सप्ताह ही गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पंजाब में घुस आए दो बच्चों को वापस पाकिस्तान को सौंप दिया था। यह दोनों बच्चे अली रेजा (11) और बाबर (10) अपने चाचा मोहम्मद शहजाद के साथ सीमा पार कर भारत में घुस आए थे। भारत ने हालांकि शहजाद को अभी अपनी हिरासत में ही रखा हुआ है। इन दोनों बच्चों को अप्रैल में ही रिहा किया जाना था लेकिन पाकिस्तान द्वारा जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भारतीय अधिकारियों ने उनकी वापसी रोक दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पाक कैदियों की रिहाई का भारत का फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देश कुलभूषण जाधव मामले पर इंटरनैशनल कोर्ट आॅफ जस्टिस में आमने-सामने हैं। पाकिस्तान के जेलों में 132 भारतीय कैदी बंद हैं, जिनमें से 57 ने अपनी सजा पहले ही पूरी कर ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/india-releases-11-pakistani-prisoners/article-1135</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/india-releases-11-pakistani-prisoners/article-1135</guid>
                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 04:55:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/indo-pak-flag.jpg"                         length="23497"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        