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                <title>World Day Against Child Labour - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>World Day Against Child Labour RSS Feed</description>
                
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                <title>End Child Labour : &amp;#8221;बाल श्रम पर लगे पूरी तरह प्रतिबंध&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[End Child Labour : हरिओम बाबा ने कला प्रदर्शन कर किया जागरूक भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस (World Day Against Child Labour) पर विशेष कला प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कलाकार हरिओम बाबा ने अपनी प्रभावशाली कला के माध्यम से लोगों को बाल श्रम की गंभीर समस्या के प्रति जागरूक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/complete-ban-on-child-labour/article-58613"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/end-child-labour.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">End Child Labour : हरिओम बाबा ने कला प्रदर्शन कर किया जागरूक</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस (World Day Against Child Labour) पर विशेष कला प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कलाकार हरिओम बाबा ने अपनी प्रभावशाली कला के माध्यम से लोगों को बाल श्रम की गंभीर समस्या के प्रति जागरूक किया। इस आयोजन में बाल कलाकार समीर सुनसुना, जय और रोहित ने मॉडल की भूमिका निभाई, जिसने प्रदर्शन को और भी अधिक प्रभावशाली बना दिया। हरिओम बाबा ने अपने प्रदर्शन में यह दर्शाया कि कैसे छोटे बच्चों को श्रम में धकेल दिया जाता है और उन्हें शिक्षा से वंचित कर दिया जाता है। उनकी कला ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि बच्चों के हाथों में मजदूरी के बजाय किताबें होनी चाहिए। Bhiwani News</p>
<p style="text-align:justify;">हरिओम ने अपनी कला के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया कि बच्चों को पढ़ाई का मौका मिलना चाहिए ताकि वे अपने जीवन में सफल हो सकें और एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ सकें। समीर सुनसुना, जय और रोहित ने मॉडल की भूमिका निभाते हुए बच्चों की वास्तविक स्थिति को दर्शाया। उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया और बाल श्रम के खतरों को स्पष्ट रूप से उजागर किया।</p>
<h3>समीर सुनसुना व जय और रोहित ने निभाई मॉडल की भूमिका</h3>
<p style="text-align:justify;">इन बाल कलाकारों ने अपनी अदाकारी से यह संदेश दिया कि बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए और उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाया जाना चाहिए। इस कला प्रदर्शन के दौरान, हरिओम बाबा ने न केवल बाल श्रम के खतरों को उजागर किया, बल्कि यह भी बताया कि समाज के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है कि वे इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने यह संदेश दिया कि बच्चों को श्रम के दलदल से निकालकर शिक्षा की मुख्यधारा में लाना अत्यंत आवश्यक है। Bhiwani News</p>
<p>दर्शकों ने हरिओम बाबा की कला से गहराई से प्रभावित होकर बाल श्रम के खिलाफ खड़ा होने का संकल्प लिया। हरिओम बाबा ने अपनी कला के माध्यम से समाज को जागरूक करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाल श्रम पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और जहां भी ऐसा होता है, वहां सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम को समाप्त करना और बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करना था। उनकी इस पहल ने लोगों को बाल श्रम के प्रति जागरूक किया और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। Bhiwani News</p>
<p><a title="Aadhar Update for Free: इस तारीख तक मुफ्त हो रहा आधार अपडेट! बाद में लगेंगे पैसे!" href="http://10.0.0.122:1245/aadhaar-update-is-free-till-this-date-it-will-cost-money-later/">Aadhar Update for Free: इस तारीख तक मुफ्त हो रहा आधार अपडेट! बाद में लगेंगे पैसे!</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jun 2024 18:18:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>World Child Labor Prohibition Day: एक भारतीय के प्रयास से हुई अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। World Child Labor Prohibition Day: अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत वर्ष 2002 में एक भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ा है। श्री सत्यार्थी ने इस मुद्दे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/international-child-labor-prohibition-day-started-with-the-efforts-of-an-indian/article-48716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/world-child-labor-prohibition-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>World Child Labor Prohibition Day: अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत वर्ष 2002 में एक भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ा है। श्री सत्यार्थी ने इस मुद्दे को लेकर विभिन्न देशों में एक सशक्त अभियान चलाया और आम जनता से लेकर राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रप्रमुखों, राजा – रानियों और महाराजा- महारानियों का समर्थन प्राप्त किया। करोड़ों बच्चों के शोषण के खिलाफ और उनके अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के लिए वर्ष 2014 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">सत्यार्थी ने बाल श्रम के बारे में दुनिया को जागरूक करने और उसे एक गंभीर अपराध के तौर पर स्वीकार करने को लेकर वर्ष 1998 में ‘ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ यानी वैश्विक जन जागरूकता यात्रा की शुरूआत की थी। यह यात्रा 17 जनवरी, 1998 को फिलीपींस के मनीला से शुरू हुई और छह जून, 1998 को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में समाप्त हुई। करीब पांच महीने तक चली इस यात्रा में सत्यार्थी के साथ 36 बच्चे भी थे ,जिन्होंने कभी बाल मजदूर के रूप में काम किया था। इस यात्रा को करीब डेढ़ करोड़ लोगों का व्यापक समर्थन भी प्राप्त हुआ। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा की दो प्रमुख मांगें बाल श्रम के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने और साल में एक विशेष दिन बाल मजदूरों को समर्पित करने की थी। यह यात्रा छह जून, 1998 को जब जेनेवा पहुंची तो उस समय संयुक्त राष्ट्र भवन में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- आईएलओ का एक महत्वपूर्ण वार्षिक सम्मेलन चल रहा था। इस सम्मेलन में 150 से अधिक देशों के मंत्री और प्रतिनिधि सहित 2,000 से अधिक व्यक्ति मौजूद थे। इन सबके बीच जब संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के गलियारे इन बच्चों के नारों और मांगों से गूंज उठे। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">आईएलओ ने अपनी परंपरा को तोड़ते हुए इतिहास में पहली बार एक सामाजिक कार्यकर्ता श्री सत्यार्थी और दो बच्चों को बाल श्रम, बाल दासता, बाल वेश्यावृत्ति और तस्करी के बारे में अपनी बात रखने का अवसर दिया। वैश्विक जन जागरूकता यात्रा के एक साल बाद यानी 17 जून, 1999 को बाल श्रम उन्मूलन के लिए आईएलओ समझौता- 182 पारित किया गया। इसपर बहुत ही कम समय में संयुक्त राष्ट्र के सभी 187 देशों ने अपने हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही बाल श्रम निषेध को लेकर एक विशेष दिन घोषित किए जाने की मांग को भी मान लिया गया‌। वर्ष 2002 में इसकी घोषणा की गई कि अब से हर साल 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाएगा। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बाल श्रम रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1986 में बाल श्रम(निषेध और विनियमन) अधिनियम लागू किया। इससे कालीन निर्माण, चूड़ी बनाने, पटाखा फैक्ट्री, सर्कस, ताला उद्योग, पीतल के बर्तन बनाने, खेती के काम, साड़ी कढ़ाई, ईंट भट्ठों और घरों काम में कम कर रहे बच्चों को बचाया गया। लेकिन अभी तक कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय कानून या ढांचा नहीं था,जो बच्चों से मजदूरी कराने, उनकी तस्करी और उन्हें वेश्यावृत्ति या दूसरे खतरनाक कामों में धकेलने से रोकता हो। World Child Labor Prohibition Day</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 13:21:02 +0530</pubDate>
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