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                <title>Motivational Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Motivational Incident: ईमानदारी एक महान गुण</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational Incident: नाव गंगा के इस पार खड़ी है। यात्रियों से लगभग भर चुकी है। रामनगर के लिए खुलने ही वाली है, बस एक-दो सवारी चाहिए। उसी की बगल में एक नवयुवक खड़ा है। नाविक उसे पहचानता है। बोलता है – ‘आ जाओ, खड़े क्यों हो, क्या रामनगर नहीं जाना है?’ नवयुवक ने कहा, ‘जाना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/honesty-is-a-great-virtue/article-51298"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/boat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational Incident: नाव गंगा के इस पार खड़ी है। यात्रियों से लगभग भर चुकी है। रामनगर के लिए खुलने ही वाली है, बस एक-दो सवारी चाहिए। उसी की बगल में एक नवयुवक खड़ा है। नाविक उसे पहचानता है। बोलता है – ‘आ जाओ, खड़े क्यों हो, क्या रामनगर नहीं जाना है?’ नवयुवक ने कहा, ‘जाना है, लेकिन आज मैं तुम्हारी नाव से नहीं जा सकता।?’ क्यों भैया, रोज तो इसी नाव से आते-जाते हो, आज क्या बात हो गई? आज मेरे पास उतराई देने के लिए पैसे नहीं हैं। तुम जाओ। अरे! यह भी कोई बात हुई। आज नहीं, तो कल दे देना। Motivational Incident</p>
<p style="text-align:justify;">नवयुवक ने सोचा, बड़ी मुश्किल से तो माँ मेरी पढ़ाई का खर्च जुटाती हैं। कल भी यदि पैसे का प्रबन्ध नहीं हुआ, तो कहाँ से दूँगा? उसने नाविक से कहा, तुम ले जाओ नौका, मैं नहीं जाने वाला। वह अपनी किताब कापियाँ एक हाथ में ऊपर उठा लेता है और छपाक नदी में कूद जाता है। नाविक देखता ही रह गया। मुख से निकला- अजीब मनमौजी लड़का है। छप-छप करते नवयुवक गंगा नदी पार कर जाता है। रामनगर के तट पर अपनी किताबें रखकर कपड़े निचोड़ता है। भींगे कपड़े पहनकर वह घर पहुँचता है। माँ रामदुलारी इस हालत में अपने बेटे को देखकर चिंतित हो उठी। अरे! तुम्हारे कपड़े तो भीगे हैं? जल्दी उतारो।</p>
<p style="text-align:justify;">नवयुवक ने सारी बात बतलाते हुए कहा, तुम्ही बोलो माँ, अपनी मजबूरी मल्लाह को क्यों बतलाता? फिर वह बेचारा तो खुद गरीब आदमी है। उसकी नाव पर बिना उतराई दिए बैठना कहाँ तक उचित था? यही सोचकर मैं नाव पर नहीं चढ़ा। गंगा पार करके आया हूँ। माँ रामदुलारी ने अपने पुत्र को सीने से लगाते हुए कहा, ‘बेटा, तू जरूर एक दिन बड़ा आदमी बनेगा।’ वह नवयुवक अन्य कोई नहीं लाल बहादुर शास्त्री थे, जो देश के प्रधानमंत्री बने और 18 महीनों में ही राष्ट्र को प्रगति की राह दिखाई।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 15:51:24 +0530</pubDate>
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                <title>अपने दुख की वजह न बनें</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/dont-be-the-cause-of-your-sadness/article-48092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/motivational-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक बार की बात है गौतम बुद्ध किसी नगर में घूम रहे थे। तभी बुद्ध ने सुना कि उस नगर में रहने वाले कुछ लोग बुद्ध को बुरा-भला कह रहे हैं और बद्दुआएं दे रहे हैं। (Motivational Story) दरअसल, उस नगर में रहने वाले बुद्ध के कुछ विरोधियों ने आम नागरिकों के मन में यह बात बिठा दी थी कि गौतम बुद्ध एक ढोंगी व्यक्ति हैं और ये उनके धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं। इस वजह से उस नगर में रहने वाले लोग बुद्ध को पसंद नहीं करते थे और उनको अपना दुश्मन मानते थे। गौतम बुद्ध ने जब नगरवासियों के इन उलाहनों को सुना तो वे एक कोने में शांति से खड़े हो गए और उनकी बुरी बातों को आराम से सुनते रहे। बुद्ध ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="अन्तिम इच्छा" href="http://10.0.0.122:1245/story-last-wish/">अन्तिम इच्छा</a></p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद जब नगरवासी उन्हें बुरा-भला कहते थक गए और चुप हो गए तो गौतम बुद्ध ने उन नगरवासियों से कहा, क्षमा चाहता हूं लेकिन अगर आप लोगों की बातें खत्म हो गई हों तो मैं यहां से जाऊं? यह सुनकर उनको बुरा कहने वाले लोग बहुत आश्चर्यचकित हुए। तभी वहां मौजूद लोगों में से एक व्यक्ति बोला, ‘हम लोग तुम्हारा गुणगान नहीं कर रहे हैं, तुमको उलाहने दे रहे हैं और तुम्हें बुरा बोल रहे हैं, क्या तुम पर इन बातों का कोई असर नहीं हो रहा?’ उस व्यक्ति की बात का जवाब देते हुए गौतम बुद्ध ने कहा, आप सब चाहें मुझे कितना भी भला-बुरा कहें, मैं इन्हें खुद पर नहीं लूंगा क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं कुछ गलत नहीं कर रहा, इसलिए इन बातों को जब तक मैं स्वीकार नहीं करता, तब तक इनका मुझ पर कोई असर नहीं पड़ सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">गौतम बुद्ध ने आगे कहा, जब मैं इन बुराइयों को अपने ऊपर लूंगा ही नहीं तो ये निश्चित तौर पर आपके पास ही रह जाएंगी और मुझ पर असर नहीं करेंगी। (Motivational Story) गौतम बुद्ध का ये प्रेरक प्रसंग हमें यह शिक्षा देता है और इस बात के लिए प्रेरित करता है कि जब आप गलत नहीं हैं तो किसी की गलत और निगेटिव बातों का असर कभी भी खुद पर न लें, क्योंकि इससे आप अपने ही दुखों की वजह स्वयं बन सकते हैं।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 16:15:01 +0530</pubDate>
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