<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/mahabharat/tag-25002" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>mahabharat - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/25002/rss</link>
                <description>mahabharat RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Karn Ka Kavach Kundal: कहाँ गया कर्ण का कवच कुंडल, इतिहास और रहस्य का संगम, जानिये यहां सब कुछ</title>
                                    <description><![CDATA[Karn Ka Kavach Kundal::अनु सैनी।  उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित प्राचीन नगर ‘हस्तिनापुर’ न केवल इतिहास और पुराणों की धरोहर है, बल्कि यह धार्मिक आस्था का भी गढ़ माना जाता है। इस नगर में स्थित ‘द्रौपदी घाट’ एक ऐसा स्थल है, जहां पौराणिक कथाओं के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की सजीव झलक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/literature/where-did-karnas-kavach-kundal-go-a-confluence-of-history-and-mystery/article-74518"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/karn-ka-kavach-kundal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Karn Ka Kavach Kundal::अनु सैनी।  उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित प्राचीन नगर ‘हस्तिनापुर’ न केवल इतिहास और पुराणों की धरोहर है, बल्कि यह धार्मिक आस्था का भी गढ़ माना जाता है। इस नगर में स्थित ‘द्रौपदी घाट’ एक ऐसा स्थल है, जहां पौराणिक कथाओं के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की सजीव झलक देखने को मिलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पौराणिक पृष्ठभूमि: महाभारत की कथा से जुड़ा स्थल | Karn Ka Kavach Kundal</h3>
<p style="text-align:justify;">द्रौपदी घाट का नाम महाभारत की प्रमुख पात्रा और पांचों पांडवों की पत्नी द्रौपदी के नाम पर पड़ा है। कहा जाता है कि वनवास के समय पांडवों ने हस्तिनापुर में भी कुछ समय बिताया था और द्रौपदी प्रतिदिन इस घाट पर स्नान करने आती थीं। यही वह स्थान है जहां द्रौपदी ने गंगा तट पर तपस्या की थी और अपने दुःख-दर्द को गंगाजल में बहाकर प्रभु से न्याय की प्रार्थना की थी।<br />
ऐसी भी मान्यता है कि महाभारत काल में जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण किया था, तब श्रीकृष्ण ने यहीं से अदृश्य रूप में हस्तक्षेप कर उन्हें आशीर्वाद दिया और चीर को अनंत कर दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गंगा का पवित्र तट: स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र</h3>
<p style="text-align:justify;">द्रौपदी घाट गंगा नदी के पवित्र तट पर स्थित है। यहां प्रत्येक पूर्णिमा, अमावस्या, गंगा दशहरा, कार्तिक स्नान और मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर हजारों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। लोगों का मानना है कि इस घाट पर स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।<br />
यहां रोज़ सुबह और शाम गंगा आरती का आयोजन होता है, जिसमें स्थानीय पुजारी और श्रद्धालु भाग लेते हैं। जलती हुई दीयों की रौशनी, मंत्रोच्चार की गूंज और गंगाजल की ठंडी लहरें – ये सब मिलकर एक दिव्य अनुभव प्रदान करती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आसपास के धार्मिक स्थल: पांडव टीला, कर्ण मंदिर और जैन मंदिर</h4>
<p style="text-align:justify;">द्रौपदी घाट के समीप ही पांडव टीला स्थित है, जिसे पांडवों के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा कर्ण मंदिर भी दर्शनीय है, जहां सूर्यपुत्र कर्ण ने अपने दानवीर स्वरूप का परिचय दिया था। साथ ही, हस्तिनापुर को जैन धर्म के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है – यहां शांति नाथ और कुंथुनाथ जी के भव्य जैन मंदिर भी स्थित हैं। वहीं कर्ण का कवच और कुंडल, जो कि महाभारत के एक महत्वपूर्ण पात्र कर्ण के पास था, इंद्रदेव ने छल से प्राप्त किया था। कहा जाता है कि इंद्रदेव उसे स्वर्ग ले जाने में सफल नहीं हो पाए और उन्होंने इसे ओडिशा के कोणार्क में समुद्र तट पर छिपा दिया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आस्था के साथ पर्यटन का भी अद्भुत स्थल</h4>
<p style="text-align:justify;">द्रौपदी घाट ना केवल धार्मिक रूप से बल्कि पर्यटन के दृष्टिकोण से भी एक उत्कृष्ट स्थान है। घाट के आस-पास हरियाली, पक्के घाट, विश्राम स्थल और स्थानीय दुकानों की रौनक इसे दर्शनीय बनाती है। उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग ने यहां बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के लिए कई प्रयास किए हैं – जैसे घाट का सौंदर्यीकरण, प्रकाश की व्यवस्था, सीढ़ियों की मरम्मत, पेयजल और शौचालय की सुविधा आदि।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रहस्य और जनमान्यताएं</h3>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का मानना है कि द्रौपदी घाट पर आज भी रात्रि के समय द्रौपदी की छाया दिखाई देती है। कई श्रद्धालुओं ने यह दावा किया है कि उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ और कोई दिव्य शक्ति उन्हें अपने दुखों से छुटकारा दिलाने वाली प्रतीत हुई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे पहुंचे द्रौपदी घाट?</h3>
<p style="text-align:justify;">हस्तिनापुर मेरठ से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह दिल्ली से भी केवल 120 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से सुगमता से पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन मेरठ और निकटतम एयरपोर्ट दिल्ली है। पौराणिक कथाओं से लेकर आज तक जिंदा है द्रौपदी की गाथा द्रौपदी घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और संस्कृति की सजीव धरोहर है। यहां गंगा की लहरों में आज भी द्रौपदी की पीड़ा, उसकी शक्ति और उसके सम्मान की गूंज सुनाई देती है। यह घाट हमें नारी शक्ति, त्याग और आत्मबल का स्मरण कराता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/literature/where-did-karnas-kavach-kundal-go-a-confluence-of-history-and-mystery/article-74518</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/literature/where-did-karnas-kavach-kundal-go-a-confluence-of-history-and-mystery/article-74518</guid>
                <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 17:42:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-08/karn-ka-kavach-kundal.jpg"                         length="37367"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Gufi Paintal Passes Away: नहीं रहे महाभारत के मामा शकुनि, आर्मी जवान से शकुनि बनने की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। Gufi Paintal Passes Away: टीवी सीरियल महाभारत (mahabharat) में शकुनि मामा (shakuni mama) का किरदार निभाकर घर-घर में लोकप्रिय हुए अभिनेता गूफी पेंटल का निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। गूफी पेंटल पिछले काफी दिनों से बीमार थे और मुंबई अंधेरी स्थित एक अस्पताल में भर्ती थे। गूफी पेंटल ने वर्ष […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/gufi-paintal-passes-away/article-48481"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/gufi-paintal-passes-away.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>Gufi Paintal Passes Away: टीवी सीरियल महाभारत (mahabharat) में शकुनि मामा (shakuni mama) का किरदार निभाकर घर-घर में लोकप्रिय हुए अभिनेता गूफी पेंटल का निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। गूफी पेंटल पिछले काफी दिनों से बीमार थे और मुंबई अंधेरी स्थित एक अस्पताल में भर्ती थे। गूफी पेंटल ने वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म ‘रफूचक्कर’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। गूफी पेंटल ने इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग ली थी। अपने भाई पेटल को देखते हुए उन्होंने एक्टिंग में कदम रखा। वर्ष 1969 में गुफी पेंटल मुंबई पहुंचे। उन्होंने मॉडलिंग की और कुछ फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर भी रहे। गूफी पेंटल ने ‘श्री चैतन्य महाप्रभु’ नाम की एक फिल्म भी निर्देशित की थी। Gufi Paintal Passes Away</p>
<p style="text-align:justify;">गूफी पेंटल को पहचान ‘महाभारत’ के शकुनि मामा के रोल से मिली थी। गुफी पेंटल ने कई फिल्मों और टीवी सीरियलों में काम किया था। उनका आखिरी टीवी शो ‘जय कन्हैया लाल की’ था। गूफी पेंटल जिन टीवी शोज में नजर आए, उनमें ‘भारत का वीर पुत्र-महाराणा प्रताप’, ‘मिसेज कौशिक की पांच बहुएं’, ‘कर्ण संगिनी’ और ‘कर्म फल दाता शनि’ जैसे नाम शामिल हैं। वहीं फिल्मों में गूफी पेंटल ने ‘सुहाग’, ‘दिल्लगी’, ‘देस परदेस’ ‘मैदान-ए-जंग’, ‘दावा’, ‘द रिवेंज: गीता मेरा नाम’ जैसे प्रोजेक्ट्स में यादगार किरदार निभाए थे। Gufi Paintal Passes Away</p>
<h3>आर्मी जवान से अभिनेता</h3>
<p>अभिनय की दुनिया में आने से पहले गुफी पेंटल आर्मी में थे। एक इंटरव्यू में पेंटल ने अपने जवान होने से लेकर शकुनि मामा बनने तक की कहानी बताई। उन्होंने कहा था, ”1962 में जब चीन-भारत युद्ध छिड़ा था, तब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। युद्ध के दौरान भी कॉलेज में सेना की भर्ती चल रही थी। मैं हमेशा सेना में शामिल होना चाहता था। सेना में पहली पोस्टिंग चीनी सीमा पर आर्टिलरी डिवीजन में हुई थी।</p>
<p>सीमा पर मनोरंजन के लिए टीवी और रेडियो नहीं था, इसलिए हम ”सेना के जवान” सीमा पर रामलीला करते थे। मैं राम लीला में सीता का रोल करता था और एक शख्स रावण के वेश में स्कूटर पर आया और मेरा अपहरण कर लिया। मुझे पहले से ही एक्टिंग का शौक था इसलिए इसने मुझे थोड़ी ट्रेनिंग दी।”</p>
<p>इसके बाद गूफी 1969 में अपने छोटे भाई कंवरजीत पेंटल के कहने पर मुंबई आ गए। मॉडलिंग और एक्टिंग की ट्रेनिंग ली और कई फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस बीच मैं बीआर चोपड़ा की महाभारत सीरीज़ के लिए एक कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम कर रहा था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/rangmanch/gufi-paintal-passes-away/article-48481</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/rangmanch/gufi-paintal-passes-away/article-48481</guid>
                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 17:15:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-06/gufi-paintal-passes-away.jpg"                         length="82574"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        