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                <title>सबको मिलकर अर्थव्यवस्था को गति देने की जरूरत : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से न सिर्फ उस क्षेत्र में रोजगार और अन्य गतिविधियाँ बढ़ेगी बल्कि कई उद्योगों को भी गति मिलेगी। सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अगुवा की भूमिका निभा रही है और इंफ्रा में निवेश कर रही है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/everyone-needs-to-accelerate-the-economy-together-sitharaman/article-12889"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirmala-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के माध्यम से संपदा निर्माण पर जोर दिया गया है</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Nirmala Sitharaman)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वित्त मंत्री निमार्ला सीतारमण ने सबको मिलकर अर्थव्यवस्था को गति देने की आवश्यकता बताते हुये रविवार को कहा कि बजट के माध्यम से सरकार इसके लिए सुविधा प्रदाता और बुनियादी ढाँचों के माध्यम से संपदा निमार्ता की भूमिका निभा रही है। (Nirmala Sitharaman) श्रीमती सीतारमण ने शनिवार को वर्ष 2020-21 का बजट पेश करने के बाद आज यहाँ संवाददाताओं से कहा कि अर्थव्यवस्था को कोई एक जैसे सरकार, निजी क्षेत्र, विदेशी निवेश, कारोबारी या एमएसएमई गति प्रदान नहीं कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबको मिलकर इसके लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार ने अपने दायित्व को समझते हुये बजट के माध्यम से अर्थव्यवस्था को गति देने के मार्ग प्रशस्त किये हैं। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के माध्यम से संपदा निर्माण पर जोर दिया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से न सिर्फ उस क्षेत्र में रोजगार और अन्य गतिविधियाँ बढ़ेगी बल्कि कई उद्योगों को भी गति मिलेगी। सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अगुवा की भूमिका निभा रही है और इंफ्रा में निवेश कर रही है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बजट में घोषित कृषि रेल और कृषि उड़ान योजना का उल्लेख करते हुये कहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके माध्यम से जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादोें को तीव्रता से बाजार तक पहुँचने में मदद मिलेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही इस काम में लगे क्षेत्र में भी तेजी आयेगी।</li>
</ul>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 17:34:40 +0530</pubDate>
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                <title>समय प्रबन्धन अपनाना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. दीपक आचार्य संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के लिए हर काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/time-management-needs-to-be-adopted-2/article-3949"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/time.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> डॉ. दीपक आचार्य</strong></p>
<p style="text-align:justify;">संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के लिए हर काम की समयावधि निश्चित की हुई है। अलग-अलग प्रकार के लोग इनके संपादन में न्यूनाधिक समय लगाते हैं। कुछ लोग तय समय सीमा में काम कर गुजरते हैं और फिर मस्त रहते हैं। कुछ लोग धीरे-धीरे काम करने के आदी होते हैं और जैसे-तैसे काम को कर पाते हैं। बहुत से लोग पड़े-पड़े खाना-पीना और कमाना चाहते हैं और कोई काम नहीं करते। इनसे काम लेना ही बड़ा भारी काम होता है। ये लोग हमेशा अपनी ही मौज-मस्ती और मनोरंजन में रहना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके लिए न कार्यस्थल की साख और काम का कोई महत्व होता है और न ही समाज, अपने क्षेत्र या देश से कोई सरोकार। अपने क्षणिक भोग-विलास और आनंद के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं। इन खुदगर्जों को कभी कोई शर्म नहीं आती। जिन्दगी भर यह महा बेशर्म बने रहते हैं। तीसरे प्रकार के लोग सभी कामों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर सकते हैं मगर उनका समय प्रबन्धन इतना बिगड़ा हुआ होता है कि कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो पाता और इसके लिए इनके पास खूब सारे बहानों का अक्षय भण्डार होता है जिसका वे पूरा-पूरा उपयोग कर लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन लोगों की कार्यस्थलों, काम-धन्धे के स्थलों और दुकानों-कंपनियों में पर्याप्त समय मिलता है और इनकी पूरे कार्यसमय में नियमित बैठक भी होती है लेकिन दायित्व कर्म के समय ये दूसरे कामों, गप्पों और टाईमपास फालतू के लोगों के साथ बिताते हुए मनोरंजन की दुनिया में खोए रहते हैं अथवा अपनी बतरसिया और दुनिया भर की हलचलों को सुनने-जानने व देखने में भटक जाते हैं। इसलिए इनके काम समय पर नहीं हो पाते और विवश होकर दु:खी मन से अतिरिक्त समय निकालना पड़ता है और इसका मलाल रोज इन लोगों को होता भी है लेकिन आदत ही ऐसी पड़ जाती है कि इनका बस नहीं चल पाता और यही क्रम जिन्दगी भर चलता रहता है। इस श्रेणी के लोगों के पास पुराने से पुराने समय का अधूरा काम लम्बित पड़ा हुआ होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये लोग कभी पुराने कामों से मुक्ति पाने का अहसास कर ही नहीं पाते कि नए-नए काम इनके पास आते हुए पुराने कामों की सूची में शामिल हो जाया करते हैंं। हमारे इलाके में समाज-जीवन के सभी क्षेत्रों में ऐसे लोगों की भारी भीड़ विद्यमान है जो समय पर काम नहीं कर पाते। ऐसे लोग अपने निकम्मेपन की वजह से ढेर होते जा रहे लम्बित कामों की वजह से दबावों में जीने के आदी हो जाते हैं और ऐसे में तनावों का उनके साथ ऐसा संबंध स्थापित हो जाता है जो मरने तक साथ बना रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुराने कामों के बोझ से उत्पन्न तनावोें का ही परिणाम है कि ये लोग नए कामों को भी तय समय सीमा में नहीं कर पाते और इसी प्रकार उत्तरोत्तर इनका बोझ बढ़ता रहता है तो आने वाले समय में पहाड़ की तरह अड़िग रहकर इनके जीवन और कर्मयोग दोनों की राह में आड़े आ जाता है। बात सरकारी क्षेत्र की हो या निजी क्षेत्र की अथवा आधे-आधे सरकारी-गैर सरकारी क्षेत्र की। हर कहीं जमा है ऐसे लोगों की भीड़ जिनके लिए जीवन भर काम का बोझ बना रहता है और इस बोझ के मारे खुद तो परेशान रहते ही हैं, दूसरों के काम भी समय पर नहीं कर पाने की वजह से लोगों की बद्दुआओं के तीर भी इनके जिस्म में चुभते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे लोगों के कामों को देखा जाए तो उन्हें रोजाना इतना समय मिलता ही है कि ये आसानी से अपने रोजमर्रा के कामों को निपटा सकें लेकिन इनकी मानसिक शिथिलता और समय प्रबन्धन की कमी के कारण ये समय का पूरा उपयोग नहीें कर पाते और रोजाना कुढ़ते रहने के आदी हो जाते हैं। समय पर काम नहीं कर पाने वाले इन लोगों को पूछा जाए तो यही बहाना होता है कि काम बहुत है, क्या करें। जबकि उन्हीं की तरह दूसरे लोग भी हैं जिनके पास भी उतना ही काम होता है मगर वे उसी समय सीमा में पूरा कर लिया करते हैं जितना समय निर्धारित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सौंपी गई अवधि में काम नहीं कर पाने वाले लोग फिर अवकाशों के दिनों में या अतिरिक्त समय में अपने कार्यस्थलों में डटे रहने की विवशता या शौक से जुटे रहते हैं और उन सभी बहुमूल्य क्षणोें को यों ही बरबाद करते रहते हैं जो क्षण उन्हें मौज-शौक या घर-गृहस्थी और सामाजिक एवं उत्सवी आनंद के लिए हुआ करते हैंं। इन लोगों के परिवारजन भी इन्हें पसन्द करना छोड़ दिया करते हैं। यह तय मान कर चलना चाहिए कि जो लोग निर्धारित अवधि में सामान्य कार्य नहीं कर पाते हैं वे इस लायक हैं ही नहीं कि उन्हें ये काम सौंपे जाएं। इन लोगों को नालायक नहीं भी कहा जाए तो यह तो मानना ही चाहिए कि इन्हें कोई सा काम सौंपे जाने का अर्थ यही है कि कहीं न कहीं चूक उन लोगों से ही हुई है जिनके द्वारा इन्हें काम सौंपा गया है। वरना इनकी बजाय दूसरे लोग होते तो समय पर और इनसे ज्यादा अच्छा काम करते।</p>
<p style="text-align:justify;">जो जहां कहीं काम कर रहा है उसे चाहिए कि वह अपने कामों के लिए निर्धारित घण्टों का पूरा उपयोग करते हुए काम पूरा करे ताकि किसी भी क्षण अतिरिक्त समय की मांग की कल्पना उसके जेहन में कभी न आए। समय पर काम नहीं करने वालों और आलस्य बरतने वालों के लिए एक ही शब्द काफी है और वह है – दीर्घसूत्री। यह आलसी, प्रमादी, समय प्रबन्धन में विफल हो चुके नाकारा लोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो कि कभी कोई काम समय पर नहीं कर सकते।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jun 2018 23:18:36 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य एशिया में कजाखस्तान का साथ जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य एशियाई देश कजाखस्तान से रिश्तों को नई ऊचाईयां प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कजाखस्तान की यात्रा की। इससे पहले प्रधानमंत्री जुलाई 2015 में मध्य एशिया के चार देशों की यात्रा के दौरान मोदी कजाखस्तान गए थे। इस बार शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक के बहाने प्रधानमंत्री कजाखस्तान गए। कजाखस्तान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/kazakhstan-needs-to-be-in-central-asia/article-1232"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/modi-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य एशियाई देश कजाखस्तान से रिश्तों को नई ऊचाईयां प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कजाखस्तान की यात्रा की। इससे पहले प्रधानमंत्री जुलाई 2015 में मध्य एशिया के चार देशों की यात्रा के दौरान मोदी कजाखस्तान गए थे। इस बार शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक के बहाने प्रधानमंत्री कजाखस्तान गए। कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में 8-9 जून को संपन्न हुए एससीओ के शिखर सम्मेलन में भारत को इस क्षेत्रीय संगठन में पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कजाखस्तान मध्य एशिया का महवपूर्ण देश है और पारंपरिक रूप से भारत के साथ उसके रिश्ते बहुत अच्छे हैं। आज से अढ़ाई दशक पूर्व जब कजाखस्तान ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी, तब भारत ने रूस की नाराजगी की चिंता किए बिना कजाखस्तान की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। दूसरी और कजाख राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव ने भी भारत की भावना का सम्मान करते हुए वर्ष 1992 में राष्ट्रमंडल देशों को छोड़ कर भारत की यात्रा की। पिछले दो दशकों के दौरान दोनों देशों के आपसी संपर्क द्वीपक्षीय संबंधों से आगे बढ़ते हुए रणनीतिक भागदारी तक पहुंचे हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और कजाखस्तान दोनों ही क्षेत्रीय शांति, कनेक्टिविटी, समन्वय, यूएनओ सुरक्षा परिषद में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जैसे जरूरी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान राय रखते हैं। वतर्मान में दोनों देश व्यापार और अर्थव्यवस्था में सहयोग की नीति पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच लगभग 426 अमेरिकी डॉलर का सालाना व्यापार है, जोकि शेष मध्य एशियाई देशों के कुल व्यापार के आधे से अधिक है। दोनों ही इस बात को समझते हैं कि दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में अपने-अपने हितों को बनाये रखने के लिए आपसी सहयोग व समन्वय जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मध्य एशियाई देशों के अकूत प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना करना चाहता है, इसके लिए कजाखस्तान भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकता है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जुलाई 2015 में जब कजाखस्तान की यात्रा पर गए थे, उस वक्त दोनों देशों के बीच 5 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए रक्षा समझौता और यूरेनियम आपूर्ति का समझौता भी शामिल है। रक्षा सहयोग के क्षेत्र में हुए करार से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का दायरा और व्यापक हो गया है। इस समझौते के तहत दोनों देश सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण, सैन्य तकनीकी सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग व विशेष सुरक्षा बलों के अदला-बदली जैसी योजनाओं पर मिलकर काम कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रणनीतिक दृष्टि से भी कजाखस्तान भारत के लिए खासा महत्वपूर्ण हैं। रूस और अमेरिका के अलावा चीन की भी इस क्षेत्र में दिलचस्पी बढ़ी है। अब शंघाई सहयोग संघ का पूर्णकालिक सदस्य बन जाने के बाद भारत अपना कद और अपनी भूमिका इस क्षेत्र में बढ़ाना चाहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत उभरती हुई अर्थव्यवस्था और दक्षिण एशिया का मजबूत देश है। कजाखस्तान भी अपनी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भारत के सहयोग का इच्छुक है। वह चाहता है कि भारत उसके ढांचागत विकास में सहयोग करे। लेकिन तथ्य यह भी कि वह भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भी संपर्क साध रहा है। ऐसी स्थिति में भारत को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। ऐसा न हो की कजाखस्तान भारत की कीमत पर पाकिस्तान के साथ संबंधों को विकसित करने लगे। ऐसा होता है तो मध्य एशिया में भारत के प्रयासों को बड़ा झटका होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई संदेह नहीं की भारत और कजाखस्तान के बीच दीर्घअवधि के रणनीतिक और व्यापारिक संबंध है। फिर भी अभी कुछ क्षेत्र ऐसे है जिसमें सहयोग कर आपसी रिश्तों को और मजबूत किया जा सकता है। उदाहरण के लिए खनिज क्षेत्र को ले सकते हैं। दोनों देशों को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। कुल मिलाकर यह तय है कि दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के विकास का दारोमदार काफी हद तक भारत-कजाखस्तान के रिश्तों पर निर्भर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– एनके सोमानी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2017 23:29:58 +0530</pubDate>
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