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                <title>Water evacuation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Water evacuation RSS Feed</description>
                
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                <title>Water Evacuation: जल निकासी पर बने कारगर नीति</title>
                                    <description><![CDATA[Water Evacuation: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा व पहाड़ी क्षेत्रों में जलभराव या बाढ़ के हालात दुखद ही नहीं, बल्कि चिंताजनक भी हैं। पिछले कुछ दिनों से देश भर के कई हिस्सों में भारी बारिश के चलते मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एहतियात के तौर पर सभी राज्यों के निचले इलाकों में रहने वाले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/have-an-effective-policy-on-drainage/article-50219"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/himachal-pradesh-flood-20231.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Water Evacuation: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा व पहाड़ी क्षेत्रों में जलभराव या बाढ़ के हालात दुखद ही नहीं, बल्कि चिंताजनक भी हैं। पिछले कुछ दिनों से देश भर के कई हिस्सों में भारी बारिश के चलते मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एहतियात के तौर पर सभी राज्यों के निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का अभियान जारी है और जिन इलाकों की ओर पानी बढ़ने की आशंका है, वहां से भी लोगों को हटाने की कवायद चल रही है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि लोगों को प्रशासन के निर्देशों के अनुरूप ही चलना चाहिए और किसी भी तरह का खतरा नहीं उठाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जल निकासी का सिस्टम बाढ़ व बारिश के पानी के सामने लाचार नजर आ रहा है। बाढ़ आने पर हर बार पानी को रोकने व तटबंध बनाने की चर्चा यूं ही होती है, लेकिन चिंता की बात है कि जल निकासी का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका। किसी ने इस बात की जिम्मेदारी लेने की कोशिश नहीं की कि समय रहते ड्रेनेज व सीवर लाइन को अतिवृष्टि से मुकाबले के लिए क्यों तैयार नहीं किया गया है। वहीं कभी नहीं सोचा गया कि यदि नदी में पांच दशक बाद बाढ़ आएगी तो अतिरिक्त जल निकासी का कोई कारगर तंत्र तैयार किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पानी का स्वभाव है कि वह ऊंचे स्थान से नीचे की तरफ बहता है। निचले स्थानों पर कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। जिन विभागों की जिम्मेदारी इनकी निगरानी करना था, वे आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। ऐसे में अब समझ में आने लगा है कि देश और धरती के लिए नदियां और बरसाती नाले क्यों जरूरी हैं। यदि छोटी नदियों में पानी कम होगा तो बड़ी नदियों में भी पानी कम रहेगा। यदि छोटी नदी में गंदगी या प्रदूषण होगा तो वह बड़ी नदी को प्रभावित करेगा। बरसाती नाले अचानक आई बारिश की असीम जलनिधि को अपने में समेट कर समाज को डूबने से बचाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में छोटी नदियां बाढ़ से बचाव के साथ-साथ धरती के तापमान को नियंत्रित रखने, मिट्टी की नमी बनाए रखने और हरियाली के संरक्षण के लिए अनिवार्य हैं। साथ ही, नदी तट से अतिक्रमण हटाने, उसमें से बालू-रेत उत्खनन को नियंत्रित करने, नदी की गहराई के लिए उसकी समय-समय पर सफाई से इन नदियों को बचाया जा सकता है। यही तंत्र एक तरह से मानो प्राकृतिक निकासी सिस्टम भी साबित हो सकता है। जल निकासी की वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्था नहीं की गई तो जलभराव का संकट लगातार गहरा होता जायेगा। हमें बिना देरी किए जल निकासी के लिए नई रणनीति पर गंभीरता से विचार कर उसे धरातल पर उतारना चाहिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Flood: देश में बाढ़ की मुसीबतें" href="http://10.0.0.122:1245/flood-troubles-in-the-country/">Flood: देश में बाढ़ की मुसीबतें</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 10:21:07 +0530</pubDate>
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                <title>Monsoon : निकासी के हों उचित प्रबंध</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर भारत में मॉनसून (monsoon) की पहली बारिश ने ही जल निकासी प्रबंधों की पोल खोल दी है। कई शहरों में हालात बदत्तर हैं। चंद महानगरों को छोड़कर छोटे-बड़े शहरों में आज तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई है। नि:संदेह यह सच है कि बारिश के दौरान शहरों के पुराने हिस्सों में हालात निरंतर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/make-proper-evacuation-arrangements/article-49368"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/monsoon-season.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर भारत में मॉनसून (monsoon) की पहली बारिश ने ही जल निकासी प्रबंधों की पोल खोल दी है। कई शहरों में हालात बदत्तर हैं। चंद महानगरों को छोड़कर छोटे-बड़े शहरों में आज तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई है। नि:संदेह यह सच है कि बारिश के दौरान शहरों के पुराने हिस्सों में हालात निरंतर बिगड़ते जा रहे हैं। नई प्लानिंग के मुताबिक बनाई जा रही कॉलोनियों की हालत तो अच्छी है, लेकिन शहरों की केवल 10 फीसदी आबादी ही इन कॉलोनियों में निवास करती है। 90 फीसदी लोग तो आज भी ऐसे पुराने मकानों में रह रहे हैं, जहां सीवरेज की लाइन तक का प्रबंध नहीं है। जिससे यह पता चलता है कि कार्य को योजनाबद्ध रूप से नहीं किया गया। monsoon</p>
<p style="text-align:justify;">चूँकि मुख्य बाजार शहर के पुराने हिस्सों में बने हुए हैं। सरकारों और राजनीतिक दलों में ऐसी इच्छाशक्ति ही नहीं कि वे जनमानस, व्यापारियों, व्यवसायियों और दुकानदारों के साथ बातचीत कर कोई बड़े बदलाव की योजना तैयार कर सकें। कहीं मकानों की हालत न बिगड़ जाए, लोग भी इस डर से व्यवस्था में बदलाव नहीं चाहते। छोटे पैमाने पर रोजगार से जुड़े हुए लोग जर्जर मौहल्लों में रहना ही सही समझते हैं। यह विचारधारा बिजनेस के लिए तो अच्छी है, लेकिन निर्माण नियोजन, खुले बाजार, उचित सीवरेज प्रबंधन की राह में बाधा है। Water evacuation</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारें और राजनीतिक दल वोट बैंक की नीति छोड़ने को तैयार नहीं हैं और मानसून में इन नीतियों का नुकसान समूह जनमानस को झेलना पड़ता है। कोई भी विधायक/सांसद अपने मतदाताओं को नाराज नहीं करना चाहता, इसलिए कई नेता इच्छा के बावजूद सुधारात्मक कदम उठाने से बचते हैं। विधायक/सांसद के पास जाकर वे सुधार संबंधी निर्णयों को रोकने में सफल हो जाते हैं। कई शहरों में नए बस अड्डों और ओवरब्रिजों के निर्माण में किसी न किसी द्वारा बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं ताकि विकास कायो्रं का बाजार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। monsoon</p>
<p style="text-align:justify;">ये तथ्य हैं कि सुधार के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, दीर्घकालीन सोच और ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है। जिन नेताओं में निर्णय लेने का साहस है, वे समाज को नई दिशा दे सकते हैं। बेशक, ऐसे नेताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन आने वाली पीढ़ियां उनके फैसलों की सराहना करेंगी। बारिश में नर्क बन जाने वाले शहरों की सूरत बदलनी है तो सरकार में बैठे नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी सोच बदलनी होगी। monsoon</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Monsoon Health Tips: मॉनसून की दस्तक के बाद, बीमारियों से होगा जीवन अस्त-व्यस्त! जानें क्या है बचाव के उपाय?" href="http://10.0.0.122:1245/monsoon-health-tips/">Monsoon Health Tips: मॉनसून की दस्तक के बाद, बीमारियों से होगा जीवन अस्त-व्यस्त! जानें क्या है बचाव …</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 15:30:38 +0530</pubDate>
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