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                <title>सरकारी कॉलेज वाला रोड़ नहीं बनने से लोग परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[उबड़-खाबड़ सड़क आम जनता के लिए खड़ी कर रही मुसीबतें | Abohar News अबोहर (सच कहूँ न्यूज)। क्षेत्र में अधूरे पड़े विकास कार्य आम जनता की परेशानी (Problems) को बढ़ा रहे हैं। हालात ये है कि अब बारिशों का दौर चल रहा है और हर रोज बारिश हो रही है, लेकिन इन सबके बीच परेशानी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/people-upset-due-to-non-construction-of-government-college-road/article-50501"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/abohar-news-28.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">उबड़-खाबड़ सड़क आम जनता के लिए खड़ी कर रही मुसीबतें | Abohar News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> क्षेत्र में अधूरे पड़े विकास कार्य आम जनता की परेशानी (Problems) को बढ़ा रहे हैं। हालात ये है कि अब बारिशों का दौर चल रहा है और हर रोज बारिश हो रही है, लेकिन इन सबके बीच परेशानी आम जनता को झेलनी पड़ रही है, क्योंंकि अधूरे कामों वाले स्थल पर बारिश के कारण दलदल जैसी स्थिति बन जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा ही एक मार्ग है सरकारी कॉलेज रोड़ वाला, जहां पर अजीमगढ़ इलाके की भांति सीवरेज तो डाल दिया गया, लेकिन सड़क नहीं बनाई गई। ऐसे में बारिश के कारण वहां हालात काफी दयनीय हो जाते हैं। जानकारी देते हुए इलाके के जागरुक लोगों ने बताया कि कुछ समय पहले यहां पर सीवरेज डाला गया था, लेकिन उसके बाद सड़क नहीं बनाई गई। अब यह उबड़-खाबड़ सड़क आम जनता के लिए परेशानी खड़ी कर रही है। जब भी बारिश होती है, तो यहां दलदल जैसी स्थिति बन जाती है। इस कारण जहां वाहनों चालकों को तो परेशानी होती है, वहीं जो व्यक्ति यहां से पैदल जाता है, उसके लिए परेशानी दोगुनी हो जाती है, क्योंकि कई बार तो उसके कपड़े भी खराब हो जाते है। Abohar News</p>
<p style="text-align:justify;">इस रोड़ से जहां विद्यार्थी वर्ग गुजरता है, वहीं यह रोड़ कई मोहल्लों को जोड़ती है। साथ ही सिंचाई विभाग का कार्यालय है और उसके कर्मचारी बड़ी मुश्किल ने रोड़ को पार कर मॉडल टाऊन या फिर साहित्य सदन मार्ग की तरफ जाते हैं। इसलिए चाहिए तो यह था कि इस रोड़ का निर्माण कार्य प्रमुखता के आधार पर होना चाहिए था। लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि उक्त रोड़ का निर्माण कार्य पहल के आधार पर करवाया जाए। Abohar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="खुशखबरी: पीएम किसान की 14वीं किस्त जारी, 8 करोड़ से अधिक किसानों खाते में पहुंचा पैसा" href="http://10.0.0.122:1245/fourteenth-installment-of-pm-kisan-released/">खुशखबरी: पीएम किसान की 14वीं किस्त जारी, 8 करोड़ से अधिक किसानों खाते में पहुंचा पैसा</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2023 19:28:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काल बनकर घूम रहे आवारा पशु</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक है। यही पर्यटन स्थल आज आवारा पशुओं की सैरगाह बना हुआ है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आवारा पशुओं की समस्या नासूर बन गई है (Problems of stray animals in capital Jaipur) । यहाँ आवारा गाय, सांड, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/problems-of-stray-animals-in-capital-jaipur/article-6803"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/cow.jpg" alt=""></a><br /><h2>राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक</h2>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक है। यही पर्यटन स्थल आज आवारा पशुओं की सैरगाह बना हुआ है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आवारा पशुओं की समस्या नासूर बन गई है <strong>(Problems of stray animals in capital Jaipur)</strong> । यहाँ आवारा गाय, सांड, सूअर, बन्दर और कुत्ते राजधानी के लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन गए है। आवारा पशुओं ने राजधानी जयपुर में पिछले एक साल में एक विदेशी पर्यटक सहित तीन लोगों की जान ले ली। जबकि प्रदेश भर में एक दर्जन लोग मौत के मुंह में समा चुके है। घायलों की संख्या सैंकड़ों में है। हाई कोर्ट ने प्रशासन को फटकारा तब आवारा पशुओं की धर पकड़ हुई। कुछ दिनों बाद प्रशासन ने अपने हाथ खींच लिए और इसी के साथ आवारा पशुओं के धर पकड़ का नाटक खत्म हो गया। आवारा पशु पहले की भांति बेखौफ होकर आतंक फैलाने लगे।</p>
<h2>शहरों में आवारा पशुओं के कातिलाना कहर की खबरें अकसर मीडिया में सुर्खियां बनती रहती हैं</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">छोटे नगरों से लेकर बड़े मैट्रो शहरों में आवारा पशुओं के कातिलाना कहर की खबरें अकसर मीडिया में सुर्खियां बनती रहती हैं</li>
<li style="text-align:justify;">फिर भी उन पर लगाम नहीं कसी जा रही। अगर प्रशासन कुछ सख्ती दिखाता भी है</li>
<li style="text-align:justify;">तो आनन फानन में अभियान चलकर आवारा पशुओं को पकड़ने की मुहिम चलती है</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन फिर थोड़े दिन बाद मामला ठंडा पड़ जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">सही तो यह है आवारा पशुओं का यह मुद्दा हमें देखने में छोटा लगता है लेकिन है बड़ा गंभीर।</li>
<li style="text-align:justify;">गाय भैंस या सांड़ ही क्यों, आवारा कुत्ते भी लोगों की नाक में कम दम नहीं करते।</li>
<li style="text-align:justify;">बच्चे तो उन के डर से घर से बाहर तक नहीं निकल पाते।</li>
<li style="text-align:justify;">अब तो शहरों में बंदरों का खौफ भी देखा जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">अस्पतालों में बंदरों के काटने के बहुत से मामले सामने आने लगे हैं।</li>
</ul>
<h2>छोटे स्कूली बच्चे इन आवारा पशुओं के आपसी झगड़े को देख काफी भयभीत हो जाते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">राजधानी में पिछले कई महीनों से आवारा पशुओं की भरमार हो गई है। बाजार क्षेत्र सहित सकरी गलियों में साँडों व आवारा पशुओं का निरंकुश होकर घूमना लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इनके आपस में झगड़ने के कारण कई बुजुर्ग-महिलाएँ एवं बच्चे भी इनकी चपेट में आने के कारण चोटिल हो जाते हैं। कभी-कभार तो छोटे स्कूली बच्चे इन आवारा पशुओं के आपसी झगड़े को देख काफी भयभीत हो जाते हैं। अक्सर खाद्य व सब्जी आदि की दुकानों पर भी यह अपना मुँह मारते रहते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में समुचित सफाई नहीं होने और जगह-जगह कचरे के ढेर लग रहने से वहाँ आवारा मवेशियों का जमघट लगा रहता है। भयावह स्थिति तब बन जाती है, जब ये आवारा मवेशी मार्गों के किनारे लगे कचरे के ढेरों पर आपस में झगड़ते हैं। कई बार तो बाजार क्षेत्र में भी इनके आपस में झगड़ने से यातायात बाधित होता है</p>
<h2>जयपुर नगर निगम ने कुछ जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ हालाँकि कार्यवाही की है</h2>
<p style="text-align:justify;">दिन हो या रात आवारा पशु सड़क पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। राजधानी जयपुर में बड़ी संख्या में पशु डेयरियां है। पशु पालक जब तक गाय भैंस दूध देती है उसका दूध निकालते हैं और उसके बाद पशुपालक इन्हें खुला छोड़ देते हैं। इसके बाद जब वह फिर से दूध देने की स्थिति में आती है तो उसे फिर से पकड़ लेते हैं। कुछ लोग तो सुबह शाम दूध निकालने के बाद जानवरों को खुला छोड़ देते हैं। विदेशी पर्यटक की मौत के बाद जयपुर नगर निगम ने कुछ जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ हालाँकि कार्यवाही की है और आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया है। मगर देखने की बात यह है कि राजधानी में पशु डेयरियों के अलावा हजारों की संख्या में आवारा पशु कॉलोनियों में विचरण करते मिल जाएंगे। इनके मालिक गायों का दूध निकलने के बाद इन्हें विचरण के लिए छोड़ देते है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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<p>Problems, Stray, Animals, Jaipur</p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 10:16:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चुनौतियों से समझौता नहीं, बल्कि सामना करें</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/do-not-deal-with-challenges-but-face-it/article-4442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/article.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग 36 वर्ष पुरानी है, लेकिन हाल ही में ओड़िशा के एक व्यक्ति ने ऐसा ही वाकया दोहराया। बैतरणी गांव के एक ओर गोइनसिका नाम का पहाड़ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके दूसरी ओर नहर बहती है, लेकिन पहाड़ बीच में होने के कारण दइतरी और उसके आस-पास के खेतों में पानी पहुंचा पाना बहुत मुश्किल था। पानी के अभाव में दइतरी को मेहनत का आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए दइतरी ने पहाड़ के बीच से रास्ता निकालने की ठानी। उसके पास साधन-संसाधन नहीं थे, लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी। अपने भाईयों की मदद से उसने पहाड़ को चीरते हुए रास्ता निकालने का प्रण किया और जुट गया इस कार्य में। चार वर्षों तक अथक मेहनत करते हुए आखिर उसने सफलता हासिल कर ही ली।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने खेतों तक कल-कल करता पानी पहुंचा, तो मानो ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। पहले विरोध करने वाले लोग भी अब दइतरी के साथ खड़े दिखे और खड़े हों भी क्यों नहीं, अब सौ एकड़ क्षेत्र में खेती करने वालों को धान की पैदावार के लिए तरसना नहीं पड़ेगा। आज दइतरी खुश है, क्योंकि उसका सपना साकार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अब लोग उसे ‘कैनाल मेन’ के नाम से पुकारने लगे हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह दशरथ मांझाी को आज भी लोग ‘माउंटेन मेन’ के नाम से जानते हैं। हालांकि दशरथ का माउंटेन मेन बनने का सफर भी बेहद चुनौतियों भरा था। वह बिहार के गहलौर गांव का रहने वाला था। वह जिस गांव में रहते थे, वहां से कस्बे के बीच एक पर्वत था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार मांझी इसी क्षेत्र में कार्य कर रहा था। उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी उसके लिए खाना लेकर जा रही थी। रास्ते में वह एक दर्रे में गिर गई और दवाईयों के अभाव में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने दशरथ का जीवन बदल कर रख गया। दु:खी मांझी ने यह प्रण लिया कि जो घटना उसके साथ हो गई, वह किसी और के साथ नहीं हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बस, इसी संकल्प के साथ छैनी और हथौड़ी लेकर वह जुट गया और 1960 में प्रारम्भ हुई उसकी यह कर्मयात्रा 1982 में पूर्ण हुई। अब वह एक रास्ता बना चुका था और जैसा कि पहले बताया गया कि अब वहां से कस्बे तक पहुंचने की दूरी 55 से घटकर 15 किलोमीटर हो चुकी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज दशरथ मांझी दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किया गया कार्य उन्हें सदैव जिंदा रखेगा। मांझी के जीवन पर फिल्म बन चुकी है। उनकी कर्मण्यता ने अनेक पुस्तकों में स्थान पाया। उन्होंने इतिहास रचा, क्योंकि उन्होंने सिर्फ सपना देखा ही नहीं बल्कि इसे साकार किया। इसके लिए पूरे 22 साल तपस्या की। दइतरी भी इसी राह पर चला।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर आज भी जहां ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन चुनौतीपूर्ण है। जहां पर्याप्त साधन नहीं हैं, इसके बावजूद दशरथ और दइतरी ने बता दिया कि इच्छाशक्ति हो और चुनौतियों का सामना करने का माद्दा हो तो यह बाधाएं मनुष्य के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से बड़ी नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">दशरथ और दइतरी के साथ यही तो हुआ। उनसे पहले किसी ने समस्या का सामना करने का साहस नहीं जुटाया। वे मुसीबतों से समझौता करते गए। इस कारण वे अपनी कोई पहचान नहीं बना पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी छाप नहीं छोड़ पाए, लेकिन दशरथ और दइतरी इनसे जुदा थे। मानो, ऐसे लोग मुसीबतों को हराने के लिए ही बनते हैं और ऐसे ही लोगों को दुनिया हमेशा याद रखती है। तो इस ‘संडे’ का ‘फंडा’ यह है कि चुनौती से समझौता नहीं बल्कि उसका सामना करना चाहिए। कठोर परिश्रम करते हुए हम हरेक बाधा को लांघकर सफलता को चूम सकते हैं और यही सफलता हमें भीड़ से अलग अलहदा पहचान दिला पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरि शंकर आचार्य</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 08:13:55 +0530</pubDate>
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                <title>सत्ता प्राप्ति की आपाधापी से उपजी समस्याएं</title>
                                    <description><![CDATA[ललित गर्ग किसान आन्दोलन, शिलांग में हिंसा, रामजन्म भूमि विवाद, कावेरी जल, नक्सलवाद, कश्मीर मुद्दा आदि ऐसी समस्याएं हैं, जो चुनाव के निकट आते ही मुखर हो जाती है। ये मुद्दे एवं समस्याएं आम भारतीय नागरिक को भ्रम में डालने वाली है एवं इनको गर्माकर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने का सोचा-समझा प्रयास किया जा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/problems-stemming-from-the-emergence-of-power/article-4029"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sathaa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ललित गर्ग</strong></p>
<p style="text-align:justify;">किसान आन्दोलन, शिलांग में हिंसा, रामजन्म भूमि विवाद, कावेरी जल, नक्सलवाद, कश्मीर मुद्दा आदि ऐसी समस्याएं हैं, जो चुनाव के निकट आते ही मुखर हो जाती है। ये मुद्दे एवं समस्याएं आम भारतीय नागरिक को भ्रम में डालने वाली है एवं इनको गर्माकर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने का सोचा-समझा प्रयास किया जा रहा है। सभी राजनैतिक दल सत्ता प्राप्ति की आपाधापी में लगे हुए हैं। देश की जनता उन्हें जिन लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के लिये जनादेश देती है, चुनकर आने के बाद राजनीतिक दल उन्हें भुला देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक दल न अपना आचरण बदलती है, नहीं ही तोर-तरीके, वे ही बातें, वैसा ही चरित्र- जैसे सारी कवायद मतदाता को ठगने के लिये होती है। बात चाहे पक्ष की हो या विपक्ष की- येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करने का उन्माद सवार है। इन स्थितियों में जो बात उभरकर सामने आई है वह यह है कि ‘हम बंट कितने जल्दी जाते हैं, हम ठगे कितनी जल्दी जाते हैं।’ अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण को लेकर जिस तरह का निरर्थक विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है उसका लक्ष्य 2019 के लोकसभा चुनाव ही हैं। सबसे आश्चर्यजनक प्रसंग यह है कि कुछ हिन्दू साधु-सन्त सरकार को धमकी दे रहे हैं कि यदि मन्दिर निर्माण नहीं कराया गया तो चुनावों में भाजपा की जीत नहीं होगी। राष्ट्र जब आर्थिक एवं आतंकवाद की समस्याओं से जूझ रहा है तब इस प्रकार की घटनाएं देशवासियों की भावनाओं को घायल कर देती हैं। एक सदी पुराने इस विवाद को किसी भी पक्ष को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">न ही किसी फैसले को हार या जीत समझना चाहिए। यह श्रीराम के नाम पर आम भारतीय नागरिक को बांटने का षडयंत्र है। भारतीय लोकतान्त्रिक प्रशासन प्रणाली के तहत कोई भी सरकार किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं करा सकती है। मन्दिर, मस्जिद या गुरुद्वारे बनाने का काम सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं का होता है, सरकारों का नहीं। सरकार का काम केवल धार्मिक सौहार्द बनाये रखने व सभी धर्मों का समान आदर करने का होता है। ऐसा लग रहा है वर्तमान सरकार को इस मुद्दे पर दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है। भारत ने स्वतन्त्रता के बाद जिस धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्त को अपना कर अपने विकास का सफर शुरू किया उसकी पहली शर्त यही थी कि इस देश के नागरिक उन अन्ध विश्वासों को ताक पर रखकर बहुधर्मी समाज की संरचना वैज्ञानिक नजरिये से करेंगे, जो उन्हें आपस में एक- दूसरे को जोड़ सके न कि तोडे़।</p>
<p style="text-align:justify;">शिलांग में मामूली झगडे़ को स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा बनाने के पीछे भी राजनीति साजिश के ही संकेत मिल रहे हैं। व्यापक हिंसा एवं तनाव के बाद वहां करीब तीन हजार दलित सिख जिस पंजाब लेन में रहते हैं, वे या तो भयाक्रांत होकर घरों में बन्द हैं या फिर गुरुद्वारा अथवा सेना के शिविरों में शरण लिये हुए हैं। कुछ सेवाभावी संगठन उन्हें राशन और अन्य सहायता पहुंचा रहे हैं। सेना तेनात है, कर्फ्यू लगा है। लगभग एक सप्ताह हो जाने के बाद भी वहां की हवाओं में पेट्रोल बमों एवं आंसू गेस के गोलों की गंध व्याप्त है। देश की एकता एवं सामाजिक सामंजस्य को उग्र संगठन एवं सत्ता के लिये लालायित राजनेता ध्वस्त करने पर तुले हैं। अपने ही देश में अपने लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार आखिर कब तक?</p>
<p style="text-align:justify;">एक और समस्या ने देश की जनता को घायल किये हुए हैं। दस दिन तक चलने वाली किसानों की हड़ताल भले ही शांतिपूर्ण हो, लेकिन इससे अराजक माहौल तो बना ही है। देश के कई राज्यों में किसानों ने आंदोलन किया है। इस दौरान उन्होंने फलों, सब्जियों सहित दूध को सड़कों पर गिरा दिया। गौरतलब है कि किसान सब्जियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आंदोलन के चलते देश के कुछ हिस्सों में फल, सब्जी और दूध लोगों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा है। किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश में देखा जा रहा है। किसानों को भड़काया जा रहा है, उनको जगह-जगह सरकार के विरोध में खड़ा किया जा रहा है। यह सही है कि किसानों की बहुत-सी समस्याएं है, मगर सरकार उन्हें दूर करने के लिये लगातार प्रयास करती रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या आज की नहीं है, जब बारडोली आन्दोलन के बाद किसानों की मांगें तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने स्वीकार कर ली, उस आन्दोलन का नेतृत्व करने वाले सरदार पटेल ने अपने अनुयायियों को विजय उत्सव नहीं मनाने दिया। उन्होंने कहा कि, आन्दोलन का अर्थ है कि किसानों के साथ जो अन्याय हो रहा था, वह मिटा दिया गया। किसी की जीत व हार का प्रश्न नहीं है।’ आज भी वही भावना पैदा करनी होगी, समस्या का निदान होना चाहिए। लेकिन उस पर राजनीति न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी जीवन है। किन्तु इस पानी ने कर्नाटक एवं तमिलनाडु दो पड़ोसी प्रान्तों को जैसे दो राष्ट्र बना दिया है। कावेरी नदी जो दोनों राष्ट्रों के बीच बहती है, वहाँ के राजनीतिज्ञ उसे फाड़ देना चाहते हैं। सौ से अधिक वर्षों से चल रहा आपसी विवाद एक राय नहीं होने के कारण आज इस मोड़ पर पहुंच गया है तथा दोनों प्रान्तों के लोगों की जन भावना इतनी उग्र बना दी गई है कि परस्पर एक-दूसरे को दुश्मन समझ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि कावेरी नदी में पानी जोर-शोर से बह रहा है। बांधों में पानी समा नहीं रहा है। कावेरी को राजनीतिज्ञ और कानूनी बनाया जा रहा है। जब देश की अखण्डता के लिए देशवासी संघर्ष कर रहे हैं तब हम इन छोटे-छोटे मुद्दे उठाकर देश को खण्ड-खण्ड करने की सीमा तक चले जाते हैं। जब-जब कावेरी के पानी को राजनीति के रंग से रंगने की कोशिश की जाती है, तब तब दक्षिण भारत की इस नदी में भले ही उफान न आया हो लेकिन पूरे भारत की राजनीति इससे प्रभावित हो जाती है। बहुत वर्षों से नदी के पानी को लेकर अनेक प्रान्तों में विवाद है- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि। राजनीतिज्ञ केवल यही दृष्टिकोण रखते हैं कि नदी का पानी उसका, जहां से नदी निकलती है। पर मानवीय नियम यह है कि नदी का पानी उसका, जहां प्यास है। आज एक प्रान्त की मिट्टी उड़कर दूसरी जगह जाती है तो कोई नहीं रोक सकता। बिजली कहीं पैदा होती है, कोयला कहीं निकलता है, पैट्रोल कहीं शुद्ध होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गेहूँ, चावल, रुई, पाट, फल पैदा कहीं होते हैं और जाते सब जगह हैं। अगर हम थोड़ा ऊपर उठकर देखें तो स्पष्ट दिखाई देगा कि अगर इस प्रकार से एक प्रान्त दूसरे प्रान्त को अपना उत्पाद या प्राकृतिक स्रोत नहीं देगा तब दूसरा प्रांत भी कैसे अपेक्षा कर सकता है कि शेष प्रान्त उसकी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करते रहें। पानी की कमी नहीं है, विवेक की कमी है। राष्ट्रीय भावना की कमी है। क्या हमें अभी भी देश के मानचित्र को पढ़ना होगा?</p>
<h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय एकता को समझना होगा?</h3>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर में रमजान के दौरान सीजफायर की भारत सरकार की घोषणा के बावजूद हिंसा और पत्थरबाजी का क्रम बढ़ रहा है। लेकिन भारत अपनी अहिंसक भावना, भाईचारे एवं सद्भावना के चलते ऐसे खतरे मौल लेता रहता है। हर बार उसे निराशा ही झेलनी पड़ती है, लेकिन कब तक? पाकिस्तानी सेना का छल-छद्म से भरा रवैया नया नहीं है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार द्वारा पत्थरबाजों की माफी देने का परिणाम भी क्या निकला?</p>
<p style="text-align:justify;">विश्वशांति एवं भाईचारे के सिद्धांत में जिसका विश्वास होता है, वह किसी को धोखा नहीं देता, किसी के प्रति आक्रामक नहीं होता। फिर भी पाकिस्तान अपनी अमानवीय एवं हिंसक धारणाओं से प्रतिबद्ध होकर जिस तरह की धोखेबाजी करता है, उससे शांति की कामना कैसे संभव है? बात चले युद्ध विराम की, शांति की, भाईचारे की और कार्य हो अशांति के, द्वेष के, नफरत के तो शांति कैसे संभव होगी?</p>
<p style="text-align:justify;">इन राष्ट्रीय एकता को ध्वस्त करने की घटनाओं में भी हमारे राजनेताओं द्वारा राजनीति किया जाना, आश्चर्यजनक है। कब तक सत्ता स्वार्थो के कंचन मृग और कठिनाइयों के रावण रूप बदल-बदलकर आते रहेंगे और नेतृत्व वर्ग कब तक शाखाओं पर कागज के फूल चिपकाकर भंवरों को भरमाते रहेंगे। राजनैतिक दल नित नए नारों की रचना करते रहते हैं।<br />
जो मुद्दे आज देश के सामने हैं वे साफ दिखाई दे रहे हैं। वह मन्दिर, किसान, पानी है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश को जरूरत है एक साफ-सुथरी शासन प्रणाली एवं आवश्यक बुनियादी सुविधाओं तथा भयमुक्त व्यवस्था की। लोकतंत्र लोगों का तंत्र क्यों नहीं बन रहा है व्याप्त अनगिनत समस्याएं राष्ट्रीय भय का रूप ले चुकी हैं। आज व्यक्ति बौना हो रहा है, परछाइयां बड़ी हो रही हैं। अन्धेरों से तो हम अवश्य निकल जाएंगे क्योंकि अंधेरों के बाद प्रकाश आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर व्यवस्थाओं का और राष्ट्र संचालन में जो अन्धापन है वह निश्चित ही गढ्ढे में गिराने की ओर अग्रसर है। यह स्वीकृत सत्य है कि एक भी राजनैतिक पार्टी ऐसी नहीं जो देश की समस्याओं पर सच बोलती हो। भारतीय जनता ने बार-बार अपने जनादेश में स्पष्ट कर दिया कि जो हाथ पालकी उठा सकते हैं वे हाथ अर्थी भी उठा सकते हैं।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jun 2018 10:31:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कोहली को नहीं स्लिप डिस्क समस्या : बीसीसीआई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। थकान व चोट के कारण भारतीय कप्तान विराट कोहली सर्रे के लिए काउंटी सत्र में कुछ ही मैच खेल सकेंगे। कोहली के अस्पताल में नजर आने से उनकी चोट को लेकर आशंकायें जताई जा रही थी। कोहली चेकअप के लिये मुंबई के एक अस्पताल गए थे जिसके बाद खबरें आई थी कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>थकान व चोट के कारण भारतीय कप्तान विराट कोहली सर्रे के लिए काउंटी सत्र में कुछ ही मैच खेल सकेंगे। कोहली के अस्पताल में नजर आने से उनकी चोट को लेकर आशंकायें जताई जा रही थी। कोहली चेकअप के लिये मुंबई के एक अस्पताल गए थे जिसके बाद खबरें आई थी कि उन्हें स्लिप डिस्क हो गया है और वह भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे से पहले सर्रे के लिये काउंटी क्रिकेट नहीं खेल सकेंगे। बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने हालांकि स्पष्ट किया कि उनकी गर्दन में मोच है और उन्हें स्लिप डिस्क नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने कहा, ‘विराट के साथ थकान का मसला है लेकिन यह कार्यभार प्रबंधन की बात है। स्लिप डिस्क नहीं हुआ है। हम उनके कार्यभार पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, ”हम देख रहे हैं कि काउंटी सत्र में उन पर ज्यादा भार नहीं पड़े। वह दो चार दिवसीय मैच खेलेंगे लेकिन 50 ओवरों वाले रायल लंदन कप के पांच मैच नहीं खेलेंगे। स्लिप डिस्क के बारे में पूछने पर अधिकारी ने कहा, ”विराट ने कल ही सरकार के फिटनेस चैलेंज के तहत अपना फिटनेस वीडियो डाला है और वह वीडियो कल ही बनाया गया है। कोहली को खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सोशल मीडिया पर अपनी फिटनेस मुहिम ‘हम फिट तो इंडिया फिट’ में टैग किया था। इसके जवाब में कोहली ने जिम में वर्जिश करते हुए अपना फिटनेस वीडियो डाला था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पूछने पर कि वह खार के एक अस्पताल में रीढ की हड्डी के डाक्टर के पास क्यों गए थे, अधिकारी ने कहा, ”विराट को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आईपीएल मैच में गर्दन में मोच आई थी। दर्द कम हो गया था लेकिन वह एहतियात के तौर पर चेक अप के लिये गया था। कोहली ने जून 2017 से अब तक नौ टेस्ट, 29 वनडे और नौ टी 20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। इसके अलावा इस सत्र में आईपीएल के 14 मैच भी उन्होंने खेले।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 13:53:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बाल श्रमिक : समस्याएं एवं कानून</title>
                                    <description><![CDATA[बाल श्रमिक समस्या भारत की नहीं विश्वभर की समस्या है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में संभवत: 20 करोड़ बाल श्रमिक है। नेशनल सेंपल सर्वे के अनुसार भारत में 2 करोड़ बाल श्रमिक हैं जिसमें से 83 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में हैं। 40 लाख श्रमिक जोखिम भरे उद्योगों में नियोजित हैं। वैसे तो भारत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-labor-problems-and-laws/article-3489"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/bal-sharm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बाल श्रमिक समस्या भारत की नहीं विश्वभर की समस्या है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में संभवत: 20 करोड़ बाल श्रमिक है। नेशनल सेंपल सर्वे के अनुसार भारत में 2 करोड़ बाल श्रमिक हैं जिसमें से 83 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में हैं। 40 लाख श्रमिक जोखिम भरे उद्योगों में नियोजित हैं। वैसे तो भारत के संविधान में अनुच्छेद 24 यह प्रतिबंध करता है कि किसी भी बालक को जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम है, उसे कारखाने, खदान अथवा जोखिम भरे उद्योगों में नियोेजित नहीं किया जा सकता। संविधान के उपरोक्त संरक्षण के उपरांत भी बाल श्रमिकों के नियोजन पर कोई नियंत्रण नहीं किया जा सका। इसलिए वर्ष 1986 में बाल श्रम (प्रतिशेध विनियमन) अधिनियम पारित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बाल श्रम से कानूनों में बालक की परिभाषा अलग-अलग दी गई है जिसमें उम्र में भी भिन्नता है हालांकि अधिकतम 14 वर्ष कई कानूनों में किया जा चुका है फिर भी परिभाषा में एकरूपता नहीं है। बाल अधिनियम 1960 में बालक की परिभाषा यह है कि जिसने 16 वर्ष की आयु पूर्ण न की हो, इसी तरह बालिका है तो 18 वर्ष की आयु पूर्ण न की हो। बाल श्रम (प्रतिशेध एवं विनियमन) अधिनियम 1996 में धारा 3 में उन उद्योगों का हवाला दिया है जिसमें बाल श्रमिकों का नियोजन प्रतिबंधित है। जैसे रेलवे, कारपेट बीविंग, भवन निर्माण, आतिशबाजी, विस्फोटक, बीड़ी निर्माण, प्रिटिंग प्रेस, बिजली उद्योग, कपड़ा छपाई आदि। ऐसे उद्योगों में यदि बाल श्रमिक का नियोजन पाया जाता है तो अधिनियम की धारा 14-अ के अनुसार नियोक्ता, मालिक को 3 माह से एक वर्ष तक का कारावास एवं अधिकतम 20- हजार रुपए के दंड से दंडित किया जा सकता है। परंतु आज तक ऐसा कोई उदाहरण देखने को नहीं मिला है कि किसी नियोक्ता को सजा मिली हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि भारत के संदर्भ में बाल श्रमिकों के नियोजन की स्थिति को देखा जाए तो यह देखा जा सकता है कि बाल श्रमिक व नियोजन उसके परिवार की सामाजिक, आर्थिक स्थिति तथा गरीबी के कारण बढ़ता चला जा रहा है। आधुनिकीकरण उपभोक्ता संस्कृति, शहरीकरण की दौड़ में बाल श्रमिक एक ऐसा सस्ता औजार है, जिसके उपयोग से नियोक्ता, ठेकेदार, प्रतिष्ठान सस्ते श्रम पर अधिकतम लाभ प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं एवं बाल श्रमिकों का धड़ाधड़ नि:संकोच नियोजन कर रहे हैं। जिस पर प्रशासन का भी नियंत्रण नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका प्रमाण श्रमायुक्त कार्यालयों के सामने न्यायालयों के सामने एवं प्रशासन के सामने ही हजारों बाल श्रमिक होटलों में, टेम्पो, मिनी बसों में, दुकानों में, गैरिज में तथा घरों में रात-दिन काम करते देखे जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाल श्रमिकों का नियोजन समाप्त किया जाना संभव नहीं है। इसका उदाहरण इस तरह भी लिया जा सकता है कि योजना आयोग द्वारा ठेका, श्रम प्रथा को समाप्त करने की सिफारिश की थी जो कि उस समय संसद की मंशा के अनुरूप थी। परन्तु ठेका श्रम प्रथा को समाप्त नहीं किया गया एवं ठेका श्रम उत्पादन एवं विनियमन अधिनियम 1970 पारित किया गया जिसका उद्देश्य तो ठेका, श्रम प्रथा को समाप्त करना था परंतु यह दूषित व्यवस्था धड़ल्ले से चल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी माता-पिता, परिवार यह नहीं चाहता कि उसका बच्चा बालपन में ही मेहनत-मजदूरी करे, प्रत्येक मां-बाप के सपने एक जैसे होते हैं। परंतु गरीबी बेरोजगारी, अशिक्षा एवं महंगाई की मार ही मजबूर करती है कि एक बालक शिक्षा की बजाय परिवार की भरण पोषण के लिए पूरक आय का साधन बनता है। सरकार को बाल श्रम के संबंध में गंभीरता से सतर्कतापूर्वक विचार करना चाहिए। क्योंकि उग्रवादी एवं आतंकवादी संगठनों द्वारा 13-14 वर्ष तक के बच्चों को नौकरी व धन का लालच देकर गुमराह किया जा रहा है एवं आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक जी.के. छिब्बर</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 04:16:04 +0530</pubDate>
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                <title>परिवार में बढ़ती दूरियां</title>
                                    <description><![CDATA[सामाजिक सौहार्द का जितना हृास विगत 50 वर्षों में हुआ है, उतना तो उससे पूर्व के पांच सौ वर्षों में भी नहीं हुआ था, जबकि उस समय न हमारी पहचान थी और न देश की। देश एक उपनिवेश मात्र था। जैसे-तैसे सैकड़ों नाम तथा अनाम सेनानियों की वजह से हमने स्वतंत्रता तो हासिल कर ली। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-distances-in-the-family/article-3384"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/family.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सामाजिक सौहार्द का जितना हृास विगत 50 वर्षों में हुआ है, उतना तो उससे पूर्व के पांच सौ वर्षों में भी नहीं हुआ था, जबकि उस समय न हमारी पहचान थी और न देश की। देश एक उपनिवेश मात्र था। जैसे-तैसे सैकड़ों नाम तथा अनाम सेनानियों की वजह से हमने स्वतंत्रता तो हासिल कर ली। किन्तु आज हम स्वयं ही उसे मिटाने में लगे हुए हैं। संचार तथा परिवहन क्रांति से देशों के मध्य दूरियां कम होती जा रही हैं, जो मनुष्य कभी सामाजिक प्राणी था, वही आज पारिवारिक प्राणी बन गया है और तेजी से एकाकी प्राणी बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। आज सब मनुष्य एक अन्धी-लंगड़ी दौड़ लगा रहे हैं। एक-दूसरे को लंगड़ी मारते हुए आगे निकल रहे हैं। इस अन्धी-लंगड़ी दौड़ में कौन गिरा, कौन कुचला गया, यह देखने के लिए रुकने की किसी को फुर्सत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबका एकमात्र लक्ष्य एक दूसरे से आगे निकलना है। यह मानव स्वभाव है कि लोग उन्हीं का सबसे ज्यादा हित या अहित करते हैं, जिनको वे जानते-पहचानते हैं। नगरों तथा महानगरों का तो यह हाल है कि लोग अपने आजू-बाजू रहने वाले पड़ोसियों के नाम तथा उनकी शक्ल भी नहीं जानते। कौन कब जाता है, क्या करता है। यह जानने की न तो उत्सुकता है और न ही उनके पास इन व्यर्थ की बातों के लिए समय है। जिन बेजान मशीनों को मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए बनाया था। आज वे ही उसकी मालिक बन बैठी हैं। इसे कहते हैं घूरे के दिन फिरना। जब जड़ वस्तुएं चेतन वस्तुओं पर भारी पड़ने लगें, उससे अजीब और क्या हो सकता है, पर यही तो कलयुग (मशीनी युग) का चमत्कार है। आज की अन्धी दौड़ का एकमात्र ध्येय है अधिकाधिक द्रव्य (धन-सम्पत्ति) का संचय कर मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करना।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही इससे प्राप्त मान-प्रतिष्ठा कितनी ही अस्थायी क्यों न हो। ज्यों-ज्यों मनुष्य का द्रव्य (धन सम्पत्ति) बढ़ता जाता है, त्यों-त्यों ही उसके शरीर के लिए द्रव (तरल, पानी) सूखता जाता है। नतीजा होता है द्रव पदार्थों पर निर्भर होते जाना। ऐसे लोग धीरे-धीरे ठोस पदार्थों का सेवन करने योग्य नहीं रह जाते, क्योंकि शरीर में इनको पचाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं रहता। सकल पदार्थ है जग मांहि करमहीन नर पावत नाही।’ ऐसे ही लोगों पर सटीक बैठती है। ऐसे लोगों को जीवन पर्यन्त तरल पदार्थों को सेवन कर गुजारना पड़ता है। दूसरी तरफ उसकी आजादी को भी ग्रहण लग जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">असुरक्षा भाव के कारण जहां एक ओर वह सुरक्षाकर्मियों से घिरा रहता है तो दूसरी ओर चिकित्सकों के दल से। ऐसे लोग समाज से स्वयं ही दूर होते जा रहे हैं। राष्टÑपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केन्द्रीय मंत्रीगण ऐसे लोग हैं, जो सामान्य आदमी की तरह न तो बाजार में घूम सकते हैं। न चाट-पकौड़ी खा सकते हैं और न ही कहीं खरीददारी कर सकते हैं। प्राचीनकाल में राजा लोग अपनी जनता का हाल जानने के लिए वेश बदलकर रात्रि को गश्त लगाया करते थे। आज के नेतागण इसके लिए अपने सहायकों पर निर्भर रहते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें सत्ता के पंचवर्षीय नवीनीकरण में उठाना पड़ता है। हम साम्प्रदायिक अलगाव, विभेद की तो लम्बी-चौड़ी बातें करते हैं। बड़े-बड़े विशेषज्ञ बैठकर लम्बी-लम्बी बहसें करते हैं, किन्तु दिन-प्रतिदन परिवार विभेद के रूप में मंडराते संकट की अनदेखी कर रहे हैं। प्रोफेशनल अथवा प्रैक्टिकल शब्द स्वार्थी-मतलबी शब्दों का ही रूपान्तरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब परिवार ही बिखर जायेगा तो न समाज रहेगा न सम्प्रदाय। यदि इन्हें बचाना है तो पहले परिवार को बचाना होगा। सौभाग्य से आज भी ऐसे संयुक्त परिवार मौजूद हैं, जिनकी तीन से भी अधिक पीढ़ियां एक साथ रह रही हैं। भले ही उनके पास अकूत धन-सम्पत्ति न हो, किन्तु उनके साथ उनका पूरा परिवार, बन्धु-बान्धव होते हैं, जो हर दु:ख-सुख में उनके साथ खड़े रहते हैं। उन्हें धन की, साधनों की, संख्या बल की कमी कभी महसूस नहीं होने देते। ऐसे ही परिवारों से स्वस्थ समाज का निर्माण होता था। आवश्यकता है परिवार के विघटन को रोकने की। बिना इसके सामाजिक सौहार्द की कल्पना करना बेमानी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक- मुरली मनोहर</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Oct 2017 04:39:23 +0530</pubDate>
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                <title>रेल दुर्घटनाओं की पुनरावृति: समस्या और समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय परिवहन का प्रमुख तंत्र रेलवे पुन: एक बड़ी दुर्घटना के चपेट में आया। मुजफ्फरनगर के खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे, जिसमें कम से कम 23 लोग मर गए तथा 100 से ज्यादा घायल हुए। दुर्घटना की तस्वीरों से ही स्थिति की भयावहता को समझा जा सकता है। खतौली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/recurrence-of-rail-accidents-problems-and-solutions/article-3286"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/railway.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय परिवहन का प्रमुख तंत्र रेलवे पुन: एक बड़ी दुर्घटना के चपेट में आया। मुजफ्फरनगर के खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे, जिसमें कम से कम 23 लोग मर गए तथा 100 से ज्यादा घायल हुए। दुर्घटना की तस्वीरों से ही स्थिति की भयावहता को समझा जा सकता है। खतौली रेलवे स्टेशन से आगे जहां हादसा हुआ, वहां पटरी मरम्मत का कार्य चल रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">पटरी मरम्मत के औजार भी घटनास्थल पर पड़े हुए हैं, फिर भी चालक को इसकी कोई जानकारी नहींं दी गई तथा कलिंग उत्कल एक्सप्रेस चश्मदीदों के अनुसार 100 किमी/घंटा की ज्यादा गति से मरम्मत वाली पटरियों से गुजरी, जिसके बाद यह हादसा तो तय ही था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दुर्घटना में रेल मंत्रालय की लापरवाही स्पष्ट देखी जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण, यह दुर्घटना तब घटी है, जब अगले ही माह सितंबर में भारत में बुलेट ट्रेन की नींव रखी जानी है। इस हादसे की भयावहता को इससे ही समझा जा सकता है कि रेल का एक डिब्बा बगल के घर में घुसते हुए चौधरी तिलक राम इंटर कॉलेज की बिल्डिंग में भी घुस गया। घर के अंदर के लोग भी इससे घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ट्रैक काफी दिनों से खराब था, जिसमें लगातार मरम्मत कार्य जारी था। चश्मदीदों के अनुसार एक माह पहले भी यहां एक बड़ी रेल दुर्घटना को स्थानीय लोगों की पहल से रोका गया था। उस समय भी रेल पटरी मरम्मत के कारण टूटे ट्रैक पर ट्रेन आ रही थी, जिसे लाल कपड़ा दिखाकर किसी तरह रोका गया। इस घटना से भी रेलवे ने कोई सीख नहीं ली।</p>
<p style="text-align:justify;">यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि मरम्मत के दौरान टूटे पटरी पर आखिर ट्रेन को चलने की अनुमति कैसे मिली? देश में रेल दुर्घटनाएँ क्यों होती हैं? कैसे होती हंै? इसके कारण और निदान नीति-निर्माता से लेकर आम आदमी सभी को पता है, फिर भी हर वर्ष ये दुर्घटनाएं होती हैं, उनकी जांच होती है, बैठकें होती हैं, मुआवजे की घोषणाएं होती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी मृतकों के परिजनों को 3.5 लाख, गंभीर रुप से घायलों को 50 हजार तथा सामान्य घायलों को 25 हजार मुआवजे की रेल मंत्रालय ने घोषणा की है। दरअसल रेल दुर्घटनाओं का असर किसी भी अन्य दुर्घटनाओं से काफी ज्यादा होता है। भारतीय रेलवे अंतर्देशीय परिवहन का सबसे बड़ा माध्यम है। दुनिया के इस सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक भारत में हर रोज सवा दो करोड़ से भी ज्यादा लोग रेल की सवारी करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में भारतीय रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तीव्रतम प्रयास करने होंगे तथा तब तक प्रयत्नशील होना होगा, जब तक रेलवे दुर्घटनाओं को शून्य तक नहीं पहुंचा दे। मानवीय चूक को रोकने के वैश्विक स्तर पर दो उपाय स्वीकार किए गए हैं-प्रथम आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग कर मानवीय चूक को कम करना, द्वितीय-रेल कार्मिकों का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आधुनिकतम तकनीक की बात करें तो इसमें ‘यूबीआरडी’प्रमुख है। रेलवे ने रेल पटरियों की सुरक्षा निगरानी हेतु दक्षिण अफ्रीका से एक खास तकनीक यूबीआरडी आयात की है, जिसमें ट्रांसमीटर एक तरंग छोड़ता है और अगर रिसीवर को वह तरंग नहीं मिलती है तो पता चल जाता है कि कहीं बीच में कोई समस्या है। इस प्रणाली से पटरी के बारीक चटक का भी पता लग जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त आधुनिक “लिंक हाफमैन बुश” डिब्बे की अनुपस्थिति से भी हताहतों की संख्या में वृद्धि होती है। लिंक हॉफमैन बुश से युक्त डिब्बे पटरी से उतरने के बाद भी ज्यादा असरदार तरीके से झटकों और इसके प्रभाव को झेल सकते हैं और ये पलटते नहीं। इससे जानमाल के नुकसान में अप्रत्याशित कमी आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानवीय चूक रोकने का दूसरा प्रमुख उपाय रेलकर्मियों का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण है। इस मामले में जिस तरह जानलेवा लापरवाही दिखी, उससे रेल कर्मियों में प्रशिक्षण की भारी कमी स्पष्टत: देखी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तेज रफ्तार वाली ट्रेन चल रही हो तो ट्रेन के दोनों ओर तैनात कुशल तकनीशयन द्वारा दूर से आ रही रेलगाड़ी की चाल उसकी लहर व उसके नीचे से निकलने वाली अवांछित आवाजों तथा ईंजन व गार्ड के मध्य सभी डिब्बों के बीच झटकों व उनके परस्पर खिंचाव आदि पर पैनी नजर रखनी चाहिए। साथ ही जिस ट्रैक से वह तीव्र गति ट्रेन गुजर रही हो उस पर भी पूरी चौकस नजर रखी जानी चाहिए। खतौली रेल दुर्घटना में तो पटरी मरम्मत तक की जानकारी ड्राइवर को नहीं मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">आपदा प्रबंधन की तमाम तैयारियों की बातों के बीच भी दिल्ली से केवल 100 किमी दूर खतौली में दुर्घटना के कम से कम एक घंटे बाद ही राहत कार्य अधिकृत तौर पर शुरू हो पाया। इस संपूर्ण मामले में मुजफ्फरनगर के खतौली निवासियों ने अपने स्तर पर घटना घटते ही बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया था। स्थानीय लोगों ने तीव्र गति से लोगों को बाहर निकाला और घायलों को हॉस्पिटल पहुँचाया।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ समय से भीड़ अपने निर्दयी कारणों से चर्चा में थी, लेकिन खतौली में भीड़ का न केवल मानवीय पक्ष सामने आया, अपितु दुर्घटना ग्रस्त यात्रियों के अनुसार वे देवदूत की ही भूमिका में थे। एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल औसतन 300 छोटी-बड़ी रेल दुर्घटनाएँ होती है। जब भी कोई रेल दुर्घटना होती है, मुआवजे की घोषणा कर उसे भुला दिया जाता है। हमें इस प्रवृत्ति से बाहर आना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रेलवे सुरक्षा के कई पहलू होते हैं, लेकिन प्रबंधन के स्तर पर सभी पहलू जुड़े रहते हैं। होता यह है कि रेलवे विभाग रेल सेवाओं में तो वृद्धि कर देता है, परंतु सुरक्षा का मामला उपेक्षित रह जाता है। राजनीतिज्ञों और प्रबंधकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रेलवे सिस्टम को एक तय सीमा से ज्यादा न खींचा जाए। रेलवे सुरक्षा और सेवाओं के मध्य समुचित संतुलन बनाए जाने की जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">उम्मीद है कि इस वर्ष से अलग रेलवे बजट न होने के कारण रेल मंत्रालय के ऊपर लोकप्रिय निर्णय लेने का दबाव नहीं रहेगा और वह सुरक्षा पर समुचित खर्च कर सकेगी। अब समय आ गया है, जब भारतीय रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें, नहीं तो फिर हम लोग शायद किसी नए दुर्घटना के बाद भी इन्हीं मुद्दों पर चर्चा करते दिखें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-Rahul Lal</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2017 00:12:26 +0530</pubDate>
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                <title>एसपी ने किया केंद्रीय कारागृह का निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[कैदियों की समस्याओं को भी सुना श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। जिला पुलिस अधीक्षक हरेंद्र महावर ने सोमवार सुबह केन्द्रीय कारागृह में अचानक निरीक्षण किया। जिला पुलिस अधीक्षक ने जेल में सभी बैरक तथा अन्य स्थानों का निरीक्षण किया और कैदियों से भी मुलाकात कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल की। जेल अधीक्षक राजपाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/inspects-of-the-central-jail-by-sp/article-2586"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/inspects.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कैदियों की समस्याओं को भी सुना</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिला पुलिस अधीक्षक हरेंद्र महावर ने सोमवार सुबह केन्द्रीय कारागृह में अचानक निरीक्षण किया। जिला पुलिस अधीक्षक ने जेल में सभी बैरक तथा अन्य स्थानों का निरीक्षण किया और कैदियों से भी मुलाकात कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल की। जेल अधीक्षक राजपाल चारण ने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र महावर कारागृह में निरीक्षण के दोरान करीब एक घण्टा रूके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने महिला और पुरूषों बैरकों का निरीक्षण किया। वहीं उन्होंने योगा, लाईब्रेरी और रसोई घर को भी देखा। सभी व्यवस्थाओं को देख एसपी संतुष्ट हुए और उन्होंने और व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास करने के निर्देश दिये। चारण ने बताया कि उन्होंने महिला और पुरूष कैदियों से भी मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने महिला बंदियों के बैरक में पंखों की संया बढ़ाने और टीवी लगवा देने के बारे में भी कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2017 08:07:12 +0530</pubDate>
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                <title>संवेदनशीलता से करें जनसमस्याओं का निराकरण: राजे</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा संभाग की जनसुनवाई जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिले में अपनी समस्या के निराकरण की आस लेकर आने वाले परिवादियों को न केवल पूरी संवेदनशीलता से सुनें बल्कि पूरी तत्परता से उनकी तकलीफों को दूर भी करें। श्रीमती राजे शुक्रवार को 8 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/solve-problems-of-peoples-from-sensitivity-raje/article-2056"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/clp_6619.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कोटा संभाग की जनसुनवाई</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिले में अपनी समस्या के निराकरण की आस लेकर आने वाले परिवादियों को न केवल पूरी संवेदनशीलता से सुनें बल्कि पूरी तत्परता से उनकी तकलीफों को दूर भी करें।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती राजे शुक्रवार को 8 सिविल लाइन्स पर जनसुनवाई के दौरान कोटा संभाग के विभिन्न जिलों से आए लोगों के अभाव-अभियोग सुन रही थीं। करीब दो घण्टे तक श्रीमती राजे ने संभाग के कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों से आये एक-एक व्यक्ति की समस्या सुनीं और अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए। कई मामलों में श्रीमती राजे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे मौके पर जाकर परिवादियों को राहत प्रदान करें। मुख्यमंत्री द्वारा की गई जनसुनवाई से लौटते समय फरियादियों के चेहरे पर संतोष के भाव दिखाई दे रहे थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अभ्यर्थियों को शीघ्र मिलेगी नियुक्ति</h3>
<p style="text-align:justify;">जनसुनवाई के दौरान संभाग के विभिन्न जिलों से आए आरएएस-2013 परीक्षा के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग की। श्रीमती राजे ने उन्हें आश्वस्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि चयनितों को जल्द नियुक्ति दी जाए। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि कार्मिक विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है और संभवत: एक सप्ताह में नियुक्ति दे दी जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जिलावार सुनवाई की व्यवस्था</h3>
<p style="text-align:justify;">जनसुनवाई के लिए आने वाले लोगों की सुविधा के लिए जिलावार ब्लॉक बनाए गए थे। इन ब्लॉक्स में सम्बन्धित जिलों से आए लोगों के लिए छाया-ठण्डे पानी तथा गर्मी से राहत देने के लिए पंखों की व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर राज्य स्तरीय जन अभाव अभियोग एवं सतर्कता समिति के अध्यक्ष श्री श्रीकृष्ण पाटीदार, राज्य वरिष्ठ नागरिक बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष श्री प्रेमनारायण गालव, संसदीय सचिव श्री नरेन्द्र नागर सहित विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव सहित संभाग के चारों जिलों से आए वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 07:10:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकास कार्यों के लिए नहीं रहेगी धन की कमी: बराला</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने समस्याओं का किया समाधान टोहाना(सच कहूँ न्यूज)। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं टोहाना के विधायक सुभाष बराला ने शनिवार को अपने आवास पर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों व अधिकारियों के साथ गांवों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपनी पंचायतों द्वारा गांवों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bjps-president-made-a-solution-to-the-problems/article-1863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/barala.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">भाजपा के प्रदेश<strong> अध्यक्ष ने समस्याओं का किया समाधान</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोहाना(सच कहूँ न्यूज)।</strong> भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं टोहाना के विधायक सुभाष बराला ने शनिवार को अपने आवास पर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों व अधिकारियों के साथ गांवों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपनी पंचायतों द्वारा गांवों के आगामी विकास कार्यों का खाका भी तैयार करवाकर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर उन्होने हर विभाग के अधिकारियों व समस्या को लेकर पहुंचे लोगों को आमने-सामने बैठाकर समाधान करवाया। बराला ने सक्ष्त हिदायत भी दी कि यदि कोई अधिकारी लोगों की समस्याओं की अनदेखी करेगा उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। बराला ने कहा कि हलका के प्रत्येक गांव में विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गांवों में गलियां, जोहड़ों की रिटर्निंग वॉल, गंदे पानी की निकासी के लिए नाले सहित सभी विकास कार्यों का खाका जन प्रतिनिधियों से तैयार करवाया गया है और उसी के अनुसार विकास कार्यों को गति दी जाएगी। इस अवसर पर सुभाष बराला के अलावा जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश खोथ, डीएसपी शमशेर दहिया, तहसीलदार नवदीप नैन, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रविन्द्र दलाल, नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार सहित अन्य मौजूद थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अन्य विभागों का होगा निरीक्षण</h2>
<p style="text-align:justify;">बिजली विभाग में औचक छापेमारी के बाद बराला अभी कई विभागों का औचक निरीक्षण करने वाले हैं। ये बात उन्होंने प्रैसवार्ता में पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कही। बराला ने कहा कि कर्मचारियों के समय पर न पंहुचने तथा कार्य न करने की शिकायतें लगातार मिल रही थी जिस को लेकर उन्होने शुक्रवार को सुबह बिजली विभाग का निरीक्षण किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कई जगहों पर बिजली की ढीली तारे व अन्य समस्याएं थी जिसको लेकर अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैें। इस अवसर पर निजी सचिव कृष्ण नैन, जिले सिंह बराला, जयदीप बराला, जयवीर मूंड, कुलदीप मूंड सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।</p>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 00:57:30 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात ने दिलाई गर्मी से राहत</title>
                                    <description><![CDATA[निकासी व्यवस्था दुरुस्त न होने से बनी परेशानी गुरुग्राम (SachKahoon News)। शनिवार शाम को आसमान में बादल छाने शुरु हो गए और पांच बजे रिमझिम बरसात शुरु हो गई। रिमझिम बरसात से मौसम सुहावना हुआ और गर्मी से राहत मिली। पंद्रह मिनट की बरसात में लोगों ने राहत ही सांस ली। गर्मी से परेशान बच्चे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/rain-in-gurugram-people-get-relief/article-1114"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/rain-in-gurugram.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">निकासी व्यवस्था दुरुस्त न होने से बनी <strong>परेशानी</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (SachKahoon News)। </strong>शनिवार शाम को आसमान में बादल छाने शुरु हो गए और पांच बजे रिमझिम बरसात शुरु हो गई। रिमझिम बरसात से मौसम सुहावना हुआ और गर्मी से राहत मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">पंद्रह मिनट की बरसात में लोगों ने राहत ही सांस ली। गर्मी से परेशान बच्चे भी अपने घरों में बरसात में नहाते दिखाई दिए। अचानक ही आई बरसात से वाहन चालक व पैदल चलने वाले लोग परेशान भी दिखाई दिए। वे बरसात से बचने के लिए जगह तलाशते दिखाई दिए। लोगों का कहना है कि थोड़ी-थोड़ी बरसात होती रहे तो भीषण गर्मी से थोड़ी राहत अवश्य मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका यह भी कहना है कि बरसात के बाद लोगों को उमस का सामना भी करना पड़ेगा। परेशानी तो उस समय होगी, जब बिजली आपूर्ति भी बाधित हो जाएगी। क्योंकि साईबर सिटी में अघोषित बिजली कट लगाए जा रहे हैं। बिजली के आने और जाने का कोई समय नहीं है। बरसात के होने से शहर के मुख्य मार्गों व कालोनियों की सड़कों पर पानी भर जाता है,</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नगर निगम द्वारा नहीं की गई है। हालांकि नगर निगम दावे करती रही है कि बरसात से पूर्व ही नालों की सफाई कराई जाती रही है। निगम इस काम पर करोड़ों खर्च भी करती है, लेकिन फिर भी शहरवासियों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है।</p>
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</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2017 00:35:50 +0530</pubDate>
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