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                <title>uniform civil code news - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>uniform civil code news RSS Feed</description>
                
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                <title>Uniform Civil Code: धार्मिक रीति-रिवाज और वैवाहिक संबंधों में भिन्नता</title>
                                    <description><![CDATA[Uniform Civil Code : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान से एक बार फिर समान नागरिक संहिता की चर्चा छिड़ गई है। प्रधानमंत्री का तर्क है कि एक परिवार एक से अधिक कानून के तहत नहीं चल सकता तो देश कैसे चलेगा। आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाने वाला कानून एक पारिवारिक और सामाजिक मुद्दा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/good-change-in-the-interest-of-society-and-country/article-49411"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/pm-modi-us-visit-41.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Uniform Civil Code : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान से एक बार फिर समान नागरिक संहिता की चर्चा छिड़ गई है। प्रधानमंत्री का तर्क है कि एक परिवार एक से अधिक कानून के तहत नहीं चल सकता तो देश कैसे चलेगा। आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाने वाला कानून एक पारिवारिक और सामाजिक मुद्दा है, लेकिन इसे धार्मिक रंग चढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि इसके धार्मिक सरोकारों पर कोई सहमति नहीं है। PM Modi</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, शादी, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति का अधिकार, ये मानव विज्ञान, समाज विज्ञान और कानून विज्ञान के मुद्दे हैं जिनका धर्म से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन विवाह को पूर्णत: धार्मिक मुद्दा नहीं माना जा सकता। विवाह एक संस्था की तरह है और धर्म किसी भी कार्य के लिए प्रेरणा, शक्ति के रूप में आदर्श को प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी बच्चे को स्कूल की परीक्षा देनी है या किसी खिलाड़ी को किसी टूनार्मेंट में भाग लेना है, तो वह सबसे पहले अपने धर्म के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के अनुसार प्रार्थना करता है, झुकता है और प्रसाद प्राप्त करता है या फिर खेलों व परीक्षाओं में सफलता के लिए एक पूरी व अलग व्यवस्था होती है जिसमें प्रबंध और नियमों का अपना महत्व होता है। Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह, विवाह एक पुरुष और एक महिला के बीच रिश्ते की शुरूआत है। इसमें धार्मिक परंपराओं का संबंध मनुष्य को सदाचारी, परोपकारी, जिम्मेदार, सहयोगी बनने की प्रेरणा देता है। नेकी की राह पर चलते हुए अच्छे आचरण पर जोर देता है, जहां तक ​​तलाक या पुनर्विवाह की बात है तो इन बातों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें ऐतिहासिक परिस्थितियों, समाज और जीव विज्ञान के पहलुओं से संबंधित हैं। PM Modi</p>
<p style="text-align:justify;">यदि विवाह या तलाक के नियम धर्मों द्वारा तय किए गए होते, तो समूह विश्व में हिंदुओं के लिए एक प्रणाली और मुसलमानों और ईसाइयों के लिए अलग-अलग प्रणाली होती। विश्व के दर्जन भर देशों में मुस्लमान निवास करते हैं, लेकिन उनके लिए तलाक का कोई नियम नहीं है। यदि तीन तलाक इस्लाम है, तो पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम बहुल देशों में तीन तलाक की प्रथा नहीं है, जबकि भारतीय मुस्लमानों में यह प्रथा है। धर्मों में परमात्मा को याद करने के तरीके अरदास/ नमाज/ प्रार्थना/ प्रेअर/ दुआ करने के साथ-साथ दान, वाणी, व्यवहार और कर्तव्यों से संबंधित निर्देश दिए गए हैं, लेकिन विवाह, मनुष्य के सामाजिक जीवन, विशेषकर धर्म के नकारात्मक पहलुओं पर कुछ नहीं कहा गया है। Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">धर्म समानता, सहयोग और किसी के अधिकारों का हनन करना नहीं सिखाता। यदि संपत्ति के उत्तराधिकारी या अधिकार के लिए कानून का प्रस्ताव (प्रावधान) करना है तो धर्म की उपरोक्त शिक्षा के तहत सर्वोत्तम नियम बनाए जा सकते हैं। कुरीतियों को समाप्त किया जाना चाहिए। समय के साथ नेक परिवर्तन को रोकना नहीं चाहिए। समाज के भीतर से भी परिवर्तन की लहर उठती है, यदि उसका कानूनी उपाय बन जाता है तब यह समाज व देश के हित में होगा। राजनीतिक स्वार्थों को त्यागकर सोचना होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हरियाणा के 16 जिलों में आज हो सकती है भारी बारिश" href="http://10.0.0.122:1245/the-arrival-of-monsoon-will-welcome-the-month-of-july/">हरियाणा के 16 जिलों में आज हो सकती है भारी बारिश</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 14:29:19 +0530</pubDate>
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                <title>Uniform Civil Code News: समान नागरिक कानून अधिकार, जानें, कितना है असरदार?</title>
                                    <description><![CDATA[क्या-क्या बदल जाएगा, शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों पर डालेगा कितना असर? नई दिल्ली। Uniform Civil Code News ‘‘दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा’’ भोपाल में कार्यकतार्ओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता पर बयान देकर एजेंडा सेट करने की कोशिश की है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/uniform-civil-code-news-hindi/article-49364"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/uniform-civil-code-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">क्या-क्या बदल जाएगा, शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों पर डालेगा कितना असर?</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Uniform Civil Code News ‘‘दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा’’ भोपाल में कार्यकतार्ओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता पर बयान देकर एजेंडा सेट करने की कोशिश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता पर मुसलमानों को उकसाया जा रहा है। साथ ही बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दलों की बैठक को उन्होंने ‘फोटो खिंचवाने का अवसर’ करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी सरकार ‘तुष्टिकरण’ की बजाए ‘संतुष्टिकरण’ की राह पर चलेगी। Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, ‘एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा। फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? हमें याद रखना है कि भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है’। पीएम मोदी ने पसमांदा मुसलमानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के साथ भी बराबर व्यवहार नहीं किया जाता है। जबकि सरकार ने बिना किसी भेदभाव के वंचितों के लिए काम किया है। पीएम मोदी ने कहा कि तीन तलाक का समर्थन करने वाले लोग सिर्फ वोट बैंक के भूखे हैं जो मुस्लिम बेटियों के साथ अन्याय कर रहे हैं। Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी के इस बयान के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह ‘हिन्दू नागरिक संहिता’ लाना चाहते हैं। ओवैसी ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री समान नागरिक संहिता की चर्चा कर रहे हैं। क्या आप समान नागरिक संहिता के नाम पर बहुलवाद, विविधता को छीन लेंगे?’ वे सभी इस्लामी प्रथाओं को अवैध करार दे देंगे और प्रधानमंत्री, कानून के तहत सिर्फ हिंदू प्रथाओं की रक्षा करेंगे।’ Uniform Civil Code</p>
<p style="text-align:justify;">ओवैसी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 300 सांसद हैं और वह चुनौती देते हैं कि क्या ‘हिंदू अविभाजित परिवार’ को खत्म कर दिया जाएगा और क्या वह ऐसा कर पाएंगे? ओवैसी ने संविधान के नीति निर्देशक तत्वों का हवाला देते हुए कहा कि भारत की संपत्ति देश के लोगों के बीच वितरित की जाए और देश की 50 प्रतिशत संपत्ति आठ से 10 लोगों के पास है। उन्होंने कहा कि नीति निर्देशक सिद्धांत में शराब पर रोक की भी बात है तो शराब पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता? गौरतलब है कि चुनाव से पहले पीएम मोदी के समान नागरिक संहिता पर बयान के बाद से नई बहस शुरू हो गई है। समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सबसे ज्यादा बहस शादी-विवाह के कानूनों पर होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समान नागरिक कानून | Uniform Civil Code</h3>
<p style="text-align:justify;">समान नागरिक कानून-नाम से ही पता चल रहा है कि इसका मतलब है कि सबके लिए एक नियम। लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसको लागू करना क्या इतना आसान है, जहां सभी को अपने-अपने धर्मों के हिसाब से रहने की आजादी है। समान नागरिक कानून के मुताबिक पूरे देश के लिये एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिये विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम एक होंगे। संविधान के अनुच्छेद 44 में भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून का प्रावधान लागू करने की बात कही गई है। अनुच्छेद-44 संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है। इस अनुच्छेद का उद्देश्य संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य’ के सिद्धांत का पालन करना है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | PM Narendra Modi speaks on the Uniform Civil Code (UCC)</p>
<p>“Today people are being instigated in the name of UCC. How can the country run on two (laws)? The Constitution also talks of equal rights…Supreme Court has also aed to implement UCC. These (Opposition) people… <a href="https://t.co/UwOxuSyGvD">pic.twitter.com/UwOxuSyGvD</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1673601795296460800?ref_src=twsrc%5Etfw">June 27, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 13:03:21 +0530</pubDate>
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