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                <title>UPSC Civil Services Exam - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>UPSC Civil Services Exam RSS Feed</description>
                
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                <title>UPSC Civil Services Final Result 2023: यूपीएससी सिविल सेवा Result 2023? यहाँ देख सकेंगे!</title>
                                    <description><![CDATA[UPSC Civil Services Final Result 2023: नई दिल्ली। सिविल सेवा परीक्षा 2023 का अंतिम रिजल्ट संघ लोक सेवा आयोग जल्द ही घोषित कर सकता है, पर अभी तक यूपीएससी द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं इस बारे में नहीं की गई है। जिन परीक्षार्थियों ने अपना व्यक्तित्व परीक्षण दिया है, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/upsc-civil-services-result-2023-declared-will-be-able-to-see-here/article-56398"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/upsc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>UPSC Civil Services Final Result 2023: नई दिल्ली।</strong> सिविल सेवा परीक्षा 2023 का अंतिम रिजल्ट संघ लोक सेवा आयोग जल्द ही घोषित कर सकता है, पर अभी तक यूपीएससी द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं इस बारे में नहीं की गई है। जिन परीक्षार्थियों ने अपना व्यक्तित्व परीक्षण दिया है, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर अपना रिजल्ट देख सकेंगे, देख ही नहीं सकेंगे बल्कि डाउनलोड भी कर सकेंगे। UPSC CSE Result 2023</p>
<p style="text-align:justify;">वर्णनीय है कि यूपीएससी ने 1026 परीक्षार्थियों का व्यक्तित्व परीक्षण आयोजित किया, जिन्हें दिसंबर 2023 में सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 2023 में सफल घोषित किया गया था। जोकि 2 जनवरी से 9 अप्रैल, 2024 तक आयोजित हुआ था। आयोग ने सितंबर 2023 में मुख्य परीक्षा और 28 मई 2023 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी। सीएसई 2023 के तहत यूपीएससी विभिन्न सरकारी विभागों में 1,105 पदों को भरना चाहता है। सफल घोषित परीक्षार्थियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) और अन्य केंद्रीय सेवाओं और पदों पर भर्ती किया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे देखें रिजल्ट! UPSC CSE Result 2023</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले आप यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं।<br />
अब होमपेज पर ‘सिविल सेवा परीक्षा 2023 अंतिम परिणाम’ लिंक पर क्लिक करें, इस दौरान एक पीडीएफ खुलेगी।<br />
परीक्षा पास करने वाले 1,105 सफल उम्मीदवारों की सूची में अपना नाम देखें और<br />
पीडीएफ डाउनलोड करें।<br />
पीडीएफ को प्रिंट करें और भविष्य यूज के लिए एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।</p>
<p><a title="10th Result 2024: 10वीं, 12वीं के परीक्षार्थियों का इंतजार खत्म? यहाँ देख सकते रिजल्ट!" href="http://10.0.0.122:1245/is-the-wait-of-10th-and-12th-candidates-over/">10th Result 2024: 10वीं, 12वीं के परीक्षार्थियों का इंतजार खत्म? यहाँ देख सकते रिजल्ट!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Apr 2024 10:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आईएएस के आसमान में नारी चमक</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) में किसी लड़की का टॉप करना अब न तो नई और न ही अचरज भरी बात है। हाल के वर्षों से देश की सर्वोच्च परीक्षा में नारी का पलड़ा वर्ष-दर-वर्ष भारी होता जा रहा है। बीते 23 मई 2023 को सिविल सेवा परीक्षा 2022 के घोषित परिणाम में पहली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/women-shining-in-the-y-of-ias/article-48079"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/ias.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) में किसी लड़की का टॉप करना अब न तो नई और न ही अचरज भरी बात है। हाल के वर्षों से देश की सर्वोच्च परीक्षा में नारी का पलड़ा वर्ष-दर-वर्ष भारी होता जा रहा है। बीते 23 मई 2023 को सिविल सेवा परीक्षा 2022 के घोषित परिणाम में पहली चार टॉपर महिलाएं हैं जो 2014 के सिविल सेवा परीक्षा का हू-ब-हू नतीजा है। गौरतलब है कि 4 जुलाई 2015 को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2014 के सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे घोषित किए गए थे जिसमें फलक पर 2022 की भांति लड़कियां ही थी और पिछले साल यानी2021 के नतीजे में भी लड़कियों से आसमान भरा था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="दुनिया में बढ़ा भारत का गौरव" href="http://10.0.0.122:1245/indias-pride-increased-in-the-world/">दुनिया में बढ़ा भारत का गौरव</a></p>
<p style="text-align:justify;">हालिया परिणाम में कुल 933 के मुकाबले 320 महिलाओं का चयन हुआ है। इस बार भी जिस तरह रैंकिंग (ranking) में शीर्ष स्थानों पर लड़कियों का कब्जा हुआ है ये सिविल सेवा परीक्षा के इतिहास में एक अनूठी मिसाल है। प्रथम 25 में 14 पर लड़कियों का होना इसे पुख्ता करता है। खास यह भी है कि बीते कई वर्षों से हिन्दी माध्यम के नतीजे निराशा से भरे रहे मगर इस मामले में भी आशा बढ़त में है। हिन्दी माध्यम का परिणाम सुधरने से इस माध्यम के प्रतियोगियों को परीक्षा के प्रति सकारात्मक बल जरूर मिलेगा। ब्रिटिश युग से इस्पाती सेवा के रूप में जानी जाने वाली सिविल सेवा वर्तमान भारत में कहीं अधिक सम्मान और भारयुक्त मानी जाती है और यह समय के साथ परिवर्तन के दौर से भी गुजरती रही है। स्वतंत्रता के पश्चात् सर्वाधिक बड़ा फेरबदल वर्ष 1979 की परीक्षा में देखा जा सकता है जो कोठारी समिति की सिफारिशों पर आधारित था।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) प्रारम्भिक, मुख्य एवं साक्षात्कार को समेटते हुए त्रिस्तरीय हो गई और इस परिवर्तित पैटर्न के पहले टॉपर उड़ीसा के डॉ. हशुर्कश पांडा हुए और इसी वर्ष से हिन्दी माध्यम का चलन भी शुरू हुआ। प्रशासनिक सेवा को लेकर हमेशा से ही युवाओं में आकर्षण रहा है साथ ही देश की सेवा का बड़ा अवसर भी इसके माध्यम से देखा जाता रहा है। लाखों युवक-युवतियां इसे अपने कैरियर का माध्यम चुनते हैं। विगत वर्षों से सिविल सेवा के नतीजे लड़कियों की संख्या में तीव्रता लिए हुए हैं। इस बार के नतीजे तो पराकाष्ठा है। यकीनन यह देश की उन तमाम लड़कियों को हिम्मत और ताकत देने का काम करेंगे जो मेहनत के बूते मुकाम हासिल करने का सपना देख रही हैं। यह अधिक खास इसलिए भी है क्योंकि इस बार की प्रथम 4 में से 3 टॉपर दिल्ली विश्वविद्यालय से हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पड़ताल बताती है कि बीते एक दशक में सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) के नतीजे नारी चमक के प्रतीक रहे हैं। विदित हो कि वर्ष 2010, 2011 और 2012 में लगातार लड़कियों ने इस परीक्षा में शीर्षस्थ स्थान हासिल किया जबकि 2013 में गौरव अग्रवाल ने टॉप करके इस क्रम को तोड़ा पर 2014 में पुन: न केवल लड़कियां शीर्षस्थ हुर्इं बल्कि प्रथम से लेकर चतुर्थ स्थान तक का दबदबा बनाए रखने में कामयाब रहीं। साल 2015 में टीना डाबी और वर्ष 2016 में नंदिनी के.आर. ने टॉप कर वर्चस्व को बनाए रखा। वर्ष 2021 के परिणाम में लड़कियां अपना परचम लहराते हुए शीर्ष तीन पर रहीं। वर्ष 2008 का परिणाम भी शुभ्रा सक्सेना के रूप में लड़कियों के ही टॉपर होने का प्रमाण है। रोचक यह भी है कि विगत कुछ वर्षों से लड़कियों की इस परीक्षा में न केवल संख्या बढ़ी है बल्कि टॉपर बनने की परम्परा भी कायम है जो नए युग की परिपक्वता भी है और परिवर्तन की कसौटी भी।</p>
<p style="text-align:justify;">बरसों से यह कसक रही है कि नारी उत्थान और विकास को लेकर कौन सी डगर निर्मित की जाए। स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक इस पर कई प्रकार के नियोजन किए गए जिसमें महिला सशक्तिकरण को देखा जा सकता है। शिक्षा और प्रतियोगिता के क्षेत्र में जिस प्रकार लड़कियां आगे बढ़ी हैं इससे तो लगता है कि उन पर की गई चिंता कामयाबी की ओर झुकने लगी है। प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में इस प्रकार की बढ़ोत्तरी स्त्री-पुरुष समानता के दृष्टिकोण को भी पोषण देने का काम करेगी साथ ही सशक्तिकरण के मार्ग में उत्पन्न व्यवधान को भी दूर करेगी जैसा कि इस बार की चयनित लड़कियों ने भी कुछ इसी प्रकार के उद्गार व्यक्त किए हैं। इसके अलावा समाज में लड़कियों के प्रति कमजोर पड़ रही सोच को भी मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिविल सेवा सपने पूरे होने और टूटने दोनों की हमेशा से गवाह रही है। ब्रिटिश काल से ही ऐसे सपने बुनने की जगह इलाहाबाद रही है जबकि अब वहां हालात बेहतर नहीं है। पहली बार वर्ष 1922 में सिविल सेवा की परीक्षा का एक केन्द्र लन्दन के साथ इलाहाबाद था जो सिविल सेवकों के उत्पादन का स्थान था। पिछले कई वर्षों से हिन्दी माध्यम का परिणाम भी निहायत संकुचित रहा है। साल 2021 में 18वें स्थान पर हिन्दी माध्यम का होना इसकी संकीर्णता को व्यापक करता है और इस बार प्रथम 100 परिणामों में 3 का हिन्दी माध्यम में होना कहीं अधिक सकारात्मकता का संकेत है। साथ ही 54 नतीजे हिन्दी माध्यम के हिस्से में तुलनात्मक बेहतरी का संकेत भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कोई दो राय नहीं कि लगातार महिलाओं का टॉपर होना एक बेमिसाल उपलब्धि है और ऐसा देश के किसी भी हिस्से से सम्भव हो रहा है। बिहार, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश तो कभी तमिलनाडु, राजस्थान टॉपर के हिस्से में जाता रहा है। इसके अलावा भी कई प्रांतों का नाम लिया जा सकता है। खास यह भी है कि जम्मू-कश्मीर से भी 16 अभ्यर्थियों के चयन की सूचना है जिसमें 11वां स्थान हासिल करने वाली लड़की प्रसन्नजीत कौर पुंछ जिले की हैं। अपेक्षाओं के धरातल पर ये जादूगरी कहीं अधिक रोमांचकारी भी है जिस प्रकार टॉप से लेकर मेधा सूची तक की यात्रा में लड़कियां शुमार हुई हैं उसे देखते हुए उनके प्रति सम्मान का एक भाव स्वत: उत्पन्न हो जाता है। इस भरोसे के साथ कि आने पीढ़ी को, समाज को और देश को भी नारी शक्ति का बल प्राप्त होगा। महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकारें नित नए नियोजन से गुजरती रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सिविल सेवा में इनकी उपस्थिति न केवल नारी सशक्तिकरण का परिचायक है बल्कि इस संवेदनशीलता का भी संकेत है कि लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा पर माता-पिता का भरोसा कहीं अधिक बड़ा और बढ़ा है। प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ने से ऐसी सेवाएं न केवल कार्यबल की दृष्टि से मजबूत होंगी बल्कि संवेदनशीलता का भी परिचायक हो सकती हैं। विकास की क्षमता पैदा करना, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और जनता का बकाया विकास उन तक पहुंचाने जैसी तमाम बातों के साथ महिलाओं की प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ती भागीदारी संतुलन के काम आ सकती है। पड़ताल बताती है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में साल 1951 में पहली बार महिलाओं को शामिल करने का फैसला किया गया। इसी वर्ष इस सेवा के लिए केवल एक महिला अन्ना राजम का चयन आईएएस के लिए हुआ था। सात दशक का लम्बा रास्ता तय करने के बाद इस बार के नतीजे में एक तिहाई से अधिक महिलाओं का चयन हुआ है। फिलहाल तो यही कहा जाएगा कि आईएएस के आसामन में लड़कियां अपनी चमक को बढ़ाती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं प्रशासनिक चिंतक (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 11:06:32 +0530</pubDate>
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