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                <title>Legal News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Supreme Court: राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मची हलचल!</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme Court Hearing On Sedition Law: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता के तहत राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को मंगलवार को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को विचार के लिए भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-decision-of-supreme-court-on-treason-law-created-a-stir/article-52247"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/supreme-court-of-india2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Supreme Court Hearing On Sedition Law: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता के तहत राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को मंगलवार को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को विचार के लिए भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इसके साथ ही नए प्रस्तावित दंड संहिता में राजद्रोह प्रावधान को संशोधित करने वाला नया कानून लागू होने तक मामले की जांच स्थगित करने की केंद्र की याचिका भी खारिज कर दी। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत की इस पीठ के समक्ष कहा कि नए प्रस्तावित दंड संहिता में राजद्रोह प्रावधान को संशोधित किया गया है। प्रस्तावित कानून फिलहाल संसदीय स्थायी समिति के समक्ष विचाराधीन है। इस बीच वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी समेत अन्य ने पीठ के समक्ष कहा कि नया कानून बनने से आईपीसी की धारा 124ए की संवैधानिकता को चुनौती खत्म नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नये कानून को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने 124ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टालने के केंद्र के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा, “कई कारण हैं-धारा 124ए कानून की किताब में बनी हुई है और दंडात्मक कानून में नए कानून का केवल संभावित प्रभाव होगा और अभियोजन की वैधता 124ए तक बनी रहेगी और चुनौती का मूल्यांकन इस प्रकार किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">” सिब्बल ने कहा कि केदारनाथ सिंह मामले (पांच सदस्यी संविधान पीठ का फैसला, जिसने प्रावधान की संवैधानिकता को बरकरार रखा था) पर पुनर्विचार करने के लिए मामले को पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है या तीन न्यायाधीशों की मौजूदा पीठ ही इस पर फैसला कर सकती है। उन्होंने कहा कि नया कानून बहुत खराब है। इसके रहते मुकदमा चलता रहेगा। पीठ ने कहा कि उसे पांच न्यायाधीशों की पीठ का गठन करना होगा, क्योंकि पांच न्यायाधीशों की पीठ का फैसला उस पर बाध्यकारी है। शीर्ष अदालत के 11 मई, 2022 के आदेश के कारण राजद्रोह कानून फिलहाल स्थगित है।</p>
]]></content:encoded>
                
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Sep 2023 15:50:18 +0530</pubDate>
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                <title>Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Gyanvapi Mosque Case: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के आदेश पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के 20 जुलाई के आदेश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-courts-big-decision-on-gyanvapi-survey/article-50805"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/supreme-court-of-india-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Gyanvapi Mosque Case: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के आदेश पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के 20 जुलाई के आदेश के फैसले पर मुहर लगाने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति वाराणसी की याचिका खारिज करते हुए सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। Gyanvapi Survey</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने का उन्हें कोई कारण नजर नहीं आता। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति वाराणसी ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा तीन अगस्त को पारित आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम निजामुद्दीन पाशा ने पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। शीर्ष अदालत के समक्ष पाशा ने सर्वेक्षण पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाते हुए कहा था, “मैंने विशेष अनुमति याचिका ईमेल कर दी है…उन्हें (सर्वेक्षण) जारी न रखने दें।” न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने जवाब दिया था, “हम इस पर तुरंत विचार करेंगे।”</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/seema-haider-news/">Seema Haider News: सीमा हैदर मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“Seema Haider News: सीमा हैदर मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/seema-haider-news/embed/#?secret=o3vK15kyty%23?secret=4lc920pSYF" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">मस्जिद का प्रबंधन करने वाली इस समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के कुछ घंटों के भीतर ही शीर्ष न्यायालय का रुख किया था।‌ उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस फैसले पर मुहर लगा दी थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी गई थी। समिति ने अपनी विशेष अनुमति याचिका में दलील दी थी कि उच्च न्यायालय के आदेश को “इस तरह के अभ्यास से उत्पन्न गंभीर जोखिमों के कारण रद्द किया जा सकता है, जिसके पूरे देश में परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में पिछले साल एक सर्वेक्षण के लिए एक आयुक्त नियुक्त किए जाने पर “पूरे मुद्दे की अत्यधिक मीडिया कवरेज और सांप्रदायिक रंगों” का हवाला दिया गया था। इस आधार पर यह भी दावा किया गया था कि ऐसी यह पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के “बिल्कुल” खिलाफ थी। इस अधिनियम के तहत 15 अगस्त 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थानों के स्वरूप को बनाए रखना अनिवार्य कर दिया था। जिला अदालत ने 21 जुलाई के आदेश में यह पता लगाने के उद्देश्य से सर्वेक्षण का आदेश दिया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 17:42:03 +0530</pubDate>
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                <title>Nuh Violence: नूंह हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया से मचा हड़कंप, जानें कोर्ट ने क्या दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Haryana Violence: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हरियाणा में भड़की हिंसा के मद्देनजर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की ओर से आयोजित रैलियों पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने उस आदेश का पालन सुनिश्चित करने का उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली सरकारों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/supreme-courts-reaction-on-nuh-violence-created-a-stir-know-what-the-court-ordered/article-50722"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/supreme-court-of-india-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Haryana Violence: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हरियाणा में भड़की हिंसा के मद्देनजर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की ओर से आयोजित रैलियों पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने उस आदेश का पालन सुनिश्चित करने का उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली सरकारों को बुधवार को निर्देश दिया, जिसमें समाज में नफरत फैलाने वाले भाषण तथा बयानों के अलावा सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिए स्वत: संज्ञान कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। Nuh Violence</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/haryana-nuh-violence-updates/">Haryana Nuh Violence Updates: नूंह हिंसा पर अनिल विज का बड़ा बयान, मचा हड़कंप</a></p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस वी भट्टी की पीठ ने केरल के मल्टी मीडिया पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह द्वारा किए गए तत्काल उल्लेख पर विशेष सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। Nuh Violence</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने ऐसी रैलियों में वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज के इस्तेमाल का निर्देश दिया और कहा,‘हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कानून का शासन कायम रहे। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से कहा कि इस प्रस्ताव पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि नफरत भरे भाषणों से माहौल खराब होता है। पीठ ने उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित अधिकारियों को हिंसा और नफरती भाषणों को रोकने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतनी चाहिए। Nuh Violence</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने याचिकाकर्ता अब्दुल्ला द्वारा शीर्ष अदालत के अक्टूबर 2022 और अप्रैल 2023 में जारी आदेशों के उल्लेख पर गौर करते हुए कहा इन आदेशों पर अमल सुनिश्चित करें। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि जब भी कोई नफरत फैलाने वाले भाषण या कोई कार्रवाई होती है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए, 153 बी और 295 ए और 505 आदि के अपराधों के तहत आती हो, तो तुरंत कार्रवाई करें। गौरतलब है कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने हरियाणा के नूंह एवं अन्य इलाकों में भड़की हिंसा के खिलाफ बुधवार को जगह जगह प्रदर्शन का आयोजन किया है। Nuh Violence</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 16:57:16 +0530</pubDate>
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                <title>Manipur News: सीबीआई खंगालेगी मणिपुर में दरिंदगी कांड का सच</title>
                                    <description><![CDATA[Manipur Violence News: केंद्र ने मणिपुर में दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न और हिंसा घटनाओं को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने के फैसले से उच्चतम न्यायालय को अवगत कराते हुए इस मामले की सुनवाई राज्य से बाहर छह महीने के भीतर करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है। शीर्ष अदालत (Supreme Court) […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-news/article-50509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/manipur-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Manipur Violence News: केंद्र ने मणिपुर में दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न और हिंसा घटनाओं को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने के फैसले से उच्चतम न्यायालय को अवगत कराते हुए इस मामले की सुनवाई राज्य से बाहर छह महीने के भीतर करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत (Supreme Court) इस मामले पर आज (शुक्रवार) को सुनवाई करेगी। वह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका से संबंधित मामले पर सुनवाई करेगी। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई से पहले गुरुवार को दायर एक हलफनामे यह भी कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के सामने आने के बाद लगातार मामले की निगरानी की जा रही है। Manipur News</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष कहा है कि उसका दृष्टिकोण महिलाओं के खिलाफ किसी भी स्तर के अपराध को बर्दाश्त नहीं करने की रही है। वह वर्तमान घटना को भी बहुत जघन्य मानती है। वह मानती है कि इस मामले को न केवल गंभीरता से लिया जाना चाहिए बल्कि समय पर तरीके से न्याय भी होना चाहिए, ताकि इसका असर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के संबंध में पूरे देश में निवारक प्रभाव पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने इन दलीलों के साथ शीर्ष अदालत से मामले की सुनवाई मणिपुर से बाहर स्थानांतरित करने करने की गुहार लगाते हुए कहा कि आरोप पत्र दाखिल होने के छह महीने के भीतर समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी की जानी चाहिए। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा कि वह उससे अनुरोध करती है कि विचाराधीन अपराध के मुकदमे सहित पूरे मामले को मणिपुर है से बाहर किसी भी राज्य में स्थानांतरित करने का आदेश दे।</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर की महिलाओं से जुड़ी भयावह घटना का वायरल वीडियो सामने आने के बाद शीर्ष अदालत ने पिछले हफ्ते अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से कहा था कि यह अदालत ‘बेहद से परेशान’ है। इसने केंद्र और मणिपुर सरकार से यह भी कहा था कि या तो अपराधियों को पकड़ें अन्यथा न्यायपालिका कार्रवाई करेगी। भल्ला ने लिखित जवाब में कहा है कि मणिपुर सरकार ने 26 जुलाई 2023 को सचिव, डीओपीएंडटी को मामले को आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है, जिसे गृह मंत्रालय ने 27 जुलाई के पत्र के माध्यम से सचिव, डीओपीएंडटी को विधिवत सिफारिश की है। इस प्रकार जांच सीबीआई को सौंप दी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि उपचारात्मक उपायों के रूप में राज्य सरकार ने 18 मई और 5 जुलाई 2023 को अपने आदेश के माध्यम से विभिन्न राहत शिविरों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मदद के लिए जिला मनोवैज्ञानिक सहायता टीमों का गठन किया है। हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक रैंक का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की सीधी निगरानी में आपराधिक मामलों की जांचों की निगरानी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हलफनामे में यह भी कहा गया है कि आपराधिक घटनाओं की रिपोर्ट करने और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए जानकारी प्रदान करने के लिए उचित इनाम भी दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आपराधिक मामलों की रोकथाम और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वह (मौजूदा कंपनियों के अलावा) 3 मई 2023 से सीएपीएफएस की अतिरिक्त कंपनियां प्रदान कर रहा है। केंद्र ने अदालत को बताया है कि ह्लस्थानीय पुलिस के अलावा सीएपीएफएस की 124 अतिरिक्त कंपनियां और सेना/असम राइफल्स की 185 टुकड़ियां मणिपुर में तैनात हैं। सुरक्षा सलाहकार की अध्यक्षता में सभी सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधित्व वाली एक एकीकृत कमान स्थापित की गई है। भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नागरिक प्रशासन के सहयोग से खुफिया जानकारी जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यवाई की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि कर्फ्यू, अन्य कानूनों आदि का उल्लंघन करने के लिए 13,782 लोगों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है।</p>
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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2023 10:11:55 +0530</pubDate>
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