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                <title>Saint Dr. MSG - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>भागों वाली घड़ी, दिन प्यारा-प्यारा</title>
                                    <description><![CDATA[15 अगस्त का दिन जहाँ भारत के इतिहास में बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन भारत गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुआ और भारतवासियों ने आजादी की फ़िजा का आनंद लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/clock-with-parts-day-lovely-lovely/article-89695"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/saint-dr.-msg-(3).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p style="text-align:justify;">Saint Dr. MSG: 15 अगस्त का दिन जहाँ भारत के इतिहास में बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन भारत गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुआ और भारतवासियों ने आजादी की फ़िजा का आनंद लिया, वहीं यह पवित्र दिन रूहानियत में भी उच्च स्थान रखता है। इसी दिन (15 अगस्त 1967) दुनिया को रूहानियत की वह ज्योत मिली, जिसने संसार में अज्ञानता, अंधविश्वास, जात-पात, नफरत और सांप्रदायिकता के अंधकार को समाप्त करके इन्सानियत का ऐसा प्रकाश किया, जिससे पूरी मानवता का कल्याण हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 15 अगस्त 1967 को श्री गुरुसर मोडिया, जिला श्रीगंगानगर (राजस्थान) की पवित्र धरती पर आदरणीय पिता नंबरदार मग्घर सिंह जी और आदरणीय माता नसीब कौर जी के घर अवतार धारण किया। आप जी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। पूजनीय बापू जी गाँव के नंबरदार और बहुत बड़े जमींदार थे। घर में दुनियावी चीजों की कोई कमी नहीं थी। बहुत बड़ा खानदान, साधन-सम्पन्न परिवार और हर सुख-सुविधा के साधन मौजूद थे। लेकिन इतने बड़े घराने में अगर कोई कमी थी तो वह थी खानदान के वारिस की। घर में सब कुछ था, लेकिन </p>
<p style="text-align:justify;">संतान न होने की चिंता आदरणीय बापू  जी और माता जी को हमेशा सताती रहती थी। आदरणीय बापू जी का गाँव के संत त्रिवेणी दास जी के साथ बहुत स्नेह था।</p>
<p style="text-align:justify;">बापू जी ने अपनी चिंता उनके सामने जाहिर की तो उन्होंने पूरा हौसला देते हुए कहा, ‘आप चिंता न करें। आपके घर कोई आम बच्चा जन्म नहीं लेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">समय आने पर स्वयं परम पिता परमात्मा अपना स्वरूप आपके घर भेजेगा।’18 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद आप जी ने पूजनीय माता-पिता जी की इकलौती संतान के रूप में अवतार धारण किया। जब आप जी 4-5 वर्ष के थे तो संत त्रिवेणी दास जी ने आप जी से कस्सी का टक लगवाकर गाँव में बनने वाली पानी की डिग्गी का मुहूर्त करवाया और कहा कि इनके बारे में अभी आपको कुछ भी पता नहीं, समय आने पर पता चलेगा कि यह कितनी महान हस्ती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय बापू जी आप जी से बहुत प्यार और सम्मान करते थे और आप जी की कही कोई बात नहीं टालते थे। प्यार इतना कि पूजनीय बापू जी आपको कंधों पर बैठाकर खेतों में ले जाते थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सतगुरु जी से मिलाप</h4>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने 5-6 वर्ष की उम्र में ही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज से नाम की अनमोल दात प्राप्त की। आप जी आदरणीय बापू जी के साथ डेरा सच्चा सौदा शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी धाम, सरसा आए। जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज तेरावास से नाम-शब्द वाले पंडाल में विराजमान हुए तो आप जी को आवाज देकर आगे बुलाया, ‘काका, आगे आ जा।’ अपने पास बिठाकर आपको भरपूर प्यार दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने 7-8 वर्ष की उम्र में ही ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। उन दिनों किसी खास घर में ही ट्रैक्टर हुआ करता था। इसी उम्र में आप जी ने खेती संभालने का काम भी शुरू कर दिया। इससे पहले पूजनीय बापू जी घराने की जमीन ठेके पर देते थे। आप जी के कहने पर पूजनीय बापू जी ने आप जी को खेती करने की इजाजत दे दी। उस साल बारिश सही समय पर हुई और चने की भरपूर फसल हुई। 9 वर्ष की उम्र में आप जी ने खेतीबाड़ी के साथ-साथ खेती का हिसाब-किताब और आढ़तियों के साथ लेन-देन भी संभाल लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पवित्र गुरुगद्दी की बख्शिश</h4>
<p style="text-align:justify;">रूहानियत में पवित्र गुरुगद्दी की बख्शिश एक अहम स्थान रखती है। सतगुरु ने सतगुरु को प्रकट करना होता है। पूजनीय परम पिता जी ने हजूर पिता जी को नाम-शब्द की अनमोल दात बख्शते समय अथाह प्यार देते हुए अपने पास बिठाया और बातचीत की। उसी दिन से उन्हें अपना वारिस बना लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/saint-dr.-msg.jpg" alt="Saint Dr. MSG" width="666" height="533"></img></p>
<p style="text-align:justify;">23 सितंबर 1990 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने आप जी (पूजनीय गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) को अपने साथ स्टेज पर विराजमान करके आप जी को गुरुगद्दी की बख्शिश की और साध-संगत को वचन फरमाए, ‘‘ आज से यह हमारा ही रूप हैं। जो जीव इनसे प्रेम करेगा, इनका हुक्म मानेगा और इन पर विश्वास करेगा, वह मानो हमारा हुक्म मानेगा।’’ पूरी साध-संगत को पूजनीय परम पिता जी द्वारा गुरुगद्दी रस्म का पवित्र हुक्मनामा पढ़कर सुनाया गया। पूजनीय परम पिता जी ने आप जी को अपना रूप बख्शा और वचन फरमाए, ‘‘हम थे, हम हैं, हम ही रहेंगे।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी और पूज्य हजूर पिता जी लगभग सवा साल तक एक साथ स्टेज पर विराजमान होते रहे। अपने मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पवित्र नाम और प्रभु परमात्मा को पाने का तरीका दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचे, संसार से जाति-प्रथा, अंधविश्वास, सांप्रदायिकता, नफरत और नशे रूपी कोढ़ का अंत हो, इसके लिए आप जी हर समय प्रयासरत रहते हैं। आप जी ने साढ़े सात करोड़ से अधिक लोगों की बुराईयाँ और नशे आदि छुड़वाकर परम पिता परमात्मा के नाम से जुड़ने का तरीका बताया। आप जी ने कन्या भ्रूण हत्या, वेश्यावृत्ति, समलैंगिकता, दहेज प्रथा आदि बुराईयों के विरुद्ध जनचेतना की ऐसी लहर चलाई, जिसका प्रभाव दुनिया के कोने-कोने में दिखाई दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">आप जी का हर पल मानवता की भलाई के लिए समर्पित है। इस धरा पर मनुष्य का जीवन सुखी और खुशहाल हो, इसके लिए आपने 176 मानवता भलाई कार्य चलाए है। इनमें जरूरतमंदों के लिए फूड बैंक, क्लॉथ बैंक, बीमारों का इलाज, गरीब जरूरतमंदों को मकान बनाकर देना, रक्तदान, मरणोपरांत नेत्रदान और शरीरदान, पौधे लगाना, सफाई अभियान, नशा छुड़ाने के लिए (डेप्थ) मुहिम आदि शामिल हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="text-align:left;">हर तरफ, </span><span style="text-align:left;">सफलता-सर्वकला संपूर्ण</span></h4>
</div>
<div style="text-align:justify;">
<p>आप जी ने स्कूली शिक्षा अपने गाँव के स्कूल से प्राप्त की, जहाँ आप जी पढ़ाई में अग्रणी रहते थे। वहीं आप जी खेलों में भी अपनी टीम की कप्तान के तौर पर अगुवाई करते थे। आप जी ने 32 नेशनल गेम्स खेलीं। आप जी अपने खिलाड़ी साथियों की केवल खेलने और नेतृत्व करने में ही सहायता नहीं करते थे, बल्कि उनके खान-पान, आर्थिक जरूरतों और खेलों का सामान उपलब्ध करवाने में भी आर्थिक सहयोग करते थे। </p>
<p>आप जी घरेलू जिम्मेदारियाँ निभाते हुए डेरा सच्चा सौदा में चल रही सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। <br />आप जी का परिवार साधन-सम्पन्न होने के कारण कई बार साथ वाले सेवादार या सतब्रह्मचारी सेवादार आप जी को हाथ से सेवा करने की बजाए सेवा की निगरानी करने के लिए कहते, लेकिन आप जी हमेशा हाथों से सेवा करने को प्राथमिकता देते थे। भारी सामान, गेहूँ की बोरियां आदि उठाते और अपनी जीप भी सामान ढोने के लिए दे देते। साथ वाले सेवादारों के चाय-पानी का प्रबंध भी अपने खर्च पर करते थे।</p>
</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/saint-dr.-msg-(2).jpg" alt="Saint Dr. MSG (2)" width="1395" height="930"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 06:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>राम-नाम ही आत्मबल देने वाली ताकत: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को भुलाए बैठा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-name-of-ram-is-the-power-that-gives-self-confidence/article-84098"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/msg-2-2-696x392.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को भुलाए बैठा है। उसको भूलने से इन्सान के अंदर गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियां बढ़ती जाती हैं और इन्सान आत्मिक कमजोरी की वजह से हमेशा दु:खी व परेशान रहने लगता है। जिनके अंदर आत्मिक कमजोरी होती है, कोई भी बात उन्हें सहन नहीं हो पाती। बात-बात पे तुनक मिजाज, बात-बात पे गुस्सा करना आम बात हो जाती है। एक राम-नाम ही ऐसी ताकत है, जिसका जाप करने से इन्सान के अंदर आत्मबल आता है, जिसके द्वारा इन्सान बड़े से बड़े काम में भी परेशान नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर जब आत्मिक कमजोरी आ जाती है, तो लोग बेवजह ही उलझे रहते हैं, बिना वजह लड़ते रहते हैं। आप जी फरमाते हैं कि आत्मबल, रूहानी शक्ति पाने के लिए सत्संग ही एक ऐसी जगह है, जहां एक अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का नाम लिया जाता हो, एक मालिक की चर्चा होती हो, इन्सान वहां आकर बैठे, तो उसे पता चलता है कि सब कुछ उसके अंदर है, फिर भी वो कंगाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो ब्रह्मांड में है, वो इन्सान के शरीर में है, जो राम का नाम जपता है, वही सब कुछ हासिल कर सकता है। उसे ही सब कुछ मिलता है, वरना जैसे लोग आते हैं, वैसे ही वापिस चले जाते हैं।  खाली हाथ आए, खाली हाथ लौट जाते हैं, लेकिन जो लोग सत्संग सुनते हैं, राम-नाम का जाप करते हैं, भक्ति करते हैं, वो ही उस परमात्मा की खुशियां हासिल करते हैं और वो मालिक के रहमो-कर्म को हासिल करके तमाम खुशियां पाकर इस कलियुग, मृतलोक में भी परमानन्द की प्राप्ति कर लिया करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मन के मते चलो मत कोई,  गुरु कहे करो तुम सोई&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस कलियुग में सत्संग इन्सानियत के लिए जलते हुए भट्ठ में एक संजीवनी के समान है। क्योंकि गमों, दुखों, परेशानियों में इन्सान जल रहे हैं, इनसे बचने का एकमात्र उपाय सत्संग को सुनकर उस पर अमल कमाना है। जिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/true-spiritual-guide-respected-guru-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan/article-83429"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/saint-dr-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस कलियुग में सत्संग इन्सानियत के लिए जलते हुए भट्ठ में एक संजीवनी के समान है। क्योंकि गमों, दुखों, परेशानियों में इन्सान जल रहे हैं, इनसे बचने का एकमात्र उपाय सत्संग को सुनकर उस पर अमल कमाना है। जिस तरह जलते हुए शरीर में बर्फ की ठंडक असर करती है उससे सैकड़ों, हजारों गुणा अधिक असर सत्संग में आने से तड़पते हुए जीव व जीवात्माओं पर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं सत्संग में आने के पश्चात ही इन्सान को यह मालूम पड़ता है कि उसके द्वारा कौन सा कार्य किया जाना चाहिए व कौन सा नहीं। जो जीव वचनों को सुनकर मान लिया करते हैं उन पर परमानंद की बरसात होती है, और जो मनमते चलते हैं वो अपने कर्मों की स्वयं ही रूपरेखा तैयार करके खुद ही पूरी जिंदगी उसमें उलझे रहते हैं। सत्संग में आने से ही इन्सान के जन्मों-जन्म के पापकर्म व जीते-जी भी जो कर्म भोगने हैं वो भी पहाड़ से राई में बदल जाया करते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब इन्सान सत्संग को सुनकर उसे माने व वचनों पर अमल करे। जब तक इन्सान वचनों पर अमल नहीं करता तब तक वह खोखला है, बिल्कुल खाली है तथा खुशियों से महरूम रहता है। इसलिए वचन सुनकर उन पर अमल करो, लेकिन मन के कहेअनुसार न चलो।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत पिछले कितने वर्षों से ही कहते आ रहे हैं कि ‘मन के मते चलो मत कोई, गुरु कहे करो तुम सोई। ये भव में गोते खिलवाए, ये गुरु से बेमुख करवाए’ अर्थात् मन बहुत बुरी बला है। ये इन्सान को इस तरह से गुमराह करता है कि उसकी हिलने तक की मजाल भी नहीं होती। उसको कोई भी जंजीर व बेड़ियां नजर नहीं आती व न कोई जाल होता है, लेकिन मन उसे अपनी गिरफ्त में ऐसा लेता है कि आदमी की उसके चंगुल से निकलने की मजाल तक नहीं होती। उससे निकलने का एकमात्र उपाय है केवल सत्संग। संतों के वचन पर अमल कमाना ही एकमात्र उपाय ऐसा है जिससे आदमी मन के चंगुल से निकल सकता है। लेकिन जब इन्सान का सतगुरु, मौला पर विश्वास न रहे तो उसके लिए सत्संग सुनना या न सुनना एक समान है तथा अगर हर समय उसके मन की तार बजती रहे तो आप समझ लीजिए मन उसका बेड़ा गरक करने वाला है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 10:59:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मार्च महीना फिर से डेरा सच्चा सौदा के लिए तीसरी बार साक्षी बनने को आतुर था&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सर्दी और गर्मी के मीठे अहसास को अपने आंचल में समेटेने वाला मार्च महीना फिर से डेरा सच्चा सौदा के लिए तीसरी बार साक्षी बनने को आतुर था। 25 मार्च 1973 का दिन था, जब पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां अपने नन्हें-नन्हें कोमल कदमों से डेरा सच्चा सौदा दरबार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/where-did-revered-guru-ji-take-the-gurumantra/article-82696"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/msg-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सर्दी और गर्मी के मीठे अहसास को अपने आंचल में समेटेने वाला मार्च महीना फिर से डेरा सच्चा सौदा के लिए तीसरी बार साक्षी बनने को आतुर था। 25 मार्च 1973 का दिन था, जब पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां अपने नन्हें-नन्हें कोमल कदमों से डेरा सच्चा सौदा दरबार में पधारे थे, पूज्य बापू स. मग्घर सिंह जी के पावन सान्निध्य में पूज्य पिता जी अपने मुर्शिदे-कामिल से रूबरू हो रहे थे। उस दिन नाम दान का प्रोग्राम शाह मस्ताना जी धाम के तेरावास व सचखण्ड हाल के बीच वाले पंडाल में था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/when-is-eating-figs-beneficial-and-when-is-it-harmful-know-complete-information/#google_vignette">Right Way to Eat Anjeer: अंजीर कब खाना है फायदेमंद और कब नुकसानदायक? जानें पूरी जानकारी</a></p>
<p style="text-align:justify;">आपजी अपने पूजनीय बापू जी के साथ गुरूमंत्र लेने वालों में पीछे ही बैठे हुए थे। पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने आपजी को आगे बुलाते हुए फरमाया, ‘‘काका, अग्गे आ जाओ।’’परमपिता जी ने घर-परिवार के बारे में काफी बातें करते हुए अपनी कुर्सी (स्टेज) के पास बिठाकर गुरुमंत्र की बख्शिश की। पूजनीय परमपिता जी ने आपजी को 23 सितंबर 1990 को सबके सामने साध-संगत में अपने पवित्र कर-कमलों से अपना उत्तराधिकारी घोषित कर गुरगद्दी पर विराजमान किया। आपजी ने साध-संगत में ये भी वचन किये कि ये हमारा ही रूप हैं। आपजी ने ये भी फरमाया कि हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परमपिता जी ने डेरा सच्चा सौदा में गुरगद्दी की नई रस्म शुरू करते हुए गुरगद्दी बख्शिश करने से कुछ महीने पहले ही पूज्य हजूर पिता जी के नाम सरकारी वसीयत लिखवा दी। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मानवता की भलाई के लिए समय-समय पर नए कार्य शुरू किए हैं। वर्तमान में डेरा सच्चा सौदा द्वारा 175 मानवता भलाई कार्य किए जा रहे हैं, जिसके तहत डेरा सच्चा सौदा के लगभग सात करोड़ अनुयायी, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार व साध-संगत दुनियाभर में दीन-दुखियों, बेसहारों, बीमारों, लाचारों व जरूरतमंदों तथा भूखे-प्यासे लोगों, पशु-पक्षियों आदि के लिए दिन-रात सेवाकार्य में जुटी हुई है। रक्तदान, नेत्रदान, जीते-जी गुर्दादान व मरणोपरांत शरीरदान की अनूठी मुहिम चलाने वाला डेरा सच्चा सौदा मानवता भलाई कार्यों में विश्वभर में अनेकों खिताब हासिल कर चुका है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/sinking-cities/">Sinking Cities: आने वाले समय में पानी में डूब जाएगें दुनिया के ये शहर, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:12:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नशा छुड़वाने के लिए, बुराइयां छुड़वाने के लिए सत्संग करते ही रहेंगे: पूज्य गुरू जी</title>
                                    <description><![CDATA[MSG Gurumantra Bhandara Month: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) ने पावन अनमोल वचनों में फरमाया कि ये सब उनका (पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज का) प्रताप है। आपजी ने फरमाया कि क्या उन्होंने अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/we-will-continue-to-conduct-satsang-to-help-people-get-rid-of-addiction-and-evil-respected-guru-ji/article-82113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/msg-16-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>MSG Gurumantra Bhandara Month: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) ने पावन अनमोल वचनों में फरमाया कि ये सब उनका (पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज का) प्रताप है। आपजी ने फरमाया कि क्या उन्होंने अपने शिष्यों की संख्या बढ़ाने के लिए या मुरीदों का नंबर ज्यादा करने के लिए सत्संगें की या कर रहे हैं? जी नहीं, नशा छुड़वाने के लिए, बुराइयां छुड़वाने के लिए, गंदी आदतों को बंदा अपने आप बदल सके उसे जगाने के लिए और बंदे से रब्ब तक का सफर कैसे तय हो सकता है बंदे को ये समझाने के लिए सच्चे दाता रहबर ने सत्संग किए, कर रहे हैं और करते ही रहेंगे।</p>
<p>पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि बुराइयां छोड़कर आज ये जीव जो बैठे हैं, साध-संगत हमारे बराबर में स्क्रीनों पर दिख रही है। ये अपने-अपने धर्मों को मानते हैं क्योंकि सच्चे दाता ने किसी भी धर्म को बदलने के लिए कभी नहीं कहा। यदि आप गरीब हैं तो इसका मतलब ये थोड़े ही है कि आप धर्म बदल लो। धर्म कोई पैसा नहीं देता, यदि कोई देता है तो वो धर्म पवित्रता की तरफ घट रहा है। क्योंकि अगर आप पैसे से किसी बंदे को खरीद कर उसका नाम बदल दोगे या धर्म बदल दोगे।</p>
<h3>”सभी धर्मों की इज्जत करो, सत्कार करो”</h3>
<p>पहले तो वो बंदा ही सही नहीं, क्योंकि उसकी खानदानी वो क्या बताएगा, कि तू किस खानदान का है भाई? सारा कुछ ही बदल दिया। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि अपने धर्म में रहो। अपने धर्म को मानो। ये तो रूहानियत, सूफियत है कि अगर आप गुरु की बात को मानते हो तो यकीन मानो आपको सभी धर्मों की समझ भी आने लग जाएगी। सभी धर्मों की इज्जत करो, सत्कार करो। डेरा सच्चा सौदा में यही सिखाया गया है और यही सिखाया जा रहा है और हमेशा यही सिखाया जाएगा। कोई ऊँच-नीच नहीं होती, कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सभी से बेग़र्ज प्यार करो।</p>
<p>ये सतगुरु जी ने सिखाया, ये सतगुरु जी ने बताया, क्योंकि जितना उनका गुण गाएं उतना ही थोड़ा है। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को अंधविश्वासों के प्रति जागरूक करते हुए फरमाया कि सत्संगी को जादू-टोना,ताबीज़, नज़र लगनी, भूत-प्रेत, जिन्न-चुड़ैल, श्याणे/चेले/ओझा/बेगे के चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। आपजी ने फरमाया कि इस धरती पर भूत-प्रेत होते ही नहीं हैं और ना ही कोई नज़र लगती है। खास कर माता-बहनें इन चक्करों में ज्यादा पड़ती हैं। आपजी ने फरमाया कि धर्मों के अनुसार सच्चा व्रत यही है कि 24 घंटे सिर्फ और सिर्फ पानी पर रहो। व्रत खोलने के बाद हल्का भोजन लो, इससे आप शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। इस बात को अब विज्ञान भी मानता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 10:28:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Saint MSG के सृष्टि के कल्याण को समर्पित मानवता की सेवा के बेमिसाल 40 दिन</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ)। सच्चे संत किसी भी परिस्थिति में रहें, उनका उद्देश्य एक ही होता है ”मानवता की भलाई”। संत स्वयं भी मानवता भलाई के कार्य करते हैं और दूसरों को भी सेवा कार्यों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/saint-msgs-40-days-of-unparalleled-service-to-humanity-dedicated-to-the-welfare-of-the-universe/article-81335"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/40-humanity-days.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>सरसा (सच कहूँ)। सच्चे संत किसी भी परिस्थिति में रहें, उनका उद्देश्य एक ही होता है ”मानवता की भलाई”। संत स्वयं भी मानवता भलाई के कार्य करते हैं और दूसरों को भी सेवा कार्यों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) ने सरसा निवास के दौरान पिछले 40 दिनों में हर दिन, हर घंटे, हर पल सृष्टि के कल्याण को समर्पित किया।</p>
<p>आप जी ने मानवता की सेवा का जो महाकुंभ चलाया, वह अपने आप में एक मील का पत्थर है। पूज्य गुरु जी ने गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा और जागरूकता के लिए लगातार नि:शुल्क एलोपैथी, नेचुरोपैथी और आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों के अंतर्गत मेडिकल कैंप लगाए, जिनका लाभ 10 हजार से अधिक लोगों ने उठाया। देश के 100 से अधिक स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने इन कैंपों में अपनी सेवाएं दीं।</p>
<h3>पूज्य गुरु जी ने कैंपों पर होने वाला खर्च अपनी हक-हलाल की कमाई से वहन किया</h3>
<p>दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, शिमला सहित अन्य महानगरों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इन कैंपों को अद्भुत और देश के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां व शाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल, प्रबंधन की सराहना की। विशेष बात यह रही कि पूज्य गुरु जी ने इन कैंपों पर होने वाला खर्च अपनी मेहनत और हक-हलाल की कमाई से वहन किया।</p>
<p>इन शिविरों में गरीब मरीजों की नि:शुल्क जांच के साथ-साथ सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे महंगे परीक्षण भी मुफ्त किए गए। ये कैंप स्वास्थ्य जागरूकता की एक बड़ी लहर साबित हुए। देश में महिलाओं में तेजी से फैल रहे छाती के कैंसर की रोकथाम के लिए जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। यदि बीमारी प्रारंभिक अवस्था में पकड़ ली जाए तो उसका इलाज सरल हो जाता है। इन कैंपों में हजारों महिलाओं को स्वयं जांच (सेल्फ एग्जामिनेशन) करने का प्रशिक्षण दिया गया।<br />
पूज्य गुरु जी ने नशों के खिलाफ चलाई मुहिम को इन 40 दिनों में इतनी गति दी कि बड़ी संख्या में लोगों ने नशा त्याग दिया। आप जी ने भयंकर नशे के शिकार लोगों को इस अभिशाप से बचाकर उन्हें पौष्टिक आहार देकर स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर किया और उनके घरों में पुन: खुशियां लौटाईं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 22:23:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;गद्दी बख्शिश से पहले ही पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने यह वचन फरमा दिए थे&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सच्चे सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के गद्दीनशीन होने से पहले की बात है कि आप जी, पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज से आज्ञा लेकर अपने घरेलू कार्यों के लिए अपने गांव पवित्र भूमि श्री जलालआणा साहिब आए थे। आप जी को पारिवारिक कार्यों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/even-before-the-throne-was-bestowed-the-revered-beparwah-shah-mastana-ji-maharaj-had-made-these-promises/article-81228"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-nature.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: सच्चे सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के गद्दीनशीन होने से पहले की बात है कि आप जी, पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज से आज्ञा लेकर अपने घरेलू कार्यों के लिए अपने गांव पवित्र भूमि श्री जलालआणा साहिब आए थे। आप जी को पारिवारिक कार्यों में लगभग पांच-छह दिन लग गए। जब आप जी वापिस लौटे, उस समय पूजनीय बेपरवाह जी डेरा सच्चा सौदा, रानियां (सिरसा) में डेरे के बाहर एक पेड़ के नीचे विराजमान थे। जब आप जी पूजनीय बेपरवाह जी के पास पहुंचे, तो पूजनीय बेपरवाह जी ने वचन फरमाया- ‘‘हरबंस सिंह (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का बचपन का नाम), इतने दिन कहां रहे? यह देह अब बूढ़ी हो गई है, अब आगे आपको ही काम करना है।’’ गद्दी बख्शिश से पहले ही पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने स्पष्ट रूप से यह वचन फरमा दिए थे। MSG Maha Rahmokaram Month<br />
<strong>स्त्रोत: सच्चे रूहानी रहबर, भाग-2</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 10:02:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: काश! उसका घर भी पक्का व सुंदर होता तो&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: 17 जनवरी 1976 गाँव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गाँव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/i-wish-his-house-was-also-strong-and-beautiful/article-80372"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-jil-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: 17 जनवरी 1976 गाँव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गाँव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी पक्का व सुंदर होता तो वह भी पिता जी से अपने घर पर चरण टिकाने की प्रार्थना कर सकता। पिता जी घूमने के लिए खेतों की तरफ जा रहे थे। जैसे ही उस फौजी भाई का घर आया तो पिता जी उसके घर जाकर वहाँ पर रखे एक मूढ़े पर विराजमान हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">फौजी की आँखों से प्रेम व खुशी के आँसू बहने लगे। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। पूज्य परम पिता जी ने उसकी सच्ची तड़प को पूरा किया तथा स्वयं कहकर उससे चाय बनवाई। परम पिता जी ने वचन किए, ‘‘परवाह न कर! मालिक खुशियां बख्शेगा।’’ उस इन्सान पर प्यारे मुर्शिद जी ने इतनी रहमत की कि उस फौजी के चार पुत्रों को सरकारी नौकरी मिल गई। सारा परिवार साध-संगत की सेवा में बढ़-चढ़ कर योगदान देने लगा। MSG Bhandara Month</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 09:49:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG BHANDARA Month: नाम-शब्द दिए बिना ही परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने ऐसे किया जीव का उद्धार!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: 2 फरवरी 1976, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव हठूर जिला लुधियाना में सत्संग फरमाकर गांव दीवाना की तरफ जा रहे थे। थोड़ी दूर जाने के बाद ड्राईवर रास्ता भूलकर गांव छीनीवाल वाली सड़क पर चल पड़ा। जब गांव के बाहर पहुंचे तो एक आदमी रास्ते में हाथ जोड़कर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/thout-even-uttering-a-name-the-supreme-father-thus-redeemed-the-soul/article-80123"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Param Pita Shah Satnam Ji: 2 फरवरी 1976, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव हठूर जिला लुधियाना में सत्संग फरमाकर गांव दीवाना की तरफ जा रहे थे। थोड़ी दूर जाने के बाद ड्राईवर रास्ता भूलकर गांव छीनीवाल वाली सड़क पर चल पड़ा। जब गांव के बाहर पहुंचे तो एक आदमी रास्ते में हाथ जोड़कर खड़ा था। पूजनीय परम पिता जी ने ड्राईवर को फरमाया, ”मोहन सिंह, गाड़ी रोको! जब गाड़ी रुकी तो उस आदमी ने विनती की, महाराज जी! मैं तो दो घंटों से यहां खड़ा हूं कि यहां महाराज जी आएंगे और मैं दर्शन करूंगा व आपजी को दूध पिलाऊंगा। मेरी दिल की इच्छा पूरी हो गई है। MSG BHANDARA Month</p>
<p>आप धन्य हो। ”पूजनीय परम पिता जी ने आशीर्वाद देते फरमाया, ” तेरा प्रेम ही हमें यहां खींच लाया है। जाना तो हमने गांव दीवाने था, लेकिन प्रेम ने रास्ता ही भुला दिया।” फिर फरमाया, ”अब दूध भी ले आ।”उस आदमी ने दूध का गिलास पहले पूजनीय परम पिता जी को दिया और फिर सभी सेवादारों को, जो परम पिता जी के साथ थे। पूजनीय परम पिता जी ने दूध पीते हुए फरमाया,”अब आप नाम-शब्द भी ले लेना।” उस आदमी ने कहा, ”जी! सत् वचन।” इसके बाद काफिला गांव दीवाना की तरफ चल पड़ा। रास्ते में शहनशाह जी उस आदमी की बातें करते हुए कहने लगे कि ”इस बेचारे का उद्धार होना था। ”</p>
<h3>”परमपिता परमात्मा को बना लो सच्चा दोस्त” | MSG BHANDARA Month</h3>
<p>सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम (Ram Rahim) सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब हर जगह मौजूद है। जहां तक निगाह जाती है और जहां तक निगाह नहीं जाती, वहां भी वो प्रभु-परमात्मा मौजूद है। इसलिए उसे हासिल करने के लिए अपनी भावना व विचारों का शुद्धिकरण करो। सच्ची श्रद्धा बनाकर रखो। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान की फितरत है कि वह जानना चाहता है कि भगवान का रंग कैसा है? उसका रूप कैसा है?</p>
<h3>भगवान का कोई रंग या रूप नहीं होता</h3>
<p>पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वैसे तो भगवान का कोई रंग या रूप नहीं होता है, उसको आप जहां भी जिस भी रूप में देखते हैं, वहां वह नजर आता है। उदाहरण देते हुए पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि किसी ने पूछा, तेरा गुरु कैसा है? क्या वो दूध जैसा है या फिर चंद्रमा जैसा, सूर्य जैसा, शहद या चीनी जैसा? उसने बताया कि मेरा गुरु तो गुरु जैसा है, उस जैसा कोई नहीं है। उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। वो उन सबसे अरबों-खरबों गुणा बढ़कर है। उसकी जिंदा तस्वीर हर जगह होती है।</p>
<p>ऐसे परमपिता परमात्मा को अपना सच्चा यार, दोस्त बनाना चाहिए, क्योंकि दुनिया की यारी, मित्रता सिर्फ मतलबी व गर्जी है। जब तक मतलब है, तब तक बात और जब मतलब निकल गया तो मुंह फेर लेते हैं। पूज्य गुरु जी ने मालिक, अल्लाह, राम, भगवान, खुदा, गॉड, रब्ब को पाने का तरीका बताते हुए फरमाया कि भगवान ही एक ऐसा है, जो आपकी हर गर्ज को पूरी कर सकता है और वो भी बिना किसी स्वार्थ के। इसलिए भगवान को हासिल करने के लिए अपनी भावना को शुद्ध रखो। विचारों का शुद्धिकरण करो।</p>
<p>सच्ची श्रद्धा बनाकर रखो। दूसरे के दु:ख-दर्द को दूर करो, ऐसा करने से इतनी खुशियां मिलेंगी कि आपकी झोलियां छोटी पड़ जाएंगी। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि खुद को पाक-पवित्र बनाने का एकमात्र उपाय है रूहानियत से जुड़ो। सेवा-सुमिरन और परहित के कार्य करो। दिखावा ना करो, दीनता-नम्रता धारण करो, इससे आप मालिक के करीब होते चले जाएंगे। MSG BHANDARA Month</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 09:58:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वचनों को मानने से ही आती हैं खुशियां: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में मौजूद है। उसका रहमो-कर्म मूसलाधार बरसता है, पर भाग्यशाली वही हैं जो उसके बरसते रहमो-कर्म को महसूस करते हैं। उन्हें फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमात्मा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/happiness-comes-only-by-following-the-vachan/article-79031"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/msg-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint Dr. MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में मौजूद है। उसका रहमो-कर्म मूसलाधार बरसता है, पर भाग्यशाली वही हैं जो उसके बरसते रहमो-कर्म को महसूस करते हैं। उन्हें फिर अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमात्मा की खुशियां तभी हासिल होती हैं, जब इन्सान को पूर्ण पीर, फकीर मिले और जीव उनके वचनों पर अमल करे। दरगाह में आत्मा के लिए सत्संग का फल मिलता है, लेकिन तीन परहेजों में गलती करते हो,  तो वो भयानक सजा भी भोगनी पड़ती है। तीन वचनों के अलावा कोई और गलती होती है, तो इन्सान सच्चे दिल से सुमिरन करे, तौबा करे, सत्संग में आकर माफी ले लेता है तो साथ ही साथ माफ हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अगर तीन परहेजों में गलती करता है और सेवा करता है तो उससे जो बरकतें आनी चाहिएं, जो बेइन्तहा खुशियां मिलनी चाहिएं, उससे इन्सान खाली रह जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आप संत, पीर-फकीर के साथ लगे हैं, तो वचनों पर अमल करना सीखो। आप दुनियादारी के लोगों को बुद्धू बना सकते हैं, उन्हें गुमराह कर सकते हैं, उनको पता नहीं चलने देते, लेकिन परमात्मा जो हर किसी के अंदर मौजूद है, उससे आप कोई पर्दा नहीं कर सकते। संत हर किसी का पर्दा रखते हैं और सबसे प्यार करते हैं, सबको मोहब्बत से नवाजते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचन मानना अति जरूरी है। अगर आपका रुतबा है, तो उसके नाम का। रूहानियत में अगर कोई आपको दुआ, सलाम करता है। आपकी इज्जत, सत्कार करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आपके कोई अलग से ताज लगा हुआ है या आप अलग से कुछ नए भाग्य लेकर पैदा हुए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वचनों को मानने…</h3>
<p style="text-align:justify;">यह तो मालिक के नाम का रहमो-कर्म है। तू गुरमुख है, सतगुरु का मुरीद है, तू उसका अजीज है, तू भक्ति करता है, तू सेवादार है, इसलिए लोग सत्कार करते हैं। बाकि जैसे आम आदमी हैं, वैसा ही तू है। बस उसके (मालिक के) नाम को सलाम है। इसलिए उसका नाजायज फायदा न उठाओ। वरना लेने के देने पड़ते हैं। इन्सान गलतियां करता है, वचनों की परवाह नहीं करता, तो सब खुशियां चली जाती हैं और अगर वचन मानने शुरू करता है और 100 प्रसेंट वचन मान ले, तो खुशियां वापिस आ जाती हैं। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचनों में गलती करने को मखौल मत समझा करो। संतों का काम माफी देना और दिलवाना है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप खुश रहेंगे। आपकी उम्र कम हो सकती है, आपके स्वास तेजी से चलेंगे और आपका टाईम पीरियड कम हो जाएगा। आपको बीमारियां लग सकती हैं। आप परिवार की तरफ से, शरीर की तरफ से टेंशन में आ जाओगे। ये सब गलती करने के साईड इफेक्ट हैं। आदमी गलती करता है तो उसके बैक गेयर लग जाता है और जैसे-जैसे गलतियां करता जाता है, उसके बैक गेयर की स्पीड भी बढ़ती जाती है। इसलिए गलतियां न करो। संत, पीर-फकीरों की दया को मखौल मत समझो। वो दया करते हैं, क्योंकि वो दयालु होते हैं। मालिक का नूर वो हर किसी तक पहुंचाते हैं, इसलिए दया करते रहते हैं। पर, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप गलतियां करते ही चले जाएं, बुरे कर्म करने से बाज ही न आओ।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तो मालिक के नाम का रहमो-कर्म है। तू गुरमुख है, सतगुरु का मुरीद है, तू उसका अजीज है, तू भक्ति करता है, तू सेवादार है, इसलिए लोग सत्कार करते हैं। बाकि जैसे आम आदमी हैं, वैसा ही तू है। बस उसके (मालिक के) नाम को सलाम है। इसलिए उसका नाजायज फायदा न उठाओ। वरना लेने के देने पड़ते हैं। इन्सान गलतियां करता है, वचनों की परवाह नहीं करता, तो सब खुशियां चली जाती हैं और अगर वचन मानने शुरू करता है और 100 प्रसेंट वचन मान ले, तो खुशियां वापिस आ जाती हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचनों में गलती करने को मखौल मत समझा करो। संतों का काम माफी देना और दिलवाना है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप खुश रहेंगे। Saint Dr. MSG</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी उम्र कम हो सकती है, आपके स्वास तेजी से चलेंगे और आपका टाईम पीरियड कम हो जाएगा। आपको बीमारियां लग सकती हैं। आप परिवार की तरफ से, शरीर की तरफ से टेंशन में आ जाओगे। ये सब गलती करने के साईड इफेक्ट हैं। आदमी गलती करता है तो उसके बैक गेयर लग जाता है और जैसे-जैसे गलतियां करता जाता है, उसके बैक गेयर की स्पीड भी बढ़ती जाती है। इसलिए गलतियां न करो। संत, पीर-फकीरों की दया को मखौल मत समझो। वो दया करते हैं, क्योंकि वो दयालु होते हैं। मालिक का नूर वो हर किसी तक पहुंचाते हैं, इसलिए दया करते रहते हैं। पर, इसका मतलब यह नहीं होता कि आप गलतियां करते ही चले जाएं, बुरे कर्म करने से बाज ही न आओ।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/happiness-comes-only-by-following-the-vachan/article-79031</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 09:34:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दीनता-नम्रता के धारणी बनो: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज़)। Saint Dr MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जब सभी का भला करने लगता है तो किसी का भला हो या न हो लेकिन उस इन्सान की भावना की वजह से परमपिता परमात्मा उस इन्सान का भला जरूर किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/be-a-follower-of-humility-and-modesty-saint-dr-msg/article-76666"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/saint-dr.-msg-2-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Saint Dr MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जब सभी का भला करने लगता है तो किसी का भला हो या न हो लेकिन उस इन्सान की भावना की वजह से परमपिता परमात्मा उस इन्सान का भला जरूर किया करते हैं। इन्सान के अंदर जैसी श्रद्धा, भावना होती है वैसी ही मालिक की दया-मेहर, रहमत उस पर बरसती है, लेकिन मालिक पर दृढ़-विश्वास होना कोई छोटी बात नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि आदमी की खुद की कमियां होती हैं जो उसके सामने खड़ी हो जाती हैं। उनकी वजह से वह जैसा खुद होता है उसे सारी दुनिया भी वैसी ही लगती है, लेकिन आप मुर्शिदे-कामिल के वचनों को सुनो और सभी का भला करो। फिर सभी आपके हो जाएंगे। बेगाना कोई भी नहीं है। सभी अपने हैं। बस, किसी को इतना अपना न बनाओ कि सतगुरु, अल्लाह, मालिक को ही भूल जाओ। वो तो रहमत का मालिक है। यह नहीं है कि वह यहां प्रकट होकर ही रहमत बरसाएगा। अगर तड़प हो, दृढ़-विश्वास हो तो बिना प्रकट हुए भी वह बेड़े पार लंघा देगा। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि इन्सान को अहंकार नहीं करना चाहिए। Saint Dr MSG</p>
<p style="text-align:justify;">दीनता-नम्रता धारण करनी चाहिए कि हम सब एक हैं, सभी मालिक की औलाद हैं। जब आदमी दूसरों की निंदा-चुगली छोड़कर अपने सतगुरु, मालिक पर विश्वास रखता है तो भयानक से भयानक रोग कट जाते हैं। अगर क्यों, किंतु, परन्तु, निंदा-चुगली करते हो तो छोटे रोग भी बड़े बन जाया करते हैं क्योंकि आदमी के कर्म होते हैं। जैसी जुबान का रस है वैसा ही असर होता है। इसलिए अहंकार छोड़कर सभी से बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो। बड़े हैं तो मां-बाप, बराबर के हैं तो बहन-भाई और छोटे हैं तो बेटा-बेटी के समान वाले रिश्ते से पुकारो। सुमिरन करो तो यकीनन मालिक की दया-मेहर, रहमत के हकदार बन जाओगे। अंदर-बाहर से खुशियां जरूर हासिल होंगी और आपके अंदर-बाहर बहारें खिल जाएंगी। Saint Dr MSG</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab News: पंजाब के इन परिवारों को मिलेगे 51,000 हजार रुपये की वित्तीय सहायता, मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी जानकारी" href="http://10.0.0.122:1245/an-amount-of-rs-twenty-crore-released-for-the-beneficiary-families-of-scheduled-caste-under-ashirvad-scheme/">Punjab News: पंजाब के इन परिवारों को मिलेगे 51,000 हजार रुपये की वित्तीय सहायता, मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी जानकारी</a></p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 17:00:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मैं तो बैठा था अपने मुर्शिद के रूबरू तो ख़ुदा ने आवाज दी&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[मैं तो बैठा था अपने मुर्शिद के रूबरू तो ख़ुदा ने आवाज दी पगले मैं ही तो हूँ तेरे सामने -जसविन्द्र जीन्द खुशियों का खजाना है सेवा-सुमिरन: पूज्य गुरु जी सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सेवा और सुमिरन इन्सान को वह तमाम खुशियां दिला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/i-was-sitting-in-front-of-my-murshid-when-god-called-out/article-76290"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/saint-dr-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><strong>मैं तो बैठा था अपने </strong><br />
<strong>मुर्शिद के रूबरू</strong><br />
<strong>तो ख़ुदा ने आवाज दी </strong><br />
<strong>पगले मैं ही तो हूँ तेरे सामने</strong><br />
<strong>-जसविन्द्र जीन्द</strong></p>
<h3>खुशियों का खजाना है सेवा-सुमिरन: पूज्य गुरु जी</h3>
<p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सेवा और सुमिरन इन्सान को वह तमाम खुशियां दिला देते हैं, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। अकसर यह कहा जाता है कि जो भाग्य में है वो मिलता है, जो मिलना है वह मालिक ने लिख दिया है। इसका मतलब यह नहीं होता कि आप हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाओ। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सभी धर्मों में लिखा है कि इन्सान कर्म योगी व ज्ञान योगी है। इसलिए ज्ञानयोगी बनो और उसके अनुसार कर्म योगी भी बनें, तो इन्सान अपनी तकदीर को बदल सकता है। ये खुदमुखत्यार है, सर्वोत्तम जून है। पशु, पक्षी, परिंदे जैसा कर्मों में लिखा है वे वैसा भोगते हैं। पर मनुष्य को मालिक ने खुदमुखत्यारी दी है, शक्ति दी है, जिससे यह परमपिता परमात्मा का नाम लेकर अपनी तकदीरों को बदल सकता है, अपने अंदर आत्मशक्ति पैदा करके बुलंदियों को छू सकता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिस प्रकार इन्सान सुबह, दोपहर, शाम अपने शरीर के लिए खुराक लेता है। उसी तरह आत्मा को भी खुराक चाहिए जिससे आत्मबल बढ़े। धर्मों के अनुसार आत्मा की खुराक तो हमारे अंदर है। प्रभु, अल्लाह, वाहेगुरू, राम के नाम की भक्ति करो तो आत्मबल बढ़ता है और जिनके अंदर आत्मबल होता है सफलता उनके कदम जरूर चूमा करती है। नासा साइंस केंद्र अमेरिका भी यह कहता है कि अगर आपको विल पॉवर चाहिए तो आप लगातार ईश्वर का नाम जपो। अगर जल्दी भगवान से आत्मबल चाहते हो तो सुबह 2 से 5 का समय है इसमें उठकर मेडिटेशन (गुरूमंत्र का जाप) करो, क्योंकि इसमें आक्सीजन ज्यादा व शुद्ध होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि चाहे धर्म की मानो चाहे विज्ञान की, क्योंकि धर्म से ही विज्ञान बनी है, विज्ञान से धर्म नहीं बना। धर्म महाविज्ञान है। धर्म ने जो बात कह दी वो बदलती नहीं, लेकिन साइंस पैर-पैर पर बदली है। धर्म खुले दिमाग से पढ़ने के लिए है, धर्म सभी के लिए है, इसे कोई भी पढ़ सकता है। धर्म ने कोई जात-पात, मजहब का चक्कर नहीं चलाया। यह तो आदमी के दिमाग का कचरा है। सभी धर्मों में लिखा है कि जो अल्लाह, वाहेगुरू, राम का नाम जपेगा, वो ही उसकी कृपा दृष्टि को पाएगा, उसके दर्शन करेगा, जो नहीं जपेगा वह अपने कर्मों का फल भोगता रहेगा। आप जी ने फरमाया कि अगर भगवान से मांगना है तो अच्छी धरती, अच्छा पानी, तंदरुस्ती, अच्छी संतान मांगो, भगवान से मांगना है तो भगवान को मांगो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 14:38:57 +0530</pubDate>
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