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                <title>Fake GST - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Fake GST RSS Feed</description>
                
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                <title>GST Fraud: दिल्ली में 128 करोड़ के फर्जी GST रैकेट का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक बड़े फर्जी जीएसटी इनवॉइसिंग रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/fake-gst-racket-worth-rs-128-crore-busted-in-delhi/article-84934"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/new-delhi-news2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>New Delhi News: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक बड़े फर्जी जीएसटी इनवॉइसिंग रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस संगठित गिरोह के जरिए लगभग 128 करोड़ रुपए के फर्जी जीएसटी लेनदेन किए जाने का खुलासा हुआ है। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, इस मामले में 24 मार्च 2026 को एफआईआर संख्या 66/2026 दर्ज की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि एक अनजान व्यक्ति के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर सितंबर 2025 में मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी। पीड़ित को इस फर्म के अस्तित्व की जानकारी तक नहीं थी। इसी फर्म के माध्यम से 128 करोड़ रुपए से अधिक के लेनदेन किए गए और लगभग 10 करोड़ रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीकी निगरानी, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में यह सामने आया कि दिलीप कुमार और राज कुमार दीक्षित इस रैकेट के मुख्य साजिशकर्ता थे। इनके अलावा अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद ने भी फर्जी कंपनियों के संचालन, बैंक खातों की व्यवस्था और ऑनलाइन लेनदेन के जरिए इस नेटवर्क को चलाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर शेल कंपनियां बनाता था और उन्हें वास्तविक कारोबार के रूप में पेश करता था। इन कंपनियों के माध्यम से बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के फर्जी जीएसटी बिल तैयार किए जाते थे, बैंकिंग चैनलों के जरिए पैसे घुमाए जाते थे, नकद के बदले फर्जी एंट्री दी जाती थी और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईओडब्ल्यू की विभिन्न टीमों ने एसीपी वीरेंद्र कादयान के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर के कई स्थानों पर समन्वित छापेमारी कर 15 मई 2026 को सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें विधि अनुसार गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने 51.12 लाख रुपए नकद, फर्जी दस्तावेज और स्टांप, बड़ी संख्या में फर्जी इनवॉइस, 15 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, दो लैपटॉप और दो कारें बरामद की हैं। जांच में करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान भी की गई है, जिनका उपयोग इस रैकेट में किया जा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपियों में राज कुमार दीक्षित को इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसने करीब 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया था। अन्य आरोपी भी फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन, इनवॉइसिंग, बैंक खातों के संचालन और पैसों के लेनदेन में सक्रिय रूप से शामिल थे। फिलहाल पुलिस इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों और संबंधित संस्थाओं की पहचान करने में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/new-delhi-news2.jpg" alt="New Delhi News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 17:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>Fake GST: फर्जी जीएसटी पंजीयन, विभाग कस रहा शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राज्य में फर्जी जीएसटी (Fake GST) पंजीकरण और फर्जी आईटीसी को रोकने हेतु एक विशेष अभियान राष्ट्रीय स्तर पर दिनांक 16 मई 2023 से 15 जुलाई 2023 तक चलाया गया था। प्रदेश में अब तक जीएसटीएन/डीजीएआरएम द्वारा 1380 संदिग्ध पंजीकृत व्यवहारियों के नाम भेजे गए तथा स्थानीय स्तर पर 237 चिन्हित किए गए। कुल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/fake-gst-registration-the-department-is-tightening-the-noose/article-50166"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/gst1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> राज्य में फर्जी जीएसटी (Fake GST) पंजीकरण और फर्जी आईटीसी को रोकने हेतु एक विशेष अभियान राष्ट्रीय स्तर पर दिनांक 16 मई 2023 से 15 जुलाई 2023 तक चलाया गया था। प्रदेश में अब तक जीएसटीएन/डीजीएआरएम द्वारा 1380 संदिग्ध पंजीकृत व्यवहारियों के नाम भेजे गए तथा स्थानीय स्तर पर 237 चिन्हित किए गए। कुल 1617 जीएसटी नंबर में से 1606 की जांच की गई जिसमें से 290 व्यवसायी असत्यापित पाए गए। इन असत्यापित फर्मों में से ₹21330.68 लाख की आईटीसी शामिल होने की संभावना है। विभाग द्वारा अब तक 2620.76 लाख की आईटीसी ब्लॉक कर दी गई है। Fake GST</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा बोगस/ अस्तित्वहीन फर्मों के विरूद्ध कार्यवाही पूर्व में ही प्रारंभ कर दी गई थी। वाणिज्यिक कर विभाग राजस्थान के मुख्य आयुक्त श्री रवि कुमार सुरपुर ने बताया कि इस अभियान द्वारा फर्जी फर्मो पर लगातार राजस्व रिसाब रोकने में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल हुई है। Fake GST</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मुख्यमंत्री गहलोत ने कॉन्स्टेबल भर्ती जैसे लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय" href="http://10.0.0.122:1245/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%A8/">मुख्यमंत्री गहलोत ने कॉन्स्टेबल भर्ती जैसे लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2023 18:52:46 +0530</pubDate>
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