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                <title>Odisha Train Accident - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Odisha Train Accident RSS Feed</description>
                
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                <title>Odisha Train Accident: बालासोर में एक और बड़ा रेल हादसा टला</title>
                                    <description><![CDATA[बालासोर (एजेंसी)। Odisha Train Accident: ओडिशा में एक मेमू ट्रेन के चालक की सतर्कता की वजह से यात्री बाल-बाल बच गये और एक बड़ी दुर्घटना टल गयी। रिपोर्टों में कहा गया है कि भद्रक-खड़गपुर ट्रेन के चालक प्रशांत पांडा ने कुछ असामान्यताएं देखीं जब ट्रेन नीलगिरि रोड स्टेशन से बाहर निकल रही थी। अगर चालक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/another-major-train-accident-averted-in-balasore/article-50185"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/balasore-train-accident.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बालासोर (एजेंसी)।</strong> Odisha Train Accident: ओडिशा में एक मेमू ट्रेन के चालक की सतर्कता की वजह से यात्री बाल-बाल बच गये और एक बड़ी दुर्घटना टल गयी। रिपोर्टों में कहा गया है कि भद्रक-खड़गपुर ट्रेन के चालक प्रशांत पांडा ने कुछ असामान्यताएं देखीं जब ट्रेन नीलगिरि रोड स्टेशन से बाहर निकल रही थी। अगर चालक ने ट्रेन को तुरंत नहीं रोका होता तो यह मुख्य लाइन की बजाय लूप लाइन में चली जाती और बहनागा बाजार ट्रेन त्रासदी जैसा हादसा हो सकता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार यह घटना स्टेशन के बाहरी इलाके में उस समय हुई जब ट्रेन धीमी गति से निकल रही थी। जैसे ही लोको पायलट ने देखा कि क्रॉसओवर रिवर्स लाइन में है, उसने तुरंत ब्रेक लगा दिया। कुछ समय पहले लाइन पर मरम्मत का काम किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">लोको पायलट ने कहा ”ट्रेन की गति लगभग 7 से 10 किमी प्रति घंटा थी। मेन लाइन में हरा सिग्नल था. खराबी का पता चलने के बाद मैंने तुरंत ट्रेन रोक दी”। उन्होंने कहा, ”पटरियों के रखरखाव के दौरान कुछ समस्याएं हो सकती थीं। स्विच में खराबी हो सकती थी। अगर ट्रेन गलत लाइन में चली गई तो प्वाइंट फट सकता था।” रेलवे अधिकारियों ने खामियों की जांच शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि गत 02 जून को बहनागा बाजार ट्रेन हादसे में 294 यात्रियों की मौत हो गयी एवं 1000 से अधिक घायल हो गए थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 13:56:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंखों देखा हादसा व पंजाबियों की सेवा भावना</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ दिन पहले ओडिशा में एक ट्रेन हादसे (Odisha Train Accident) में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हो गए थे। कुछ परेशान करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं, जिनमें दुर्घटना के शिकार लोगों के शवों को जानवरों की तरह ट्रकों में फेंका जा रहा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/service-spirit-of-punjabis-in-khanna-train-accident/article-49048"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/udisha-train-accident.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुछ दिन पहले ओडिशा में एक ट्रेन हादसे (Odisha Train Accident) में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हो गए थे। कुछ परेशान करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं, जिनमें दुर्घटना के शिकार लोगों के शवों को जानवरों की तरह ट्रकों में फेंका जा रहा है। जब भी मैं ट्रेन हादसों के बारे में पढ़ता हूं तो मुझे 26 नवंबर 1998 को खन्ना के पास हुए पंजाब के सबसे भीषण ट्रेन हादसे के दृश्य याद आ जाते हैं। मैंने अपने जीवन में कभी इतने शव और घायल नहीं देखे और न ही इतना भयानक हादसा देखा। उस समय मैं पायल सब-डिवीजन में बतौर डीएसपी के पद पर कार्यरत था। Odisha Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">हादसा सुबह तीन बजे के करीब हुआ और आधे घंटे में ही पुलिस, जीआरपी, रेलवे के अधिकारी और सिविल प्रशासन मौके पर पहुंच गया। आज 25 साल बाद भी वह भयानक मंजर मेरी आंखों के सामने है। ट्रेन के डिब्बे इस तरह चकनाचूर हो गए जैसे किसी बच्चे ने गुस्से में माचिस की डिब्बी को मरोड़ दिया हो। एक ट्रेन का इंजन तोप के गोले की तरह दूसरी ट्रेन के डिब्बों के आर-पार हो गया। सोए रहे लोगों को शायद पता नहीं होगा कि मौत ने उन्हें अपने शिकंजे में जकड़ रखा है। हादसा मानवीय भूल के कारण हुआ, जब सियालदह एक्सप्रेस फ्रंटियर मेल की अग्रिम पंक्ति के तीन डिब्बों से टकरा गई। सियालदह एक्सप्रेस जम्मू से दिल्ली जा रही थी और फ्रंटियर मेल दिल्ली से लुधियाना जा रही थी।</p>
<h3>हर तरफ घायलों की चीख-पुकार मची हुई थी | (Odisha Train Accident)</h3>
<p style="text-align:justify;">खन्ना से पांच किलोमीटर दूर कौड़ी गांव के पास फ्रंटियर मेल के तीन डिब्बे गल्त कपलिंग के कारण ट्रेन से अलग होकर सियालदह एक्सप्रेस ट्रैक पर जा गिरे। इससे पहले कि यात्री बोगियों से उतर पाते, 110 किमी. की रफ्तार से आ रही सियालदह एक्सप्रेस उनसे टकराकर पटरी से उतर गई और बुरी तरह पलट गई। सियालदह के चार और फ्रंटियर के तीन डिब्बे पूरी तरह नष्ट हो गए। दोनों ट्रेनों में करीब 2500 यात्री सवार थे, जिनमें से 212 की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए। Khanna Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">हादसा इतना भीषण था कि सियालदह का इंजन टीन के डिब्बे की तरह कुचल दिया गया और चालक के शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए। इस दर्दनाक हादसे का सबसे उल्लेखनीय पहलू इन विकट परिस्थितियों में पंजाबियों द्वारा दिखाई गई अनुकरणीय और महान सेवा भावना थी। चूंकि दुर्घटना स्थल खेतों में होने के चलते बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी। हर तरफ घायलों की चीख-पुकार मची हुई थी और कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। लेकिन खबर फैलते ही आसपास के गांवों और खन्ना के सैकड़ों लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। Khanna</p>
<h3>सरकारी अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में लोग रक्तदान करने पहुंचे</h3>
<p style="text-align:justify;">रोशनी की व्यवस्था के लिए किसानों ने दुर्घटनास्थल के दोनों तरफ दर्जनों ट्रैक्टर खड़े कर दिए। न किसी ने डीजल की परवाह की और न ही प्रशासन से इसकी मांग की। दानदाताओं ने सुबह होने से पहले घटनास्थल पर सैकड़ों स्ट्रेचर, बिस्तर, कंबल और चिकित्सा सामग्री पहुंचा दी। किसी भी वस्तु के लिए यदि अधिकारी आवाज उठाते तो सौ लोग हाजिर होते। सरकारी अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में लोग रक्तदान करने पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">रात से ही चाय-प्रसाद का लंगर शुरू हो गया था और पीड़ितों के वारिसों के ठहरने की व्यवस्था के लिए लोगों ने अपने घरों के दरवाजे खोल दिए थे। दिल्ली से रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी जब मौके पर पहुंचे तो लोगों द्वारा की गई व्यवस्था को देख वे भावुक हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि कई राज्य तो ऐसे हैं यदि वहां कोई दुर्घटना हो जाए तो लोग मदद करने के बजाय मृतकों और घायलों की संपत्ति लूटने लगते हैं। Odisha Train Accident</p>
<h3>सबसे बड़ी दिक्कत शवों को उनके पते पर पहुंचाने में आई</h3>
<p style="text-align:justify;">कानूनी कार्रवाई करने के बाद सबसे बड़ी दिक्कत शवों को उनके पते पर पहुंचाने में आई। मृतकों के सभी वारिस इतने समृद्ध नहीं थे कि वे दिल्ली से दक्षिण तक वाहन किराए पर कर सकें। फिर पंजाबियों के भाई कन्हैया जी का सेवा भाव सामने आया। खन्ना के दानदाताओं ने भारत के कोने-कोने में शवों को पहुंचाने के लिए अपने खर्च पर टैक्सियां उपलब्ध करवाई और गरीब वारिसों को यात्रा खर्च के लिए पैसे भी दिए। Odisha Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान एक बेहद घटिया हरकत भी हुई। जब सभी लोग नि:स्वार्थ भाव से बचाव कार्य में जुटे हुए थे, तब रेडक्रॉस के कर्मचारियों ने एक सरकारी कर्मचारी को मृतकों के जेवरात और पैसे चुराते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। इस व्यवहार से लोग तैश में आ गए और मारपीट कर उसे भगा दिया। अब भी जब किसी ट्रेन हादसे की खबर आती है तो मन उदास हो जाता है। मानवीय भूल और लापरवाही के कारण पूरे परिवार नष्ट हो जाते हैं, लेकिन बार-बार हादसों के बावजूद कालांतर की गलतियों को सुधारा नहीं जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसों के बाद की गई जांच में भ्रष्ट, अक्षम अधिकारियों की खामियां सामने आती हैं। लेकिन क्या फायदा मुर्दा वापस नहीं आएगा। इसलिए रेलवे व्यवस्था को हर स्तर पर सुधारा जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों। किसी मंत्री या उच्च अधिकारी के इस्तीफे या निलंबन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>बलराज सिंह सिद्धू, कमांडेंट एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 15:26:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>2000 Rupee Note: 2 हजार के नोट पर नया विवाद, जानिये क्या है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा ट्रेन दुर्घटना सहायता के लिए 2,000 रुपये के नोटों में दिए जाने पर बीजेपी, टीएमसी में विवाद कोलकाता। 2000 Rupee Note भारतीय जनता पार्टी पार्टी द्वारा दावा किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस वाकयुद्ध में उलझ गई। पश्चिम बंगाल सरकार के एक मंत्री 2,000 रुपये के नोटों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bjp-tmc-spar-over-odisha-train-accident-aid-being-paid-in-rs-two-thousand-notes/article-48588"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/2000-rupee-note-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ओडिशा ट्रेन दुर्घटना सहायता के लिए 2,000 रुपये के नोटों में दिए जाने पर बीजेपी, टीएमसी में विवाद</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता। </strong>2000 Rupee Note भारतीय जनता पार्टी पार्टी द्वारा दावा किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस वाकयुद्ध में उलझ गई। पश्चिम बंगाल सरकार के एक मंत्री 2,000 रुपये के नोटों में ओडिशा ट्रेन दुर्घटना पीड़ितों के परिवारों को मौद्रिक मुआवजा प्रदान कर रहे थे। पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें कथित तौर पर बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के एक परिवार को 2,000 रुपये के नोटों से भरे कैश बंडल पकड़े हुए दिखाया गया है। मजूमदार के अनुसार, ओडिशा के बालासोर में ट्रेन दुर्घटना में परिवार के एक सदस्य को खोने के बाद उन्हें मुआवजे के रूप में पैसा मिला था। 2000 Rupee Note</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/sbi-released-shocking-figures/">2000 Rupees: एसबीआई ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े, यहां सबसे ज्यादा 2000 के नोट का इस्तेमाल हो रहा है</a></p>
<p style="text-align:justify;">‘ममता बनर्जी के निर्देश पर राज्य के एक मंत्री तृणमूल पार्टी की ओर से पीड़ितों के परिवारों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दे रहे हैं। मैं सराहना करता हूं। लेकिन इस सिलसिले में मैं यह सवाल भी रख रहा हूं कि 2000 रुपये के नोटों के बंडल का स्रोत क्या है? उन्होंने ट्वीट में कहा। मजूमदार ने यह भी पूछा कि क्या बैंकों में मुद्रा नोट बदलने की प्रक्रिया को देखते हुए पीड़ितों के परिवारों को 2,000 रुपये के नोट देना एक अच्छा निर्णय था। 2000 Rupee Note</p>
<p style="text-align:justify;">‘वर्तमान में, बाजार में 2,000 रुपये के नोटों की आपूर्ति कम है और उन्हें बैंकों के माध्यम से बदलने की प्रक्रिया चल रही है। तो क्या असहाय परिवारों को 2000 रुपये के नोट देकर उनकी मुश्किलें नहीं बढ़ा दी गई हैं? दूसरा, क्या यह टीएमसी के लिए अपने काले धन को सफेद करने का तरीका नहीं है? उन्होंने कहा। जवाब में, तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा कि किसी को 2,000 रुपये के नोट देना अवैध नहीं था क्योंकि यह अभी भी कानूनी मुद्रा था और मजूमदार के ट्वीट को “आधारहीन” करार दिया। ‘क्या 2000 रुपये का नोट अमान्य है? आज अगर कोई किसी को 2000 का नोट देता है तो यह अवैध या काला धन नहीं है। 2000 Rupee Note</p>
<h3 style="text-align:justify;">बंगाल के मुख्यमंत्री ने घायल यात्रियों से की मुलाकात</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोरोमंडल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त यात्रियों से मुलाकात की, जो वर्तमान में कटक के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के यात्रियों के मरने वाले 103 शवों की अब तक पहचान की जा चुकी है, जबकि 30 अभी भी लापता हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="bn" xml:lang="bn">মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের নির্দেশে তৃণমূল দলের পক্ষ থেকে নিহতদের পরিবারকে 2 লক্ষ টাকার আর্থিক সাহায্য করছেন রাজ্যের একজন মন্ত্রী। সাধুবাদ জানাই। কিন্তু এপ্রসঙ্গে এই প্রশ্নটাও রাখছি, একসাথে 2000 টাকার নোটে 2 লক্ষ টাকার বান্ডিলের উৎস কি? <a href="https://t.co/TlisMituGG">pic.twitter.com/TlisMituGG</a></p>
<p>— Dr. Sukanta Majumdar (@DrSukantaBJP) <a href="https://twitter.com/DrSukantaBJP/status/1666028700775895040?ref_src=twsrc%5Etfw">June 6, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/bjp-tmc-spar-over-odisha-train-accident-aid-being-paid-in-rs-two-thousand-notes/article-48588</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 10:50:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Odisha Train Accident: कैसे हुआ कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसा ? लोको पायलट ने किया बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[बालासोर। Odisha Train Accident Update News: ओडिशा के बालासोर जिले में एक बड़े ट्रेन हादसे के बाद पूरी दुनिया सदमे में थी, जिसमें 275 लोग मारे गए थे और 1000 से अधिक अन्य घायल हो गए थे। कई अभी भी कई सवाल पूछ रहे हैं जबकि अन्य ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर गुस्सा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>बालासोर। </strong>Odisha Train Accident Update News: ओडिशा के बालासोर जिले में एक बड़े ट्रेन हादसे के बाद पूरी दुनिया सदमे में थी, जिसमें 275 लोग मारे गए थे और 1000 से अधिक अन्य घायल हो गए थे। कई अभी भी कई सवाल पूछ रहे हैं जबकि अन्य ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर गुस्सा उतार रहे हैं। इसके अलावा, ट्रेन दुर्घटना के बाद सोमवार को पहली बार लोको पायलट या दुर्घटनाग्रस्त कोरोमंडल एक्सप्रेस के चालक का बयान दर्ज किया गया था। Odisha Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट, गुणनिधि मोहंती ने कहा कि जब वह लूप लाइन में प्रवेश करते थे तो सिग्नल हरा था, लाल नहीं था और ट्रेन अनुमेय गति सीमा के भीतर थी। लोको पायलट गुणानिधि मोहंती और सहायक लोको पायलट हजारी बेहरा दोनों, जो ट्रेन त्रासदी में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, का अब भुवनेश्वर में इलाज चल रहा है। लोको पायलट के बयानों की पुष्टि करते हुए, आॅपरेशन एंड बिजनेस डेवलपमेंट के रेलवे बोर्ड के सदस्य जया वर्मा सिन्हा ने देश में सबसे घातक ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक के मद्देनजर रेलवे सुरक्षा के बारे में कई गलतफहमियों को दूर किया था। Odisha Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">‘हमने ड्राइवर से बात की थी और उसने पुष्टि की कि सिग्नल हरा था। हमारा स्टाफ समर्पित है और समर्पण के साथ काम करता है। सिग्नल रेड होने पर न तो वह गुजरा था और न ही ओवरस्पीडिंग कर रहा था। ड्राइवर को गंभीर चोटें आईं और उसने बताया कि सिग्नल हरा था, सिन्हा ने कहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">सिन्हा के अनुसार, हमारा डेटा रिकॉर्ड (सीलबंद रिकॉर्ड जो जांच का हिस्सा है) भी बताता है कि सिग्नल हरा था और सिग्नल लाल होने पर ड्राइवर पास नहीं हुआ था। ‘दूसरी बात, हर लोको में एक स्पीडोमीटर और एक चार्ट होता है जो गति रिकॉर्ड करता है। स्पीडोमीटर ग्राफ को हटा दिया गया है और वह (ड्राइवर) अपनी अनुमेय गति सीमा में था। यह एक हाई-स्पीड सेक्शन है (130 किमी/घंटा की अनुमति है) और ट्रेन ड्राइवर की गति 128 किमी/घंटा थी,’ सिन्हा ने कहा। लोको पायलट और सहायक लोको पायलट का भुवनेश्वर में इलाज चल रहा है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा उच्चतम जांच चल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोको पायलट और सहायक लोको पायलट दोनों का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। सहायक लोको पायलट की सर्जरी होनी थी, ‘दक्षिण पूर्व रेलवे के सीपीआरओ आदित्य चौधरी ने कहा। सूत्रों ने बताया कि लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की स्थिति में और सुधार होने के बाद उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 21:06:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MS Dhoni: धोनी ने उड़ीसा ट्रेन हादसे में मदद कर दिखाई महानता, देख कर करोगे सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा। MS Dhoni: ओडिशा के बालासोर जिले के बहानागा में हाल ही में हुए (accident odisha victims) विनाशकारी ट्रेन हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच, कई मशहूर हस्तियों और खिलाड़ियों द्वारा ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को भारी मात्रा में धन दान (Donation) करने की खबरें आई हैं। व्हाट्सएप और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/dhoni-showed-greatness-by-helping-in-orissa-train-accident-you-will-salute-after-seeing/article-48500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/ms-dhoni.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ओडिशा। </strong>MS Dhoni: ओडिशा के बालासोर जिले के बहानागा में हाल ही में हुए (accident odisha victims) विनाशकारी ट्रेन हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच, कई मशहूर हस्तियों और खिलाड़ियों द्वारा ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को भारी मात्रा में धन दान (Donation) करने की खबरें आई हैं। व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म पर एक संदेश भेजा जा रहा है कि चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार और भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के लिए 60 करोड़ रुपये का दान दिया है। MS Dhoni</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, ओटीवी द्वारा एक तथ्य-जांच से पता चला है कि एमएस धोनी ने ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के लिए 60 करोड़ रुपये का दान किया है, यह एक धोखा है। एमएस धोनी ने कभी भी ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के लिए 60 करोड़ रुपये या इतनी बड़ी राशि दान करने की घोषणा नहीं की। यह एक फर्जी संदेश है जिसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाया जा रहा है। Donation</p>
<h3 style="text-align:justify;">अफवाहें फैलाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश: पुलिस | MS Dhoni</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, कई ट्विटर उपयोगकर्ता भी घातक दुर्घटना को ‘सांप्रदायिक रंग’ देते हैं, जिसमें 275 लोगों की जान चली गई थी। फर्जी ट्वीट्स पर ध्यान देते हुए ओडिशा पुलिस ने चेतावनी दी कि ऐसी पोस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ‘यह देखने में आया है कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल शरारती तरीके से बालासोर में हुए दुखद ट्रेन हादसे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सभी संबंधितों से अपील करते हैं कि वे इस तरह के झूठे और दुर्भावनापूर्ण पोस्ट प्रसारित करने से बचें, ‘ओडिशा पुलिस के एक ट्वीट में कहा गया है। उन्होंने चेतावनी दी, ‘अफवाहें फैलाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 20:43:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>odisha train accident reason: बढ़ती तकनीक और दहलाते रेल हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[odisha train accident: बेशक बालासोर ( balasore) रेल दुर्घटना देश क्या दुनिया के भीषणतम हादसों में एक है। इतना ही नहीं और याद भी नहीं कि देश में कभी एक साथ तीन रेलें इस तरह टकराई हों? दुर्घटना से जो एक सच सामने आया है वो बेहद दुखद और चौंकाने वाला है जिसमें रिजर्व बोगियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/increasing-technology-and-shocking-train-accidents/article-48471"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/odisha-train-accident-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">odisha train accident: बेशक बालासोर ( balasore) रेल दुर्घटना देश क्या दुनिया के भीषणतम हादसों में एक है। इतना ही नहीं और याद भी नहीं कि देश में कभी एक साथ तीन रेलें इस तरह टकराई हों? दुर्घटना से जो एक सच सामने आया है वो बेहद दुखद और चौंकाने वाला है जिसमें रिजर्व बोगियों के अलावा मौतें जनरल बोगियों में सवारों की भी हुईं। उससे भी बड़ी हमेशा की तरह सच्चाई यह है कि यह दुर्घटना स्टेशन पहुंचने से थोड़ा पहले हुई। odisha map</p>
<p style="text-align:justify;">odisha train accident: अप और डाउन दोनों ट्रैक किसी स्टेशन पर पहुंचने से पहले यात्री सुविधाओं की दृष्टि से कई लूप ट्रैक में विभाजित होकर रुकने वाली ट्रेनों को प्लेटफॉर्म तक और माल व नॉन स्टाप गाड़ियों को आगे का सीधा ट्रैक पकड़ाते हैं। यहां आगे जा रही या पीछे से आ रही ट्रेनों की स्थिति और निगरानी में जरा सी चूक हादसों में बदल जाती है, यही हुआ। यकीनन ट्रेनों के परिचालन के लिए नित नई उन्नत और नवीनतम तकनीक विकसित होती जा रही है। बावजूद इसके हादसे उतने ही गहरे जख्म भी छोड़ते जा रहे हैं। odisha map</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, ये हादसा बहानागा रेलवे स्टेशन के पास शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841), और सर एम.विश्वेश्वरैया टर्मिनल-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12864) तथा मालगाड़ी एक-दूसरे से टकराने से हुआ। कोरोमंडल एक्सप्रेस डिरेल होकर खड़ी मालगाड़ी से टकराई डिब्बे गिरे और लोग निकल जान बचाने इधर-उधर भागने लगे। ठीक उसी समय दूसरे ट्रैक पर यशवंतपुर हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12864) आ गई और पहले गिरी दोनों ट्रेनों से टकरा गई। इसके चलते हादसे का रूप भयंकर वीभत्स और दिल दहला देने वाला हो गया। train accident today</p>
<p style="text-align:justify;">odisha train accident: जान बचाकर भागते कई लोग भी शिकार हो गए। सुबह जब ड्रोन से तस्वीरें मिलनी शुरू हुर्इं तो रोंगटे खड़े कर देने वाले दर्दनाक मंजरों ने दिल दहला दिया। जबकि बोगियों के अन्दर की तस्वीरें बेहद दर्दनाक थीं। किसी का सर धड़ से अलग था किसी के हाथ-पैर और शरीर क्षत-विक्षत। मालगाड़ी के डिब्बे के ऊपर सवारी गाड़ियों के डिब्बे जिग-जैग पोजीशन में एक-दूसरे के ऊपर 50-55 फीट तक जा चढ़े। कई डिब्बे सैकड़ों मीटर दूर तक जा गिरे। दोनों ही ट्रेन अपनी पूरी क्षमता से भरी थीं यानी 1750 यात्रियों की जगह 3500 यात्री बैठे थे। हादसे में सैकड़ों जाने चली गईं और हजारों लोग घायल हो गए। पिछले 20 वर्षों में यह सबसे बड़ा हादसा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते बरस की ही बात है, जीरो रेल एक्सीडेंट मिशन में आॅटो ब्रेक सिस्टम पर तेजी से काम की खूब बातें हुईँ। ट्रेन प्रोटेक्शन एण्ड वार्निंग यानी टीपीडब्ल्यूएस तकनीक का ढिंढ़ोरा पिटा। वो प्रणाली बताई गई जिसमें गलती से भी कोई ट्रेन रेड सिग्नल जंप कर जाए तो यह वार्निंग प्रणाली उसे रोक देगी। डिवाइस लोकोपायलट के उन क्रियाकलापों को मॉनीटर करेगा जिसमें ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैँडल शामिल हैं। यदि कोई लोको पायलट प्रतिक्रिया नहीं देगा या झपकी लग जाएगी तो ये सिस्टम खुद तुरंत ऐक्टिवेट होकर ब्रेक लगाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">odisha train accident: यदि ट्रेनों की रफ्तार तय स्पीड से ज्यादा हुई और रेड सिग्नल दिखा तो भी सिस्टम लोको पायलट का रिस्पांस न मिलने पर खुद सक्रिय होगा तथा धीरे-धीरे ब्रेक लगाकर इंजन बंद कर देगा। इस हादसे पर इससे भी बड़ी विडंबना या मजाक ये कि महज एक दिन पहले 1 जून को ही रेल मंत्रालय ने र्ट्रेन सुरक्षा पर बड़ा चिंतन शिविर लगाया। नई तकनीकों पर जोरदार पक्ष रखा। रेल के सफर को सुरक्षित और आरामदेह बनाने पर फोकस किया और दावा कि कवच तकनीक से लैस ट्रेनों का आपस में एक्सीडेंट हो ही नहीं सकता। यहां तक कि यदि ये दो ट्रेनें आमने-सामने आ भी जाएं तो यह तकनीक उन्हें खुद ही पीछे की तरफ धकेलने लगेगी मतलब ट्रेन का आगे बढ़ना रुक जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि कवच की बात सामने आने के चंद घण्टों के भीतर ही यह बड़ा हादसा हो गया। रेलवे बोर्ड से पूरे देश में 34,000 किलोमीटर रेल ट्रैक पर यह कवच सिस्टम लगाने की मंजूरी मिली है। साल 2024 तक सबसे व्यस्त रेल ट्रैक्स पर इसे लगाना है। इस कवच की तकनीक को रिसर्च डिजाइन एंड स्टेंडर्ड आॅर्गनाइजेशन यानी आरडीएओ की मदद से पूरे देश के रेलवे ट्रैक पर शुरू होना है। हालांकि रेल मंत्री के राज्यसभा में दिए जवाब के मुताबिक यह तकनीक दक्षिण मध्य रेलवे के 1455 रूट पर लग चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर वर्ष 2021-22 में 133 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि 2022-2023 में 272.30 करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान है। रेलवे ट्रेन में टीपीडब्ल्यूएस सिस्टम भी लागू कर रहा है जो ट्रेन सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली का वो सिस्टम है जिससे एक्सीडेंट कम हो सकते हैं। इसमें हर रेलवे सिग्नल इंजन के कैब में लगी स्क्रीन पर दिखाई देगा। लोको पायलट घने कोहरे, बारिश या किसी अन्य कारण से खराब मौसम के बावजूद कोई सिग्नल मिस नहीं करेगा ट्रेन की सही गति भी मालूम होती रहेगी ताकि खराब मौसम में गति नियंत्रित कर सके। odisha train accident reason</p>
<p style="text-align:justify;">जब देश में इन दिनों वन्देभारत ट्रेन शुभारंभ की चमकदार तस्वीरें सामने होती हैं इसी बीच ऐसी दुर्घटनाओं का काला सच तमाचा तो मारता है। जाहिर है लोग सवाल तो पूछेंगे कि क्या देश में केवल लक्जरी ट्रेनों के संचालन को प्राथमिकता है और आम लोगों की रेलगाड़ियां और पटरी पर कोई ध्यान नहीं ? भले ही यह राजनीतिक बहस का विषय बने लेकिन देश में आम सवारी गाड़ियों की हालत ठीक नहीं है। देश के आम यात्रिओं की सुविधाओं पर भी ध्यान जरूरी है। सबसे कमाऊ रेलवे जोन में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का पूरा ध्यान केवल कोयला ढुलाई पर है। यात्री सेवा में यह जोन सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। शायद ही कोई गाड़ी यहां अपने सही पर चलती हो। odisha train accident reason</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग यात्री सुविधाओं के लिए अभिशप्त कहलाने लगा है। तीसरी लाइन का ज्यादातर हिस्सा चालू हो जाने के बाद सुविधाओं में इजाफे की खूब बातें हुई वे सब बेमानी निकलीं। जरूरी और लंबी दूरी की गाड़ियों का 3-4 घण्टे की देरी से चलना आम तो 8 से 10 घण्टे लेट चलना भी हैरानी भरा नहीं होता। कोयले के खातिर मेन प्लेटफॉर्म तक कोल सायडिंग में तब्दील हो जाते हैं। बिलासपुर रेल जोन का अमलाई स्टेशन सबूत है जिसका मुख्य प्लेटफार्म सायडिंग की बलि चढ़ गया। odisha train accident reason</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल बालासोर से 22 किमी दूर घनी आबादी वाले इलाके के पास हुए इस हादसे ने ट्रेन और उससे ज्यादा यात्रियों की सुरक्षा को लेकर तमाम सवालों की झड़ी लगा ही दी है। दुर्घटना की शिकार कोरोमंडल एक्सप्रेस में कोई टक्कर रोधी यानी एंटी-कोलिजन उपकरण नहीं होने की बातें भी सामने आ रही हैं जिससे एक ही ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनें एक निश्चित दूरी पर रुकती हैं। सवाल कई हैं और जांचें भी कई होंगी। लेकिन यह सच है कि शाम कुछ लोग सोने की तैयारी में थे तो कुछ रात का खाना खा रहे थे। कइयों के हाथों में खाने का निवाला ही कि वो खुद मौत का निवाला बन गए। काश आम भारतीयों की पहले समय से चलने वाली ट्रेनों व उनके सुरक्षित सफर के लिए भी कुछ सोचा जाता? राहत की बात यह है कि प्रधानमंत्री खुद वहां पहुंचे हैं इसलिए पूरे देश के रेल यात्रियों में उम्मीद की किरण बाकी है। odisha train accident reason<br />
(यह लेखक के अपने विचार हैं)</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/world-environment-day/">World Environment Day 2023: पर्यावरण संरक्षण में हमारा कितना योगदान</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 13:19:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तबाह ट्रेनें, बिखरी बोगियां, लाशों का अंबार! सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा ट्रेन हादसे की समयबद्ध जांच के लिए शीर्ष अदालत में याचिका नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। ओडिशा रेल हादसे (Odisha Train Accident) की समयबद्ध जांच उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले एक विशेषज्ञ आयोग से कराने का निर्देश देने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/plea-in-apex-court-for-time-bound-probe-in-odisha-train-accident/article-48446"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/odisha-train-accident-6.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ओडिशा ट्रेन हादसे की समयबद्ध जांच के लिए शीर्ष अदालत में याचिका</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> ओडिशा रेल हादसे (Odisha Train Accident) की समयबद्ध जांच उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले एक विशेषज्ञ आयोग से कराने का निर्देश देने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि यह दुर्घटना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार और नागरिकों की स्वतंत्रता के उल्लंघन के मद्देनजर उच्च अधिकारियों द्वारा की गई घोर लापरवाही को दर्शाती है। दो जून को हुए इस हादसे में 288 लोगों की मृत्यु और 1000 से अधिक लोगों के घायल हो गये हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दशकों में भारत में सबसे बड़े रेल हादसों में से एक | (Odisha Train Accident)</h3>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत के समक्ष दायर इस याचिका में भारतीय रेलवे प्रणाली की मौजूदा जोखिम और सुरक्षा मानकों का विश्लेषण और समीक्षा करके इसे मजबूत करने के लिए व्यवस्थित संशोधनों का सुझाव देने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा व्यवस्था (एटीपी) ‘कवच’ लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश भी मांग की है। ट्रेन संचालन की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में इस मत्वपूर्ण कदम की घोषणा रेल मंत्रालय ने 23 मार्च 2022 को की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">तिवारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उच्च अधिकारियों द्वारा बार-बार इस तरह (रेल हादसा) की अनियमित और लापरवाहीपूर्ण कार्रवाइयों के साथ ही सख्त न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। याचिका में ओडिशा ट्रेन दुर्घटना में तीन ट्रेनों के दुर्घटनाग्रस्त होने से 288 से अधिक लोगों की मौत और 1000 से अधिक लोग घायल तथा इससे सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान होने का जिक्र है। याचिका में कहा गया है कि यह हादसा पिछले कुछ दशकों में भारत में सबसे बड़े रेल हादसों में से एक है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेकर वैष्णव का इस्तीफा लें मोदी : कांग्रेस</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने ओडिशा में हुई रेल दुर्घटना (Odisha Train Accident) को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पीड़ित परिजनों के प्रति रविवार को संवेदना व्यक्त की और कहा कि इस दुघर्टना में करीब 300 निर्दोष यात्री मारे गए हैं, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव का इस्तीफा लेना चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा तथा पार्टी के राज्य सभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहले बड़ी रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया तथा नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दिया था और इस बार श्री मोदी को नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर रेल मंत्री से इस्तीफा मांगना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “इस्तीफा देने का मतलब है नैतिक जिम्मेदारी लेना। इस सरकार में न जिम्मेदारी दिखती है, न नैतिकता।प्रधानमंत्री जी, ये देश उम्मीद करता है कि जिस तरह लाल बहदुर शास्त्री जी, नीतीश कुमार जी, माधव राव सिंधिया जी ने इस्तीफा दिया था… उस तरह आप भी अपने रेल मंत्री का इस्तीफा लें।” कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार में रेलवे ट्रैक की मरम्मत और उनके नवीनीकरण का बजट हर साल कम होता जा रहा है। यही नहीं जो बजट है उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कैग की रिपोर्ट बताती है कि 2017 से 2021 के बीच ट्रेनों के पटरी से उतरने की कुल 1,127 घटनाएं हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार पर रेलवे को खोखला करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘ ‘हम हाई-स्पीड ट्रेन के खिलाफ नहीं हैं लेकिन 10-15 चमकती ट्रेन दिखाकर आप पूरा ढांचा खोखला कर देंगे, ये मंजूर नहीं है। आप रेल मंत्री के ट्विटर टाइमलाइन पर जाएंगे तो रेलवे की हकीकत दिख जाएगी। रेल विभाग में 3.12 लाख पद खाली हैं। नौ फरवरी को रेल मंत्रालय में सकुर्लेट हुई आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया था कि सिग्नल इंटरलॉकिंग सिस्टम में खामी है। ये सही नहीं हुई तो हादसे होते रहेंगे। सवाल है कि इस रिपोर्ट को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री सदी के सबसे भयावह रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेकर रेल मंत्री का इस्तीफा लेंगे। संसद की स्थाई समिति की इस संबंध में आई रिपोर्ट पर प्रधनमंत्री की तरफ से कौन जवाब देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा,‘आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार में रेलवे सुरक्षा के लिए अलग इंजीनियर्स की टीम होती थी, जो रेलवे ट्रैक की सुरक्षा और उनकी मरम्मत का काम देखती थी। आजादी के बाद हमारी सरकारों ने तय किया कि रेलवे अपना मुनाफा देखेगा। ऐसे में यात्री तथा रेलवे सुरक्षा की चिंता करते हुए अलग से रेलवे सुरक्षा आयोग बनाया था जिसे नागरिक उड्डयन के अंतर्गत रखा गया था। रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड की यह कहते हुए आलोचना की गई थी कि वह रेलवे सुरक्षा आयोग की सिफारिशों पर ध्यान नहीं दे रहा था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Digital Library:- हरियाणा के ऐलनाबाद हलके के हर गांव में होगी डिजिटल लाइब्रेरी" href="http://10.0.0.122:1245/there-will-be-a-digital-library-in-every-village-of-haryana-ellenabad-area/">Digital Library:- हरियाणा के ऐलनाबाद हलके के हर गांव में होगी डिजिटल लाइब्रेरी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/plea-in-apex-court-for-time-bound-probe-in-odisha-train-accident/article-48446</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2023 18:08:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>त्वरित टिप्पणी &amp;#8230; तो सिस्टम ही कुछ ऐसा है, कोई मरता है तो मरने दे !</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. संदीप सिंहमार। भारत देश में आमजन को अपने गंतव्य तक पहुंचने के (Odisha Train Accident) लिए रेल, सड़क मार्ग, हवाई मार्ग, जल मार्ग का प्रयोग करना पड़ता है। यातायात के यही सभी साधन विश्वसनीय भी हैं ,क्योंकि यह सभी केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। यदि हम विश्व स्तरीय बात करें तो फिर भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/odisha-train-accident/article-48390"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/coromandel-train-accident1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारत देश में आमजन को अपने गंतव्य तक पहुंचने के (Odisha Train Accident) लिए रेल, सड़क मार्ग, हवाई मार्ग, जल मार्ग का प्रयोग करना पड़ता है। यातायात के यही सभी साधन विश्वसनीय भी हैं ,क्योंकि यह सभी केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। यदि हम विश्व स्तरीय बात करें तो फिर भी इन्हीं मागोें का उपयोग किया जाता है। यह माना जा सकता है कि जलमार्ग का उपयोग अधिकतर आयात निर्यात के लिए किया जाता है तो ट्रेन का सफर इन सभी में से आमजन के लिए सुगम माना गया है, क्योंकि सबसे आसानी से उपलब्ध होने वाला व्यवस्था साधन रेलवे को ही माना जाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Odisha Train Accident: ओडिशा ट्रेन दुर्घटना के कारण सौ से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित" href="http://10.0.0.122:1245/coromandel-train-accident/">Odisha Train Accident: ओडिशा ट्रेन दुर्घटना के कारण सौ से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित</a></p>
<p style="text-align:justify;">यहाँ हम बात करें तो भारत देश में रेल मार्ग की शुरूआत गुलामी के दिनों में हुई थी। हादसे तब भी होते थे। लेकिन आजाद भारत की बात करें तो अब तक भारत देश में इतने ज्यादा रेल हादसे हो चुके हैं कि यदि हम गौर फरमाएं तो सोचने वाला हर व्यक्ति दांतों तले उंगली दबा सकता है कि आखिर सरकारी विभाग इन हादसों के बाद जागता क्यों नहीं? एक जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की जाती? यदि हम यह कहें …‘तो सिस्टम ही कुछ ऐसा है कोई मरता है तो मरने दे’ इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह पंक्तियां रेलवे विभाग पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं।</p>
<h3>14 घंटे बीत जाने के बावजूद भी रेस्क्यू अभियान पूरा नहीं हो पाया</h3>
<p style="text-align:justify;">हादसे जब भी हुए अधिकतर लोग गरीब मरे क्योंकि अमीर लोग यातायात के इस विश्वसनीय साधन में यात्रा तय करने में कम विश्वास करते हैं। यह माना कि उड़ीसा के बालेश्वर में जो दर्दनाक हादसा हुआ, उसमें से एक मालगाड़ी व दों एक्सप्रेस ट्रेन थी। हादसे के 14 घंटे बीत जाने के बावजूद भी अब तक एनडीआरएफ स्थानीय प्रशासन द्वारा रेस्क्यू अभियान पूरा नहीं हो पाया है। मरने वालों की संख्या भी 244 के पार पहुंच चुकी है। रेलवे विभाग की माने तो यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौके पर पहुंच चुके हैं। पर हुआ क्या? वही जो पहले होता आया है?</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा राशि देने से इन हादसों पर रोक नहीं लग सकती और क्या मुआवजा देने से जिन्दगी वापिस आ जाएगी। इन दर्दनाक हादसों पर रोक लगाने के लिए स्टेशन मास्टर से लेकर रेल मंत्री तक की जिम्मेदारी होनी चाहिए। देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के समय को याद कीजिए। जब वे रेल मंत्री थे तो उनके समय में भी एक बड़ा रेल हादसा हुआ था। इस रेल हादसे की जिम्मेदारी उन्होंने खुद लेते हुए तुरंत अपने पद से 1956 में इस्तीफा तक दे दिया था। यहां उन्होंने अपने पद की गरिमा बचाते हुए इंसानियत दिखाने का कार्य किया था। लेकिन रेल हादसा तब भी नहीं रुका था।</p>
<h3>यह हादसा हुआ क्यों? उस केंद्र बिंदु पर कोई नहीं पहुंच पाया</h3>
<p style="text-align:justify;">अब यहां हम किसी के भी इस्तीफे की बात नहीं कर रहे। बल्कि बात कर रहे हैं, इस देश के बड़े रेल हादसे की टेक्निकली जांच की। टेक्निकल जांच में जिसकी भी लापरवाही मिले, उसे इसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए। यह तो पक्का तय है कि इस तरह के हादसे बड़ी लापरवाही की वजह से होते हैं। लेकिन इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? उसकी जाँच जरूर करनी होगी। सिर्फ यह बात कहने से कि जान गंवाने वालों के प्रति हमारी गहरी संवेदना है, इससे काम नहीं चलने वाला। ओडिशा में एक दिन का राजकीय शोक भी घोषित कर दिया गया। पर अभी तक रेस्क्यू अभियान के साथ-साथ उस केंद्र बिंदु पर कोई नहीं पहुंच पाया कि यह हादसा हुआ क्यों?</p>
<p style="text-align:justify;">रेलवे विभाग की चार दशक पहले की सबसे बड़ी घटना भी अपनी उम्र का अर्धशतक पूरा करने वाले लोगों को जरूर याद होगी। तब 6 जून 1981 को बिहार में एक पुल पार करते हुए ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी। इस हादसे में 750 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। हादसे यहीं नहीं थमे इसके बाद भी चलते रहे और हमारे देश के सत्तासीन सिर्फ संवेदना व्यक्त करते रहे। पर ऐसे हादसों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब देश के सबसे विश्वसनीय यातायात के साधन से लोगों का विश्वास राजनीति की तरह उठ जाएगा। उड़ीसा के इस हादसे के बाद भी राजनीति का एक नया खेल शुरू होने वाला है। मीडिया में पक्ष-विपक्ष की बयानबाजी होगी और लोगों को इमोशनल करने का काम कर गुमराह किया जाएगा। पर कोई भी ये नहीं बताएगा हादसे का टेक्निकल नतीजा क्या हुआ? इस बात पर गहन मंथन करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आजाद भारत में अब तक कई बड़े रेल हादसे हुए हैं, इन दर्दनाक हादसों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है।</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">कब-कब हुए देश में बड़े रेल हादसे</h3>
<p style="text-align:justify;">1956 में महबूबनगर रेल हादसे में 112 लोगों की मौत हुई थी। हादसा होने पर तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसे तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने स्वीकार नहीं किया। तीन महीने बाद ही अरियालूर रेल दुर्घटना में 114 लोग मारे गए। उन्होंने फिर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफा स्वीकारते हुए संसद में कहा कि वह इस्तीफा इसलिए स्वीकार कर रहे हैं कि यह एक नजीर बने। इसलिए नहीं कि हादसे के लिए किसी भी रूप में शास्त्री जिम्मेदार हैं। पर हादसे क्यों हुए इस ओर तब भी गौर नहीं किया गया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">23 दिसंबर 1964 को पम्बन-धनुषकोडि पैसेंजर ट्रेन चक्रवात का शिकार हो गई थी। इस हादसे में 126 यात्रियों की मौत हो गई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">6 जून, 1981 को देश में सबसे बड़ी रेल दुर्घटना हुई थी। इस दिन बिहार में पुल पार करते समय एक ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी, जिसमें 750 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">20 अगस्त, 1995 को फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी कालिंदी एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस घटना में 305 लोगों की मौत हुई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">26 नवंबर, 1998 को जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस पंजाब के खन्ना में फ्रंटियर गोल्डन टेंपल मेल के पटरी से उतरे तीन डिब्बों से टकरा गई थी, जिसमें 212 लोगों की मौत हो गई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">दो अगस्त, 1999 को गैसल ट्रेन दुर्घटना हुई थी, इस हादसे में ब्रह्मपुत्र मेल उत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार डिवीजन के गैसल स्टेशन पर अवध असम एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में 285 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक घायल हो गए। पीड़ितों में सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान शामिल थे।</li>
<li style="text-align:justify;">9 सितंबर, 2002 को रफीगंज ट्रेन हादसा- हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस रफीगंज में धावे नदी पर एक पुल के ऊपर पटरी से उतर गई थी, जिसमें 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई।</li>
<li style="text-align:justify;">28 मई, 2010 को जनेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई थी। मुंबई जाने वाली ट्रेन झारग्राम के पास पटरी से उतर गई थी और फिर एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिससे 148 यात्रियों की मौत हो गई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">20 नवंबर, 2016 को पुखरायां ट्रेन पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में 152 लोगों की मौत हो गई थी और 260 घायल हो गए थे।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>रेल हादसों में जान गंवाने वाले नागरिकों को दैनिक ‘सच कहूँ’ की ओर से श्रद्धांजलि</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2023 12:41:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Odisha Train Accident: ओडिशा ट्रेन दुर्घटना के कारण सौ से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली/कोलकाता (एजेंसी)। Coromandel Train Accident ओडिशा में बालासोर जिले में कल शाम हुई रेल दुर्घटना के कारण 58 से अधिक ट्रेनों को पूरी तरह से और 10 को आंशिक रूप से रद्द किया गया है जबकि 41 ट्रेनों का मार्ग बदला गया है। दक्षिण पूर्व रेलवे की एक विज्ञप्ति के अनुसार खडगपुर भुवनेश्वर खंड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/coromandel-train-accident/article-48386"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/coromandel-train-accident.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/कोलकाता (एजेंसी)।</strong> Coromandel Train Accident ओडिशा में बालासोर जिले में कल शाम हुई रेल दुर्घटना के कारण 58 से अधिक ट्रेनों को पूरी तरह से और 10 को आंशिक रूप से रद्द किया गया है जबकि 41 ट्रेनों का मार्ग बदला गया है। दक्षिण पूर्व रेलवे की एक विज्ञप्ति के अनुसार खडगपुर भुवनेश्वर खंड पर चलने वाली 58 गाड़ियों को निरस्त कर दिया गया है जबकि दस गाड़ियों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। 41 गाड़ियों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा है जबकि एक गाड़ी को परिवर्तित समय पर चलाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रेन सं. 12841 शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस और ट्रेन सं. 12864 सर एम विश्वेश्वरैया बेंगलुरु सिटी-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस दो जून को बहनागा बाजार रेलवे स्टेशन के पास लगभग 18.55 बजे पटरी से उतरने के कारण खडगपुर भुवनेश्वर खंड पर रेल यातायात पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। रेलवे के इंजीनियर मार्ग को साफ करके यातायात बहाल करने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। रेलवे के सूत्रों के अनुसार यह सदी की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना मानी जा सकती है जिसमें मृतकों की संख्या 244 से कहीं अधिक हो सकती है। ओडिशा सरकार के अनुसार दुर्घटना में घायल 900 से अधिक लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। Coromandel Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह सहित अनेक नेताओं ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन दुर्घटना के हताहतों के राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव आज सुबह दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने भी राहत एवं बचाव अभियान पर ध्यान फोकस करने का निर्देश दिया है। रेल संरक्षा आयुक्त (दक्षिण पूर्व सर्किल) ए. एम. चौधरी को दुर्घटना की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। हालांकि आरंभिक संकेतों के अनुसार इस दुर्घटना के पीछे मानवीय चूक भी हो सकती है। Coromandel Train Accident</p>
<h3 style="text-align:justify;">ओडिशा दुर्घटना: बैठक में स्थिति की समीक्षा करेंगे मोदी | Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा रेल दुर्घटना के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक बुलाई है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ओडिशा रेल दुर्घटना के बाद उत्पन्न स्थिति की बैठक में विस्तार से समीक्षा करेंगे। सूत्रों ने हालांकि, बैठक के बारे में और जानकारी नहीं दी है लेकिन यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस बड़ी रेल दुर्घटना को गंभीरता से ले रहे हैं और बैठक में रेल दुर्घटनाओं से संबंधित सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि ओडिशा के बालासोर जिले के बहनगा बाजार स्टेशन पर शुक्रवार को 12841 अप चेन्नई शालीमार कोरोमंडल एक्सप्रेस तथा 12864 बेंगलुरु हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस एक के बाद एक पटरी से उतर गयीं। इस दुर्घटना में 238 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों यात्री घायल हो गए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2023 11:46:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Odisha Train Accident: 42 साल का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा, वजह का हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रेन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 244 हुई, राजकीय शोक की घोषणा | train Accident Coromandel Express Accident ओड़िशा में बालासोर (Balasore) के बहानागा में शुक्रवार शाम हुई (Odisha Train Accident) ट्रेन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 244 हो गई। राज्य में एक दिन के शोक की घोषणा की गई है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/odisha-train-accident-news/article-48381"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/odisha-train-accident-.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">ट्रेन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 244 हुई, राजकीय शोक की घोषणा | train Accident</h4>
<p style="text-align:justify;">Coromandel Express Accident ओड़िशा में बालासोर (Balasore) के बहानागा में शुक्रवार शाम हुई (Odisha Train Accident) ट्रेन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 244 हो गई। राज्य में एक दिन के शोक की घोषणा की गई है। बालासोर के कलेक्टर डी बी शिंदे ने कहा कि अब तक दुर्घटनास्थल से 244 शव निकाले जा चुके हैं। दुर्घटनास्थल राजधानी से करीब 200 किलोमीटर दूर है। इससे पहले ओड़िशा के मुख्य सचिव पी के जेना ने एक ट्वीट में ट्रेन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 233 और घायलों की संख्या 900 बताई थी। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार दुर्घटना में 900 से अधिक यात्रियों को बचाया गया है और उन्हें इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों ने कहा कि हताहतों की संख्या बढ़ने की संभावना है (Odisha Train Accident) क्योंकि दुर्घटनास्थल पर एक जनरल बोगी आधी दबी हुई है और उसमें से शवों को निकालने के प्रयास जारी हैं। इस बीच, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। 03 जून को पूरे दिन राज्य में कोई राजकीय समारोह नहीं होगा। वहीं इजून के महीने में हुए इस हादसे ने 42 साल पहले उस रेल दुर्घटना की याद दिला दी, जिसे देश का सबसे दर्दनाक रेल हादसा कहा जाता है। 6 जून 1981 को बिहार में हुए इस ट्रेन हादसे में करीब 800 लोगों की मौत हो गई थी। बिहार के सहरसा में यह हादसा हुआ था, जब एक पैसेंजर ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बचाव अभियान जारी | Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव शनिवार सुबह बहनागा स्टेशन पर ग्राउंड जीरो पहुंचे और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों, एनडीआरएफ और ओडीआरएएफ टीमों के साथ स्थिति की समीक्षा की। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी भी मौके पर मौजूद थे। रेल मंत्री ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि शवों को बहानागा के दो स्कूलों में रखा गया है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए स्थानीय अस्पतालों में ले जाया जाएगा। रेलवे की एक तकनीकी टीम ने शनिवार तड़के दुर्घटनास्थल का हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटना में शालीमार चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस, यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और पैरामेडिक्स के साथ 45 मोबाइल स्वास्थ्य टीमों को भी दुर्घटनास्थल पर भेजा गया है। इसमें केंद्रपाड़ा की पांच, जयपुर की 16, भद्रक की दस और बालासोर की 14 टीमें शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि बचाव अभियान जारी है और कुछ और समय तक जारी रहेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बालासोर रेल दुर्घटना के पीड़ितों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की अनुग्रह राशि: मोदी | Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार की शाम हुए रेल हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से दो-दो लाख रुपए देने की घोषणा की है। मोदी ने ट्वीट कर लिखा, ‘ओडिशा में ट्रेन दुर्घटना में प्रत्येक मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। इससे पहले रेल मंत्री ने भी ट्रेन दुर्घटना में जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये सहायता राशि देने और इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को दो-दो लाख रुपये तथा मामूली रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा रेल दुर्घटना पर दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। मोदी ने ट्वीट में कहा, ‘ओडिशा में ट्रेन हादसे से व्यथित। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। घायल जल्द स्वस्थ हों। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से बात की और स्थिति का जायजा लिया। दुर्घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी है और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता दी जा रही है। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने यहां जारी एक संदेश में कहा कि उन्हें ओडिशा के बालासोर में रेल दुर्घटना में लोगों के मारे जाने के समाचार से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा, ‘इस कठिन समय में मेरी संवेदना पीड़ित परिवारों के साथ है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। Odisha Train Accident</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ओडिशा रेल दुर्घटना पर दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बालासोर में हुई रेल दुर्घटना बेहद दुखद है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम दुर्घटना स्थल पर पहुंच गई है। अन्य टीम भी राहत और बचाव अभियान के लिए पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित लोगों के परिजनों के प्रति उनकी संवेदना है और वह घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे पर गहरा दुख जताया| Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा कि वह इस बड़े हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बालासोर जिले में हुई रेल दुर्घटना के पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने ट्रेन दुर्घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि घायल यात्रियों की जान बचाना अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री पटनायक बालासोर जिले में ट्रेन के पटरी से उतरने के बाद राहत अभियान का जायजा लेने के लिए विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) नियंत्रण कक्ष पहुंचे। उन्होंने कहा है कि मैंने स्थिति की समीक्षा की है। मैं कल सुबह घटनास्थल पहुंचकर स्थिति का जायजा लूंगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे पर गहरा दुख जताया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे हुआ हादसा | Odisha Train Accident</h3>
<p style="text-align:justify;">आइए हम समझते हैं कि हादसा कैसे हुआ। सबसे पहले बता दें कि यह हादसा बालासोर स्टेशन के नजदीक बहानगा बाजार स्टेशन के पास हआ है। हादसे के समय आउटर लाइन पर एक मालगाड़ी खड़ी थी। हावड़ा से आ रही कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841) जो कि चेन्नई जा रही थी बहानगा बाजार से 300 मीटर पहले डिरेल हुई। हादसा इतना भयानक था कि कोरोमंडल एक्सप्रेस का ईंजन मालगाड़ी पर चढ़ गया। इसके साथ ही कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन की पीछे वाली बोगियां तीसरे ट्रैक पर जा गिरीं। तभी इसी ट्रैक पर तेज रफ्तार से आ रही हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस (12864) ट्रैक पर पड़ी कोरोमंडल एक्सप्रेस की बोगियों से बहुत तेजी से टकराईं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2023 10:24:30 +0530</pubDate>
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