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                <title>Maharashtra politics - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Maharashtra politics RSS Feed</description>
                
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                <title>एनसीपी में नई कार्यकारिणी को लेकर बढ़ी राजनीतिक उथल-पुथल, दिग्गज नेताओं के नाम गायब</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी सूची सार्वजनिक होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है। निर्वाचन आयोग को भेजे गए संगठनात्मक दस्तावेज में कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव दिखाई देने के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/political-turmoil-increased-in-ncp-regarding-new-executive-names-of/article-84672"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/ncp-maharashtra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Maharashtra Politics: मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी सूची सार्वजनिक होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है। निर्वाचन आयोग को भेजे गए संगठनात्मक दस्तावेज में कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव दिखाई देने के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। Maharashtra Political News</p>
<p style="text-align:justify;">नई सूची में पार्टी नेतृत्व ने युवा पीढ़ी को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपते हुए संगठन में नए चेहरों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि राज्यसभा सदस्य पार्थ पवार को राष्ट्रीय महासचिव तथा जय पवार को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। सूची सामने आने के बाद अनुभवी नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे और दिलीप वलसे पाटिल की भूमिकाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई नेताओं के पुराने पदों का उल्लेख नहीं होने से संगठन के भीतर बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जाने लगीं। सोशल मीडिया पर सूची वायरल होने के बाद सुनेत्रा पवार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दस्तावेज में कुछ तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियां रह गई थीं, जिन्हें शीघ्र ही सुधार लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित संशोधन के लिए निर्वाचन आयोग को अतिरिक्त पत्र भेजा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में यह बदलाव पार्टी की भावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके माध्यम से युवा नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय भूमिका देने की तैयारी की जा रही है। Maharashtra Political News</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को राष्ट्रीय कार्यसमिति में स्थान दिया गया है और उन्हें राज्यसभा में दल के नेता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, सुनील तटकरे को लोकसभा में पार्टी नेतृत्व की भूमिका मिली है। नई कार्यकारिणी में कई नए और पुराने नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की रणनीति के तहत यह पुनर्गठन किया है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि आने वाले समय में एनसीपी अपने संगठनात्मक स्वरूप में और बदलाव कर सकती है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि संगठन में सभी वरिष्ठ नेताओं का सम्मान बरकरार है और सूची से जुड़ी भ्रम की स्थिति जल्द समाप्त कर दी जाएगी। Maharashtra Political News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:51:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Maharashtra : विधानसभा चुनाव से पूर्व एनसीपी को बड़ा झटका! 4 नेताओं ने छोड़ी पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र (एजेंसी)। विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो चली हैं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar, Deputy CM Maharashtra) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 4 शीर्ष नेता पार्टी छोड़ गए और महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवाड़ में इस्तीफा दे दिया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-blow-to-ncp-before-assembly-elections-4-leaders-left-the-party/article-59913"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/ajit-pawar-ncp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र (एजेंसी)। विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो चली हैं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar, Deputy CM Maharashtra) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 4 शीर्ष नेता पार्टी छोड़ गए और महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवाड़ में इस्तीफा दे दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये चारों नेता सप्ताह के अंत में शरद पवार (Sharad Pawar) के एनसीपी के मूल गुट में शामिल हो सकते हैं। Maharashtra News</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम विधानसभा चुनाव से पहले और हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव 2024 में अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के खराब प्रदर्शन के बाद हुआ है। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के हिस्से के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह केवल एक सीट – रायगढ़ – जीत सकी, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 8 सीटें जीतीं थी।</p>
<h3>अजित पवार खेमे के कुछ नेता शरद पवार के गुट में लौटना चाहते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी छोड़ने का किस्सा उस समय चर्चा में आया कि अजित पवार खेमे के कुछ नेता शरद पवार के गुट में लौटना चाहते हैं। अपना इस्तीफा सौंपने वालों में एनसीपी की पिंपरी-चिंचवाड़ इकाई के प्रमुख अजित गव्हाने भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार अन्य लोगों में पिंपरी चिंचवाड़ छात्र विंग के प्रमुख यश साने और पूर्व पार्षद राहुल भोसले और पंकज भालेकर शामिल हैं। Maharashtra News</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में बताया गया है कि ये घटनाक्रम शरद पवार के उस बयान के कुछ दिनों बाद सामने आया जिसमें उन्होंने कहा था कि जो लोग उनकी पार्टी को ‘कमजोर’ करना चाहते हैं, उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन वे ऐसे नेताओं को स्वीकार करेंगे जो पार्टी की छवि को ‘नुकसान’ नहीं पहुँचाएँगे। पवार ने कहा था, ‘‘जो लोग पार्टी को कमजोर करना चाहते हैं, उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन जो नेता संगठन को मजबूत करने में मदद करेंगे और पार्टी की छवि को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे, उन्हें शामिल किया जाएगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">2023 में, अजित पवार ने अपने चाचा और एनसीपी के संस्थापक शरद पवार के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और पार्टी को दो राजनीतिक दलों में विभाजित कर दिया। शरद पवार विपक्षी खेमे में रहे, जबकि अजित पवार महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए। पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। Maharashtra News</p>
<p><a title="समुद्र में तेल टैंकर पलटने से 13 भारतीय और 3 श्रीलंकाई लापता!" href="http://10.0.0.122:1245/13-indians-and-3-sri-lankans-missing-after-oil-tanker-capsized-in-the-sea/">समुद्र में तेल टैंकर पलटने से 13 भारतीय और 3 श्रीलंकाई लापता!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Jul 2024 10:39:20 +0530</pubDate>
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                <title>देश में फिर शुरू हुई जोड़-तोड़ की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[Politics of Manipulation: देश की राजनीति में एक बार फिर जोड़-तोड़ की कशमकश जारी है। महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान चरम पर है। इधर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थिति भी शिवसेना जैसी होती जा रही है। पार्टी से बागी हुए अजित पवार ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन में शामिल होकर न केवल उप-मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-of-manipulation/article-49685"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/politics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Politics of Manipulation: देश की राजनीति में एक बार फिर जोड़-तोड़ की कशमकश जारी है। महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान चरम पर है। इधर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थिति भी शिवसेना जैसी होती जा रही है। पार्टी से बागी हुए अजित पवार ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन में शामिल होकर न केवल उप-मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया है बल्कि चुनाव आयोग के समक्ष अपने गुट को ही वास्तविक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी होने का दावा भी कर दिया है। ऐसी घटनाओं से मतदाता में दुविधा की भावना प्रबल होती है। अब सवाल यह है कि अजित पवार ने पद के लालच में बगावत की है या फिर पार्टी से तंग आकर कोई फैसला लिया है। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने अपनी बढ़ती उम्र को देखते हुए हाल ही में अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है, इसी बात से अजित नाराज बताए जा रहे थे। Politics of Manipulation</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियां जोर-आजमाइश कर रही हैं। कांग्रेस, जनता दल, एनसीपी सहित 17 पार्टियां गठबंधन की कोशिश में हैं। इस चलन में मुद्दों की चर्चा बिल्कुल नदारद है, केवल किसी पार्टी विशेष को हराना राजनीति या लोकतंत्र नहीं है, बल्कि राजनीति का संबंध मुद्दों से जुड़ा हुआ है। पार्टियों में एजेंडे की चर्चा से अधिक गठबंधन की चर्चा ज्यादा हो रही है। इसी तरह कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार में भी जल्द सियासी तूफान उठने वाला है। वस्तुत: विचारों/एजेंडे की चर्चा जनता को अपने से जोड़ती है। लोकतंत्र में जनता का भी अहम स्थान है, लेकिन जब बिना किसी एजेंडे के बदलाव, गठबंधन हो जाए तब राजनीति केवल पार्टी नेताओं की कशमकश तक सीमित रह जाती है। Politics</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में राजनीति में विश्वसनीयता व स्पष्टता आवश्यक है लेकिन राजनीति इतनी पेचीदा स्थिति में पहुंच गई है कि आम वोटर को पता ही नहीं होता कि आखिर ये चल क्या रहा है। यदि कोई नेता किसी पार्टी का कट्टर विरोधी होता है और उसे जनता का दुश्मन बताया जाता है, जब वही नेता सत्ता में आ जाता है तो उसे वही पार्टी मां से भी प्यारी और उसे जनता का सेवक कहा जाने लगता है। राजनीति में स्वार्थ इस हद तक बढ़ गया है कि गठबंधन के लिए सिद्धांतों की बलि दी जाती है और केवल पद लेना ही मुख्य उद्देश्य रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ऐसा भी समय था जब गुरमुख सिंह मुसाफिर जैसे नेता को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति हो गई थी, तब मुसाफिर साहब को यह निर्णय पसंद नहीं आया और वह कहीं जाकर छिप गए थे। बड़ी मुश्किल से उन्हें ढूंढा गया, वहीं दूसरी ओर हमने एक ऐसा नेता भी देखा जिसने पंद्रह दिन के अंदर तीन पार्टियां बदल लीं। दलबदल विरोधी कानून बनाने का मुख्य कारण उसी नेता का तख्तापलट था। गठबंधन भी टूट रहे हैं और बन भी रहे हैं। पता नहीं कब किसी नेता को अपने प्रतिद्वंद्वी नेता का पार्टनर बनने का वक्त आ जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। यह चलन राजनीति चमक को फीका कर रहा है। Politics of Manipulation</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="BJP vs Opposition: भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के प्रयास" href="http://10.0.0.122:1245/opposition-unity-efforts-against-bjp/">BJP vs Opposition: भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के प्रयास</a></p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 11:05:46 +0530</pubDate>
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