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                <title>Universe - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>रहस्यों, सवालों, संभावनाओं से भरा है ब्रह्माण्ड</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रह्मांड को यदि रहस्यों, संभावनाओं एवं प्रश्नों का पिटारा कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वैज्ञानिकों द्वारा ब्रह्मांड की उत्पत्ति के विषय में दिया गया सर्वमान्य सिद्धांत यह कहता है कि लगभग चौदह अरब वर्ष पूर्व ऊर्जा एवं द्रव्य एक अति उच्च ताप एवं घनत्व के बिंदु के रूप में संघनित था। इस बिंदु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/the-universe-is-full-of-mysteries-questions-possibilities/article-48773"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/universee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ब्रह्मांड को यदि रहस्यों, संभावनाओं एवं प्रश्नों का पिटारा कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वैज्ञानिकों द्वारा ब्रह्मांड की उत्पत्ति के विषय में दिया गया सर्वमान्य सिद्धांत यह कहता है कि लगभग चौदह अरब वर्ष पूर्व ऊर्जा एवं द्रव्य एक अति उच्च ताप एवं घनत्व के बिंदु के रूप में संघनित था। इस बिंदु में महाविस्फोट के परिणामस्वरूप ब्रह्मांड का अस्तित्व में आना संभव हुआ। इस विस्फोट को बिगबैंग के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष बात तो यह है कि उत्पत्ति के बाद से लेकर ब्रह्मांड का प्रसार अनवरत रूप से जारी है। इस बात की पुष्टि विभिन्न गैलेक्सियों के लिए मापे गए डॉप्लर विस्थापन के विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के लाल भाग में स्थित होने से हो जाती है। उच्च ताप व घनत्व के बिंदु में हुए महाविस्फोट का नतीजा यह हुआ कि ऊर्जा एवं द्रव्य चारो ओर फैलने लगे। संभवत: यह ऊर्जा इतनी उच्च रही होगी कि आज भी ब्रह्मांड उसी ऊर्जा से जनित बल के द्वारा स्वयं का विस्तार कर रहा है।</p>
<h3>ब्रह्मांड पर अनवरत रूप से शोध कार्य जारी | (Universe)</h3>
<p style="text-align:justify;">द्रव्य के इधर-उधर बिखरने के फलस्वरूप विभिन्न आकाशीय पिंडों का जन्म हुआ जिन्हें हम तारा, ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह इत्यादि के रूप में जानते हैं। ब्रह्मांड पर अनवरत रूप से शोध कार्य जारी है एवं समय-समय पर विभिन्न रोचक जानकारियां इन शोधकार्यों के नतीजों के रूप में प्रकाशित होती रहती हैं। यदि सर्वाधिक प्रचलित एवं मान्य होने के कारण बिगबैंग सिद्धांत पर विश्वास कर लिया जाए तो भी केवल आदि अर्थात आरंभ के रहस्य की गुत्थी सुलझ पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के द्वारा 2040 में मंगल की धरती पर इंसान के द्वारा पहला कदम रखे जाने का एलान किया गया है। यह भी बताया गया है कि इस मिशन हेतु सेतु के रूप में चंद्रमा पर एक कार्यालय भी बनाया जाएगा। प्रथम चरण के तहत अंतरिक्ष यात्री 2033 में मंगल की परिक्रमा करेंगे एवं 7 वर्ष के उपरांत मंगल की सूनी किंतु उम्मीदों से भरी हुई धरती पर मानव के कदम पड़ना संभव होगा।</p>
<h3>तारे के अंत का अर्थ है- उसके सौरमंडल का भी अंत</h3>
<p style="text-align:justify;">नासा की यह घोषणा निस्संदेह भविष्य में पृथ्वी के अतिरिक्त किसी अन्य ग्रह पर भी मानव जीवन को पूर्णरूपेण विकसित करने की संभावना हेतु आशा की किरण जगाती है। एक नवीनतम शोध में यह खुलासा हुआ है कि किसी तारे के अंत का सीधा सा अर्थ है- उसके सौरमंडल का भी अंत।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं के द्वारा यह देखा गया कि अक्विला नक्षत्र के एक तारे के द्वारा अपने ईंधन की समाप्ति पर आकार में वृद्धि करते हुए अपने निकट परिक्रमा करने वाले ग्रहों को आत्मसात कर लिया गया। इससे यह निश्चित है कि भविष्य में जब कभी पृथ्वी से 15 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित सूर्य का अंत होगा तो हमारी पृथ्वी भी उसमें समा जाएगी। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि कहीं न कहीं पृथ्वी के भविष्य की एक झलक इस घटना के द्वारा मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज इंसान को चांद पर पहुंचाने के लिए अरबपतियों के बीच प्रतिस्पर्धा लगी हुई है। एलन मस्क एवं जेफ बेजोस के साथ नासा ने 2029 में लांच होने वाले आर्टेमिस मिशन के लिए 3.4 बिलियन डालर का समझौता किया है। बहरहाल पृथ्वी के बाद वर्तमान में यदि कहीं जीवन की संभावना नजर आती है तो वह है -मंगल ग्रह। मंगल पर महासागरों के ठोस सबूत मिले हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अतीत में मंगल पर नदियां एवं झीलें मौजूद थीं। (Universe)</p>
<p style="text-align:justify;">मंगल के उत्तरी गोलार्ध में महासागर का प्रमाण मिला है। इन सब प्रमाणों से एक प्रश्न निश्चित रूप से शोध का विषय बन जाता है कि क्या कभी मंगल पर जीवन मौजूद था। इस प्रश्न के उत्तर की तलाश के साथ-साथ भविष्य में मंगल पर जीवन की क्या संभावनाएं हैं, इस पर वैज्ञानिकों का शोध निरंतर जारी है। संभवत: कभी वह शुभ घड़ी आए जब मंगल पर मानव बस्ती बसाने का सपना साकार हो सके।<br />
शिशिर शुक्ला</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2023 18:38:52 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रह्मांड से जुड़े अनूठे तथ्य</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रह्मांड में अब तक 19 अरब आकाशगंगाएं होने का अनुमान है। सभी आकाशगंगाएं एक-दूसरे से दूर हटती जा रही हैं। 19 अरब आकाशगंगाओं में से हमारी आकाशगंगा है-मिल्की वे आकाशगंगा। मिल्की वे आकाशगंगा में हमारी पृथ्वी और सूर्य हैं। मिल्की वे की उम्र 13.2 अरब वर्ष बताई जाती है यानी ब्रह्मांड की उम्र जितनी। सूर्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/unique-facts-about-the-universe/article-87180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/galaxy.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>ब्रह्मांड में अब तक 19 अरब आकाशगंगाएं होने का अनुमान है। सभी आकाशगंगाएं एक-दूसरे से दूर हटती जा रही हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>19 अरब आकाशगंगाओं में से हमारी आकाशगंगा है-मिल्की वे आकाशगंगा। मिल्की वे आकाशगंगा में हमारी पृथ्वी और सूर्य हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मिल्की वे की उम्र 13.2 अरब वर्ष बताई जाती है यानी ब्रह्मांड की उम्र जितनी। सूर्य इस ब्रह्मांड का चक्कर लगभग 26,000 वर्षों में पूरा करता है जबकि अपनी धुरी पर सूर्य एक महीने मे एक चक्कर लगाता है। आकाश गंगा का प्रवाह उत्तर से दक्षिण की ओर है। हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी की गति 552 किमी प्रति सेकंड है। सोलर एक्लिप्स (सूर्यग्रहण) के दौरान पृथ्वी का तापमान 6 डिग्री तक भी गिर सकता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>शुक्र अपनी धुरी पर एक चक्कर पृथ्वी के 243 दिन में लगाता है जबकि सूर्य की परिक्र मा 225 दिन में करता है अर्थात एक दिन एक वर्ष से ज्यादा।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पृथ्वी का भार हर दिन बढ़ रहा है क्योंकि अंतरिक्ष से हर दिन करीब 27 टन धूल धरती पर गिरती है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हर पूर्णिमा पर चांद एक ही दिशा से दिखाई देता है। उसके पीछे की सतह कभी भी नहीं देखी जा सकती। पूरा चाँद आधे चाँद से करीब 9 गुना ज्यादा तेज चमकता है।</strong></li>
</ul>
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                <pubDate>Thu, 15 Dec 2022 10:30:55 +0530</pubDate>
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