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                <title>President Vladimir Putin - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>President Vladimir Putin RSS Feed</description>
                
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                <title>Vladimir Putin: बढ़ सकती हैं खाद्य पदार्थों की कीमतें व खाद्य संकट</title>
                                    <description><![CDATA[Vladimir Putin: रूस ने यूक्रेनी अनाज को काला सागर के जरिये दुनिया के बाजारों में सुरक्षित पहुंच को मंजूरी देने वाले ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव (बीएसजीआई) अर्थात काला सागर अनाज समझौते से खुद को अलग कर लिया है। रूस के इस फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/putins-heart-also-has-to-be-understood/article-50550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/president-bladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Vladimir Putin: रूस ने यूक्रेनी अनाज को काला सागर के जरिये दुनिया के बाजारों में सुरक्षित पहुंच को मंजूरी देने वाले ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव (बीएसजीआई) अर्थात काला सागर अनाज समझौते से खुद को अलग कर लिया है। रूस के इस फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने व खाद्य संकट उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि, समझौते में बड़ी भूमिका निभाने वाले तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब आर्दोआन का विश्वास है कि रूस को समझौते में वापस लौटने के लिए राजी किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अहम सवाल यह है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया को भुखमरी की ओर धकेलने वाला यह फैसला क्यों लिया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि पुतिन यूक्रेन युद्ध में अनाज को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के मूड में हो। या फिर पुतिन बीएसजीआई की आड़ में पश्चिमी देशों पर सौदेबाजी के लिए दबाव बना रहे हों। पुतिन के वक्तव्य से तो यही लग रहा है। वे बार-बार कह रहे हंै कि मास्को के हितों की अनदेखी की जा रही है। इस समझौते से रूस को वो फायदा नहीं हुआ जिसका वादा किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">काला सागर दक्षिणपूर्वी यूरोप और एशिया के बीच एक रणनीतिक क्षेत्र है, जिसके जरिए समुद्री, महाद्वीपीय, भू-रणनीतिक और आर्थिक हितों को एक साथ साधा जा सकता है। यूक्रेन जिसे यूरोप की ‘बे्रडबास्केट’ कहा जाता है, दुनिया के सबसे बड़े अनाज आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। वह वैश्विक बाजार में सालाना 45 मिलियन टन से अधिक अनाज उपलब्ध कराता है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार यूक्रेनी अनाज दुनिया भर में 400 मिलियन लोगों का पेट भरता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूसी नौसैनिक जहाजों ने यूक्रेन के बंदरगाहों की नाकेबंदी की तो 20 मिलियन टन से अधिक अनाज बंदरगाहों पर खड़े कंटेनरों में अटक कर रह गया।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस की इस कार्रवाई से अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में खाद्यान्न संकट पैदा हो गया। खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान को छूने लगी। ऐसे में अनाज और अन्य उर्वरकों की सस्ती पहुंच के लिए पिछले साल जुलाई में रूस, तुर्किए, यूक्रेन और संयुक्त राष्ट्र ने काला सागर अनाज पहल या ब्लैक सी र्ग्रेन इनिशिएटिव के रूप में यह समझौता किया था। समझौते के तहत यूक्रेन के तीन बंदरगाहों ओडेसा, चोनोर्माेर्स्क और पिवडेनी से जहाजों को सुरक्षित मार्ग की गारंटी दी गई थी । समझौते की पालना के लिए तुर्किए के इस्तांबुल में एक संयुक्त समन्वय केन्द्र (जेसीसी) स्थापित किया गया। समझौते को वैश्विक अनाज संकट को हल करने की दिशा में एक कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन पर रूसी हमलों के बाद जहां एक और खाद्य पदार्थो की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो गई थी वहीं समझौते के बाद कीमतें गिरना शुरू हो गई। लगभग एक वर्ष के दौरान इसमें 23 फीसदी की कमी आई है। समझौते की बदौलत मई 2023 तक यूक्रेन द्वारा 32 मिलियन टन से अधिक अनाज (मक्का और गेहंू) का निर्यात किया गया है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद गेहंू और मक्के की कीमतों में क्रमश: 17 प्रतिशत और 26 प्रतिशत की गिरावट आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर कहा जाए तो समझौते के बाद यूक्रेन से होेने वाले खाद्यन निर्यात के कारण वैश्विक अनाज बाजारों ने राहत की सांस ली। इस समझौते की बदौलत ही संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के खाद्य मूल्य सूचकांक में गुजरे एक साल के दौरान हर महीने कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। मार्च 2022 के अपने सर्वाधिक उच्च स्तर के बाद से जुलाई 2023 तक इसमें 23 प्रतिशत गिरावट दर्ज की जा चुकी हैं। रूस ने 17 जुलाई को जैसे ही डील खत्म करने का ऐलान किया इंटरनेशनल मार्केट में खाद्य प्रदार्थो की कीमते 3 गुना तक बढ़ गई। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि बीएसजीआई वैश्विक अनाज बाजार के लिए किस कदर जरूरी था। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मामले में पुतिन के पक्ष को भी देखा जाना चाहिए। पुतिन लंबे समय से यह शिकायत कर रहे थे कि पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से रूस को अपने खाद्य पदार्थो और फटीर्लाइजर निर्यात करने की अनुमति देने वाले समझौते के हिस्से का पालन नहीं किया जा रहा है। पुतिन ने गरीब देशों तक अनाज नहीं पहुंचने की बात भी कही। पुतिन का आरोप बेजा नहीं है। समझौते के पक्ष में दलील तो यही दी जा रही थी कि इसके जरिये अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देशों को खाद्यन संकट से बचाने में मदद मिलेगी। लेकिन वास्तविकता यह थी कि यूक्रेनी बंदरगाहों से जाने वाले अनाज का एक बड़ा हिस्सा यूरोप के अमीर देशों के बाजारों में बिक रहा था। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि इन्हीं देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर रूस की अर्थव्यस्था का गला घोंटने के लिए उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। सच तो यह है कि समझौते की पूरी अंतर्कथा में रूस को खोने के लिए सब कुछ था पाने के लिए कुछ भी नहीं। लेकिन इसके बावजूद पुतिन ने सद्भावना दिखाई। मॉस्कों के हितों की अनदेखी होने के बावजूद वे समझौते के नवीनीकरण के लिए राजी हुए। लेकिन जब कीव ने क्रीमिया प्रायद्धीप को रूस से जोड़ने वाले केर्च ब्रिज पर हमला कर पुतिन को ललकारने का दुस्साहस किया तो गुस्साएं पुतिन ने समझौते से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया। हमले में दो लोगों की मौत हो गयी थी। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले पिछले अक्टूबर में भी पुतिन उस वक्त समझौते से हट गए थे जब काला सागर में रूसी जहाजों के बेड़े पर यूक्रेन ने ड्रोन हमला किया था। इसके बाद जब यूक्रेन ने संयुक्त समन्वय केन्द्र में इस बात की लिखित गांरटी दी कि सैन्य अभियानों के लिए मानवीय गलियारे का उपयोग नहीं किया जाएगा तब रूस दोबारा समझौते में शामिल हुआ। कोई दो राय नहीं कि समझौते से बाहर आना रूसी रणनीति का हिस्सा है। रूस अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों में राहत चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अब पुतिन के समझौते से बाहर निकलने के फैंसले के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन दुनिया को अनाज भेजना जारी रखेगा। हालांकि जेलेंस्की कह रहे हैं कि यूक्रेन डेन्यूब नदी के रास्ते निर्यात जारी रखेगा। एक बारगी जेलेंस्की के इस दावे को स्वीकार भी कर लिया जाए तो इससे यूरोप को तो सस्ता अनाज मिल सकता है, लेकिन चीन, यमन, मिस्र और अफगानिस्तान जैसे देशों तक डेन्यूबी नदी के रास्ते अनाज पहुंचाना संभव नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा, पुतिन पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन की खाद्य निर्यात सुविधाओं पर हमला कर रहे हैं। ऐसे में रूसी द्वारा सुरक्षा गांरटी न दिये जाने तक शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को युद्ध क्षेत्र में भेजने के लिए क्यों तैयार होगी। निसंदेह रूस के इस फैसले का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल सकता है। दुनिया की हालत बदतर होगी और बड़ी संख्या में लोग भुखमरी के शिकार होंगे। लेकिन राहत की बात यह है कि पुतिन ने मांगे पूरी होने पर समझौते के नवीनीकरण के संकेत जरूर दिए हैं। इसलिए बेहतर यही है कि रूस के पक्ष को भी समझ लिया जाना चाहिए। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. एन.के सोमानी, अंतर्राष्टÑीय मामलों के जानकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चीन के फ़ुज़ियान में डोक्सुरी तूफ़ान के कारण भारी बारिश , परिवहन निलंबित" href="http://10.0.0.122:1245/doxuri-storm-causes-heavy-rain-in-fujian-china-transportation-suspended/">चीन के फ़ुज़ियान में डोक्सुरी तूफ़ान के कारण भारी बारिश , परिवहन निलंबित</a></p>
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                                                            <category>लेख</category>
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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 12:33:20 +0530</pubDate>
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                <title>Wagner Group का साहस और पुतिन की जिद्द</title>
                                    <description><![CDATA[Wagner Group : जिस तरह रोस्तोव में येवगेनी प्रिगोझिन के साथ सेल्फी लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए रूसियों में होड़ लगी हुई थी उससे यह भी प्रदर्शित होता है कि पुतिन को आंख दिखाने और पुतिन शासन को चुनौती देने की हिम्मत दिखाने वाले को जनता सराह रही है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/wagner-groups-courage-and-putins-stubbornness/article-49408"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/wagner-group.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Wagner Group : जिस तरह रोस्तोव में येवगेनी प्रिगोझिन के साथ सेल्फी लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए रूसियों में होड़ लगी हुई थी उससे यह भी प्रदर्शित होता है कि पुतिन को आंख दिखाने और पुतिन शासन को चुनौती देने की हिम्मत दिखाने वाले को जनता सराह रही है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की ओर से मोर्चा संभालने वाली निजी सैन्य कंपनी वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन ने बगावत का फैसला वापस लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बड़ी राहत प्रदान की है। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वैगनर ग्रुप (Wagner Group) ने अपने आका पुतिन को जिस तरह आंखें दिखाईं उससे दुनिया भर को यह संदेश गया है कि आतंक को पालना और निजी सैन्य समूहों को बढ़ावा देना कितना खतरनाक हो सकता है। भले कोई देश या राष्ट्राध्यक्ष दूसरों के खिलाफ उपयोग करने के लिए आतंक को पाले लेकिन एक दिन वही आतंक या निजी सैन्य समूह उसके लिए भस्मासुर साबित होता है। इसके अलावा, वैगनर ग्रुप की बगावत के बाद जिस तरह बेलारूस के राष्ट्रपति ने बीच बचाव करवा कर रूस को कुछ मांगों को मानने के लिए मनाया, वह यह भी दर्शाता है कि अपने लगभग ढाई दशक के कार्यकाल में पुतिन पहली बार कमजोर पड़े हैं। Vladimir Putin</p>
<h3>पुतिन के खिलाफ रूसियों के मन में बगावत की आग | Wagner Group</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, जिस तरह रोस्तोव में येवगेनी प्रिगोझिन के साथ सेल्फी लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए रूसियों में होड़ लगी हुई थी उससे यह भी प्रदर्शित होता है कि पुतिन को आंख दिखाने और पुतिन शासन को चुनौती देने की हिम्मत दिखाने वाले को जनता सराह रही है। जनता ने जिस तरह वैगनर ग्रुप के मुखिया को सराहा वह यह भी संकेत देता है कि पुतिन के खिलाफ रूसियों के मन में बगावत की आग भभक रही है। दरअसल रूसी जनता पहले दिन से नहीं चाहती थी कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ा जाए। पुतिन ने अपनी सनक में आकर जो युद्ध छेड़ा है उसकी बड़ी कीमत रूसी जनता भी चुका रही है और इस युद्ध के लंबे खिंचते चले जाने से वह आजिज भी आ चुकी है। यही नहीं, रूसी सेना का एक बड़ा धड़ा भी बेहद नाराज बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि राष्ट्रपति पुतिन ने वैगनर ग्रुप की बगावत को लेकर अपने रक्षा मंत्री या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई की तो बगावत का झंडा बुलंद किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक वैगनर ग्रुप जैसे निजी सैन्य समूहों को बढ़ावा देने की बात है तो इतिहास गवाह है कि आतंक को प्रश्रय देने वाले खुद उसके सबसे बड़े शिकार बने हैं। जरा याद कीजिए कैसे अमेरिका ने ही एक समय ओसामा बिन लादेन को आगे बढ़ाया और एक समय ऐसा आया कि इस आतंक की चोट 9/11 के रूप में अमेरिका को ही झेलनी पड़ी थी। एक सशक्त उदाहरण अपने पड़ोस पाकिस्तान में भी है। पाकिस्तान ने तमाम आतंकी संगठनों को भारत में आतंक फैलाने के लिए तैयार किया लेकिन आज तहरीक-ए-तालिबान और उस जैसे तमाम आतंकी संगठन खुद पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने तालिबान को भी प्रश्रय देकर उसे अफगानिस्तान की सत्ता तक पहुँचाने में मदद की थी लेकिन आज वही तालिबान उसके सिर पर चढ़कर बोल रहा है। वैगनर ग्रुप भी एक तरह से पुतिन की ओर से निर्मित किया गया निजी सैन्य समूह है जिसने अब धमकी देकर अपने आका के माथे पर पसीना ला दिया। यही नहीं, चीन अक्सर संयुक्त राष्ट्र में किसी पाकिस्तानी आतंकवादी को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के प्रयासों में बाधा डालता है तो उसे लगता है कि उसने मुंबई में हुए 26/11 के हमलावरों को बचाकर भारत को झटका दिया है। लेकिन चीन को पाकिस्तान में कार्यरत चीनियों पर बढ़ते आतंकी हमलों को देखकर यह समझ आ जाना चाहिए कि आतंकवाद अपने जन्मदाता या प्रश्रयदाता को भी नहीं बख्शता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैगनर ग्रुप ने भले 2014 में पुतिन की ओर से क्रीमिया पर और 2023 में यूक्रेन के बखमुत पर कब्जा किया लेकिन अब वह सिर्फ भाड़े के टट्टू के रूप में काम करने को राजी नहीं है। येवगेनी प्रिगोझिन अब अपने लिए बड़ी भूमिका चाहते हैं। भले फिलहाल वह बेलारूस के मनाने पर मान गए हों लेकिन उन्होंने जो तेवर दिखाए हैं वह आने वाले समय में भी पुतिन के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकते हैं। यदि येवगेनी प्रिगोझिन को पश्चिमी या नाटो देशों का साथ मिल गया तो यह पुतिन के लिए बड़ी मुश्किलों का सबब बन सकता है क्योंकि वैगनर ग्रुप रूस की सैन्य क्षमताओं के बारे में बहुत कुछ जानकारी रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकरण ने यह भी दर्शाया है कि रूस की सैन्य शक्ति को जितना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता था, हकीकत वैसी नहीं है। यदि खुद को महाशक्ति कहलाने वाला देश युद्ध के समय लड़ने के लिए लड़ाके निजी कंपनी से आउटसोर्स करे तो सवाल उठेगा ही कि परेड के दौरान जिस सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था कहीं वह फैन्सी ड्रेस शो तो नहीं था? वैगनर ग्रुप की बगावत से रूस का जो सच दुनिया के सामने आया है और उससे जो परिस्थितियां निर्मित हुई हैं, उसका फायदा उठाने में अमेरिका और नाटो देश कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। इसलिए यह मान कर चलना चाहिए कि वैगनर ग्रुप के टैंक और लड़ाके भले रोस्तोव से बाहर चले गए हों लेकिन असल पिक्चर अभी बाकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह भी दर्शाया है कि रूस की सैन्य रणनीति पूरी तरह कामयाब नहीं रही है। युद्ध में अब तक जानमाल का सर्वाधिक नुकसान भले ही यूक्रेन को हुआ हो लेकिन प्रतिष्ठा का नुकसान सर्वाधिक रूस को हुआ है। रूसी सेना के हाथ से कई जीते हुए इलाके निकल गए, रूसी सेना की रणनीतियां विभिन्न मोर्चों पर नाकामयाब रहीं, रूसी सेना के बड़े-बड़े कमांडर युद्ध में मारे गए, युद्ध के बीच में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सैन्य नेतृत्व में बदलाव तक करने पड़ गए, जो रूस दुनिया के कई देशों को हथियार देता है उसे ईरान और चीन से हथियार और ड्रोन तक लेने पड़ गए। यकीनन इस सबसे रूस के महाशक्ति होने के दावे पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसके अलावा जिस तरह रूस में सैन्य नेतृत्व के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तेजी से परिणाम हासिल करने का दबाव बढ़ रहा है, उसके बारे में इस तरह की खबरें हैं कि यह पुतिन के खिलाफ जल्द ही विद्रोह की शक्ल अख्तियार कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, गलती पर गलती करते चले जाने के चलते पुतिन एकदम अकेले पड़ गए हैं। रूस ने एक छोटा सैन्य अभियान समझ कर जो युद्ध शुरू किया था वह अब अंतहीन होता दिख रहा है। यह संघर्ष जिस तरह दिन पर दिन लंबा और महंगा होता जा रहा है उससे रूस में पुतिन के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ रहा है। 2014 में क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद से ही रूस पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए तमाम प्रतिबंधों का सामना कर रहा था। ऐसे में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध और बढ़ गए जिससे रूस की अर्थव्यवस्था भारी दबाव में आ गई है। इसके साथ ही युद्ध का बढ़ता खर्च और साख बचाने की कोशिशों में जो अनाप-शनाप खर्च पुतिन कर रहे हैं वह रूस को पतन की ओर ही ले जा रहा है। कहा जा सकता है कि बगावत का सीजन रूस में शुरू हो चुका है। वैगनर ग्रुप ने जो साहस दिखाया है उसने जनता को भी ऊर्जा दे दी है। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:right;"><strong>नीरज कुमार दुबे, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 13:00:59 +0530</pubDate>
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                <title>Qatar Emir: 211 सेकंड में जानिये कौन है कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, जिन्होंने Putin से बात की?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं, खासकर रूस में वैगनर विद्रोह के बाद हालिया चर्चाओं के संदर्भ में। चल रहे संघर्ष के बीच, शेख तमीम ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ औपचारिक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/who-is-sheikh-tamim-bin-hamad-al-thani-qatar-amir-who-spoke-with-putin/article-49338"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/qatar-emir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं, खासकर रूस में वैगनर विद्रोह के बाद हालिया चर्चाओं के संदर्भ में। चल रहे संघर्ष के बीच, शेख तमीम ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ औपचारिक बातचीत की, जिसमें कूटनीति और वैश्विक मामलों में कतर की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला गया।Qatar Emir</p>
<p style="text-align:justify;">शेख हमद बिन खलीफा अल थानी और शेखा मोजा बिन्त नासिर अल-मिस्नेद के चौथे बेटे के रूप में जन्मे शेख तमीम को नेतृत्व और जिम्मेदारी की विरासत विरासत में मिली है। जो लोग उन्हें जानते हैं वे उन्हें मिलनसार, आत्मविश्वासी और खुले विचारों वाले बताते हैं, उनके पास गुणों का एक अनूठा मिश्रण है जिसने उन्हें राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिल दुनिया से निपटने में सक्षम बनाया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश की समृद्ध विरासत में गहरी रुचि | Qatar Emir</h3>
<p style="text-align:justify;">अपने करिश्माई व्यक्तित्व के अलावा, शेख तमीम को अक्सर उनकी व्यावहारिकता और सावधानीपूर्वक निर्णय लेने के लिए पहचाना जाता है। वह पश्चिमी देशों के साथ उत्कृष्ट संबंध बनाए रखता है, जिससे वैश्विक मंच पर कतर की स्थिति और मजबूत होती है। क्षेत्रीय गतिशीलता की गहरी समझ और कूटनीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ, शेख तमीम ने कतर के हितों को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने आधिकारिक कर्तव्यों से परे, शेख तमीम एक पूर्ण निजी जीवन जीते हैं। वह प्रतिस्पर्धी खेलों में एक उत्साही प्रतिभागी हैं, उन्हें मिस्र के पूर्व सैन्य प्रमुख मोहम्मद हुसैन तंतावी के साथ बैडमिंटन और गेंदबाजी करते हुए फिल्म में कैद किया गया है। शेख तमीम का शारीरिक गतिविधि के प्रति उत्साह संतुलित जीवनशैली बनाए रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दशार्ता है। Qatar Emir</p>
<p style="text-align:justify;">खेल के अलावा, शेख तमीम को इतिहास और अपने देश की समृद्ध विरासत में गहरी रुचि है। कतर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रति उनका समर्पण उनकी पहचान और गौरव की गहरी भावना का प्रमाण है। अरबी, अंग्रेजी और फ्रेंच में निपुण, उनके पास जनता को संबोधित करने और अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ने के लिए आवश्यक भाषाई कौशल है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति पुतिन के साथ हालिया बातचीत के दौरान, कतर की राज्य समाचार एजेंसी क्यूएनए ने बताया कि नवीनतम क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई। कतर, जो वैश्विक मामलों में अपने सूक्ष्म दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है, ने पड़ोसी यूक्रेन पर रूस के 16 महीने के पूर्ण पैमाने पर युद्ध के बीच काफी हद तक तटस्थ रुख बनाए रखा है। इस संतुलित दृष्टिकोण ने कतर को बातचीत को बढ़ावा देने और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान को आगे बढ़ाने में रचनात्मक भूमिका निभाने की अनुमति दी है। जैसा कि शेख तमीम कतर के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करना और देश की विदेश नीति को आकार देना जारी रखते हैं, उनका नेतृत्व जटिल अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Qatar Emir</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 17:54:20 +0530</pubDate>
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