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                <title>Anmol Vachan - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Anmol Vachan RSS Feed</description>
                
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                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इंसान को मालिक तभी याद आता है जब उसे कोई गम, दु:ख, दर्द या परेशानी हो</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि नाम की महिमा अपरम्पार है और वो जीव बहुत भाग्यशाली होते हैं जो इस घोर कलियुग में उस मालिक के नाम से अपने-आपको जोड़ लेते हैं। इस घोर कलियुग में जीव राम-नाम से जुड़ना तो दूर उसे राम नाम कभी-कभार ही याद आता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-pujya-guru-ji-says-that-a-person-remembers/article-90019"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/msg-bhandara-(7).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि नाम की महिमा अपरम्पार है और वो जीव बहुत भाग्यशाली होते हैं जो इस घोर कलियुग में उस मालिक के नाम से अपने-आपको जोड़ लेते हैं। इस घोर कलियुग में जीव राम-नाम से जुड़ना तो दूर उसे राम नाम कभी-कभार ही याद आता है। इन्सान के अपने बनाए गए जाल ही इतने बड़े हो चुके हैं कि वह काम-धंधे, शारीरिक, पारिवारिक आदि में उलझकर उस मालिक को भुला देता है। वो उसे तभी याद आता है जब उसे कोई गम, दु:ख, दर्द या परेशानी हो। Anmol Vachan </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब इन्सान के सामने कोई मुश्किल आ जाए तो तब उसे मालिक बहुत प्यारा लगता है। फिर वह मालिक का बनने के वायदे करता है, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि जिन जीवों को किसी प्रकार की चिंता, परेशानी नहीं होती उसे मालिक बिल्कुल याद नहीं आता लेकिन दु:ख, चिंता व परेशानी आने पर वह मालिक को ही इसका जिम्मेवार बताकर उसे याद करते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब इन्सान के सामने सभी सुख-सुविधाएं होती हैं तो उसे कोई याद नहीं रहता और इन्सान का मन उसको ही इसका पूरा श्रेय देता है। ये सभी चीजें इन्सान को मालिक से दूर रखती हैं और इन्सान मालिक से दूर होकर परेशान रहता है इसलिए आप अगर वाकई प्रभु से खुशियों की प्राप्ति करना चाहते हैं तो प्रभु के नाम का सुमिरन व भक्ति-इबादत किया करें। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:44:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Anmol Vachan: प्रभु-परमात्मा को अपना साथी बनाना है तो करो यह जरूरी काम!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि उस प्रभु को अपना साथी बनाना है तो यह जरूरी है कि इन्सान नेकी-भलाई के रास्ते पर चले, उस परमात्मा का नाम जपे। तड़प कर उस अल्लाह, मालिक को अपना बना लो और एक बार जब वह आपका हो गया तो कभी भी वह बिछोड़ा नहीं करता। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-if-you-want-to-make-god-your-companion/article-89971"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/msg-bhandara11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि उस प्रभु को अपना साथी बनाना है तो यह जरूरी है कि इन्सान नेकी-भलाई के रास्ते पर चले, उस परमात्मा का नाम जपे। तड़प कर उस अल्लाह, मालिक को अपना बना लो और एक बार जब वह आपका हो गया तो कभी भी वह बिछोड़ा नहीं करता। इसलिए आप ऐसा साथी बनाओ जो पक्का हो। जिसे आप साथी समझ बैठते हैं उसके बारे में तो भगवान जानता है कि किसको, कितने श्वास दिए हैं। इसलिए उसको साथी बनाओ जो श्वास देता है। जब वो आपका अपना हो जाएगा तो आप दुनिया में बहार की तरह जीवन गुजारेंगे वरना पतझड़ का मौसम आ जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि दुनिया के प्यार की शुरुआत स्वार्थ से होती है। दुनियादारी में लोग खो जाते हैं और अल्लाह, मालिक, राम, कायदे-कानून सब भूल जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि जब उस राम की मार पड़ती है तो आदमी को कोई रास्ता नजर नहीं आता। इसलिए सेवा-सुमिरन करो, भक्ति की चाह करो। उससे सब कुछ मांगो और वो देगा, अंदर-बाहर से मालामाल कर देगा। इसलिए उस परमात्मा से कभी भी मुंह न मोड़ो। मालिक का सुमिरन, भक्ति-इबादत करते रहो तो अंदर-बाहर से लबरेज हो जाओगे। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप अपनी मर्जी से जीते रहो, संतों को उससे कुछ लेना-देना नहीं है। बस, बुराई न करो, बुरे कर्म न करो क्योंकि जब बुराई का लेखा-जोखा होगा तो आपको पश्चाताप होगा। आप तड़पोगे और दोष संतों को दोगे। अपने आपको कोई दोष नहीं देता और संतों को दोष देने में देर नहीं लगती। संत जब प्यार से, हाथ जोड़-जोड़ कर समझाते हैं कि मान जाओ, बुरे कर्म न करो। तब तो संतों का मजाक उड़ाते हो और जब कर्मों की मार पड़ती है तो संतों को दोष क्यों देते हो? इसलिए बुरे कर्मों से बच जाओ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 09:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Anmol Vachan: जब कोई मुश्किल आती है, तब मालूम पड़ता है, सच्ची प्रीत किसकी है?</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जब तक इन्सान मुर्शिदे-कामिल की शरण में नहीं आता, उसे यह मालूम नहीं होता कि सच्ची प्रीत किसकी है। इन्सान बहुत से यार, दोस्त, मित्र बनाता है, रिश्ते-नाते जोड़ता है लेकिन जब कोई मुश्किल आती है, तब मालूम पड़ता है कि सारे ही रास्ता छोड़ गए। उस समय कोई हमराही बनता है तो वो ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम बनता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-when-any-difficulty-comes-then-we-know-whose/article-89926"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan)फरमाते हैं कि जब तक इन्सान मुर्शिदे-कामिल की शरण में नहीं आता, उसे यह मालूम नहीं होता कि सच्ची प्रीत किसकी है। इन्सान बहुत से यार, दोस्त, मित्र बनाता है, रिश्ते-नाते जोड़ता है लेकिन जब कोई मुश्किल आती है, तब मालूम पड़ता है कि सारे ही रास्ता छोड़ गए। उस समय कोई हमराही बनता है तो वो ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम बनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आपने अपने सतगुरु, अल्लाह को अपना बना रखा है तो वो आपके अंग-संग धुनकारें देता है और आप कभी अकेले नहीं होंगे। इसलिए सच्चा मीत, सच्चा मित्र जो दोनों जहान में साथी है, वो सतगुरु, ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब है। अगर प्यार या वैराग्य करना है तो सतगुरु, मौला के वैराग्य में आओ। उसकी याद में तड़प कर तो देखो, वो क्या नहीं कर सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान धन-दौलत, नौकरी, बेटा-बेटी, बहन-भाई के लिए आंसू बहाता है। यही आंसू कभी उस अल्लाह, राम के लिए बहाकर देखो तो एक-एक आंसू हीरे-मोती, जवाहरात बन जाएगा, लेकिन हैरानी की बात यही है कि लोग मालिक के लिए नहीं बल्कि दुनियावी साजो-सामान के लिए पागल हो जाते हैं और वो पागलपन बता देता है कि आप किसमें, कितनी हद तक खोए हुए हैं। जिसे आदमी अपना पक्का साथी समझता है वो पता नहीं कब साथ छोड़ जाए। इसलिए अगर साथी ही बनाना है तो उस दोनों जहान के मालिक, अल्लाह, वाहेगुरु, राम को बनाइए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान इस संसार में किस वजह से दुखी, परेशान है?</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान इस संसार में किसी और वजह से नहीं, बल्कि अपने कर्मों की वजह से दुखी, परेशान है। खुद के पाप-कर्म, खुद की बुराइयां बढ़ती जाती हैं तो इन्सान के दु:ख-परेशानियों में बढ़ोतरी होती चली जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-says-that-why-are-humans/article-89652"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/sister-side-1024x580.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान इस संसार में किसी और वजह से नहीं, बल्कि अपने कर्मों की वजह से दुखी, परेशान है। खुद के पाप-कर्म, खुद की बुराइयां बढ़ती जाती हैं तो इन्सान के दु:ख-परेशानियों में बढ़ोतरी होती चली जाती है। खुद की वो बुरी आदतें, परेशानियां इस जन्म की हो सकती हैं, जन्म-जन्म के पाप-कर्म की हो सकती हैं। इन परेशानियों से अगर इन्सान बचना चाहे तो वह अपने आत्म-विश्वास को बुलंद करे। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आत्म-विश्वास अगर आपके अंदर है तो आप अपने अंदर की तमाम बुरी आदतों, परेशानियों को पल में दूर कर सकते हैं। आत्म-विश्वास सबसे जल्दी अगर बढ़ता है तो उसका एकमात्र उपाय सुमिरन है, भक्ति-इबादत है। जब आप सुमिरन करेंगे तो आपके अदंर सहन शक्ति बढ़ेगी। अगर सहन शक्ति बढ़ेगी तो आप अंदर की बुराइयों पर जीत हासिल कर सकेंगे। कोई आपको बुरा कहता है, गाली देता है  तो सहनशक्ति बढ़ने से ही उसका आप पर असर नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वरना तो यूं लगता है जैसे नंगी तारों को छू लिया हो। जरा-सी बात किसी को कह दो तो वह तमतमा जाता है। गुस्से में बुरा हाल हो जाता है, क्योंकि आज आत्म-विश्वास किसी के अंदर है ही नहीं। उनके अंदर जरूर है जिनको अपने सतगुरु, मौला पर दृढ़ विश्वास है। सुमिरन करते हैं, मां-बाप के अच्छे संस्कार हैं। उनके अंदर यह भावना रहती है कि वो अपने अल्लाह-मौला के हुक्मानुसार मालिक की भक्ति-इबादत करते हुए सबका भला मांगते रहते हैं। जब आप सबका भला मांगते हैं तो मालिक आपका भला जरूर करता है, क्योंकि जैसी आपकी भावना है, वैसा आपको फल जरूर मिलेगा। ‘राम झरोखे बैठके सबका मुजरा ले, जैसी जिसकी भावना वैसा ही फल दे।’ Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:14:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: इन्सान अपनी बुराई को ऐसे छोड़ सकता है!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो इन्सान मालिक की भक्ति -इबादत करता है, उसकी याद में तड़पता है, मालिक उनके दिलो दिमाग में बस जाता है। वो मालिक से यही मांगते हैं कि उसे हमेशा मालिक का दीदार होता रहे, वो हमेशा मालिक के प्यार में खोया रहे और दुनिया से बेगाना हो जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-man-can-leave-his-evil-like-this/article-89601"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/sirsa-1024x576.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि जो इन्सान मालिक की भक्ति -इबादत करता है, उसकी याद में तड़पता है, मालिक उनके दिलो दिमाग में बस जाता है। वो मालिक से यही मांगते हैं कि उसे हमेशा मालिक का दीदार होता रहे, वो हमेशा मालिक के प्यार में खोया रहे और दुनिया से बेगाना हो जाए। वह यही दुआ करता है कि हे ओउम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड ऐसा रहमो-करम कर कि तेरी याद के सिवाय और कुछ याद ही न रहे। ईर्ष्या, नफरत, दुई-द्वेष के लिए कोई जगह न बचे। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को सुबह शाम सुमिरन के लिए समय निश्चित करना चाहिए और बाद में अपने गुजरे हुए समय के बारे में कुछ न कुछ अवश्य सोचना चाहिए कि उसने बीते समय में कितने गलत और कितने सही कर्म किए हैं। जो गलत किया है उसे आने वाले समय के लिए बाहर निकाल देना चाहिए और अच्छी आदतें अपनानी चाहिए। सुमिरन के द्वारा ही इन्सान अपनी बुराई को छोड़ सकता है। सुमिरन करके इन्सान अपनी बुरी आदतों को छोड़ दे और अच्छी आदतों को दृढ़ता से अपनाए तो मालिक अपनी दया-मेहर उस इन्सान पर जरूर करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान अगर दूसरों को देख-देख कर जलता-भुनता रहता है तो वह अपनी भक्ति, प्यार, मोहब्बत और अपनी सेवा का फल खत्म कर लेता है। फिर तकलीफें, गम, चिंता, परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। इसलिए दूसरों की बुराइयां, उनके गुनाह नहीं देखने चाहिए बल्कि अपनी बुराई, गुनाह को देखो और सुमिरन के द्वारा उनको खत्म करके खुद को पाक -साफ बनाओ। जहां भी कोई निंदा, चुगली हो वहां से कान हटा लेना चाहिए, यानि उनके पास नहीं जाना चाहिए क्योंकि  निंदा, चुगली आपकी की हुई सारी भक्ति को तबाह कर देती है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:29:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: ''काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन व माया के पर्दे एक-एक करके गिरते चले जाते हैं''</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ऐसी कोई जगह नहीं, जहां वह परमपिता परमात्मा न हो। वो कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। कोई ऐसा सैकेंड नहीं होता, सैकेंड तो क्या सैकेंड का 100वां हिस्सा भी नहीं होता जब मालिक सारी त्रिलोकियों में न हो। हर समय, हर पल, हर जगह वो मौजूद रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-the-curtains-of-lust-anger-greed-attachment-ego/article-89558"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि ऐसी कोई जगह नहीं, जहां वह परमपिता परमात्मा न हो। वो कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। कोई ऐसा सैकेंड नहीं होता, सैकेंड तो क्या सैकेंड का 100वां हिस्सा भी नहीं होता जब मालिक सारी त्रिलोकियों में न हो। हर समय, हर पल, हर जगह वो मौजूद रहता है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान अगर आत्मिक आवाज को सुनता हुआ अच्छे कर्म करता है, तो मालिक उसके और नजदीक होता चला जाता है। काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन व माया के पर्दे एक-एक करके गिरते चले जाते हैं, आत्मा-परमात्मा का मेल होने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि अगर इन्सान मन के अधीन होकर मनमते लोगों की सुनता है, तो पर्दे मजबूत होते चले जाते हैं और मालिक अंदर होते हुए भी कभी भी महसूस नहीं होता। आप आत्मा, परमात्मा के बीच में जो पर्दें हैं, उनको गिराने के लिए सेवा और सुमिरन का सहारा लो। यही ऐसी ताकतें हैं, यही ऐसी शक्तियां हैं, जो आपके अंत:करण को साफ कर सकती हैं, आपके मन को आपका गुलाम बना सकती हैं और मन की गुलामी से आपको आजाद करवा सकती हैं। इसलिए तन-मन-धन से सेवा करो, मालिक की औलाद का भला करो और साथ में सुमिरन करो। आप जी फरमाते हैं कि सुमिरन में ऐसी शक्ति है कि इन्सान एक घंटा सुबह-शाम सुमिरन करे तो मालिक की दया-मेहर, रहमत बरसनी शुरु हो जाएगी। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंत:करण की सफाई कैसे होगी व बुरे विचार अंदर से ऐसे जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[संत, पीर, फकीर सत्संग में जीवों को मालिक के नाम का जाप करने का संदेश देते हैं। जिससे इन्सान के अंत:करण की सफाई होगी और बुरे विचार अंदर से चले जाएंगे और इसके पश्चात आप अपने विचारोें पर काबू पाना स्वयं सीख जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-says-that-how-will-a/article-89508"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/msg-bhandara11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि आज इन्सान दु:खी इसलिए है क्योेंकि उसके विचार काबू में नहीं। उसके विचार बेलगाम घोड़े की तरह दौड़ते रहते हैं। इन्सान के लिए बुरा सोचना व बुरा करना आज आम बात हो गई है। इन्सान काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, माया में बुरी तरह फंस गया है। इनमें फंसकर इतना अहंकारी और खुद गर्ज हो गया है कि उसे अपने अलावा कोई दूसरा नजर ही नहीं आता। इन्सान के लिए जरूरी है इन्सानियत को जिंदा रखते हुए अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करना। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">संत, पीर, फकीर सत्संग में जीवों को मालिक के नाम का जाप करने का संदेश देते हैं। जिससे इन्सान के अंत:करण की सफाई होगी और बुरे विचार अंदर से चले जाएंगे और इसके पश्चात आप अपने विचारोें पर काबू पाना स्वयं सीख जाएंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग में चलकर आने से ही इन्सान को इन्सानियत के बारे व इन्सानियत का रास्ता पकड़ने के लिए क्या-क्या करना चाहिए इस बारे में पता चलता है। किसी को दु:ख दर्द में तड़पता देखकर उसके गम, दु:ख व परेशानियों को दूर करना ही सच्ची इन्सानियत है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:01:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: बहुत भागों, नसीबों से इन्सान को मिलने वाला 'शब्द' जो भाग्य बदल देता है!</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम-शब्द बहुत भागों, नसीबों से इन्सान को मिलता है। सुमिरन करे तो भाग्य बदल जाते हैं, सुमिरन न करे तो अपने कर्मों का बोझ इन्सान को उठाना पड़ता है। मालिक का नाम जब इन्सान को मिल जाता है, तो उसके बाद उसका सुमिरन करना अति जरूरी होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-the-word-that-a-person-gets-through-many/article-89373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/maha-rehmokaram-diwas-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि नाम-शब्द बहुत भागों, नसीबों से इन्सान को मिलता है। सुमिरन करे तो भाग्य बदल जाते हैं, सुमिरन न करे तो अपने कर्मों का बोझ इन्सान को उठाना पड़ता है। मालिक का नाम जब इन्सान को मिल जाता है, तो उसके बाद उसका सुमिरन करना अति जरूरी होता है। जब तक आप सुमिरन नहीं करेंगे, आपकी मनोइंद्रियां काबू में नहीं आएंगी और आप मन के हाथों मजबूर हो सकते हैं। इसलिए आप सुमिरन के पक्के बनो। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आप लगातार घंटा-घंटा सुबह-शाम सुमिरन करते हैं, तो आपके आने वाले पहाड़ जैसे कर्म कंकर में बदलते हैं और लगातार सुमिरन करने से वो कंकर की चुभन भी महसूस नहीं होती। इसलिए इन्सान को सुमिरन का पक्का बनना चाहिए। आप सुमिरन के लिए समय निश्चित करो। वैसे आप सुबह 2 से 5 बजे के बीच में कभी भी जागो, उसके बाद घंटा सुमिरन करो। अगर ऐसा संभव नहीं है तो जब भी जागो, तब टाइम फिक्स कर लो कि यह समय मालिक को देना ही है। वैसे टाइम मालिक को नहीं देना, बल्कि उस टाइम में मालिक से बहुत कुछ लेना है। जब तक आप टाइम फिक्स नहीं करते, तब तक आप सुमिरन नहीं कर सकेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि जब आप सुमिरन में बैठेंगे, तो कुछ समय तक आपका ध्यान नहीं जमेगा। आपको जम्हाई आएगी, कभी खाज-खुजली हो जाएगी, कभी ध्यान इधर-उधर चला जाएगा, लेकिन आप फिर भी सुमिरन करना मत छोड़ो। क्योंकि इस कलियुग में आपने जितना भी सुमिरन कर लिया, उसका फल मिलना ही मिलना है। इसलिए आप सुमिरन करना मत छोड़िए, अपने-आप मन अपनी आदतें छोड़ देगा। शुरू-शुरू में वो अड़चनें पैदा करता ही करता है, बहुत लोग उन अड़चनों में अड़ कर ही सुमिरन करना छोड़ देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो अड़चनों की परवाह नहीं करते और सुमिरन पर लगे रहते हैं, तो फिर उनका मन उन्हें तंग करना बंद कर देता है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-the-word-that-a-person-gets-through-many/article-89373</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:38:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: यदि सच्चे हृदय और भावना से ऐसा कर लिया जाए तो हर चिंता से मुक्ति मिल जाए!</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि  मालिक का नाम वो खुशियां और बरकतें देता है, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। यदि इन्सान सच्चे हृदय और भावना से प्रभु का नाम लेता है तो प्रभु उस इन्सान को हर चिंता से मुक्त कर देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-if-this-is-done-with-a-true-heart/article-89329"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/maha-rehmokaram-diwas-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan)फरमाते हैं कि  मालिक का नाम वो खुशियां और बरकतें देता है, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। यदि इन्सान सच्चे हृदय और भावना से प्रभु का नाम लेता है तो प्रभु उस इन्सान को हर चिंता से मुक्त कर देता है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि परमात्मा का कोई सच्ची भावना, सच्चे हृदय से नाम लेता है तो वो मालिक, परमात्मा उसकी तमाम मुश्किलों को हल कर देता है, तमाम चिंताओं से मुक्ति दिला देता है और अंदर ऐसा आत्मबल, आत्मविश्वास भर देता है कि इन्सान मालिक की वो बरकतें खुशियां हासिल करता है, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर समय परमात्मा का गुणगान, अपने सतगुरु मौला के गुणगान गाते रहना चाहिए। जब तक इन्सान परमपिता के गुणगान नहीं गाता, जब तक उसकी दया मेहर, रहमत के काबिल नहीं बनता तब तक सुमिरन ध्यान से, लगन से करना चाहिए और जब उसकी रहमत हो जाती है, फिर सुमिरन करना नहीं पड़ता, अपने आप चलने लग जाता है। इसलिए जब तक आपके अंदर नूरी स्वरूप के दर्शन नहीं होते, जब तक अंत:करण की भावना मालिक से जुड़ती नहीं, शुद्ध नहीं होती तब तक लगातार सुमिरन करते रहिए। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-if-this-is-done-with-a-true-heart/article-89329</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:02:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी ने फरमाया...हमेशा  परमानंद देने वाला कौन है?</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में प्रभु का नाम सुखों की खान है। परमपिता परमात्मा के नाम के बिना दुनिया में परेशानियां हैं, दु:ख, तकलीफें, मुश्किलें हैं। केवल प्रभु, ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु, परमपिता परमात्मा का नाम परमानंद देने वाला है। इसलिए हमेशा प्रभु के नाम का सुमिरन करो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-said-who-is-the-one/article-89246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में प्रभु का नाम सुखों की खान है। परमपिता परमात्मा के नाम के बिना दुनिया में परेशानियां हैं, दु:ख, तकलीफें, मुश्किलें हैं। केवल प्रभु, ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु, परमपिता परमात्मा का नाम परमानंद देने वाला है। इसलिए हमेशा प्रभु के नाम का सुमिरन करो। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि चलते, बैठे, कामधंधा करते जितना भी समय आप सुमिरन कर सकें करते रहना चाहिए। क्योंकि वो किया गया सुमिरन कभी बेकार नहीं जाता, उसका फल लाजमी मिलता ही मिलता है।  जब भी आप सुमिरन करेंगे मालिक मंजूर (कबूल) जरूर करेंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर सुन्न समाधी में जाना हो, मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन करने हों,  तो उसके लिए जरूरी है आप बैठकर सुमिरन करें।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह 2 से 5 के बीच में अगर आप सुमिरन करें तो आपके  गम, चिंता, परेशानियां दूर होंगी व मालिक के नजारे आने शुरू हो जाएंगे। इसलिए सुमिरन करो, चाहे शारीरिक व्यवस्था कैसी भी क्यों न हो। किया गया  सुमिरन मालिक की दरगाह में मंजूर (कबूल) जरूर होता है। इसलिए मालिक को पाने के लिए सुमिरन जरूर करें, जिससे आपकी कमियां दूर होंगी आप मालिक की दया, मेहर रहमत के काबिल बन जाएंगे। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 08:53:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं ...मालिक का रहमो-कर्म किन किन जीवों पर बरसता है?</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का रहमो-कर्म हर उस जीव पर बरसता है, जिनके अंत:करण में मालिक के प्रति प्यार और जुबां पर सबका भला होता है, मालिक उन्हें अंदर-बाहर से खुशियों से नवाजते रहते हैं। जो लोग दोगली नीति में चला करते हैं, उनके लिए नरकों का रास्ता खुला रहता है। इसलिए शुद्ध भावना से परमात्मा को याद किया करो ताकि वो आप पर दया-मेहर करे और आपकी जिंदगी में खुशियां भर दे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-says-that-on-which-living/article-89197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/msg-bhandara-5-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि मालिक का रहमो-कर्म हर उस जीव पर बरसता है, जिनके अंत:करण में मालिक के प्रति प्यार और जुबां पर सबका भला होता है, मालिक उन्हें अंदर-बाहर से खुशियों से नवाजते रहते हैं। जो लोग दोगली नीति में चला करते हैं, उनके लिए नरकों का रास्ता खुला रहता है। इसलिए शुद्ध भावना से परमात्मा को याद किया करो ताकि वो आप पर दया-मेहर करे और आपकी जिंदगी में खुशियां भर दे। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो लोग सच्चे दिल से मालिक से दुआ करते हैं, मालिक से मोहब्बत करते हैं, उसे अंदर-बाहर कोई कमी नहीं छोड़ते। खुशी इन्सान से दूर नहीं है, बल्कि इन्सान खुशियों से दूर हो जाता है। अगर आप वाकई मालिक के रहमो-कर्म के हकदार बनना चाहते हैं, उसकी रहमत को हासिल करना चाहते हैं, तो यह बहुत जरूरी है कि नाम का सुमिरन करें, तन-मन-धन से दीन-दुखियों की मदद करें, तो यकीनन आपके और मालिक के बीच की दूरी खत्म होगी और आप मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बन जाएंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सुमिरन और सेवा ऐसे तरीके हैं, जिसके द्वारा इन्सान मालिक से तमाम खुशियां ले सकता है। सच्ची भावना से मालिक को याद करो। मालिक से मालिक को मांगते हुए जो लोग आगे बढ़ते हैं, वो मालिक के रहमो-कर्म से मालामाल हो जाते हैं। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 08:50:10 +0530</pubDate>
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                <title>Anmol Vachan: ''सोचने से पहले ही की हर जायज मांग को पूरा कर देता है वो परमात्मा''</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा वो तमाम खुशियां इन्सान को बख्शता है, जिनकी इन्सान ने कल्पना भी नहीं की होती। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-god-fulfills-every-legitimate-demand-even-before-thinking/article-89137"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/msg-bhandara-91.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा वो तमाम खुशियां इन्सान को बख्शता है, जिनकी इन्सान ने कल्पना भी नहीं की होती। वो मालिक, दाता-रहबर हर खुशी इन्सान को अता करता है, अगर इन्सान उसका बनता है। उसका बनने के लिए जरूरी है प्रभु के नाम का सुमिरन करना, उसकी औलाद की सेवा करना, व्यवहार व अंत:करण के साफ व सच्चे बनना। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा इन्सान को सोचने भी नहीं देता, इससे पहले ही उसकी हर जायज मांग को पूरा कर देता है। वो सबकुछ जानता है। क्योंकि अंधा कुछ नहीं देख सकता लेकिन आंखों वाला तो सबकुछ देखने में सक्षम होता है। जिसकी आंखें नहीं क्या पता कब दल-दल में फंस जाए, कब सूलों पर चल पड़े, क्या पता कब खड्ढे में गिर जाये। लेकिन जिनके आंखें होती हैं उन्हें तो पता चलता है कि सामने दल-दल है, खड्डा है, कांटें हैं। उसी तरह अल्लाह, वाहेगुरू, राम को आपके आने वाले और पिछले सब कर्मों का पता होता है। आपके साथ क्या होने वाला है? क्या हुआ था? उसको सब मालूम है।</p>
<p style="text-align:justify;">परमपिता परमात्मा आपके आने वाले दु:ख, परेशानियों को दूर कर देगा। इसलिए सच्ची भावना, श्रद्धा से उसके साथ तार जोड़ कर रखो। वो कभी किसी का बुरा नहीं करता बल्कि सभी का भला करता है। अगर इन्सान वचनों पर अमल करे तो परमपिता परमात्मा उसे दोनों जहान की खुशियां बख्श देता है। सेवा व सुमिरन द्वारा अपनी कमियों को दूर करो। सुमिरन व सेवा के बिना आपकी कमियां दूर नहीं होंगी, आप मालिक की कृपा दृष्टि के काबिल नहीं बन पाएंगे। इसलिए अपनी कमियों को अपने अंदर से निकाल डालो। परमपिता परमात्मा से चालाकी नहीं चलती, उसे सब मालूम है। पर वो दया का सागर है, रहमत का दाता है। आप अपने अंदर की सफाई रखो। अगर भावना साफ है, तो परमपिता परमात्मा जरूर दया मेहर रहमत से नवाज देगा। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 08:46:06 +0530</pubDate>
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