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                <title>Enemy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अब पानी के अंदर भी दुश्मन की खैर नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी) Edited By Vijay Sharma।  सेना को पानी के अंदर ताकत देने के मकसद से रक्षा खरीद परिषद (डी.ए.सी.) ने टी-90 टैंक्स के लिए पानी के अंदर कारगर होने वाले खास तरह के उपकरण खरीदने की मंजूरी दी है। मंगलवार को डीएसी ने करीब 9100 करोड़ रुपए की खरीद को मंजूरी दी है जिसमें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/not-even-the-enemy-in-the-water/article-6000"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/water-ship.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी) Edited By Vijay Sharma।</strong>  सेना को पानी के अंदर ताकत देने के मकसद से रक्षा खरीद परिषद (डी.ए.सी.) ने टी-90 टैंक्स के लिए पानी के अंदर कारगर होने वाले खास तरह के उपकरण खरीदने की मंजूरी दी है। मंगलवार को डीएसी ने करीब 9100 करोड़ रुपए की खरीद को मंजूरी दी है जिसमें आकाश मिसाइल की रैजीमैंट को अपग्रेड करने के अलावा टैंकों को और शक्तिशाली बनाने के मकसद से उपकरणों की खरीद को मंजूरी मिल गई है।</p>
<h2>आईयूडब्ल्यूबीए उपकरणों को मिली मंजूरी</h2>
<p>रक्षा मंत्रालय की ओर से इंडीविजुअल अंडर-वॉटर ब्रीदिंग एप्रेट्स यानी आईयूडब्ल्यूबीए उपकरणों को मंजूरी मिली है। इन उपकरणों को टी-90 टैंक्स में फिट किया जाएगा। ये उपकरण टैंक के क्रू की तरफ से प्रयोग किए जाते हैं। इन्हें सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम माना जाता है और पानी के अंदर किसी भी आपातकाल की स्थिति में क्रू आसानी से निकल सकता है। इस उपकरण को डिफैंस रिसर्च डिवैल्पमैंट ऑर्गेनाइजेशन (डी.आर. डी.ओ.) की लैब डेबेल की ओर से डिवैल्प किया गया है। डी.ए.सी. ने इसके अलावा टी-90 टैंक्स के गाइडेड वैपन्स सिस्टम के लिए टैस्ट इक्विपमैंट्स को भी मंजूरी दे दी है। इस उपकरण को भी डी.आर.डी.ओ. की ओर से डिवैल्प किया जाएगा। इन उपकरणों को पहले विदेशी कम्पनी से खरीदा गया था लेकिन बाद में मेक इन इंडिया मुहिम तहत देश में तैयार किए गए।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Sep 2018 09:16:51 +0530</pubDate>
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                <title>हमें पाकिस्तान नहीं, चीन से खतरा: मुलायम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए दावा किया कि यह पड़ोसी देश भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और भारत पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इस विषय पर उनकी बात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/danger-from-china-mulayam/article-2443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mulayam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए दावा किया कि यह पड़ोसी देश भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और भारत पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इस विषय पर उनकी बात नहीं सुन रही और उठाए जाने वाले कदमों पर राय नहीं ले रही। यादव ने लोकसभा में शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा कि मैं बीस साल से सावधान करता आ रहा हूं और हर साल इस बारे में इस सदन में बोलता हूं कि चीन से भारत को बहुत खतरा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> नेपाल पर भी चीन की नजर</h2>
<p style="text-align:justify;">चीन भारत के खिलाफ षड्यंत्र कर रहा है और हिंदुस्तान पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है। उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान से नहीं चीन से खतरा है। उसने पाकिस्तान को भी अपने साथ मिला लिया है। नेपाल पर भी चीन की नजर है। यादव ने सरकार को आगाह करते हुए यह दावा भी किया सूचना मिली है कि चीन ने पाकिस्तान की जमीन में एटम बम गाड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा नेता ने कहा कि तत्कालीन सरकारों की सबसे बड़ी भूल रही कि तिब्बत पर चीन का कब्जा होने दिया। तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा पूरी तरह भारत के साथ रहे और आज भी भारत के साथ हैं, लेकिन हम उन्हें संरक्षण नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि हमें अब भी तिब्बत की आजादी का समर्थन करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2017 06:44:47 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन बाल श्रम</title>
                                    <description><![CDATA[बाल श्रम से हमारा तात्पर्य ऐसे कार्यों से है, जिसमें काम करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित उम्र से छोटा होता है और इस प्रथा को अनेक देशों और अंतरास्ट्रीय संगठनों ने शोषित करने वाली माना है। अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन ने जागरूकता पैदा करने के लिए 2002 में हर वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम विरोधी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/childs-biggest-enemy-child-labor/article-1157"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/child-labour.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बाल श्रम से हमारा तात्पर्य ऐसे कार्यों से है, जिसमें काम करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित उम्र से छोटा होता है और इस प्रथा को अनेक देशों और अंतरास्ट्रीय संगठनों ने शोषित करने वाली माना है। अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन ने जागरूकता पैदा करने के लिए 2002 में हर वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की। यह दिवस मानाने का उद्देश्य पूरे विश्व को बाल श्रम के विरुद्ध जागृत करना एवं बच्चों को बाल मजदूरी से बचाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन के अनुमान के मुताबिक विश्व में 21 करोड़ 80 लाख बालश्रमिक हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2 करोड़ और अंतरास्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार तो लगभग 5 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन बालश्रमिकों में से 19 प्रतिशत के लगभग घरेलू नौकर हैं। घरेलु कार्य के अलावा इन बालश्रमिकों को पटाखे बनाना, कालीन बुनना, वेल्डिंग करना, ताले बनाना, पीतल उद्योग में काम करना, कांच उद्योग, हीरा उद्योग, माचिस, बीड़ी बनाना, खेतों में काम करना, कोयले या पत्थर खदानों में, सीमेंट उद्योग, दवा उद्योग में तथा होटलों व ढाबों में झूठे बर्तन धोना आदि सभी काम मालिक की मर्जी के अनुसार करने होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने और अपने परिवार के पेट की आग को बुझाने के लिए मासूम बच्चों को छोटी उम्र में मजदूरी करनी पड़ रही है। चाहे तपती गर्मी हो या फिर कड़कड़ाती ठण्ड, बच्चे मजदूरी कर अपना और अपने घर का पेट पालने को मजबूर होते हैं। शिक्षा की रोशनी से महरूम इन बच्चों के खेलने-कूदने के दिन मजदूरी में बीतते है। भारत में बाल मजदूरी बहुत बड़ी समस्या है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या सदियों से चली आ रही है। कहने को देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। फिर भी बच्चों से बाल मजदूरी कराई जाती है। जो दिन बच्चों के पढ़ने, खेलने-कूदने के होते हैं, उन्हें बाल मजदूर बनना पड़ता है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बालश्रम की समस्या बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करती है। जोकि संविधान के विरूद्ध है और मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है। भारत के संविधान में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से ऐसे कार्य या कारखाने आदि में नहीं रखा जाये। कारखाना अधिनियम, बाल श्रम निरोधक कानून आदि में भी बच्चों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीबी और कुपोषण बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन है। नेशनल सेम्पल सर्वे संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दो तिहाई लोग पोषण के सामान्य मानक से कम खुराक प्राप्त कर रहे हैं। एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुपोषित और कम वजन के बच्चों की आबादी का लगभग 40 प्रतिशत भाग भारत में है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बाल श्रम रोकने के लिए अनेक कानून बनाये हैं और कड़ी सजा का प्रावधान भी किया है, मगर असल में आज भी लाखों बच्चे कल-कारखानों से लेकर विभिन्न स्थानों पर मजदूरी कर रहे हैं। चाय की दुकानों पर, फल-सब्जी से लेकर मोटर गाड़ियों में हवा भरने, होटल, रेस्टोरेंटों में और छोटे-मोटे उद्योग धंधों में बाल मजदूर सामान्य तौर पर देखने को मिल जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान, एमपी, यूपी, हरियाणा, पंजाब सहित विभिन्न प्रदेशों में बिहार और बंगाल के बच्चे मजदूरी करते देखने को मिल जायेंगे। सरकारी प्रयासों से कई बार प्रशासन ने ऐसे बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उनके घरों पर भेजा, मगर गरीबी के हालात इनकी प्रगति एवं विकास में अवरोध बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अशिक्षा, गरीबी, अंधविश्वास आदि अनेक कारणों के विश्लेषण से पता चलता है कि बच्चे बाल श्रम करने पर मजबूर हैं। ये बच्चे मजदूरी नहीं करना चाहते मगर मजबूरी इन्हें इन कार्यों को करने पर मजबूर कर रही है। इसलिए बाल श्रम को केवल कानून बनाकर ही नहीं रोका जा सकता। आवश्यकता इच्छाशक्ति की है। हमें अपने प्रयासों को तेज करना चाहिये और बच्चों का भविष्य संवारने के लिए वह हर जतन करना चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-बालमुकुंद ओझा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 22:54:23 +0530</pubDate>
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