<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/food-grains/tag-2496" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Food Grains - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/2496/rss</link>
                <description>Food Grains RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Food Grains: गहराते खाद्यान्न संकट पर भारत का रूख</title>
                                    <description><![CDATA[Food Grains: काला सागर अनाज समझौते से बाहर निकल जाने के कारण दुनिया के बाजार पहले से ही खाद्यान्न संकट से जूझ रहे थे। अब भारत सरकार के इस फैसले ने बाजार की नींद उड़ा दी है। प्रतिबंध की खबर आते ही वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई। जनता से लेकर व्यापारियों तक ने चावल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-stand-on-the-deepening-food-crisis/article-50996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/wheat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Food Grains: काला सागर अनाज समझौते से बाहर निकल जाने के कारण दुनिया के बाजार पहले से ही खाद्यान्न संकट से जूझ रहे थे। अब भारत सरकार के इस फैसले ने बाजार की नींद उड़ा दी है। प्रतिबंध की खबर आते ही वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई। जनता से लेकर व्यापारियों तक ने चावल का भंडारण करना शुरू कर दिया है। अमेरिका के सुपर मार्केट्स में चावल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं। दुकानों के बाहर ग्राहकों को लंबी कतारें दिख रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि जो माल रास्ते में है, उसकी कीमत भी 50-100 डॉलर प्रति टन तक बढ़ गई है। पुरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने आक्रामक रूख दिखाया है और कहा है कि भारत को प्रतिबंध हटा लेना चाहिए अन्यथा भारत को जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए। Food Grains</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पिछले कुछ समय से देश के भीतर खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। चावल की घरेलू कीमतों में साल भर में करीब 11.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। विपक्ष मंहगाई के नाम पर सरकार को कठघरे में खड़े कर रहा है। टमाटर की कीमतों को लेकर लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं। अगले कुछ महीनों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व तेलगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार को अंदेशा था कि अनाज की बढ़ती हुई कीमतें चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए सरकार ने घरेलू बाजार में गैर-बासमती चावल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से चावल के निर्यात पर रोक लगाने का फैंसला किया। हालांकि, इससे पहले सरकार ने पिछले साल अगस्त में गैर-बासमती चावल के निर्यात पर 20 फीसदी का निर्यात शुल्क लगा कर देश में चावल की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन स्थिति में बहुत ज्यादा परिवर्तन न देखकर अब इसके निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, सरकार के इस निर्णय को सियासी लाभ की दृष्टि से उठाया हुआ कदम कहा जा रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों के लिए अकेले भारत को ही जिम्मेदार ठहरना सही नहीं है। दरअसल, दुनियाभर में निर्यात होने वाले चावल की 90 फीसदी फसल एशिया में पैदा होती है। पिछले कुछ समय से अल-नीनो और मौसम में बदलाव की वजह से चावल में उत्पादन की कमी आने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। उत्पादन से जुड़ी तमाम अनिश्चितताओं के कारण बड़े अनाज व्यापारियों ने चावल का स्टॉक करना शुरू कर दिया। परिणाम स्वरूप कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">द्वितीय, रूस के काला सागर अनाज समझौते से बाहर निकलने के निर्णय के चलते खाद्यन की कीमतें बढ़ी। अब भारत सरकार के इस फैंसले के बाद उसमें और तेजी आ गई । तृतीय, चावल निर्यात करने वाले देशों की सूची में भारत के बाद क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर थाईलैंड और वियतनाम आते है। चावल निर्यात के मामले में दोनों देशों को भारत का प्रतिस्पर्धी कहा जाता है। जुलाई के अंत में भारत ने जैसे चावल निर्यात पर रोक का ऐलान किया वैसे ही इन दोनों देशों ने निर्यात पर 10 फीसदी कीमतें बढ़ा दी। नतीजतन अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल महंगा हो गया। जहां तक देश के भीतर चावल की कीमते बढ़ने का सवाल है तो इसकी बड़ी वजह न्यूनतम समर्थन मुल्य में हुए इजाफे को कहा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत पिछले कुछ वर्षों से दुनिया का शीर्ष चावल निर्यातक देश बना हुआ है। विश्व के कुल चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। दुनिया के तकरीबन 140 से अधिक देश भारत से गैर बासमती चावल का खरीदते हैं। साल 2022 में भारत ने रिकॉर्ड 22.2 मिलियन टन चावल का निर्यात किया था। देश से गैर-बासमती चावल का कुल निर्यात 2022-23 में 4.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था। जो इससे पहले वित्त वर्ष 2021-22 में 3.3 मिलियन डॉलर का था। मौजूदा वित्त वर्ष 2023-24 (अप्रेल-जून) में 15.54 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया गया है, जो पिछले साल 2022-23 के मुकाबले 35 फीसदी ज्यादा हैं। Food Grains</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर कहा जाए तो दुनिया के चार सबसे बड़े निर्यातक देश थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और अमेरिका चावल का जितना निर्यात करते हैं, भारत अकेला उनसे अधिक निर्यात करता है। ऐसे में भारत द्वारा चावल निर्यात पर रोक लगाए जाने के फैसले बाद वैश्विक आपूर्ति मे करीब एक करोड़ टन की कमी आ सकती है। थाईलैंड और वियतनाम की स्थिति ऐसी नहीं है कि इस बड़ी कमी को पूरा कर सके। यही वजह है कि खाद्यान्न संकट से जूझ रहे देशों के माथे पर चिंताएं की लकीरे उभरने लगी हैं। खासतौर से उन छोटे अफ्रीकी देशों के जो भारत से आने वाले अनाज पर निर्भर करते हैं। Food Grains</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, देश के भीतर भी सरकार के इस फैंसले को कोई बहुत अच्छा नहीं माना जा रहा है। अनुमान है कि प्रतिबंध के इस फैंसले से भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि जिस तरह से थाईलैंड और वियतनाम ने आपदा में अवसर को तलाशते हुए निर्यात पर 10 फीसदी की बढ़ोतरी की है, उसी तर्ज पर भारत को भी निर्यात मूल्य में वृद्धि कर बढी हुई कीमतों का फायदा उठाना चाहिए था। दूसरा, भारत के इस कदम से देश के किसानों के भीतर भी निराशा का माहोल बनेगा। Food Grains</p>
<p style="text-align:justify;">निर्यात पर प्रतिबंध के फैंसले के कारण देश के किसान उस लाभ से वंचित रह जाएंगे जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतों के चलते उन्हें मिल सकता था। इससे किसानों के बीच निराशा का भाव उत्पन्न और वे धान की खेती से मुंह फेरने लगेगें। तृतीय, सबसे अहम बात यह है कि सरकार के इस फैंसले से वैश्विक बाजार में भारत की विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार की छवि पर बट्टा लग सकता है। ऐसे में भारत को अपने फैंसले पर फिर से विचार करना चाहिए । दुनिया भर में 3 अरब से अधिक लोग चावल को मुख्य खाद्यान्न के रूप में इस्तेमाल करते है। ऐसे में भारत को अपनी विदेश नीति के आधार वाक्य वसुधैव कुटम्बकम के सिद्धांत पर चलते हुए संतुलन का एक ऐसा मार्ग तलाशना चाहिए जिस पर चलकर हम अपने राष्ट्रीय हित को साधने के साथ-साथ दुनिया को आसन्न खाद्यान्न संकट की चिंता से मुक्ति दिला सके। Food Grains</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. नंद किशोर सोमानी, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PM Kisan Scheme: पीएम किसान योजना की 15वीं किस्त के लिए आज से कर सकते हैं आवेदन, जानें आपको कैसे मिलेगा लाभ" href="http://10.0.0.122:1245/pm-kisan-scheme-15th-installment/">PM Kisan Scheme: पीएम किसान योजना की 15वीं किस्त के लिए आज से कर सकते हैं आवेदन, जानें आपको कैसे मिल…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-stand-on-the-deepening-food-crisis/article-50996</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-stand-on-the-deepening-food-crisis/article-50996</guid>
                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 15:09:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-08/wheat.jpg"                         length="38730"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में तीस करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सरकार ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2020-21 के दौरान तीस करोड़ दस लाख टन खाद्यान्नों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सोमवार को रबी सम्मेलन 2020 को सम्बोधित करते हुए कहा कि धान की पैदावार करीब 12 करोड़ टन और गेहूं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/target-to-produce-300-million-tons-of-food-grains-in-the-country/article-18607"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/zero-cost-natural-farming-is-a-boon-for-farmers.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सरकार ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2020-21 के दौरान तीस करोड़ दस लाख टन खाद्यान्नों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सोमवार को रबी सम्मेलन 2020 को सम्बोधित करते हुए कहा कि धान की पैदावार करीब 12 करोड़ टन और गेहूं का दस करोड़ 80 लाख टन उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । दलहन और तिलहन की पैदावार बढाने पर जोर दिया गया है और दलहन की पैदावार दो करोड़ 56 लाख टन तथा तिलहन की पैदावार तीन करोड़ 70 लाख टन करने का लक्ष्य तय किया गया है । सरकार तिलहन के आयात को कम से कम करने का प्रयास कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने 2019..20 में कोविड काल के दौरान विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रिकार्ड 29 करोड़ 66 लाख टन से अधिक खाद्यान्नों की पैदावार के लिए किसानों को बधाई दी । इस दौरान दलहन का उत्पादन दो करोड़ 31 लाख टन और तिलहन की पैदावार तीन करोड़ 34 लाख टन होने का अनुमान है । उन्होंने कहा कि इस बार खरीफ के दौरान 1113 लाख हेक्टेयर में फसलों को लगाया गया है जो सामान्य से 46 लाख हेक्टेयर अधिक है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/business/target-to-produce-300-million-tons-of-food-grains-in-the-country/article-18607</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/business/target-to-produce-300-million-tons-of-food-grains-in-the-country/article-18607</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Sep 2020 16:07:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-09/zero-cost-natural-farming-is-a-boon-for-farmers.gif"                         length="202239"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेमका का अनाज की खरीद आढ़़तियों के माध्यम से होने पर सवाल उठाना उचित नहीं : गर्ग</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने आज कहा कि आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने आढ़़तियों के माध्यम से अनाज की खरीद करने व सरकार का करोड़ों रूपए आढ़़तियों को कमीशन देने पर जो सवाल उठाया गया है, वह उचित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-not-fair-to-question-khemkas-purchase-of-food-grains-through-agents-garg/article-18430"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/case-complaints-related-to-cleaning-of-grains-and-less-weighing-in-sacks.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने आज कहा कि आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने आढ़़तियों के माध्यम से अनाज की खरीद करने व सरकार का करोड़ों रूपए आढ़़तियों को कमीशन देने पर जो सवाल उठाया गया है, वह उचित नहीं है। गर्ग ने जारी बयान में कहा कि आढ़ती किसान व सरकार के बीच ाजबूत कड़ी हैं। देश व प्रदेश में राज्य सरकारों ने मार्केटिंग बोर्ड बनाया हुआ है। इसी प्रकार हरियाणा में मार्केटिंग बोर्ड के माध्यम से करोड़ों रूपए की दुकान खरीदकर आढ़ती मंडियों में व्यापार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आढ़तियों के माध्यम से अनाज की खरीद नहीं होगी तो मंडी में आढ़ती दुकान करके क्या करेगा? उन्होंने कहा कि आढ़ती फसल खरीद से लेकर अनाज उठाने तक सारे काम करता है। जब मंडी में आढ़तियों के माध्यम से फसल की खरीद नहीं होगी तो हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। गर्ग ने कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार बार-बार बयान दे रहे हैं कि किसान की फसल मंडी में आढ़़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाएगी और अनाज मंडी पहले की तरह चालू रहेगी इसलिए ऐसे में अशोक खेमका का यह सवाल करना कि फसल मंडी के माध्यम से क्यों बिक रही है, पूरी तरह किसान व व्यापारी विरोधी है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-not-fair-to-question-khemkas-purchase-of-food-grains-through-agents-garg/article-18430</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-not-fair-to-question-khemkas-purchase-of-food-grains-through-agents-garg/article-18430</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Sep 2020 16:53:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-09/case-complaints-related-to-cleaning-of-grains-and-less-weighing-in-sacks.gif"                         length="209632"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में ‘एपीएल’ कार्ड धारकों को भी खाद्यान्न उपलब्ध :भुजबल</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। महाराष्ट्र में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल नहीं किये गये गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) नारंगी रंग के राशन कार्ड धारकों को लॉकडाउन के दौरान प्रति व्यक्ति तीन किलोग्राम गेहूं और दो किलो चावल दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री छगन भुजबल ने रविवार को यह जानकारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/food-grains-available-to-apl-card-holders-in-maharashtra-bhujbal/article-14772"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/food1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> महाराष्ट्र में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल नहीं किये गये गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) नारंगी रंग के राशन कार्ड धारकों को लॉकडाउन के दौरान प्रति व्यक्ति तीन किलोग्राम गेहूं और दो किलो चावल दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री छगन भुजबल ने रविवार को यह जानकारी दी। यहां जारी एक बयान के अनुसार एपीएल कार्ड धारकों के लाभार्थियों को 1.56 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का वितरण एक मई के बजाय 24 अप्रैल से शुरू हो गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल नहीं किये गये नारंगी (एपीएल) कार्डधारकों को राशन की दुकानों से खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए हालांकि, राज्य सरकार ने 59,000 रुपये से एक लाख रुपये की वार्षिक आय वाले नारंगी राशन कार्ड धारकों को 12 रुपये प्रति किलो के दर से दो किलो चावल और आठ रुपये प्रति किलोग्राम के दर से तीन किलो गेहूं प्रदान करने का निर्णय लिया है जिससे लॉकडाउन के दौरान राज्य के नागरिकों को भोजन की कमी न महसूस हो।</p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/food-grains-available-to-apl-card-holders-in-maharashtra-bhujbal/article-14772</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/food-grains-available-to-apl-card-holders-in-maharashtra-bhujbal/article-14772</guid>
                <pubDate>Sun, 26 Apr 2020 10:56:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-04/food1.jpg"                         length="18323"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूर्वोत्तर क्षेत्र में दोगुनी खाद्यान्नों की आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय खाद्य निगम के 86 डिपो संचालित 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supply-of-food-grains-doubled-in-north-east-region/article-14574"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/food.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> देशव्यापी लॉकडाउन के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्रों में चार लाख 42 हजार टन खाद्यान्न की आपूर्ति की गई है। गत 24 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा के बाद भारतीय खाद्य निगम ने मालगाड़ियों के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों के दुर्गम इलाकों और सीमित संसाधनों के बीच सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना अधिक खाद्यान्नों की आपूर्ति की है । पिछले 25 दिनों के दौरान 158 मालगाड़ियों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अनाजों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के सात राज्यो में भारतीय खाद्य निगम के 86 डिपो संचालित हैं जिनमें से 38 रेल मार्ग से जुड़े हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मेघालय में रोड से तथा अरुणाचल प्रदेश में भी अधिकतर सड़क मार्ग से ही खाद्यान्नों की आपूर्ति की जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">असम से ट्रक से 33000 टन खाद्यान्न मेघालय को भेजा गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसी तरह से अरुणाचल प्रदेश को 11000 टन अनाज ट्रक से भेजा गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">नागालैंड से मणिपुर को 14000 हजार टन अनाज भेजा गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">असम को छोड़कर पूर्वाेत्तर के ज्यादातर राज्यो में छोटे छोटे भंडारगृह हैं जिसके कारण भी समस्या है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom td_uid_2_5e9d1fb7794b0_rand td_block_template_1" style="text-align:justify;"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/supply-of-food-grains-doubled-in-north-east-region/article-14574</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/supply-of-food-grains-doubled-in-north-east-region/article-14574</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Apr 2020 13:18:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-04/food.jpg"                         length="18323"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कड़ी मेहनत से उपजाया खाद्यान्न सड़ने से बचाना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[देश का किसान आंदोलन कर रहा है, पिट रहा है। कारण, उनकी फसल कौड़ियों के मोल खरीदी जाती है, लेकिन विडम्बना है कि कौड़ियों के मोल खरीदी इस फसल का हाल भी बुरा होता है। अगले सप्ताह से बारिश का मौसम शुरु होने वाला है। इस मौसम में बाढ़ के खतरे के साथ-साथ गोदामों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/food-grains-will-have-to-save-from-decay/article-1158"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/khadan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश का किसान आंदोलन कर रहा है, पिट रहा है। कारण, उनकी फसल कौड़ियों के मोल खरीदी जाती है, लेकिन विडम्बना है कि कौड़ियों के मोल खरीदी इस फसल का हाल भी बुरा होता है। अगले सप्ताह से बारिश का मौसम शुरु होने वाला है। इस मौसम में बाढ़ के खतरे के साथ-साथ गोदामों में पड़ा अनाज भी भारी मात्रा में खराब हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक प्रतिवर्ष हजारों टन खाद्यान्न खराब हो रहा है, लेकिन जिस तरह गत वर्ष आई एक वैश्विक रिपोर्ट में भारत को विश्व का सबसे अधिक भुखमरों का देश बताया एवं सरकार ने खाद्यान्न सुरक्षा गारंटी बिल पास कर लाखों टन खाद्यान्न देने की योजना बनाई, ऐसे में बरसात से बर्बाद होने वाले अनाज को बचाया जाना बेहद जरूरी है। क्योंकि देश में भारतीय खाद्य निगम व राज्य खाद्य निगमों के हजारों गोदाम ऐसे हैं, यहां पर केवल तिरपाल से ही गेहूं, चावल व अन्य अनाज जो खाने के काम आता है ढक कर रखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खाद्यान्न के ऐसे खुले गोदामों में नीचे का फर्श भी सुरक्षित नहीं होता। नतीजा हर बरसात में अनाज के बोरे भीग कर खराब होते रहते हैं। कई बार अनाज बरसात के बिना वातावरण की नमी से ही खराब हो जाता है। भीगा हुआ खाद्यान्न एक-डेढ सप्ताह में ही काला पड़ जाता है व बदबू मारने लग जाता है। इस प्रकार भंडारण प्रक्रिया के बाद अनाज भारी मात्रा में बेकार हो जाता है। प्रतिवर्ष ऐसे सड़े अनाज की मात्रा कुल अनाज के 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जोकि लाखों टन बैठती है। सड़ गये अनाज के लिए केवल मौसम की मार व गोदामों के अभाव को कारण बताकर सरकार व अधिकारी अपनी जिम्मेवारी को पूरा हुआ मान लेते हैं। जबकि देश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे करोड़ों लोग प्रतिदिन भूखा रहने को विवश हो रहे हैं। जिनमें बहुतों की प्रति वर्ष भूख एवं कुपोषण से मौत हो जाती है। सरकारी नीतियां किस प्रकार तय होती हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">यह किसी भी वर्ग के समझ नहीं पड़ती, क्योंकि आज भी जीडीपी का 60 प्रतिशत तक कृषि आय से ही प्राप्त हो रहा है। कृषि का उत्पादकता स्तर 70 के दशक से अभी ऊपर नहीं जा पाया है। जबकि 70 के बाद से देश की आबादी में दोगुणें से थोड़ा कम तक की वृद्धि हो चुकी है। औद्योगिक विकास एवं आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए देश की बहुत सारी उपजाऊ भूमि क्रंकीट एवं शहरीकरण के नीचे दब चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बची हुई कृषि भूमि पर उत्पादन बढ़ता रहे इसके लिए सब्सिडियां एवं अन्य कृषि सुविधाएं देने से सरकार हाथ खींच रही है। नीतियों के इन्हीं घालमेल का परिणाम है कि अब खुले बाजार में प्रतिवर्ष खाद्य पदार्थों के दाम दस से पंद्रह प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। खाद्यान्नों के दामों को वर्तमान नीतियों से किसी भी प्रकार नियंत्रित नहीं किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि उपजाऊ जमीन कम हो रही है। जो जमीन बची हुई है उन पर किसानों को कृषि नहीं करने के लिए हतोसाहित किया जा रहा है। फिर भी यदि बम्पर उत्पादन हो रहा है तब उसे गोदामों में सड़ा दिया जाता है। निश्चित ही देश के नेता अपनों के साथ धोखा कर रहे हैं। ऐसे में किसी व्यवस्था को कब तक विकासमान एवं स्थिर रखा जा सकेगा? यह प्रश्न एक दुस्वप्न की तरह है। जिसका यदि हल नहीं खोजा गया तो करोड़ों लोगों का जीवन अकाल ही मौत के मुंह में चला जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/food-grains-will-have-to-save-from-decay/article-1158</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/food-grains-will-have-to-save-from-decay/article-1158</guid>
                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 23:00:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/khadan.jpg"                         length="88708"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        