<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/space-news/tag-25768" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Space News - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/25768/rss</link>
                <description>Space News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Space News: वैज्ञानिकों को अंतरीक्ष में मिले पृथ्वी जैसे दो ग्रह, जल्द ही मानव जाएंगे&amp;#8230;वैज्ञानिकों को बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ/अनु सैनी)। Space News: हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नई और रोमांचक खोज की है जो पृथ्वी के जैसे एक ग्रह के अस्तित्व का संकेत देती है। यह ग्रह, जिसे “सुपर-अर्थ” के नाम से जाना जा रहा है, हमसे केवल 20 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और यह अपने तारे की परिक्रमा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/scientists-found-two-earth-like-planets-in-space/article-79951"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ/अनु सैनी)। </strong>Space News: हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नई और रोमांचक खोज की है जो पृथ्वी के जैसे एक ग्रह के अस्तित्व का संकेत देती है। यह ग्रह, जिसे “सुपर-अर्थ” के नाम से जाना जा रहा है, हमसे केवल 20 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और यह अपने तारे की परिक्रमा करता है। यह तारा हमारे सूर्य के समान ही है, और यह ग्रह अपने तारे के “रहने योग्य क्षेत्र” में आता है, जो जीवन के लिए उपयुक्त हो सकता है। इस ग्रह का नाम HD 20794 d रखा गया है और इसे “सुपर-अर्थ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आकार में पृथ्वी से बड़ा है, लेकिन इसके पास जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हो सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ग्रह का खोज और परिक्रमा</h3>
<p style="text-align:justify;">HD 20794 d ने अपने तारे की एक पूरी परिक्रमा 647 दिनों में पूरी की, जो वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह को रहने योग्य क्षेत्र में लाती है। इसका मतलब यह है कि यहां पानी होने की संभावना बहुत अधिक है, जो जीवन के अस्तित्व के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। इस ग्रह की खोज इंस्टीट्यूटो डी एस्ट्रोफिसिका डी कैनरियास (Instituto de Astrofísica de Canarias-IAC) और यूनिवर्सिडैड डी ला लगुना (Universidad de La Laguna-ULL) ने मिलकर की है। यह ग्रह अपने तारे, HD 20794, की परिक्रमा करता है, जो हमारे सूर्य से थोड़ा छोटा है। इसके पहले भी वैज्ञानिकों ने इस तारे के आसपास दो अन्य सुपर-अर्थ ग्रहों की खोज की थी, जो जीवन के लिए उपयुक्त हो सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुपर-अर्थ की परिभाषा और संभावनाएं | Space News</h3>
<p style="text-align:justify;">“सुपर-अर्थ” शब्द का इस्तेमाल उन ग्रहों के लिए किया जाता है जो आकार में पृथ्वी से बड़े होते हैं, लेकिन उनके पास जीवन के लिए जरूरी तत्व हो सकते हैं। इस श्रेणी में आने वाले ग्रहों में तापमान, दबाव और अन्य पर्यावरणीय स्थितियाँ पृथ्वी के समान हो सकती हैं, जिससे जीवन का अस्तित्व संभव हो सकता है। HD 20794 d जैसे ग्रहों की खोज से यह उम्मीदें बढ़ गई हैं कि हम भविष्य में पृथ्वी जैसे जीवन के ग्रहों का पता लगा सकते हैं। ऐसे ग्रहों की स्थितियाँ हमारे ग्रह के जैसे हो सकती हैं, जिससे जीवन के विभिन्न रूपों के अस्तित्व की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">20 साल के अवलोकन का परिणाम</h3>
<p style="text-align:justify;">HD 20794 d की खोज 20 साल के गहरे अवलोकन के बाद संभव हो पाई है। यह लंबे समय तक किए गए अध्ययन का परिणाम है, जिसमें वैज्ञानिकों ने स्टार्स और उनके आस-पास के ग्रहों के व्यवहार का अवलोकन किया। इस दौरान मिली जानकारी से यह पता चला कि HD 20794 d अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र में स्थित है, और इसके वातावरण में जीवन के लिए जरूरी तत्व हो सकते हैं। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में पृथ्वी जैसे ग्रहों की और अधिक जानकारी प्राप्त करने के दरवाजे खुल सकते हैं। इन ग्रहों के वातावरण का अध्ययन करने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि पृथ्वी पर जीवन कैसे उत्पन्न हुआ और क्या अन्य स्थानों पर भी जीवन संभव हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सूर्य जैसे तारे के आसपास जीवन की संभावना</h3>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती यह रही है कि वे ऐसे ग्रहों की खोज करें जो हमारे सूर्य जैसे तारों के रहने योग्य क्षेत्रों में स्थित हों। इन क्षेत्रों में तापमान, दबाव और अन्य तत्व जीवन के लिए अनुकूल हो सकते हैं। HD 20794 जैसे ग्रहों की खोज इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जब वैज्ञानिकों ने इस तारे के आसपास तीन सुपर-अर्थ ग्रहों का पता लगाया, तो यह स्पष्ट हुआ कि यहां जीवन के लिए संभावनाएं हो सकती हैं। हालांकि यह अभी तक पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है कि इन ग्रहों पर जीवन है या नहीं, लेकिन इनकी स्थितियों का अध्ययन करना एक अहम कदम है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पृथ्वी जैसी जीवन स्थितियों का अध्ययन</h3>
<p style="text-align:justify;">HD 20794 d की खोज से यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि हम भविष्य में अन्य ग्रहों के वातावरण का और अधिक विस्तार से अध्ययन कर सकेंगे। वैज्ञानिकों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे उन तत्वों और परिस्थितियों को समझें, जो पृथ्वी पर जीवन के उद्भव के लिए जिम्मेदार थे। यदि हम किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की तलाश करते हैं, तो हमें ऐसे ही वातावरण की आवश्यकता होगी जो जीवन के लिए उपयुक्त हो। HD 20794 d जैसे ग्रहों का अध्ययन हमें यह जानने में मदद करेगा कि क्या अन्य ग्रहों पर भी पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हो सकती हैं, जहां जीवन अस्तित्व में आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;">HD 20794 d की खोज एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल पृथ्वी जैसे ग्रहों की समझ को बढ़ाती है, बल्कि भविष्य में जीवन के लिए उपयुक्त ग्रहों की खोज में भी मदद कर सकती है। इस ग्रह के अध्ययन से वैज्ञानिक यह जान सकेंगे कि जीवन की उत्पत्ति के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ क्या हैं, और क्या हम जीवन की तलाश में सफलता हासिल कर सकते हैं। हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि इस ग्रह पर जीवन है या नहीं, लेकिन यह खोज भविष्य के अनुसंधानों के लिए एक दिशा दिखाती है, और हमें यह उम्मीद देती है कि शायद एक दिन हम किसी अन्य ग्रह पर पृथ्वी जैसा जीवन ढूंढ सकें। Space News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="UP Highway News: खुशखबरी, यूपी का ये राष्ट्रीय राजमार्ग होगा 6 लेन, इन जिलों और गांवों में रॉकेट की तरह बढ़ेंगे जमीनों के भाव" href="http://10.0.0.122:1245/bareilly-sitapur-national-highway-in-up-to-be-six-lane/">UP Highway News: खुशखबरी, यूपी का ये राष्ट्रीय राजमार्ग होगा 6 लेन, इन जिलों और गांवों में रॉकेट की तरह बढ़ेंगे जमीनों के भाव</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/scientists-found-two-earth-like-planets-in-space/article-79951</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/scientists-found-two-earth-like-planets-in-space/article-79951</guid>
                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 16:02:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-01/space-news.jpg"                         length="77452"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत सरकार की अंतरिक्ष सुरक्षा: बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स से भारत का सामरिक और तकनीकी उभार</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. संदीप सिंहमार। Space News: भारत सरकार ने अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित की जा रही यह योजना ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स’ के निर्माण पर केंद्रित है, जो देश के उपग्रहों को दुश्मन देशों द्वारा किसी भी प्रकार के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indian-governments-space-security-indias-strategic-and-technological-emergence-with-bodyguard-satellites/article-76036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> Space News: भारत सरकार ने अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित की जा रही यह योजना ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स’ के निर्माण पर केंद्रित है, जो देश के उपग्रहों को दुश्मन देशों द्वारा किसी भी प्रकार के खतरे से बचाएगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह नया रक्षा कवच पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की किसी भी संभावित सैन्य या साइबर हमले को विफल करने में मदद करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष सुरक्षा का बढ़ता महत्व आज के डिजिटल और तकनीकी युग में अंतरिक्ष केवल वैज्ञानिक अनुसंधान और संचार का माध्यम नहीं रहा। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक प्रभुत्व का एक निर्णायक क्षेत्र बन चुका है। भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा, सेना की रणनीति, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन सिस्टम, और दूरसंचार समेत कई महत्वपूर्ण सेवाएं उपग्रहों पर निर्भर हैं। इसलिए उपग्रहों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं। यदि दुश्मन देश हमारे उपग्रहों को निशाना बनाते हैं, तो इसका दुष्प्रभाव सीधे देश की सुरक्षा एवं सामान्य जीवन पर पड़ सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियां | Space News</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत का अंतरिक्ष संगठन, इसरो, पिछले तीन दशकों से निरंतर सफलता के नए आयाम बना रहा है। चंद्रयान मिशन के जरिए चंद्रमा की सतह पर पहुंचना, मंगलयान मिशन द्वारा मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक उपग्रह स्थापित करना, और पहले भारतीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का सफल संचालन भारत की तकनीकी सक्षमता का प्रमाण है। इन उपलब्धियों ने भारत को विश्व अंतरिक्ष समुदाय में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स का स्वरूप और तकनीक</h3>
<p style="text-align:justify;">‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स’ नामक यह योजना भारतीय उपग्रहों के लिए एक नया सुरक्षा कवच प्रदान करेगी। यह छोटे, परंतु अत्याधुनिक तकनीक से लैस उपग्रह होंगे जो मुख्य उपग्रहों के करीब उड़ेंगे और उन्हें संभावित खतरे जैसे इलेक्ट्रॉनिक जामिंग, साइबर हमले, या फिजिकल मिसाइल हमलों से बचाएंगे। यह व्यवस्था जमीन पर उपयोग हो रहे अत्याधुनिक S400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की तरह काम करेगी, लेकिन अंतरिक्ष में।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एआई से लैस होगी तकनीक</h3>
<p style="text-align:justify;">यह सैटेलाइट अपने आसपास के खतरों की पहचान करने के लिए हाई-स्पीड सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम से लैस होंगे, जो खतरे का पता लगाकर तत्काल प्रतिक्रिया करेंगे। उदाहरण के लिए, यदि कोई दुश्मन उपग्रह या क्षतिकर मिसाइल भारतीय उपग्रह को निशाना बनाने का प्रयास करती है, तो ये बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स उसे नष्ट करने या अपनी रक्षा करने का काम करेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वैश्विक संदर्भ एवं अंतरराष्ट्रीय नियम</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका, रूस, और चीन जैसे देशों ने अपने उपग्रहों के लिए पहले ही काउंटर-सैटेलाइट तकनीक विकसित कर ली है। भारत के लिए आवश्यक है कि वह भी इस क्षेत्र में पीछे न रहे और समुचित संसाधन निवेश करके अपनी रक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाए। साथ ही, अंतरिक्ष हथियारों पर नियंत्रण के लिए संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन करना भी जरूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय शांतिप्रिय प्रयासों को बाधित न किया जाए। Space News</p>
<h3 style="text-align:justify;">चुनौतियां और समाधान</h3>
<p style="text-align:justify;">यह योजना तकनीकी और वित्तीय दोनों ही दृष्टि से बड़े पैमाने पर चुनौतीपूर्ण है। अत्याधुनिक सेंसर, शक्तिशाली कंप्यूटर और रॉकेट विज्ञान की अनुसंधान एवं विकास को बेहतर बनाना होगा। इसके अलावा, पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना पड़ेगा ताकि इस सुरक्षा पहल से तनाव में वृद्धि न हो।सरकार को इस दिशा में अनुसंधान एवं विकास के लिए बजट बढ़ाना होगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना होगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी ध्यान देना होगा जिससे तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान हो सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विज्ञान और तकनीक में आत्मनिर्भरता</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार की ‘बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स’ योजना अंतरिक्ष सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया युग प्रारंभ करने वाली है। यह देश की सामरिक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ विज्ञान और तकनीक में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी साकार करेगी। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर निरंतर फोकस बना रहे, संसाधन उपलब्ध हों और कूटनीतिक समझदारी के साथ इस नई सुरक्षा रणनीति को लागू किया जाए। तभी भारत न केवल अपने उपग्रहों की सुरक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में भी मजबूत और प्रभावशाली भूमिका निभाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">व्यापक और रणनीतिक होंगे राजनीतिक लाभ</h3>
<p style="text-align:justify;">बॉडीगार्ड सेटेलाइट्स से भारत को राजनीतिक लाभ व्यापक और रणनीतिक होंगे। इस कदम से न केवल रक्षा की मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका और प्रभावशीलता में भी वृद्धि होगी। सबसे पहले बॉडीगार्ड सेटेलाइट्स भारत के उपग्रह नेटवर्क को संपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करेंगे। इनमें उच्च तकनीकी सेंसर और रडार सिस्टम लगाए जाएंगे जो संभावित खतरों जैसे कि विरोधी देशों के सैटेलाइट हमले, जामिंग या हैकिंग को तुरंत पहचान कर निपटने में सक्षम होंगे। इससे भारत की सैन्य और नागरिक उपग्रह प्रणालियों की रक्षा होगी, जो संचार, नेविगेशन तथा संवेदनशील डेटा के लिए आवश्यक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे यह तकनीक भारत को क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा में अनुकूल स्थिति में रखेगी। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश जो अंतरिक्ष में सक्रिय हैं, उनके सामने यह भारत की एक मजबूत रणनीतिक ताकत होगी। इससे राजनीतिक तौर पर भारत की साख बढ़ेगी और पड़ोस की अनिश्चितताओं को कम करने में मदद मिलेगी। तीसरे घरेलू रक्षा उद्योग और विज्ञान तकनीक के क्षेत्र में यह परियोजना न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी, बल्कि युवाओं और विशेषज्ञों को अत्याधुनिक तकनीकी विकास के लिए प्रेरित करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक नेतृत्व के लिए यह एक महत्वपूर्ण संदेश होगा कि भारत अन्तरिक्ष सुरक्षा में अग्रणी राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत एक सक्षम और सुरक्षित अंतरिक्ष शक्ति के रूप में पेश होगा, जिससे वैश्विक सुरक्षा और सहयोगी मंचों में उसकी भागीदारी मजबूत होगी। इस पहल से भारत अपनी राजनीतिक और रणनीतिक पहुंच दोनों को बढ़ा सकेगा और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान करेगा।बॉडीगार्ड सेटेलाइट्स के माध्यम से भारत को रणनीतिक सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक प्रभाव में भी महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी, जो देश की राजनीतिक मजबूती के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/indian-governments-space-security-indias-strategic-and-technological-emergence-with-bodyguard-satellites/article-76036</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/indian-governments-space-security-indias-strategic-and-technological-emergence-with-bodyguard-satellites/article-76036</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 14:39:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-09/space-news.jpg"                         length="81091"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Space News: अगर धरती 5 सेकंड के लिए रुक जाए तो कौन-कौन बचेगा जिंदा? वैज्ञानिकों की डरावनी भविष्यवाणी</title>
                                    <description><![CDATA[Space News:  अनु सैनी। पृथ्वी लगातार अपनी धुरी पर घूमती रहती है। यही घूमना हमारे दिन-रात और मौसम के बदलाव का कारण है। एक पूरा घूर्णन 24 घंटे में पूरा होता है, जिसे हम “एक दिन” मानते हैं। लेकिन ज़रा कल्पना कीजिए, अगर एक पल के लिए – सिर्फ 5 सेकंड के लिए – यह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/what-if-the-earth-stops-for-5-seconds-just-thinking-about-it-will-send-chills-down-your-spine/article-73480"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Space News:  अनु सैनी।</strong> पृथ्वी लगातार अपनी धुरी पर घूमती रहती है। यही घूमना हमारे दिन-रात और मौसम के बदलाव का कारण है। एक पूरा घूर्णन 24 घंटे में पूरा होता है, जिसे हम “एक दिन” मानते हैं। लेकिन ज़रा कल्पना कीजिए, अगर एक पल के लिए – सिर्फ 5 सेकंड के लिए – यह घूर्णन रुक जाए तो क्या होगा? जवाब डरावना है और मानवीय सभ्यता के लिए किसी भयानक आपदा से कम नहीं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/does-a-snake-enter-your-house-again-and-again-so-do-these-things-immediately-snakes-get-irritated-by-these/">Snake: बरसात के दिन चल रहे हैं…बार-बार घर में घुस आता है सांप? तो… झटपट करें ये काम, इनसे चिढ़ते हैं सर्प</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या होता है जब पृथ्वी रुक जाती है? Space News</h3>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी पर मौजूद हर चीज़ – पानी, हवा, पेड़, इमारतें और इंसान पृथ्वी की गति के साथ घूम रहे होते हैं। पृथ्वी अचानक रुक गई, तो ये सारी चीज़ें अपनी मौजूदा गति (momentum) से आगे बढ़ती रहेंगी। इसका असर बिल्कुल वैसा होगा, जैसे चलती गाड़ी अचानक ब्रेक मारे और उसमें बैठे लोग हवा में उछल जाएं। लेकिन यहां मामला सिर्फ एक गाड़ी नहीं, पूरी पृथ्वी का है!</p>
<h3 style="text-align:justify;">हवा मचाएगी कोहराम</h3>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी की भूमध्य रेखा (Equator) पर इसकी घूमने की रफ्तार लगभग 1670 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। अब कल्पना कीजिए कि इसी रफ्तार से हवाएं चलने लगें – यह किसी भी सुपर टाइफून से कई गुना तेज होगी। ये हवाएं अफ्रीका, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे क्षेत्रों को पूरी तरह तबाह कर देंगी। बड़े-बड़े पेड़ उखड़ जाएंगे, इमारतें गिर जाएंगी और इंसान हवा में उड़ सकते हैं। इतनी तेज हवा किसी भी संरचना को टिकने नहीं देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समुद्रों का प्रकोप: सुनामी और जलप्रलय</h3>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी अपनी घूर्णन की वजह से थोड़ा चपटी (oblate) होती है, खासकर भूमध्य रेखा पर। अगर पृथ्वी रुक गई, तो यह फिर से गोल आकार लेने लगेगी। इससे भूमध्य रेखा पर इकट्ठा पानी ध्रुवों की ओर बहने लगेगा। इसका नतीजा होगा भयानक सुनामी, जो समुद्र के किनारों पर बसे शहरों और गांवों को पूरी तरह निगल सकती है। समुद्र का पानी तटों पर तबाही मचाएगा और जीवन संकट में पड़ जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दो ही जगह थोड़ी राहत: ध्रुवीय क्षेत्र</h3>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर घूमने की गति बहुत कम होती है। अगर धरती रुक भी जाए, तो इन इलाकों में हवाओं का असर कम होगा। इसलिए ये क्षेत्र थोड़ी राहत दे सकते हैं, लेकिन ये राहत भी स्थायी नहीं होगी, क्योंकि जलवायु, भोजन और ऊर्जा की आपूर्ति यहां भी लंबे समय तक संभव नहीं रहेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अगर पृथ्वी धीरे-धीरे रुकने लगे? Space News</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर घूर्णन धीरे-धीरे बंद हो तो भी जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा। दिन और रात का समय बढ़ने लगेगा और एक दिन ऐसा आएगा जब 6 महीने दिन और 6 महीने रात होगी – जैसा कि हम ध्रुवों में देखते हैं। इससे गर्मी और सर्दी का संतुलन बिगड़ जाएगा। फसलों की पैदावार, इंसानों की नींद, जानवरों का व्यवहार – सब कुछ गड़बड़ा जाएगा। धीरे-धीरे धरती जीवन के लिए अनुकूल नहीं रहेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विज्ञान क्या कहता है?</h3>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी का घूर्णन कोई अचानक शुरू हुई प्रक्रिया नहीं है। वैज्ञानिक मानते हैं कि करीब 4 अरब साल पहले, जब ग्रहों का निर्माण हो रहा था, तब गैस और धूल के कणों के आपसी टकराव से पृथ्वी को घूमने की गति मिली। तभी से यह घूमती आ रही है। अगर यह गति अचानक रुक जाए, तो वह एक प्राकृतिक महाविनाश होगा, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।<br />
धरती का रुकना सिर्फ एक ख्याल नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अंत की शुरुआत हो सकती है। भले ही यह सिर्फ 5 सेकंड के लिए क्यों न हो, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर तबाही बनकर टूटेगा। हवा, पानी और धरती – तीनों तत्व बेकाबू हो जाएंगे और जो बचेगा, वह सिर्फ मलबा और खामोशी होगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/what-if-the-earth-stops-for-5-seconds-just-thinking-about-it-will-send-chills-down-your-spine/article-73480</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/what-if-the-earth-stops-for-5-seconds-just-thinking-about-it-will-send-chills-down-your-spine/article-73480</guid>
                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 13:03:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-07/space-news.jpg"                         length="36870"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Space News: इधर विश्व युद्ध की आहट, उधर अंतरिक्ष से हर 44 मिनट में कौन भेज रहा सिग्नल&amp;#8230;दूसरी दुनिया से आया रहस्यमयी संदेश?</title>
                                    <description><![CDATA[Space news:  मुज्जफरनगर अनु सैनी। खगोलशास्त्रियों ने हाल ही में अंतरिक्ष में एक ऐसा रहस्यमयी पिंड खोजा है, जो हर 44 मिनट पर रेडियो तरंगें और एक्स-रे सिग्नल उत्सर्जित करता है। इस नियमित और अनजाने व्यवहार ने वैज्ञानिकों को हैरानी में डाल दिया है। किसने की खोज? इस अनोखे ऑब्जेक्ट को ASKAP J1832-0911 नाम दिया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mysterious-object-found-in-space-sends-radio-and-x-ray-signals-every-44-minutes/article-72329"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;"><strong>Space news:  मुज्जफरनगर अनु सैनी।</strong> खगोलशास्त्रियों ने हाल ही में अंतरिक्ष में एक ऐसा रहस्यमयी पिंड खोजा है, जो हर 44 मिनट पर रेडियो तरंगें और एक्स-रे सिग्नल उत्सर्जित करता है। इस नियमित और अनजाने व्यवहार ने वैज्ञानिकों को हैरानी में डाल दिया है।</p>
<h3 class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">किसने की खोज?</h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">इस अनोखे ऑब्जेक्ट को ASKAP J1832-0911 नाम दिया गया है। सबसे पहले इसे ऑस्ट्रेलिया में स्थित स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर (ASKAP) रेडियो टेलीस्कोप ने देखा था। बाद में नासा की चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी ने भी इस खोज की पुष्टि की।</p>
<h3 class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">क्या है इस ऑब्जेक्ट की खास बात? <strong>Space news</strong></h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">इस खगोलीय वस्तु का व्यवहार अब तक देखे गए किसी भी पिंड से मेल नहीं खाता। शोधकर्ता एंडी वांग (कर्टिन यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया) के अनुसार, यह ऑब्जेक्ट हर 44 मिनट में लगभग 2 मिनट तक तीव्र ऊर्जा तरंगें छोड़ता है – जो कि खगोलशास्त्र में किसी भी वर्तमान सिद्धांत या मॉडल से नहीं जुड़ता। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इसे लॉन्ग-पीरियड ट्रांज़िएंट (LPT) की श्रेणी में रखा है – यानी ऐसा खगोलीय स्रोत जो लंबी और तय अंतराल के बाद ऊर्जा का विस्फोट करता है।</p>
<h3 class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">यह ऑब्जेक्ट क्या हो सकता है? Space News:</h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के अनुसार यह या तो कोई मैग्नेटार हो सकता है – जो अत्यधिक चुंबकीय शक्ति वाला एक मृत तारा होता है,<br />
या फिर ऐसा व्हाइट ड्वार्फ, जो दो सितारों के बाइनरी सिस्टम में एक भागीदार हो। हालांकि, अब तक की कोई भी थ्योरी इस व्यवहार को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाई है।</p>
<h3 class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">खोज के पीछे का उद्देश्य</h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं की टीम अब इसी तरह के और ऑब्जेक्ट्स को ढूंढने में लगी है ताकि यह समझा जा सके कि इस प्रकार के रहस्यमयी घटनाक्रम के पीछे असल वजह क्या है।</p>
<h3 class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">ब्रह्मांड के रहस्य और गहराए</h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">यह खोज ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक एक्सोप्लैनेट (सौरमंडल से बाहर स्थित ग्रह) पर जीवन के संकेत मिलने की भी संभावना जताई थी। लगातार हो रही इन खोजों से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि ब्रह्मांड में अभी भी अनगिनत रहस्य छिपे हैं, जो हमारे ज्ञान और सोच से परे हैं।</p>
<h3 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">इजरायल ने पश्चिमी ईरान में फिर से हमले किए</h3>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">इजरायली वायु सेना ने बुधवार शाम पश्चिमी ईरान में फिर से हमले किए। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा है कि इजरायली जेट विमानों ने सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के प्रक्षेपण और भंडारण स्थलों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि यह पिछले 24 घंटों में ईरान पर इजरायली हवाई हमलों की तीसरी बड़ी कार्रवाई है। रात भर चले इस अभियान में 50 से अधिक लड़ाकू विमानों ने तेहरान के आसपास लगभग 40 लक्ष्यों को निशाना बनाया।</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जिन लक्ष्यों पर हमला किया गया, उनमें एक सेंट्रीफ्यूज उत्पादन स्थल भी शामिल है, जो ईरानी सरकार के यूरेनियम संवर्धन का एक प्रमुख घटक है। उन्होंने कहा कि रात में एक और ठिकाने पर हमला किया गया जो तेहरान के पास स्थित है और उसका उपयोग एंटी-टैंक मिसाइलों के निर्माण के लिए किया जाता था । हमलों की दूसरी कार्रवाई बुधवार अपराह्न शुरू हुयी, जिसमें तेहरान में 20 से अधिक अतिरिक्त लक्ष्यों पर हमला किया गया। जिन लक्ष्यों पर हमला किया गया, वे ईरान के सैन्य हथियार उद्योग और उसके सुरक्षा तंत्र का हिस्सा थे। इनमें मिसाइल उत्पादन से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण साइटें शामिल हैं, जिनमें इंजन, नेविगेशन सिस्टम और मिसाइलें बनायी जाती हैं।</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार बुधवार को तेहरान में पुलिस मुख्यालय के पास एक क्षेत्र में इजरायली हमला हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस बीच ईरानी विदेश मंत्रालय ने जर्मनी के राजदूत को तलब किया और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की उस टिप्पणी पर विरोध जताया, जिसमें उन्होंने ईरान पर इजरायल के हमलों का समर्थन किया था। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ‘भड़काऊ’ टिप्पणियों का विरोध करने के लिए स्विस दूत को भी तलब किया । गौरतलब है कि ट्रम्प ने ईरान को ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ को कहा है।</p>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Punjab Weather Alert: हरियाणा-पंजाब वालों छाता रख लो तैयार, गरज-चमक के साथ आ रहे हैं काले बादल, तीन दिन बहुत भारी" href="http://10.0.0.122:1245/rain-is-expected-in-the-entire-ncr-including-haryana-punjab-delhi-for-the-next-few-days/">Haryana Punjab Weather Alert: हरियाणा-पंजाब वालों छाता रख लो तैयार, गरज-चमक के साथ आ रहे हैं काले बादल, तीन दिन बहुत भारी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/mysterious-object-found-in-space-sends-radio-and-x-ray-signals-every-44-minutes/article-72329</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/mysterious-object-found-in-space-sends-radio-and-x-ray-signals-every-44-minutes/article-72329</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Jun 2025 17:57:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-06/space-news.jpg"                         length="48346"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Space News: जब भारत ने अंतरिक्ष में रचा नया इतिहास: पीएसएलवी-सी9 मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[Space News: 28 अप्रैल 2008 का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए गौरव और उपलब्धि का प्रतीक बन गया। इस दिन श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित हुआ पीएसएलवी-सी9 रॉकेट, जिसने एक साथ 10 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर विश्व स्तर पर भारत की तकनीकी दक्षता का परचम लहरा दिया। Space News यह उपलब्धि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pslv-c9-mission/article-70282"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Space News: 28 अप्रैल 2008 का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए गौरव और उपलब्धि का प्रतीक बन गया। इस दिन श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित हुआ पीएसएलवी-सी9 रॉकेट, जिसने एक साथ 10 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर विश्व स्तर पर भारत की तकनीकी दक्षता का परचम लहरा दिया। Space News</p>
<p style="text-align:justify;">यह उपलब्धि इसलिए भी अद्भुत थी क्योंकि इससे पहले इतने अधिक उपग्रहों को एक ही मिशन में छोड़ने का कारनामा केवल कुछ विकसित देशों ने ही किया था। पीएसएलवी-सी9 ने भारत का 690 किलोग्राम वजनी काटोर्सैट-2ए उपग्रह भी अंतरिक्ष में पहुँचाया, जो उच्च गुणवत्ता की पृथ्वी की तस्वीरें भेजने में सक्षम था। साथ ही, इसमें आठ विदेशी उपग्रह भी शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर जर्मनी और कनाडा के थे। Space News</p>
<p style="text-align:justify;">यह मिशन न केवल इसरो की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बना, बल्कि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त किया। Space News</p>
<p style="text-align:justify;">पीएसएलवी-सी9 की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अब भारत अंतरिक्ष विज्ञान की दौड़ में किसी से पीछे नहीं है — बल्कि नए कीर्तिमान गढ़ने के लिए तैयार है!</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Pahalgam Terror Attack: भारत सरकार द्वारा लिए जा रहे कठोर निर्णय दे रहे पाकिस्तान के लिए बदहाली बढ़ाने के संकेत" href="http://10.0.0.122:1245/the-tough-decisions-being-taken-by-the-indian-government-are-giving-indications-of-worsening-conditions-for-pakistan/">Pahalgam Terror Attack: भारत सरकार द्वारा लिए जा रहे कठोर निर्णय दे रहे पाकिस्तान के लिए बदहाली बढ़ाने के संकेत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/pslv-c9-mission/article-70282</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/pslv-c9-mission/article-70282</guid>
                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 14:41:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-04/space-news.jpg"                         length="93259"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Space News: धरती से अंतरिक्ष जाने में इतना लगता है समय? जानकर आप भी हो जाएंगे दंग</title>
                                    <description><![CDATA[Space News: मुज्जफरनगर, अनु सैनी। अंतरिक्ष यात्रा मानवता की एक महान उपलब्धि है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निरंतर प्रगति को दर्शाती है। आइए जानते हैं कि पृथ्वी से अंतरिक्ष में पहुंचने में कितना समय लगता है और यह प्रक्रिया कैसे होती है। Champions Trophy: ये भारतीय खिलाड़ी हो गया मालोमाल, कंपनी ने कर दिया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-much-time-does-it-take-to-go-from-earth-to-space-you-will-be-surprised-to-know-this/article-68544"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Space News: मुज्जफरनगर, अनु सैनी। </strong>अंतरिक्ष यात्रा मानवता की एक महान उपलब्धि है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निरंतर प्रगति को दर्शाती है। आइए जानते हैं कि पृथ्वी से अंतरिक्ष में पहुंचने में कितना समय लगता है और यह प्रक्रिया कैसे होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/this-indian-player-has-become-very-rich-the-company-has-made-a-big-announcement-know-more/">Champions Trophy: ये भारतीय खिलाड़ी हो गया मालोमाल, कंपनी ने कर दिया बड़ा ऐलान, जानिये</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में प्रवेश का समय | Space News</h3>
<p style="text-align:justify;">आम तौर पर, पृथ्वी की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित ‘कर्मन रेखा’ को पार करने में एक रॉकेट को लगभग 8.5 मिनट का समय लगता है। यह समय रॉकेट के प्रकार, मिशन के उद्देश्य और मार्ग पर निर्भर करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने में समय:-</h3>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर स्थित है। ISS तक पहुंचने में रॉकेट को कर्मन रेखा को पार करने के बाद अतिरिक्त समय लगता है। उदाहरण के लिए, अमेरिकी शटल को कर्मन रेखा को पार करने में लगभग 2.5 मिनट और ISS तक पहुंचने में कुल मिलाकर लगभग 8.5 मिनट का समय लगता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्पेसएक्स फाल्कन हेवी रॉकेट</h3>
<p style="text-align:justify;">स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट ने कर्मन रेखा को पार करने में लगभग 3.5 मिनट का समय लिया था, जो इसकी उच्च प्रदर्शन क्षमता को दर्शाता है। पृथ्वी से अंतरिक्ष में पहुंचने में कुल मिलाकर लगभग 8.5 मिनट से लेकर कुछ घंटे तक का समय लग सकता है, जो मिशन की प्रकृति, रॉकेट की क्षमता और गंतव्य पर निर्भर करता है। यह प्रक्रिया विज्ञान और प्रौद्योगिकी के निरंतर विकास को प्रतिबिंबित करती है, जो भविष्य में और भी तेज और कुशल अंतरिक्ष यात्राओं का मार्ग प्रशस्त करेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/how-much-time-does-it-take-to-go-from-earth-to-space-you-will-be-surprised-to-know-this/article-68544</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/how-much-time-does-it-take-to-go-from-earth-to-space-you-will-be-surprised-to-know-this/article-68544</guid>
                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 12:29:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-03/space-news.jpg"                         length="43989"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NASA: अंतर&amp;#x200d;िक्ष में मिल गया है पृथ्&amp;#x200d;वी जैसा ग्रह, चंद्रमा की तरह चमकता भी है, इतना मिला तापमान&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[space news: डॉ. संदीप सिंहमार। खगोल वैज्ञानिकों के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। इन वैज्ञानिकों ने सुदूर अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज कर ली है। खास बात यह है कि पृथ्वी जैसा नजर आने वाला यह ग्रह चंद्रमा की तरह चमकता भी है और वैज्ञानिकों ने पहली बार इस ग्रह का तापमान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earth-like-planet-has-been-found-in-space/article-56115"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/nasaa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">space news: डॉ. संदीप सिंहमार। खगोल वैज्ञानिकों के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। इन वैज्ञानिकों ने सुदूर अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज कर ली है। खास बात यह है कि पृथ्वी जैसा नजर आने वाला यह ग्रह चंद्रमा की तरह चमकता भी है और वैज्ञानिकों ने पहली बार इस ग्रह का तापमान भी मापा है। TRAPPIST-1b नाम का यह ग्रह देखने में बिल्कुल पृथ्वी जैसा लग रहा है। ऐसा कर दिखाया है अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने। इस ग्रह की खोज के बाद नासा के वैज्ञानिक अब इस खोज में लगे हैं कि क्या यह मनुष्य रह सकता है या नहीं। इस ग्रह पर मनुष्य का जीवन संभव हुआ तो यह नासा की अब तक की सबसे बड़ी खोज होगी। नासा के वैज्ञानिक इस खोज को लेकर बड़े ही उत्साहित हैं। वैज्ञानिक वर्षों से ऐसे ग्रह की तलाश कर रहे हैं,जो पृथ्‍वी की तरह हो। जहां जीवन की संभावना हो। लेकिन अभी तक कोई भी ऐसा ग्रह उन्‍हें नहीं मिला था,पर अब यह सफलता मिली है। वैसे तो खगोल वैज्ञानिकों ने उनकी संभावना वाले ग्रह की पहले भी खोज की है लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। जीवन संभव होगा या नहीं इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/swollen-veins/">Swollen Veins: क्या फूली हुई नसें हानिकारक हैं? लक्षण, कारण और उपचार, जानें डॉक्टर की जुबानी</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">वायुमंडल नहीं मिला</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेर‍िकी अंतर‍िक्ष एजेंसी नासा ने पृथ्वी की तरह दिखाई देने वाले ग्रह की खोज तो कर ली है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस ग्रह पर वायुमंडल नहीं है और वायुमंडल के बिना जीवन की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। इसल‍िए ये दावा तो अभी कल्पनाशील ही रहेगा कि यहां जीवन की संभावना है। पर वैज्ञानिकों की खोज जारी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यह है मेट्रो की रिपोर्ट</h3>
<p style="text-align:justify;">मेट्रो की रिपोर्ट के अनुसार नासा के स्पेस टेलीस्कोप ने ट्रैपिस्ट-1 नामक तारे की परिक्रमा कर रहे कई चट्टानी एक्सोप्लैनेट की खोज की थी। लेकिन अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने तारे की परिक्रमा करने वाले चट्टानी एक्सोप्लैनेट में से एक का तापमान मापने में सफलता हास‍िल कर ली है। इसे बड़ी सफलता से जोड़ कर देखा जा रहा है। TRAPPIST-1b के नाम से जाना जाने वाला यह ग्रह चमकता जरूर है,पर खुद का ऐसा प्रकाश नहीं है। जिससे यह प्रकाश फैलाए।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">What kinds of planets could host alien life? <a href="https://twitter.com/NASAWebb?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASAWebb</a> will help tackle this question by looking at TRAPPIST-1, a system of seven rocky planets orbiting a faint star: <a href="https://t.co/pDQFLyFokV">https://t.co/pDQFLyFokV</a></p>
<p>It’s the 5th anniversary of the TRAPPIST-1 news, but there’s more <a href="https://twitter.com/NASAAstrobio?ref_src=twsrc%5Etfw">@NASAAstrobio</a> to come! <a href="https://t.co/e35ymHBULy">pic.twitter.com/e35ymHBULy</a></p>
<p>— NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/1496191146359414792?ref_src=twsrc%5Etfw">February 22, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<h3 style="text-align:justify;">बहुत गर्म है यह ग्रह,तापमान 230 डिग्री सेल्सियस</h3>
<p style="text-align:justify;">इस गहन शोध के के सह-लेखक डॉ. पियरे-ओलिवियर लागेज ने कहा यह पहली बार है, जब हमने क‍िसी चट्टानी ग्रह के उत्‍सर्जन का पता ल‍गाया है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। हमने पाया क‍ि TRAPPIST-1b बहुत ज्यादा गर्म है। इस ग्रह तापमान लगभग 230 ड‍िग्री सेल्‍स‍ियस मिला है। नासा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि बेशक इसका वायुमंडल नहीं है,लेकिन यह ग्रह हमारे सौर मंडल के चट्टानी ग्रहों जितना छोटा और प्रकाश प्राप्‍त करने वाला ग्रह हो सकता है। इस पर अभी रिसर्च जारी है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/signs-of-cholesterol-in-men/">Signs of Cholesterol: कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 5 लक्षण, पीला जहर निकालेंगे ये घरेलू उपाय</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">आसपास मिले सात अन्य ग्रह,जहां जीवन की उम्मीद!</h3>
<p style="text-align:justify;">नासा के खगोल वैज्ञानिक रिसर्च टीम के प्रमुख डॉ. थॉमस ग्रीन ने कहा की किसी भी दूरबीन से ऐसी रोशनी अब तक नहीं मापी गई थी। इस पहली बार हुआ है। इससे हम पता लगा पाएंगे क‍ि क्‍या इस ग्रह पर कभी जीवन रहा है या नहीं। इसके आसपास सात और ग्रह नजर आते हैं, जो ठंडे हैं और उम्‍मीद जगाते हैं।नासा के अनुसार TRAPPIST-1 b सबसे भीतरी ग्रह है। पृथ्वी को सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा से लगभग चार गुना अधिक ऊर्जा भी प्राप्त करता है। हालांकि अभी जो तापमान मिला है,उससे यह तो सिद्ध हो गया है कि यह ग्रह उन ग्रहों में जरूर शामिल हुआ है,जहां मनुष्य के लिए जीवन की तलाश की जा सकती है। नासा के वैज्ञानिक इस ग्रह की खोज को भविष्य की उम्मीद बता रहे हैं</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/earth-like-planet-has-been-found-in-space/article-56115</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/earth-like-planet-has-been-found-in-space/article-56115</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Apr 2024 12:03:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-04/nasaa.jpg"                         length="43296"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Space News: अंतरिक्ष से गिरी रहस्यमयी वस्तु से टूट गई एक घर की छत! आखिर कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी?</title>
                                    <description><![CDATA[Space News: डॉ. संदीप सिंहमार। हमारा अन्तरिक्ष रहस्यों से भरा हुआ है। कुछ न कुछ ऐसी गतिविधि देखने को मिल जाती है ,जिसे हर कोई सोचने के लिए मजबूर हो जाता है कि ऐसे हुआ कैसे? अंतरिक्ष से ऐसी एक घटना अमेरिका के फ्लोरिडा में घटी। फ्लोरिडा में एक घर पर अंतरिक्ष से एक ऐसी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-roof-of-a-house-broke-due-to-a-mysterious-object-falling-from-space/article-56006"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Space News: डॉ. संदीप सिंहमार। हमारा अन्तरिक्ष रहस्यों से भरा हुआ है। कुछ न कुछ ऐसी गतिविधि देखने को मिल जाती है ,जिसे हर कोई सोचने के लिए मजबूर हो जाता है कि ऐसे हुआ कैसे? अंतरिक्ष से ऐसी एक घटना अमेरिका के फ्लोरिडा में घटी। फ्लोरिडा में एक घर पर अंतरिक्ष से एक ऐसी रहस्यमयी वस्तु गिरी कि घर की छत ही टूट गई। जोरदार धमाके के साथ गिरी इस रहस्य में वास्तु के बाद आसपास में भी अफरातफरी का माहौल मचा। अभी तक कोई भी यह कंफर्म नहीं कर सक है कि यह वस्तु क्या है,जो अंतरिक्ष से आकर गिरी। अभी तक वैज्ञानिक बिसरख अंदाजा लगा रहे हैं कि यह स्पेस स्टेशन पर लगी बैटरी का टुकड़ा हो सकता है। अंतरिक्ष से यह वस्तु इतनी तेज गति से घर की छत पर गिरी कि घर की दो फ्लोर की छत में छेद हो गया। जिस व्यक्ति की छत को नुकसान पहुंचा है उसने अपने ट्विटर हैंडल पर इस घटना की सूचना पोस्ट की। देखते देखते ही देखते उसे व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड की गई जानकारी अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा तक पहुंच गई। इसके बाद नासा नेवी इस पूरे मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/haryana-government-preparing-to-send-youth-to-israel-again/">Haryana News: युवाओं को दोबारा इजराइल भेजने की तैयारी में हरियाणा सरकार, कमा सकते हैं 1.50 लाख प्रति महीना</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">यह स्पेस सेंटर का कचरा है या बैटरी,अभी जांच जारी | Space News</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक तौर पर ऐसा माना जा रहा है कि यह वस्तु इंटरनेशनल स्पेस सेंटर से गिरा कोई कचरा हो सकता है। यह स्पेस सेंटर की बैतरीबक हिस्सा हो सकता है।फ्लोरिडा के नेपल्स में रहने वाले अलेजांड्रो ओटेरो ने एक्स ट्विटर पर अपनी पोस्ट में लिखा कि लिखा कि आसमान से कोई वस्तु गिरी तो पहली मंजिल की छत को तोड़ते हुए मेरे बच्चे के कमरे आ गई। अलेजांड्रो का कहना है कि यह नासा द्वारा 2021 में स्पेस स्टेशन पर भेजे गए कार्गो पैलेट की ओल्ड बैटरी है। पर इसको लेकर यह महज उसका अंदाज़ मात्र है। इतना जरूर है कि इस पोस्ट के बाद नासा के वैज्ञानिक सतर्क जरूर हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह उम्मीद लगाई जा रही थी की अंतरिक्ष से गिरी यह रहस्यमयी धरती के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगी पर इस नहीं हुआ। अलेजांड्रो के ट्वीट पर प्रसिद्ध एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोनाथन मैक्डॉवल ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि आसमान से एक वस्तु नीचे आती देखी गई थी। इसी की वजह से छत को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/are-you-also-a-coffee-lover-so-be-careful-you-may-have-to-face-these-problems/#google_vignette">Coffee Side Effects: क्या आप भी है कॉफी के शौकिन? तो हो जाएं सावधान, करना पड़ सकता है इन दिक्कतों का सामना</a></p>
<h4 style="text-align:justify;">EP-9 बैटरी का टुकड़ा हो सकता है, पर सवाल यह आवासीय क्षेत्र में गिर क्यों?</h4>
<p style="text-align:justify;">जोनाथन भी अंतरिक्ष से संबंधित जानकार हैं। उनको ऐसा लगता है कि यह EP-9 बैटरी पैलेट का टुकड़ा लग रहा है। इसी सूचना के आधार पर नासा के केनेडी स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने अलेजांड्रो के घर से यह टुकड़ा उठाकर उच्च स्तरीय जांच शुरू की है। पर अभी कुछ भी खुलासा नहीं हो पाया है। नासा के वैज्ञानिकों ने महज़ इतना कहा कि जांच के बाद ही स्पष्ट तौर पर बता पाएंगे कि यह वस्तु असल में स्पेस स्टेशन से आया है, या किसी और ग्रह या एस्टेरॉयड का टुकड़ा है। उनका मानना है कि यह एस्टेरॉयड भी हो सकता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/check-today-whether-your-ppf-nps-and-ssy-account-has-been-closed/#google_vignette">NPS vs PPF: आज ही जांच लें, कहीं आपका PPF, एनपीएस एवं एसएसवाई खाता बंद तो नहीं हो गया?</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">अब जिम्मेदारी पर सवाल?</h3>
<p style="text-align:justify;">फ्लोरिडा की छत पर गिरी रस्यमयी बस्तु के बारे में कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बैटरी पैलेट नासा का है, लेकिन इसे लॉन्च जापानी स्पेस एजेंसी ने किया था। अब यह चिंतन करने में लगे हैं कि इसकी वास्तविक जिम्मेदारी नासा की होगी या जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा की। इससे पहले 2022 में SpaceX ड्रैगन कैप्सूल का हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के एक खेत में गिरा था। तब भी कई महीनो तक चली लंबी जांच के बाद स्पष्ट हो पाया था की जो हिस्सा गिरा है वह ड्रैगन कैप्सूल का हिस्सा था। इसके अलावा चीन के लॉन्ग मार्च रॉकेट के टुकड़े जमीन पर गिरते रहते हैं। जिसकी आलोचना पूरी दुनिया में होती रहती है। वैश्विक तौर पर स्पेस एजेंसियां इस बात पर निगरानी रखती है कि धरती के चारों तरफ चक्कर लगा रहे 30 हजार से ज्यादा कचरे के बड़े टुकड़े कहीं धरती पर न गिरें। यदि गिरे तो ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ नुकसान की संभावना कम हो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-roof-of-a-house-broke-due-to-a-mysterious-object-falling-from-space/article-56006</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/the-roof-of-a-house-broke-due-to-a-mysterious-object-falling-from-space/article-56006</guid>
                <pubDate>Thu, 04 Apr 2024 16:24:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-04/space-news.jpg"                         length="46100"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PSLV-C56: पीएसएलवी-सी56/डीएस-एसएआर मिशन के लिए उल्टी गिनती शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई (एजेंसी)। Isro PSLV-C56 launch on Sunday: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से रविवार को पीएसएलवी-सी56 से छह सह-यात्रियों के साथ सिंगापुर के डीएस-एसएआर विशेष वाणिज्यिक उपग्रह को प्रक्षेपित किये जाने की शनिवार से उल्टी गिनती शुरू हुयी। 44.4 मीटर लंबा चार चरण वाला वाहन पीएसएलवी-सी56, 228 टन भार के साथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/countdown-begins-for-pslv-c56-ds-sar-mission/article-50543"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/pslv-c56-mission1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई (एजेंसी)।</strong> Isro PSLV-C56 launch on Sunday: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से रविवार को पीएसएलवी-सी56 से छह सह-यात्रियों के साथ सिंगापुर के डीएस-एसएआर विशेष वाणिज्यिक उपग्रह को प्रक्षेपित किये जाने की शनिवार से उल्टी गिनती शुरू हुयी। 44.4 मीटर लंबा चार चरण वाला वाहन पीएसएलवी-सी56, 228 टन भार के साथ रविवार सुबह 06.30 बजे शार रेंज से प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि उल्टी गिनती शनिवार सुबह पांच बजे शुरू हो गई। इसरो ने ट्वीट किया, ‘30 जुलाई, 2023 को भारतीय समयानुसार सुबह 6:30 बजे लॉन्च की उलटी गिनती शुरू हो गई है। उलटी गिनती के दौरान, चार चरणों वाले वाहन में प्रणोदक भरने का कार्य किया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिन हो या रात, यह देगा हमेशा साथ | PSLV-C56</h3>
<p style="text-align:justify;">डीएस-एसएआर इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा विकसित सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) पेलोड रखता है। यह डीएस-एसएआर को हर मौसम में दिन और रात की कवरेज प्रदान करने की अनुमति देता है। विभाग के मुताबिक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने डीएसटीए और एसटी इंजीनियरिंग, सिंगापुर से 360 किलोग्राम के डीएस-एसएआर उपग्रह को तैनात करने के लिए पीएसएलवी-सी 56 खरीदा है। इसरो ने बताया कि यह सी-55 के समान ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएसएलवी-सी 56 अपने साथ 360 किलोग्राम भारी डीएस-एसएआर सैटेलाइट को 5 डिग्री सेल्यिसस झुकाव एवं 535 किमी. की ऊंचाई पर निकट भूमध्यरेखीय कक्षा में लॉन्च करेगा। इससे पहले चंद्रयान-3 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने चांद के लिए रवाना किया है। पृथ्वी की कक्षा में अपनी परिक्रमा पूरी करने के बाद वो अगले महीने चांद की धरती पर उतरेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि भारत ने 14 जुलाई एलवीएम3-एम4 रॉकेट द्वारा अपने तीसरे चंद्रयान-3 की सफल लॉचिंग की थी। चंद्रयान-3 अपनी 41 दिनों की यात्रा में चांद के दक्षिणी धु्रव क्षेत्र पर एक बार फिर साफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेगा। अभी तक लैंडिंग पर नजर डालें तो दक्षिणी धु्रव पर अभी तक किसी देश ने सॉफ्ट लैंडिंग नहीं की है। चांद की सतह पर अब तक अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ और चीन जैसे देश सॉफ्ट लैंडिंग कर चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मगर उनकी सॉफ्ट लैंडिंग चांद के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं हो सकती है। दूसरी तरफ इंडियन स्पेस रिसर्च आॅर्गेनाइजेशन (इसरो) का 600 करोड़ रुपये का चंद्रयान-3 मिशन 4 साल में अंतरिक्ष एजेंसी के दूसरे प्रयास में लैंडर को उतारने में कामयाब हो जाता है तो अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद भारत चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक में कामयाबी हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/countdown-begins-for-pslv-c56-ds-sar-mission/article-50543</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/countdown-begins-for-pslv-c56-ds-sar-mission/article-50543</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 10:25:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-07/pslv-c56-mission1.jpg"                         length="54542"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Earth: पृथ्वी संकट में? अंतरिक्ष से गिर रहे 3-3 एस्टरॉयड का जानें कैसा होगा असर?</title>
                                    <description><![CDATA[Earth: अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि आज 3 बड़े एस्टरॉयड जोकि लघु ग्रह के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है, धरती की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। ये एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसा हाल ही में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earth-in-trouble-know-what-will-be-the-effect-of-3-3-asteroids-falling-from-space/article-49542"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/earth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earth: अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि आज 3 बड़े एस्टरॉयड जोकि लघु ग्रह के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है, धरती की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। ये एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसा हाल ही में नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIS) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है। रिपोर्ट की मानें तो अंतरिक्ष से तीन विशालकाय एस्टेरॉइड धरती की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि इनमें से एक एस्टेरॉइड MT-1 का आकार इंडिया गेट जितना बड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान का कहना है कि ये तीनों एस्टेरॉइड पृथ्वी के काफी करीब से गुजरने वाले हैं जिसे लेकर संस्थान के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने जानकारी दी है। इसे लेकर उन्होंने पब्लिक आउटरीच प्रोग्राम में बात की। हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि इन तीनों एस्टेरॉइड से पृथ्वी को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।</p>
<h3>वहीं वैज्ञानिकों ने किया खुलासा | Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि तीनों एस्टेरॉयड जुलाई में पृथ्वी के पास से गुजरेंगे। हालांकि, तीनों घटना अलग-अलग तारीखों पर देखने को मिलेंगी। डॉ. यादव का कहना है कि 2023 MT-1 एस्टेरॉयड और ME-4 एस्टेरॉयड 8 जुलाई को पृथ्वी से 1.36 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेंगे। ये एस्टेरॉइड पृथ्वी के करीब से 12 किलोमीटर प्रति सेकेंड से गुजरेंगे। अमेरिका और यूरोप के ऊपर से गुजरते हुए नजर आएंगे। वहीं तीसरा यूक्यू 3 एस्टेरॉयड 18 जुलाई को पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरेगा जो करीब 18 से 20 मीटर व्यास का होगा। डॉ. यादव ने बताया कि हर साल पृथ्वी की ओर आते हैं एस्टेरॉइड।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. यादव ने आगे बताया कि एस्टेरॉइड हर साल पृथ्वी (Earth) की ओर आते हैं। कुछ एस्टेरॉइड का पृथ्वी से टकराने का खतरा बना रहता जिन्हें खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, ये तीनों एस्टेरॉइड पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरने वाले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एस्टेरॉयड का व्यास 524 फीट के आसपास होगा जबकि इसकी रफ्तार 11.8 किमी प्रति सेकंड है। ये एस्टेरॉयड एक घंटे में 26 हजार मील से ज्यादा की दूरी तय कर रहे हैं, जो ध्वनि की गति से भी 34 गुना ज्यादा रफ्तार है।</p>
<p style="text-align:justify;">एस्टेरॉयड 2013 WV44 हमारे ग्रह से 2.1 मिलियन मील दूरी से गुजरने वाला है जो अंतरिक्ष के हिसाब से सुरक्षित दूरी मानी जाती है। एक एक्सपर्ट के अनुसार ये दूरी चंद्रमा से लगभग 9 गुना ज्यादा है, फिर भी ये एस्टेरॉयड को नियर अर्थ आॅब्जेक्ट के रूप में वगीर्कृत किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन एस्टेरॉयड का पृथ्वी पर कोई असर नहीं होगा। अगर एक छोटा एस्टेरॉयड हमारे ग्रह से टकराया तो वो वायुमंडल में ही जलकर राख हो जाएगा। हालांकि, अगर कोई बड़ा एस्टेरॉयड टकराया तो उससे नुकसान होने का खतरा हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/earth-in-trouble-know-what-will-be-the-effect-of-3-3-asteroids-falling-from-space/article-49542</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/earth-in-trouble-know-what-will-be-the-effect-of-3-3-asteroids-falling-from-space/article-49542</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 12:05:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-07/earth.jpg"                         length="44217"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        