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                <title>Anmol Vachan - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Anmol Vachan RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>''जो लोग भोले-भाले लोगों को फंसाकर मालिक से दूर करते हैं ऐसे लोगों की कुलों तक में भी बेचैनी बनी रहेगी''</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो इन्सान अपनी खुदी, अहंकार को त्यागकर मालिक की भक्ति करता है, वह प्रभु-परमात्मा की दया-मेहर को पा सकता है। जिस इन्सान के अंदर का कचरा साफ हो जाता है उसकी निगाह ऐसी बन जाती है कि उसे कण-कण, जर्रे-जर्रे में अपना मालिक, सतगुरु नजर आने लगता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/there-will-be-unrest-even-in-the-clans-of-those/article-86273"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि जो इन्सान अपनी खुदी, अहंकार को त्यागकर मालिक की भक्ति करता है, वह प्रभु-परमात्मा की दया-मेहर को पा सकता है। जिस इन्सान के अंदर का कचरा साफ हो जाता है उसकी निगाह ऐसी बन जाती है कि उसे कण-कण, जर्रे-जर्रे में अपना मालिक, सतगुरु नजर आने लगता है। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आज कलियुग में ज्यादातर लोग मन के कहे चलते हैं। किसी भी बुराई को जल्दी ग्रहण कर लेते हैं और अपना अहंकार इतना बढ़ा लेते हैं कि किसी और को वह अपने सामने कुछ भी नहीं समझते। अंतत: ऐसे लोग बेचैन रहने लगते हैं और मालिक से मुंह मोड़ने लगते हैं। इस स्थिति में वे भक्त होने का दिखावा करते हैं, लेकिन आंतरिक रूप से ऐसे लोग खस्ता, मन के हाथों मजबूर और अहंकारी हो जाते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि बुरा कर्म करते रहने से आगे चलकर सुख, चैन खत्म हो जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि दुनिया में ऐसे भी बहुत से लोग होते हैं जो खुद तो भक्ति-इबादत करते हैं, साथ ही दूसरों को भी मालिक से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। वो लोग अपने दोस्त, रिश्तेदार यहां तक कि राहगिरों को भी समझाते हैं कि मालिक की भक्ति में सुख ही सुख है। कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो बाहर से भक्ति का दिखावा करते हैं और अंदर ही अंदर लोगों को भक्ति-मार्ग से तोड़ते रहते हैं। ऐसा करना गाय को बूचड़खाने में कटवाने के समान पाप है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो लोग अपनी बातों से भोले-भाले लोगों को अपने चंगुल में फंसाते हैं और मालिक से दूर करते हैं ऐसे लोगों में तो क्या उनकी तो कुलों में भी बेचैनी बनी रहेगी। इसलिए किसी को जोड़ नहीं सकते तो उसको तोड़ना भी नहीं चाहिए। गिरे हुए को उठाओगे तो मालिक कृपा-दृष्टि से जरूर नवाजेगा। अगर गिरे हुए को उठा नहीं सकते तो चलते हुए को गिराना भी पाप है। जो इन वचनों पर  अमल नहीं करता वह जीवन में कभी भी सुख-चैन से नहीं रह सकता।  उसका जीवन नरक के मानिंद गुजरता रहेगा। इसलिए सच्चे दिल से मालिक की भक्ति-इबादत करनी चाहिए, इससे सुख मिलेगा और अगर ऐसा नहीं करते और स्वार्थ में ही डूबे रहे तो भौतिकतावाद में खोए रहोगे और मालिक से दूर हो जाओगे। फिर वो मालिक पास होते हुए भी नजर नहीं आयेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>''एक ही है ऐसा जो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता'' </title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानीजनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/there-is-only-one-who-does-not-come-in-the/article-86237"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि सत्संग का अर्थ है सच का साथ। सच उसे कहते हैं जिसे कहा जा सकता है कि जो सच था, सच है और सच ही रहेगा। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब ही इस दुनिया में एकमात्र सच है। भगवान के अनेक नाम हैं, लेकिन वो सुप्रीम पावर यानी सबसे बड़ी ताकत एक ही है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानीजनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है। कोई भी जगह उससे खाली नहीं होती। हर जगह, कण-कण, जर्रे-जर्रे में उसकी मौजूदगी का अहसास होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक हमारी निगाह जाती है वहां तक वो मालिक, परमात्मा है और जहां तक निगाह नहीं जाती वो वहां तक भी है। दोनों जहानों यानी त्रिलोकी, जहां आत्मा जाती है और जहां शरीर नहीं जाता है, वहां भी वो है। ऐसा मालिक, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा, सुप्रीम पावर जो सारी सृष्टि को बनाने वाला है। उसे देखा, महसूस किया जा सकता है लेकिन उसके लिए भक्ति करनी अति आवश्यक है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप कोई भी काम-धन्धा करते हैं तो उसके लिए मेहनत भी जरूर करते हैं, क्योंकि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिल सकती। किसान भाई अपने खेत में अच्छी फसल पैदा करने के लिए जमीन को साफ-सुथरा करते हैं, बुआई, निराई, गुड़ाई, बिजाई, खाद, स्प्रे हर तरह से उसे संभालते हैं। बीज डालते समय भी संभाल जरूरी है, क्योंकि ऐसी बीमारियां हैं जो धरती में ही लग जाती हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि यदि पेड़-पौधे की अच्छी तरह से संभाल की जाए तो वो बहुत जल्दी लहलहाने लगता है।  इसी तरह इन्सान को मनुष्य शरीर रूपी धरती तो मिल चुकी है।इसमें पाप-कर्म, ठगी, बेईमानी, रिश्वतखोरी, नशों रूपी खरपतवार भी बहुत उगे हुए हैं। इस तरह यह धरती उपजाऊ होते हुए भी झाड़, फूस से भर गई है। धरती को साफ करने के लिए हल चलाना पड़ता है, उसी तरह इस शरीर रूपी धरती में भी जो घास-फूस, बुराई पैदा हो गई है उसे राम-नाम रूपी हल से साफ करना होगा। जैसे-जैसे घास-फूस साफ होता जायेगा, वैसे-वैसे राम-नाम का बीज फलता-फूलता जायेगा। जिस धरती रूपी शरीर में पहले से पाप-कर्म कम होते हैं या होते ही नहीं, उस धरती में बीज पड़ते ही पौधा जल्दी ही फलने-फूलने लग जाता है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:45:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम-नाम ही आत्मबल देने वाली ताकत: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को भुलाए बैठा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-name-of-ram-is-the-power-that-gives-self-confidence/article-84098"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/msg-2-2-696x392.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को भुलाए बैठा है। उसको भूलने से इन्सान के अंदर गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियां बढ़ती जाती हैं और इन्सान आत्मिक कमजोरी की वजह से हमेशा दु:खी व परेशान रहने लगता है। जिनके अंदर आत्मिक कमजोरी होती है, कोई भी बात उन्हें सहन नहीं हो पाती। बात-बात पे तुनक मिजाज, बात-बात पे गुस्सा करना आम बात हो जाती है। एक राम-नाम ही ऐसी ताकत है, जिसका जाप करने से इन्सान के अंदर आत्मबल आता है, जिसके द्वारा इन्सान बड़े से बड़े काम में भी परेशान नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर जब आत्मिक कमजोरी आ जाती है, तो लोग बेवजह ही उलझे रहते हैं, बिना वजह लड़ते रहते हैं। आप जी फरमाते हैं कि आत्मबल, रूहानी शक्ति पाने के लिए सत्संग ही एक ऐसी जगह है, जहां एक अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का नाम लिया जाता हो, एक मालिक की चर्चा होती हो, इन्सान वहां आकर बैठे, तो उसे पता चलता है कि सब कुछ उसके अंदर है, फिर भी वो कंगाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो ब्रह्मांड में है, वो इन्सान के शरीर में है, जो राम का नाम जपता है, वही सब कुछ हासिल कर सकता है। उसे ही सब कुछ मिलता है, वरना जैसे लोग आते हैं, वैसे ही वापिस चले जाते हैं।  खाली हाथ आए, खाली हाथ लौट जाते हैं, लेकिन जो लोग सत्संग सुनते हैं, राम-नाम का जाप करते हैं, भक्ति करते हैं, वो ही उस परमात्मा की खुशियां हासिल करते हैं और वो मालिक के रहमो-कर्म को हासिल करके तमाम खुशियां पाकर इस कलियुग, मृतलोक में भी परमानन्द की प्राप्ति कर लिया करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वचनों को मानने से ही आती हैं खुशियां: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में मौजूद है। उसका रहमो-कर्म मूसलाधार बरसता है, पर भाग्यशाली वही हैं जो उसके बरसते रहमो-कर्म को महसूस करते हैं। उन्हें फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमात्मा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/happiness-comes-only-by-following-the-vachan/article-79031"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/msg-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में मौजूद है। उसका रहमो-कर्म मूसलाधार बरसता है, पर भाग्यशाली वही हैं जो उसके बरसते रहमो-कर्म को महसूस करते हैं। उन्हें फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमात्मा की खुशियां तभी हासिल होती हैं, जब इन्सान को पूर्ण पीर, फकीर मिले और जीव उनके वचनों पर अमल करे। दरगाह में आत्मा के लिए सत्संग का फल मिलता है, लेकिन तीन परहेजों में गलती करते हो,  तो वो भयानक सजा भी भोगनी पड़ती है। तीन वचनों के अलावा कोई और गलती होती है, तो इन्सान सच्चे दिल से सुमिरन करे, तौबा करे, सत्संग में आकर माफी ले लेता है तो साथ ही साथ माफ हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अगर तीन परहेजों में गलती करता है और सेवा करता है तो उससे जो बरकतें आनी चाहिएं, जो बेइन्तहा खुशियां मिलनी चाहिएं, उससे इन्सान खाली रह जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आप संत, पीर-फकीर के साथ लगे हैं, तो वचनों पर अमल करना सीखो। आप दुनियादारी के लोगों को बुद्धू बना सकते हैं, उन्हें गुमराह कर सकते हैं, उनको पता नहीं चलने देते, लेकिन परमात्मा जो हर किसी के अंदर मौजूद है, उससे आप कोई पर्दा नहीं कर सकते। संत हर किसी का पर्दा रखते हैं और सबसे प्यार करते हैं, सबको मोहब्बत से नवाजते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचन मानना अति जरूरी है। अगर आपका रुतबा है, तो उसके नाम का। रूहानियत में अगर कोई आपको दुआ, सलाम करता है। आपकी इज्जत, सत्कार करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आपके कोई अलग से ताज लगा हुआ है या आप अलग से कुछ नए भाग्य लेकर पैदा हुए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वचनों को मानने…</h3>
<p style="text-align:justify;">यह तो मालिक के नाम का रहमो-कर्म है। तू गुरमुख है, सतगुरु का मुरीद है, तू उसका अजीज है, तू भक्ति करता है, तू सेवादार है, इसलिए लोग सत्कार करते हैं। बाकि जैसे आम आदमी हैं, वैसा ही तू है। बस उसके (मालिक के) नाम को सलाम है। इसलिए उसका नाजायज फायदा न उठाओ। वरना लेने के देने पड़ते हैं। इन्सान गलतियां करता है, वचनों की परवाह नहीं करता, तो सब खुशियां चली जाती हैं और अगर वचन मानने शुरू करता है और 100 प्रसेंट वचन मान ले, तो खुशियां वापिस आ जाती हैं। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचनों में गलती करने को मखौल मत समझा करो। संतों का काम माफी देना और दिलवाना है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप खुश रहेंगे। आपकी उम्र कम हो सकती है, आपके स्वास तेजी से चलेंगे और आपका टाईम पीरियड कम हो जाएगा। आपको बीमारियां लग सकती हैं। आप परिवार की तरफ से, शरीर की तरफ से टेंशन में आ जाओगे। ये सब गलती करने के साईड इफेक्ट हैं। आदमी गलती करता है तो उसके बैक गेयर लग जाता है और जैसे-जैसे गलतियां करता जाता है, उसके बैक गेयर की स्पीड भी बढ़ती जाती है। इसलिए गलतियां न करो। संत, पीर-फकीरों की दया को मखौल मत समझो। वो दया करते हैं, क्योंकि वो दयालु होते हैं। मालिक का नूर वो हर किसी तक पहुंचाते हैं, इसलिए दया करते रहते हैं। पर, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप गलतियां करते ही चले जाएं, बुरे कर्म करने से बाज ही न आओ।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तो मालिक के नाम का रहमो-कर्म है। तू गुरमुख है, सतगुरु का मुरीद है, तू उसका अजीज है, तू भक्ति करता है, तू सेवादार है, इसलिए लोग सत्कार करते हैं। बाकि जैसे आम आदमी हैं, वैसा ही तू है। बस उसके (मालिक के) नाम को सलाम है। इसलिए उसका नाजायज फायदा न उठाओ। वरना लेने के देने पड़ते हैं। इन्सान गलतियां करता है, वचनों की परवाह नहीं करता, तो सब खुशियां चली जाती हैं और अगर वचन मानने शुरू करता है और 100 प्रसेंट वचन मान ले, तो खुशियां वापिस आ जाती हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचनों में गलती करने को मखौल मत समझा करो। संतों का काम माफी देना और दिलवाना है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप खुश रहेंगे। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी उम्र कम हो सकती है, आपके स्वास तेजी से चलेंगे और आपका टाईम पीरियड कम हो जाएगा। आपको बीमारियां लग सकती हैं। आप परिवार की तरफ से, शरीर की तरफ से टेंशन में आ जाओगे। ये सब गलती करने के साईड इफेक्ट हैं। आदमी गलती करता है तो उसके बैक गेयर लग जाता है और जैसे-जैसे गलतियां करता जाता है, उसके बैक गेयर की स्पीड भी बढ़ती जाती है। इसलिए गलतियां न करो। संत, पीर-फकीरों की दया को मखौल मत समझो। वो दया करते हैं, क्योंकि वो दयालु होते हैं। मालिक का नूर वो हर किसी तक पहुंचाते हैं, इसलिए दया करते रहते हैं। पर, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप गलतियां करते ही चले जाएं, बुरे कर्म करने से बाज ही न आओ।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 09:34:40 +0530</pubDate>
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                <title>‘बस ये काम कर लो, नहीं रहेगी अंदर-बाहर कोई कमी’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज़)। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को चाहे दुनिया का कितना भी तजुर्बा आ जाए, पर वह मालिक की तरफ से तब तक नन्हा बच्चा ही रहता है, जब तक इन्सान सत्संग नहीं सुनता, अमल नहीं करता। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/just-do-this-work-there-will-be-no-shortage-inside-or-outside/article-78632"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/anmol-vachan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को चाहे दुनिया का कितना भी तजुर्बा आ जाए, पर वह मालिक की तरफ से तब तक नन्हा बच्चा ही रहता है, जब तक इन्सान सत्संग नहीं सुनता, अमल नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान अपने मन-जालिम की वजह से दिखता कुछ और है, करता कुछ और है। ऐसे में इन्सान कभी सुख हासिल नहीं कर पाता। फिर वो जीव भाग्यशाली होते हैं जो मन से लड़ते हुए सत्संग में आते हैं। जीवों के कोई अच्छे संस्कार होते हैं कि जीव सत्संग में आ जाता है और मन की नहीं मानता। हालांकि मन तरह-तरह के विचार देता है, लेकिन जीव विचारों पर अमल नहीं करता तो वह विचारों के फल से बच जाता है। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने बुरे विचारों को काबू करना चाहिए। अगर इन्सान को बुरे विचार आते हैं तो उसी समय सुमिरन कर लो। फिर धीरे-धीरे ये विचार आने बंद हो जाएंगे, लेकिन मन ऐसा जादूगर योद्धा है, जो थकता नहीं है। इसलिए ऐसा नहीं है कि आपके पांच मिनट के सुमिरन से मन काबू आ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong> अत:</strong> आप भी हिम्मत वाले बन जाओ कि जब मन शुरू होगा तो मैं भी शुरू हो जाऊंगा। तो यकीन मानिए कि बुरे विचारों का लेश मात्र भी असर आपकी भक्ति पर या आपकी जिंदगी पर नहीं आएगा। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने विचारों को सोच-सोचकर बीमार नहीं होना चाहिए कि अब तो मुझे खुशी नहीं, रहमत नहीं है। अब तो मैं दुखी हो जाऊंगा। अगर आप ऐसा करते रहोगे तो ये मन की चालें हैं। इसलिए मन की कभी न सुनो और मन से लड़ते रहो। सुमिरन करने से मन कंट्रोल में आ जाएगा और एक दिन आत्मा की जीत जरूर होगी। वो दिन आपके लिए सबसे सुखों भरा होगा, खुशियां लेकर आएगा। सिर्फ आपके ही नहीं बल्कि परिवारों के चेहरे भी खुशियों से लबरेज हो जाएंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="वोटर लिस्ट सुधार व कूड़ा कलेक्शन की जांच को घर-घर पहुंचे डीएम-कमिश्नर" href="http://10.0.0.122:1245/dm-commissioner-goes-door-to-door-to-inspect-voter-list-corrections-and-garbage-collection/">वोटर लिस्ट सुधार व कूड़ा कलेक्शन की जांच को घर-घर पहुंचे डीएम-कमिश्नर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:39:03 +0530</pubDate>
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                <title>‘सोने पे सुहागा है सेवा के साथ किया गया सुमिरन’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक के प्यार-मोहब्बत में चलना बड़ा मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। मुश्किल इसलिए है, क्योंकि काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया ऐसे दुश्मन हैं, जो नजर नहीं आते, लेकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/it-is-very-difficult-to-walk-in-the-love-and-affection-of-the-lord-in-this-terrible-kali-yuga/article-69325"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/saint-dr.-msg-4-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक के प्यार-मोहब्बत में चलना बड़ा मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। मुश्किल इसलिए है, क्योंकि काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया ऐसे दुश्मन हैं, जो नजर नहीं आते, लेकिन बहुत बड़ा घात करते हैं। ये इन्सान को दुखी, परेशान रखते हैं और इनके साथ-साथ मनमते लोग भी होते हैं। जब इन्सान इस सारे चक्रव्यूह में फंस जाता है, तो मालिक का प्यार-मोहब्बत उसे बकबका लगने लगता है और दुनियादारी का साजो-सामान बड़ा मीठा लगता है। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक का प्यार-मोहब्बत, उसका नाम दोनों जहान में हमेशा अमर रहने वाला है। हमेशा मस्तो-मस्त रहने वाला है। कुनैन कोई नहीं लेना चाहता, लेकिन जब लेनी पड़ती है, तो बुखार का खात्मा कर देती है। पहले कुनैन बहुत कड़वी होती थी। इसलिए दूध को मीठा करके उसके साथ कुनैन लिया जाता था। आजकल बड़ा आसान है, कुनैन पर पहले से ही चीनी का थोड़ा लेप चढ़ा होता है। उसी तरह पहले समय में अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम लेना बड़ा मुश्किल होता था। सारी-सारी उम्र उसकी याद में बैठना पड़ता था और तब कहीं जाकर मालिक के प्यार-मोहब्बत की एक झलक मिलती थी। इस कलियुग में संतों ने आसान तरीका बना दिया। उठते-बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए अभ्यास करें, तो जो उम्र बीत जाने के बाद मिलता था, वो कुछ घंटों की भक्ति-इबादत से भी हासिल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि कलियुग में इन्सान को गम, दु:ख, दर्द, परेशानियों का सामना तो करना पड़ता है। मन-इंद्रियां बड़े फैलाव में हैं, लेकिन इसके साथ ही कलियुग में मालिक का नाम जपना बड़ा आसान भी है। आप किसी भी तरीके से नाम का जाप करें, उसका असर लाजमी होगा और उसका फल आपको जरूर मिलेगा। इसलिए आप चलते, बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए मालिक के नाम का सुमिरन करें। सुमिरन करने से ही मालिक का प्यार बढ़ता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप बुराई, निंदा करने वालों का साथ देने लग जाते हैं तो सारी करी-कराई भक्ति का नाश हो जाता है। इन्सान बेचैन, परेशान होने लगता है और मालिक के प्यार से दूर होता चला जाता है। आप मालिक से ओड़ निभाना चाहते हैं, तो सुमिरन के पक्के बनो, सेवा करो और दुनियादारी में रहते हुए व्यवहार के सच्चे बनो। ठगी, बेइमानी, भ्रष्टाचार से दूर रहो। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">निंदा-चुगली से जितना हो सके दूर रहो और यह सब संभव है, जब आप सुमिरन करते हैं। सुमिरन के बिना यह संभव नहीं है। अगर आप सुमिरन नहीं करते तो आपकी मन-इंद्रियां फैलाव में रहेंगी, क्या पता कब दगा दे जाएं। जो लोग तन-मन-धन से परमार्थ करते हैं, उनके लिए भी जरूरी है कि आप भी थोड़ा सुमिरन करें, ताकि आपने जो परमार्थ किया है, वो कई गुणा बढ़े-फूले और इस संसार में रहते हुए आप खुशियों से मालामाल हो जाएं। यह सोने पे सुहागे की तरह है कि आप तन-मन-धन से सेवा के साथ-साथ सुमिरन भी करें। फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती और अपने-आप अच्छे विचार आते रहते हैं और इन्सान उन अच्छे विचारों पर चलता हुआ एक दिन परमानन्द की प्राप्ति जरूर कर लेता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Gold-Silver Price Today: फीकी पड़ी सोने-चांदी की चमक! जानें आज की ताजा कीमतें!" href="http://10.0.0.122:1245/the-shine-of-gold-and-silver-has-faded-know-todays-latest-prices/">Gold-Silver Price Today: फीकी पड़ी सोने-चांदी की चमक! जानें आज की ताजा कीमतें!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 16:52:47 +0530</pubDate>
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                <title>Saint Dr MSG Insan: मनमते लोगों का संग न करें</title>
                                    <description><![CDATA[Anmol Vachan: सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/precious-words-of-saint-dr-msg-insan/article-67997"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Anmol Vachan: सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते लोगों का टोला उस इन्सान को मालिक से ओड़ नहीं निभाने देते। वह उसकी राह में रुकावटें व परेशानियां खड़ी कर देते हैं। इन्सान पर मन इतना हावी हो जाता है कि वह सतगुरु, मौला जिसके लिए वो अपनी जान कुर्बान कर सकता है व जिसके लिए वह यह सोचता है कि सारी दुनिया एक तरफ और मेरा मालिक एक तरफ मनमते लोगों व मन की बातों में आकर वह एक पल में उससे मन मोड़ लेता है। Saint Dr MSG Insan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन बड़ी जालिम ताकत है और उसको मनमते लोग हवा देने के लिए तैयार बैठे हैं। जैसा कि देखा है और किया करते थे कि खेतों में आमतौर पर पड़ी लकड़ियों को जलाते व कई बार जो लकड़ी गीली होती वह जलने में काफी समय लेती। उसको जलाने के लिए मुंह से फूंक मारते और वह लकड़ी सुलगती रहती। बार-बार फूंक मारने से कई बार आंखों में धुआं भी चला जाता लेकिन अंत में हारकर वो जल पड़ती थी। इसी तरह पहले तो इंसान को उसका मन हवा देता है लेकिन वह सुमिरन व भक्ति करता है जिस कारण सतगुरु का प्यार उसको यह करने से रोकता है। फिर मतमते लोग आ जाते हैं जिनका खुद का कोई ईमान व कोई आधार नहीं होता।</p>
<h3>मन ने भ्रम में डाला हुआ है</h3>
<p style="text-align:justify;">वो तो केवल बिन पैंदे के लौटे होते हैं। वो न किसी के परोपकार को मानते हैं और न ही मालिक का अहसान मानते हैं। तो वो भी उस इन्सान के कान भरना (फूंक मारना) शुरू कर देते हैं। इसलिए उस इन्सान को जो आग पहले से ही लगी होती है, उसके मन ने उसको पहले से ही भ्रम में डाला हुआ है, धीरे-धीरे उसके मन की आग को और भी बढ़ा देता है और एक दिन जीव उससे जल उठता है। फिर वह सारी जिंदगी उस आग में जलता रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस जालिम मन से लड़ो। मालिक का प्यार पाना आसान है लेकिन उससे ओड़ निभाना काफी मुश्किल है क्योंकि ओड़ निभाने में काफी समय होता है। इन्सान का पता नहीं कब वह इस संसार से चला जाए लेकिन वह जब तक इस नश्वर संसार को त्यागकर नहीं जाता तब तक मतमते लोग उस इन्सान को टोकते रहते हैं। फिर भी जो लोग उस मालिक का दर पकड़े हुए हैं और उस मालिक के प्यार में चलते रहते हैं, वो खुद और उनके मां-बाप धन्य होते हैं व उनकी कुलें भी धन्य हो जाती हैं क्योंकि मां-बाप के संस्कार ही बताते हैं कि आपके अंदर कैसी आदतें हैं। Saint Dr MSG Insan</p>
<p><a title="Eye Donation: आंखों को उजियारा देने में भिवानी ब्लॉक ने निभाई अहम भूमिका" href="http://10.0.0.122:1245/bhiwani-block-played-an-important-role-in-giving-light-to-the-eyes/">Eye Donation: आंखों को उजियारा देने में भिवानी ब्लॉक ने निभाई अहम भूमिका</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/precious-words-of-saint-dr-msg-insan/article-67997</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 09:50:03 +0530</pubDate>
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                <title>‘सच्चे संत नेकी पर चलने की शिक्षा देते हैं’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे संत, गुरु, पीर-फकीर सबको नेकी व सच के राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। चुगली, निंदा से बचकर रहने की शिक्षा देते हैं क्योंकि निंदा करने वाले के साथ भक्ति की कितनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/true-saints-teach-us-to-follow-goodness/article-67865"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/saint-dr.-msg-4-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे संत, गुरु, पीर-फकीर सबको नेकी व सच के राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। चुगली, निंदा से बचकर रहने की शिक्षा देते हैं क्योंकि निंदा करने वाले के साथ भक्ति की कितनी भी डिग्रियां लगी हों, वो आम आदमी से भी गया-गुजरा होता है। निंदा-चुगली इन्सान को बर्बाद करती है। निंदा किसी की भी अच्छी नहीं है। दूसरों की निंदा करना महापाप है और जो इन्सान निंदा-चुगली करते हैं वो दोनों जहां में नरक भोगते हैं तथा उन्हें चैन, आनन्द, सुख नसीब नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मों के अनुसार अगर आप किसी को भी बुरा कहते हो तो आपको कोई फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही है। निंदा-चुगली करने वाले लोग मन मुख होते हैं। वो किसी पीर-फकीर को मानने वाले नहीं होते। ऐसे लोगों का दोनों जहां में मुंह काला होता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि किसी को बुरा न कहो अगर आप एक अंगुली किसी की तरफ उठाते हो तो तीन अंगुलियां आपकी तरफ उठती हैं। इसका अर्थ यही होता है कि दूसरों को बुरा कहने से पहले अपने अंदर निगाह मारें। कई लोग सत्संग सुनते रहते हैं, भक्त बने रहते हैं लेकिन फिर भी चुगली, निंदा से बाज नहीं आते और निंदा, ईर्ष्या में डूबे रहते हैं। ऐसे लोग सांप जैसे होते हैं। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">सांप जब तक चन्दन से लिपटा रहता है तब तक जहर नहीं उगलता लेकिन जैसे ही वह वहां से हटता है तो जहर उगलना शुरू कर देता है। वैसे ही वो लोग होते हैं जब तक सत्संग के दायरे में हैं, गुरू, पीर-फकीर वचन कर रहा है तब तक वो शांत रहते हैं लेकिन जैसे ही सत्संग के दायरे से बाहर होते हैं तो निंदा, ईर्ष्या करना शुरू कर देते हैं। परंतु जो इन्सान संतों के वचनों पर अमल करते हैं, निंदा-चुगली से कोसों दूर रहते हैं उन पर मालिक की दया-मेहर, रहमत जरूर बरसती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Tamatar ki Kheti: छोटे किसानों के लिए लाभकारी है टमाटर की खेती" href="http://10.0.0.122:1245/tomato-cultivation-is-beneficial-for-farmers/">Tamatar ki Kheti: छोटे किसानों के लिए लाभकारी है टमाटर की खेती</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:40:11 +0530</pubDate>
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                <title>Anmol Vachan: ‘मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ )। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में जीव जब चलकर आते हैं, राम नाम का पाठ संत उन्हें पढ़ाते हैं। सुन कर जो अमल कमाया करते हैं उनके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और मालिक की दया-मेहर मुसलाधार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/there-is-infinite-joy-in-the-name-of-the-lord/article-65094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/saint-dr-msg1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा (सच कहूँ )। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में जीव जब चलकर आते हैं, राम नाम का पाठ संत उन्हें पढ़ाते हैं। सुन कर जो अमल कमाया करते हैं उनके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और मालिक की दया-मेहर मुसलाधार बरसती हुई उन्हें नजर आने लगती है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां हैं। नाम का सुमिरन कोई नसीबों वाला और अच्छे संस्कारों वाला ही करता है। देखने में आता है कि मालिक का नाम अनमोल है। पर कोई-कोई ही ले पाता है, कोई-कोई ही उसका जाप कर पाता है। जो करता है, वो खुशियां जिसकी कभी कल्पना नहीं हो सकती, इन्सान को महसूस होती हैं। और इन्सान उन खुशियों को हासिल करके दोनों जहानों की सैर करना शुरू कर देता है। एक बार आत्मा अगर रुहानी मंडलों पर उड़ारी मार देती है तो कभी भी गिरती नहीं, बल्कि उड़ती चली जाती है। काल-महाकाल की भी ताकत नहीं होती कि उसे रोक सके। जीते-जी जब तक शरीर में आत्मा रहती है तो परमानंद की प्राप्ति होती है और मरणोपरांत आत्मा को मोक्ष मुक्ति मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब तक जिंदगी है मालिक की भक्ति करो, आत्मरक्षा हर प्राणी का फर्ज है उसे करते रहना चाहिए। सुमिरन करते रहना चाहिए। मन के हाथों चढ़कर गलत कदम कभी न उठाओ। मन बड़ा जालिम है, जो भी इन्सान मन के हाथों मजबूर होकर बुरे कर्म करते हैं वो हमेशा दुखी रहते हैं, परेशान रहते हैं तथा खुशियां कभी उनके पास नहीं आती। Anmol Vachan</p>
<p><a title="Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लगेंगी!" href="http://10.0.0.122:1245/yaad-e-murshid-free-eye-camp-3/">Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लग…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>सत्संग</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 12:01:43 +0530</pubDate>
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                <title>मालिक सच्ची भावना को सुनते हैं: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा को जो सच्ची भावना, सच्चे हृदय से याद करता है, वो मालिक उनकी पुकार सुनते हैं। आज के दौर में इन्सान अपने-आपमें इतना खो गया है कि उसके पास अपने अलावा दूसरों के लिए समय नहीं है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-lord-listens-to-true-feelings-pujya-guru-ji/article-63669"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/anmol-vachan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा को जो सच्ची भावना, सच्चे हृदय से याद करता है, वो मालिक उनकी पुकार सुनते हैं। आज के दौर में इन्सान अपने-आपमें इतना खो गया है कि उसके पास अपने अलावा दूसरों के लिए समय नहीं है, पर जो मालिक के प्यारे समय निकालते हैं और समय निकाल कर हिम्मत और दृढ़ता से परहित, परमार्थ करते हैं, उन पर मालिक का रहमो-कर्म एक न एक दिन जरूर बरसता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सेवा करना महान है, पर सेवा की अड़चन मन और मनमते लोग डालते रहते हैं। इसलिए न मन की सुनो, न मनमते इन्सान की सुनो। आप सेवा पर चलते हुए परमपिता परमात्मा की दया-मेहर को हासिल करो, सुमिरन करो, किसी को दु:खी देखकर खुश न हो, बल्कि उसका दु:ख दूर करने की कोशिश करो। इसी का नाम भक्त, सच्चा मुरीद होता है। परंतु ऐसा बहुत मुश्किल है, क्योंकि आज लोग दूसरों के सुखों को दुखकर दु:खी हैं, दूसरों को खुश देखकर परेशान हैं। ऐसी भावना रखने वाला, शैतानियत के कारनामे करने वाला मालिक से दूर होता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि हमेशा दया, रहम की भावना अंदर बना कर रखो।</p>
<p style="text-align:justify;">हमेशा सबका भला मांगते रहो, कभी किसी का बुरा न करो। जो लोग सेवा-सुमिरन करते हैं, यकीनन मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल वो जरूर बन जाते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि नाम का सुमिरन और सेवा दो गहने हैं। जो भी इन गहनों को धारण कर लेता है, वो मालिक की कृपा के काबिल बनता है, उस पर उस परमात्मा का रहमो-कर्म जरूर बरसता है और सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि उसकी कुलों का भी उद्धार हो जाया करता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अपने विचारों को शुद्ध करो और मालिक से मालिक को मांगा करो। जितना हो सके सत्संग सुनो, सेवा-सुमिरन करो, तो यकीनन इन्सान को रूहानी तंदुरुस्ती, ताजगी मिलती है, दिलो-दिमाग फ्रैश रहता है और उसकी झोलियां मालिक की कृपा से मालामाल हो जाया करती हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 17:04:43 +0530</pubDate>
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                <title>किसी के कहने से सेवा-सुमिरन ना छोड़ो: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज़)। Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में जो क्षण गुजरते हैं, वो क्षण इन्सान की पूरी जिंदगी बदल देते हैं। मालिक की याद में समय लगाना बड़ा मुश्किल है, लेकिन जिसको मालिक की याद आती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/do-not-give-up-sewa-and-sumiran-at-someones-behest-pujya-guru-ji/article-62499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/sirsa-news-6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में जो क्षण गुजरते हैं, वो क्षण इन्सान की पूरी जिंदगी बदल देते हैं। मालिक की याद में समय लगाना बड़ा मुश्किल है, लेकिन जिसको मालिक की याद आती है, वो अति भाग्यशाली, कर्मों वाला है और दोनों जहान में उसका नाम रोशन होता है। आप जी फरमाते हैं कि अगर इन्सान चाहे तो अपना भाग्य बदल सकता है। कोई कहे कि तू अभाग्यशाली है, तो आप टेंशन ना लो। आप चुपचाप घंटा-घंटा सुबह-शाम राम का नाम जपना शुरू कर दो।</p>
<p style="text-align:justify;">यकीन मानो, आपके कर्मों की वो काली परछाई कब उड़ जाएगी, आपको मालूम ही नहीं पड़ेगा और आप अति भाग्यशाली बन जाएंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि टेंशन किसी भी चीज का हल नहीं होता। जितनी आप टेंशन लेंगे, उतना शरीर और रूह दोनों ही बर्बाद होते हैं। सोचना इन्सान का कर्म है और कर्म करना भी इन्सान का फर्ज है। लेकिन अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं है। हद से ज्यादा कर्म करते हो, तो हो सकता है कि वो आपकी सेहत के लिए जायज ना हो। हद से ज्यादा सोचना टेंशन का कारण बन जाता है। इसलिए सोचो, हिम्मत करो, कर्म करो और मालिक पर छोड़ दो। आपका काम मेहनत करना है। आपके शरीर में जितना सामर्थ्य है, शक्ति है, आप कर्म करो। जितना दिमागी तौर पर अच्छे कर्म कर सकते हो, करो। आगे मालिक जाने, उसका काम जाने। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को कर्म करना चाहिए और साथ में सुमिरन करना चाहिए। आप जो सोच रहे हैं, क्या पता मालिक वो करने को तैयार बैठा हो। परंतु आप किसी भय की वजह से या मन की वजह से सुमिरन न करते हों, मालिक को अपनी बात न कह पाते हों, तो यह आपकी कमी है। Saint Dr. MSG</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हृदय रोगों का उपचार शुरू, कैथ-लैब स्थापित" href="http://10.0.0.122:1245/treatment-of-heart-diseases-started-in-shah-satnam-ji-specialty-hospital/">शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हृदय रोगों का उपचार शुरू, कैथ-लैब स्थापित</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Sep 2024 16:20:46 +0530</pubDate>
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                <title>मालिक को पाने की राह पर दृढ़ता से चलना बेमिसाल: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्यार, उसकी मोहब्बत जिनके नसीब में आती है, वे बहुत भाग्यशाली हैं। मालिक की उन पर बहुत रहमत होती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में झूठ-फरेब, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/words-of-respected-guru-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-insan-ji/article-56571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/msg-6-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्यार, उसकी मोहब्बत जिनके नसीब में आती है, वे बहुत भाग्यशाली हैं। मालिक की उन पर बहुत रहमत होती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में झूठ-फरेब, ठगी-बेइमानी चलता रहता है। भाग्यशाली वे हैं, जो मालिक के सच्चे प्यार के आशिक हैं। मालिक भी उन्हें भाग्यशाली बना देता है, जो उससे सच्चा प्यार करते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा के रास्ते पर चलना इस कलियुग में बेमिसाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि इन्सान फिजूल की बातों में ही उलझा रहता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक को पाने की राह में बहुत सारी अड़चनें आती हैं। रोकने-टोकने वाले मिलते हैं। इसके बावजूद जिनके बहुत अच्छे भाग्य होते हैं, वे इन्सान ही मालिक की राह पर चला करते हैं और खुशियों से लबरेज होते चले जाते हैं। आपजी ने फरमाया कि मालिक की राह पर चलने वाले किसी की परवाह नहीं करते। कोई क्या बोलता है, कोई क्या कहता है, इससे उन्हें कुछ लेना-देना नहीं होता। मालिक के प्यारों का तो एक ही उसूल होता है कि हमने परमपिता परमात्मा को पाने के लिए दृढ़ता से आगे बढ़ना है। फिर ऐसे इन्सान को भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड भी अन्दर-बाहर से कोई कमी नहीं छोड़ते और मालामाल कर देते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Summer special Laddu: गर्मियों में ठंडाई का काम करेगा ये खास लड्डू, हर रोज खाएं, कमजोरी एवं थकान दूर भगाएं" href="http://10.0.0.122:1245/summer-special-laddu/">Summer special Laddu: गर्मियों में ठंडाई का काम करेगा ये खास लड्डू, हर रोज खाएं, कमजोरी एवं थकान दूर भगाएं</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/words-of-respected-guru-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-insan-ji/article-56571</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Apr 2024 16:11:58 +0530</pubDate>
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