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                <title>आस्ट्रेलिया की आग से सबक लेगी दुनिया?</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक ऊष्मण, बाढ़, सूखा जैसी समस्याएं वनों के ह्रास के कारण ही उत्पन्न हुई हैं।
मजे की बात यह है कि इसका समाधान भी पौधारोपण में ही छिपा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/will-the-world-learn-from-the-fire-of-australia/article-12567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/fire-of-australia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया पिछले पांच महीने से विकराल दावानल की चपेट में है। अत्यधिक गर्म मौसम, सूखे की स्थिति और तेज गति से बहती गर्म हवाओं ने दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित इस महाद्वीप की पारिस्थितिकी को तहस-नहस कर दिया है। न्यू साउथ वेल्स समेत आस्ट्रेलिया के कई इलाके अभी भी भीषण आग से प्रभावित हैं। जंगल की आग धीरे-धीरे मानव बस्ती की ओर बढ़ने लगी है, जिससे वहां के नागरिकों को परेशान होना पड़ा है। वहीं दूसरी तरफ, सुलगते जंगलों से उठकर वायुमंडल में मौत बनकर मंडराते धुएं ने वहां के निवासियों को हाँफने को विवश कर दिया है। आॅस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग का धुंआ अब ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना तक जा पहुंचा है, जिससे वहां की हवा में भी जहर घुलने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों आस्ट्रेलिया इतिहास के सबसे बड़े दावानल से जूझ रहा है। जंगली हिस्सों में दूर-दूर तक केवल तबाही के मंजर ही दिखाई दे रहे हैं। वहां के कई प्रांतों की बिजली गुल हो चुकी है। वहीं जलस्रोतों के सूखने के कारण पीने के पानी को लेकर लोगों में व्याकुलता बढ़ती जा रही है। इस भीषण आग में अब तक दो दर्जन से भी अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। जबकि दो हजार से भी अधिक घर उजड़ गये हैं। हालांकि पिछले दिनों बारिश होने से थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन हालात अब भी नियंत्रण से बाहर हैं। दूसरी तरफ सूखाग्रस्त इलाकों में पीने का पानी बचाने के लिए आॅस्ट्रेलिया में दस हजार ऊंटों को मारने का काम भी शुरू हो गया है। कितनी विडंबना की बात है कि आस्ट्रेलिया के प्रमुख जानवरों में एक रहे ऊंटों को सिर्फ इस तर्क के आधार पर मारा जा रहा है कि वे अधिक पानी पीते हैं!यह समझना कठिन है कि जिन ऊंटों को आस्ट्रेलिया में परिवहन की सुविधा हेतु ‘रेगिस्तान के जहाज’ के रूप में आयात किया जाता है, उसे ही अब मौत के घाट उतारा जा रहा है!</p>
<p style="text-align:justify;">जंगल की आग कितनी खतरनाक हो सकती है, इसे आस्ट्रेलिया के मौजूदा हालात से समझा जा सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दावानल की वजह से अब तक वहां एक अरब से भी अधिक जीव-जंतुओं की मौत हो चुकी है। जबकि, एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक वनों से आच्छादित भू-भाग आग से प्रभावित हुआ है। कोआला, कंगारू, वालाबी और पोसम जैसे तमाम जानवर, जिससे आस्ट्रेलिया की खूबसूरती बढ़ी है, उन पर भी यह आग आफत बनकर बरसी है। इधर घायल जानवरों की जो तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं, वह भी काफी विचलित करने वाली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आग में कई जानवर जलकर पूरी तरह राख तो गये, तो कई अधजले जीवित हैं। कई जानवर दौड़कर दूर तो भाग गये, लेकिन किसी के मुंह, पैर या शरीर का कोई हिस्सा जल गया। कई जानवरों के शरीर में छाले देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कई जानवर धुएं की वजह से दम घुटने से मर गये, तो कइयों ने आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होने की वजह से दम तोड़ दिया। कई अब भी जीवित हैं लेकिन कष्ट इतना है कि कहना मुश्किल है कि वे बचेंगे भी या नहीं!आग के बाद जानवरों और पौधों की कई प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इस आग में कई विशिष्ट प्रजातियां भी राख हो गईं। जहां कुछ समय पहले घने जंगल थे, वहां अब केवल राख और पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं। जाहिर है, ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहे विश्व को इसकी भरपाई करने में वर्षों लग जाएंगे!</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कमर कस रही दुनिया के समक्ष दावानल ने नई चुनौती खड़ी की है। हाल के वर्षों में दावानल की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे न सिर्फ तबाही का दायरा बढ़ा है, अपितु वनावरण में भी कमी आई है। गौरतलब है कि पिछले साल दक्षिण अमेरिका के अमेजन, इंडोनेशिया और अफ्रीका के जंगलों में जो आग लगी थी, उससे पारिस्थितिक तंत्र को गहरा आघात पहुंचा है। एक तरफ भारत जैसे देश में जंगल के क्षेत्रफल में वृद्धि हो रही है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में सफलता मिलती दिख रही है, तो वहीं दुनिया के दूसरे हिस्से में स्थित जंगलों में जब आग लगती है, तो पूरी दुनिया स्तब्ध और परेशान हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जंगल की आग की वजह से जंगल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो जाता है, जिससे पर्यावरण में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। प्रकृति में हो रही अनावश्यक हलचल के चलते प्राकृतिक आपदाएं पहले से कहीं अधिक सक्रिय हुई हैं, जिससे वैश्विक चिंताएं बढ़ी हैं। पारिस्थितिक तंत्र के विच्छेद होने का ही परिणाम है कि इन दिनों भारत हाड़ कपाने वाली सर्दी, आस्ट्रेलिया इतिहास के सबसे बड़े दावानल और इंडोनेशिया भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। अमेजन के घने जंगलों में 2018 की तुलना में पिछले साल आगलगी की घटनाओं में तीस फीसदी का इजाफा देखने को मिला था। आस्ट्रेलिया में अभी जो आग लगी है, उसके बारे में पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसी आग प्राकृतिक तौर पर प्रत्येक 350 साल में घटित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार इसका शिकार आस्ट्रेलिया हुआ है। हालांकि दावानल से निपटने को लेकर अंतर्राष्ट्रीय जगत का रवैया हतप्रभ करने वाला रहा है। वहीं जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक मंच पर एकजुटता का नहीं दिखना भी गंभीर विषय बन चुका है। गौरतलब है कि पिछले महीने ही स्पेन की राजधानी मैड्रिड में कॉप-25 के तहत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का जुटान हुआ था, लेकिन वह पूरी तरह निरर्थक रहा। अब तक का सबसे लंबी अवधि तक चले पर्यावरण सम्मेलन के बेनतीजा रहने से दुनियाभर में नाराजगी देखी गई। विडंबना है कि उस समय भी आस्ट्रेलिया में दावानल को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयास नहीं किए गए। जिसका दुखद परिणाम हम सब देख रहे हैं!</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चाई यह है कि पर्यावरण संबंधी अधिकांश समस्याओं की जड़ वनोन्मूलन ही है। वैश्विक ऊष्मण, बाढ़, सूखा जैसी समस्याएं वनों के ह्रास के कारण ही उत्पन्न हुई हैं। मजे की बात यह है कि इसका समाधान भी पौधारोपण में ही छिपा है। भारत में जन्मदिन के मौके पर लोगों से पौधे लगाने का आह्वान किया जाता रहा है, लेकिन शायद ही एक बड़ी आबादी इस पर जोर देती है!अगर वास्तव में एक खुशहाल विश्व बनाना है तो प्रकृति को सहेजने को लिए हम सबों को आने आना होगा। जो जंगल शेष हैं उनकी रक्षा करनी होगी। इसके अलावा पौधारोपण के लिए हरेक स्तर से प्रयास करने होंगे। आपदा प्रबंधन को लेकर आम नागरिकों को जागरूक करना होगा। प्राकृतिक संतुलन के लिए जंगलों का बचे रहना बेहद जरुरी है। पृथ्वी पर जीवन को खुशहाल बनाए रखने का एकमात्र उपाय पौधारोपण पर जोर देने तथा जंगलों के संरक्षण से जुड़ा है।<br />
<em><strong>-सुधीर कुमार</strong></em></p>
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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2020 21:01:12 +0530</pubDate>
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                <title>मोबाइल एप से सीखें खेती के गुर</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि से जुड़े हर सवाल का जवाब व मिलेंगे हर तरह के उपाय नई दिल्ली। देशभर में आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत खेती कर रहे हैं जबकि कई किसान ऐसे हैं जो खेती-किसानी की जानकारियों में अपडेट रहकर कृषि क्षेत्र में नई-नई कामयाबी हासिल कर रहे हैं। कोई गन्ने के साथ-साथ टमाटर की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/learn-from-mobile-app-farming-tricks/article-4688"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/mobile-app.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कृषि से जुड़े हर सवाल का जवाब व मिलेंगे हर तरह के उपाय</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> देशभर में आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत खेती कर रहे हैं जबकि कई किसान ऐसे हैं जो खेती-किसानी की जानकारियों में अपडेट रहकर कृषि क्षेत्र में नई-नई कामयाबी हासिल कर रहे हैं। कोई गन्ने के साथ-साथ टमाटर की खेती कर रहा है तो कोई छोटी मगर कमाल की मशीनों का अपने खेती में उपयोग कर कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ी बात यह है कि किसान आज तेजी से सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिये खेती-किसानी की जानकारी बटोर रहे हैं और उन्हें अपनी खेती में उपयोग कर मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं। आज हम किसानों को खेती-किसानी से जुड़े ऐसे कुछ मोबाइल एप के बारे में बताएंगे जो न सिर्फ उन्हें कृषि क्षेत्र की सही जानकारी देंगे, बल्कि खेती से जुड़े उनके सवालों का उपाय भी बताएंगे।</p>
<h1 style="text-align:center;">एम किसान मोबाइल एप</h1>
<p style="text-align:justify;">किसान भाईयों के लिए एम किसान मोबाइल एप बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। ऐसा कहना इसलिये है क्योंकि इस मोबाइल एप के जरिये किसान खेती-किसानी से जुड़े अपने किसी भी तरह के सवालों का जवाब किसान विशेषज्ञों से पा सकते हैं। किसान विशेषज्ञों की सही सलाह से किसान अपनी फसलों में बेहतर उत्पादन के साथ-साथ ज्यादा मुनाफा भी कमा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं, किसान इस एप के जरिये लाइव विशेषज्ञों से बात भी कर सकते हैं। किसानों के लिए इस मोबाइल एप को डैक पुणे की मदद से कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा विकसित किया गया है। यह मोबाइल एप किसान भाई एमकिसान पोर्टल पर पंजीकरण कर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा एककिसान इंडिया नाम से गूगल प्ले स्टोर से भी डाउनलोड किया जा सकता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">एग्री पोर्टल</h1>
<p style="text-align:justify;">इस मोबाइल एप से भारत में किसान व्यापारी और किसान बिना किसी शुल्क के नवीनतम मूल्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह एप मंडी में कीमत पता लगाने के लिए बेहद उपयुक्त एप है और इसका किसानों समेत अन्य सभी लोगों द्वारा भी उपयोग किया जा सकता है। इस एप के डाउनलोड करने से किसानों को कृषि बाजार में उतार-चढ़ाव के बारे में जानकारी मिलती है। यह मोबाइल एप हिन्दी, गुजराती और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। जल्द ही यह मोबाइल एप तेलगू, तमिल और बंगाली में भी उपलब्ध होगा।</p>
<h1 style="text-align:center;">शेतकारी मासिक मोबाइल एप</h1>
<p style="text-align:justify;">शेतकारी मासिक मोबाइल एप असल में च्च्शेतकारी मासिक” पत्रिका है। यह पत्रिका कृषि विभाग महाराष्ट्र की ओर से पिछले 51 सालों से प्रकाशित की जा रही है। यह एक लोकप्रिय पत्रिका है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शेतकारी मासिक मोबाइल एप को एक बार डाउनलोड करने पर खेती-किसानी से जुड़ी आप जानकारी पा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि एक बार डाउनलोड किये जाने के बाद इसे बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी पढ़ा जा सकता है और किसान भाई उपयुक्त जानकारी पा सकते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">फार्म ओ पीडिया</h1>
<p style="text-align:justify;">इस मोबाइल एप के जरिये किसान अपने मिट्टी और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चुनाव, फसलवार जानकारी, अपने क्षेत्र में मौसम के बारे में और अपने मवेशियों को संभालने के बारे में जानकारी दी गई है। यह मोबाइल एप भी किसानों के लिए उपयोगी है। यह एप अभी अंग्रेजी और गुजराती भाषा में उपलब्ध है। सीडैक, मुंबई की ओर से विकसित यह एप ग्रामीणों के लिए बहुभाषी एप है।</p>
<h1 style="text-align:center;">किसान सुविधा</h1>
<p style="text-align:justify;">किसानों के लिए एक मोबाइल एप किसान सुविधा भी बहुत उपयोगी है। इस एप के जरिये किसान अगले पांच दिनों के मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा किसान व्यापारी, बाजार में कीमतों, कृषि परामर्श, पौध सरंक्षण और आईपीएम आचरण समेत कई जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। मौसम की जानकारियों के साथ निकटतम क्षेत्र में बाजार मूल्यों के बारे में इस एप के जरिये पता किया जा सकता है।</p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jul 2018 03:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बड़ी दुर्घटनाओं से ली जाए सीख</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन की 27 मंजिला इमारत में आग लगने से यहां 6 लोगों की मौत हो गई और 50 के करीब लोग घायल हो गए, बहुतों का अभी पता नहीं चल पाया। यह हादसा एक फ्रिज में आग लगने की वजह से घटित हुआ और पूरी बिल्डिंग जलकर खाक हो गई। भारत में भी इस तरह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/learn-to-be-taken-from-big-accidents/article-1233"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/fire-in-tower1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लंदन की 27 मंजिला इमारत में आग लगने से यहां 6 लोगों की मौत हो गई और 50 के करीब लोग घायल हो गए, बहुतों का अभी पता नहीं चल पाया। यह हादसा एक फ्रिज में आग लगने की वजह से घटित हुआ और पूरी बिल्डिंग जलकर खाक हो गई। भारत में भी इस तरह के कई भीषण अग्निकांड हो चुके हैं, जिनमें भारत ने अपने सैकड़ों नागरिकों को खोया है।</p>
<p style="text-align:justify;">1995 में हरियाणा के कस्बा डबवाली में घटित भीषण अग्निकांड में 400 लोगों की जान गई। 1997 में दिल्ली में उपहार सिनेमा का अग्निकांड में 60 लोग मारे गए। वर्ष 2011 में कोलकाता का एमरी हॉस्पिटल अग्निकांड, जिसमें 90 लोगों की मौत हो गई थी, 2016 में हरियाणा के पानीपत में एक फैक्टरी में आग से 7 लोगों की मौत हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकतर अग्निकांड की मुख्य वजह तकनीकी खराबी या मानवीय भूल ही होती है। डबवाली व उपहार सिनेमा अग्निकांड में आग की वजह यहां मानवीय गलतियां थी, वहीं मरने वालों की ज्यादा संख्या भी मानवीय लापरवाहियां ही थी। अग्निकांड में जानमाल की बड़ी क्षति के मुख्य कारण दुर्घटना स्थल पर अग्निशामकों का नहीं होना, दुर्घटना स्थल पर निकास रास्तों की कमी होना, दुर्घटना स्थल के प्रबंधकों, कर्मचारियों द्वारा दुर्घटना की गंभीरता को न भांप सकना ही बनते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले माह पंजाब के रामपुराफूल कस्बे में घटित एक बस में आग लगने की घटना में घायलों व मृतकों की संख्या इसलिए बढ़ी, चूंकि ड्राईवर ने यात्रियों की नहीं सुनी और 300 मीटर तक बस को इसलिए दौड़ाता रहा कि वह रेल फाटक बंद होने से पूर्व उसे क्रॉस कर ले। गत सप्ताह मध्यप्रदेश में एक पटाखा फैक्टरी में आग से करीब 20 लोग जिंदा जल गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ये बड़े हादसे सबक देते हैं कि घनी होती मानवीय बस्तियों में बिना सुरक्षा प्रबंधों के रहना हर पल मौत के साये में रहने जैसा हो गया है। यहां समस्या यह भी है कि दुर्घटना के पश्चात भी आपात सेवाएं लोगों की जान बचा पाने में विफल हो जाती हैं। भारतीय जनमानस की तो सोच ही ऐसी है कि यहां रहने व काम करने की जगह की ही बात होती है, बाकि सुरक्षा प्रबंध, पानी, शौचालय आदि बातों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है,</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि किसी भी बड़ी ईमारत, कारखाना, संस्थान में सुरक्षा प्रबंध, सबसे पहले हों, तत्पश्चात बाकि सुविधाएं एवं निर्माण की बात होनी चाहिए। देशभर में अभी भी लाखों बहुमंजिला इमारतें हैं जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखे हुए हैं। ठीक ऐसे ही करोड़ों नागरिकों को आपदा के समय सुरक्षा की कोई जानकारी नहीं है, जोकि उन्हें दिया जाना बेहद जरूरी है। बड़ी घटनाओं को सदैव एक घटना मानकर नहीं भुलाया जाए, बल्कि उनसे सीख ली जाए कि यदि वह हमारे साथ दोबारा घटित होती है तो हम उससे कैसे बचें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2017 23:36:09 +0530</pubDate>
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