<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/child-labor/tag-2492" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Child Labor - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/2492/rss</link>
                <description>Child Labor RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>World Child Labor Prohibition Day: एक भारतीय के प्रयास से हुई अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। World Child Labor Prohibition Day: अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत वर्ष 2002 में एक भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ा है। श्री सत्यार्थी ने इस मुद्दे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/international-child-labor-prohibition-day-started-with-the-efforts-of-an-indian/article-48716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/world-child-labor-prohibition-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>World Child Labor Prohibition Day: अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत वर्ष 2002 में एक भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ा है। श्री सत्यार्थी ने इस मुद्दे को लेकर विभिन्न देशों में एक सशक्त अभियान चलाया और आम जनता से लेकर राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रप्रमुखों, राजा – रानियों और महाराजा- महारानियों का समर्थन प्राप्त किया। करोड़ों बच्चों के शोषण के खिलाफ और उनके अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के लिए वर्ष 2014 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">सत्यार्थी ने बाल श्रम के बारे में दुनिया को जागरूक करने और उसे एक गंभीर अपराध के तौर पर स्वीकार करने को लेकर वर्ष 1998 में ‘ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ यानी वैश्विक जन जागरूकता यात्रा की शुरूआत की थी। यह यात्रा 17 जनवरी, 1998 को फिलीपींस के मनीला से शुरू हुई और छह जून, 1998 को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में समाप्त हुई। करीब पांच महीने तक चली इस यात्रा में सत्यार्थी के साथ 36 बच्चे भी थे ,जिन्होंने कभी बाल मजदूर के रूप में काम किया था। इस यात्रा को करीब डेढ़ करोड़ लोगों का व्यापक समर्थन भी प्राप्त हुआ। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा की दो प्रमुख मांगें बाल श्रम के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने और साल में एक विशेष दिन बाल मजदूरों को समर्पित करने की थी। यह यात्रा छह जून, 1998 को जब जेनेवा पहुंची तो उस समय संयुक्त राष्ट्र भवन में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- आईएलओ का एक महत्वपूर्ण वार्षिक सम्मेलन चल रहा था। इस सम्मेलन में 150 से अधिक देशों के मंत्री और प्रतिनिधि सहित 2,000 से अधिक व्यक्ति मौजूद थे। इन सबके बीच जब संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के गलियारे इन बच्चों के नारों और मांगों से गूंज उठे। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">आईएलओ ने अपनी परंपरा को तोड़ते हुए इतिहास में पहली बार एक सामाजिक कार्यकर्ता श्री सत्यार्थी और दो बच्चों को बाल श्रम, बाल दासता, बाल वेश्यावृत्ति और तस्करी के बारे में अपनी बात रखने का अवसर दिया। वैश्विक जन जागरूकता यात्रा के एक साल बाद यानी 17 जून, 1999 को बाल श्रम उन्मूलन के लिए आईएलओ समझौता- 182 पारित किया गया। इसपर बहुत ही कम समय में संयुक्त राष्ट्र के सभी 187 देशों ने अपने हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही बाल श्रम निषेध को लेकर एक विशेष दिन घोषित किए जाने की मांग को भी मान लिया गया‌। वर्ष 2002 में इसकी घोषणा की गई कि अब से हर साल 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाएगा। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बाल श्रम रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1986 में बाल श्रम(निषेध और विनियमन) अधिनियम लागू किया। इससे कालीन निर्माण, चूड़ी बनाने, पटाखा फैक्ट्री, सर्कस, ताला उद्योग, पीतल के बर्तन बनाने, खेती के काम, साड़ी कढ़ाई, ईंट भट्ठों और घरों काम में कम कर रहे बच्चों को बचाया गया। लेकिन अभी तक कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय कानून या ढांचा नहीं था,जो बच्चों से मजदूरी कराने, उनकी तस्करी और उन्हें वेश्यावृत्ति या दूसरे खतरनाक कामों में धकेलने से रोकता हो। World Child Labor Prohibition Day</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/international-child-labor-prohibition-day-started-with-the-efforts-of-an-indian/article-48716</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/international-child-labor-prohibition-day-started-with-the-efforts-of-an-indian/article-48716</guid>
                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 13:21:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-06/world-child-labor-prohibition-day.jpg"                         length="61228"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल श्रमिक : समस्याएं एवं कानून</title>
                                    <description><![CDATA[बाल श्रमिक समस्या भारत की नहीं विश्वभर की समस्या है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में संभवत: 20 करोड़ बाल श्रमिक है। नेशनल सेंपल सर्वे के अनुसार भारत में 2 करोड़ बाल श्रमिक हैं जिसमें से 83 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में हैं। 40 लाख श्रमिक जोखिम भरे उद्योगों में नियोजित हैं। वैसे तो भारत के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-labor-problems-and-laws/article-3489"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/bal-sharm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बाल श्रमिक समस्या भारत की नहीं विश्वभर की समस्या है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में संभवत: 20 करोड़ बाल श्रमिक है। नेशनल सेंपल सर्वे के अनुसार भारत में 2 करोड़ बाल श्रमिक हैं जिसमें से 83 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में हैं। 40 लाख श्रमिक जोखिम भरे उद्योगों में नियोजित हैं। वैसे तो भारत के संविधान में अनुच्छेद 24 यह प्रतिबंध करता है कि किसी भी बालक को जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम है, उसे कारखाने, खदान अथवा जोखिम भरे उद्योगों में नियोेजित नहीं किया जा सकता। संविधान के उपरोक्त संरक्षण के उपरांत भी बाल श्रमिकों के नियोजन पर कोई नियंत्रण नहीं किया जा सका। इसलिए वर्ष 1986 में बाल श्रम (प्रतिशेध विनियमन) अधिनियम पारित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बाल श्रम से कानूनों में बालक की परिभाषा अलग-अलग दी गई है जिसमें उम्र में भी भिन्नता है हालांकि अधिकतम 14 वर्ष कई कानूनों में किया जा चुका है फिर भी परिभाषा में एकरूपता नहीं है। बाल अधिनियम 1960 में बालक की परिभाषा यह है कि जिसने 16 वर्ष की आयु पूर्ण न की हो, इसी तरह बालिका है तो 18 वर्ष की आयु पूर्ण न की हो। बाल श्रम (प्रतिशेध एवं विनियमन) अधिनियम 1996 में धारा 3 में उन उद्योगों का हवाला दिया है जिसमें बाल श्रमिकों का नियोजन प्रतिबंधित है। जैसे रेलवे, कारपेट बीविंग, भवन निर्माण, आतिशबाजी, विस्फोटक, बीड़ी निर्माण, प्रिटिंग प्रेस, बिजली उद्योग, कपड़ा छपाई आदि। ऐसे उद्योगों में यदि बाल श्रमिक का नियोजन पाया जाता है तो अधिनियम की धारा 14-अ के अनुसार नियोक्ता, मालिक को 3 माह से एक वर्ष तक का कारावास एवं अधिकतम 20- हजार रुपए के दंड से दंडित किया जा सकता है। परंतु आज तक ऐसा कोई उदाहरण देखने को नहीं मिला है कि किसी नियोक्ता को सजा मिली हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि भारत के संदर्भ में बाल श्रमिकों के नियोजन की स्थिति को देखा जाए तो यह देखा जा सकता है कि बाल श्रमिक व नियोजन उसके परिवार की सामाजिक, आर्थिक स्थिति तथा गरीबी के कारण बढ़ता चला जा रहा है। आधुनिकीकरण उपभोक्ता संस्कृति, शहरीकरण की दौड़ में बाल श्रमिक एक ऐसा सस्ता औजार है, जिसके उपयोग से नियोक्ता, ठेकेदार, प्रतिष्ठान सस्ते श्रम पर अधिकतम लाभ प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं एवं बाल श्रमिकों का धड़ाधड़ नि:संकोच नियोजन कर रहे हैं। जिस पर प्रशासन का भी नियंत्रण नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका प्रमाण श्रमायुक्त कार्यालयों के सामने न्यायालयों के सामने एवं प्रशासन के सामने ही हजारों बाल श्रमिक होटलों में, टेम्पो, मिनी बसों में, दुकानों में, गैरिज में तथा घरों में रात-दिन काम करते देखे जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाल श्रमिकों का नियोजन समाप्त किया जाना संभव नहीं है। इसका उदाहरण इस तरह भी लिया जा सकता है कि योजना आयोग द्वारा ठेका, श्रम प्रथा को समाप्त करने की सिफारिश की थी जो कि उस समय संसद की मंशा के अनुरूप थी। परन्तु ठेका श्रम प्रथा को समाप्त नहीं किया गया एवं ठेका श्रम उत्पादन एवं विनियमन अधिनियम 1970 पारित किया गया जिसका उद्देश्य तो ठेका, श्रम प्रथा को समाप्त करना था परंतु यह दूषित व्यवस्था धड़ल्ले से चल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी माता-पिता, परिवार यह नहीं चाहता कि उसका बच्चा बालपन में ही मेहनत-मजदूरी करे, प्रत्येक मां-बाप के सपने एक जैसे होते हैं। परंतु गरीबी बेरोजगारी, अशिक्षा एवं महंगाई की मार ही मजबूर करती है कि एक बालक शिक्षा की बजाय परिवार की भरण पोषण के लिए पूरक आय का साधन बनता है। सरकार को बाल श्रम के संबंध में गंभीरता से सतर्कतापूर्वक विचार करना चाहिए। क्योंकि उग्रवादी एवं आतंकवादी संगठनों द्वारा 13-14 वर्ष तक के बच्चों को नौकरी व धन का लालच देकर गुमराह किया जा रहा है एवं आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक जी.के. छिब्बर</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-labor-problems-and-laws/article-3489</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/child-labor-problems-and-laws/article-3489</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 04:16:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-11/bal-sharm.jpg"                         length="39588"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश के लिए अभिशाप है बालश्रम</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे देश का भविष्य हैं। हमारे देश में बच्चों को भगवान का रूप भी माना गया है। लेकिन वर्तमान में बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षित भविष्य के लिए समूचा देश चिन्तित है। हमारे देश में कुल श्रम शक्ति का लगभग 3.4 प्रतिशत भाग 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का है। यह उम्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/curse-for-country-is-child-labor/article-3388"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/child-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बच्चे देश का भविष्य हैं। हमारे देश में बच्चों को भगवान का रूप भी माना गया है। लेकिन वर्तमान में बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षित भविष्य के लिए समूचा देश चिन्तित है। हमारे देश में कुल श्रम शक्ति का लगभग 3.4 प्रतिशत भाग 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का है। यह उम्र बच्चों के पढ़ने और खेलने-कूदने की है। मगर गरीबी और अशिक्षा के कारण ये बच्चे इन सुविधाओं से वंचित हैं और जबरन मजदूरी में धकेल दिये गये हैं। भारत में प्रत्येक दस बच्चों में से 9 बच्चे काम करते हैं। ये बच्चे लगभग 85 फीसदी पारम्परिक कृषि कार्यों और घरेलू कार्यों में कार्यरत हैं। जबकि 9 फीसदी से कम बच्चे उत्पादन, सेवा और मरम्मती कार्यों में लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">8.8 फीसदी बच्चे कारखानों में मजदूरी पर लगे हैं। पढ़ाई के बजाय मजदूरी करने से बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है और यह देश के भविष्य के लिए भी अभिशाप है। अंतर्राष्टÑीय संगठन यूनिसेफ के अनुसार विश्व में लगभग दो करोड़ 50 लाख बच्चे जिनकी आयु सीमा 17 तक है बाल श्रम में लिप्त हैं। बताया जाता है कि इनमें से बहुत से परिवार अपनी बेहद तंगी और गरीबी के कारण अपने बच्चों को मजदूरी में धकेलते हैं। रोटी हमारी बुनियादी जरूरत है। रोटी ही बच्चों को ऐसे कार्यों में धकेलती है और माँ-बाप न चाहते हुए भी अपने बच्चों से बालश्रम करवाने में मजबूर हैं। भारत के संविधान में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कारखाने आदि में काम पर नहीं रखा जाये। कारखाना अधिनियम, बाल श्रम निरोधक कानून आदि में भी बच्चों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मगर बच्चे आज भी घरेलू नौकर का कार्य करते हैं। होटलों, कारखानों, सेवा केन्द्रों, दुकानों आदि में सरेआम और सरेराह बच्चों को काम करते देखा जा सकता है। कानून के रखवालों की आंख के नीचे बच्चे काम करते मिल जायेंगे। सरकार ने स्कूलों में बच्चों के लिए शिक्षा, वस्त्र, भोजन आदि की मुफ्त व्यवस्था की है। मगर सरकार के लाख जतन के बाद भी बाल श्रम आज बदस्तूर जारी है। गरीबी और कुपोषण बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन है। नेशनल सेम्पल सर्वे संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दो तिहाई लोग पोषण के सामान्य मानक से कम खुराक प्राप्त कर रहे हैं। एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुपोषित और कम वजन के बच्चों की आबादी का लगभग 40 प्रतिशत भाग भारत में है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों में अपराध और बाल मजदूरी के मामले में भी हमारा देश आगे है। हालांकि सरकार दावा कर रही है कि बाल मजदूरी में अपेक्षाकृत काफी कमी आई है। सरकार ने बाल श्रम रोकने के लिए अनेक कानून बनाये हैं और कड़ी सजा का प्रावधान भी किया है मगर असल में आज भी लाखों बच्चे कल-कारखानों से लेकर विभिन्न स्थानों पर मजदूरी कर रहे हैं।चाय की दुकानों पर, फल-सब्जी से लेकर मोटर गाड़ियों में हवा भरने, होटल, रेस्टोरेंटों में और छोटे-मोटे उद्योग धंधों में बाल मजदूर सामान्य तौर पर देखने को मिल जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी प्रयासों से कई बार प्रशासन ने ऐसे बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उनके घरों पर भेजा मगर गरीबी के हालात इनकी प्रगति एवं विकास में अवरोध बने हुए हैं। जितने बच्चे बाल श्रम से मुक्त कराये जाते हैं, उससे अधिक बच्चे फिर बाल मजदूरी में फंस जाते हैं। ये बच्चे गरीबी के कारण स्कूलों का मुंह नहीं देखते और परिवार पोषण के नाम पर मजदूरी में धकेल दिये जाते हैं। हमें अपने प्रयासों को तेज करना चाहिये और बच्चों का भविष्य संवारने के लिए वह हर जतन करना चाहिये जिससे बच्चे बाल श्रम की इस कुत्सित प्रथा और मजबूरी से बचपन मुक्त हो सकें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/curse-for-country-is-child-labor/article-3388</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/curse-for-country-is-child-labor/article-3388</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Oct 2017 04:23:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-10/child-2.jpg"                         length="119834"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन बाल श्रम</title>
                                    <description><![CDATA[बाल श्रम से हमारा तात्पर्य ऐसे कार्यों से है, जिसमें काम करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित उम्र से छोटा होता है और इस प्रथा को अनेक देशों और अंतरास्ट्रीय संगठनों ने शोषित करने वाली माना है। अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन ने जागरूकता पैदा करने के लिए 2002 में हर वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम विरोधी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/childs-biggest-enemy-child-labor/article-1157"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/child-labour.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बाल श्रम से हमारा तात्पर्य ऐसे कार्यों से है, जिसमें काम करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित उम्र से छोटा होता है और इस प्रथा को अनेक देशों और अंतरास्ट्रीय संगठनों ने शोषित करने वाली माना है। अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन ने जागरूकता पैदा करने के लिए 2002 में हर वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की। यह दिवस मानाने का उद्देश्य पूरे विश्व को बाल श्रम के विरुद्ध जागृत करना एवं बच्चों को बाल मजदूरी से बचाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन के अनुमान के मुताबिक विश्व में 21 करोड़ 80 लाख बालश्रमिक हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2 करोड़ और अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार तो लगभग 5 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन बालश्रमिकों में से 19 प्रतिशत के लगभग घरेलू नौकर हैं। घरेलु कार्य के अलावा इन बालश्रमिकों को पटाखे बनाना, कालीन बुनना, वेल्डिंग करना, ताले बनाना, पीतल उद्योग में काम करना, कांच उद्योग, हीरा उद्योग, माचिस, बीड़ी बनाना, खेतों में काम करना, कोयले या पत्थर खदानों में, सीमेंट उद्योग, दवा उद्योग में तथा होटलों व ढाबों में झूठे बर्तन धोना आदि सभी काम मालिक की मर्जी के अनुसार करने होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने और अपने परिवार के पेट की आग को बुझाने के लिए मासूम बच्चों को छोटी उम्र में मजदूरी करनी पड़ रही है। चाहे तपती गर्मी हो या फिर कड़कड़ाती ठण्ड, बच्चे मजदूरी कर अपना और अपने घर का पेट पालने को मजबूर होते हैं। शिक्षा की रोशनी से महरूम इन बच्चों के खेलने-कूदने के दिन मजदूरी में बीतते है। भारत में बाल मजदूरी बहुत बड़ी समस्या है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या सदियों से चली आ रही है। कहने को देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। फिर भी बच्चों से बाल मजदूरी कराई जाती है। जो दिन बच्चों के पढ़ने, खेलने-कूदने के होते हैं, उन्हें बाल मजदूर बनना पड़ता है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बालश्रम की समस्या बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करती है। जोकि संविधान के विरूद्ध है और मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है। भारत के संविधान में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से ऐसे कार्य या कारखाने आदि में नहीं रखा जाये। कारखाना अधिनियम, बाल श्रम निरोधक कानून आदि में भी बच्चों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीबी और कुपोषण बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन है। नेशनल सेम्पल सर्वे संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दो तिहाई लोग पोषण के सामान्य मानक से कम खुराक प्राप्त कर रहे हैं। एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुपोषित और कम वजन के बच्चों की आबादी का लगभग 40 प्रतिशत भाग भारत में है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बाल श्रम रोकने के लिए अनेक कानून बनाये हैं और कड़ी सजा का प्रावधान भी किया है, मगर असल में आज भी लाखों बच्चे कल-कारखानों से लेकर विभिन्न स्थानों पर मजदूरी कर रहे हैं। चाय की दुकानों पर, फल-सब्जी से लेकर मोटर गाड़ियों में हवा भरने, होटल, रेस्टोरेंटों में और छोटे-मोटे उद्योग धंधों में बाल मजदूर सामान्य तौर पर देखने को मिल जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान, एमपी, यूपी, हरियाणा, पंजाब सहित विभिन्न प्रदेशों में बिहार और बंगाल के बच्चे मजदूरी करते देखने को मिल जायेंगे। सरकारी प्रयासों से कई बार प्रशासन ने ऐसे बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उनके घरों पर भेजा, मगर गरीबी के हालात इनकी प्रगति एवं विकास में अवरोध बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अशिक्षा, गरीबी, अंधविश्वास आदि अनेक कारणों के विश्लेषण से पता चलता है कि बच्चे बाल श्रम करने पर मजबूर हैं। ये बच्चे मजदूरी नहीं करना चाहते मगर मजबूरी इन्हें इन कार्यों को करने पर मजबूर कर रही है। इसलिए बाल श्रम को केवल कानून बनाकर ही नहीं रोका जा सकता। आवश्यकता इच्छाशक्ति की है। हमें अपने प्रयासों को तेज करना चाहिये और बच्चों का भविष्य संवारने के लिए वह हर जतन करना चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-बालमुकुंद ओझा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/childs-biggest-enemy-child-labor/article-1157</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/childs-biggest-enemy-child-labor/article-1157</guid>
                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 22:54:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/child-labour.jpg"                         length="126701"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        