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                <title>Manipur Violence - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Manipur Violence News: सीएम बीरेन सिंह ने भड़काई हिंसा? सुप्रीम कोर्ट की बड़ी अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme Court: मणिपुर हिंसा मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह (CM Biren Singh ) द्वारा जातीय हिंसा भड़काने वाले कथित ऑडियो क्लिप पर फोरेंसिक रिपोर्ट मांगी है। एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है कि मणिपुर में जातीय झड़पों से बीरेन सिंह को जोड़ने वाले कुछ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-violence-case-did-cm-biren-singh-incite-violence/article-67052"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-02/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Supreme Court: मणिपुर हिंसा मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह (CM Biren Singh ) द्वारा जातीय हिंसा भड़काने वाले कथित ऑडियो क्लिप पर फोरेंसिक रिपोर्ट मांगी है। एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है कि मणिपुर में जातीय झड़पों से बीरेन सिंह को जोड़ने वाले कुछ ऑडियो टेप पर सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की फोरेंसिक लैब रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपना है। रिपोर्ट के अनुसार इसकी अपडेट सुप्रीम कोर्ट से दी गई है। Manipur Violence News</p>
<p><a title="Gold-Silver Price Today: भारत में सोना हो गया सस्ता, कीमतों में आई बड़ी भारी गिरावट!" href="http://10.0.0.122:1245/gold-has-become-cheaper-in-india-prices-have-fallen-drastically/">Gold-Silver Price Today: भारत में सोना हो गया सस्ता, कीमतों में आई बड़ी भारी गिरावट!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 12:43:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Manipur Violence: मणिपुर में हिंसा बढ़ी! मैतेई समूह ने सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम!</title>
                                    <description><![CDATA[Manipur Violence News: मणिपुर (एजेंसी)। मणिपुर में हिंसा के कारण तेजी से संकट भी बढ़ते जा रहे हैं, इसी के चलते नागरिक समाज समूहों ने बीरेन सिंह सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें सशस्त्र उग्रवादी समूहों के खिलाफ तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की मांग की गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/violence-increased-in-manipur-meitei-group-gave-24-hour-ultimatum-to-the-government/article-64399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/manipur-violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Manipur Violence News: मणिपुर (एजेंसी)। मणिपुर में हिंसा के कारण तेजी से संकट भी बढ़ते जा रहे हैं, इसी के चलते नागरिक समाज समूहों ने बीरेन सिंह सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें सशस्त्र उग्रवादी समूहों के खिलाफ तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की मांग की गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में लगातार हिंसक गतिविधियों के कारण अशांति फैल रही है, जिसको देखते हुए मैतेई समूह द्वारा कार्रवाई का आह्वान किया गया है, इसी के तहत शनिवार शाम भीड़ द्वारा सीएम एन बीरेन सिंह के आवास पर हमला भी करने की कोशिश की गई। Manipur Violence</p>
<h3 style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने की पीएम दौरे की मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में बढ़ती हिंसा को देखते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य का दौरा करने और शांति बहाल करने के लिए कदम उठाने की मांग की है। विपक्ष के नेता गांधी ने एक्स पर अपनी गहरी चिंता जाहित करते हुए कहा कि मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसक झड़पों और खून-खराबा करने वाली गतिविधियां बेहद परेशान करने वाली है। राहुल गांधी ने कहा कि विभाजन को एक साल से ज्यादा का समय हो चला है और पीड़ा भी बढ़ गई हैं। हर भारतीय की उम्मीद थी कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कोई न कोई समाधान निकाल लेंगी। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोबारा मणिपुर में शांति और सुधार के लिए कदम उठाने का आग्रह करता हंू।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हिंसा के दौरान सरकारी संपत्तियों पर हमला | Manipur Violence</h3>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर हिंसा से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारियों द्वारा शनिवार को 3 राज्य मंत्रियों और 6 विधानसभा सदस्यों के घरों पर भी हमला किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री और भाजपा एन नेता बीरेन सिंह भी शामिल थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला?</h3>
<p style="text-align:justify;">6 व्यक्तियों के लापता होने के बाद उनके शव जिरीबाम में एक नदी से बरामद होने के बाद हिंसा फैल गई और जिसको लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने संपत्ति में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के दामाद भाजपा विधायक आरके इमो के सागोलबंद आवास के बाहर प्रदर्शन करने हेतु एकत्र हुए। सुरक्षा बलों ने भी स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मणिपुर की राजधानी इंफाल के विभिन्न हिस्सों में आंसू गैस के गोले छोड़े। Manipur Violence</p>
<p><a title="RHFL Fund Case: रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट को 26 करोड़ रुपये का नोटिस!" href="http://10.0.0.122:1245/sebi-issues-notice-of-rs-26-crore-to-reliance-big-entertainment/">HFL Fund Case: रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट को 26 करोड़ रुपये का नोटिस!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Nov 2024 10:28:21 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur Violence: छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते 5 दिन बंद रहेगा इंटरनेट!</title>
                                    <description><![CDATA[Internet Closed: इंफाल (एजेंसी)। मणिपुर सरकार ने बढ़ते तनाव और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पूरे राज्य में इंटरनेट सेवाएं पांच दिनों के लिए बंद कर दी। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इंटरनेट बंद 15 सितंबर तक जारी रहेगा। मणिपुर के ख्वाइरामबंद महिला बाजार में सोमवार से डेरा डाले सैकड़ों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/internet-will-remain-closed-for-5-days-due-to-student-protest/article-62033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/curfew-shillong.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Internet Closed: इंफाल (एजेंसी)। मणिपुर सरकार ने बढ़ते तनाव और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पूरे राज्य में इंटरनेट सेवाएं पांच दिनों के लिए बंद कर दी। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इंटरनेट बंद 15 सितंबर तक जारी रहेगा। मणिपुर के ख्वाइरामबंद महिला बाजार में सोमवार से डेरा डाले सैकड़ों छात्रों ने मंगलवार को बीटी रोड के किनारे राजभवन की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस भवन के पास सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि डीजीपी और मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार को हटाने की मांग को लेकर राजभवन की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे छात्रों और महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प के दौरान आंसू गैस के गोले दागे गए। मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी विरोध रैली निकाली और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका। मणिपुर सरकार ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर इंफाल पूर्व और पश्चिम जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है और थौबल में बीएनएसएस की धारा 163 (2) के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। Manipur Violence</p>
<p><a title="Landslide on Kedarnath: केदारनाथ में तीर्थयात्रियों पर बरपा कुदरत का कहर!, पांच मरे" href="http://10.0.0.122:1245/landslide-on-kedarnath-road-five-dead/">Landslide on Kedarnath: केदारनाथ में तीर्थयात्रियों पर बरपा कुदरत का कहर!, पांच मरे</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 18:06:33 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur: महिलाओं एवं बच्चियों के लापता होने की त्रासदी</title>
                                    <description><![CDATA[Manipur: मणिपुर में 19 जुलाई को दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का वीडियो वायरल हुआ था, उस घटना ने देश-विदेश के सभ्य समाजों को झकझोर दिया है। अब ऐसी ही एक घटना पश्चिम बंगाल के मालदा में सामने आई है। यहां भीड़ ने दो महिलाओं की पिटाई की, फिर उन्हें अर्धनग्न कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/tragedy-of-missing-women-and-girls/article-51081"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/manipur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Manipur: मणिपुर में 19 जुलाई को दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का वीडियो वायरल हुआ था, उस घटना ने देश-विदेश के सभ्य समाजों को झकझोर दिया है। अब ऐसी ही एक घटना पश्चिम बंगाल के मालदा में सामने आई है। यहां भीड़ ने दो महिलाओं की पिटाई की, फिर उन्हें अर्धनग्न कर दिया गया। यह घटना मालदा के बामनगोला पुलिस स्टेशन के पाकुआ हाट इलाके में हुई। दोनों पीड़ित महिलाएं आदिवासी हैं। जब उनकी पिटाई हो रही थी और कपड़े उतारे जा रहे थे तो पुलिस वहां मूकदर्शक बनी खड़ी हुई थी। Manipur</p>
<p style="text-align:justify;">बात केवल आदिवासी महिलाओं की नहीं है, बात केवल महिलाओं पर हो रहे अपराधों, उत्पीड़न, हिंसा की भी नहीं है, बल्कि अधिक विचलित करने वाली बात महिलाओं एवं बच्चियों के लापता होने की है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की ओर से संकलित आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2021 के बीच यानी मात्र तीन सालों में देश भर में 13 लाख से अधिक लड़कियां और महिलाएं लापता हुई हैं। इन लापता होने वाली लड़कियों और महिलाओं में दलित, आदिवासी जनजाति की संख्या ज्यादा है। Manipur</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया की तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था वाले देश की महिलाएं मध्ययुग से भी ज्यादा सामंती सोच, असंवेदना, असुरक्षा, हिंसा, वीभत्स अपराधों और हवस की शिकार बन रही हैं। आज जब देश में हर मुद्दे पर बहस छिड़ जाना आम बात हो गई है, दर्जनों टी.वी. चैैनल एक से ही सवाल पर घंटों बहस करते हैं, आम चुनाव की चौखट पर खड़े देश के राजनीतिक दल ज्वलंत मुद्दों के नाम पर सरकार को घेरने की तलाश में रहते हैं तो इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के लापता होने एवं यौन-उत्पीड़न के सवालों पर बहस क्यों नहीं छेड़ी जाती? बहस इस बात पर भी होनी चाहिए कि दिल्ली के निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित कानूनों को कठोर किया गया लेकिन कानून बन जाने के बाद भी स्थितियां क्यों नहीं सुधरी हैं? चिन्ता का कारण है कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कोई विशेष कमी आती नहीं दिख रही है। Manipur</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ा प्रश्न है कि तमाम कानून एवं सुरक्षा व्यवस्थाएं होने के बावजूद आखिर इतनी बड़ी संख्या में लड़कियां और महिलाए कहां गायब हो रही हैं? यह वह प्रश्न है, जिसका उत्तर नीति-नियंताओं के साथ ही समाज को भी देना होगा, क्योंकि यह ऐसा मामला नहीं, जिसके लिए केवल सरकारों को कठघरे में खड़ा कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाए। गायब होती लड़कियों और महिलाओं के मामले में समाज भी उत्तरदायी है। राजनीतिक दल भी इसके दोषी हैं। इन सबकोे अपने अंदर झांकना होगा और स्वयं से यह प्रश्न करना होगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि देश के कई हिस्सों में अभी बालक-बालिकाओं का अनुपात संतुलित नहीं हुआ है, क्योंकि कन्या भ्रूण हत्या का सिलसिला कायम है। यह सिलसिला कानूनों को कठोर करने के बाद भी कायम है।</p>
<p style="text-align:justify;">गायब होने वाली लड़कियों में ज्यादा संख्या नाबालिग लड़कियों की भी है। इसका मतलब है कि नारी सुरक्षा का मामला बहुत ही गंभीर है। यह मानने का कोई कारण नहीं कि 2021 के बाद स्थितियों में सुधार आया होगा, क्योंकि लड़कियों और महिलाओं के लापता होने या उनका अपहरण किए जाने अथवा बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के समाचार आए दिन आते ही रहते हैं। महिलाओं के प्रति यह संवेदनहीनता एवं बर्बरता कब तक चलती रहेगी? भारत विकास के रास्ते पर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी कई हिस्सों में महिलाओं को लेकर गलत धारणाएं बनी हुई हैं। एक विकृत मानसिकता भी कायम है कि वे भोग्य वस्तुएं हैं? उन्हें पांव के नीचे रखा जाना चाहिए। लापता होने की</p>
<p style="text-align:justify;">घटनाएं आए दिन होने वाले जघन्य अपराधों की ही अगली कड़ी है, मगर यह पुरुषवादी सोच और समाज के उस ढांचे को भी सामने करती है, जिसमें महिलाओं की सहज जिंदगी लगातार मुश्किल बनी हुई है, संकटग्रस्त एवं असुरक्षित है। भले ही महिलाओं ने अपनी जंजीरों के खिलाफ बगावत कर दी है, लेकिन देश में ऐसा वर्ग भी है जहां आज भी महिलाएं अत्याचार का शिकार होती हैं। आदिवासी महिलाएं भी बड़ी संख्या में लापता हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही एक खास महिला वर्ग ने आर्थिक मोर्चे पर आजादी हासिल की है, लेकिन एक बड़ा महिला वर्ग आज भी पुरुषप्रधान समाज की संकीर्ण एवं विकृत सोच का शिकार है। ऐसे में महिलाएं अपनी अस्मिता एवं अस्तित्व की सुरक्षा की गुहार लगातीं हुई दिखाई देती है। इसलिये कि उन्हें सदियों से चली आ रही मानसिकता, साजिश एवं सजा के द्वारा भीतरी सुरंगों में धकेल दिया जाता है, अत्याचार भोगने को विवश किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिन्ता की बात यह है कि इन शर्मसार करने एवं झकझोर देने वाली घटनाओं पर भी राजनीतिक दल राजनीति करने से बाज नहीं आते। इन अति संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक लाभ की रोटियां सेंकना दुर्भाग्यपूर्ण है। अच्छा हो सभी मिलकर नारी सम्मान के प्रति सचेत और संवेदनशील होकर उनके लापता होने, उन पर लगातार हो रहे अत्याचारों को रोकने की दिशा में कोई प्रभावी एवं सार्थक पहल करें। गायब होती लड़कियों और महिलाओं की बड़ी संख्या यही बताती है कि भारतीय समाज उनके प्रति अनुदार है। इस अनुदारता को दूर करने के लिए सबसे अधिक राजनीतिक वर्ग को ही आगे आना होगा और अनिवार्य रूप से समाज को भी। Manipur</p>
<p style="text-align:justify;">नरेन्द्र मोदी की पहल पर निश्चित ही महिलाओं पर लगा दोयम दर्जे का लेबल हट रहा है। हिंसा एवं अत्याचार की घटनाओं में भी कमी आ रही है। बड़ी संख्या में छोटे शहरों और गांवों की लड़कियां पढ़-लिखकर देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे उन क्षेत्रों में जा रही हैं, जहां उनके जाने की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। वे टैक्सी, बस, ट्रक से लेकर जेट तक चला-उड़ा रही हैं। सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा कर रही है। अपने दम पर व्यवसायी बन रही हैं। होटलों की मालिक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर स्टार्टअप शुरू कर रही हैं। वे विदेशों में पढ़कर नौकरी नहीं, अपने गांव का सुधार करना चाहती हैं। अब सिर्फ अध्यापिका, नर्स, बैंकों की नौकरी, डॉक्टर आदि बनना ही लड़कियों के क्षेत्र नहीं रहे, वे अन्य क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह नारी एवं बालिका शक्ति ने अपना महत्व तो दुनिया को समझाया है, लेकिन नारी एवं बालिका के प्रति हो रहे अपराधों में कमी न आना, घरेलू हिंसा का बढ़ना, आदिवासी-दलित महिलाओं एवं बालिकाओं पर अत्याचारों का बढ़ना एवं उनका लापता होना, उनकी सुरक्षा खतरे में होना- ऐसे चिन्तनीय प्रश्न हैं, जिन पर सरकार को कठोर बनना होगा, सख्त व्यवस्था बनानी होगी। सरकार ने सख्ती बरती है, लेकिन आम पुरुष की सोच को बदलने बिना नारी एवं बालिका सम्मान की बात अधूरी ही रहेगी। इस अधूरी सोच को बदलना नये भारत का संकल्प हो।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Nuh Violence: नूंह में स्कूलों को लेकर आई बड़ी अपडेट" href="http://10.0.0.122:1245/schools-open-after-ten-days-of-violence/">Haryana Nuh Violence: नूंह में स्कूलों को लेकर आई बड़ी अपडेट</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/tragedy-of-missing-women-and-girls/article-51081</link>
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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2023 16:09:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंजाब बन्द का आह्वान: फिरोजपुर शहर व छावनी मुकम्मल रहे बंद</title>
                                    <description><![CDATA[साथ लगते कस्बे गुरूहरसहाए, ममदोट, तलवंडी आम दिनों की तरह खुले फिरोजपुर (सच कहूँ/सतपाल थिन्द)। मणीपुर में घटी घटना (Manipur Violence) के विरोध में बुधवार को विभिन्न भाईचारों द्वारा दिए गए पंजाब बन्द के आह्वान का असर पंजाब के बाकी जिलों में देखने को मिला, वहीं फिरोजपुर में पंजाब बन्द के आह्वान की कॉल का […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/firozpur-city-and-cantonment-remained-closed-in-protest-against-the-incident-in-manipur/article-51022"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/firozpur-news.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">साथ लगते कस्बे गुरूहरसहाए, ममदोट, तलवंडी आम दिनों की तरह खुले</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजपुर (सच कहूँ/सतपाल थिन्द)।</strong> मणीपुर में घटी घटना (Manipur Violence) के विरोध में बुधवार को विभिन्न भाईचारों द्वारा दिए गए पंजाब बन्द के आह्वान का असर पंजाब के बाकी जिलों में देखने को मिला, वहीं फिरोजपुर में पंजाब बन्द के आह्वान की कॉल का असर भी दिखाई दिया, जिस दौरान फिरोजपुर शहर और छावनी मुकंमल बन्द रहा। इसके अलावा फिरोजपुर के साथ लगते बडेÞ कस्बे में कुछ खास असर दिखाई नहीं दिया। Firozpur News</p>
<p style="text-align:justify;">जिसमें जीरा, खाई फेमे कि दे बजार भी बन्द रहे लेकिन गुरूहरसहाए, ममदोट, तलवंडी जैसे कस्बे आम दिनों की तरह खुले रहे। इस दौरान पुलिस भी चप्पे-चप्पे पर तैनात रही। वहीं इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शहर और छावनी में केन्द्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और बाजारों में पुतला फूंक मार्च भी निकाला, जिस दौरान पुलिस कर्मी भी प्रदर्शनकारियों के साथ तैनात रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">नेताओं ने कहा कि मणीपुर में दलित महिलाओं पर अत्त्याचार हो रहे हैं लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले घिनौने कार्य के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवार्ई की जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसा कर्म करने के बारे में सोच भी न सके। Firozpur News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एलपीयू चांसलर व राज्यसभा सांसद डॉ. मित्तल प्रधानमंत्री मोदी से मिले" href="http://10.0.0.122:1245/lpu-chancellor-and-rajya-sabha-mp-dr-mittal-met-prime-minister-modi/">एलपीयू चांसलर व राज्यसभा सांसद डॉ. मित्तल प्रधानमंत्री मोदी से मिले</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/firozpur-city-and-cantonment-remained-closed-in-protest-against-the-incident-in-manipur/article-51022</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 21:52:06 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर यौन हिंसा मामले में पीड़ितों का बयान दर्ज करने पर लगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह मंगलवार को सुनवाई पूरी होने तक मणिपुर यौन हिंसा वायरल वीडियो मामले की दो बलात्कार पीड़िताओं से न तो बातचीत करे और न ही उनके बयान दर्ज करे। शीर्ष अदालत ने इस मामले में पीड़ित महिलाओं की याचिकाओं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ban-on-recording-statement-of-victims-in-manipur-sexual-violence-case/article-50677"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/delhi-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह मंगलवार को सुनवाई पूरी होने तक मणिपुर यौन हिंसा वायरल वीडियो मामले की दो बलात्कार पीड़िताओं से न तो बातचीत करे और न ही उनके बयान दर्ज करे। शीर्ष अदालत ने इस मामले में पीड़ित महिलाओं की याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई की थी और आगे की सुनवाई के लिए आज (मंगलवार) अपराह्न दो बजे का समय मुकर्रर की थी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता बन वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दो पीड़ित महिलाओं की ओर से इस मामले में किए गए ‘विशेष उल्लेख’ पर मौखिक रूप से आदेश जारी किया। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पीठ की ओर से मौखिक आदेश में कहा, ‘चूंकि शीर्ष अदालत मंगलवार को दोपहर दो बजे मामले की सुनवाई करने वाली है। इस वजह से बेहतर होगा कि सीबीआई आज मंगलवार की सुनवाई से पहले उन महिलाओं के बयान दर्ज न करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष कहा कहा कि अगर सीबीआई इस मामले में तुरंत बयान दर्ज नहीं करती है तो पीड़ितों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल हम (सरकार) पर निष्क्रियता का आरोप लगाएंगे और कहेंगे कि हम अपना कर्तव्य नहीं निभा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सिब्बल ने सोमवार को शीर्ष अदालत के समक्ष सरकार की कथित निष्क्रियता के खिलाफ याचिका दायर करने दोनों महिलाओं का पक्ष रखा था। उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर जातीय हिंसा के दौरान राज्य में चार मई को दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने के मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को कहा था कि इस दलील के साथ इसे (घटना को) सही नहीं ठहराया जा सकता कि ऐसी घटनाएं अन्य जगहों (राज्यों) पर भी हुई हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की तीन सदस्यीय पीठ ने मणिपुर में दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में ‘जीरो एफआईआर’ (जिसमें आमतौर पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाती है) 18 मई को दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए थे। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता से कई सवाल पूछे थे। पीठ ने पूछा घटना के बाद 14 दिनों तक वहां की पुलिस क्या कर रही थी? तत्काल प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई? पुलिस को इसमें क्या दिक्कत थी?</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले को भी मणिपुर के साथ सुनवाई करने की अधिवक्ता बांसुरी स्वराज दलील पर पीठ ने अपना रुख स्पष्ट किया। अधिवक्ता ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर दोनों राज्यों से संबंधित मामलों की सुनवाई मणिपुर के साथ करने की गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अधिवक्ता की दलील पर कहा था, ‘इस में इनकार नहीं किया जा सकता कि पश्चिम बंगाल (और छत्तीसगढ़ ) में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं, लेकिन यहां (मणिपुर) मामला अलग है। यहां हम सांप्रदायिक हिंसा और इसमें में महिलाओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा के मामले पर सुनवाई कर रहे हैं। मणिपुर में जो हुआ उसे हम यह कहकर उचित नहीं ठहरा सकते कि कुछ इसी तरह की घटना कहीं (पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़) और हुई।’</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने में देरी को लेकर पूछे गए सवालों पर श्री मेहता ने राज्य सरकार का पक्ष रखा था। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि वीडियो वायरल (दो निर्वस्त्र महिलाओं से संबंधित) होने के 24 घंटे के भीतर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उस थाने में 20 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इसी प्रकार राज्य भर में 6000 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने मणिपुर के आपत्तिजनक वीडियो 19 जुलाई 2023 को वायरल होने के मामले में पिछले सप्ताह स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ी चेतावनी के साथ केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। केंद्र सरकार ने 27 जुलाई को अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि हिंसा और महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई हैं। केंद्र सरकार ने इसके साथ ही हिंसा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई किसी अन्य राज्य में कराने की भी गुहार शीर्ष अदालत से लगाई है। Manipur Violence</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कन्या कॉलेज में नया शैक्षणिक सत्र आरंभ" href="http://10.0.0.122:1245/new-academic-session-starts-in-kanya-college/">कन्या कॉलेज में नया शैक्षणिक सत्र आरंभ</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ban-on-recording-statement-of-victims-in-manipur-sexual-violence-case/article-50677</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 15:43:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Manipur News: सीबीआई खंगालेगी मणिपुर में दरिंदगी कांड का सच</title>
                                    <description><![CDATA[Manipur Violence News: केंद्र ने मणिपुर में दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न और हिंसा घटनाओं को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने के फैसले से उच्चतम न्यायालय को अवगत कराते हुए इस मामले की सुनवाई राज्य से बाहर छह महीने के भीतर करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है। शीर्ष अदालत (Supreme Court) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-news/article-50509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/manipur-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Manipur Violence News: केंद्र ने मणिपुर में दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न और हिंसा घटनाओं को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने के फैसले से उच्चतम न्यायालय को अवगत कराते हुए इस मामले की सुनवाई राज्य से बाहर छह महीने के भीतर करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत (Supreme Court) इस मामले पर आज (शुक्रवार) को सुनवाई करेगी। वह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका से संबंधित मामले पर सुनवाई करेगी। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई से पहले गुरुवार को दायर एक हलफनामे यह भी कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के सामने आने के बाद लगातार मामले की निगरानी की जा रही है। Manipur News</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष कहा है कि उसका दृष्टिकोण महिलाओं के खिलाफ किसी भी स्तर के अपराध को बर्दाश्त नहीं करने की रही है। वह वर्तमान घटना को भी बहुत जघन्य मानती है। वह मानती है कि इस मामले को न केवल गंभीरता से लिया जाना चाहिए बल्कि समय पर तरीके से न्याय भी होना चाहिए, ताकि इसका असर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के संबंध में पूरे देश में निवारक प्रभाव पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने इन दलीलों के साथ शीर्ष अदालत से मामले की सुनवाई मणिपुर से बाहर स्थानांतरित करने करने की गुहार लगाते हुए कहा कि आरोप पत्र दाखिल होने के छह महीने के भीतर समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी की जानी चाहिए। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा कि वह उससे अनुरोध करती है कि विचाराधीन अपराध के मुकदमे सहित पूरे मामले को मणिपुर है से बाहर किसी भी राज्य में स्थानांतरित करने का आदेश दे।</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर की महिलाओं से जुड़ी भयावह घटना का वायरल वीडियो सामने आने के बाद शीर्ष अदालत ने पिछले हफ्ते अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से कहा था कि यह अदालत ‘बेहद से परेशान’ है। इसने केंद्र और मणिपुर सरकार से यह भी कहा था कि या तो अपराधियों को पकड़ें अन्यथा न्यायपालिका कार्रवाई करेगी। भल्ला ने लिखित जवाब में कहा है कि मणिपुर सरकार ने 26 जुलाई 2023 को सचिव, डीओपीएंडटी को मामले को आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है, जिसे गृह मंत्रालय ने 27 जुलाई के पत्र के माध्यम से सचिव, डीओपीएंडटी को विधिवत सिफारिश की है। इस प्रकार जांच सीबीआई को सौंप दी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि उपचारात्मक उपायों के रूप में राज्य सरकार ने 18 मई और 5 जुलाई 2023 को अपने आदेश के माध्यम से विभिन्न राहत शिविरों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मदद के लिए जिला मनोवैज्ञानिक सहायता टीमों का गठन किया है। हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक रैंक का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की सीधी निगरानी में आपराधिक मामलों की जांचों की निगरानी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हलफनामे में यह भी कहा गया है कि आपराधिक घटनाओं की रिपोर्ट करने और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए जानकारी प्रदान करने के लिए उचित इनाम भी दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आपराधिक मामलों की रोकथाम और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वह (मौजूदा कंपनियों के अलावा) 3 मई 2023 से सीएपीएफएस की अतिरिक्त कंपनियां प्रदान कर रहा है। केंद्र ने अदालत को बताया है कि ह्लस्थानीय पुलिस के अलावा सीएपीएफएस की 124 अतिरिक्त कंपनियां और सेना/असम राइफल्स की 185 टुकड़ियां मणिपुर में तैनात हैं। सुरक्षा सलाहकार की अध्यक्षता में सभी सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधित्व वाली एक एकीकृत कमान स्थापित की गई है। भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नागरिक प्रशासन के सहयोग से खुफिया जानकारी जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यवाई की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि कर्फ्यू, अन्य कानूनों आदि का उल्लंघन करने के लिए 13,782 लोगों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/manipur-news/article-50509</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2023 10:11:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Manipur Violence: मणिपुर में सख्त कदम उठाने की दरकार</title>
                                    <description><![CDATA[Manipur Violence: मणिपुर में हो रही नस्लीय हिंसा मामले में संसद ठप है। सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मामले में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। मणिपुर में जो कुछ हो रहा है, उसे देख-सुनकर देशवासी सन्न हैं। असल में पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर बीते ढाई महीने से भी अधिक समय से नस्लीय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/need-to-take-strict-steps-in-manipur/article-50473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/massive-shootout-between-cookie-militants-in-manipur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Manipur Violence: मणिपुर में हो रही नस्लीय हिंसा मामले में संसद ठप है। सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मामले में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। मणिपुर में जो कुछ हो रहा है, उसे देख-सुनकर देशवासी सन्न हैं। असल में पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर बीते ढाई महीने से भी अधिक समय से नस्लीय हिंसा की आग से जल रहा है। बीती 19 जुलाई को मणिपुर की दो महिलाओं के साथ अनैतिक दुर्व्यवहार का एक वीडियो सामने आया। मणिपुर पुलिस ने इस वीडियो की पुष्टि करते हुए बताया है कि ये महिलाएं बीती चार मई को मणिपुर के थोबल जिले में अनैतिक दुर्व्यवहार की शिकार हुई थीं। इस वीभत्स और मानवता को शर्मसार करने वाले वीडियो के वायरल होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस समस्या का हल क्या है? Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर में बीती तीन मई को हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक 142 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 60,000 लोग बेघर हो गए हैं। राज्य सरकार के मुताबिक इस हिंसा में 5000 आगजनी की घटनाएं हुई हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक रिपोर्ट में मणिपुर सरकार ने कहा कि इस हिंसा से जुड़े कुल 5,995 मामले दर्ज किए गए हैं और 6,745 लोगों को हिरासत में लिया गया है। मणिपुर में मौजूदा समय में कानून व्यवस्था की स्थिति पर कोई आॅन रिकॉर्ड बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर में तीन बड़े समुदाय मैतेई, नागा और कुकी हैं। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं और वह ओबीसी कैटेगरी में आते हैं। राज्य में मैतई लोगों की जनसंख्या भी ज्यादा है। राज्य में नागा और कुकी ज्यादातर ईसाई हैं और ये दोनों अनुसूचित जनजाति में आते हैं। राज्य में मैतेई की आबादी करीब 60 फीसदी है और ये समुदाय इंफाल घाटी में रहता है। राज्य के कुल 10 फीसदी भूभाग में मैतेई समुदाय रहता है और बाकी का जो ये 90 फीसदी हिस्सा है, वो पहाड़ी है। यहां पर कुकी और नागा समुदाय को मिलाकर राज्य की जनसंख्या के करीब 40 फीसदी लोग बसे हुए हैं। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">पहाड़ में नागा और कुकी को मिलाकर 30 से ज्यादा छोटी-बड़ी जनजातियां हैं। ये अनुसूचित जनजाति में आती है। इनके पास कई सुविधाएं हैं और पहाड़ी इलाकों में सिर्फ यही रह सकते हैं। मैतेई समुदाय इसका विरोध करता है। वो कहते हैं कि हमें भी एसटी का दर्जा मिलना चाहिए क्योंकि उनके पास रहने के लिए रहने को जमीन कम है। अगर एसटी का दर्जा मिलेगा. तो वो पहाड़ों पर शिफ्ट हो सकेंगे। वर्तमान हालात की बात करें तो ये कहने में कुछ भी गलत नहीं है कि इसके लिए राज्य की सरकार जिम्मेदार है जो उच्च न्यायालय द्वारा मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने संबंधी फैसले के बाद उत्पन्न स्थिति से सही ढंग से निपटने में असफल रही। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">कुकी समुदाय द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के बाद की जाने हिंसा के बारे में खुफिया एजेंसियों द्वारा भी सही समय पर जानकारी या तो दी नहीं गई या फिर जिम्मेदार लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी त्यागपत्र देने का ऐलान किया लेकिन मौजूदा परिस्थिति में मुख्यमंत्री बदलने से भी कुछ लाभ नहीं होगा क्योंकि राज्य में ऐसा एक भी राजनीतिक नेता नहीं है जिसे दोनों समुदायों का विश्वास हासिल हो। लेकिन इस सबके बीच गत दिवस 4 मई को मैतेई हमलवारों द्वारा एक गांव पर धावा बोलकर पकड़ी गई दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का वीडियो सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित होने के बाद पूरे देश में जबरदस्त रोषपूर्ण प्रतिक्रिया हुई। सर्वोच्च न्यायालय से संसद तक उसकी गूंज सुनाई दी। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सामने आकर उक्त घटना को पूरे देश को शर्मसार करने वाला बताया। विपक्ष को भी संसद का सत्र शुरू होते ही केंद्र सरकार को घेरने का जोरदार मुद्दा हाथ लग गया जिसका लाभ लेने में उसने लेश मात्र भी देर नहीं लगाई। आनन-फानन में दोषी लोगों की गिरफ्तारी होने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें फांसी तक पहुंचाने की बात कही लेकिन उनका ये कहना चौंकाने वाला है कि ऐसे हजारों मामले हैं और उसी लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया है। सवाल ये हैं कि यदि ऐसे हजारों मामले थे तो राज्य सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए और महिलाओं को नग्न घुमाए जाने की रिपोर्ट थाने में दर्ज हो जाने के दो महीने बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, ये बात भी विचारणीय है कि 4 मई की घटना का वीडियो संसद के सत्र तक क्यों दबाकर रखा गया? जाहिर है इसके पीछे भी उन ताकतों का हाथ है जो मणिपुर में लगी आग को ठंडी करने के बजाय उसे और भड़काने में जुटे हुए हैं। मणिपुर में कुकी समुदाय मूलत: म्यांमार से आकर पर्वतीय क्षेत्रों में बस गया और अभी भी सीमा पार से अवैध रूप से घुसपैठ जारी है। इनके द्वारा अफीम की खेती कर तस्करी के जरिए उसे विदेश भेजने की बात भी सामने आ चुकी है जिसमें विदेशी हाथ होना अवश्यंभावी है। ये देखते हुए इस राज्य को पूरी तरह स्थानीय प्रशासन के भरोसे छोड़कर रखना भूल साबित हुआ है। महिलाओं के अपमान की जो घटना सामने आई वह किसी भी दृष्टि से सहनीय नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां एक तरफ पहाड़ी इलाकों में एक अलग प्रशासन की मांग उठ रही है, वहीं मैदानी इलाकों के लोग लगातार ये इल्जाम लगाते आ रहे हैं कि इस हिंसा में म्यांमार से मणिपुर में घुसे लोगों की एक बड़ी भूमिका है। इसीलिए घाटी में रहने वाले लोग अब एनआरसी करवा कर अवैध रूप से मणिपुर में घुसे लोगों की पहचान करवाने की मांग कर रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदाय के लोग इस बात का खंडन करते हैं। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">मैतेई और कुकी नामक आदिवासी समुदायों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में प्रदेश और प्रशासन दो हिस्सों में बंट गया है। एक दूसरे के हिस्से में जाना मौत को गले लगाने जैसा है। पुलिस और सशस्त्र बलों के हथियार लूटकर दोनों समूहों ने अपनी सेना बना ली है। अस्थाई तौर पर बनाए बंकरों में नौजवान इस तरह तैनात हैं जैसे सामने शत्रु देश की सीमा हो। राजधानी इंफाल तक सुरक्षित नहीं है। प्रशासन पूरी तरह लाचार नजर आ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन राज्य में हर दिन हो रही हिंसा ये बात बार-बार याद दिला रही है कि दोनों समुदायों के बीच अविश्वास की खाई लगातार गहरी होती जा रही है। एक ऐसी खाई जिसका खामियाजा मणिपुर के हजारों लोग हर दिन भुगत रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध जताना देश के नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, और कुकी यदि यहीं तक सीमित रहते, तो कहीं ज्यादा प्रभावी हो सकते थे। मगर अब बात हिंसा और हथियार तक पहुंच गई है। चूंकि यहां की जनजातियां सिर्फ अलगाववादी गुट नहीं हैं, इसलिए इस मसले के समाधान में सिविल सोसाइटी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बन जाती है। सत्ता-प्रतिष्ठान निस्संदेह जरूरी होने पर सख्ती दिखाए, लेकिन अमन का रास्ता मिल-बैठकर बातचीत करने से ही निकलेगा। यहां के समुदाय अपने हितों के लिए अपनों की जान-माल और सुरक्षा को दांव पर नहीं लगा सकते। उनका यह रुख किसी भी सभ्य समाज में उचित नहीं कहा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>राजेश माहेश्वरी, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PM Modi to visit Rajasthan: पीएम मोदी सवा लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र राष्ट्र को करेंगे समर्पित" href="http://10.0.0.122:1245/preparations-completed-for-pms-public-meeting-in-sikar/">PM Modi to visit Rajasthan: पीएम मोदी सवा लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र राष्ट्र को करेंगे समर्पित</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2023 09:47:07 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur Violence: संसद भवन परिसर में गांधी जी की प्रतिमा के समक्ष विपक्ष का प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Manipur Violence: इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के सांसदों ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद भवन (Parliament House) परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष नारे लगाते हुए मणिपुर के हालात पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को प्रदर्शन किया। कांग्रेस तथा गठबंधन में शामिल सभी दलों के सदस्यों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/oppositions-demonstration-in-front-of-gandhijis-statue-in-the-parliament-house-complex/article-50371"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/manipur-violence-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Manipur Violence: इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के सांसदों ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद भवन (Parliament House) परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष नारे लगाते हुए मणिपुर के हालात पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को प्रदर्शन किया। कांग्रेस तथा गठबंधन में शामिल सभी दलों के सदस्यों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया तथा सरकार से मणिपुर के हालात को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इंडिया गठबंधन के प्रदर्शनकारी सदस्यों ने कहा कि मणिपुर की स्थिति बहुत खराब है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद के दोनों सदनों में इस बारे में बयान देना चाहिए और हालात को नियंत्रित करने के लिए सरकार की योजना बतानी चाहिए।</p>
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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2023 12:21:31 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur Violence: कैसे रची गई मणिपुर में साजिश, हुआ बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[इंफाल (एजेंसी)। Manipur Violence: मणिपुर पुलिस ने चार मई को बी फीनोम गांव में भीड़ द्वारा दो महिलाओं को  घुमाने में कथित संलिप्तता को लेकर अब तक एक किशोर सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के एक बयान के अनुसार राज्य पुलिस कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी करके शेष अपराधियों को पकड़ने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-the-conspiracy-was-hatched-in-manipur-big-disclosure/article-50343"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/manipur-violence-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफाल (एजेंसी)।</strong> Manipur Violence: मणिपुर पुलिस ने चार मई को बी फीनोम गांव में भीड़ द्वारा दो महिलाओं को  घुमाने में कथित संलिप्तता को लेकर अब तक एक किशोर सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के एक बयान के अनुसार राज्य पुलिस कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी करके शेष अपराधियों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, यहां स्थित टी.जी. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रों ने शनिवार को सरकार से इंफाल के रहने वाले दो स्कूली छात्रों (एक छात्रा और एक छात्र) का पता लगाने का आग्रह किया है। टी.जी. उच्चतर माध्यमिक बालिका विद्यालय की छात्राओं ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि एक सहपाठी को आखिरी बार छह जुलाई को देखा गया था। उन्होंने बताया कि छात्रा का मोबाइल फोन चुराचांदपुर जिले के लमदान में एक व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किया गया था। Manipur Violence</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/what-happens-when-you-quit-tea/">Benefits Of Quitting Tea: यह जानकारी पाकर आप खुद ही चाय को बाय कर देंगे!</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“Benefits Of Quitting Tea: यह जानकारी पाकर आप खुद ही चाय को बाय कर देंगे!” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/what-happens-when-you-quit-tea/embed/#?secret=JeKs7AA8vz%23?secret=PoHv2nPYWZ" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इससे पहले कहा था कि तीन मई को चुराचांदपुर में एक रैली के बाद शुरू हुए मणिपुर संकट के बाद अब तक बड़ी संख्या में हत्याएं, लापता मामले और उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं। अब तक लगभग 145 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। लापता लोगों में सोमोरेंद्र नाम का एक पूर्व पत्रकार भी शामिल है। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों ने संवेदनशील तथा सीमावर्ती इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। इंफाल के कुछ हिस्सों में स्थिति अब भी तनावपूर्ण है। पुलिस ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में विभिन्न प्रकार के कानूनों के उल्लंघन के सिलसिले में 396 लोगों को हिरासत में लिया गया है। चूंकि कांगपोकपी में राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध है, इसलिए आवश्यक वस्तुओं के साथ एनएच-37 पर लगभग 839 वाहनों और एनएच-2 पर 215 वाहनों को मणिपुर लाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/alien-invasion-news/">Alien On Earth: एक डरावनी खबर-धरती पर आ रहे हैं एलियंस! इंसान बनेंगे गुलाम?</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 23 Jul 2023 16:37:41 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur Violence: जातीय जंजाल में उलझा मणिपुर</title>
                                    <description><![CDATA[Manipur Violence: आपसी वैमनस्य और जातीय हिंसा का जो दृश्य मणिपुर में दिखा है, उसने संपूर्ण मानवता को झकझोर देने का काम किया है। दो महिलाओं की निर्वस्त्र परेड और उनके अंगों के साथ बेशर्मी की हद तक खिलवाड़ ने साफ कर दिया है कि मनुष्य को यदि मनमानी करने की छूट मिलती रही तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-embroiled-in-ethnic-web/article-50286"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/manipur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Manipur Violence: आपसी वैमनस्य और जातीय हिंसा का जो दृश्य मणिपुर में दिखा है, उसने संपूर्ण मानवता को झकझोर देने का काम किया है। दो महिलाओं की निर्वस्त्र परेड और उनके अंगों के साथ बेशर्मी की हद तक खिलवाड़ ने साफ कर दिया है कि मनुष्य को यदि मनमानी करने की छूट मिलती रही तो उसे असभ्यता की चरम बर्बरता तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी? मनुष्य के अवचेतन में पैठ जमाए बैठी क्रूरता, निर्ममता और हिंसा की सभी सीमाएं लांघकर मानवीय गरिमा को तार-तार कर देंगी। 1979-80 में कश्मीर घाटी में जब हिंदुओं को आतंकवादी-अलगाववादियों ने कश्मीर से बाहर हो जाने की मुनादी पीटी थी, तब महिलाओं के साथ ऐसे ही या इनसे भी बदतर अत्याचार हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">तब प्रधानमंत्री वीपी सिंह के मुंह पर ताला पड़ गया था और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला लंदन भाग गए थे। आज देर से ही सही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा है कि हैवानियत की यह घटना अक्षम्य है। घटना पर पीड़ा भी होती है और क्रोध भी आता है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना के कारण 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ा है। आखिरकार इस मुद्दे पर भी विचार करना जरूरी है कि आजादी के बाद से ही यह भूखंड अस्थिर क्यों है? Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाली मणिपुर की आग इतनी बेकाबू हो गई है कि वहां की आबादी में अब यह विभाजन करना नामुमकिन है कि कौन फरियादी है और कौन अपराधी ! क्योंकि दोनों पक्ष ही आगजनी और हिंसा में भागीदार हैं और दोनों ही पीड़ित? यह भी कहना मुश्किल है कि प्रशासन और पुलिस निष्पक्ष एवं निर्विवादित है? सच्चाई तो यह है कि पुलिस ने अपने कर्तव्य का पालन भी ठीक से नहीं किया। घटना चार मई 2023 की बताई जा रही है। इसके एक-दो दिन पहले ही मणिपुर में तीन विवादित कानूनों को लेकर मैतेई और नगा-कुकी समुदायों के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ना शुरू हो गई थी। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में ही एक समुदाय के पुरुषों ने शत्रु समुदाय की स्त्रियों की अस्मिता से घिनौने खेल की शुरुआत कर दी थी। पीड़ित कुकी समुदाय की महिलाओं ने अब कार्रवाई आरंभ होने पर बयान दिया है कि करीब एक हजार हथियारबंद लोग उनके गांव में घूसे चले आए। घरों में आग और कत्ल-ए-आम का तांडव रच दिया। जब ये महिलाएं प्राण और आबरू  बचाने की कोशिश में सुरक्षित जगह तलाश रही थीं, तब पुलिस ने अपने वाहन में इन्हें शरण दे दी। पुलिस जब महिलाओं को थाने ले जाने लगी, तभी भीड़ वाहन के सामने खड़ी हो गई और बैठी महिलाओं को उनके हवाले करने की मांग करने लगी। आफत में पड़ी पुलिस को खुद की जान बचाने की चिंता हो गई और पुलिस ने लाचार महिलाओं को भीड़ के सुपुर्द कर दिया। फिर भीड़ ने जो किया वह वीडियो के जरिए दो माह बाद अब सामने आया है। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को इस घटना और ऐसी ही वीभत्स सैकड़ों घटनाओं की जानकारी पहले से ही थी, इसलिए उनसे जब घटना की प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने सच्चाई उगल भी दी। कहा, ‘ऐसी हजारों घटनाएं घटित हो चुकी हैं। उन सबके बारे में जांच चल रही है। ‘मसलन राजनीति के कुटिल व चतुर खिलाड़ी बीरेन सिंह कतई संवेदनशील नहीं हैं। मुख्यमंत्री का बयान और निर्वस्त्र महिलाओं की सार्वजनिक परेड से जाहिर है कि मणिपुर के दंगाग्रस्त एक बड़े इलाके में कानून व्यवस्था ढाई माह से पूरी तरह ठप है। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे भी मणिपुर चीन और म्यांमार के सीमाई क्षेत्र से लगा होने के कारण संवेदनशील क्षेत्र है। स्थानीय उपद्रवियों, घुसपैठियों और नशा कारोबारियों की टोह लेने के लिए इस पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में केंद्रीय व राज्य स्तरीय गुप्तचर संस्थाएं और उनके गुप्तचर बड़ी संख्या में तैनात हैं, आखिर ये क्या कर रहे थे ? इसे राज्य सरकार समेत तमाम शासकीय एजेंसियों की अक्षमता ही कहा जाएगा कि सरेआम घटना भी घट गई और कानों में लाचार स्त्रियों को पुकार भी नहीं गूंजी ?</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि थाउबल जिले में घटी इस घटना की जो अब जानकारियां छनकर सामने आ रही हैं, उससे साफ हुआ है कि 4 मई की इस घटना की रिपोर्ट 13 मई को कांग्पोक्पी जिले के साइकुल थाने में शून्य पर दर्ज कर ली गई थी। बाद में 21 जून को प्राथमिकी साईकुल थाने से थाउबल थाने में दर्ज हुई। लेकिन मुख्य आरोपी हेरादास सिंह व तीन अन्य की गिरफ्तारियां 19 जुलाई को वीडियो वायरल होने के 24 घंटे बाद हुईं। तब तक पुलिस इस मामले को दबाए रखने के लिहाज से हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">एक लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था में इस तरह की समाज को जलील करने वाली घटना केंद्र व राज्य सरकार के मातहत एजेंसियां महीनों तक छुपाए रखें, तो इसे कानून की असफलता ही माना जाएगा? सड़क से संसद तक हंगामा खड़ा करने वालों से पूछा जाना चाहिए कि आखिर वे कैसा समाज गढ़ रहे हैं या गढ़ना चाहते हैं? क्योंकि मानवता को कलंकित करने वाली यह इकलौती घटना नहीं है। इसी कालखंड में राजस्थान और छत्तीसगढ़ में महिलाओं के साथ दुष्कर्म और नृशंस हत्या की घटनाएं सामने आई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं को हिंसा के साधन के रूप में इस्तेमाल करना नामंजूर है। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने भी कह दिया कि आपको ग्राउंड पर जाकर रियलिटी देखनी चाहिए। राज्य में ऐसे हजारों मामले दर्ज हैं। इसीलिए तो इंटरनेट बंद किया है !</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार गंभीर है, दोषियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचाया जाएगा।ह्य इस घटना के ट्वीट वीडियो से भी यह पता चलता है कि मुख्यधारा का मीडिया चाहे प्रिंट हो या टीवी समाचार चैनल मणिपुर में हिंसक व स्त्रीजन्य निर्लज्जता की खबरों तक पहुंच ही नहीं पाया। वैसे भी स्वतंत्रता के बाद से पूर्वोत्तर के राज्य शेष भारत से लगभग अलग-थलग रहे हैं, इसलिए वहां न केवल उग्रवाद को पनपने के नए-नए अवसर मिलते रहे, बल्कि बांग्लादेशी मुस्लिम और म्यांमार के रोहिंग्या घुसपैठिए आग में घी डालने का काम करते रहे हैं। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;">ईसाई मतांतरण के चलते यहां जनसंख्यात्मक घनत्व का संतुलन बिगड़ जाना भी उपद्रव का एक प्रमुख कारण है। चीनी दखल इस उपद्रव को उकसा कर जीवंत बनाए रखने का काम करता है। चीन और म्यांमार यहां अलगाव वादियों को चारा डालते रहे हैं। हालांकि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पूर्वोत्तर के सातों राज्यों पर विशेष ध्यान देना शुरू हुआ है। ढ़ांचागत विकास के साथ-साथ आवागमन के साधन बढ़े हैं। पर्यटन के रूप में भी इलाका जाने जाना लगा है। नशे के कारोबार पर लगाम लगी है और आतंकी समूहों को जमींदोज किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैतेई और कुकी समुदायों के बीच अब यह विरोध वैमनस्यता में बदलकर इतना गहरा हो गया है कि समुदायों से जुड़े आम लोग ही नहीं सरकारी नौकरी-पेशा भी जातिगत समूहों में बंट गए हैं। इनमें प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों से लेकर वे बुद्धिजीवी भी हैं, जो समरसता की थोथी बातें करते रहे हैं। अत: अब मणिपुर को गंभीरता से लेते हुए समस्या का समाधान युद्धस्तर पर निकालने की जरूरत है। Manipur Violence</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रमोद भार्गव, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बच्चे की पलकों पर ये कैसा जीव जिसे देख उड़े डाक्टरों के होश!" href="http://10.0.0.122:1245/what-kind-of-creature-is-this-on-the-eyelids-of-the-child/">बच्चे की पलकों पर ये कैसा जीव जिसे देख उड़े डाक्टरों के होश!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2023 12:25:46 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur Viral Video: मणिपुर की घटना पर पीएम मोदी का बहुत बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। PM Modi On Manipur Viral Video: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के सवालों के बीच आज मणिपुर की घटना को लेकर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया और कहा मणिपुर में जो कुछ भी हो रहा है वह सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है, इसीलिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-modi-on-manipur-viral-video-case-live/article-50223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/pm-modi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>PM Modi On Manipur Viral Video: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के सवालों के बीच आज मणिपुर की घटना को लेकर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया और कहा मणिपुर में जो कुछ भी हो रहा है वह सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है, इसीलिए इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को माफ नहीं किया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सभ्य समाज के लिए शर्मनाक | Manipur Viral Video</h3>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने संसद भवन परिसर में मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक पहले आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं लोकतंत्र के मंदिर में खड़ा हूं और मणिपुर की, जो घटना सामने आई है वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। गुनाह करने वाले कौन हैं, कितने हैं, वह अपनी जगह है, लेकिन इसकी वजह से देश के 140 करोड़ लोगों को शर्मसार होना पड़ता है। इन घटनाओं की जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।”</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Prime Minister Narendra Modi says, “…I assure the nation, no guilty will be spared. Law will take its course with all its might. What happened with the daughters of Manipur can never be forgiven.” <a href="https://t.co/HhVf220iKV">pic.twitter.com/HhVf220iKV</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1681894026948247552?ref_src=twsrc%5Etfw">July 20, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<h4 style="text-align:justify;">महिलाओं की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाए | Manipur Violence</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने राज्य सरकारों से इस तरह की घटनाएं रोकने और खासकर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर सख्त रुख अख्तियार करने की अपील करते हुए कहा, “मैं सभी मुख्यमंत्रियों से अनुरोध करता हूं कि वह अपने राज्यों में कानून व्यवस्था को मजबूत करें और खासकर महिलाओं की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाए। राजनीति से उठकर महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। मैं देशवासियों विश्वास दिलाता हूं कि महिलाओं के सम्मान के लिए सारे कदम उठाए जाएंगे और मणिपुर की बेटियों के साथ जो हुआ है ऐसे करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले उन्होंने विपक्षी दलों से संसद चलाने में सहयोग देने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा, “यह पवित्र सावन का महीना है और लोकतंत्र के मंदिर में पवित्र काम करने के लिए इससे उत्तम अवसर कुछ नहीं हो सकता है। मुझे विश्वास है सभी माननीय सांसद जनहित में इस सत्र का उपयोग करेंगे और संसद की जो जिम्मेदारी है उनका निर्वहन किया जाएगा।”</p>
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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 11:30:17 +0530</pubDate>
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