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                <title>पटियाला : ट्रैफिक नियमों की अनदेखी बन रही हादसों का कारण : एसपी</title>
                                    <description><![CDATA[रोड सेफ्टी इंजीनियर सविन्द्र बराड़ ने कहा कि हमारे देश में हर चौथे मिनट में हादसे घटते हैं और कीमती जानें मौत के मुंह में चली जाती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले 3 सालों में पटियाला जिले में 1020 मौतें केवल सड़क हादसों के कारण ही हुई हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/ignoring-traffic-rules-is-the-reason-for-accidents-sp/article-12556"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/road-safety-week-scaled.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">31वां राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह यातायात नियमों की पालना करने का संदेश देकर हुआ समाप्त | <strong><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Road Safety Week</span></span></strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला(खुशवीर सिंह तूर)।</strong> जिला सिविल व पुलिस प्रशासन की ओर से मनाया गया 31वां राष्ट्रीय <strong>(Road Safety Week)</strong> सड़क सुरक्षा हफ़्ता यातायात नियमों की पालना सख़्ती के साथ करने का संदेश देकर समाप्त हो गया। यहां सरकारी बिक्रम कॉलेज आॅफ कॉमर्स में करवाए एक समारोह दौरान मुख्य मेहमान के तौर पर पहुंचे पटियाला के एसपी स्थानीय नवनीत सिंह बैंस ने कहा कि बेशक हम यातायात नियमों से जानकार होते हैं और यह भी जानते हैं कि नियमों की अनदेखी हादसों का कारण बनती है परंतु इसके बावजूद हम यातायात नियमों का पालन नहीं करते, जिस कारण कीमती जिंदगीयां मौत के मुंह में समा जाती हैं।</p>
<h2>लोग सड़क सुरक्षा प्रति नहीं बरतें लापरवाही : अरविन्द कुमार</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस मौके उपस्थित स्कूलों के विद्यार्थियों को कहा कि वह जहां खुद यातायात नियमों का पालन यकीनी तौर पर करें बल्कि दूसरे को भी इन बारे जागरूक करें। सचिव रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी अरविन्द कुमार ने कहा कि लोगों को सड़क सुरक्षा प्रति कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ओवर स्पीड, नशे कर गाड़ी चलानी, सीट बैलट और हेलमेट से बिना ड्रायविंग खतरनाक है। रोड सेफ्टी इंजीनियर सविन्द्र बराड़ ने कहा कि हमारे देश में हर चौथे मिनट में हादसे घटते हैं और कीमती जानें मौत के मुंह में चली जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि पिछले 3 सालों में पटियाला जिले में 1020 मौतें केवल सड़क हादसों के कारण ही हुई हैं। सरकारी को -एड मल्टीपर्पज सीनियर सेकैंडरी स्कूल के विद्यार्थियों मनरूप कौर, लवप्रीत सिंह, सिमरत राज सिंह, जशनप्रीत बाजवा, हरप्रीत सिंह, गुरपिवन्दर सिंह, जशनप्रीत कौर ने डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल द्वारा लिखा और निर्देशित किया सड़क सुरक्षा संबंधी नाटक ‘मेरी आवाज सुनो’ की भावुकता भरपूर प्रस्तुति देकर ट्रैफिक नियमों का पालन करने का प्रण करवाया। जबकि ग्रीन वैली अकैडमी हाई स्कूल के विद्यार्थियों ने कविता द्वारा यातायात नियमों से अवगत करवाया।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2020 19:58:16 +0530</pubDate>
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                <title>पेट्रोल-डीजल के जीएसटी में शामिल न होने का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर आसमान पर पहुंच गई हैं। कर्नाटक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। सोमवार को पेट्रोल की कीमतों ने 84 का आंकड़ा पार किया। अब मंगलवार को डीजल भी 74 रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/reason-of-petrol-diesel-price-gst/article-3733"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/petrol-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर आसमान पर पहुंच गई हैं। कर्नाटक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। सोमवार को पेट्रोल की कीमतों ने 84 का आंकड़ा पार किया। अब मंगलवार को डीजल भी 74 रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इन्हें जीएसटी के तहत लाने की बात भी कही जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि सरकार के लिए ऐसा करना आसान नहीं है। अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाता है, तो इससे इनकी कीमतों में कुछ राज्यों में काफी कमी आ जाएगी. लेकिन दूसरी तरफ, कुछ राज्यों में जहां पेट्रोल अभी कम कीमत में बिकता है, वहां इसके लिए लोगों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। दरअसल मौजूदा व्यवस्था में महाराष्ट्र जैसे कई राज्य जहां 40 फीसदी तक वैट वसूलते हैं, तो वहीं अंडमान और निकोबार जैसे राज्य 6 फीसदी तक टैक्स पेट्रोल और डीजल पर लगाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इससे देश भर में अलग-अलग सेल्स टैक्स की बजाय एक ही टैक्स हो जाएगा। इससे भले ही महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में थोड़ी राहत मिलेगी, लेक‍िन कम वैट वसूलने वाले राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बहुत बड़े स्तर पर बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसे में कोई राजनीतिक पार्टी नहीं चाहेगी कि वह ऐसा कोई कदम उठाए। अगर पेट्रोल और डीजल जीएसटी के तहत शामिल नहीं होता है, तो सरकार के पास एक्साइज ड्यूटी घटाने और राज्यों को वैट कम करने के लिए कहने का विकल्प होगा। हालांकि तमि‍लनाडु ने पहले ही ऐसा कोई कदम उठाने से इनकार कर दिया है। एक्साइज ड्यूटी घटाना भी सरकार के खजाने पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में देखना होगा कि सरकार पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 May 2018 14:04:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, गोरखपुर में बच्चों की मौत की असल वजह बताए UP सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद। गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बेहद सख्त है। गोरखपुर के बीआरडी मेड‍िकल कॉलेज में हुई मौतों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूपी सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार से बच्चों की हुई मौतों के पीछे की असल वजह बताने को कहा। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hc-a-to-up-government-the-real-cause-of-children-death/article-3203"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/hc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इलाहाबाद।</strong> गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बेहद सख्त है। गोरखपुर के बीआरडी मेड‍िकल कॉलेज में हुई मौतों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूपी सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार से बच्चों की हुई मौतों के पीछे की असल वजह बताने को कहा। यूपी सरकार ने इसके लिए वक्त मांगा। सरकार को 29 अगस्त को जवाब देना होगा। HC ने कहा, ”ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें सही तथ्य सामने आने चाहिए, जिससे इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।”</p>
<p style="text-align:justify;">लोकेश खुराना व कई अन्य की जनहित याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत के मामले में जनहित याचिका पर मुख्य न्यायधीश डीबी भोसले के साथ न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सुनवाई की।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मौत को लेकर हाईकोर्ट में कई PIL दायर</h2>
<p style="text-align:justify;">बच्चों की मौत को लेकर हाईकोर्ट में कई PIL दायर की गई हैं। वकीलों का कहना था कि इतनी बड़ी घटना के बाद अभी तक मृत बच्चों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया और न ही कोई प्राथमिकी ही दर्ज कराई गई। आरोप लगाया गया कि सरकार गलत बयानी कर घटना की लीपापोती कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले व न्यायाधीश यशवंत वर्मा का कहना था कि किसी भी प्रकार का न्यायालय से आदेश पारित करने से पहले सरकार का मौत की कारणों को लेकर जवाब आना जरूरी है। सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अदालत से जवाब के लिए समय की मांग की। इस पर अदालत ने सरकार को समय देते हुए 29 अगस्त को पुन: इस मामले पर सुनवाई का आदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 04:54:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कार्तिक ने हार के लिए कैच छूटने को जिम्मेदार ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[किंग्सटन (एजेंसी)। भारतीय बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ट्वेंटी-20 मुकाबले में हार के लिए खराब क्षेत्ररक्षण और कैच टपकाने को जिम्मेदार ठहराया है। मैच में भारतीय पारी के टॉप स्कोरर रहे कार्तिक (48) ने कहा, ‘हमने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी के दौरान कई कैच टपकाए जो अंत में टीम की हार के लिए जिम्मेदार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/catches-drop-is-the-reason-of-defeated-the-match-karthik/article-2196"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/kartik.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>किंग्सटन (एजेंसी)।</strong> भारतीय बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ट्वेंटी-20 मुकाबले में हार के लिए खराब क्षेत्ररक्षण और कैच टपकाने को जिम्मेदार ठहराया है। मैच में भारतीय पारी के टॉप स्कोरर रहे कार्तिक (48) ने कहा, ‘हमने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी के दौरान कई कैच टपकाए जो अंत में टीम की हार के लिए जिम्मेदार रहा। पारी की शुरुआत में एविन लुइस को कई मौकों पर जीवनदान देना हम पर भारी पड़ा जिसका फायदा उठाते हुए उन्होंने शानदार शतक जड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘हमने मजबूत स्कोर खड़ा किया था लेकिन लुइस शानदार लय में थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जीवनदान का बखूबी फायदा उठाया</h2>
<p style="text-align:justify;">क्रिकेट के इस छोटे प्रारुप में आपके पास गलतियां करने की गुंजाइश बेहद कम होती है और एक बार मौका हाथ से निकल जाए तो वापसी करना कठिन हो जाता है। लुइस ने पारी के दौरान मिले जीवनदान का बखूबी फायदा उठाया और करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेल दी। कार्तिक ने कहा, ‘जब हमने पहले बल्लेबाजी करते हुए 190 रन बनाए थे तो हम जीत के प्रति आशन्वित थे। हम कुछ और रन और बना सकते थे लेकिन 190 के ऊपर के लक्ष्य को कमजोर नहीं कहा जा सकता है। लुइस शानदार लय में थे और वाकई यह उन्हीं का दिन था। वह गेंदों पर आसानी से प्रहार करते हुए बाउंड्री हासिल कर रहे थे। वह अच्छी गेंदों को भी सीमा रेखा के पार भेज रहे थे और ऐसे में उन्हें रोकना मुश्किल था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 08:54:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कतर पर प्रतिबन्ध के मायने</title>
                                    <description><![CDATA[खाड़ी देशों में एक अजीब घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के आरोप में सऊदी अरब सहित कई मध्य एशियाई इस्लामिक देशों ने कतर पर प्रतिबन्ध लगा दिए हैं। इस प्रतिबन्ध के दूरगामी असर भारत पर भी दिखने के असार हैं। दरअसल कतर की चर्चा उसकी संपदा, उसकी दौलत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/reason-for-restrictions-on-qatar/article-1156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/qatar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खाड़ी देशों में एक अजीब घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के आरोप में सऊदी अरब सहित कई मध्य एशियाई इस्लामिक देशों ने कतर पर प्रतिबन्ध लगा दिए हैं। इस प्रतिबन्ध के दूरगामी असर भारत पर भी दिखने के असार हैं। दरअसल कतर की चर्चा उसकी संपदा, उसकी दौलत के चलते ही होती है, लेकिन खाड़ी देशों ने कूटनीतिक संबंध खत्म कर अब इसी कतर को अलग-थलग कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनयिक संबंध खत्म करने वाले देशों में सउदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, यमन और लीबिया शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन ने कतर के लिए हवाई, जमीनी और समुद्री रास्ते भी बंद कर दिए हैं। इन देशों ने एक सुर में कतर पर आरोप लगाया कि वो क्षेत्र में कथित इस्लामिक स्टेट और चरमपंथ को बढ़ावा दे रहा है, जबकि कतर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोपों का खंडन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले इन आरोपों में कितना दम है, इस मुद्दे पर तमाम अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार यह मान रहे हैं कि सऊदी के लिए आरोप लगाना तो बेहद आसान है, लेकिन क्या सउदी अरब तमाम तरह की फंडिंग करने में लिप्त नहीं है? यह एक विमर्श का मुद्दा है कि सऊदी अरब और अन्य देशों ने जिस तरह से कतर से राजनयिक संबंध तोड़े हैं, इसकी तात्कालिक वजह क्या रही है,</p>
<p style="text-align:justify;">इसे चरमपंथ से जोड़कर देखा जाए या मध्य एशिया में कोई अन्य मुद्दा कतर को अलग-थलग करने की वजह बना। यदि मध्य-एशिया के सऊदी सहित अन्य इस्लामिक देश आतंकवाद के विरुद्ध इतना कड़ा रुख अपनाते हैं कि वर्षों तक साथ रहने वाले कतर से भी आतंक के नाम पर किनारा कर लेते हैं, तो इसे अच्छा संकेत मानना चाहिए। क्योंकि जब तक खुद इस्लामिक देश आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाते, तब तक आतंक का खात्मा संभव नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">तात्कालिक वजह में कतर की ईरान के प्रति बढ़ती घनिष्टता को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। कुछ दिन पूर्व कतर के शेख ने एक विवादित सन्देश दिया था, जिसमें उन्होंने जिक्र किया कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए ईरान बेहद जरुरी है, लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब कतर से इस्लामी दुनिया के देशों ने संपर्क तोड़े हों। 2014 के मार्च महीने में भी सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर पर उनके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाते हुए अपने राजदूत वापस बुला लिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कतर और सऊदी अरब के मध्य विवाद का पहलू समय-समय पर बदलता रहता है। पहले अरब और फारस का विवाद था, बाद में शिया सुन्नी विवाद बना और अब ये कतर सउदी अरब की शक्ल में है। कतर पहले से ही ईरान का समर्थक रहा है, जबकि सऊदी और ईरान के मध्य सम्बन्ध बेहतर नहीं हैं। ईरान से सउदी अरब की असुरक्षा की भावना अब सामने आ रही है।” और अरब देशों ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब खाड़ी देशों और उनके पड़ोसी ईरान के बीच तनाव बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया अरब यात्रा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे। इस घटना को अमरीका के दोस्त कहे जाने वाले ताकतवर खाड़ी देशों के बीच एक बड़ी दरार की तरह देखा जा रहा है। इस पूरे मामले को अमेरिकी और खाड़ी देशों के मध्य सम्बन्ध संतुल्लित करने के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि कतर पहले भी इस तरह के प्रतिबंधों का सामना कर चुका है और ना तो कतर इन देशों पर निर्भर है और ना ही ये देश कतर पर निर्भर हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान के खिलाफ जिन 54 देशों को एकजुट करने की कोशिश हो रही थी, उसमें ये पहली दरार है। इस्लामी देशों के राजनयिक संपर्क तोड़ने और तमाम प्रतिबंधों के बाद क्या वाकई कतर दुनिया में अलग थलग पड़ जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर के पास क्या विकल्प हैं इस संकट का, भविष्य क्या है, इस बात की समीक्षा भी कुछ समय अंतराल के बाद ही की जायेगी। लेकिन जानकार इस बात का कयास लगा रहे हैं कि ये संकट जल्द सुलझ जाना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा न हुआ और ईरान के साथ कतर ने रणनीतिक साझेदारी कर ली, तो खाड़ी देशों के लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही अगर कतर ने चीन के साथ साझेदारी कर ली, तो फिर अमेरिका, सऊदी के साथ मिलकर भी क्या करेगा। हालांकि, कतर और सऊदी अरब के बीच इस संकट को हल करने का प्रयास लगातार जारी है। कुवैत के अमीर इन देशों के बीच मध्यस्थता का नेतृत्व कर रहे हैं। कतर पर लगने वाले प्रतिबंधों की भारत पर प्रभाव की बात करें, तो प्रवासियों के मुल्क कतर में सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों की संख्या भारत से गए लोगों की है। कतर पर पाबंदी लगने के बाद साफ है कि उनके हित भी प्रभावित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर में बसे भारतीयों में से काफी लोग ऐसे भी हैं, जो कतर में व्यापार करते हैं और वो अन्य खाड़ी मुल्कों सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिश्र में भी फैला हुआ है। ऐसे में अब उन लोगों के सामने दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। कतर के साथ भारत की ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में कई संधियां हैं। कतर को निर्यात करने वाला भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। प्रतिबंधों का असर कतर के व्यापार पर भी पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त खाड़ी का यह मुल्क भारत को बड़ी मात्रा में एलएनजी गैस सप्लाई करता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत अपनी जरूरत की 65 फीसदी गैस कतर से ही आयात करता है। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां भी कतर के साथ समय समय पर गैस का अनुबंध करती रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भारत कतर से एथलीन, प्रोपलीन, अमोनिया, यूरिया और पोलिथिन का आयाता करता है। इसलिए व्यापार का संतुलन कतर के पक्ष में भारी रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार साल 2014-15 में कतर के लिए भारत का निर्यात 1 अरब डॉलर से अधिक था। हालांकि कुछ समय पहले कतर के निर्यात में गिरावट के कारण द्विपक्षीय व्यापार में काफी कमी आई है। ऐसे में भारत को काफी सोच-समझ कर इस पूरे मामले में आगे बढ़ने की जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– पार्थ उपाध्याय</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 22:50:17 +0530</pubDate>
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