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                <title>Destruction - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>प्रेरणास्त्रोत: लोभ से विनाश</title>
                                    <description><![CDATA[सूचना मिलने पर राजा पहुँचा और पुत्र का शव देखकर विलाप करने लगा। तभी वहाँ पहुँचे एक ऋषि ने स्मरण कराया अब कुछ होने का नहीं है। पुत्र की कामना का लोभ उत्तम था। वह लोभ होकर भी लोभ से परे था। तुमने उसमें अप्राकृतिक विधान जोड़ा और ऐसा विलक्षण पुत्र पाया जिसकी रक्षा कठिन हो गई।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/destruction-by-greed/article-12343"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/destruction-by-greed.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्राचीन काल में संजय नामक राजा थे। उनकी एक ही कन्या थी। उन्हें पुत्र की बड़ी चाह थी। एक बार देवर्षि नारद उनके राज्य में पहुँचे और राजा के कहने पर उन्होंने पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। राजा ने माँगा- मुझे ऐसा पुत्र चाहिए जो रूपवान तो हो ही, उसका मल-मूत्र , थूक-कफ सभी सोने के हों। मांग अप्राकृतिक थी, फिर भी देवर्षि ने तथास्तु कह दिया। कुछ समय बाद राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुत्र का नाम सुवर्णजीवी रखा गया। वरदान के अनुरूप पुत्र का मल-मूत्र, थूक- कफ सभी सोने का था। देखते-ही-देखते राजा ने पूरा राजमहल सोने का बनवा लिया। राजा के इस विलक्षण पुत्र की चर्चा पूरे राज्य में फैल गई। दूर-दूर से लोग उसे देखने आने लगे। डाकुओं की भी पूरे घटनाक्रम पर दृष्टि थी। वे लगातार राजकुमार का अपहरण करने की योजना बना रहे थे। एक दिन डाकू राजमहल से राजकुमार को उठकार ले गए। जंगल में डाकुओं का आपस में विवाद हो गया। सभी राजकुमार पर अपना नियंत्रण चाहते थे। इधर, राजसेना राजकुमार की खोज में जंगल तक पहुँच गई थी। डाकुओं को कोई उपाय न सूझा।</p>
<p style="text-align:justify;">राजकुमार को अधिक दिन तक छुपाए रखना कठिन जान, डाकुओं ने उसकी हत्या कर दी और जो भी सोना हाथ लगा, उसे बाँटकर फरार हो गए। इधर, राजसेना जंगल पहुँची तो देखा राजकुमार का शव पड़ा है। सूचना मिलने पर राजा पहुँचा और पुत्र का शव देखकर विलाप करने लगा। तभी वहाँ पहुँचे एक ऋषि ने स्मरण कराया अब कुछ होने का नहीं है। पुत्र की कामना का लोभ उत्तम था। वह लोभ होकर भी लोभ से परे था। तुमने उसमें अप्राकृतिक विधान जोड़ा और ऐसा विलक्षण पुत्र पाया जिसकी रक्षा कठिन हो गई। परिणामस्वरूप पुत्र नहीं बच पाया। लोभ ठीक है किन्तु इस तरह उसमें अति हो तो अंत में विनाश और विलाप ही छोड़ जाता है। इसलिए लोभ की अति से बचें।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 20:45:56 +0530</pubDate>
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                <title>बरबादी के मंजर के खिलाफ उत्तर भारत हुआ एकजुट</title>
                                    <description><![CDATA[नशे के खिलाफ एक बार फिर सरकारी मशीनरी कमर कसने जा रही है। नशे और इसके सौदागरों से निपटने के लिए पूरा उत्तर भारत एक हो गया है। यह अलग बात है की सरकारी स्तर पर ढिलाई और मिलीभगत से ही नशे का प्रचलन घर घर तक पहुँचने में कामयाब हुआ है। देर आये दुरस्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/north-india-became-united-against-the-erosion-of-destruction/article-5495"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/artical-02.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नशे के खिलाफ एक बार फिर सरकारी मशीनरी कमर कसने जा रही है। नशे और इसके सौदागरों से निपटने के लिए पूरा उत्तर भारत एक हो गया है। यह अलग बात है की सरकारी स्तर पर ढिलाई और मिलीभगत से ही नशे का प्रचलन घर घर तक पहुँचने में कामयाब हुआ है। देर आये दुरस्त आये की तर्ज पर अभी भी सरकारी अमला जन सहयोग से जी जान से जुटे तो लाखों नौजवानों को नशे की गिरफ्त में आने से बचाया जा सकता है। सात राज्यों ने इस दिशा में एक जूट होकर पहल की है। दो और राज्यों को इस संयुक्त अभियान में शामिल किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल, दिल्ली केंद्रशासित राज्य चंडीगढ़ सहित जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश एक साथ संयुक्त अभियान में शामिल होकर नशे की बुराई और नशे के सौदागरों के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही अमल में लाएंगे। आशा की जाती है इस पहल के सकारात्मक परिणाम हासिल होंगे।सात राज्यों ने इस मुद्दे पर सोमवार को चंडीगढ़ में बैठक कर एकजुटता दिखाई है। बाकी के दो राज्यों उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को भी इस मुहिम का हिस्सा बनाया जाएगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की पहल पर हुई इस बैठक में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरेंद्र सिंह व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">अगली बैठक में दिल्ली, राजस्थान के साथ यूपी और जम्मू कश्मीर के सीएम भी मौजूद रहेंगे। इस तरह से उत्तर भारत के 9 राज्य मिलकर नशे के खिलाफ मुहिम छेड़ेंगे।पंजाब के बार्डर राज्य होने की वजह से यहां नशे की तस्करी काफी हो रही है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, नयी दिल्ली, जम्मू-कश्मीर तथा केंद्रशासित राज्य चंडीगढ़ में भी नशा लगातार फैल रहा है। उत्तर भारत के गांव गांव में नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री की जा रही है। शराब, चरस, स्मैक, गांजा आदि नशीले पदार्थ परचून के सामान की तरह बेचे जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सर्वे के अनुसार देश की जनसंख्या में 65 प्रतिशत युवा हैं जिनकी उम्र 35 वर्ष से कम है और 1.35 अरब लोगों में से आधे देश की आबादी की उम्र 25 वर्ष से कम है इनमें बड़ी संख्या युवा नशे का शिकार हैं किसी को भी यह आंकड़ा चौंकाने वाला लग सकता है। मगर यह हकीकत है। पंजाब नशे का सबसे बड़ा और संवेदनशील गढ़ है आज वहाँ राज्य का हर नौजवान किसी न किसी तरह के नशे की गिरफ्त में है। उत्तराखंड में 70 प्रतिशत , हरियाणा में 63 प्रतिशत लोग भांग और गांजा लेने के आदी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजधानी दिल्ली में 76.7 प्रतिशत आबादी तबांकू का सेवन करती है उसमें 2.8 प्रतिशत महिलाएं गुटखा-पान मसाला खाती हैं।देश में नशे का प्रचलन यूँ ही बढ़ता रहा तो भारत को नशेड़ी देश बनते देर नहीं लगेगा। आज नशे ने पंजाब को जलाया है कल समूचा देश धूं धूं कर जलेगा। पंजाब और नशे का रिश्ता काफी पुराना और गहरा है। पंजाब नशीले पदार्थों के मामले में देश में पहले नंबर पर आता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि पंजाब में मादक पदार्थ माफिया, पुलिस अधिकारियों और राजनीतिज्ञों का बड़ा गठजोड़ है। इसी गठजोड़ ने हरे भरे पंजाब को मौत की दहलीज तक पहुंचा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी सच है कि नशे में एक नहीं अपितु अनेक दुर्गुण है। इन दुगुर्णों के कारण भला चंगा व्यक्ति अपनी सुध बुध खोकर जघन्य अपराधों में लिप्त हो गया है। छेड़छाड़ ,बलात्कार और लूट जैसे गंभीर अपराध भी नशे के कारण ही समाज और देश को बर्बाद करने पर तुले है। आज पंजाब जल रहा है और कल पूरा देश इसके चपेट में आने से कोई भी नहीं रोक पायेगा।एक सर्वे के अनुसार भारत में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लगभग 37 प्रतिशत लोग नशे का सेवन करते हैं। आजादी के बाद देश में शराब की खपत 60 से 80 गुना अधिक बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें ऐसे लोग भी शामिल है जिनके घरों में दो जून रोटी भी सुलभ नहीं है। जिन परिवारों के पास रोटी-कपड़ा और मकान की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा सुबह-शाम के खाने के लाले पड़े हुए हैं उनके मुखिया मजदूरी के रूप में जो कमा कर लाते हैं वे शराब पर फूंक डालते हैं। इन लोगों को अपने परिवार की चिन्ता नहीं है कि उनके पेट खाली हैं और बच्चे भूख से तड़फ रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। ये लोग कहते हैं वे गम को भुलाने के लिए नशे का सेवन करते हैं। उनका यह तर्क कितना बेमानी है जब यह देखा जाता है कि उनका परिवार भूखे ही सो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 22 Aug 2018 09:51:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विनाश को संकेत देते महासागर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रकृति के साथ खिलवाड़ के चलते वह दिन दूर नहीं जब महासागर विनाश का कारण बनने लगेंगे। ऐसे में महासागरों को बचाने के लिए दुनिया के 193 देशों द्वारा एक साथ आने का संकल्प निश्चित रुप से सुखद समाचार है। महासागर जिसकी पहचान ही धीर-गंभीर मानी जाती रही है, भविष्य में विनाश का संकेत देने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ocean-gives-destruction-signals/article-2207"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mahasagar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रकृति के साथ खिलवाड़ के चलते वह दिन दूर नहीं जब महासागर विनाश का कारण बनने लगेंगे। ऐसे में महासागरों को बचाने के लिए दुनिया के 193 देशों द्वारा एक साथ आने का संकल्प निश्चित रुप से सुखद समाचार है।</p>
<p style="text-align:justify;">महासागर जिसकी पहचान ही धीर-गंभीर मानी जाती रही है, भविष्य में विनाश का संकेत देने लगे हैं। एक ओर तापमान में लगातार बढ़ोतरी से ग्लेसियर पिघलते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर महासागरों के जल स्तर में बढ़ोतरी के रुप में सामने आने लगा है, वहीं समुद्र में अंदरुनी हलचल भी तेज होने लगी है। समुद्री जीव जंतु और पौध-पादप का अस्तित्व प्रभावित होने लगा हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक मोटे अनुमान के अनुसार महासागरों में 15 करोड़ टन प्लास्टिक फैल चुका है। सवा पांच लाख करोड़ टुकड़े महासागरों में तैर रहे हैं। प्रदूषण के चलते महासागरों का सांस लेना भी दूभर होने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समुद्र में आॅक्सिजन का स्तर कम होने लगा है। एक और महासागरों में प्रदूषण फैल रहा है दूसरी ओर समुद्री जीवों का अत्यधिक दोहन खासतौर से मछलियों के अधिक शिकार, ग्लेसियरों के पिघलने से बढ़ता जल स्तर इस कदर चिंतनीय होता जा रहा है कि वैज्ञानियों द्वारा यहां तक कयास लगाया जाने लगा है कि समुद्र के किनारे बसे शहरों के अस्तित्व पर संकट आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समुद्री गतिविधियों में बदलाव का स्पष्ट संकेत आए दिन सुनामी और समुद्री तूफानों के माध्यम से देखा जा सकता है। समुद्र में प्रदूषण के चलते यह तो विनाश की शुरुआत के रुप में देखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाये तो प्रकृति ने संतुलन बनाए रखने के लिए ही धरातल और महासागरों का अनुपात तय किया है। महासागरों को भी संतुलित तरीके से व्यवस्थित किया है। प्रकृति से खिलवाड़ के चलते जल, थल और वायु प्रदूषण का असर सीधे-सीधे दिखाई देने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतिवृष्टि और अनावृष्टि आम होती जा रही है। एक साथ अधिक बरसात के चलते औसत बरसात तो दिख जाती है पर मौसम के अनुसार बरसात से जल संचय अधिक सुचारु नहीं हो पाता है। दुनिया में जल संकट बढ़ता जा रहा है। समुद्री पानी में अम्लता बढ़ती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आबादी के दबाव, अत्यधिक शहरीकरण, भूगर्भ का अत्यधिक दोहन, रसोई गैस, पेट्रोल आदि र्इंधन और बड़े-बड़े संयत्रों में थर्मल और कोयला, गैस आधारित ऊर्जा स्रोत, कल कारखानों की धुआं उगलती चिमनियां प्रदूषण को बढ़ाती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा इलेक्ट्रोनिक कबाड़ और समुद्र में फैंका जा रहा कचना विनाश का कारण बनता जा रहा है। हमारे जीवन में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में सबसे अधिक भूमिका निभाई। जीवन में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से वातावरण पूरी तरह से असंतुलित होता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक का कचरा धरती, धरती के जीवों, जंगलों, नदी-नालों ही नहीं अब तो समुद्र तक को प्रभावित करने लगा है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और इसके निस्तारण के ठोस प्रयास नहीं होने से पूरा वातावरण प्रभावित हो रहा है। जानवर प्लास्टिक खाने से असमय मृत्यु का कारण बन रहे हैं। जल स्रोतों मेंं प्लास्टिक बाधक व प्रदूषण का कारण बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों जून माह की 5 से 9 जून तक संयुक्त राष्टÑ के नेतृत्व में दुनिया के देशों ने महासागरों को बचाने के लिए किए जाने वाले उपायों पर गंभीर चिंतन मनन किया है। समुद्री कचरे को हटाने में सहयोग के लिए दुनिया भर के गैर सरकारी संगठनों ने भी आगे आने की पहल की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया के 193 देशों ने एक साथ आकर महासागरों को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया है। संयुक्त राष्टÑ महासभा के अध्यक्ष पीटर थामसन ने बताया कि इन पांच दिनों में समुद्री जीवन को बर्बादी से बचाने रोकने के उपायों पर विचार किया गया है। महासागरों के सामने उभरते खतरों से निपटना और महासागरों का संरक्षण बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस तरह से आज चीन की राजधानी सहित दुनिया के कई देशों मेंं धुंध के प्रभाव से जीवन प्रभावित हो रहा है उसी तरह की चुनौती आने वाले समय में सागरों में भी बढ़ने वाली है। समुद्र का जल स्तर बढ़ने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लेसियर पिघलने से टापुओं के अस्तित्व खतरे में पड़ने के साथ ही समुद्री यातायात प्रभावित होने और ग्लेशियरों के पानी से महासागरों के जल स्तर में अधिक बढ़ोतरी होने से स्थितियां गंभीर होने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले सालों में सुनामी और समुद्री तूफानों की मात्रा अधिक बढ़ी है। समुद्री किनारे वाले शहरों में आए दिन तूफानों से जीवन दूभर होने लगा है। जनहानि के साथ ही बेतहाशा धन हानि होने लगी है। प्लास्टिक के दुष्प्रभाव के कारण इसके उपयोग पर अब कई देशों द्वारा प्रतिबंध लगाया जाने लगा है। इलेक्ट्रोनिक कचरा भी महासागरों को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते महासागरों की दुर्लभ प्रजातियों पर संकट आने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया में अब अधिक गरमी पड़ने लगी है। तापमान में बढ़ोतरी इसका साफ संकेत है। समुद्री हलचल प्रभावित होने लगी है। ऐसे में महासागरों के अस्तिÞत्व को बचाने के लिए दुनिया के देशों द्वारा साझा और ठोस प्रयास करने का निर्णय शुभ संकेत माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आशा की जानी चाहिए कि आने वाले समय में महासागरों को भी प्रदूषण रहित करने के ठोस प्रयास करने होंगे और सम्मेलन केवल चिंता तक सीमित ना रहकर कारगर बनाने होंगे। लोगों को भी अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा। कचरा प्रबंधन समझना होगा तभी जाकर इस तरह के प्रदूषण को रोका जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 23:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस: विनाश काले विपरीत बुद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[अच्छे को बुरा साबित करना, दुनिया की पुरानी आदत है। वर्तमान राजनीतिक वातावरण को देखते हुए यह आसानी से कहा जा सकता है कि आज यह गाना कांगे्रस के लिए सटीक लग रहा है। कांग्रेस  के नेता संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख के बारे में जिस प्रकार की टिप्पणी की है, उससे ऐसा लगने लगा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/congress-destruction-black-opposite-wisdom/article-1200"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/congress-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अच्छे को बुरा साबित करना, दुनिया की पुरानी आदत है। वर्तमान राजनीतिक वातावरण को देखते हुए यह आसानी से कहा जा सकता है कि आज यह गाना कांगे्रस के लिए सटीक लग रहा है। कांग्रेस  के नेता संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख के बारे में जिस प्रकार की टिप्पणी की है, उससे ऐसा लगने लगा है कि कांगे्रस जिस प्रकार से विनाश की ओर कदम बढ़ा रही है, उसी प्रकार उसके नेताओं की बुद्धि भी विपरीत होती जा रही है। देश में जो अच्छा हो रहा है, उसे गलत ठहराने की कांग्रेस  में परम्परा सी बनती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने हिन्दुओं के लिए मां का दर्जा रखने वाली गौमाता को सरेआम काटकर उसका राक्षसी रुप से भक्षण किया और आज कांगे्रस के नेता भारत माता की रक्षा में तत्पर रहने वाले सेना प्रमुख को सड़क का गुंडा जैसी उपाधि प्रदान कर रहे हैं। कांग्रेस के ऐसे कारनामों को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि या तो उसके नेताओं को इतना ज्ञान नहीं है कि देश का मान बढ़ाने वाली भाषा कौन सी है,</p>
<p style="text-align:justify;">या फिर कांगे्रस के नेता सोची समझी साजिश के तहत इस प्रकार के ब्यान दे रहे हैं। हालांकि इन ब्यानों के बाद देश में कांगे्रस की खिल्ली उड़ने के बाद वे माफी मांगने को तैयार हो जाते हैं। कोई बताता है तब ही कांगे्रस को अपने नेताओं द्वारा कही गई बात गलत लगती है। कांगे्रस के नेता अगर बोलने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें, तो संभवत: इस प्रकार की गलती नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के नेताओं के इन ब्यानों के पीछे केवल राजनीतिक प्रचार पाने का की साजिश दिखाई देती है। राजनीतिक दलों के नेता अपना नाम सुर्खियों में लाने के लिए ऐसे ब्यान पहले भी देते रहे हैं। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का वह ब्यान शायद ही कोई भूला होगा, जिसमें उन्होंने आतंकवादियों के लिए सम्मानित भाषा का प्रयोग किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार कई बड़े नेताओं ने भी ऐसी भाषा बोलकर देश का माहौल खराब करने का प्रयास किया। इन नेताओं को समझना चाहिए कि आज देश की जनता बहुत समझदार हो गई है। राजनेताओं की ओर प्रतिक्रिया भले ही न आए, लेकिन जनता की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया दी जाने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कांगे्रस देश की जनता के मिजाज को अभी तक नहीं समझ पा रही है। लोकसभा चुनाव में भारी पराजय का सामना करने के बाद भी कांग्रेस बेहोशी की अवस्था में दिखाई दे रही है। इसी बेहोशी के चलते अपने ब्यानों के माध्यम से विवेकहीनता का प्रदर्शन किया जा रहा है। कांग्रेस की इस प्रकार की मानसिकता निर्मित करने के पीछे कौन सी शक्तियां काम कर रही है, यह उनकी अंतरात्मा ही जानती होगी, लेकिन इस प्रकार की मानसिकता भारत के भविष्य के लिए दुखदायी ही साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव में कांगे्रस के सिमटने के बाद कांगे्रस ने अपने आपको संभालने का कोई प्रयास नहीं किया, इसके चलते उसे देश के महत्व पूर्ण राज्यों में भी पराजय का दंश झेलना पड़ा। कांगे्रस ऐसा क्यों कर रही है, इसका जवाब यही हो सकता है कि सरकारी सुविधाओं के बिना कांग्रेस के नेताओं की स्थिति जल बिन मछली के समान हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी तड़पन कांगे्रसी नेताओं के स्वरों में सुनाई देती है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो कांगे्रस सत्ता प्राप्त करने के लिए तड़पती हुई दिखाई देने लगी है। वास्तव में जो भी व्यक्ति सुविधाओं का दास हो जाता है, वह अपने परिश्रम के बल पर प्रगति नहीं कर सकता। आज कांग्रेस सुविधाओं का दास बनती हुई दिखाई दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण उसके नेताओं को सीमा की रक्षा करने वालों का त्याग दिखाई नहीं देता। सेना पर पत्थर फेंकने वाले उग्रवादी दिखाई नहीं देते। कांगे्रस नेता संदीप दीक्षित का ब्यान निश्चित रुप से सेना के त्याग का अपमान ही कहा जाएगा। हम यह भी सोच सकते हैं कि ऐसे ब्यानों के कारण कांग्रेस संभवत: आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी जताने का प्रयास करती हुई दिखाई देती है। ऐसे में प्रश्न यह भी आता है कि कांगे्रस आतंकवादियों का मनोबल बढ़ाना क्यों चाह रही है। इससे कांगे्रस को क्या हासिल होने वाला है। कांग्रेस कम से कम देश हित के मुद्दों पर विरोध की राजनीति करना बंद करे, तभी देश में राष्ट्रीय भावना का प्रकटीकरण हो सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2017 23:12:44 +0530</pubDate>
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