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                <title>Gods Word - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>परेशानियों से छुटकारा दिलाता है राम-नाम</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-saves-from-bad-things/article-4706"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/guruji-1-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं। जो दान-दक्षिणा लेते हैं वो संत ही नहीं होते, क्योंकि संत माया के लिए नहीं बल्कि राम-नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं। जब भगवान ही पैसा नहीं लेते तो संत पैसा क्यों लें? सभी धर्मों में लिखा है कि भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान हर इन्सान के अंदर समाया हुआ है। भगवान को देखने के लिए किसी जंगल, पहाड़ आदि कहीं पर भी जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है। ऐसे-ऐसे रोग जिनको डॉक्टर लाईलाज बता देते हैं, राम-नाम के द्वारा वो लाईलाज रोग भी ठीक होते हुए देखे गए हैं। भगवान सर्वव्यापक है।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर रोज सुबह-शाम आधा-आधा घंटा राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए। जिस तरह इन्सान खाने-पीने, सोने के लिए समय निश्चित करता है, सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन खाना इन्सान नहीं भूलता उसी तरह राम का नाम भी नहीं भूलना चाहिए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jul 2018 03:19:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जन्मों-जन्मों के पाप कर्मों को काटता है राम नाम</title>
                                    <description><![CDATA[जिन्हें कर्म रोग कहते हैं वो राम नाम से कट जाया करते हैं पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अपने किये कर्मों का फल जरूर भोगता है। कई बार इन्सान सोचता है कि मैंने ऐसा कौन-सा कर्म किया है जिसकी वजह से मैं दु:खी हूं। लोग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">जिन्हें कर्म रोग कहते हैं वो राम नाम से कट जाया करते हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अपने किये कर्मों का फल जरूर भोगता है। कई बार इन्सान सोचता है कि मैंने ऐसा कौन-सा कर्म किया है जिसकी वजह से मैं दु:खी हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोग मिलते हैं कि मैंने इस जीवन में कोई बुरा कर्म नहीं किया, कोई गलत कर्म नहीं किया फिर भी मैं दु:खी हूं, परेशान हूं। आप जी फरमाते हैं कि इसकी वजह होती है इन्सान के संचित कर्म, जन्मों-जन्मों के संचित कर्म इन्सान के साथ जुड़े होते हैं। उन पाप कर्मों को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम का नाम ही खत्म कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सभी रोगों की मुकमल दवा, औषधि है अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम का नाम। सच्चे दिल से, सच्ची भावना से कोई प्रभु का नाम लेता है तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्म तो कटते ही हैं, जो बेवजह काम-धंधे में बाधा, शरीर में रोगों का लग जाना, जिन्हें कर्म रोग कहते हैं वो राम नाम से कट जाया करते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">लाईलाज का इलाज़ राम नाम</h1>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि यहां लाखों मरीज आते हैं और उनके अनुभव बताते हैं कि उन्होंने राम का नाम जपा और जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट गए। कैंसर जैसे रोग, जिन्हें डॉक्टर लाईलाज कहते हैं, जिन्हें थर्ड स्टेज का कैंसर था और आज भी वो जिंदा हैं। ऐसा कैसे संभव है?</p>
<p style="text-align:justify;">इस बारे में आप जी फरमाते हैं कि जैसे बच्चा भूखा हो तो मां तड़प उठती है, आपके बच्चे के जरा-सी चोट लग जाए तो आंखों से बेइंतहा आंसू आ जाते हैं। ऐसी ही भावना अगर इन्सान अल्लाह, वाहेगुरु, राम के लिए बनाए, उसे याद करे, उसकी भक्ति करे तो जिस मालिक ने शरीर बनाया उसके लिए शरीर से रोग निकालना इस तरह है जैसे मक्खन से बाल निकालना।</p>
<h1 style="text-align:center;">भगवान आपके पैसे का भूखा नहीं है</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान आपके पैसे का भूखा नहीं है, अगर ऐसा होता तो अरबों-खरबोंपति तो कभी बीमार ही न होते। वह भगवान भावना से मिलता है। जिसकी शुद्ध भावना होती है वो मालिक को पा लिया करते हैं। उन्हीं पर मालिक की कृपादृष्टि होती है, साक्षात मालिक के दर्शन कर सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 09:53:17 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्संग में आने से कटते हैं पाप कर्म : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग भागों वालों को मिला करता है, और जो सत्संग में चलकर आते हैं वो और भाग्यशाली बन जाया करते हैं। क्योंकि दुनिया में कहीं भी आप जाओ, दुनिया में चुगली है, निंदा है, टांग खिंचाई है, लड़ाई-झगड़े, काम-वासना, मोह-ममता, मन-माया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग भागों वालों को मिला करता है, और जो सत्संग में चलकर आते हैं वो और भाग्यशाली बन जाया करते हैं। क्योंकि दुनिया में कहीं भी आप जाओ, दुनिया में चुगली है, निंदा है, टांग खिंचाई है, लड़ाई-झगड़े, काम-वासना, मोह-ममता, मन-माया इसका मकड़जाल फैला हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं भी आप जाएंगे लोग ऐसा कर्म करते आपको नजर आएंगे। सत्संग में आते हो तो जिस तरह आप अपने मैले कपड़े धोबी को दे देते हो वो बिल्कुल धोकर साफ कर देता है, चमका देता है उसी तरह सत्संग में आने से आपके पाप कर्म कटना शुरु हो जाते हैं। आप पाक-पवित्र बन जाते हैं, आत्मा उज्जवल हो जाती है, हृदय निर्मल हो जाता है और आप इस लायक बन जाते हैं कि मालिक की याद में ध्यान लगने लगता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि यदि आप अपने विचारों का शुद्धिकरण चाहते हो, अपने विचारों को बदलना चाहते हो और चाहते हो कि आप को परमानंद मिलें, खुशियां मिले तो जरूरी है सत्संग में चलकर आओ। दुनियादारी में लोग गुमराह करने के सिवाए कुछ नहीं करते। आप से प्यार करते हैं, अगर अच्छा व्यवहार करते हैं उसके पीछे कोई न कोई उनकी मंशा जरूर छिपी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई न कोई स्वार्थ जरूर होता है। फिर भी आपको लगता है कोई नि:स्वार्थ आपको प्यार करता है तो वो संत करते हैं या फिर सच्चे शिष्य करते हैं। अदरवाईज दुनिया में बहुत मुश्किल है कि कोई बेगर्ज प्यार करे। नि:स्वार्थ भावना से आपसे बात करे। लोग खिलाते पिलाते हैं। उसके पीछे भी बहुत मकसद होेते हैं।कई बार अपना साजो सामान बेचने के लिए अपना उल्लू सीधा करने के लिए लोग आपको बरगला लेते हैं। मीठी-मीठी बातें करते हैं, आपको भरमाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनानते हैं ताकि आप गुमराह हो जाएं और मालिक से दूर हो जाएं। तो ये जरूरी है कि आप रब का नाम लें, ईश्वर को याद करें, सत्ंसग सुनें। तभी आपको अच्छे बुरे की समझ आएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 10:54:09 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भयानक पाप-कर्मों से बचाता है सत्संग</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, तथा उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। आप जी फरमाते हैं कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्म […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, तथा उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। आप जी फरमाते हैं कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा कितना बड़ा है, इसके बारे में कुछ भी लिख-बोलकर नहीं बताया जा सकता, लेकिन यह हकीकत है कि जीव सत्संग सुनकर अमल करे तो जीव अपने भयानक से भयानक पाप-कर्मों से बच जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग सुनकर अमल करने का मतलब है कि आप नाम जपो, मालिक की औलाद से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो, कभी भी किसी का दिल न दुखाओ। अहंकारवश, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, मन-मायावश जब जीव किसी का दिल दुखाता है तो उसकी भक्ति कटती है, वह खुद दुखी होता है और मालिक से दूर हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए कभी किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। जब इतने बड़े महापुरुष, संत, पीर-फकीरों ने यह लिख दिया कि ‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय, जिन ऐसा कर मानेया, मीत हमारा सोय।।’ कहने का मतलब है कि कहने को कोई भी कह देगा कि मैं ये हूं, वो हूं लेकिन जो लोग ऐसा मान लेते हैं कि मैं दूसरों को बुरा क्यों कहूं और वो असल में किसी को बुरा नहीं कहता, बल्कि अपने आपको ही बुरा कहता है तो जो ऐसा कहकर मान लेते हैं, वो मालिक के मीत, प्यारे, अति प्यारे हो जाया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में जीव को समझ आती है, लेकिन यह जरूरी है कि आदमी सुनकर अमल करे। तभी खुशियां हासिल होती हैं। सुनना अच्छी बात है। जैसे पत्थर गर्मी में रहते हैं तो किसी का पांव सड़ा देते हैं। उन पर थोड़ा पानी गिरता रहे तो वो ठंडे रहते हैं। सत्संग सुन कर जीव चाहे अमल न करे फिर भी न सुनने वाले से तो बेहतर हैं लेकिन सुनकर अमल करने से ही खुशियां आती हैं, वरना किए कर्मों का भुगतान करना पड़ता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग में संत जीवों को शिक्षा देते हैं कि मानो भाई, अमल करो और जो सुनकर अमल कर लिया करते हैं, वो ही दोनों जहान की खुशियों के हकदार बनते हैं। उन्हीं के अंदर पवित्रता आती है, चेहरे पर नूर आता है। वो एक दिन मालिक के दर्श-दीदार के काबिल जरूर बन जाया करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Mar 2018 06:02:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सत्संग में मिलती है आत्मा को शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह है, यहां आने से इन्सान का शुद्धिकरण होता है, जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं, अंत:करण की सफाई होती है और मालिक से मिलने की इच्छा जागृत हो जाती है। इन्सान के दिलो-दिमाग में विचारों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-gives-the-power-to-the-soul/article-3556"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-02/pitaji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह है, यहां आने से इन्सान का शुद्धिकरण होता है, जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं, अंत:करण की सफाई होती है और मालिक से मिलने की इच्छा जागृत हो जाती है। इन्सान के दिलो-दिमाग में विचारों का आना जाना आम बात है, खास बात यह है राम, अल्लाह, वाहेगुरु, खुदा, रब्ब के विचारों का आना। आप जी फरमाते हैं कि कलियुग में काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार, मन-माया यह आम बात है। यह विचार तो चलते ही चलते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पर इन विचारों का काट करके जब सतगुरु के प्यार, सत्संग में मिलती मुहब्बत के विचार चलने लगते हैं तो वो खास बात हो जाती है और यह खास बात सत्संग में आकर अति खास होती है। यानि आत्मा को शक्ति मिलती है ताकि नेक विचार और बढ़ जाएं, उन विचारों का हमेशा तांता लगा रहे। यह घोर कलियुग का समय है। लोग मालिक से सैकड़ों इच्छाएं रखते हैं, मालिक पूरी भी करता है, कदम-कदम पर जान बचाता है, मौत जैसे भयानक कर्मों को पल में काट देता है। जब वो कर्म होते हैं, जब मालिक का रहमों कर्म होता है तो इन्सान को लगता है कि जिंदगी तो है ही उसी की।</p>
<p style="text-align:justify;">जब समय गुजरता है तो मन इतना हरामी, कपटी है कि इन्सान सतगुरू के किये गए परोपकारों को भुला देता है। आप जी ने फरमाया इन्सान की सौ में से निन्यानवें इच्छाएं सतगुरू ने पूरी कर दी उसका शुक्राना नहीं जो एक इच्छा पूरी नहीं हुई उसका गिला-शिकवा ज्यादा होता है। आप जी फरमाते हैं कि मौत जैसा कर्म कटता है अगर इन्सान अरबों-खरबों रुपये लगा दे तो भी जिंदगी खरीद नहीं सकता। जिस दाता ने जिंदगी दी है, इन्सान को उसका शुक्राना करते रहना चाहिए क्योंकि उसकी रहमत से जिंदगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मन व मनमते लोगों के जाल में इन्सान ऐसा फंसता है कि सतगुरू के किये गए परोपकारों को पल में भुला देता है। इसी का नाम घोर कलियुग है। लोग मालिक की दया मेहर रहमत को भुला देते हैं और मन व मनमते लोगों में उलझे रहते हैं।आप जी फरमाते हैं कि अगर सतगुरू के गुणगान गाओगे तो वो किसी तरह की कमी नहीं छोड़गा, वो अंदर-बाहर से लबरेज रखेगा। आदमी, आदमी है, मालिक तो सबके अंदर रहता है। इसलिए मालिक की सुनो, अपने गुरु-पीर की सुनो, अपने दिमाग से काम लो। आप जी फरमाते हैंकि वचनों पर अमल किया करो ताकि बुराइयों से आपका पीछा छूट जाए और सुमिरन-सेवा करते हुए मालिक की रहमत के हकदार बनो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Feb 2018 03:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वचनों को मानने से मिलती हैं खुशियां</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिहं जी इन्सां फरमाते हैं कि एक मुरीद मालिक से दुआ करके अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ता है तो परमपिता परमात्मा, वो सतगुरु, मौला उसकी दुआ मंजूर, कबूल करता है और बदले में अंत:करण को खुशियों से भरपूर कर देता है। आप जी फरमाते हैं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिहं जी इन्सां फरमाते हैं कि एक मुरीद मालिक से दुआ करके अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ता है तो परमपिता परमात्मा, वो सतगुरु, मौला उसकी दुआ मंजूर, कबूल करता है और बदले में अंत:करण को खुशियों से भरपूर कर देता है। आप जी फरमाते हैं कि जो जीव वचनों पर अमल किया करते हैं उन्हें सतगुरु, दाता की भरपूर खुशियां मिलती हैं। इसलिए वचनों पर चलना, उनके बताए रास्ते पर चलना अति जरूरी है। वो लोग भाग्यशाली हैं जो वचनों पर चलते हैं और उनके माता-पिता भी धन्य-धन्य होते हैं जिनकी औलाद संत, पीर-फकीर के वचनों को सुनते हैं।  ऐसा घोर कलियुग है और जीव के कर्म इतने भारी हैं, मन ऐसा अहंकारी है कि लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर से आकर सत्संग सुनते हैं और कई ऐसे निर्भागे होते हैं जो बिलकुल फ्री में सत्संग सुन सकते हैं, जिन्हें कोई काम-धन्धा नहीं, फिर भी मन के हाथों मजबूर होकर मालिक की खुशियां हासिल नहीं कर पाते और दुर्भाग्यशाली बनकर कर्मों की ठोकरों तले हमेशा दबे रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें न अंदर चैन मिलता है और न बाहर का सुकून। वचनों को मानने … आप जी फरमाते हैं कि यह काल की नगरी है और यहां तरह-तरह के लोग हैं। सभी एक तरह के नहीं होते, लेकिन यह देखकर हैरानी होती है कि क्या मन इतना शातिर है कि पीर-फकीर की बात को ही नहीं सुनता। यह घोर कलियुग का समय है। यहां मन-इंद्रियां बड़े फैलाव में हैं लेकिन इन्सान को यह याद रखना चाहिए कि अगर वह दे सकता है तो एक पल में सब कुछ ले भी सकता है। लगता है कि जब ऐसा समय आएगा तभी लोगों को अक्ल आएगी और मालिक ऐसा जरूर करेगा। आज इन्सान को जब तक ठोकर नहीं लगती तब तक वह नहीं मानता। चाहे उसे जितना मर्जी ज्ञान सुना दो। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान पर जब कर्मों की मार पड़ती है तो वह बिलबिलाता है और फिर क्या किया जा सकता है। तो यह घोर कलियुग का समय है, यहां मन इन्सान की पट्टी पोंछ कर रख देता है। इसलिए कहते हैं कि जो लोग सत्संग में चलकर आते हैं उनके अच्छे भाग्य हैं और वो ही खुशियां हासिल कर जाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2017 04:36:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालिक का नाम सुखों की खान: डॉ. एमएसजी</title>
                                    <description><![CDATA[लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत | Gods Word सरसा (आनंद भार्गव)। मालिक का नाम सुखों की खान है, (Gods Word) लेकिन वो खान ढूंढना बहुत जरूरी है। कहीं भी पता चल जाए कि इस दुनियां में सोने, चांदी, हीरे जवाहरात की खान है तो लोग दिन रात उन्हें ढूंढने में लगे रहते हैं, दिन रात […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-give-us-happiness-saint-dr-msg/article-2732"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gurmeet-ram-rahim-11.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत | Gods Word</h1>
<p><strong>सरसा (आनंद भार्गव)।</strong> मालिक का नाम सुखों की खान है, <strong>(Gods Word)</strong> लेकिन वो खान ढूंढना बहुत जरूरी है। कहीं भी पता चल जाए कि इस दुनियां में सोने, चांदी, हीरे जवाहरात की खान है तो लोग दिन रात उन्हें ढूंढने में लगे रहते हैं, दिन रात मिट्टी छानते रहते हैं। आपके अंदर ऐसी खान है, जिसको हासिल करने से आपके गम, चिंता दूर हो जाएंगी। परमानंद मिलेगा और चेहरे पर बेइंतहा खुशियां छा जाएंगी। उक्त वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम में आयोजित रूहानी सत्संग के दौरान फरमाए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">11,560 लोगों ने लिया गुरुमंत्र | Gods Word</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने 11,560 लोगों को नाम, गुरुमंत्र दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">हजारों लोगों ने जाम ए इन्सां ग्रहण कर बुराइयां त्यागने व मानवता भलाई कार्य करने का संकल्प लिया।</li>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि इंसान जरूर कोशिश करेगा कि क्यों ना ऐसी खान को हासिल किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">हैरानी की बात है कि इसको पाने के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ता, कोई दान चढ़ावा नहीं देना पड़ता।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">जट्टू इंजीनियर की डीवीडी लांच | Gods Word</h1>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि वो खान है हरी रस, आबोहयात की खान, जो सब में मौजूद है। राम नाम की खान को पाने के लिए सुमिरन करना पड़ता है। भक्ति में समय लगाना पड़ता है तभी वो खान नसीब होती है। एक बार वो हरी रस मिल गया तो सारी जिंदगी आप बेगमपुर के बादशाह बन जाओगे। सुख- शांति- खुशियों से मालामाल हो जाओगे। इसको पाने के लिए कोई जंगल पहाड़ों में नहीं जाना पड़ता और ना ही घर बार छोड़ना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए आपके हाथ कार यानि कार्य की तरफ हों व ध्यान यार यानि प्रभु परमात्मा की तरफ हो। हाथों पैरों से कर्मयोगी बनो और जिव्हा-ख्यालों से ज्ञानयोगी बनो। पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन व माया आपके श्वासों को लूट रहे हैं। आप इनमें डूब कर खुश होते हैं। आपका हर श्वास त्रिलोकी से भी बेशकीमती है, इनमें जितने लगा दिए बर्बाद हो गए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">यारी करनी है तो परमात्मा से करो | Gods Word</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि संत कहते हैं कि संग करने से पहले हजार बार सोचो।</li>
<li style="text-align:justify;">संग सोहबत इंसान को ले डूबती है।</li>
<li style="text-align:justify;">अपनी कमियां ढूंढों, बुरा संग ना करो।</li>
<li style="text-align:justify;">यारी करनी है तो उस परमपिता परमात्मा, अल्लाह, राम से करो।</li>
<li style="text-align:justify;">उसे अपना सर्वश्रेष्ठ, बेस्ट फ्रेंड बना लो।</li>
<li style="text-align:justify;">इस दौर में अगर अंदर का खजाना हासिल करना चाहते हो तो अच्छा संग करो और सत्संग जरूर सुनो।</li>
<li style="text-align:justify;">सत्संग सुनकर मानते हो तो फायदा ज्यादा है,</li>
<li style="text-align:justify;">आप अंदर के खजाने की तरफ बढ़ते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि सबसे सच्चा दोस्त राम सतगुरु है जो आपके बडे से बडे गुनाह को कब चुटकी में माफ कर देता है</li>
<li style="text-align:justify;">आपको पता ही नहीं लगता।</li>
<li style="text-align:justify;">आपकी भक्ति व मानवता भलाई के कार्यों को देखते वो पहाड़ जैसे कर्मों को चकनाचूर कर देता है।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">बाक्सर मनोज कुमार को दी बधाई | Gods Word</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भारतीय बाक्सर मनोज कुमार द्वारा चेक गणराज्य में 48वीं ग्रां प्री उस्तीनाद लाबेम चैंपियनशिप मेें स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी है।</li>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी ने ट्विट कर बधाई देते हुए बाक्सर मनोज कुमार को शुभकामनाएं भी दी।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">4 जरूरतमंदों को दिए चैक | Gods Word</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के भलाई फंड से 4 जरूरतमंदों को सौंपे। पूज्य गुरुजी ने गुरभगत सिंह इन्सां निवासी मुक्तसर पंजाब को उसके पिता के इलाज के लिए 1 लाख, जोगिंद्र इन्सां जिला पानीपत को उसकी पत्नी के इलाज के लिए 75 हजार, बग्गा सिंह इन्सां जिला पटियाला को बेटे के इलाज के लिए 1 लाख तथा कुलविंद्र कौर इन्सां जिला फरीदकोट को पति के इलाज के लिए 40 हजार रुपए के चैक सौंपे।</p>
<h1 style="text-align:justify;">7 दिन चलेगा पावन भंडारे का कार्यक्रम | Gods Word</h1>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के दौरान पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि अगस्त माह का पावन भंडारा 7 दिनों तक चलेगा। 10 से 16 अगस्त तक चलने वाले पावन भंडारे में सातों रात भव्य रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भंडारे में आकर्षण का केंद्र मेला टाईप वातावरण होगा, जिसमें अलग अलग राज्यों की दुकानें होंगी। सत्संग के दौरान रोजाना गुरुमंत्र दिया जाएगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2017 23:30:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राम-नाम ही बनाता है इन्सान को बे-गम</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक के नाम के बिना, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की याद के बिना और कोई तरीका नहीं है, जो इन्सान को बे-गम कर सके, इन्सान की परेशानियों को दूर कर सके और आने वाले पहाड़ जैसे कर्म को काट सके। यह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/method-of-meditation-makes-life-easy/article-2129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gurmeet-ram-rahim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक के नाम के बिना, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की याद के बिना और कोई तरीका नहीं है, जो इन्सान को बे-गम कर सके, इन्सान की परेशानियों को दूर कर सके और आने वाले पहाड़ जैसे कर्म को काट सके। यह सब अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति, सेवा से ही संभव है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अहंकार बुरी बला है</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार बुरी बला है। गैरत-अणख एक अलग चीज है। सच, नेकी की राह पर चलते हुए अपना दृढ़ विश्वास बनाकर रखना, उसे अणख-गैरत कहा जाता है। घमंड, अहंकार आ जाना सही नहीं है। एक सेवादार, मालिक से प्यार करने वाले को जितना हो सके, दीनता-नम्रता धारण करनी चाहिए। सभी से मीठा बोलो और किसी को भी कड़वा न बोलो। मालिक के नाम को सलाम है। अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब के नाम का पटा जब गले में डल जाता है, तो जीव उस पटे को सलाम करते हैं, न कि आदमी की करतूतों को। इसलिए अपने अंदर के बुरे कर्मों को बदल डालो। सुमिरन, सेवा करो और सबका भला मांगो, फिर मालिक आपका भला जरूर करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/method-of-meditation-makes-life-easy/article-2129</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 04:04:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परेशानियों से छुटकारा दिलाता है राम-नाम : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जो दान-दक्षिणा लेते हैं वो संत ही नहीं होते, क्योंकि संत माया के लिए नहीं बल्कि राम-नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं। जब भगवान ही पैसा नहीं लेते तो संत पैसा क्यों लें? सभी धर्मों में लिखा है कि भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान हर इन्सान के अंदर समाया हुआ है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है</h2>
<p style="text-align:justify;">भगवान को देखने के लिए किसी जंगल, पहाड़ आदि कहीं पर भी जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है। ऐसे-ऐसे रोग जिनको डॉक्टर लाइलाज बता देते हैं, राम-नाम के द्वारा वो लाईलाज रोग भी ठीक होते हुए देखे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवान सर्वव्यापक है। भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर रोज सुबह-शाम आधा-आधा घंटा राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए। जिस तरह इन्सान खाने-पीने, सोने के लिए समय निश्चित करता है, सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन खाना इन्सान नहीं भूलता उसी तरह राम का नाम भी नहीं भूलना चाहिए। भोजन तो केवल शरीर को ताकत देता है लेकिन राम का नाम आत्मा, रूह को ताकत देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस तरह मजबूत पेड़ पर लगने वाली टहनियां, फल आदि अपने आप आ जाते हैं उसी तरह जिस इन्सान की आत्मा शुद्ध होती है तो उसे सारे सुख मिल जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस समय इन्सान के आत्मबल में कमी आती है तो बहुत से लोग सोचते हैं कि वो तो मरने की कगार पर है और उस पर कोई भी दवा काम नहीं करती, लेकिन उस समय अगर इन्सान राम के नाम का जाप करे तो राम-नाम एक दवा का काम करता है और वो इन्सान ठीक हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 02:05:18 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नाम की महिमा अपरम्पार</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-are-priceless-saint-dr-msg/article-1203"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/guruji-in-satsang.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा: </strong>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम की महिमा अपरम्पार है और वो जीव बहुत भाग्यशाली होते हैं, जो इस घोर कलियुग में उस मालिक के नाम से अपने-आपको जोड़ लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घोर कलियुग में जीव राम-नाम से जुड़ना तो दूर उसे राम नाम कभी-कभार ही याद आता है। इन्सान अपने बनाए गए जाल में इतना फंस जाता है कि वह काम-धंधे, परिवार आदि में उलझकर उस मालिक को भूला देता है। वो उसे तभी याद आता है, जब इन्सान को कोई गम, दु:ख, दर्द या परेशानी हो। जब इन्सान के सामने कोई मुश्किल आ जाए, तब उसे मालिक बहुत प्यारा लगता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इन्सान मालिक से दूर होकर रहता है परेशान</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब इन्सान के सामने सभी सुख-सुविधाएं होती हैं, तो उसे कोई याद नहीं रहता और इन्सान का मन इन्सान को ही इसका पूरा श्रेय देता है। ये सभी चीजें इन्सान को मालिक से दूर रखती हैं और इन्सान मालिक से दूर होकर परेशान रहता है। इसलिए आप अगर वाकई प्रभु से खुशियों की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो प्रभु के नाम का सुमिरन व भक्ति-इबादत किया करें। उसके नाम का किया गया सुमिरन ही आपको खुशी की तरफ लेकर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि उस मालिक को ढोंग-ढकोसले बिल्कुल ही पसंद नहीं हैं। इन्सान भले ही जितना मर्जी दिखावा करता रहे, लेकिन जब तक इन्सान का अंत:करण साफ नहीं होता व वचनों का धनी नहीं बनता, तब तक मालिक की तमाम खुशियां पास होते हुए भी दूर होती हैं। इसलिए अगर आप मालिक की तमाम खुशियां हासिल करना चाहते हैं, तो आप वचनों पर अमल करना सीखो।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2017 23:44:54 +0530</pubDate>
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