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                <title>परेशानी का सबब बने टिड्डी दल</title>
                                    <description><![CDATA[टिड्डी नया या आधुनिक कीट नहीं है। ईसा के समय में भी इस प्रवासी कीट के होने के प्रमाण मिलते हैं। 1422 ई. से 1411 ईसा पूर्व होरेमबए प्राचीन मिस्र के कब्र कक्ष में टिड्डी का उल्लेख मिलता है। प्राचीन मिस्रियों ने 2470 से 2220 ईसा पूर्व की अवधि में कब्रों पर टिड्डी की नक्काशी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/grasshopper-became-trouble/article-12536"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/grasshopper.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">टिड्डी नया या आधुनिक कीट नहीं है। ईसा के समय में भी इस प्रवासी कीट के होने के प्रमाण मिलते हैं। 1422 ई. से 1411 ईसा पूर्व होरेमबए प्राचीन मिस्र के कब्र कक्ष में टिड्डी का उल्लेख मिलता है। प्राचीन मिस्रियों ने 2470 से 2220 ईसा पूर्व की अवधि में कब्रों पर टिड्डी की नक्काशी की थी। कुरान में भी कई जगह टिड्डियों के स्थानों का उल्लेख मिलता है। नौवी शताब्दी ईसा पूर्व चीन अधिकारियों ने टिड्डे विरोधी अधिकारियों को नियुक्त किया था। महान युनानी दार्शनिक व राजशास्त्री अरस्तु ने भी टिड्डी के प्रजनन और उसकी आदतों का उल्लेख किया है।</h3>
<h3 style="text-align:justify;">एन.के. सोमानी</h3>
<h4 style="text-align:justify;">पाकिस्तान से आए प्रवासी टिड्डियों के दल ने राजस्थान के 10 जिलों में तबाही मचा दी है। सीमांत क्षेत्र में टिड्डियों के प्रकोप से परेशान किसान अपनी आंखों के सामने हाडतोड़ मेहनत से तैयार फसलों को बरबाद होते देख रहे हंै। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों के लगभग 850 गांव के 90 हजार किसान प्रभावित हुए है, तथा 1.55 लाख हैक्टेयर फसल का नुक्सान प्राम्भिक सर्वे में सामने आया है। सरसों, तारामीरा तथा गेहूं की फसल को टिड्डियों ने नुकसान पहुंचाया है। राजस्थान के साथ-साथ पड़ोसी राज्य गुजरात के भी कई जिलों में टिड्डी के हमले से फसल खत्म होने के समाचार आ रहे हैं। राजस्थान व अन्य राज्यों सहित देश में अब तक 15 बार टिड्डी दलों का आक्रमण हो चुका है। सरकार व कृषि अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा है कि खेत, फसल व भूमि पुत्रों के दुश्मन इस ‘घुसपैठिये’ से आखिर कैसे निपटा जाए। हालांकी कृषि पर्यवेक्षकों सहित कृषि विभाग के आला अधिकारियों द्वारा गांव-गांव जाकर टिड्डियों को भगाने के उपाय बताए जा रहे हैं।<br />
राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगगांनगर सिरोही, जालोर व बीकानेर में टिड्डी दलों का हमला होता रहा है। इस बार पहला टिड्डी दल मई के आखिरी सप्ताह में देखा गया था। उसके बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने रात-दिन अभियान चला दवा छिड़काव कर इन पर काबू पाया था, लेकिन अब एक बार फिर बड़ी संख्या में टिड्डियों के हमले ने सरकार व किसानों की नींद उड़ा दी है। इस साल राज्य के चार जिलों में 1 लाख 38 हजार 585 हेक्टेयर भूमि पर अब तक 96 हजार 748लीटर दवा छिड़की जा चुकी है, फिर भी किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।<br />
विकीपिडिया के अनुसार टिड्डी ऐक्रिडाइइडी परिवार आर्थाप्टेरा गण का कीट है। हेमिप्टेरा गण के सिकेडा वश का कीट भी टिड्डी या फसल टिड्डी कहलाता है। इसे लघुश्रृंगीय टिड्डा भी कहा जाता है। पूरी दुनिया में इसकी केवल छह प्रजातियॉं पाई जाती हैं। यह प्रवासी कीट है, और इसकी उड़ान दो हजार मील तक पाई जाती है। टिड्डी दल अक्सर असंतुलित जलवायु वाले स्थानों पर पाया जाता है कैस्पियन सागर, ऐरेंल सागर तथा बालकश झील में गिरने वाली नदियों के बालू से घिरे डेल्टा को टिड्डीयों का निवास स्थान कहा जाता है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में बरसात कम या अधिक होती है, उस मरूभूमि में पाए जाने वाले घास के मैदानों में भी टिड्डीयां पाई जाती है। वैज्ञानिक अनुसंधानों में पता चला है कि टिड्डी दल पहले पूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया, सोमालिया, मोरोक्को, मोरिटानिया के साथ-साथ अरब देश यमन के अंदर तबाही मचाकर भारत की और रूख करते हैं। यह हिंद महासगर के रास्ते भारत और पाकिस्तान में प्रवेश करती है।<br />
एक टिड्डी दल में लाखों की संख्या में टिड्डियां होती हैं, और जहां भी यह दल पड़ाव डालता है, वहां फसलों तथा अन्य वनस्पतियों को चट कर जाता है। इसके आक्रमण से खेतों को भारी नुक्सान पहुंचता है। वैज्ञानिकों की माने तो एक कीट अपने वजन के बराबर फसल खा जाता है, इसका वजन 2 ग्राम होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए हवाई जहाज से विषैली औषधियों का छिड़काव, विषेला चारा, हेक्साक्लोराइड के विलयन में भीगी हुई गेहूँ की भूसी का फैलाव किया जाता है। लेकिन यह सभी साधन अत्यत खर्चिले होने के कारण लोग टिड्डियों को भगाने के लिए थाली-पिंपे के शोर या धुआं करने जैसे अन्य पंरपरागत साधनों का सहारा लेते है। इससे पहले जुलाई-अक्टूबर 1993 में टिड्डी दलों ने राजस्थान में बड़ा हमला किया था और हजारों हेक्टयर में फसल तथा वनस्पति को बर्बाद कर दिया था। उस वक्त टिड्डियों के आक्रमण से खेतों में खड़ी मूंग, बाजरा, मोठ, तिल, ग्वार की फसल को नुकसान हुआ था। ग्रामीण बताते हैं कि 1993 की टिड्डी का आकार आज की टिड्डी से बड़ा था। इसके बाद वर्ष 1998 में टिड्डी दल ने राजस्थान में बड़ा नुकसान पहुंचाया था। कहा तो यह भी जाता है कि जब-जब देश के भीतर टिड्डी ने आक्रमण किया है, तब-तब देश में अकाल की स्थिति बनी है। राजस्थान के साथ-साथ गुजरात के बनासकांठा जिले में टिड्डियों के आक्रमण से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। धानेरा मंडल में अभी भी टिड्डियों का आतंक जारी है। गुजरात के बनासकांठा, साबरकांठा, पाटण, एवं महेसाणा मंडल में टिड्डियों ने छह हजार से भी अधिक हेक्टेयर में फसलों को तबाह कर दिया है। यहां टिड्डियों ने राई, एरंडा, गेहूँ और कपास सहित विविध फसलों को नष्ट किया है।<br />
जोधपुर जिले के कई गांवों मेंं खेतों में खड़ी फसलों को टिड्डी दल ने चट कर दिया है। जोधपुर जिले में पिछले चार दिनों से बाप, फलोदी, शेरगढ, बालेसर व लूणी उपखंड के दर्जनों गांवों में किसानों की फसलों को टिड्डियों ने चट कर डाला है। बाड़मेर जिले में पाकिस्तान से लगती सीमा से टिड्डियों के आने का क्रम जारी है। पिछले दो दिन में तीन बडे़ दल पाक से भारत में घुसे हैं। श्रीगांनगर के अनुपगढ़ क्षेत्र में भी टिड्डी दल का आतंक जारी है। घड़साना उपखंड के दो दर्जन से अधिक चक टिड्डी दल के आक्रमण से प्रभावित हुए हैं। बाड़मेर जिले में पाकिस्ताल से लगती सीमा से टिड्डियों के आने का क्रम जारी है। पिछले दो दिन में तीन बडे़ दल पाक से भारत में घुसे हैं।<br />
टिड्डियों के प्रकोप से वह किसान सबसे ज्यादा चिंतित है, जो पहले से ही कर्ज में डूबे हुए हैं। ऐसे में अगर उनकी फसलें टिड्डी दल का शिकार होती हैं, तो उनकी माली हालात खराब हो जाएगी। दूसरी ओर बीमा कंपनी के नियम भी किसानों की तकलीफ को बढ़ाने वाले हैं। फसल बीमा में व्यक्तिगत स्तर पर क्लेम का प्रावधान नहीं है। ऐसे में किसी पटवार सर्किल में 50 फीसदी या इससे अधिक खराबा होने पर ही उस इलाके के किसानों को क्लेम मिल पाता है। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीमांत क्षेत्र में टिड्डियों के प्रकोप से फसल खराबे का जायजा लेने के लिए बाड़मेर, जालोर, एवं जैसलमेर का दौरा कर सात दिन में गिरदावरी करने के निर्देश दिए है। उधर, पाकिस्तान ने भी देर से ही सही अब टिड्डियों पर नियंत्रण करने के लिए हवाई छिड़काव करने की तैयारी की है। सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने सोमवार को कृषि मंत्रालय से कहा कि रेगिस्तानी इलाके में स्प्रे करने के लिए कई विमान किराए पर लेने के निर्देश दिए है। जिससे प्रजनन काल की शुरूआत से पहले ही उन क्षेत्रों में टिड्डियों को मिटाया जा सके। उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकार व पड़ोसी देश के संयुक्त प्रयासों के चलते जल्द ही हमारा अन्नदाता काले-पीले पखंधारी ‘घुसपैठिये’ के भय से मुक्त होगा।</h4>
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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2020 20:30:05 +0530</pubDate>
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                <title>सफेद चादर में लिपटा शहर, सड़कों पर रेंगते दिखे वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[-विद्यार्थियों के लिए कोहरा बना मुसबीत भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। जिस मकर सक्रांति के बाद ठंड का अवसान माना जाता है, उस मकर सक्रांति के बाद इस बार ठंड ने फिर दस्तक दी है। पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी का असर भिवानी में भी देखने को मिला। भिवानी में शुक्रवार को कोहरे की सफेद चादर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>-विद्यार्थियों के लिए कोहरा बना मुसबीत</h2>
<p><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिस मकर सक्रांति के बाद ठंड का अवसान माना जाता है, उस मकर सक्रांति के बाद इस बार ठंड ने फिर दस्तक दी है। पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी का असर भिवानी में भी देखने को मिला। भिवानी में शुक्रवार को कोहरे की सफेद चादर वातावरण में बिछी नजर आ रही थी। कोहरे की चादर से वातावरण लिपटा होने की वजह से वाहन चालक खासे परेशान दिखे तो दूसरी ओर आमजन भी कोहरे से एवं ठंड से बचाव के लिए अलाव सहारा लेते नजर आए। वही यह मौसम किसानों की फसलों के लिए काफी हद तक वरदान बन रहा है। वही कोहरा विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बना हुआ है। विद्यार्थी ठंड में ठिठुरते स्कूल जाते देखे गए। भिवानी में एक बार फिर से ठंड व कोहरे की दस्तक से लोगों की समस्याएं बढ़ी हैं। वाहन चालको को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो वही पशुपालकों की भी चिंता बढ़ी हुई है। यह मौसम अधिकतर बुजर्गों व बच्चों के लिए नुकसानदायी साबित हो सकता है। कोहरे के कारण विद्यार्थी भी जकड़े हुए नजर आए।</p>
<h2>बुजुर्ग और बच्चों के लिए भी मुसबीत</h2>
<p>भिवानीवासियों का कहना है कि एक सप्ताह से मौसम काफी धूप वाला था, मगर फिर से कोहरे के कारण काम-काज में तो बाधा आ रही है, घर से निकलना भी दूभर हो रहा है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा समस्या तो वाहन चलाते समय आती है, क्योंकि कोहरे के कारण 10 मीटर की दूरी पर दूसरा वाहन भी दिखाई नही देता, जिससे दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है। उन्होंने बताया कि अधिक ठंड और कोहरे से पशुओं की भी भी नुकसान हो सकता है और यह बुजुर्ग और बच्चों के लिए भी मुसबीत बन रहा है। वही स्कूली छात्रों ने बताया कि कोहरे के कारण उन्हे स्कूल जाने में काफी दिक्कत महसूस हो रही है। वही किसानों ने कोहरे फसलों के लिए काफी हद तक लाभकारी बताया।<br />
फोटो: 18बीडब्ल्यूएन, 1 : ठिठुरती हुई स्कूल जाती छात्राएं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jan 2019 13:50:16 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सपा-बसपा गठबंधन से मुश्किल में कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[देश को सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीट देने वाले उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाथ मिला लिया है। मसलन अब बुआ-भतीजा लोकसभा की धुरी माने जाने वाले इस प्रदेश में अपना दौर चलाएंगे। दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगें। कांग्रेस पर कृपा करते हुए अमेठी राहुल गांधी और रायबरेली सीटें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">देश को सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीट देने वाले उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाथ मिला लिया है। मसलन अब बुआ-भतीजा लोकसभा की धुरी माने जाने वाले इस प्रदेश में अपना दौर चलाएंगे। दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगें। कांग्रेस पर कृपा करते हुए अमेठी राहुल गांधी और रायबरेली सीटें सोनिया गांधी के लिए छोड़ दी हैं। यह दया कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किए बिना ही बरती गई है। कांग्रेस 2014 के चुनाव में 7.53 फीसदी मत प्राप्त कर महज दो सीटें जीत पाई थी, जिनमें एक राहुल और एक सोनिया की थी। हालांकि मायावती और अखिलेश यादव ने जिस ढंग से कांग्रेस की उपेक्षा की है, उससे लगता यही है कि अब कांग्रेस पूरे देश में अकेली रहकर हिंदी क्षेत्र में चुनाव लड़ने की रणनीति बनाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों में सत्ता खोने के बाद भाजपा ने सबक लेते हुए गठबंधन का धर्म उदारता से निभाने का संकेत दिया है। बिहार में जदयू और लोजपा के साथ लोकसभा की सीटों के बंटवारे को लेकर हुआ समझौता इसका गवाह है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और तेलगु देशम पार्टी के प्रमुख एवं आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से बाहर हो जाने से भी भाजपा ने सबक लेते हुए रामविलास पासवान को राज्यसभा की सीट बोनस में दे दी है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी कुछ समय से गठबंधन के उस धर्म का पालन करती नहीं दिख रही थी, जिसकी पैरवी अटलबिहारी वाजपेयी किया करते थे। वाजपेयी अपने सहयोगियों को बराबर का साझीदार मानने के आदर्श पर चलते थे, नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कसौटी सहयोगी दलों को भाजपा के विस्तार का औजार मानता रहा है। इस सिद्धांत को थोपने की कोशिश में भाजपा, सहयोगी दलों को इस दृष्टि से आशंकित करती रही है कि कहीं वह उनके वर्चस्व पर ही स्थापित न हो जाए? सहयोगियों के महत्व को नकारने के संकेत भी भाजपा इन साढ़े चार सालों से देती रही है। चंद्रबाबू नायडू इसके उदाहरण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा की अपने सबसे पुराने व विश्वसनीय सहयोगी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से भी अनबन चल रही है। महाराष्ट्र की राजनीति की जमीनी पड़ताल करें तो यहां 2014 वाली हवा नदारद है। अरविंद केजरीवाल और शरद यादव किस करवट बैठते हैं, यह कहना फिलहाल मुश्किल है, क्योंकि ये नेता राहुल का नेतृत्व स्वीकारने से कतरा रहे हैं। दूसरे, कांग्रेस और भाजपा से इतर क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ यह संकट है कि अन्य किसी दल का देशव्यापी न तो जनाधार है और न ही संगठन। ऐसे में आम चुनाव के पूर्व इन्हीं में से किसी एक की छत्र-छाया में शरण लेना राजनीतिक मजबूरी है।</p>
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                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:24:03 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चेतावनी, आज कई राज्यों में मुसीबत बनकर बरसेंगे बदरा</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश में अलर्ट जारी Warning, today in many states trouble will become bad नई दिल्ली(एजेंसी)। समय से पूर्व आए मानसून की वजह से देश में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं जमकर बरसात हो रही है। इस बीच मौसम विभाग की तरफ से जुलाई के पहले सप्ताह में देश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/warning-today-in-many-states-trouble-will-become-bad-2/article-4593"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/trouble-will-become-bad.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश में अलर्ट जारी</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Warning, today in many states trouble will become bad</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> समय से पूर्व आए मानसून की वजह से देश में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं जमकर बरसात हो रही है। इस बीच मौसम विभाग की तरफ से जुलाई के पहले सप्ताह में देश के कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है <strong>(Warning, today in many states trouble will become bad)</strong>। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा व मिजोरम में रविवार को भारी बारिश होने को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की ओर से जारी किए गए अलर्ट के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य को लेकर संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने एवं किसी भी स्थिति से निपटने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">छह जुलाई तक मानसून की सक्रियता हिमालय के तराई क्षेत्र में रहेगी</h2>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग द्वारा व्यक्त पूर्वानुमान के मुताबिक एक से छह जुलाई तक मानसून की सक्रियता हिमालय के तराई क्षेत्र में रहेगी <strong>(Warning, today in many states trouble will become bad)</strong>। इसके परिणामस्वरूप पश्चिमी हिमालयन क्षेत्र में जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के उत्तरी इलाकों में अधितर स्थानों जबकि पंजाब, हरियाणा और बिहार के कुछ इलाकों में रविवार से मंगलवार तक मूसलाधार बारिश हो सकती है। इस बीच दिल्ली और आसपास के इलाकों में छिटबुट बारिश होने की संभावना है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">उत्तराखंड में जनजीवन प्रभावित</h2>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड में जनजीवन पर मौसम के तेवर भारी पड़ने लगे हैं। मौसम विभाग ने तीन जुलाई तक राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के आदेश दिए हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े महकमों को तैयार रहने के लिए कहा गया है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Jul 2018 08:50:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जोहड़ पायतन बना लोगों के लिए परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[लोगो का आरोप विधायक कस्बे के विकास में नहीं है गंभीर? केसरीसिंहपुर (बाबू लाल, सच कहूं न्यूज)। कस्बे के वार्ड 5 में स्थित जोहड़ पायतन लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। इस के समीप बसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि एक तरफ यहां मच्छरों की भरमार रहती है जिससे अनेक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/johad-makes-the-cause-of-trouble-for-the-people/article-3819"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/johad.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">लोगो का आरोप विधायक कस्बे के विकास में नहीं है गंभीर?</h2>
<p><strong>केसरीसिंहपुर (बाबू लाल, सच कहूं न्यूज)। </strong>कस्बे के वार्ड 5 में स्थित जोहड़ पायतन लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। इस के समीप बसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि एक तरफ यहां मच्छरों की भरमार रहती है जिससे अनेक बीमारियां फैल रही है वहीं दूसरी ओर बच्चों बूढ़ों आदि का इसके अंदर गिरकर मरना एक आम सी बात हो गई है वही इसके समीप बसे लोगों को इतनी दुर्गंध में रहना उनके लिए जी का जंजाल बना हुआ है क्योंकि यह आबादी क्षेत्र में है और इसके समीप अनेक लोग रहते हैं जिनके लिए यहां रहना परेशानी का सबब है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं मौसम विभाग द्वारा श्रीगंगानगर जिले में भारी बरसात की चेतावनी दी गई है बरसात के चलते पायतन पूरी तरह से पानी से भर जाता जिसके चलते पानी लोगों के घरों में घुस जाते हैं वह लोगों के लिए यह एक आफत से कम नहीं है गत दिनों में विधायक सुरेंद्र पाल सिंह टीटी कस्बे में अनेक विकास कार्यों शिलान्यास व लोकापर्ण करने पहुंचे तो विधायक अपने संबोधन में विकास की गाथा गाते दिख रहे थे</p>
<p style="text-align:justify;">पर इस समस्या की ओर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया और ना ही इसका साढे चार वर्षों में कोई समाधान कर सके जबकि कस्बेवासियों द्वारा समय-समय पर विधायक को इस समस्या से अवगत कराया गया है पिछले विधानसभा चुनाव में जब टीटी कस्बे में प्रचार करने के लिए पहुंचे तो उनके सामने यह समस्या उठाएगी तो उन्होंने आश्वासन दिया कि मैं विधायक बनते ही इस समस्या को हल करवाऊंगाऔर व मंत्री भी बन गए पर आज साढे चार वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या का हल होता नहीं दिख रहा वह जोहड़ पायतन वही का वही आबादी क्षेत्र में स्थित है</p>
<p style="text-align:justify;">गत महीनों में वार्डवासियों द्वारा नगरपालिका में जाकर इस समस्या के बारे में पालिकाध्यक्ष से बात की तो पालिकाध्यक्ष ने कहा की नगरपालिका इस समस्या का समधान करने के लिए अपने स्तर पर कार्य कर रही है पर लोगों को संतुष्ट जनक जवाब नहीं मिला जिस कारण वार्ड के बीजेपी कार्यकर्ता बीजेपी पार्टी व विधायक का विरोध करते नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टीटी के कार्यक्रमो में वार्डवासी व बीजेपी कार्यकर्ता का ना जाना कस्बे में टीटी के विरोध का उदहारण है मंडी में टीटी अपने कार्यक्रमों में भीड़ नही जुटा पा रहे है। चुनावी वर्ष है अगर इसी तरह टीटी का विरोध जारी रहा तो करनपुर विधानसभा सीट का बीजेपी को सोचना होगा। कार्यकर्ता किसी भी पार्टी की रीढ़ की हड्डी होता है पर व कार्यकर्ता आज बीजेपी से नाखुश नजर आ रहे है। यह जोहड़ पायतन आबादी क्षेत्र से बाहर होना चाहिए यह बीमारियों का घर है। यह वार्ड के लिए सबसे बड़ी समस्या है इसका समाधान होना चाहिए।</p>
<p><em>वीरू पार्षद वार्ड 5 नगरपालिका के पास धन की कोई कमी नहीं है नगर पालिका अपने स्तर पर इस समस्या का समाधान करने में लगी हुई है। अगर मंडवासी नगर पालिका को तीन नंबर चुंगी जोहड़ पायतन से लेकर राधा स्वामी डेरे तक सीधा खाला निकालने की अनुमति दें तो जोहड़ पायतन के आधे गंदे पानी की निकासी नगर पालिका को मिल रही भूमि में की जा सकती है। यह मंडीवासियों के सहयोग से ही सम्भव हैं।</em><br />
<em><strong>-कालूराम बाजीगर नगर पालिका अध्यक्ष</strong></em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 09:30:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोटबंदी नासमझी वाला फैसला था : चिदंबरम</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों लोगों को तकलीफ में डाला नई दिल्ली (एजेंसी)। नोटबंदी का फैसला नासमझी वाला और जल्दबाजी में लिया गया फैसला था। यह बड़ी भूल साबित हुआ। इसकी वजह से इकोनॉमी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और करोड़ों आम लोगों को तकलीफ हुई। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह बात अपने ट्वीट में लिखी है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/crores-of-people-in-trouble/article-3516"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/note-bandi.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">करोड़ों लोगों को तकलीफ में डाला</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> नोटबंदी का फैसला नासमझी वाला और जल्दबाजी में लिया गया फैसला था। यह बड़ी भूल साबित हुआ। इसकी वजह से इकोनॉमी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और करोड़ों आम लोगों को तकलीफ हुई। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह बात अपने ट्वीट में लिखी है। उन्होंने रविवार को एक के बाद एक कई ट्वीट किए। “नोटबंदी के एक साल बाद, इस फैसले के लिए हर दावा तुच्छ हो चुका है, इसे खारिज कर दिया गया है और हंसी उड़ रही है।” “अब मुझे तर्क दिया जा रहा है कि नोटबंदी नकली नोटों को खत्म करने के लिए थी। ” “एक साल बाद हमसे कहा गया कि आरबीआई के पास वापस आए 15 लाख 28 हजार करोड़ (बंद किए गए नोटों का मूल्य) रुपए में से 41 करोड़ के नोट नकली थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए, नोटबंदी भारतीय नकली नोटों का जवाब नहीं है।”  “नोटबंदी के बाद भी करप्शन हो रहा है, रिश्वत देने और लेने वाले लगातार रंगे हाथों पकड़े जा रहे हैं।” “जहां तक ब्लैकमनी का सवाल है, हर दिन टैक्सेबल इनकम जनरेट होती है। उसका एक हिस्सा ऐसा होता है, जिस पर टैक्स नहीं चुकाया जाता और अलग-अलग मकसद के लिए इसका इस्तेमाल होता है। जैसे- रिश्वत देना, इलेक्शन फंडिंग, कैपिटेशन फीस, जुआ खेलने और लेबर लगाने के लिए।” “नोटबंदी एक नासमझी वाला एकतरफा फैसला था, जो बड़ी भूल साबित हुआ। इकोनॉमी को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और करोड़ों आम लोगों को इसने तकलीफ में डाल दिया।””डेमोक्रेसी में किसी भी चुनी हुई सरकार को लोगों को बेहद तकलीफ और दुख में डालने का कोई हक नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Nov 2017 06:28:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनता नोटबंदी व जीएसटी से परेशान: बादल</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के वित्तमंत्री मंगलवार दोपहर पहुंचे सादुलशहर सादुलशहर (सेठी)। पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल मंगलवार दोपहर सादुलशहर पहुंचे। व्यापार मंडल के अध्यक्ष रूप चंद वधवा ने उनका यहां पहुंचने पर भव्य स्वागत किया। वधवा ने पंजाब के वित्तमंत्री को भाखड़ा सिंचाई प्रणाली की विभिन्न नहरों में पंजाब से आ रहे दूषित पानी को रोकने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/public-disconnection-and-trouble-with-gst-badal/article-3496"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/manpreet.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">पंजाब के वित्तमंत्री मंगलवार दोपहर पहुंचे सादुलशहर</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सादुलशहर (सेठी)।</strong> पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल मंगलवार दोपहर सादुलशहर पहुंचे। व्यापार मंडल के अध्यक्ष रूप चंद वधवा ने उनका यहां पहुंचने पर भव्य स्वागत किया। वधवा ने पंजाब के वित्तमंत्री को भाखड़ा सिंचाई प्रणाली की विभिन्न नहरों में पंजाब से आ रहे दूषित पानी को रोकने की मांग की। वितमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने इसके निस्तारण के उच्च स्तर पर कदम उठाने का आश्वासन दिया। पंजाब के वित्तमंत्री ने कार्यकर्ताओं से कहा कि राजस्थान में कार्यकर्ता अभी से आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी की नीतियों का प्रचार-प्रसार शुरू कर दें। राजस्थान में आगामी चुनावों में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाएगी। जनता नोटबन्दी व जीएसटी के कारण परेशान है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद बादल ने तहसील कार्यालय में पहुंच कर तहसीलदार मान सिंह प्रजापत व नायब तहसीलदार बृजमोहन बजाज से पानी की गुणवत्ता की जानकारी हासिल की। पत्रकारों से बातचीत में बादल ने कहा कि घर के पड़ोसी का प्रथम दायित्व सुख-दु:ख में भागेदारी निभाने का होता है। इसको ध्यान में रखते हुए हमारे द्वारा सदैव सादुलशहर विधान सभा की जनता के पंजाब सरकार से सम्बन्धित कार्यों को प्रमुखता से समयावधि में करवाने का प्रयास रहता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से हमारा हमेशा लगाव रहा है। मीडिया से सम्बंधित सवालों के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि हिमाचल व गुजरात में जनता में क ांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ा है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दिशा निर्देशों के अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं विश्वास है। ज्ञात रहे कि वित्तमंत्री बादल अपनी निजी गाड़ी से सादुलसहर आए थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 07:19:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दस पार्षदों ने खोला नप प्रधान के खिलाफ मोर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[बोले : चंद चहेते पार्षदों से घिरे प्रधान को नहीं शहर की परवाह फतेहाबाद (विजय बजाज)। विवादों के साथ चोली-दामन का साथ रखने वाले नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल की मुसीबतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस बार उनकी समस्या बढ़ाने वाले कोई और नहीं, बल्कि शहर के विभिन्न वार्डों के 10 पार्षद ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/council-chief-enhanced-the-trouble/article-3237"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/18ftd5.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">बोले : चंद चहेते पार्षदों से घिरे प्रधान को नहीं शहर की परवाह</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद (विजय बजाज)।</strong> विवादों के साथ चोली-दामन का साथ रखने वाले नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल की मुसीबतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस बार उनकी समस्या बढ़ाने वाले कोई और नहीं, बल्कि शहर के विभिन्न वार्डों के 10 पार्षद ही है। नगर परिषद प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पार्षदों में एडवोकेट विरेन्द्र, नेहा मित्तल, वजीर जाखड़, पार्षद प्रतिनिधि रणजीत ओड, सतीश चराईपोत्रा, महेश मक्कड़, मनोहर लाल कुका नारंग, एडवोकेट विनय शर्मा, दीपू टूटेजा व सौरभ मेहता ने बैठक की और प्रधान को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक उपरांत लामबंद हुए पार्षदों ने नप प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे 2-4 चहेते पार्षदों से बाहर शहर के विकास के बारे में कुछ सोच ही नहीं पा रहे हैं, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों, जर्जर गलियों के हालात सुधारने जैसे अनेक मुद्दे गंभीर रूप ले चुके हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">नगर परिषद प्रधान ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरने का किया काम</h1>
<p style="text-align:justify;">रोष जताने वाले इन पार्षदों ने कहा कि उनके वार्डों के लोगों ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें वार्ड पार्षद बनाकर नगर परिषद में भेजा था ताकि वे अपने वार्डों का विकास करवा सकें लेकिन नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल ने अपनी गलत कार्य प्रणाली के चलते उनके वार्डों के लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है। विरोधी हुए पार्षद यहीं नहीं रूके और बोले की नप प्रधान अपना निजी द्वेष निकालने के लिए भी उनके वार्डों के विकास कार्यों को प्रभावित कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके वार्डों की अनेक गलियां स्ट्रीट लाइटें न होने के चलते शाम होते ही अंधेरे की चपेट में आ जाती है, जबकि चंद चहेते पार्षर्दों के वार्डों में नियमों को ताक पर रखकर प्रधान ने एक ही जगह 10-10 लाइटें लगावा डाली है। इसके अलावा नगर परिषद प्रधान जानबूझ कर शहर में लगातार बढ़ रही सफाई कर्मियों की कमी को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रहे, जिससे शहर में गंदगी के ढेर आमजन के जी का जंजाल बन चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द नप प्रधान ने अपनी कार्य प्रणाली को सुधारते हुए शहर व उनके वार्डों की समस्याओं को हल करवाने की तरफ ध्यान नहीं दिया तो वे जनहित में धरना-प्रर्दशन जैसे कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/council-chief-enhanced-the-trouble/article-3237</link>
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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2017 00:12:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कुछ नया करने पर शुरू में दिक्कतें, बाद में सुधार : जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने को लेकर हो रहे विरोध के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कुछ नया करने पर शुरू में दिक्कतें आती हैं, लेकिन उसमें सुधार कर लिया जाता है। जीएसटी लागू होने से चंद घंटे पहले यहां एक टेलीविजन चैनल के सम्मेलन में जेटली ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/arun-jaitley-speak-about-gst/article-1805"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/arun-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने को लेकर हो रहे विरोध के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कुछ नया करने पर शुरू में दिक्कतें आती हैं, लेकिन उसमें सुधार कर लिया जाता है। जीएसटी लागू होने से चंद घंटे पहले यहां एक टेलीविजन चैनल के सम्मेलन में जेटली ने कहा कि पिछले 70 साल में किसी विधेयक पर इतनी बहस नहीं हुई है जितनी जीएसटी पर हुई है। इसके लागू होने को बड़ा मौका बताते हुए उन्होंने कहा कि बड़े कदमों से ही देश की तकदीर बदलती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नेताओं की अहम भूमिका</h2>
<p style="text-align:justify;">इसे लागू करने में कई नेताओं की अहम भूमिका रही है। कई राज्यों के मंत्रियों ने इसे पास कराने में काफी मदद की है। इस पर सबकी सहमति के लिए सरकार ने कई बैठकें कीं। कई बैठकें तो दो-तीन दिन तक चली। देश की आजादी के बाद जीएसटी को सबसे बड़े आर्थिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। जेटली ने कहा कि जीएसटी पर सब कुछ केन्द्र ने तय नहीं किया है। केन्द्र सरकार के साथ 31 राज्य सरकारों ने कई दौर की बैठकों के बाद इस पर आम सहमति बनाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी को लेकर लोगों में घबराहट की जिक्र करते हुए जेटली ने कहा हम एक नयी व्यवस्था में आ रहे हैं। इसकी वजह से लोगों में घबराहट है। व्यापारियों की दिक्कतों पर उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत सभी रिटर्न सॉफ्टवेयर से भरे जायेंगे। इससे उनको कोई दिक्कत नहीं होगी। देश का एक बड़ा व्यापारी वर्ग नयी कर व्यवस्था के पक्ष में है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2017 08:21:39 +0530</pubDate>
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                <title>हरियाणा की सड़कों पर नहीं उतरी रोडवेज बसें</title>
                                    <description><![CDATA[हजारों यात्रियों को करना पड़ा परेशानी का सामना चंडीगढ़। निजी बस संचालकों से परमिट वापस लेने की मांग को लेकर चक्का जाम के आह्वान और एक दिन के बंद के कारण हरियाणा रोडवेज की 4,000 से अधिक बसें मंगलवार को सड़कों पर नहीं उतरी। 2016-17 परिवहन नीति के अन्तर्गत परमिट दिए जाने के विरोध में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-roadways-staff-on-strike/article-1174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/roadways.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हजारों यात्रियों को करना पड़ा परेशानी का सामना</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> निजी बस संचालकों से परमिट वापस लेने की मांग को लेकर चक्का जाम के आह्वान और एक दिन के बंद के कारण हरियाणा रोडवेज की 4,000 से अधिक बसें मंगलवार को सड़कों पर नहीं उतरी। 2016-17 परिवहन नीति के अन्तर्गत परमिट दिए जाने के विरोध में हड़ताल के कारण हरियाणा रोडवेज की बसों पर निर्भर रहने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नेता सरबत सिंह पूनिया ने बताया कि पूरे राज्य में बंद है और लग्जरी वोल्वो बसों सहित 4,000 से अधिक बसें सड़कों पर नहीं उतरी। हम निजी संचालकों को परमिट देने कि सरकार की नीति का विरोध कर रहे हैं। सरकार रोडवेज का निजीकरण करने की योजना बना रही है। गतिरोध को रोकने के लिए पिछले दो महीनों के दौरान राज्य सरकार और हड़ताली कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल सका।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने दोपहर चंडीगढ़ में यूनियन के नेताओं की एक बैठक बुलाई है। पुनिया ने बताया कि हमें बैठक के लिए बुलाया गया है, लेकिन हमारी भविष्य की कार्रवाई इन बातचीत के परिणामों पर निर्भर करेगी। पूर्व में भी सरकार ने प्रतिबद्धता जताई है लेकिन यह मुकाम पर पहुंचने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर आज की बातचीत असफल रहती है तो हड़ताली कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2017 05:13:55 +0530</pubDate>
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