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                <title>Delhi Flood - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Delhi Flood RSS Feed</description>
                
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                <title>&amp;#8230;त्याग की ऐसी और कोई मिसाल गूगल पर भी न मिली!</title>
                                    <description><![CDATA[Shah Satnam Ji Green S Welfare Force : प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव राहत कार्यों में जुटे कई लोग नजर आते हैं। कोई अपनी कानूनी ड्यूटी निभाता है तो कोई अपनी आजीविका के लिए निकलता है। परंतु इस माहौल में वे लोग भी हैं जो न तो तनख्वाह लेते हैं और न ही उनकी कोई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/no-other-such-example-of-sacrifice-was-found-even-on-google/article-50288"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/sirsa-flood-2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shah Satnam Ji Green S Welfare Force : प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव राहत कार्यों में जुटे कई लोग नजर आते हैं। कोई अपनी कानूनी ड्यूटी निभाता है तो कोई अपनी आजीविका के लिए निकलता है। परंतु इस माहौल में वे लोग भी हैं जो न तो तनख्वाह लेते हैं और न ही उनकी कोई सरकारी ड्यूटी है और न ही वे किसी की मदद के सहारे आगे आते है। यह लोग सिर्फ और सिर्फ दूसरों की भलाई के लिए ही अपने कामकाज छोड़कर और अपनी जान का जोखिम उठाने के लिए तैयार रहते हैं। यह दृश्य पंजाब-हरियाणा में घग्गर में आई बाढ़ (Haryana Flood) के दौरान भी देखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इन परोपकारी लोगों के आने की एक ही वजह स्वैच्छा हैं। यह स्वैच्छा के साथ पानी से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं, पीड़ितों को भोजन और पशुओं के लिए चारा पहुंचा रहे हैं। 5-10 फुट गहरे पानी में वह उतर जाते हैं और यह लोग यह भी लिखकर देते हैं कि मानवता भलाई कार्यों में हमारी जान भी चली जाए तो इसकी जिम्मेवारी हमारी अपनी है। यह भी अजूबा है कि इन लोगों के पास अपना स्वयं का ही खाना-पीना और यातायात के अपने ही साधन हैं। यह किसी से पानी भी नहीं मांगकर पीते और दूसरों को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए रौद्र बनी नदी में भी उतर जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खुद का खर्चा करके पहुंचते हैं और किसी पर बोझ बने बिना दूसरों की भलाई के लिए जुट जाते हैं। त्याग की ऐसी कोई और मिसाल ढूंढनी बेहद कठिन है। सिर्फ तस्वीर खिंचवा कर घरों को चले जाना इनकी फितरत में नहीं। आमतौर पर नाले, माइनर का पानी किसी से संभाला नहीं जाता और यह नदियों के साथ नाता जोड़ लेते हैं। ये धन्य कहलाने के काबिल शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के मैंबर जिनके दिलों में मानवता की सेवा के लिए स्वैच्छा पैदा की है सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल रुहानी रहबर पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने। Haryana Flood</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से इन सेवादारों ने तो 2004 में अंडमान निकोबार टापुओं जैसे अनजान क्षेत्रों, सूनामी के समय बेमिसाल सेवा की थी। रक्तदान करना तो इनके लिए बांए हाथ का काम है। जो पानी ट्रक जैसे बड़े वाहनों को एक खिलौने की तरह बहाकर ले जाए, उस पानी के खतरनाक बहाव में उतरकर किसी की जान बचाना, बहाव को रोकना, नदियों को नकेल डालने जैसा होता है। यह असंभव और बड़ा कार्य किसी रुहानी प्रेरणा, दृढ़ इच्छाशक्ति, समर्पण और त्याग की भावना से ही संभव है।<br />
<strong>संपादक</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="अगर डेरा सच्चा सौदा के सेवादार न आते तो चामल बांध न बंधता: रणजीत सिंह" href="http://10.0.0.122:1245/chaudhary-ranjit-singh-lauds-dera-sacha-sauda-sewadar-for-their-contribution-in-helping-flood-victims/">अगर डेरा सच्चा सौदा के सेवादार न आते तो चामल बांध न बंधता: रणजीत सिंह</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2023 13:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Delhi Flood: आखिर क्यों हुई दिल्ली पानी-पानी</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Flood: वैसे हर बारिश में गांव हो या शहर कमोबेश नए संघर्ष की यात्रा कर ही लेते हैं, मगर इस बार मामला कुछ ज्यादा जटिल रहा। हिमाचल, उत्तराखंड सहित कई पहाड़ी राज्यों के साथ मैदानी इलाके भी हालिया बारिश और बाढ़ (Flood) से अच्छी खासी तबाही से जूझ रहे हैं। इसी तबाही का शिकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/after-all-why-did-delhi-become-water-water/article-50067"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/delhi-water-water.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Delhi Flood: वैसे हर बारिश में गांव हो या शहर कमोबेश नए संघर्ष की यात्रा कर ही लेते हैं, मगर इस बार मामला कुछ ज्यादा जटिल रहा। हिमाचल, उत्तराखंड सहित कई पहाड़ी राज्यों के साथ मैदानी इलाके भी हालिया बारिश और बाढ़ (Flood) से अच्छी खासी तबाही से जूझ रहे हैं। इसी तबाही का शिकार फिलहाल दिल्ली भी है। रिकॉर्ड तोड़ बारिश और यमुना के जल स्तर का रिकॉर्ड स्तर जिस तरह टूटा है उससे दिल्ली में केवल आमजन तक ही नहीं बल्कि मंत्रियों और सांसदों के घर तक बारिश का पानी पहुंचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे देखा जाए तो दिल्ली पहली बार न तो त्रस्त हुई है न त्रासदी देखी है बल्कि यह लगभग हर साल के मौसम में कम-ज्यादा होता रहा है। हां, यह बात और है कि इस बार दिल्ली की सड़कें ताल-तलैया और पोखर में तब्दील हो गए। सवाल है कि जिस दिल्ली में दो सरकारें रहती हैं, जो देश की आबोहवा को बदलने की ताकत रखती है वह दिल्ली बारिश के चलते खुद डूबती दिखी। गौरतलब है कि दिल्ली की आबादी दो करोड़ से अधिक है और 1947 में यहां महज सात लाख की जनसंख्या थी। समय के साथ बढ़Þती आबादी और निर्माण कार्यों में तेजी आई और एक मेगा शहर का स्वरूप अख्तियार करते हुए दिल्ली इमारतों, सड़कों, रिहायशी भवनों, कल-कारखानों और बड़े-बड़े ओवर ब्रिज से बोझिल हो गई और इसी निरंतरता के साथ जन घनत्व में भी प्रसार हुआ, मगर कई समस्याओं ने इसे चारों तरफ से घेर भी लिया।</p>
<h3>1976 की बनी जल निकासी की योजना ज्यों की त्यों</h3>
<p style="text-align:justify;">मसलन कचरे का ढ़ेर, ई-कचरा, जल निकासी की समस्या आदि ने एक नए तरीके की पीड़ा भी इस दिल्ली को दी है। कहा जाता है कि दिल्ली के जल निकासी के लिए जो योजना 1976 में बनायी गई थी वही आज भी निरंतरता लिए हुए है। खास यह है कि इसे महज 20 साल के लिए बनाया गया था जो लगभग 50 साल पूरे कर रही है। अब यह बात समझना सहज है कि दिल्ली बारिश में क्यों हाफने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया स्थिति को देखें तो दिल्ली में आया जल प्रलय योजनाकारों और सरकारों दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। दिल्ली के कई इलाकों में यमुना के बढ़ते पानी के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी। यमुना का जल स्तर 208 मीटर से अधिक का छलांग लगाते हुए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। आईटीओ, निगमबोध घाट, कश्मीरी गेट सहित कई इलाकों में जल भराव तीन फिट से ऊपर चला गया जिसके चलते सरकारें अलर्ट मोड में चली गयी। निचले इलाकों से लोगों को निकाला जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाये तो 1978 के बाद पहली बार यमुना का जलस्तर इतना बढ़ा। जान-माल का काफी नुकसान हो रहा है, लाल किले में भी यमुना का पानी घुस गया। मेट्रो को भी कुछ इलाकों में बंद करना पड़ा, सड़कों पर लम्बा जाम इत्यादि समस्याएं यह बताती हैं कि दिल्ली पानी-पानी तो खूब हुई हैं और इसके पीछे बेतरजीब तरीके से हुई बसावट, सरकार की घोर लापरवाही तथा इंतजाम की कमी देखी जा सकती है। यमुना के निचले इलाकों में 37 हजार से अधिक अवैध बाशिंदे हैं जिन्हें विस्थापित करना स्वाभाविक है। यमुना के जल स्तर के बढ़ने के पीछे हथिनीकुण्ड बैराज से पानी छोड़ना भी है यह बैराज हरियाणा में है। Delhi Flood</p>
<h3>दिल्ली की सड़कों पर नाव चला करेंगी</h3>
<p style="text-align:justify;">वैसे बैराज से पानी छोड़ा जाना हर बारिश में अपने ढंग की आवश्यकता है। दूसरा बड़ा कारण यहां की बूढ़ी हो चुकी जल निकासी व्यवस्था है। दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम के साथ 11 विभाग शामिल हैं जिन्हें एक मेज पर बैठकर नया मास्टर प्लान तैयार करना ही होगा। यदि ऐसा नहीं सम्भव हुआ तो दिल्ली की सड़कों पर कार और मोटरगाड़ी की बजाये नाव चला करेंगी। फिलहाल दिल्ली पुलिस ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में धारा 144 लागू कर दी है। वैसे देखा जाये तो यह चौथी बार है जब यमुना का जलस्तर 207 मीटर के पार पहुंचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारी बारिश के चलते उत्तर भारत में ट्रेन का आवागमन भी बेपटरी हुआ है। 500 से अधिक ट्रेने आंशिक व पूर्ण रूप से रद्द हो चुकी हैं। टिकट रद्द होने और रिफण्ड के चलते रेलवे भी घाटे की ओर अग्रसर है। हालांकि ऐसे मौके कई बार रहे हैं और मौसम ठीक होने की स्थिति में ट्रेनें फिर पटरी पर दौड़ती रही हैं। खास यह भी है कि एक ओर जहां हिमाचल और पंजाब में बाढ़ से हालत गम्भीर है और दिल्ली में भी बारिश और बाढ़ ने नई समस्या खड़ी की है। वहीं झारखण्ड और उत्तर प्रदेश में बारिश की कमी महसूस कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे भारत के पड़ताल किया जाये तो अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु को देखा जा सकता है। देखा जाये तो ये 8 राज्य इन दिनों बारिश से बेहाल हैं जबकि देश के 11 ऐसे राज्य जो कम बारिश से युक्त हैं। बिहार में बारिश सामान्य से 33 फीसद कम है और किसान इस कमी से परेशान हैं साथ ही गर्मी और उमस की समस्या बरकरार है। झारखण्ड में मानसून कमजोर रहा हालांकि आगे सक्रियता बढ़ने की सम्भावना है। झारखण्ड में 43 फीसद और ओडिशा में 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। असम को छोड़ दिया जाये तो पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में मानसूनी बादल कम ही बरसे हैं।</p>
<h3>हरियाणा के 9 जिलों के 6 सौ गांव में पानी भर गया | Delhi Flood</h3>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल 12 जुलाई तक हुई 4 दिन की बारिश से देश के अंदर सौ से ज्यादा की बाढ़ और बारिश से मौत हुई। 10 हजार से अधिक पर्यटक हिमाचल प्रदेश में जहां-तहां फंस गये। हरियाणा के 9 जिलों के 6 सौ गांव में पानी भर गया। उक्त आंकड़े यह दर्शातें हैं कि हालिया बारिश और बाढ़ का परिप्रेक्ष्य से पूरा देश नहीं घिरा है बल्कि कुछ राज्य तक यह मामला है जिसमें देश की राजधानी दिल्ली भी खूब पानी-पानी हुई है। Rain</p>
<p style="text-align:justify;">बारिश पर किसी का जोर नहीं मगर बढ़ रहे पृथ्वी के तापमान, जलवायु परिवर्तन और मानव द्वारा सृजित या निर्मित अनेक वे कारक जो पृथ्वी के बदलाव को बड़े बदलाव में तब्दील करने में लगे हैं उसको कमतर किया जा सकता है। इतना ही समय रहते शहरों के जल निकासी को दुरूस्त करना, बारिश से पहले साफ-सफाई करना, अवैध कॉलोनी को न बसने देना, नाला-खाला आदि पर अतिक्रमण से रोक और बेहतरीन मास्टर प्लान बनाकर बाढ़ से बचा जा सकता है। दिल्ली देश का वह चित्र है जहां से पूरे देश के मानचित्र की सेहत सुधरती है। ऐसे में बारिश और बाढ़ के चलते इसका बीमार होना सही नहीं है। Delhi Flood</p>
<p style="text-align:justify;">बदले परिप्रेक्ष्य और दृष्टिकोण के अन्तर्गत यह समझने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए कि शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, सुरक्षा समेत अनेक बुनियादी व समावेशी विकास के निहित अर्थों में बाढ़ से बचाव भी शामिल है। बाढ़ और बारिश से जान-माल की हानि को कम करना, आवागमन को सुचारू बनाए रखना तथा जीवन को पटरी से उतरने से रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में दिल्ली हो या देश का कोई भी शहर हवा में काम करने के बजाये जमीन पर उतर कर अपने शहर को समझना, उसके अनेक प्रबंधन को उसी जमीन पर उतारना ताकि नौबत कुछ भी आ जाये बारिश कितनी भी हो बाढ़ से बचा जा सके। हालांकि यह काम कठिन है मगर नामुमकिन नहीं है। सबके बाद दो टूक यह कि इसकी शुरूआत सबसे पहले दिल्ली से ही होनी चाहिए। Delhi Flood</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं प्रशासनिक चिंतक (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2023 15:22:56 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली: हर जगह पानी-पानी! भारी बारिश से बिगड़े हालात, राजनीति शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में आई बाढ़ के पीछे भाजपा और मोदी सरकार की गहरी साजिश : संजय सिंह नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। आम आदमी पार्टी (आप) ने यमुना का जल स्तर बढ़ने से दिल्ली में पैदा हुए बाढ़ के हालात के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मोदी सरकार (Modi Sarkar) की गहरी साजिश करार दिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bjp-and-modi-government-deep-conspiracy-behind-flood-in-delhi-sanjay-singh/article-50013"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/delhi-flood1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">दिल्ली में आई बाढ़ के पीछे भाजपा और मोदी सरकार की गहरी साजिश : संजय सिंह</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आम आदमी पार्टी (आप) ने यमुना का जल स्तर बढ़ने से दिल्ली में पैदा हुए बाढ़ के हालात के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मोदी सरकार (Modi Sarkar) की गहरी साजिश करार दिया है। ‘आप’ के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आज कहा कि दिल्ली में आई बाढ़ भाजपा और केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित थी। इसका मकसद दिल्ली को बर्बाद करना था। दिल्ली में तीन दिनों से बारिश नहीं हुई है, फिर भी यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, क्योंकि हथिनी कुंड से सारा पानी दिल्ली की ओर यमुना में छोड़ा गया। ऐसी स्थिति में हथिनी कुंड से उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की तरफ बराबर पानी छोड़ा जाता है लेकिन केंद्र सरकार ने नफरत और दुर्भावना के चलते नौ से 13 जुलाई तक सारा पानी दिल्ली की ओर छोड़ा गया। Delhi Flood</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘दिल्ली के अंदर बिना बारिश के जो बाढ़ आई है, यह एक प्रायोजित की हुई आपदा है यह प्राकृतिक आपदा नहीं है। इस बात को हम पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं। ऐसे समय में जब हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लोग बाढ़ की तबाही झेल रहे हैं, देश के प्रधानमंत्री भारत छोड़कर फ्रांस की सैर पर निकल गए हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं, मगर कम से कम उन्हें जाते अपनी पार्टी के लोगों को समझाकर जाना चाहिए था कि ऐसी परिस्थिति में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। मगर ये लोग तो अभी भी वही घटियां राजनीति करने में लगे हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;">सांसद संजय सिंह ने कहा कि आखिर भाजपा के लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं? दिल्ली के लोगों ने तो इनके सात सांसदों को जिताया है। बेहतर यह होता कि सातों सांसद हरियाणा की सरकार और प्रधानमंत्री से अपील करते कि पानी को सभी जगह बराबर छोड़ा जाए। सारा पानी दिल्ली की तरफ क्यों छोड़ रहे हैं? अगर बराबर पानी छोड़ते तो इतनी भयावह स्थिति नहीं पैदा होती। आपदा प्रबंधन के लोग आपस में बातचीत करते और पानी का फैलाव बराबर होता, तो शायद यह बाढ़ की स्थिति न ही दिल्ली को झेलनी पड़ती और न उत्तर प्रदेश और हरियाणा को झेलनी पड़ती। Delhi Flood</p>
<p style="text-align:justify;">‘आप’ की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा, ‘पिछले तीन दिनों से दिल्ली में बारिश नहीं हुई है। आज हम दिल्ली में यमुना के निचले इलाकों में जो बाढ़ देख रहे हैं, वह भाजपा द्वारा ‘मैन मेड’ बाढ़ है। केंद्र सरकार ने पूरी मंशा से ये सुनिश्चित किया कि हथिनी कुंड बैराज का पूरा पानी हरियाणा से दिल्ली आए। उन्होंने कहा,ह्ल हमारे सभी मंत्री, विधायक, पार्षद, निगम के महापौर मैदान में उतरकर प्रभावित लोगों की मदद में जुटे हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल स्वयं पहले दिन से ही लगातार स्थिति पर पैनी नजर रखे हैं और वे विभिन्न इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। हम हर तरह से स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वायु सेना ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 146 लोगों को बचाया | Delhi Flood</h3>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वायुसेना का राहत और बचाव अभियान जारी है और इस अभियान में पिछले 48 घंटों में वायुसेना के विमानों ने 40 उड़ानें भरी है और 126 लोगों को बचाया है। वायुसेना, पिछले कुछ दिनों से हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चला रही है। पिछले 48 घंटों में वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों की कुल 40 उड़ानें भरी गईं, जिनमें 126 लोगों को बचाया गया है और विभिन्न इलाकों में 17 टन राहत सामग्री वितरित की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 24 घंटों में हरियाणा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के बड़े अभियान चलाए गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों निहारा, अलाउदीन माजरा, बिशनगढ़, सेगटा, भुन्नी, मुमनी, सेगटी और जनसुई गांवों को एम-17 हेलिकॉप्टरों द्वारा राशन, तिरपाल, चादरें, ताजा भोजन और पानी की बोतलें सहित राहत सामग्री पहुंचाई गई। इस अभियान के लिए वायु सेना के अधिकारी तथा जवान और एम-17 और चीनूक हेलिकॉप्टर, एएन-32 और सी-130 परिवहन विमान आदि जरूरी संचालन और राहत उपायों के लिए तैयार हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने बाढ़ प्रभावित हिमाचल के लिए 180 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की</h3>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बाढ़ प्रभावित हिमाचल प्रदेश के लिए राज्य आपदा मोचन कोष से केंद्रीय हिस्से की दूसरी किस्त के रूप में वर्ष 2023-24 के लिए 180.40 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी करने को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार को इस राशि से मौजूदा मॉनसून मौसम के दौरान प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी।केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में हाल ही में अचानक आई बाढ़ और बादल फटने तथा भूस्खलन के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार को सभी आवश्यक रसद और वित्तीय सहायता प्रदान की है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 11 टीमें बचाव अभियान के लिए बचाव नौकाओं और अन्य आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात की गई है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सशस्त्र बलों की भी मदद ली जा रही है। इसके लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों और स्थिति का मौके पर आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम का भी गठन किया है। यह तीन 17 जुलाई को अपना दौरा शुरू करेगा। केंद्र सरकार पहले ही वर्ष 2023-24 के दौरान 27 राज्यों को एसडीआरएफ के केंद्रीय हिस्से के रूप में 10,031.20 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 11:00:25 +0530</pubDate>
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                <title>बाढ़, अब दिल्ली से भी संपर्क टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[पहले अम्बाला व चंडीगढ़ के लिए बंद हुई थी बस सेवा | Delhi Flood हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। कहर बनकर बरसी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वजह से हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश व देश की राजधानी दिल्ली में जलभराव (Waterlogging) होने के कारण हरियाणा के लोगों का चंडीगढ़ के बाद अब दिल्ली से भी संपर्क टूट गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/due-to-waterlogging-in-delhi-the-people-of-haryana-have-also-lost-contact-with-delhi/article-49950"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/delhi-flood.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पहले अम्बाला व चंडीगढ़ के लिए बंद हुई थी बस सेवा | Delhi Flood</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)।</strong> कहर बनकर बरसी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वजह से हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश व देश की राजधानी दिल्ली में जलभराव (Waterlogging) होने के कारण हरियाणा के लोगों का चंडीगढ़ के बाद अब दिल्ली से भी संपर्क टूट गया है। दिल्ली के आईएसबीटी में ज्यादा पानी भरने के कारण बसें अंदर नहीं जा पा रही वहीं पानीपत की तरफ से एंट्री करने वाली बसों को सड़कों पर पानी जमा होने के कारण रेंग-रेंग कर चलना पड़ता है। इसी वजह से दिल्ली के लिए हरियाणा रोडवेज की बसें फिलहाल बंद की गई है। इससे पहले हिसार डिपो से अंबाला व चंडीगढ़ के बीच चलने वाली हरियाणा रोडवेज की 16 बसों को स्थगित किया गया था। Delhi Flood</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर के बीच चलने वाले हरियाणा रोडवेज की बसों को अभी फिलहाल स्थगित किया गया है। जो कि हिमाचल प्रदेश में जम्मू कश्मीर में लैंडस्लाइडिंग की वजह से अधिकतर सड़क मार्ग बंद चल रहे हैं। इसी वजह से बसों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अगले निर्णय तक इन सभी स्थानों पर बसें बंद रहेगी। दूसरी ओर अंबाला-चंडीगढ़ के बीच वीरवार को राहत के तौर पर हरियाणा रोडवेज की कुछ बसें चलाई गई है। क्योंकि अब चंडीगढ़ की सड़कों से पानी कम हो गया है। हरियाणा रोडवेज की बसें चंडीगढ़ दिल्ली,हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर के लिए बंद होने के बाद निजी वाहन चांदी कूटने नजर आ रहे हैं। बस अड्डे के बाहर सवारी भी निजी वाहनों को ढूंढ रहे हैं। विभिन्न प्रकार के बनाए गए निजी ऐप के माध्यम से भी लोग अपनी गाड़ी बुक कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रेल सेवा पर भी असर | Delhi Flood</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल, प्रदेश व दिल्ली में जलभराव का असर भारतीय रेल सेवा पर भी पड़ा है। दिल्ली से जम्मू की ओर जम्मू से दिल्ली व हिसार की ओर चलने वाली लगभग ट्रेनें इन दिनों स्थगित चल रही है। जम्मू से हिसार की तरफ आने वाली कुछ ट्रेनों का वाया अमृतसर रूट डायवर्ट किया गया है। यहां से आने वाले यात्रियों को वाया अमृतसर-लुधियाना होते हुए हिसार आना पड़ रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश भी नहीं जा सकेंगी बसें</h3>
<p style="text-align:justify;">हरिद्वार सहित संपूर्ण उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के चलते व कावड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा के पानीपत बस अड्डे से हरियाणा रोडवेज की बसों के कैराना,शामली,कांधला,बिजनौर, मुजफ्फरनगर, नजीबाबाद, कोटद्वार, रुद्रपुर, मुरादाबाद, बरेली, अमरोहा, गजरौला, हल्द्वानी, काठगोदाम व बदायु रूट के लिए भी हरियाणा रोडवेज की 40 से अधिक बसों के चक्कर अस्थाई तौर पर बंद किए गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार ने के हरियाणा के सभी बॉर्डर सील | Delhi Flood</h3>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी हरियाणा से जुड़ने वाले सभी बॉर्डर्स को सील कर दिया है। करनाल, पानीपत से आने वाली बसों को सुबह ही कुंडली बॉर्डर तक इंटर करने गया था। वहीं डबवाली, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, रोहतक की ओर से दिल्ली आईएसबीटी की तरफ जाने वाली बसों को करनाल बाईपास से ही वापस लौटना पड़ा। दिल्ली सरकार के इस निर्णय से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके तुरंत बाद हरियाणा रोडवेज ने भी दिल्ली के लिए फिलहाल सभी बसों को स्थगित कर दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="SFI: छात्र-छात्राओं ने किया प्राचार्य का घेराव" href="http://10.0.0.122:1245/students-gheraoed-the-principal/">SFI: छात्र-छात्राओं ने किया प्राचार्य का घेराव</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2023 17:52:44 +0530</pubDate>
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