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                <title>खुद से हारेगी दिल्ली में भाजपा ?</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली की झुग्गी झौपड़ियां और दिल्ली की कच्ची कालोनियों में रहने वाली आबादी के सबंध में इनकी जानकारी ही नहीं है, ये सिर्फ मीडिया में ही धमाल मचा पाते हैं, इनकी प्राथमिकता में एयर कंडिशन की संस्कृति हैं, पेज थ्री की संस्कृति हैं। प्रोफेशनल लोग वोट कहां डालते हैं, प्रोफेशनल लोगो के पास वोट डालने का समय कहां होता हैं|
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/will-bjp-lose-in-delhi/article-12490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/bjp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>-राजनीतिक हवा का रूख कहता है कि भाजपा खुद से दिल्ली में हारेगी? ऐसा मानना कोई विपक्षी दल आम आदमी पार्टी का नहीं है, और न ही ऐसा मानना कांग्रेस का है। ऐसा मानना भाजपा के समर्पित कार्यकतार्ओं का है। भाजपा में ऐसे समर्पित कार्यकतार्ओं की कोई कमी भी नहीं है, ऐसे समर्पित कार्यकर्ता पहले पन्द्रह साल की शीला दीक्षित की सरकार के खिलाफ लडे थे और अब पांच साल की अरविन्द केजरीवाल की सरकार के खिलाफ लडते रहे हैं। दिल्ली में भाजपा कार्यकतार्ओं के पीड़ा सुनकर दंग होना ही पडेगा। भाजपा के एक पार्षद की पीड़ा है कि उसके टेलीफोन सांसद नहीं उठाते हैं, सांसद उनसे मिलते नहीं हैं, सांसद मिलने का समय तक नहीं देते हैं, हमारे तीन ही विधायक हैं। पार्षदों की यह पीड़ा सही है।</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा फिर से देश की सरकार पर स्थापित करने की वीरता तो जरूर दिखायी है पर दिल्ली में भाजपा की फिर से सरकार में आने का सपना कब पूरा होगा, इनका वनवास कब समाप्त होगा? यह कहना मुश्किल है। वनवास कोई पांच-दस साल का नहीं है बल्कि वनवास के पूरे बीस साल हो गये। यानी कि भाजपा दिल्ली में बीस साल से सत्ता से बाहर है। दिल्ली में भाजपा के अंतिम मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज थी, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। प्याज की मूल्य में वृद्धि के कारण भाजपा की सरकार दफन हुई थी और कांग्रेस की सरकार बनी थी। शीला दीक्षित जिनकी दिल्ली की राजनीति में कोई भूमिका नहीं थी फिर भी वह मुख्यमंत्री बनी और पूरे पन्द्रह साल तक सरकार में बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">पन्द्रह सालों तक शीला दीक्षित को हराने में भाजपा नाकाम रही। शीला दीक्षित की सरकार का पतन हुआ तो अरविन्द केजरीवाल की सरकार आ गयी और अरविन्द केजरीवाल की सरकार पूरे पांच साल तक कायम रही है। अब दिल्ली में विधान सभा चुनाव है, भाजपा अरविन्द केजरीवाल की सरकार के खिलाफ आक्रोशित भी है और आक्रामक भी है पर क्या अरविन्द केजरीवाल को भाजपा परास्त करने में सफल होगी और अपना बीस सालों का वनवास समाप्त कर पायेगी? अगर भाजपा चुनावी वीरता दिखायी तो फिर यह आश्चर्य चकित करने वाली राजनीतिक घटना होगी और प्रदेश ईकाइयों से क्षरण की प्रक्रिया बंद हो जायेगी। प्रदेश ईकांइयों से भाजपा का लगातार क्षरण हो रहा है। प्रदेश ईकांइयों के क्षरण को भाजपा की गिरती साख और नरेन्द्र मोदी के चमत्कार के कथित क्षरण का परिणाम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली भाजपा में कभी एक से बढ़कर नेता थे जो पूरी दिल्ली की जनता की इच्छाओं को समझते थे और दिल्ली की जनता के साथ जिनके आत्मीय संबंध थे। ऐसे नेताओं में साहिब सिंह वर्मा, मदन लाल खुराना, ओम प्रकाश कोहली, सुषमा स्वराज, केदारनाथ साहनी, मांगेलाल गर्ग आदि शामिल थे। इनमें से ओम प्रकाश कोहली को छोड़कर सभी नेता दिवगंत हो गये। ओम प्रकाश कोहली भी राज्यपाल का कार्यकाल पूरा कर घर मे बैठ गये। ये सभी नेता जनसंघ कार्यकाल के महारथी थे। उस काल में ये सभी ने कांग्रेस के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय देते हुए दिल्ली में भाजपा को स्थापित किया था। एक समय कहा यह जाता था कि दिल्ली मे भाजपा के सामने कांग्रेस भी पस्त रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सही भी था कि दिल्ली में जनसंघ की कोई एक बार नही बार-बार स्थानीय सरकार बनती थी। लेकिन विकल्प भाजपा खोज नहीं पायी। संपूर्ण विकल्प तो मिलता नहीं पर विकल्प खड़ा करने की जो दृष्टि होती है, वह दृष्टि ही दोषपूर्ण और अदूरदर्शी होने के कारण विकल्प बनता ही नहीं है। यही संकट भाजपा का है। आज साहिब सिंह वर्मा, मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज, केदारनाथ साहनी , मांगेलाल गर्ग, विजय कुमार मल्होत्रा आदि का जो विकल्प भाजपा में सामने हैं वह है मनोज तिवारी, विजय गोयल, विजेन्द्रर गुप्ता, मीनाक्षी लेखी, हर्षवर्द्धन आदि हैं। ये सभी नेता नरेन्द्र मोदी के चमत्कार से उत्पन्न राजनीति के सहचर तो हैं पर इन सबों की अपनी कोई ऐसी चमत्कार की छवि नहीं बनती है जो अपने कंघो पर दिल्ली भाजपा की भार उठा कर अरविन्द केजरीवाल की सत्ता को पराजित कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने दिल्ली में संसद सदस्य बनाने की जो नीति बनायी थी वह भी दोषपूर्ण तो थी ही, इसके अलावा वह नीति दूरदर्शी भी नहीं थी, अरविन्द केजरीवाल को परास्त करने को केन्द्रित बना कर नहीं बनायी गयी थी। दूसरी संस्कृति से आये उदित राज पूरे पांच साल तक भाजपा को उपेक्षित करते रहे, अपनी भाजपा विरोधी हवा बनाते रहे, दूसरे महेश गिरि राजनीति में जनता की सेवा की संस्कृति से दूर रहने वाले साबित हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दोनों का टिकट काटा गया। पर जिन्हें संसद सदस्य का टिकट दिया गया और जीताया गया उनमें प्रोफेशनल और गैर राजनीतिज्ञ को तरजीह मिली। गौतम गंभीर, हंस राज हंस और मीनाक्षी लेखी और खुद मनोज तिवारी की जन अभूमिका देखने वाले लोग कह सकते हैं, कि यह निर्णय भाजपा के लिए आत्मघाती ही है। गौतम गंभीर क्रिकेट मे कमेन्ट्री करते हैं, देश-विदेश घूमते हैं, हंसराज हंस अपनी गायकी की दुनिया को ही तरजीह देते हैं, जनता की सेवा उनकी प्राथमिकता भी समर्पण वाली नहीं है। मीनाक्षी लेखी बड़ी वकील हैं, उनके पास भी आम कार्यकतार्ओं से मिलने का समय नहीं है। ऐसे में कोई कार्यकर्ता अपनी पीड़ा कहां व्यक्त कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक प्रक्रिया जरूर भाजपा के पक्ष में दिखायी दे रही है। नरेन्द्र मोदी ने इसकी आधारशिला भी रख दी है। कच्ची कालोनियों का पक्कीकरण कर एक वीरता पूर्वक कार्य हुआ है और इसका श्रेय नरेन्द्र मोदी को है। 2008 से ही यह प्रश्न हल होने से दूर था। कच्ची कालोनियों में कोई एक दो लाख नहीं बल्कि पूरे 40 लाख लोग रहते हैं। अगर इन 40 लाख लोगों के पास भाजपा के लोग पहुंच सके तो फिर भाजपा को जीत होने से कौन रोक सकता है? सबसे बडी बात यह है कि दिल्ली में वोटरों की संख्या एक करोड़ 46 लाख है, इसमें 66 लाख लोग भाजपा के सदस्य हैं। अगर भाजपा अपने 66 लाख सदस्यों तक पहुंच सकती है तो फिर भाजपा को सत्ता में लौटने से कौन रोक सकता है?</p>
<p style="text-align:justify;">संकट यह है कि भाजपा के चुनाव प्रबंधन में जो लोग लगे हैं, जिनके उपर अरविन्द केजरीवाल को हराने की जिम्मेदारी दी गयी है वे लोग दिल्ली को जानते ही नहीं हैं, जिनके पास आम कार्यकर्ता की पहुंच ही नहीं हो सकती हैं, दिल्ली की झुग्गी झौपड़ियां और दिल्ली की कच्ची कालोनियों में रहने वाली आबादी के सबंध में इनकी जानकारी ही नहीं है, ये सिर्फ मीडिया में ही धमाल मचा पाते हैं, इनकी प्राथमिकता में एयर कंडिशन की संस्कृति हैं, पेज थ्री की संस्कृति हैं। प्रोफेशनल लोग वोट कहां डालते हैं, प्रोफेशनल लोगो के पास वोट डालने का समय कहां होता हैं, इन्हें लाइन में लग कर वोट डालना स्वीकार कहां होता है, और भाजपा के नेता इन्ही लोगो पर दांव लगाते हैं। वोट तो झुग्गी झौपड़ियों में रहने वाले और कच्ची कालोनियों में रहने वाले लोग सक्रिय होकर डालते हैं, इनके बीच भाजपा के हवाहवाई नेता की पहुंच ही नहीं है। सिर्फ मोदी भरोसे सत्ता की प्राप्ति संभव नहीं है।<br />
<em><strong>-विष्णुगुप्त</strong></em></p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 20:56:13 +0530</pubDate>
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                <title>गत्ता फैक्ट्री में लगी भयानक आग, करोड़ों का नुकसान</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fire-in-the-cardboard-factory/article-3420"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/fire-factory.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">फैक्ट्री पूरी तरह जलकर राख, जानी नुक्सान से बचाव</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>भटिंडा (अशोक वर्मा)।</strong> दीवाली वाली रात को भटिंडा के मानसा रोड पर औद्योगिक फोक्ल प्वार्इंट में स्थित गत्ता फैक्ट्री ‘अग्रवाल कौरो क्राफटस प्राईवेट लिमटिड’ को लगी भयानक आग से करोड़ों रुपए का नुक्सान होने का अंदेशा जताया जा रहा है। आग से फैक्ट्री पूरी तरह तबाह हो गई है परंतु किसी भी किस्म के जानी नुक्सान से बचाव रहा है। आग लगने के कारणों का पता नहीं लग सका है फिर भी प्राथमिक तौर पर आतिशबाजी वगैरह से आग लगने की संभावना जताई जा रही है। आग का पता लगते एसडीएम साक्षी साहनी व तहसीलदार सुखबीर सिंह बराड़ सहित पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे व राहत कार्योंं को शुरू करवाया।</p>
<h3>समूह फायर टैंडरों को मौके पर किया रवाना</h3>
<p style="text-align:justify;">विवरणो के मुताबिक आग देर शाम साढ़े दस बजे के करीब लगी जिसने कुछ ही सैकेंडों में देखते ही देखते गत्ता फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया प्राप्त जानकारी के मुताबिक भटिंडा फायर ब्रिगेड ने आग लगने की सूचना मिलने से तत्काल बाद सब फायर अधिकारी मक्खन राम के नेतृत्व नीचे समूह फायर टैंडरों को मौके पर रवाना किया गया। हालांकि भटिंडा फायर ब्रिगेड की गाड़ीयों ने तुरंत कार्यवाही शुरू की परंतु फोम टैंडर न होने के कारण वह पूरी तरह बेबस दिखाई दीं अधिकारियों ने गुरू नानक देव थर्मल प्लांट भटिंडा के फायर टैंडर बुलाए परंतु आग पर काबू न पाया जा सका। इसी दौरान रिफाईनरी, राष्ट्रीय खाद कारखाने, मलोट व गिद्दड़बाहा नगर कौंसिलों व लहरा मोहब्बत ताप बिजली की आग बुझाने वाली गाड़ीयां मौके पर पहुंच गई।</p>
<h4>आग को बुझाने में समूह फायर टैंडर बेबस</h4>
<p style="text-align:justify;">आग इतनी ज्यादा भयानक थी कि ऊं ची ऊंची लपटें निकल रही थी। आग को बुझाने में समूह फायर टैंडर बेबस नजर आ रहे थे। कुछ समय पश्चात फायर टैंडरों के प्रयासों से आग शांत हो गई परंतु आखिरी समाचार लिखे जाने तक फैक्ट्री पूरी तरह सुलग रही थी। सब फायर अधिकारी मक्खन राम ने बताया कि गत्ता फैक्ट्री में गत्तो के लंबे रोल तैयार किए जाते थे, जिस कारण आग पर काबू पाने में मुश्किल आई है। उन्होंने बताया कि पूरी रात की जद्दोजहद के बाद में आग पर काबू पाया गया है। उन्होंने बताया कि अब भी जेसीबी मशीनों से जले हुए सामान को उल्टा कर पानी फेंका जा रहा है ताकि फिर से आग ने भड़के।</p>
<p style="text-align:justify;">बीस करोड़ के नुक्सान का अन्दाजाफैक्ट्री के मालिक मुनीश मित्तल का कहना था कि इस भयानक अग्निकांड में उन का करीब 20 करोड़ का नुक्सान हो गया है। उन्होंने कहा कि आग रात के समय लगी, जिस कारण कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है  फैक्ट्री पूरी तरह तबाह: एसडीएम एसडीएम भटिंडा साक्षी साहनी का कहना था कि आग कारण इमारत पूरी तरह तबाह हो गई है परंतु प्रशासनिक ब्लाक का बचाव हो गया है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री मालिकों ने फैक्ट्री का मुकम्मल बीमा करवाया हुआ है और वह खुद ही नुक्सान का अनुमान लगा रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Oct 2017 06:29:33 +0530</pubDate>
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                <title>स्टेशनरी शॉप में लगी भयंकर आग</title>
                                    <description><![CDATA[शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादारों ने पाया आग पर काबू राएकोट(राम गोपाल )। रविवार सुबह 10 बजे के करीब स्थानीय मालेरकोटला रोड बाइपास पर स्थित ‘सिंगला बैग हाउस’, जो कि प्लास्टिक व स्टेशनरी का कारोबार बड़े स्तर पर करते हैं, की दुकान में आग लग गई, जिससे दुकान में रखा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fire-in-stationery-shop/article-2345"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/fire-6.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;"><strong>शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादारों ने पाया आग पर काबू</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>राएकोट(राम गोपाल )।</strong> रविवार सुबह 10 बजे के करीब स्थानीय मालेरकोटला रोड बाइपास पर स्थित ‘सिंगला बैग हाउस’, जो कि प्लास्टिक व स्टेशनरी का कारोबार बड़े स्तर पर करते हैं, की दुकान में आग लग गई, जिससे दुकान में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। आगजनी के बारे में जैसे ही शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंंग के सेवादारों को पता लगा तो वे घटनास्थल पर पहुंच कर आग बुझाने में जुट गए।</p>
<p style="text-align:justify;">दुकान मालिक दविन्दर कुमार सिंगला के भाई राकेश कुमार सिंगला ने बताया कि जब वह सुबह दुकान पर आए तो उनकी ओर से दुकान खोल कर बिजली का स्विच आॅन करने के थोड़ी देर बाद ही दुकान के अंदर से धुआं बाहर आने लगा। जब तक वह कुछ समझ पाते धुआं आग की लपटों में बदल गया। इसके बाद उन्होंने जगराओं फायर ब्रिगेड को फोन किया। देखत ही देखते आग तेज हो गई।</p>
<h2>आगजनी से लाखों का नुकसान</h2>
<p>आसपास के लोग व शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादार टिंकू इन्सां, बिक्कर सिंह इन्सां, सेवक इन्सां, सुरजीत सिंह इन्सां, गग्गी इन्सां व अन्य उपस्थित लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाना शुरू कर दिया व स्थानीय मार्केट समिति का पानी का टैंकर भी पहुंच गया व लोग टैंकों में पानी लेकर आग को काबू करने में जुट गए। 40-45 मिनटों बाद नगर कौंसिल जगराआें व एयर फोर्स स्टेशन हलवारा की फायर बिग्रेड गाड़ियां पहुंच गई जिन्होंने आग पर काबू पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">दुकानदार राकेश कुमार सिंगला ने कहा कि उनका सब कुछ जल कर राख हो गया है व नुकसान का अंदाजा 30 -35 लाख तक का है। आग लगने संबंधी स्थानीय थाना सिटी के प्रमुख जरनैल सिंह ने कहा कि अब तक जो पता लगा है उससे लगता है कि यह आग बिजली के शॉर्ट-सर्किट कारण लगी है बाकी जांच चल रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कौंसिल के प्रति रोष</h2>
<p style="text-align:justify;">रायकोट के लिए प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर हुई फायर बिग्रेड की गाड़ी नगर कौंसिल द्वारा तैनात न किए के जाने के कारण घटनास्थल पर उपस्थित लोगों में भारी गुस्सा था। लोगों का कहना था कि अगर रायकोट में फायर बिग्रेड होती तो इस दुर्घटना के नुकसान से बचाया जा सकता था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कौंसिल के पास साधनों की कमी: अधिकारी</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी नगर कौंसिल के कार्यकारी अधिकारी बलबीर सिंह ने कहा कि नगर कौंसिल अपने वित्तीय हालात को देखते हुए फायर बिग्रेड रखने में समर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि इस गाड़ी के लिए अलग शिफ्टों के लिए कई कर्मचारियों की जरूरत है और इसका मासिक खर्च दो-सवा दो लाख के करीब होगा और नगर कौंसिल के पास ऐसे कोई वित्तीय साधन नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 20:21:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दार्जिलिंग बंद और हिंसा में 800cr का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[दार्जिलिंग: पश्चिम बंगाल से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर बीते एक महीने से दार्जिलिंग में बंद और हिंसा जारी है। जिसके चलते यहां करीब 800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। रात के वक्त गैंग खाने-पीने की दुकानें लूट रहे हैं। हालिया हिंसा के बाद ममता सरकार ने सेना को दोबारा तैनात किया। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/800-crore-lose-in-darjeeling-violence/article-2204"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/darjling.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दार्जिलिंग:</strong> पश्चिम बंगाल से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर बीते एक महीने से दार्जिलिंग में बंद और हिंसा जारी है। जिसके चलते यहां करीब 800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। रात के वक्त गैंग खाने-पीने की दुकानें लूट रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया हिंसा के बाद ममता सरकार ने सेना को दोबारा तैनात किया। इस हिंसा में अब तक सात युवकों की मौत हो गई है। जून-जुलाई में दार्जिलिंग की सड़कें और होटल टूरिस्ट्स से भरे रहते हैं। यहां की खूबसूरती को हर कोई अपने कैमरे में ताउम्र संभालकर रखना चाहता है। लेकिन यह नजारा गुम हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां बाजार बंद हैं। सड़कें सूनी हैं और होटलों में भी ताले जड़े हुए हैं। बिल्कुल कर्फ्यू जैसा माहौल है। यह कहते हुए दार्जिलिंग की गलियों में हैंडीक्राफ्ट बेचने वाले बिपिन सुबक पड़ते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">100 साल से भी पुरानी है गोरखालैंड की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">यहां के लोगों का कहना है कि अलग गोरखालैंड की उनकी मांग सौ साल से भी पुरानी है। मगर इस बार 8 जून को आए ममता सरकार के एक आदेश ने हालात बिगाड़ दिए। सरकार ने 10वीं क्लास तक बांग्ला भाषा की पढ़ाई को जरूरी करने का आदेश दिया,जबकि यहां के लोगों की मूल भाषा नेपाली है। हालांकि बाद में नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा गया कि यह आदेश वॉलेंटरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 23:01:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पटाखा गोदाम में धमाका,भारी नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[नजदीकी घरों की उड़ी छतें दो दर्जन से अधिक घायल ,कईयों की हालत गंभीर संगरूर(गुरप्रीत सिंह)। सुनाम के नीलोवाल रोड पर स्थित पटाख़ों वाले गोदाम में जोरदार धमाका होने के कारण दो दर्जन से अधिक व्यक्तियों के घायल होने का समाचार है। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास कई घरों की छतें हिल गई और घरों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/blast-in-fireworks-warehouse/article-1162"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/blast1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">नजदीकी घरों की उड़ी छतें</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>दो दर्जन से अधिक घायल ,कईयों की हालत गंभीर</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर(गुरप्रीत सिंह)। </strong>सुनाम के नीलोवाल रोड पर स्थित पटाख़ों वाले गोदाम में जोरदार धमाका होने के कारण दो दर्जन से अधिक व्यक्तियों के घायल होने का समाचार है। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास कई घरों की छतें हिल गई और घरों के बड़ी संख्या लोग घायल हो गए। गोदाम में हुए जोरदार धमाके के कारण पूरा सुनाम शहर दहशत में आ गया और लोग अपने-अपने घरों से बाहर आ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनाम से नीलोवाल गांव को जाते रोड पर स्थित पटाखों वाले गोदाम में आज देर शाम एक के बाद एक धमाके हुए , जिस कारण सारा गोदाम मलबे के ढेर में तबदील हो गया और आसपास के कई मकान ढह गए और कई राहगीर भी इस धमाके की चपेट में आ गए। अचानक हुए इस धमाके के कारण लोग बुरी तरह सहम गए। धीरे-धीरे खून में लथपथ हुए लोग बाहर को भागने शुरू हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">
सुनाम के सरकारी अस्पताल के सूत्रों के अनुसार वहां 20 से ज्यादा घायल पहुंच चुके थे जिनमें कईयों की हालत गंभीर होने के कारण उनको पटियाला के लिए रैफर किया गया है।घटना की सूचना मिलते ही सदर सुनाम और सिटी सुनाम की पुलिस मौके पर पहुंच गई और तुरंत जेसीबी मशीनों के साथ बड़े स्तर पर फैले मलबे को उठाना शुरू कर दिया। फिलहाल हादसे के कारण का पता नहीं चल पाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 23:47:18 +0530</pubDate>
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