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                <title>Chandrayaan-3 Updates - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Chandrayaan-3 Updates RSS Feed</description>
                
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                <title>Chandrayaan-3 moon landing: चांद पर कदम, ऐतिहासिक उपलब्धि!</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3 moon landing: चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतर चुका है। अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत जैसे विकासशील देश के लिए चंद्रमा पर पहुंचना एक ऐतिहासिक और अद्भुत उपलब्धि है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। मात्र 20 वर्षों में चंद्रयान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/step-on-the-moon-historic-achievement/article-51568"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-31.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 moon landing: चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतर चुका है। अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत जैसे विकासशील देश के लिए चंद्रमा पर पहुंचना एक ऐतिहासिक और अद्भुत उपलब्धि है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। मात्र 20 वर्षों में चंद्रयान की सफलता भारत की प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता को साबित करती है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में वैज्ञानिकों की कोई कमी नहीं है। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग में पूरी विशेषज्ञता प्राप्त कर ली है। इससे पूर्व भी भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व भर के विभिन्न देशों के विकास के लिए काम किया है। एक विकासशील देश के लिए धन जुटाने के साथ-साथ प्रतिभाओं को अवसर देना कठिन होता है। चंद्रयान-3 की उपलब्धि के बाद भारतीय वैज्ञानिकों व इसरों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल गए हैं। पहले ही इसरो के माध्यम से कई देश अपने सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ चुके हैं, जिससे भारत को आर्थिक रुप से योगदान मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले लंबे समय से अमेरिका का अंतरिक्ष जांच केंद्र नासा विश्व भर के लिए आर्कषण का केंद्र बना हुआ है, लेकिन अब इसरो भी दुनिया के मानचित्र पर आ गया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि अब इसरो एक पर्यटन स्थल भी बन जाएगा। सभी वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं, जिनकी मेहनत और समर्पण रंग लाया है। इसरो को अगली परियोजनाओं के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए ताकि वैज्ञानिक आगामी नई खोजों को सफलतापूर्वक कर सकें। एक समय था जब इसरो के रॉकेटों पहुंचाने के लिए बैल गाड़ियों का प्रयोग किया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के पास सीमित वित्तीय संसाधन थे। फिर भी इसरो ने प्रगति की और चंद्रमा तक पहुंच गया। यह भी बड़ी बात है कि चन्द्रयान-2 भी नाकामी के बावजूद वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी और मेहनत को जारी रखा। रूस जैसे देश की लूना-25 चंद्र परियोजना की विफलता के बावजूद इसरो के वैज्ञानिकों के हौंसले बुलंद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम यह भी साबित करता है कि आत्मविश्वास और साहस बहुत महत्वपूर्ण है, यदि कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया जाए तो प्रगति निश्चित है। यह भी आवश्यक है कि प्रकृति की गहराई को समझने के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। प्रकृति के वरदान को अवश्य खोजा जाए, लेकिन प्रकृति के चक्र को भी साथ-साथ बरकरार रखा जाए। यह विश्व के अन्य ताकतवर देशों के लिए भी आवश्यक है कि प्रकृति के साथ रिश्ता मित्रता व सद्भावना भरा हो। Chandrayaan-3 moon landing</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Brinjal side effects: इन बीमारियों ने कर रखा है अगर शरीर में घर तो इस सब्जी का सेवन जरा सभंलकर कर" href="http://10.0.0.122:1245/brinjal-side-effects/">Brinjal side effects: इन बीमारियों ने कर रखा है अगर शरीर में घर तो इस सब्जी का सेवन जरा सभंलकर कर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 13:06:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>chandrayaan-3 mission: अंतरिक्ष: बढ़ते कदम और प्रकट होती संभावनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[chandrayaan-3 mission: विगत 14 जुलाई को चंद्रयान-3 मिशन के रूप में भारत ने चंद्रमा की ओर एक नई यात्रा की शुरुआत की। इससे पहले भी वर्ष 2008 एवं वर्ष 2019 में क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय चंद्रयान मिशन के द्वारा भारत ने संपूर्ण विश्व को यह बता दिया कि अब हमारे कदमों में भी चांद तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/space-growing-steps-and-possibilities/article-51442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-31.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">chandrayaan-3 mission: विगत 14 जुलाई को चंद्रयान-3 मिशन के रूप में भारत ने चंद्रमा की ओर एक नई यात्रा की शुरुआत की। इससे पहले भी वर्ष 2008 एवं वर्ष 2019 में क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय चंद्रयान मिशन के द्वारा भारत ने संपूर्ण विश्व को यह बता दिया कि अब हमारे कदमों में भी चांद तक का सफर तय करने का सामर्थ्य आ चुका है। चंद्रयान-1 मिशन के द्वारा एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी प्रकाश में आई थी कि चांद पर कभी पानी मौजूद था।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-2 दुर्भाग्यवश लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया एवं मिशन अपूर्ण रह गया। इस अधूरे मिशन का बीड़ा उठाते हुए चंद्रयान-3 ने चांद की ओर उड़ान भरी है। यहां पर एक बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-1 से हमें चंद्रमा के विषय में जानकारी तो मिली किंतु उस मिशन में चंद्रमा की सतह से सूचनाएं एकत्र करने का तरीका चंद्रयान-2 एवं चंद्रयान-3 से सर्वथा भिन्न था। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-1 मिशन में एक उपकरण मून इंपैक्ट प्रोब को चांद के दक्षिणी हिस्से पर गिराया गया था जबकि चंद्रयान-3 में चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग होनी है। यह व्यवस्था चंद्रयान-2 में भी थी किंतु लैंडिंग करते वक्त रोवर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चंद्रयान-3 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। सॉफ्ट लैंडिंग सफल होते ही भारत भी अमेरिका, रूस एवं चीन के बाद चांद पर लैंडर उतारने वाला विश्व का चौथा देश बन जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मिशन के साथ एक खास बात यह है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर रवाना होने वाला यह विश्व का प्रथम मिशन है। लेकिन हमारा मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने वाला विश्व का प्रथम मिशन बन पाएगा अथवा नहीं, इस विषय में पूर्ण निश्चितता के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता। इसका कारण यह है कि रूस ने भी 11 अगस्त को अपना मून मिशन लूना-25 लांच किया है। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि चंद्रयान-3 की तुलना में लूना-25 बेहद शक्तिशाली प्रक्षेपण रॉकेट से सम्बद्ध है जिस वजह से लूना-25 को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार करके चंद्रमा की कक्षा में स्थापित होने में महज एक सप्ताह का समय लगा, जबकि चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चांद की आॅर्बिट पकड़ने में 22 दिन का समय लग गया। यहां पर उल्लेखनीय है कि निस्संदेह भारत के द्वारा चंद्रमिशन हेतु अथक परिश्रम करते हुए एक अच्छा खासा समय खर्च किया गया। किंतु तकनीक के मामले में अभी हम कहीं न कहीं रूस के मुकाबले पीछे खड़े हैं। तकनीक का यह अंतर लूना-25 एवं चंद्रयान-3 की तुलना करते हुए स्पष्ट दिखाई पड़ता है। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">जैसा कि सर्वविदित है कि पृथ्वी से चांद तक की यात्रा में चंद्रयान-3 के लिए चालीस दिन का समय निर्धारित है जबकि लूना-25 के द्वारा यही यात्रा दस दिन में पूरी कर ली जाएगी। वजह यह है कि लूना-25 अपनी यात्रा हेतु एक बेहद शक्तिशाली रॉकेट सोयुज पर सवार है जबकि चंद्रयान-3 के साथ इतनी क्षमतायुक्त व्यवस्था नहीं है। रूस के पास मौजूद प्रक्षेपण रॉकेट इस हद तक सक्षम है कि उसके चंद्रमिशन को चंद्रमा तक पहुंचाने के लिए इतनी ऊर्जा व संवेग प्राप्त हो जाता है कि वह सीधे मार्ग का अनुसरण करते हुए चंद्रमा की कक्षा में स्थापित हो सकता है। दूसरी ओर भारत के स्पेसक्राफ्ट को स्लिंग शॉट तकनीक के जरिए चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया जाता है। इसे हम एक व्यावहारिक उदाहरण से समझ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि एक पत्थर को किसी डोरी से बांधकर उसे बंद पथ में बार-बार घुमाना एवं प्रत्येक घुमाव के बाद पथ को बड़ा करते हुए अंत में उसे लक्ष्य की ओर छोड़ देना। इस प्रक्रिया में पत्थर अभिकेंद्र बल का सहारा लेते हुए ऊर्जा प्राप्त करता है और धीरे-धीरे उसकी कक्षा बड़ी होती जाती है। चंद्रयान-3 में भी पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से जनित अभिकेंद्र बल का उपयोग करते हुए उसे उत्तरोत्तर बड़े आकार की अर्थ आर्बिट में घुमाया गया एवं अंत में उसे पर्याप्त ऊर्जा देकर पृथ्वी से पलायन कराते हुए चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया। दूसरा विकल्प यह होता है कि पृथ्वी के चक्कर कम काटने पड़ें एवं सीधा चंद्रमा की कक्षा में प्रविष्ट हुआ जाए, जोकि तभी संभव है जबकि प्रक्षेपणयान पर्याप्त शक्तिशाली हो। फिलहाल हमारी रॉकेट तकनीक इतनी उन्नत दशा में नहीं है, लिहाजा हम लंबे व घुमावदार मार्ग का अनुसरण करने के लिए बाध्य हैं। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल लैंडिंग चाहे चंद्रयान-3 की पहले हो अथवा लूना-25 की, दोनों के साथ अनेक लक्ष्य एवं स्वप्न जुड़े हुए हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा जोकि भौगोलिक रूप से विषमतापूर्ण एवं अद्भुत क्षेत्र है। सूर्य की रोशनी सीधे पड़ने के कारण यहां का तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है। चांद की सतह पर रोवर प्रज्ञान चौदह दिन तक अपना अनुसंधान कार्य करेगा जबकि लूना-25 मिशन की अवधि एक वर्ष है। जैसा कि चंद्रयान-1 मिशन से जानकारी मिली थी कि चंद्रमा पर कभी पानी की मौजूदगी थी। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">इस तथ्य की सत्यता की जांच हेतु चंद्रयान-3 चंद्रमा पर मौजूद गड्ढों एवं चट्टानों को बारीकी से परखकर यह बताने का प्रयास करेगा कि चांद पर बर्फ या पानी की उपस्थिति की बात कितने फीसदी सच है। इसके अतिरिक्त एक अन्य बेहद महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि चंद्रमा पर हीलियम-3 की उपस्थिति की अपार संभावनाएं हैं। हीलियम-3 ऊर्जा का एक असीमित व अतुलनीय स्रोत है। यदि किसी प्रकार भविष्य में हीलियम-3 को चंद्रमा से पृथ्वी तक लाना संभव हो सका, तो संपूर्ण विश्व की ऊर्जा आवश्यकता हेतु एक उत्तम आपूर्तिस्रोत उपलब्ध हो जाएगा। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रमा पर पृथ्वी से 100 गुना ज्यादा हीलियम-3 विद्यमान है। मैग्नीशियम, सिलिकॉन, पोटेशियम, कैल्शियम, टाइटेनियम, आयरन, अल्युमिनियम जैसी धातुओं एवं अन्य बहुमूल्य खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना भी चंद्रयान-3 के उद्देश्यों में शामिल है। कुल मिलाकर यह मिशन हमारे लिए भविष्य की एक आशाकिरण है। इसकी सफलता निश्चित रूप से भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विस्तार एवं विश्वपटल पर भारत के कद की बढ़त के द्वार खोलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर की एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार अब वह दिन दूर नहीं है जब अंतरिक्ष की सैर एक लोकप्रिय पर्यटन हो जाएगा। धरती की यात्रा वास्तव में समय तालिका के पैमाने पर बहुत छोटी हो चुकी है क्योंकि परिवहन के साधनों ने विकास के उन्नतोन्नत आयामों को स्पर्श कर लिया है। यद्यपि अंतरिक्ष पर्यटन का सपना साकार होने में कई दशक लगेंगे किन्तु इसमें कोई दो राय नहीं है कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए चांद व मंगल की सैर एक आम बात होगी। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:right;"><strong>शिशिर शुक्ला, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="RBI New Rule: आरबीआई का नया नियम…मुश्किलें बढ़ने के साथ बढ़ सकती है ईएमआई भी!" href="http://10.0.0.122:1245/rbis-new-rule-emi-may-also-increase-as-difficulties-increase/">RBI New Rule: आरबीआई का नया नियम…मुश्किलें बढ़ने के साथ बढ़ सकती है ईएमआई भी!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 13:00:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Moon Landing Update: लैंडर आज होगा चंद्रमा के और नजदीक, 23 अगस्त को करेगा लैंडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Chandrayaan 3 Moon Landing Update: इसरो ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि शुक्रवार शाम को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर को निचली कक्षा में पहुंचाया जाएगा, इसके लिए स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार धीमी करनी होगी, जोकि 20 अगस्त को भी होगी। इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी केवल 30 किमी रह जाएगी। दूरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lander-will-be-closer-to-the-moon-today/article-51330"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Chandrayaan 3 Moon Landing Update: इसरो ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि शुक्रवार शाम को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर को निचली कक्षा में पहुंचाया जाएगा, इसके लिए स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार धीमी करनी होगी, जोकि 20 अगस्त को भी होगी। इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी केवल 30 किमी रह जाएगी। दूरी सबसे कम होने के कारण 23 अगस्त को ही शाम को सॉफ्ट लैंडिंग होगी। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के अनुसार चंद्रयान-3 का प्रोपल्शन मॉड्यूल लैंडर-रोवर से अलग किया गया था। इस बीच लैंडर ने प्रोपल्शन मॉड्यूल से कहा- ‘थैक्स फॉर द राइड मेट’। प्रोपल्शन मॉड्यूल वर्तमान कक्षा में रहकर धरती से आने वाले रेडिएशन्स का महीनों या वर्षों तक अध्ययन कर सकता है। जबकि प्रोपल्शन मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल का स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन करने और पृथ्वी पर बादलों से ध्रुवीकरण से भिन्नता मापने के लिए 14 दिन तक पानी की खोज सहित अन्य प्रयोग करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी जानकारी के लिए बताया जा रहा है कि चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर, रोवर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल शामिल हैं। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर 14 दिनों तक प्रयोग करेंगे। वहीं प्रॉपल्शन मॉड्लूय चांद की कक्षा में ही रहकर चांद की सतह से आने वाले रेडिएशंस का अध्ययन करेगा। इस मिशन के जरिए इसरो चांद की सतह पर यह भी जानेगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Zero Shadow Day 2023: जब परछाई भी छोड़ गई साथ, जानिए कैसे बनते हैं ऐसे हालात?" href="http://10.0.0.122:1245/when-even-the-shadow-left-you-know-how-such-situations-happen/">Zero Shadow Day 2023: जब परछाई भी छोड़ गई साथ, जानिए कैसे बनते हैं ऐसे हालात?</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2023 15:01:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रयान-3 पर आया बड़ा अपडेट, जल्दी देखें &amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई (एजेंसी)। चंद्रमा को फतह करने निकले चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) ने गुरूवार को अपने मिशन का एक और बेहद अहम पड़ाव पार कर लिया जिसमें विक्रम लैंडर मॉड्यूल, प्रॉपल्शन मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग होकर आगे की यात्रा पर रवाना हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) के अनुसार अब लैंडर रोवर को लेकर आगे की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-crossed-a-very-important-milestone/article-51299"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-launch.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई (एजेंसी)।</strong> चंद्रमा को फतह करने निकले चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) ने गुरूवार को अपने मिशन का एक और बेहद अहम पड़ाव पार कर लिया जिसमें विक्रम लैंडर मॉड्यूल, प्रॉपल्शन मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग होकर आगे की यात्रा पर रवाना हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) के अनुसार अब लैंडर रोवर को लेकर आगे की यात्रा अकेले तय करेगा और इसके 23 अगस्त शाम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर उतरने का कार्यक्रम है। इसके लिए सभी अभ्यास पूरे कर लिये गये हैं। इसरो के अनुसार इस चरण के सफलतापूर्वक पूरा होने का मतलब है कि चंद्रयान-3 की सभी प्रणालियां सही तरीके से काम कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान 3 (Chandrayaan-3) का प्रक्षेपण 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से किया गया था। चंद्रमा की सहत पर उतरने के बाद लैंडर से रोवर बाहर निकलेगा और मिशन के उद्देश्यों को पूरा करेगा। इस मिशन के सफल होने के बाद भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जायेगा। अभी तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही यह उपलब्धि हासिल की है। चंद्रयान 3 ने पिछले तीन हफ्तों में कई चरणों का पार कर चांद की अलग अलग कक्षाओं में प्रवेश करते हुए इस महत्वपूर्ण चरण को पूरा किया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Monsoon Update: जयपुर में रुक-रुककर हो रही बरसात" href="http://10.0.0.122:1245/intermittent-rain-in-jaipur/">Monsoon Update: जयपुर में रुक-रुककर हो रही बरसात</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 15:56:25 +0530</pubDate>
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                <title>चांद पर लूना से पहले Chandrayaan-3 करने जा रहा धमाका!</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3 Updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के अज्ञात क्षेत्र में खोज करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रयान 3 मिशन का उद्देश्य चंद्र परिदृश्य के बारे में हमारी समझ का विस्तार करना है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि यह इस दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र को छूने वाला पहला अंतरिक्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-is-going-to-explode-before-luna-on-the-moon/article-51111"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 Updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के अज्ञात क्षेत्र में खोज करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रयान 3 मिशन का उद्देश्य चंद्र परिदृश्य के बारे में हमारी समझ का विस्तार करना है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि यह इस दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र को छूने वाला पहला अंतरिक्ष यान है। अपने विशेष उपकरणों की श्रृंखला के साथ, चंद्रयान 3 का लक्ष्य पृथ्वी के 14 दिनों की अवधि में प्रयोगों की एक श्रृंखला आयोजित करके सतह के नीचे छिपे रहस्यों को उजागर करना है। लेकिन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक कोई दूसरा देश क्यों नहीं उतरा? इसरो के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है? यहां सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/tricolour-hoisting-rules/">Tiranga Hoisting: घर पर तिरंगा फहराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियम</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">चंद्रयान-3: अज्ञात की खोज | Chandrayaan-3</h3>
<p style="text-align:justify;">चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र लंबे समय से वैज्ञानिकों को अपनी रहस्यमय प्रकृति से मोहित करते रहे हैं। पृथ्वी से निकटता के बावजूद, ये क्षेत्र अपनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण अपेक्षाकृत अछूते रहे हैं। हालाँकि, पिछले आॅर्बिटर मिशनों की अंतर्दृष्टि ने जिज्ञासा बढ़ा दी है, जो दक्षिणी ध्रुव में ज्ञान के संभावित समुद्र की ओर इशारा करती है। 2008 में भारत के चंद्रयान-1 मिशन द्वारा गहरे गड्ढों के भीतर बर्फ के अणुओं की खोज ने आगे की खोज के लिए मंच तैयार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">2019 में नासा की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह उजागर किया गया था कि पानी, एक बार चंद्रमा पर स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों (पीएसआर) में प्रवेश करने के बाद, विस्तारित अवधि को सहन कर सकता है। रिपोर्ट में चंद्रमा को घेरने वाले रोबोटिक अंतरिक्ष यान लूनर रिकॉनिसेंस आॅर्बिटर (एलआरओ) पर स्थित डिवाइनर उपकरण के डेटा का संदर्भ दिया गया है। यह उपकरण पीएसआर सहित विभिन्न चंद्र क्षेत्रों में तापमान मापता है। निष्कर्षों से पता चला कि कुछ सतहें इतनी ठंडी स्थिति प्रदर्शित करती हैं कि चंद्रमा की सतह पर पानी स्थिर रूप से मौजूद रह सकता है। हालाँकि, चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग में तीन कारणों से अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है:</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अंधेरा और -230 डिग्री सेल्सियस की अत्यधिक ठंड।</li>
<li style="text-align:justify;">कम तापमान के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संचालन बाधित होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">सूर्य का प्रकाश चक्र: 14 दिन का प्रकाश, 14 दिन का अंधकार।</li>
<li style="text-align:justify;">सौरमंडल की उत्पत्ति का सुराग?</li>
<li style="text-align:justify;">जैसा कि चंद्रयान 3 चंद्रमा की सतह को खंगालता है, इस क्षेत्र की चट्टानें और मिट्टी प्रारंभिक सौर मंडल और इसे आकार देने वाली गतिशील प्रक्रियाओं के बारे में अमूल्य सुराग प्रदान कर सकती हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जैसा कि चंद्रयान 3 वहां जाने की तैयारी कर रहा है जहां पहले कोई अन्य यान नहीं गया है, वैज्ञानिक और अंतरिक्ष उत्साही यह जानने के लिए उत्साहित हैं कि चंद्रमा के रहस्यमय दक्षिणी ध्रुव में क्या है।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2023 12:56:39 +0530</pubDate>
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                <title>Chandrayaan-3 Updates: चांद के सफर पर रवाना हुआ Chandrayaan-3, जानें पल-पल की अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई। Chandrayaan 3 Launch Live Updates: भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का शुक्रवार अपराह्न दो बजकर 35 मिनट पर आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र श्रीहरिकोटा के शार रेंज से प्रक्षेपण किया गया। इसरो अध्यक्ष ने प्रक्षेपण को सफल बताते हुए इसरो परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। करीब 3900 किलोग्राम के इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-launch/article-49980"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/chandrayaan-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चेन्नई। Chandrayaan 3 Launch Live Updates: भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का शुक्रवार अपराह्न दो बजकर 35 मिनट पर आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र श्रीहरिकोटा के शार रेंज से प्रक्षेपण किया गया। इसरो अध्यक्ष ने प्रक्षेपण को सफल बताते हुए इसरो परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। करीब 3900 किलोग्राम के इस चन्द्रयान-3 के प्रक्षेपण के अवसर पर इसरो के वैज्ञानिकों के आलावा केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डा़ जितेन्द्र सिंह उपस्थित थे। मिशन तैयारी समीक्षा के बाद, प्रक्षेपण प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूरी दे दी जिसके बाद सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र (एसडीएससी केंद्र) में प्रतिष्ठित मिशन की उलटी गिनती गुरुवार को भारतीय समयानुसार दोपहर दो बजकर 35 मिनट 17 सेंकेड पर शुरू हुई। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के अनुसार 170 गुना 36500 किलोमीटर आकार की एलिप्टिक पार्किंग कक्षा में एकीकृत चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान मॉड्यूल को प्रक्षेपित करने के लिए संगठन के सबसे भारी रॉकेट लॉन्च वाहन मार्क -3 (एलवीएम 3-एम 4) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस 642 टन भार के साथ 43.5 मीटर लंबा प्रक्षेपण वाहन ने पूर्ण संतुलन के साथ आज दोपहर 2.35 बजे दूसरे लॉन्च पैड से धुएं और लपट छोड़ते हुए उड़ान भरी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह ट्विटर पर कई ट्वीट के माध्यम से जारी संदेश में कहा कि जहां तक ​​भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का सवाल है, 14 जुलाई 2023 हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा। चंद्रयान-3, हमारा तीसरा चंद्र मिशन, अपनी यात्रा शुरू करेगा। यह उल्लेखनीय मिशन हमारे देश की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा। मोदी ने चंद्रयान-3 मिशन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा, ‘मैं आप सभी से इस मिशन और अंतरिक्ष, विज्ञान और नवाचार में हमने जो प्रगति की है, उसके बारे में और अधिक जानने का आग्रह करता हूं। इससे आप सभी को बहुत गर्व महसूस होगा। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ के कल बताया था कि चंद्रमा पर सूर्योदय होने पर तिथि (उतरने की तिथि) तय की जाती है। जब हम उतर रहे हों तो सूर्य की रोशनी अवश्य होनी चाहिए। इसलिए लैंडिंग 23 या 24 अगस्त को होगी। उन्होंने कहा था कि यदि 23 या 24 अगस्त को योजना के अनुसार चन्द्रयान की लैंडिंग नहीं होती है, तो इसरो सितंबर में लैंडिंग का प्रयास करने के लिए एक और महीने तक इंतजार करेगा। लैंडर और रोवर सूर्य की रोशनी आने तक 14 दिनों तक चंद्रमा पर रहेंगे। जब सूर्य का प्रकाश नहीं होगा, तो रोवर पर लगा एक छोटा सौर पैनल बिजली उत्पन्न करेगा रोशनी आने तक अगले 14 दिनों के लिए बैटरी को चार्ज करें।’ Chandrayaan-3 Updates</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2023 15:33:45 +0530</pubDate>
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