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                <title>Motivational Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Motivational Story RSS Feed</description>
                
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                <title>An Inspiring Family Story: रिश्तों में मिठास! एक छोटे बदलाव ने बदल दिए पूरे परिवार के रिश्ते</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए कैसे एक सास ने अपनी बहू की भावनाओं को समझकर परिवार के रिश्तों में नई मिठास घोल दी। पढ़ें भावनात्मक और प्रेरणादायक पारिवारिक कहानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/an-inspiring-family-story-sweetness-in-relationships-a-small-change/article-88868"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/family-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">An Inspiring Family Story: निशा ने अपनी मां को फोन करते हुए कहा, ‘मां, घर संभालते-संभालते मैं बहुत थक गई हूं। यहां मेरी थकान को कोई समझता ही नहीं। मेरा मन है कि कुछ दिन आराम करूं। मैं सोच रही हूं कि कुछ दिनों के लिए मायके आ जाऊं। बच्चों को भी साथ ले आऊंगी, वे वहीं से स्कूल चले जाएंगे। आखिर ससुराल और मायका एक ही शहर में होने का कुछ फायदा तो मिलना चाहिए।’ मां कमला ने प्यार से जवाब दिया, ‘हां बेटी, जब मन करे आ जाना। आखिर यह घर तुम्हारा भी है।’ निशा खुशी से बोली, ‘ठीक है मां, मैं कल ही आ जाऊंगी।’ Inspiring Story</p>
<p style="text-align:justify;">कमला ने कहा, ‘हां बेटा, कल आ जाना। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी। अब मैं फोन रखती हूं, मुझे मंदिर भी जाना है।’ फोन रखने के बाद कमला सीधे रसोई में गई। वहां उसकी बहू पूजा खाना बना रही थी। कमला ने कहा, ‘पूजा, सुनो, निशा कल आ रही है। आज बाजार जाकर फल, सब्जियां और मिठाई ले आना। मेरी बेटी अपने ससुराल में बहुत काम करती है। कोई उसकी थकान नहीं समझता। अगर वह यहां कुछ दिन रह लेगी तो उसका मन और स्वास्थ्य दोनों ठीक हो जाएंगे।’ सास की बातें सुनकर पूजा का चेहरा उदास हो गया। उसके मन में कई सवाल उठने लगे। उसने सोचा, ‘काश! मेरी थकान भी कोई देख पाता। मैं भी दिन-रात घर के कामों में लगी रहती हूं। झाड़ू-पोंछा, बर्तन, खाना बनाना, बाजार जाना और परिवार की हर जरूरत का ध्यान रखना, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। लेकिन मेरी मेहनत और मेरी भावनाओं को कोई क्यों नहीं समझता?’</p>
<p style="text-align:justify;">पूजा के मन में आया, ‘आपकी बेटी जब चाहती है, मायके आ जाती है, लेकिन मैं साल में केवल एक बार अपने माता-पिता से मिलने जा पाती हूं। क्या मेरा मन नहीं करता कि मैं भी मां के पास बैठूं, अपने सुख-दुख बांटूं और कुछ समय आराम करूं? मैं भी इंसान हूं, मेरी भी भावनाएं हैं।’ उसने मन ही मन भगवान से प्रार्थना की, ‘हे प्रभु! मेरी सास को मेरी थकान भी दिखाई दे, उन्हें मेरी भावनाएं भी समझ आएं।’</p>
<p style="text-align:justify;">शाम तक ऐसा लगा जैसे पूजा की प्रार्थना सुन ली गई हो। निशा ने अपनी मां को फोन करके बताया कि उसकी सास ने इस बार मायके आने से मना कर दिया है। कमला हैरान रह गई। उसने कहा, ‘ऐसा कैसे हो सकता है? उन्होंने तो पहले कभी तुम्हें आने से नहीं रोका। इस बार क्या हुआ? मुझे उनसे बात करने दो, मैं समझाती हूं।’ निशा ने फोन अपनी सास को दे दिया। कमला ने कहा, ‘नमस्कार बहन जी, मैं आपसे एक बात कहना चाहती थी। निशा त्योहार के कारण मायके आना चाहती है। अगर आप उसे भेज दें तो अच्छा रहेगा।’ Inspiring Story</p>
<p style="text-align:justify;">निशा की सास ने शांत स्वर में कहा, ‘बहन जी, आपकी बेटी मायके आए, हमें इससे कोई परेशानी नहीं है। हमने उसे कभी नहीं रोका। लेकिन कुछ दिन पहले मेरी मुलाकात आपकी बहू पूजा की मां से हुई थी। बातचीत में पता चला कि पूजा साल में केवल एक बार और बहुत कम समय के लिए अपने मायके जा पाती है।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा मानना है कि पहले आपको पूजा को उसके मायके भेजना चाहिए। जब वह वापस आ जाएगी, तब मैं निशा को आपके पास भेज दूंगी।’ कमला चुप हो गई। पूजा की सास ने आगे कहा, ‘एक बात आपको समझनी चाहिए कि बहू को भी बेटी जैसा प्यार और सम्मान चाहिए। वह भी अपने माता-पिता के घर जाना चाहती है। अगर हम बहू की भावनाओं को दबाते रहेंगे तो एक दिन रिश्तों में दूरी आ सकती है। रिश्तों की मिठास बनाए रखने के लिए समय रहते बदलाव करना जरूरी है।’ Inspiring Story</p>
<p style="text-align:justify;">कमला को अपनी कुड़मणी की बातों में सच्चाई नजर आई। उसे एहसास हुआ कि बेटी के प्यार में वह इतनी डूब गई थी कि बहू की भावनाओं को समझ ही नहीं पाई। वह हमेशा अपनी बेटी को बहू से अधिक महत्व देती रही। निशा भी यह बातचीत सुन रही थी। उसे भी अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सोचा कि उसने कभी अपनी भाभी पूजा से दिल खोलकर बात नहीं की। जब भी वह मायके आती थी, उसकी भाभी के चेहरे की उदासी को उसने कभी समझने की कोशिश नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">कमला ने पूजा को बुलाकर कहा, ‘बेटी पूजा, निशा अभी कुछ दिनों के लिए नहीं आ रही है। इसलिए तुम पहले अपने मायके होकर आओ।’ यह सुनते ही पूजा के चेहरे पर खुशी की चमक आ गई। यह पहली बार था जब उसकी सास ने खुद उसे मायके जाने के लिए कहा था। अगले दिन पूजा अपने मायके चली गई। इस बार वह केवल एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे एक सप्ताह तक वहां रही। उसने अपने माता-पिता और रिश्तेदारों से मुलाकात की। जब वह वापस लौटी तो उसके चेहरे पर खुशी और आंखों में नई चमक थी। पूजा के लौटने के बाद निशा भी मायके आ गई। इस बार उसने खुद आगे बढ़कर अपनी भाभी से प्यार से बात की और दोनों ने खूब बातें कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब पूजा भी अपने ससुराल के बदले व्यवहार से खुश थी। वह पूरे मन से परिवार की देखभाल करती और प्यार से अपनी जिम्मेदारियां निभाती। वह हमेशा इस बात का ध्यान रखती कि उसके किसी शब्द या व्यवहार से घर का माहौल खराब न हो। कमला भी समय-समय पर पूजा को उसके मायके भेजने लगी। एक छोटे से बदलाव ने सास, बहू, ननद और भाभी के रिश्तों में आई कड़वाहट को हमेशा के लिए दूर कर दिया। Inspiring Story<br /><strong>जसविन्द्रपाल शर्मा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 16:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Motivational Incident: ईमानदारी एक महान गुण</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational Incident: नाव गंगा के इस पार खड़ी है। यात्रियों से लगभग भर चुकी है। रामनगर के लिए खुलने ही वाली है, बस एक-दो सवारी चाहिए। उसी की बगल में एक नवयुवक खड़ा है। नाविक उसे पहचानता है। बोलता है – ‘आ जाओ, खड़े क्यों हो, क्या रामनगर नहीं जाना है?’ नवयुवक ने कहा, ‘जाना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/honesty-is-a-great-virtue/article-51298"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/boat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational Incident: नाव गंगा के इस पार खड़ी है। यात्रियों से लगभग भर चुकी है। रामनगर के लिए खुलने ही वाली है, बस एक-दो सवारी चाहिए। उसी की बगल में एक नवयुवक खड़ा है। नाविक उसे पहचानता है। बोलता है – ‘आ जाओ, खड़े क्यों हो, क्या रामनगर नहीं जाना है?’ नवयुवक ने कहा, ‘जाना है, लेकिन आज मैं तुम्हारी नाव से नहीं जा सकता।?’ क्यों भैया, रोज तो इसी नाव से आते-जाते हो, आज क्या बात हो गई? आज मेरे पास उतराई देने के लिए पैसे नहीं हैं। तुम जाओ। अरे! यह भी कोई बात हुई। आज नहीं, तो कल दे देना। Motivational Incident</p>
<p style="text-align:justify;">नवयुवक ने सोचा, बड़ी मुश्किल से तो माँ मेरी पढ़ाई का खर्च जुटाती हैं। कल भी यदि पैसे का प्रबन्ध नहीं हुआ, तो कहाँ से दूँगा? उसने नाविक से कहा, तुम ले जाओ नौका, मैं नहीं जाने वाला। वह अपनी किताब कापियाँ एक हाथ में ऊपर उठा लेता है और छपाक नदी में कूद जाता है। नाविक देखता ही रह गया। मुख से निकला- अजीब मनमौजी लड़का है। छप-छप करते नवयुवक गंगा नदी पार कर जाता है। रामनगर के तट पर अपनी किताबें रखकर कपड़े निचोड़ता है। भींगे कपड़े पहनकर वह घर पहुँचता है। माँ रामदुलारी इस हालत में अपने बेटे को देखकर चिंतित हो उठी। अरे! तुम्हारे कपड़े तो भीगे हैं? जल्दी उतारो।</p>
<p style="text-align:justify;">नवयुवक ने सारी बात बतलाते हुए कहा, तुम्ही बोलो माँ, अपनी मजबूरी मल्लाह को क्यों बतलाता? फिर वह बेचारा तो खुद गरीब आदमी है। उसकी नाव पर बिना उतराई दिए बैठना कहाँ तक उचित था? यही सोचकर मैं नाव पर नहीं चढ़ा। गंगा पार करके आया हूँ। माँ रामदुलारी ने अपने पुत्र को सीने से लगाते हुए कहा, ‘बेटा, तू जरूर एक दिन बड़ा आदमी बनेगा।’ वह नवयुवक अन्य कोई नहीं लाल बहादुर शास्त्री थे, जो देश के प्रधानमंत्री बने और 18 महीनों में ही राष्ट्र को प्रगति की राह दिखाई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PM e-Bus Seva : देश के 100 शहरों में 10 हजार ई-बसें चलाने का केन्द्र का सही फैसला" href="http://10.0.0.122:1245/centers-right-decision-to-run-e-buses/">PM e-Bus Seva : देश के 100 शहरों में 10 हजार ई-बसें चलाने का केन्द्र का सही फैसला</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 15:51:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अपने दुख की वजह न बनें</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार की बात है गौतम बुद्ध किसी नगर में घूम रहे थे। तभी बुद्ध ने सुना कि उस नगर में रहने वाले कुछ लोग बुद्ध को बुरा-भला कह रहे हैं और बद्दुआएं दे रहे हैं। (Motivational Story) दरअसल, उस नगर में रहने वाले बुद्ध के कुछ विरोधियों ने आम नागरिकों के मन में यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/dont-be-the-cause-of-your-sadness/article-48092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/motivational-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक बार की बात है गौतम बुद्ध किसी नगर में घूम रहे थे। तभी बुद्ध ने सुना कि उस नगर में रहने वाले कुछ लोग बुद्ध को बुरा-भला कह रहे हैं और बद्दुआएं दे रहे हैं। (Motivational Story) दरअसल, उस नगर में रहने वाले बुद्ध के कुछ विरोधियों ने आम नागरिकों के मन में यह बात बिठा दी थी कि गौतम बुद्ध एक ढोंगी व्यक्ति हैं और ये उनके धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं। इस वजह से उस नगर में रहने वाले लोग बुद्ध को पसंद नहीं करते थे और उनको अपना दुश्मन मानते थे। गौतम बुद्ध ने जब नगरवासियों के इन उलाहनों को सुना तो वे एक कोने में शांति से खड़े हो गए और उनकी बुरी बातों को आराम से सुनते रहे। बुद्ध ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="अन्तिम इच्छा" href="http://10.0.0.122:1245/story-last-wish/">अन्तिम इच्छा</a></p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद जब नगरवासी उन्हें बुरा-भला कहते थक गए और चुप हो गए तो गौतम बुद्ध ने उन नगरवासियों से कहा, क्षमा चाहता हूं लेकिन अगर आप लोगों की बातें खत्म हो गई हों तो मैं यहां से जाऊं? यह सुनकर उनको बुरा कहने वाले लोग बहुत आश्चर्यचकित हुए। तभी वहां मौजूद लोगों में से एक व्यक्ति बोला, ‘हम लोग तुम्हारा गुणगान नहीं कर रहे हैं, तुमको उलाहने दे रहे हैं और तुम्हें बुरा बोल रहे हैं, क्या तुम पर इन बातों का कोई असर नहीं हो रहा?’ उस व्यक्ति की बात का जवाब देते हुए गौतम बुद्ध ने कहा, आप सब चाहें मुझे कितना भी भला-बुरा कहें, मैं इन्हें खुद पर नहीं लूंगा क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं कुछ गलत नहीं कर रहा, इसलिए इन बातों को जब तक मैं स्वीकार नहीं करता, तब तक इनका मुझ पर कोई असर नहीं पड़ सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">गौतम बुद्ध ने आगे कहा, जब मैं इन बुराइयों को अपने ऊपर लूंगा ही नहीं तो ये निश्चित तौर पर आपके पास ही रह जाएंगी और मुझ पर असर नहीं करेंगी। (Motivational Story) गौतम बुद्ध का ये प्रेरक प्रसंग हमें यह शिक्षा देता है और इस बात के लिए प्रेरित करता है कि जब आप गलत नहीं हैं तो किसी की गलत और निगेटिव बातों का असर कभी भी खुद पर न लें, क्योंकि इससे आप अपने ही दुखों की वजह स्वयं बन सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 16:15:01 +0530</pubDate>
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