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                <title>Anmol Vachan - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>वचनों को मानने से ही आती हैं खुशियां: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में मौजूद है। उसका रहमो-कर्म मूसलाधार बरसता है, पर भाग्यशाली वही हैं जो उसके बरसते रहमो-कर्म को महसूस करते हैं। उन्हें फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमात्मा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/happiness-comes-only-by-following-the-vachan/article-79031"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/msg-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में मौजूद है। उसका रहमो-कर्म मूसलाधार बरसता है, पर भाग्यशाली वही हैं जो उसके बरसते रहमो-कर्म को महसूस करते हैं। उन्हें फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमात्मा की खुशियां तभी हासिल होती हैं, जब इन्सान को पूर्ण पीर, फकीर मिले और जीव उनके वचनों पर अमल करे। दरगाह में आत्मा के लिए सत्संग का फल मिलता है, लेकिन तीन परहेजों में गलती करते हो,  तो वो भयानक सजा भी भोगनी पड़ती है। तीन वचनों के अलावा कोई और गलती होती है, तो इन्सान सच्चे दिल से सुमिरन करे, तौबा करे, सत्संग में आकर माफी ले लेता है तो साथ ही साथ माफ हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अगर तीन परहेजों में गलती करता है और सेवा करता है तो उससे जो बरकतें आनी चाहिएं, जो बेइन्तहा खुशियां मिलनी चाहिएं, उससे इन्सान खाली रह जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आप संत, पीर-फकीर के साथ लगे हैं, तो वचनों पर अमल करना सीखो। आप दुनियादारी के लोगों को बुद्धू बना सकते हैं, उन्हें गुमराह कर सकते हैं, उनको पता नहीं चलने देते, लेकिन परमात्मा जो हर किसी के अंदर मौजूद है, उससे आप कोई पर्दा नहीं कर सकते। संत हर किसी का पर्दा रखते हैं और सबसे प्यार करते हैं, सबको मोहब्बत से नवाजते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचन मानना अति जरूरी है। अगर आपका रुतबा है, तो उसके नाम का। रूहानियत में अगर कोई आपको दुआ, सलाम करता है। आपकी इज्जत, सत्कार करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आपके कोई अलग से ताज लगा हुआ है या आप अलग से कुछ नए भाग्य लेकर पैदा हुए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वचनों को मानने…</h3>
<p style="text-align:justify;">यह तो मालिक के नाम का रहमो-कर्म है। तू गुरमुख है, सतगुरु का मुरीद है, तू उसका अजीज है, तू भक्ति करता है, तू सेवादार है, इसलिए लोग सत्कार करते हैं। बाकि जैसे आम आदमी हैं, वैसा ही तू है। बस उसके (मालिक के) नाम को सलाम है। इसलिए उसका नाजायज फायदा न उठाओ। वरना लेने के देने पड़ते हैं। इन्सान गलतियां करता है, वचनों की परवाह नहीं करता, तो सब खुशियां चली जाती हैं और अगर वचन मानने शुरू करता है और 100 प्रसेंट वचन मान ले, तो खुशियां वापिस आ जाती हैं। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचनों में गलती करने को मखौल मत समझा करो। संतों का काम माफी देना और दिलवाना है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप खुश रहेंगे। आपकी उम्र कम हो सकती है, आपके स्वास तेजी से चलेंगे और आपका टाईम पीरियड कम हो जाएगा। आपको बीमारियां लग सकती हैं। आप परिवार की तरफ से, शरीर की तरफ से टेंशन में आ जाओगे। ये सब गलती करने के साईड इफेक्ट हैं। आदमी गलती करता है तो उसके बैक गेयर लग जाता है और जैसे-जैसे गलतियां करता जाता है, उसके बैक गेयर की स्पीड भी बढ़ती जाती है। इसलिए गलतियां न करो। संत, पीर-फकीरों की दया को मखौल मत समझो। वो दया करते हैं, क्योंकि वो दयालु होते हैं। मालिक का नूर वो हर किसी तक पहुंचाते हैं, इसलिए दया करते रहते हैं। पर, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप गलतियां करते ही चले जाएं, बुरे कर्म करने से बाज ही न आओ।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तो मालिक के नाम का रहमो-कर्म है। तू गुरमुख है, सतगुरु का मुरीद है, तू उसका अजीज है, तू भक्ति करता है, तू सेवादार है, इसलिए लोग सत्कार करते हैं। बाकि जैसे आम आदमी हैं, वैसा ही तू है। बस उसके (मालिक के) नाम को सलाम है। इसलिए उसका नाजायज फायदा न उठाओ। वरना लेने के देने पड़ते हैं। इन्सान गलतियां करता है, वचनों की परवाह नहीं करता, तो सब खुशियां चली जाती हैं और अगर वचन मानने शुरू करता है और 100 प्रसेंट वचन मान ले, तो खुशियां वापिस आ जाती हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचनों में गलती करने को मखौल मत समझा करो। संतों का काम माफी देना और दिलवाना है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप खुश रहेंगे। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी उम्र कम हो सकती है, आपके स्वास तेजी से चलेंगे और आपका टाईम पीरियड कम हो जाएगा। आपको बीमारियां लग सकती हैं। आप परिवार की तरफ से, शरीर की तरफ से टेंशन में आ जाओगे। ये सब गलती करने के साईड इफेक्ट हैं। आदमी गलती करता है तो उसके बैक गेयर लग जाता है और जैसे-जैसे गलतियां करता जाता है, उसके बैक गेयर की स्पीड भी बढ़ती जाती है। इसलिए गलतियां न करो। संत, पीर-फकीरों की दया को मखौल मत समझो। वो दया करते हैं, क्योंकि वो दयालु होते हैं। मालिक का नूर वो हर किसी तक पहुंचाते हैं, इसलिए दया करते रहते हैं। पर, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप गलतियां करते ही चले जाएं, बुरे कर्म करने से बाज ही न आओ।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 09:34:40 +0530</pubDate>
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                <title>‘बस ये काम कर लो, नहीं रहेगी अंदर-बाहर कोई कमी’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज़)। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को चाहे दुनिया का कितना भी तजुर्बा आ जाए, पर वह मालिक की तरफ से तब तक नन्हा बच्चा ही रहता है, जब तक इन्सान सत्संग नहीं सुनता, अमल नहीं करता। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/just-do-this-work-there-will-be-no-shortage-inside-or-outside/article-78632"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/anmol-vachan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को चाहे दुनिया का कितना भी तजुर्बा आ जाए, पर वह मालिक की तरफ से तब तक नन्हा बच्चा ही रहता है, जब तक इन्सान सत्संग नहीं सुनता, अमल नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपने मन-जालिम की वजह से दिखता कुछ और है, करता कुछ और है। ऐसे में इन्सान कभी सुख हासिल नहीं कर पाता। फिर वो जीव भाग्यशाली होते हैं जो मन से लड़ते हुए सत्संग में आते हैं। जीवों के कोई अच्छे संस्कार होते हैं कि जीव सत्संग में आ जाता है और मन की नहीं मानता। हालांकि मन तरह-तरह के विचार देता है, लेकिन जीव विचारों पर अमल नहीं करता तो वह विचारों के फल से बच जाता है। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने बुरे विचारों को काबू करना चाहिए। अगर इन्सान को बुरे विचार आते हैं तो उसी समय सुमिरन कर लो। फिर धीरे-धीरे ये विचार आने बंद हो जाएंगे, लेकिन मन ऐसा जादूगर योद्धा है, जो थकता नहीं है। इसलिए ऐसा नहीं है कि आपके पांच मिनट के सुमिरन से मन काबू आ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong> अत:</strong> आप भी हिम्मत वाले बन जाओ कि जब मन शुरू होगा तो मैं भी शुरू हो जाऊंगा। तो यकीन मानिए कि बुरे विचारों का लेश मात्र भी असर आपकी भक्ति पर या आपकी जिंदगी पर नहीं आएगा। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने विचारों को सोच-सोचकर बीमार नहीं होना चाहिए कि अब तो मुझे खुशी नहीं, रहमत नहीं है। अब तो मैं दुखी हो जाऊंगा। अगर आप ऐसा करते रहोगे तो ये मन की चालें हैं। इसलिए मन की कभी न सुनो और मन से लड़ते रहो। सुमिरन करने से मन कंट्रोल में आ जाएगा और एक दिन आत्मा की जीत जरूर होगी। वो दिन आपके लिए सबसे सुखों भरा होगा, खुशियां लेकर आएगा। सिर्फ आपके ही नहीं बल्कि परिवारों के चेहरे भी खुशियों से लबरेज हो जाएंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="वोटर लिस्ट सुधार व कूड़ा कलेक्शन की जांच को घर-घर पहुंचे डीएम-कमिश्नर" href="http://10.0.0.122:1245/dm-commissioner-goes-door-to-door-to-inspect-voter-list-corrections-and-garbage-collection/">वोटर लिस्ट सुधार व कूड़ा कलेक्शन की जांच को घर-घर पहुंचे डीएम-कमिश्नर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:39:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘सोने पे सुहागा है सेवा के साथ किया गया सुमिरन’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक के प्यार-मोहब्बत में चलना बड़ा मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। मुश्किल इसलिए है, क्योंकि काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया ऐसे दुश्मन हैं, जो नजर नहीं आते, लेकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/it-is-very-difficult-to-walk-in-the-love-and-affection-of-the-lord-in-this-terrible-kali-yuga/article-69325"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/saint-dr.-msg-4-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक के प्यार-मोहब्बत में चलना बड़ा मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। मुश्किल इसलिए है, क्योंकि काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया ऐसे दुश्मन हैं, जो नजर नहीं आते, लेकिन बहुत बड़ा घात करते हैं। ये इन्सान को दुखी, परेशान रखते हैं और इनके साथ-साथ मनमते लोग भी होते हैं। जब इन्सान इस सारे चक्रव्यूह में फंस जाता है, तो मालिक का प्यार-मोहब्बत उसे बकबका लगने लगता है और दुनियादारी का साजो-सामान बड़ा मीठा लगता है। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक का प्यार-मोहब्बत, उसका नाम दोनों जहान में हमेशा अमर रहने वाला है। हमेशा मस्तो-मस्त रहने वाला है। कुनैन कोई नहीं लेना चाहता, लेकिन जब लेनी पड़ती है, तो बुखार का खात्मा कर देती है। पहले कुनैन बहुत कड़वी होती थी। इसलिए दूध को मीठा करके उसके साथ कुनैन लिया जाता था। आजकल बड़ा आसान है, कुनैन पर पहले से ही चीनी का थोड़ा लेप चढ़ा होता है। उसी तरह पहले समय में अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम लेना बड़ा मुश्किल होता था। सारी-सारी उम्र उसकी याद में बैठना पड़ता था और तब कहीं जाकर मालिक के प्यार-मोहब्बत की एक झलक मिलती थी। इस कलियुग में संतों ने आसान तरीका बना दिया। उठते-बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए अभ्यास करें, तो जो उम्र बीत जाने के बाद मिलता था, वो कुछ घंटों की भक्ति-इबादत से भी हासिल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि कलियुग में इन्सान को गम, दु:ख, दर्द, परेशानियों का सामना तो करना पड़ता है। मन-इंद्रियां बड़े फैलाव में हैं, लेकिन इसके साथ ही कलियुग में मालिक का नाम जपना बड़ा आसान भी है। आप किसी भी तरीके से नाम का जाप करें, उसका असर लाजमी होगा और उसका फल आपको जरूर मिलेगा। इसलिए आप चलते, बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए मालिक के नाम का सुमिरन करें। सुमिरन करने से ही मालिक का प्यार बढ़ता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप बुराई, निंदा करने वालों का साथ देने लग जाते हैं तो सारी करी-कराई भक्ति का नाश हो जाता है। इन्सान बेचैन, परेशान होने लगता है और मालिक के प्यार से दूर होता चला जाता है। आप मालिक से ओड़ निभाना चाहते हैं, तो सुमिरन के पक्के बनो, सेवा करो और दुनियादारी में रहते हुए व्यवहार के सच्चे बनो। ठगी, बेइमानी, भ्रष्टाचार से दूर रहो। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">निंदा-चुगली से जितना हो सके दूर रहो और यह सब संभव है, जब आप सुमिरन करते हैं। सुमिरन के बिना यह संभव नहीं है। अगर आप सुमिरन नहीं करते तो आपकी मन-इंद्रियां फैलाव में रहेंगी, क्या पता कब दगा दे जाएं। जो लोग तन-मन-धन से परमार्थ करते हैं, उनके लिए भी जरूरी है कि आप भी थोड़ा सुमिरन करें, ताकि आपने जो परमार्थ किया है, वो कई गुणा बढ़े-फूले और इस संसार में रहते हुए आप खुशियों से मालामाल हो जाएं। यह सोने पे सुहागे की तरह है कि आप तन-मन-धन से सेवा के साथ-साथ सुमिरन भी करें। फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती और अपने-आप अच्छे विचार आते रहते हैं और इन्सान उन अच्छे विचारों पर चलता हुआ एक दिन परमानन्द की प्राप्ति जरूर कर लेता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Gold-Silver Price Today: फीकी पड़ी सोने-चांदी की चमक! जानें आज की ताजा कीमतें!" href="http://10.0.0.122:1245/the-shine-of-gold-and-silver-has-faded-know-todays-latest-prices/">Gold-Silver Price Today: फीकी पड़ी सोने-चांदी की चमक! जानें आज की ताजा कीमतें!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 16:52:47 +0530</pubDate>
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                <title>Saint Dr MSG Insan: मनमते लोगों का संग न करें</title>
                                    <description><![CDATA[Anmol Vachan: सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/precious-words-of-saint-dr-msg-insan/article-67997"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Anmol Vachan: सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते लोगों का टोला उस इन्सान को मालिक से ओड़ नहीं निभाने देते। वह उसकी राह में रुकावटें व परेशानियां खड़ी कर देते हैं। इन्सान पर मन इतना हावी हो जाता है कि वह सतगुरु, मौला जिसके लिए वो अपनी जान कुर्बान कर सकता है व जिसके लिए वह यह सोचता है कि सारी दुनिया एक तरफ और मेरा मालिक एक तरफ मनमते लोगों व मन की बातों में आकर वह एक पल में उससे मन मोड़ लेता है। Saint Dr MSG Insan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन बड़ी जालिम ताकत है और उसको मनमते लोग हवा देने के लिए तैयार बैठे हैं। जैसा कि देखा है और किया करते थे कि खेतों में आमतौर पर पड़ी लकड़ियों को जलाते व कई बार जो लकड़ी गीली होती वह जलने में काफी समय लेती। उसको जलाने के लिए मुंह से फूंक मारते और वह लकड़ी सुलगती रहती। बार-बार फूंक मारने से कई बार आंखों में धुआं भी चला जाता लेकिन अंत में हारकर वो जल पड़ती थी। इसी तरह पहले तो इंसान को उसका मन हवा देता है लेकिन वह सुमिरन व भक्ति करता है जिस कारण सतगुरु का प्यार उसको यह करने से रोकता है। फिर मतमते लोग आ जाते हैं जिनका खुद का कोई ईमान व कोई आधार नहीं होता।</p>
<h3>मन ने भ्रम में डाला हुआ है</h3>
<p style="text-align:justify;">वो तो केवल बिन पैंदे के लौटे होते हैं। वो न किसी के परोपकार को मानते हैं और न ही मालिक का अहसान मानते हैं। तो वो भी उस इन्सान के कान भरना (फूंक मारना) शुरू कर देते हैं। इसलिए उस इन्सान को जो आग पहले से ही लगी होती है, उसके मन ने उसको पहले से ही भ्रम में डाला हुआ है, धीरे-धीरे उसके मन की आग को और भी बढ़ा देता है और एक दिन जीव उससे जल उठता है। फिर वह सारी जिंदगी उस आग में जलता रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस जालिम मन से लड़ो। मालिक का प्यार पाना आसान है लेकिन उससे ओड़ निभाना काफी मुश्किल है क्योंकि ओड़ निभाने में काफी समय होता है। इन्सान का पता नहीं कब वह इस संसार से चला जाए लेकिन वह जब तक इस नश्वर संसार को त्यागकर नहीं जाता तब तक मतमते लोग उस इन्सान को टोकते रहते हैं। फिर भी जो लोग उस मालिक का दर पकड़े हुए हैं और उस मालिक के प्यार में चलते रहते हैं, वो खुद और उनके मां-बाप धन्य होते हैं व उनकी कुलें भी धन्य हो जाती हैं क्योंकि मां-बाप के संस्कार ही बताते हैं कि आपके अंदर कैसी आदतें हैं। Saint Dr MSG Insan</p>
<p><a title="Eye Donation: आंखों को उजियारा देने में भिवानी ब्लॉक ने निभाई अहम भूमिका" href="http://10.0.0.122:1245/bhiwani-block-played-an-important-role-in-giving-light-to-the-eyes/">Eye Donation: आंखों को उजियारा देने में भिवानी ब्लॉक ने निभाई अहम भूमिका</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 09:50:03 +0530</pubDate>
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                <title>‘सच्चे संत नेकी पर चलने की शिक्षा देते हैं’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे संत, गुरु, पीर-फकीर सबको नेकी व सच के राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। चुगली, निंदा से बचकर रहने की शिक्षा देते हैं क्योंकि निंदा करने वाले के साथ भक्ति की कितनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/true-saints-teach-us-to-follow-goodness/article-67865"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/saint-dr.-msg-4-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे संत, गुरु, पीर-फकीर सबको नेकी व सच के राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। चुगली, निंदा से बचकर रहने की शिक्षा देते हैं क्योंकि निंदा करने वाले के साथ भक्ति की कितनी भी डिग्रियां लगी हों, वो आम आदमी से भी गया-गुजरा होता है। निंदा-चुगली इन्सान को बर्बाद करती है। निंदा किसी की भी अच्छी नहीं है। दूसरों की निंदा करना महापाप है और जो इन्सान निंदा-चुगली करते हैं वो दोनों जहां में नरक भोगते हैं तथा उन्हें चैन, आनन्द, सुख नसीब नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मों के अनुसार अगर आप किसी को भी बुरा कहते हो तो आपको कोई फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही है। निंदा-चुगली करने वाले लोग मन मुख होते हैं। वो किसी पीर-फकीर को मानने वाले नहीं होते। ऐसे लोगों का दोनों जहां में मुंह काला होता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि किसी को बुरा न कहो अगर आप एक अंगुली किसी की तरफ उठाते हो तो तीन अंगुलियां आपकी तरफ उठती हैं। इसका अर्थ यही होता है कि दूसरों को बुरा कहने से पहले अपने अंदर निगाह मारें। कई लोग सत्संग सुनते रहते हैं, भक्त बने रहते हैं लेकिन फिर भी चुगली, निंदा से बाज नहीं आते और निंदा, ईर्ष्या में डूबे रहते हैं। ऐसे लोग सांप जैसे होते हैं। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">सांप जब तक चन्दन से लिपटा रहता है तब तक जहर नहीं उगलता लेकिन जैसे ही वह वहां से हटता है तो जहर उगलना शुरू कर देता है। वैसे ही वो लोग होते हैं जब तक सत्संग के दायरे में हैं, गुरू, पीर-फकीर वचन कर रहा है तब तक वो शांत रहते हैं लेकिन जैसे ही सत्संग के दायरे से बाहर होते हैं तो निंदा, ईर्ष्या करना शुरू कर देते हैं। परंतु जो इन्सान संतों के वचनों पर अमल करते हैं, निंदा-चुगली से कोसों दूर रहते हैं उन पर मालिक की दया-मेहर, रहमत जरूर बरसती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Tamatar ki Kheti: छोटे किसानों के लिए लाभकारी है टमाटर की खेती" href="http://10.0.0.122:1245/tomato-cultivation-is-beneficial-for-farmers/">Tamatar ki Kheti: छोटे किसानों के लिए लाभकारी है टमाटर की खेती</a></p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:40:11 +0530</pubDate>
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                <title>Anmol Vachan: ‘मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ )। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में जीव जब चलकर आते हैं, राम नाम का पाठ संत उन्हें पढ़ाते हैं। सुन कर जो अमल कमाया करते हैं उनके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और मालिक की दया-मेहर मुसलाधार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/there-is-infinite-joy-in-the-name-of-the-lord/article-65094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/saint-dr-msg1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा (सच कहूँ )। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में जीव जब चलकर आते हैं, राम नाम का पाठ संत उन्हें पढ़ाते हैं। सुन कर जो अमल कमाया करते हैं उनके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और मालिक की दया-मेहर मुसलाधार बरसती हुई उन्हें नजर आने लगती है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां हैं। नाम का सुमिरन कोई नसीबों वाला और अच्छे संस्कारों वाला ही करता है। देखने में आता है कि मालिक का नाम अनमोल है। पर कोई-कोई ही ले पाता है, कोई-कोई ही उसका जाप कर पाता है। जो करता है, वो खुशियां जिसकी कभी कल्पना नहीं हो सकती, इन्सान को महसूस होती हैं। और इन्सान उन खुशियों को हासिल करके दोनों जहानों की सैर करना शुरू कर देता है। एक बार आत्मा अगर रुहानी मंडलों पर उड़ारी मार देती है तो कभी भी गिरती नहीं, बल्कि उड़ती चली जाती है। काल-महाकाल की भी ताकत नहीं होती कि उसे रोक सके। जीते-जी जब तक शरीर में आत्मा रहती है तो परमानंद की प्राप्ति होती है और मरणोपरांत आत्मा को मोक्ष मुक्ति मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब तक जिंदगी है मालिक की भक्ति करो, आत्मरक्षा हर प्राणी का फर्ज है उसे करते रहना चाहिए। सुमिरन करते रहना चाहिए। मन के हाथों चढ़कर गलत कदम कभी न उठाओ। मन बड़ा जालिम है, जो भी इन्सान मन के हाथों मजबूर होकर बुरे कर्म करते हैं वो हमेशा दुखी रहते हैं, परेशान रहते हैं तथा खुशियां कभी उनके पास नहीं आती। Anmol Vachan</p>
<p><a title="Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लगेंगी!" href="http://10.0.0.122:1245/yaad-e-murshid-free-eye-camp-3/">Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लग…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>सत्संग</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 12:01:43 +0530</pubDate>
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                <title>मालिक सच्ची भावना को सुनते हैं: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा को जो सच्ची भावना, सच्चे हृदय से याद करता है, वो मालिक उनकी पुकार सुनते हैं। आज के दौर में इन्सान अपने-आपमें इतना खो गया है कि उसके पास अपने अलावा दूसरों के लिए समय नहीं है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/the-lord-listens-to-true-feelings-pujya-guru-ji/article-63669"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/anmol-vachan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा को जो सच्ची भावना, सच्चे हृदय से याद करता है, वो मालिक उनकी पुकार सुनते हैं। आज के दौर में इन्सान अपने-आपमें इतना खो गया है कि उसके पास अपने अलावा दूसरों के लिए समय नहीं है, पर जो मालिक के प्यारे समय निकालते हैं और समय निकाल कर हिम्मत और दृढ़ता से परहित, परमार्थ करते हैं, उन पर मालिक का रहमो-कर्म एक न एक दिन जरूर बरसता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सेवा करना महान है, पर सेवा की अड़चन मन और मनमते लोग डालते रहते हैं। इसलिए न मन की सुनो, न मनमते इन्सान की सुनो। आप सेवा पर चलते हुए परमपिता परमात्मा की दया-मेहर को हासिल करो, सुमिरन करो, किसी को दु:खी देखकर खुश न हो, बल्कि उसका दु:ख दूर करने की कोशिश करो। इसी का नाम भक्त, सच्चा मुरीद होता है। परंतु ऐसा बहुत मुश्किल है, क्योंकि आज लोग दूसरों के सुखों को दुखकर दु:खी हैं, दूसरों को खुश देखकर परेशान हैं। ऐसी भावना रखने वाला, शैतानियत के कारनामे करने वाला मालिक से दूर होता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि हमेशा दया, रहम की भावना अंदर बना कर रखो।</p>
<p style="text-align:justify;">हमेशा सबका भला मांगते रहो, कभी किसी का बुरा न करो। जो लोग सेवा-सुमिरन करते हैं, यकीनन मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल वो जरूर बन जाते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि नाम का सुमिरन और सेवा दो गहने हैं। जो भी इन गहनों को धारण कर लेता है, वो मालिक की कृपा के काबिल बनता है, उस पर उस परमात्मा का रहमो-कर्म जरूर बरसता है और सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि उसकी कुलों का भी उद्धार हो जाया करता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अपने विचारों को शुद्ध करो और मालिक से मालिक को मांगा करो। जितना हो सके सत्संग सुनो, सेवा-सुमिरन करो, तो यकीनन इन्सान को रूहानी तंदुरुस्ती, ताजगी मिलती है, दिलो-दिमाग फ्रैश रहता है और उसकी झोलियां मालिक की कृपा से मालामाल हो जाया करती हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 17:04:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>किसी के कहने से सेवा-सुमिरन ना छोड़ो: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज़)। Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में जो क्षण गुजरते हैं, वो क्षण इन्सान की पूरी जिंदगी बदल देते हैं। मालिक की याद में समय लगाना बड़ा मुश्किल है, लेकिन जिसको मालिक की याद आती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/do-not-give-up-sewa-and-sumiran-at-someones-behest-pujya-guru-ji/article-62499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/sirsa-news-6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में जो क्षण गुजरते हैं, वो क्षण इन्सान की पूरी जिंदगी बदल देते हैं। मालिक की याद में समय लगाना बड़ा मुश्किल है, लेकिन जिसको मालिक की याद आती है, वो अति भाग्यशाली, कर्मों वाला है और दोनों जहान में उसका नाम रोशन होता है। आप जी फरमाते हैं कि अगर इन्सान चाहे तो अपना भाग्य बदल सकता है। कोई कहे कि तू अभाग्यशाली है, तो आप टेंशन ना लो। आप चुपचाप घंटा-घंटा सुबह-शाम राम का नाम जपना शुरू कर दो।</p>
<p style="text-align:justify;">यकीन मानो, आपके कर्मों की वो काली परछाई कब उड़ जाएगी, आपको मालूम ही नहीं पड़ेगा और आप अति भाग्यशाली बन जाएंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि टेंशन किसी भी चीज का हल नहीं होता। जितनी आप टेंशन लेंगे, उतना शरीर और रूह दोनों ही बर्बाद होते हैं। सोचना इन्सान का कर्म है और कर्म करना भी इन्सान का फर्ज है। लेकिन अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं है। हद से ज्यादा कर्म करते हो, तो हो सकता है कि वो आपकी सेहत के लिए जायज ना हो। हद से ज्यादा सोचना टेंशन का कारण बन जाता है। इसलिए सोचो, हिम्मत करो, कर्म करो और मालिक पर छोड़ दो। आपका काम मेहनत करना है। आपके शरीर में जितना सामर्थ्य है, शक्ति है, आप कर्म करो। जितना दिमागी तौर पर अच्छे कर्म कर सकते हो, करो। आगे मालिक जाने, उसका काम जाने। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को कर्म करना चाहिए और साथ में सुमिरन करना चाहिए। आप जो सोच रहे हैं, क्या पता मालिक वो करने को तैयार बैठा हो। परंतु आप किसी भय की वजह से या मन की वजह से सुमिरन न करते हों, मालिक को अपनी बात न कह पाते हों, तो यह आपकी कमी है। Saint Dr. MSG</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हृदय रोगों का उपचार शुरू, कैथ-लैब स्थापित" href="http://10.0.0.122:1245/treatment-of-heart-diseases-started-in-shah-satnam-ji-specialty-hospital/">शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हृदय रोगों का उपचार शुरू, कैथ-लैब स्थापित</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Sep 2024 16:20:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मालिक को पाने की राह पर दृढ़ता से चलना बेमिसाल: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्यार, उसकी मोहब्बत जिनके नसीब में आती है, वे बहुत भाग्यशाली हैं। मालिक की उन पर बहुत रहमत होती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में झूठ-फरेब, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/words-of-respected-guru-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-insan-ji/article-56571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/msg-6-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्यार, उसकी मोहब्बत जिनके नसीब में आती है, वे बहुत भाग्यशाली हैं। मालिक की उन पर बहुत रहमत होती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में झूठ-फरेब, ठगी-बेइमानी चलता रहता है। भाग्यशाली वे हैं, जो मालिक के सच्चे प्यार के आशिक हैं। मालिक भी उन्हें भाग्यशाली बना देता है, जो उससे सच्चा प्यार करते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा के रास्ते पर चलना इस कलियुग में बेमिसाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि इन्सान फिजूल की बातों में ही उलझा रहता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक को पाने की राह में बहुत सारी अड़चनें आती हैं। रोकने-टोकने वाले मिलते हैं। इसके बावजूद जिनके बहुत अच्छे भाग्य होते हैं, वे इन्सान ही मालिक की राह पर चला करते हैं और खुशियों से लबरेज होते चले जाते हैं। आपजी ने फरमाया कि मालिक की राह पर चलने वाले किसी की परवाह नहीं करते। कोई क्या बोलता है, कोई क्या कहता है, इससे उन्हें कुछ लेना-देना नहीं होता। मालिक के प्यारों का तो एक ही उसूल होता है कि हमने परमपिता परमात्मा को पाने के लिए दृढ़ता से आगे बढ़ना है। फिर ऐसे इन्सान को भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड भी अन्दर-बाहर से कोई कमी नहीं छोड़ते और मालामाल कर देते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Summer special Laddu: गर्मियों में ठंडाई का काम करेगा ये खास लड्डू, हर रोज खाएं, कमजोरी एवं थकान दूर भगाएं" href="http://10.0.0.122:1245/summer-special-laddu/">Summer special Laddu: गर्मियों में ठंडाई का काम करेगा ये खास लड्डू, हर रोज खाएं, कमजोरी एवं थकान दूर भगाएं</a></p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Apr 2024 16:11:58 +0530</pubDate>
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                <title>MSG भंडारे पर पूज्य गुरु जी के वचन</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। MSG Bhandara: पूज्य गुरु जी ने अपने साढ़े 6 करोड़ परिवार को संबोधित करते हुए डेरा सच्चा सौदा की स्थापना संबंधी विस्तारपूर्वक जानकारी दी। आप जी ने फरमाया कि गांव कोटड़ा (बिलोचिस्तान) में अति पूजनीय पिता श्री पिल्ला मल जी व पूजनीय माता तुलसां बाई जी के घर बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/respected-guru-ji-vachan-on-msg-bhandare/article-55379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/saint-dr.-msg3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा। </strong>MSG Bhandara: पूज्य गुरु जी ने अपने साढ़े 6 करोड़ परिवार को संबोधित करते हुए डेरा सच्चा सौदा की स्थापना संबंधी विस्तारपूर्वक जानकारी दी। आप जी ने फरमाया कि गांव कोटड़ा (बिलोचिस्तान) में अति पूजनीय पिता श्री पिल्ला मल जी व पूजनीय माता तुलसां बाई जी के घर बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने अवतार धारण किया। सार्इं जी बचपन से ही धार्मिक खयालों के थे, क्योंकि जब बाल्यवस्था में उनको पूजनीय माता तुलसां बाई जी ने बर्फी देकर बेचने के लिए भेजा तो आप जी ने रास्ते में मिले साधुओं को वह बर्फी खिला दी और बर्फी के पैसे घर ले जाने के लिए किसी किसान के खेत में शाम तक काम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सार्इं जी ज्ञान की तलाश में निकले तो कई रिद्धि-सिद्धि वाले मिले, लेकिन सार्इं जी ने कहा कि हमें तो अंदर वाला राम ही चाहिए। इस दौरान वह ब्यास पहुंंचे, जहां बेपरवाह जी ने सार्इं सावण शाह जी से सच्चा ज्ञान प्राप्त किया। आप जी पैरों में घुंघरू बांधकर सार्इं सावण शाह जी के सामने खूब नाचते और सार्इं सावण शाह जी आप जी को मस्ताना कहकर नवाजते। आप जी को नाचते देखकर कुछ और लोग भी उन्हीं की तरह ही नाचने लगते, तो सावण शाह जी फरमाते कि ‘मस्ताना तो एक ही है, बाकी तो सब नकली बने घूम रहे हैं।’ बेपरवाह जी, सार्इं सावण शाह जी को अपने मक्खण मलाई, मेरे शहनशाह इत्यादि कहकर पुकारते।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों ने वहां आपत्ति जताई तो सार्इं सावण शाह जी ने शाह मस्ताना जी महाराज को फरमाया, ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ बोल दिया करो। फिर सार्इं सावण शाह जी ने शाह मस्ताना जी को कहा कि आप बागड़ में जाओ (सरसा क्षेत्र को पहले बागड़ कहा जाता था) व लोगों को राम नाम से जोड़ो। इस बात पर बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने अर्ज की कि सार्ईं जी बागड़ के क्षेत्र के लोगों को मेरी भाषा समझ में नहीं आएगी तो सांई सावण शाह जी ने पावन वचन फरमाए, ‘आपकी आवाज खुदा की आवाज होगी, लोग सुनकर मस्त हो जाया करेंगे।’ बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने फिर अर्ज की कि सार्इं जी, जिसे भी नाम दें, उसका एक पैर यहां और दूसरा पैर सचखंड में हो। बेपरवाह जी ने यह मांग भी सार्इं जी से मंजूर करवा ली। शाह मस्ताना जी ने यह वचन भी मंजूर करवाए कि अगर किसी प्रेमी ने किसी मुश्किल घड़ी में ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा लगाया तो उसके भयानक कर्म कट जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सार्इं सावण शाह जी ने यह सभी मांगें मंजूर की व आप जी को बागड़ की तरफ भेज दिया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जहां अब शाह मस्ताना जी धाम है, यहां जंगलात था। जंगल में सांप, बिच्छू निकलने लगे तो लोगों ने कहा कि सार्इं जी आप यहां कहां आ गए, यहां तो सांप, बिच्छू हैं। बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने फरमाया कि पवित्र नारा ‘धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ लगा देना यह किसी को कुछ नहीं कहेंगे। उस दिन से आज तक डेरे में बड़े-बड़Þे कोबरे निकलने पर उसे मारा नहीं जाता, बल्कि उसे पकड़कर दूर जंगल में छोड़ दिया जाता है। आप जी ने फरमाया कि बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज द्वारा शुरु किए गए इस सच्चे सौदे की आज करोड़ों की संख्या में साध-संगत है, जो मानवता भलाई के कार्यों में दिन-रात जुटी हुुई है। यह शाह मस्तान, शाह सतनाम जी की दया मेहर से ही संभव हो रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Sirsa: भंडारे की रूहानी शाम का नजारा, लूट लो खुशियाँ… देखें वीडियो…" href="http://10.0.0.122:1245/msg-incarnation-day/">Sirsa: भंडारे की रूहानी शाम का नजारा, लूट लो खुशियाँ… देखें वीडियो…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Nov 2023 20:58:14 +0530</pubDate>
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                <title>आदमी का दिमाग विचार शून्य नहीं होता: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (यूपी) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से साध-संगत के सवालों के जवाब देते हुए उनकी जिज्ञासा को शांत किया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि घर-गृहस्थ में रहना, पर संयम हो। संयम पति-पत्नी दोनों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/thoughts-of-a-mans-mind-are-never-empty-revered-guru-ji/article-43916"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/msg-223.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा।</strong> सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (यूपी) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से साध-संगत के सवालों के जवाब देते हुए उनकी जिज्ञासा को शांत किया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि घर-गृहस्थ में रहना, पर संयम हो। संयम पति-पत्नी दोनों में होना चाहिए। अदरवाइज पारिवारिक ढांचा बिगड़ सकता है। अदरवाइज झगड़े हो सकते हैं। अदरवाइज रिश्तों में खटास, शक और पता नहीं क्या-क्या चीजें आ जाएंगी और रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हाँ, दोनों में संयम हो, जोकि सुमिरन से ही हो सकता है, राम-नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, ख़ुदा, रब्ब की भक्ति से ही संयम आता है और संयम एक ऐसी चीज है, जो इन्सान को बेइंतहा खुशियां देती है। तो घर-गृहस्थ में रहते हुए संयम होना ही चाहिए। ब्रह्मचर्य में तो ये परफैक्ट होता है, अगर कोई ब्रह्मचर्य का पालन करे। पर घर-गृहस्थ में सुमिरन के द्वारा, भक्ति के द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है अपने विचारों को, अपने ख्यालों को।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आदमी का दिमाग विचार शून्य नहीं होता। कुछ न कुछ अंदर चलता ही रहता है, चलता ही रहता है। और हर आदमी की मन की इच्छा पूरी नहीं होती। ये नहीं होता कि आपने जो सोच लिया वो पूरा ही होगा, ऐसा संभव नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाँ, जो आपके लिए अच्छा है वो तब पूरा होगा जब आप संयमी बन जाओगे, जब आप प्रभु के नाम का सुमिरन करोगे, तब आप मानने लगोगे कि प्रभु ने जो किया ठीक था, जो कर रहा है ठीक है और आगे जो होगा ठीक होगा, ऐसा सोच लिया समझो भक्त बन गए। अदरवाइज, अगर आप तरह-तरह के विचारों की, प्रश्नों की दीवार खड़ी करते रहते हो भगवान के सामने, उससे होता कुछ नहीं, लेकिन आपके भक्ति मार्ग में बाधाएं आना शुरू हो जाती हैं, तो भाई सुमिरन कीजिये, कर्मयोगी, ज्ञानयोगी बनिए, चलते, बैठके, लेटके, काम-धंधा करते हुए सुमिरन किया करो। और कई बार, जैसे बच्चों ने कहा था कि गुरु जी वो कौन सा तरीका है, जो दौड़ने से वजन कम होता है, आज हमने वो आपके लिए डाला भी है फोन पर, कि कैसे वो दौड़ना चाहिए।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 09:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>संसार में लोग चंद नोटों के लिए किसी न किसी के गुलाम बन जाते हैं: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। जब पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपनी प्रेरणामयी मीठी आवाज में ‘महक आ रही है फिजा भी गा रही है…’ शब्द का गायन कर साध-संगत को मोहित कर दिया। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि पीरो, मुर्शिदे-कामिल का रहमो-कर्म एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/most-of-people-do-slavery-just-for-a-little-money/article-41840"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/anmol-vachan-ok.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> जब पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपनी प्रेरणामयी मीठी आवाज में ‘महक आ रही है फिजा भी गा रही है…’ शब्द का गायन कर साध-संगत को मोहित कर दिया। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि पीरो, मुर्शिदे-कामिल का रहमो-कर्म एक ऐसे नशे, मस्ती के रूप में छाया हुआ है कि जीवात्माओं के पांव धरती पर नहीं लग रहे हैं। पूरी दुनिया में पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के जन्ममाह की धूम मची हुई है और जैसे-जैसे अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब के नाम की धूम मचती है तो काल के घर में भी आग लगती है। लेकिन हमारा सतगुरु, दयाल इतना महान् है कि चाहे आग लगे या कुछ भी हो, वो लाज रख रहा था, रखता है और हमेशा ही रखता रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि इस संसार में लोग पता नहीं क्या भावना लेकर आते हैं। कई लोग आजाद होते हुए भी गुलाम बन जाते हैं और कई गुलाम होते हुए आजाद हो जाते हैं। इस संसार में लोग चंद नोटों के लिए किसी न किसी के गुलाम बन जाते हैं। थोड़े पैसे के लिए सारी उम्र की गुलामी करते हैं। पशुओं की तरह जीवन गुजारते हैं और कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने जमीर की आवाज सुनते हैं और अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब से बेइन्तहा मोहब्बत करते हुए उसकी दया-मेहर, रहमत के काबिल बन जाया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने आगे फरमाया कि मालिक की दया-मेहर, रहमत, दया-दृष्टि के काबिल बनना हर प्राणी के लिए जरूरी है। हमारे सभी धर्म, मजहब में यही शिक्षा है कि आप मालिक की औलाद से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करें। उस परमपिता परमात्मा का नाम जपें ताकि उसके सुमिरन के द्वारा आप उसकी दया-मेहर, रहमत, कृपा-दृष्टि के लायक बन जाएं। आप जी ने आगे फरमाया कि अगर आप हमेशा के लिए सच्ची मस्ती दिलो-दिमाग में संजोना चाहते हैं, जो कभी खत्म न हो, तो आप मालिक के नाम का सुमिरन किया करो।</p>
<p style="text-align:justify;">मालिक के नाम का सुमिरन ही आवागमन से आजाद करवाता है और मालिक से मिला देता है। इसलिए चलते, बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए सुमिरन करो, सतगुरु का शुक्राना करो, जिसने हमें मस्ती का यह आलम बख्शा है। सतगुरु का शुक्राना करने से और अधिक उसकी दया-मेहर, रहमत के काबिल बनोगे। वह अपना शुक्राना नहीं लेता लेकिन बदले में दया-मेहर, रहमत लुटा देता है। इसलिए इन्सान का फर्ज है कि अपने ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का जितना धन्यवाद, शुक्राना हो सके करते रहें, तो मालिक की दया-मेहर जरूर बरसती है। गम, चिंता, परेशानियां दूर होती हैं और आदमी मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन जाता है।</p>
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                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jan 2023 13:47:59 +0530</pubDate>
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