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                <title>banned - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>सरकारी अधिकारियों के जींस टी-शर्ट पहनने पर पाबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)। फरीदकोट जिले के सभी सरकारी दफ्तर में जींस और टीशर्ट (Jeans and T-Shirt) पहनकर आने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिले डीसी द्वारा सभी विभागों के प्रमुखों को इसका अनुपालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। फरीदकोट में सरकारी अधिकारियों के जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक लग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/there-is-a-complete-ban-on-coming-to-government-offices-wearing-jeans-and-t-shirt/article-52095"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/jeans-ban.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)।</strong> फरीदकोट जिले के सभी सरकारी दफ्तर में जींस और टीशर्ट (Jeans and T-Shirt) पहनकर आने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिले डीसी द्वारा सभी विभागों के प्रमुखों को इसका अनुपालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। फरीदकोट में सरकारी अधिकारियों के जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक लग गई है। अब सभी को फॉर्मल कपड़ों में ऑफिस आना होगा। जिले के डीसी विनीत कुमार ने यह आदेश जारी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">डीसी ने आदेश जारी कर सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के जींस टी शर्ट पहन कर दफ्तरों में आने पर तुरंत प्रभाव से पाबंदी लगा दी है और सभी को फार्मल ड्रेस में आने की हिदायतें दी है। डीसी की तरफ से जारी आदेश में लिखा गया है कि आम तौर पर देखने को मिल रहा है कि कई अधिकारी व कर्मचारी दफ्तरों में जींस टी शर्ट आदि पहन कर आते है। यह प्रथा ठीक नहीं है। ऐसा पहरावा लोगों पर अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ता। ऐसे भी सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को दफ्तर में फॉर्मल ड्रेस ही पहन कर आना चाहिए। डीसी ने जिले के समूह विभाग के मुखियों को आदेश की प्रतिलिपि भेजकर अपने अधीन सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को हिदायतों से अवगत करवाने और इसका पालन करवाने के आदेश दिए हैं। Faridkot News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बच्चे से मारपीट करने वाला टीचर निलंबित" href="http://10.0.0.122:1245/teacher-who-assaulted-child-suspended/">बच्चे से मारपीट करने वाला टीचर निलंबित</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 21:19:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा के छह जिलों में गैर पंजीकृत सोशल मीडिया न्यूज प्लेटफार्म्स बैन</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया को मान्यता देने के आदेशों के तुरंत बाद हुई कार्रवाई  (Unregistered social media news platforms Banned ) करनाल में 15 दिन तो सोनीपत, कैथल, चरखी दादरी, नारनौल और भिवानी में अगले आदेशों तक बैन विरोध में लोगों ने सोशल मीडिया पर ही चलाई मुहिम सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़। प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/unregistered-social-media-news-platforms-banned-in-six-districts-of-haryana/article-16692"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/unregistered-social-media-news-platforms-banned-in-six-districts-of-haryana.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">सोशल मीडिया को मान्यता देने के आदेशों के तुरंत बाद हुई कार्रवाई  (Unregistered social media news platforms Banned )</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>करनाल में 15 दिन तो सोनीपत, कैथल, चरखी दादरी, नारनौल और भिवानी में अगले आदेशों तक बैन</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>विरोध में लोगों ने सोशल मीडिया पर ही चलाई मुहिम</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़</strong>। प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार ने हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक में सोशल मीडिया पर आधारित पत्रकारिता को मान्यता देने का फैसला किया था, लेकिन इस फैसले के तुरंत बाद प्रदेश के छह जिलों में सोशल मीडिया आधारित पत्रकारिता पर बैन लगा दिया गया है। यह बैन उपायुक्त स्तर पर जिलों में लिखित आदेशों के बाद लगाया गया है। बैन लोगों ने सोशल मीडिया पर ही अपनी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। बता दें कि प्रदेश के 6 जिला उपायुक्तों ने अपने अधिकार क्षेत्र में हरियाणा में सोशल मीडिया समाचार प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसमें कहा गया है कि ऐसे प्लेटफार्मों से असत्यापित और भ्रामक समाचारों का प्रसार समाज में शांति भंग कर सकता है और कोरोना वायरस महामारी के दौरान आम आदमी के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। हरियाणा में विपक्ष व मानवाधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने इसे अघोषित आपातकाल और सोशल मीडिया की आवाज को चुप कराने का प्रयास बताया है। साथ ही बैन हटाने की मांग भी की है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर आधारित रिपोर्टिंग पर लगा बैन</h4>
<h6 style="text-align:justify;">रिपोर्टों के अनुसार व्हाट्सएप, ट्विटर, फेसबुक, टेलीग्राम, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, पब्लिक ऐप और लिंक्डइन पर आधारित सभी सोशल मीडिया समाचार प्लेटफॉर्म को बैन किया गया है। सोनीपत, कैथल, चरखी दादरी, करनाल, नारनौल और भिवानी के डीसी द्वारा ये बैन लगाया गया है। इसमें भी करनाल डीसी ने 15 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाया है, जबकि अन्य पांच ने अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">सबसे पहले चरखी दादरी में लगा था बैन</h4>
<h6 style="text-align:justify;">बता दें कि इसी तरह का पहला आदेश चरखी दादरी डीसी ने इस साल 12 मई को जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया था। इसके बाद अब ताजा आदेश 10 जुलाई को करनाल डीसी ने जारी किया है। जानकारी के मुताबिक सोनीपत में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने समाचार चैनल के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं ली है। उन्हें न तो हरियाणा सरकार के सूचना और जनसंपर्क निदेशालय से पंजीकरण मिला और न ही केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय से कोई अनुमति दी गई है। प्रतिबंध आईपीसी की धारा 188, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और महामारी रोग अधिनियम, 1957 के तहत लगाए गए हैं। यह भी उल्लिखित किया गया है कि इन कानूनों का उल्लंघन करने पर जेल की सजा और जुर्माना भी लग सकता है। वहीं कुछेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इन धाराओं को मनमाना और असंवैधानिक करार दिया है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">भ्रामक जानकारियां फैलने से रोकने के लिए जारी हुए आदेश</h4>
<h6 style="text-align:justify;">बैन लगाने के पीछे तर्क भी दिया गया है। इसके तहत सोशल मीडिया के समाचार चैनलों से जानबूझकर या अनजाने में फर्जी समाचार या गलत रिपोर्टिंग के कारण कोरोना वायरस महामारी की इस असामान्य परिस्थिति में समाज के एक बड़े वर्ग के बीच भ्रामक जानकारी फैलने की आशंका है। इसलिए इसे पंजीकृत करवाना आवश्यक है।</h6>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2020 21:36:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनजीटी ने दक्षिण दिल्ली में पेड़ काटने पर 19 जुलाई तक रोक लगाई</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण दिल्ली में सात कालोनियों को पुर्नविकसित के लिए  पेड़ों को काटने पर रोक नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिण दिल्ली में सात कालोनियों को पुर्नविकसित करने के लिए 17 हजार पेड़ों को काटने पर 19 जुलाई तक रोक लगा दी है । (NGT, Banned, Tree, Cutting, SouthDelhi) एनजीटी में सोमवार को इस मामले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ngt-bans-tree-cutting-in-south-delhi-till-july-19/article-4624"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/ngt-banned-tree-cutting.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">दक्षिण दिल्ली में सात कालोनियों को पुर्नविकसित के लिए  पेड़ों को काटने पर रोक</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिण दिल्ली में सात कालोनियों को पुर्नविकसित करने के लिए 17 हजार पेड़ों को काटने पर 19 जुलाई तक रोक लगा दी है । <strong>(NGT, Banned, Tree, Cutting, SouthDelhi)</strong> एनजीटी में सोमवार को इस मामले पर सुनवाई हुई । प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधीश जावेद रहीम ने कालोनियों को विकसित करने वाले सार्वजिनक उपक्रम राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम(एनबीसीसी) और केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग(सीपीडब्ल्यूडी)को निर्देश दिया कि इस मामले की 19 जुलाई को सुनवाई तक पेड़ों की कटाई नहीं करे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पेड़ों की कटाई को लेकर कई संगठन ने किया विरोध</h3>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी 25 जून को एक डॉक्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए चार जुलाई तक पेड़ों की कटाई को रोकने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चार जुलाई को होनी है। दक्षिण दिल्ली में सात कालोनियों को विकसित किया जाना है जिसके लिए पेड़ों की कटाई की जानी थी। पेड़ों की कटाई को लेकर कई संगठन विरोध कर रहे हैं। जिन कालोनियों का पुर्नविकास किया जाना है उनमें सरोजिनी नगर,नेताजी नगर,नारौजी नगर,कस्तूरबा नगर,त्यागराज नगर,श्रीनिवास पुरी और मोहम्मदपुर शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 16:38:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाक सिनेमाघरों में बॉलीवुड फिल्मों पर बैन</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एंजेसी)। ईद पर रिलीज होने जा रही सलमान खान की फिल्म रेस 3 का इंतजार कर रहे उनके पाकिस्तानी फैंस को उनकी ही सरकार से करारा झटका लगा है। पाकिस्तान के सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईद के मौके पर भारतीय फिल्म के रिलीज होने पर पाबंदी लगाने की घोषणा की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/banned-on-bollywood-movies-in-cinema-theaters/article-3791"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/bang.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एंजेसी)। </strong>ईद पर रिलीज होने जा रही सलमान खान की फिल्म रेस 3 का इंतजार कर रहे उनके पाकिस्तानी फैंस को उनकी ही सरकार से करारा झटका लगा है। पाकिस्तान के सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईद के मौके पर भारतीय फिल्म के रिलीज होने पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है। घोषणा के मुताबिक, ईद से दो दिन पहले ये रोक प्रभावी होगी और बकरीद तक ये रोक जारी रहेगी। पाक सरकार ने इस फैसले को लेकर तर्क ये दिया गया है कि ईद का मौका पाकिस्तानी फिल्मों की दुनिया के कारोबार के लिए बड़ा अवसर होता है। अगर ईद के मौके पर भारत की, खास तौर पर अगर बॉलीवुड की फिल्म वहां रिलीज की जाएगी, तो पाकिस्तानी फिल्मों का कारोबार ठप पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सलमान खान को लेकर वहां की जनता क्रेजी है और ये तय माना जा रहा था कि अगर रेस 3 पाक सिनेमाघरों में रिलीज होती है, तो वहां की फिल्मों के सिनेमाघर सूने हो जाएंगे। पाक सेंसर बोर्ड को भी सूचना प्रसारण मंत्रालय ने पत्र लिखकर आगाह किया है कि इस दौरान किसी भी भारतीय फिल्म को पाक सिनेमाघरों में रिलीज के लिए सार्टिफिकेट जारी न किया जाए। सूचना के मुताबिक, ईद के मौके पर रिलीज होने वाली पाकिस्तानी फिल्मों में माहिरा खान (रईस में शाहरुख खान की हीरोइन) की नई फिल्म ‘वजूद’ के अलावा दो और फिल्में ‘सात दिन मोहब्बत इन’ और ‘आजादी’ रिलीज होने जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारों के मुताबिक, रेस 3 को पाकिस्तान में रिलीज करने के लिए अधिकार लगभग 10 करोड़ में बिके हैं। इस फिल्म पर दांव लगाने वाले पाक के वितरकों को इस सरकारी फैसले से बड़ा घाटा होगा। दूसरी तरफ रेस 3 के रिलीज न होने का सीधा फायदा माहिरा खान की फिल्म को मिलने की उम्मीद है। जब से पाकिस्तान में भारत की फिल्मों को अधिकारिक तौर पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की अनुमति मिली है, तभी से ये मुद्दा लगातार वहां बना हुआ है। पाक के फिल्मी कारोबार से जुड़े लोग इस बात की पैरवी करते हैं कि भारत की फिल्मों को रिलीज होने देना चाहिए, क्योंकि इससे कमाई पाक के सिनेमाघरों की होती है और टैक्स सरकार को मिलता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/rangmanch/banned-on-bollywood-movies-in-cinema-theaters/article-3791</link>
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                <pubDate>Fri, 25 May 2018 21:25:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खाद्य पदार्थों में तरल नाइट्रोजन पर बैन</title>
                                    <description><![CDATA[बैन। प्रदेश में पेय एवं खाद्य सामग्री में तरल नाइट्रोजन की फ्लशिंग एवं मिश्रण पर प्रतिबंध नपेंगी उल्लंघन करने वाली कंपनियां, होगी कानूनी कार्रवाई चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य के हित को ध्यान में रखते हुए किसी भी पेय पदार्थ एवं खाद्य सामग्री में तरल नाइट्रोजन की फ्लशिंग एवं मिश्रण पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/food-grade-liquid-nitrogen-banned/article-2668"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/liquid-nitrogen.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">बैन। प्रदेश में पेय एवं खाद्य सामग्री में तरल नाइट्रोजन की फ्लशिंग एवं मिश्रण पर प्रतिबंध</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नपेंगी उल्लंघन करने वाली कंपनियां, होगी कानूनी कार्रवाई</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रदेश सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य के हित को ध्यान में रखते हुए किसी भी पेय पदार्थ एवं खाद्य सामग्री में तरल नाइट्रोजन की फ्लशिंग एवं मिश्रण पर प्रतिबंध लगाया है। ऐसा करने पर खाद्य व पेय पदार्थ निमार्ता के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी। खाद्य एवं औषध प्रशासन विभाग के आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) डॉ. साकेत कुमार ने बताया कि इस आशय का आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम,2006 (2006 का केन्द्रीय अधिनियम 34) की धारा 34 के तहत जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के अनुसार तरल नाइट्रोजन की फ्लशिंग एवं मिश्रण से तैयार पेय पदार्थ या खाद्य सामग्री का सेवन हमारे लिए बहुत हानिकारक है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में गठित होंगी टीमें</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रदेशभर के पेय और खाद्य पदार्थ निर्माताओं व विक्रेताओं को निर्देश दिए है कि वे ऐसे पदार्थों में तरल नाइट्रोजन का प्रयोग न करें। उन्होंने बताया कि इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नेतृत्व में टीमों का गठन करके ऐसे पदार्थो की जांच भी कारवाई जाएगी। किसी भी पेय और खाद्य पदार्थ में तरल नाइट्रोजन रसायन पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ये हैं तरल नाइट्रोजन के नुक्सान</h2>
<p style="text-align:justify;">तरल नाइट्रोजन का तापमान अत्यंत कम होने के कारण इसके सम्पर्क में आने से हमारे शरीर के ऊतकों (टिशु) के क्षतिग्रस्त होने के अतिरिक्त शीतदंश (फ्रोस्टबाइट) और क्रायोजेनिक ज्वलनशीलता हो सकती है। तरल नाइट्रोजन से बने खाद्य या पेय पदार्थों के सेवन से शरीर में अत्यधिक आंतरिक क्षति होने और मुंह एवं आंत्रिक टैक्ट में ऊतक के नष्ट होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, तरल नाइट्रोजन के वाष्पीकरण के दौरान बड़ी मात्रा में गैस निकलती है इसलिए यदि भारी मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो पेट फटने की संभावना भी रहती है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2017 07:52:53 +0530</pubDate>
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                <title>गेंदबाज मलिंगा पर प्रतिबंध और फीस का 50 फीसदी जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो (एजेंसी)। श्रीलंका के तेज गेंदबाज लसित मलिंगा पर उनके अनुबंध का निरंतर उल्लंघन करने और मीडिया में बिना अनुमति के लगातार बयान देने के आरोप में एक वर्ष का निलंबित प्रतिबंध और मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाया गया है। श्रीलंकाई गेंदबाज ने खेल मंत्री दयासिरी जयासेकरा के खिलाफ भी मीडिया में कई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/banned-and-fined-50-percent-of-fee-on-lasith-malinga/article-1717"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/malinga.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलंबो (एजेंसी)।</strong> श्रीलंका के तेज गेंदबाज लसित मलिंगा पर उनके अनुबंध का निरंतर उल्लंघन करने और मीडिया में बिना अनुमति के लगातार बयान देने के आरोप में एक वर्ष का निलंबित प्रतिबंध और मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाया गया है। श्रीलंकाई गेंदबाज ने खेल मंत्री दयासिरी जयासेकरा के खिलाफ भी मीडिया में कई आपत्तिजनक बयान दिए थे जिसमें उन्होंने दयासिरी को ‘बंदर’ तक कह दिया था। समझा जाता है कि उनके इन बयानों के बाद मलिंगा को इस कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सज़ा को स्वीकार किया</h2>
<p style="text-align:justify;">श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (एसएलसी) ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि मलिंगा को उनके मीडिया में बिना अनुमति के दिए गए बयानों के लिए अनुशासनात्मक समिति ने दोषी पाया है और उन पर एक वर्ष का निलंबित प्रतिबंध लगाया गया है। 33 वर्षीय गेंदबाज को अपनी अगली एकदिवसीय सीरीज में मैच फीस के 50 फीसदी का जुर्माना भी देना होगा। हालांकि श्रीलंकाई क्रिकेटर पर लगे इस निलंबित प्रतिबंध के कारण उनके जिम्बाब्वे दौरे में उपलब्धता पर असर नहीं होगा जहां उन्हें पहले दो मैचों के लिए 13 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। एसएलसी ने जारी बयान में बताया कि मलिंगा मामले की जांच के लिए अनुशासनात्मक समिति के समक्ष मंगलवार को पेश हुए थे जहां उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को स्वीकार करते हुए सज़ा को स्वीकार कर लिया तथा आधिकारिक रुप से माफी भी मांग ली।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रुप से बुलाई गई कार्यकारी समिति ने मलिंगा पर एक वर्ष का निलंबित प्रतिबंध लगाया जो छह महीने में समाप्त हो जाएगा। लेकिन यही गलती दोबारा होने पर शेष छह महीने की अवधि में फिर से उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा। इसके अलावा अगली वनडे सीरीज में मैच फीस पर 50 फीसदी जुर्माना भी लगेगा। गौरतलब है कि एसएलसी के करार के तहत तेज गेंदबाज मलिंगा ने दो बार अपने करार का उल्लंघन किया है जिसके अनुसार उन्हें बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अनुमति के बिना मीडिया में कुछ भी कहने का अधिकार नहीं था। मलिंगा ने 19 जून को पहली और फिर 21 जून को दूसरी बार नियमों का उल्लंघन किया जिसके बाद बोर्ड की कार्यकारी समिति ने तुरंत अनुशासत्मक कार्रवाई का निर्णय किया था।</p>
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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2017 08:50:59 +0530</pubDate>
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                <title>कतर पर प्रतिबन्ध के मायने</title>
                                    <description><![CDATA[खाड़ी देशों में एक अजीब घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के आरोप में सऊदी अरब सहित कई मध्य एशियाई इस्लामिक देशों ने कतर पर प्रतिबन्ध लगा दिए हैं। इस प्रतिबन्ध के दूरगामी असर भारत पर भी दिखने के असार हैं। दरअसल कतर की चर्चा उसकी संपदा, उसकी दौलत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/reason-for-restrictions-on-qatar/article-1156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/qatar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खाड़ी देशों में एक अजीब घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के आरोप में सऊदी अरब सहित कई मध्य एशियाई इस्लामिक देशों ने कतर पर प्रतिबन्ध लगा दिए हैं। इस प्रतिबन्ध के दूरगामी असर भारत पर भी दिखने के असार हैं। दरअसल कतर की चर्चा उसकी संपदा, उसकी दौलत के चलते ही होती है, लेकिन खाड़ी देशों ने कूटनीतिक संबंध खत्म कर अब इसी कतर को अलग-थलग कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनयिक संबंध खत्म करने वाले देशों में सउदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, यमन और लीबिया शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन ने कतर के लिए हवाई, जमीनी और समुद्री रास्ते भी बंद कर दिए हैं। इन देशों ने एक सुर में कतर पर आरोप लगाया कि वो क्षेत्र में कथित इस्लामिक स्टेट और चरमपंथ को बढ़ावा दे रहा है, जबकि कतर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोपों का खंडन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले इन आरोपों में कितना दम है, इस मुद्दे पर तमाम अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार यह मान रहे हैं कि सऊदी के लिए आरोप लगाना तो बेहद आसान है, लेकिन क्या सउदी अरब तमाम तरह की फंडिंग करने में लिप्त नहीं है? यह एक विमर्श का मुद्दा है कि सऊदी अरब और अन्य देशों ने जिस तरह से कतर से राजनयिक संबंध तोड़े हैं, इसकी तात्कालिक वजह क्या रही है,</p>
<p style="text-align:justify;">इसे चरमपंथ से जोड़कर देखा जाए या मध्य एशिया में कोई अन्य मुद्दा कतर को अलग-थलग करने की वजह बना। यदि मध्य-एशिया के सऊदी सहित अन्य इस्लामिक देश आतंकवाद के विरुद्ध इतना कड़ा रुख अपनाते हैं कि वर्षों तक साथ रहने वाले कतर से भी आतंक के नाम पर किनारा कर लेते हैं, तो इसे अच्छा संकेत मानना चाहिए। क्योंकि जब तक खुद इस्लामिक देश आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाते, तब तक आतंक का खात्मा संभव नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">तात्कालिक वजह में कतर की ईरान के प्रति बढ़ती घनिष्टता को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। कुछ दिन पूर्व कतर के शेख ने एक विवादित सन्देश दिया था, जिसमें उन्होंने जिक्र किया कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए ईरान बेहद जरुरी है, लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब कतर से इस्लामी दुनिया के देशों ने संपर्क तोड़े हों। 2014 के मार्च महीने में भी सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर पर उनके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाते हुए अपने राजदूत वापस बुला लिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कतर और सऊदी अरब के मध्य विवाद का पहलू समय-समय पर बदलता रहता है। पहले अरब और फारस का विवाद था, बाद में शिया सुन्नी विवाद बना और अब ये कतर सउदी अरब की शक्ल में है। कतर पहले से ही ईरान का समर्थक रहा है, जबकि सऊदी और ईरान के मध्य सम्बन्ध बेहतर नहीं हैं। ईरान से सउदी अरब की असुरक्षा की भावना अब सामने आ रही है।” और अरब देशों ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब खाड़ी देशों और उनके पड़ोसी ईरान के बीच तनाव बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया अरब यात्रा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे। इस घटना को अमरीका के दोस्त कहे जाने वाले ताकतवर खाड़ी देशों के बीच एक बड़ी दरार की तरह देखा जा रहा है। इस पूरे मामले को अमेरिकी और खाड़ी देशों के मध्य सम्बन्ध संतुल्लित करने के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि कतर पहले भी इस तरह के प्रतिबंधों का सामना कर चुका है और ना तो कतर इन देशों पर निर्भर है और ना ही ये देश कतर पर निर्भर हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान के खिलाफ जिन 54 देशों को एकजुट करने की कोशिश हो रही थी, उसमें ये पहली दरार है। इस्लामी देशों के राजनयिक संपर्क तोड़ने और तमाम प्रतिबंधों के बाद क्या वाकई कतर दुनिया में अलग थलग पड़ जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर के पास क्या विकल्प हैं इस संकट का, भविष्य क्या है, इस बात की समीक्षा भी कुछ समय अंतराल के बाद ही की जायेगी। लेकिन जानकार इस बात का कयास लगा रहे हैं कि ये संकट जल्द सुलझ जाना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा न हुआ और ईरान के साथ कतर ने रणनीतिक साझेदारी कर ली, तो खाड़ी देशों के लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही अगर कतर ने चीन के साथ साझेदारी कर ली, तो फिर अमेरिका, सऊदी के साथ मिलकर भी क्या करेगा। हालांकि, कतर और सऊदी अरब के बीच इस संकट को हल करने का प्रयास लगातार जारी है। कुवैत के अमीर इन देशों के बीच मध्यस्थता का नेतृत्व कर रहे हैं। कतर पर लगने वाले प्रतिबंधों की भारत पर प्रभाव की बात करें, तो प्रवासियों के मुल्क कतर में सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों की संख्या भारत से गए लोगों की है। कतर पर पाबंदी लगने के बाद साफ है कि उनके हित भी प्रभावित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर में बसे भारतीयों में से काफी लोग ऐसे भी हैं, जो कतर में व्यापार करते हैं और वो अन्य खाड़ी मुल्कों सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिश्र में भी फैला हुआ है। ऐसे में अब उन लोगों के सामने दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। कतर के साथ भारत की ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में कई संधियां हैं। कतर को निर्यात करने वाला भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। प्रतिबंधों का असर कतर के व्यापार पर भी पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त खाड़ी का यह मुल्क भारत को बड़ी मात्रा में एलएनजी गैस सप्लाई करता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत अपनी जरूरत की 65 फीसदी गैस कतर से ही आयात करता है। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां भी कतर के साथ समय समय पर गैस का अनुबंध करती रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भारत कतर से एथलीन, प्रोपलीन, अमोनिया, यूरिया और पोलिथिन का आयाता करता है। इसलिए व्यापार का संतुलन कतर के पक्ष में भारी रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार साल 2014-15 में कतर के लिए भारत का निर्यात 1 अरब डॉलर से अधिक था। हालांकि कुछ समय पहले कतर के निर्यात में गिरावट के कारण द्विपक्षीय व्यापार में काफी कमी आई है। ऐसे में भारत को काफी सोच-समझ कर इस पूरे मामले में आगे बढ़ने की जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– पार्थ उपाध्याय</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 22:50:17 +0530</pubDate>
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