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                <title>Patient - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बिना डिग्री मरीजों का कर रहे थे इलाज, दो हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[-मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के भिवानी प्रभारी सुनील कुमार की अगुवाई में की छापेमारी भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश) मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक की स्वास्थ्य विभाग व भिवानी पुलिस की संयुक्त टीम ने बीती देर सांय सोमवार को भिवानी जिला के गांव ईशरवाल में श्योराण डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापेमारी की। इस दौरान राजेंद्र सिंह द्वारा अपने श्योराण डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/patients-were-being-treated-without-degree-two-in-custody/article-35423"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/bhiwani.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">-मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के भिवानी प्रभारी सुनील कुमार की अगुवाई में की छापेमारी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)</strong> मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक की स्वास्थ्य विभाग व भिवानी पुलिस की संयुक्त टीम ने बीती देर सांय सोमवार को भिवानी जिला के गांव ईशरवाल में श्योराण डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापेमारी की। इस दौरान राजेंद्र सिंह द्वारा अपने श्योराण डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीज बलकेश व कपिल को दाखिल कर उनका इलाज किया जा रहा था। राजेन्द्र द्वारा मौका पर इलाज के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली दवाईयों की खरीद व बेचने के संबध में बिल, रिकॉर्ड व डिग्री मांगने पर राजेंद्र ने बताया कि उन्होंने डी-फामेर्सी की हुई है, परंतु वह कोई डॉक्टर की डिग्री पेश नहीं कर पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार गांव ईशरवाल के बस स्टैंड पर स्थित जनता अस्पताल पर भी छापेमारी की गई। इस दौरान वहां सतीश द्वारा अपने अस्पताल में मरीज मुख्त्यारी देवी को दाखिल करके इलाज किया जा रहा था। सतीश द्वारा इलाज के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली दवाईयों की खरीद व बेचने के संबध में बिल, रिकॉर्ड व डिग्री मांगने पर सतीश ने बताया कि उन्होंने डी-फामेर्सी की हुई है, परंतु वह कोई डॉक्टर की डिग्री पेश नहीं कर पाया। जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दिया गया तथा राजेंद्र व सतीश को हिरासत में ले लिया है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Jul 2022 19:02:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बुरी स्वास्थ्य सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[एक तरफ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व राज्य सरकारें कोरोना वायरस के साथ निपटने के लिए पूरे प्रबंधों का दावा कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ पंजाब के फगवाड़ा के सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीजों को गलत ग्रुप व एचआईवी पीड़ित रक्त चढ़ाने का मामला सामने आया है। अस्पताल की ये लापरवाही कितनी घातक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/bad-health-facilities/article-12963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/bad-health-facilities.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">एक तरफ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व राज्य सरकारें कोरोना वायरस के साथ निपटने के लिए पूरे प्रबंधों का दावा कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ पंजाब के फगवाड़ा के सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीजों को गलत ग्रुप व एचआईवी पीड़ित रक्त चढ़ाने का मामला सामने आया है। अस्पताल की ये लापरवाही कितनी घातक हो सिद्ध हो सकती है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं, यह सीधा मरीजों की जिंदगी के साथ जुड़ा सवाल है। चिंता वाली बात यह है कि देश में मेडीकल सेवाओं का ढ़ांचा ही अभी तक इस कार्य में सक्षम नहीं हो पाया कि पीड़ित मरीज को सुरक्षित व सही ग्रुप का रक्त मुहैया करवाया जाए।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">कभी देश में रक्तदान की कमी रहती थी, जिसे समाज सेवी संस्थाओं ने दूर करने में अहम योगदान दिया है। लेकिन अस्पतालों में जमा किए गए रक्त का सही प्रयोग ही ना हो पाना सरकार व स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की नाकामी का ही परिणाम है। वैसे स्वास्थ्य मंत्रियों द्वारा अस्प्तालों में छापेमारी की खबरें प्रतिदिन ही आती रहती हैं। अस्पतालों में ईलाज में लापरवाहियों के जारी रहने से छापेमारी पर भी सवाल उठने स्वाभाविक है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">दरअसल सेवाओं में ऊपर से लेकर नीचे तक चूक न होना बहुत ही आवश्यक है। केवल छापेमारी ही समस्या का हल नहीं बल्कि उच्च अधिकारियों का निम्न स्तरीय अधिकारियों के कामकाज को दुरूस्त बनाना आवश्यक है। दरअसल सरकारी अस्पताल केवल गरीबों के अस्पताल बनकर रह गए हैं। इन अस्पतालों की कमियां तब ही सामने आती हैं जब कोई बड़ी घटना घटित हो जाए। ईमानदार व मेहनती कर्मचारियों को कोई शाबाशी नहीं दी जाती व सही तरीके से काम न करने वाले अधिकारी/कर्मचारी अपनी लापरवाही हमेशा जारी रखते हैं। अगर अस्पतालों के कामकाज की समय पर जांच होती रहे तब लापरवाही रोकी जा सकती है। जब किसी एक घटना के घटने पर कोई सबक नहीं लिया जाता या कुछ दिनों बाद ही घटना को भुला दिया जाता है तब फिर कोई न कोई नयी घटना घटित हो जाती है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">सरकारी भाषा में ‘जांच’ एक ऐसा शब्द है जो मामले को लम्बे समय तक लटकाकर लापरवाही करने वालो को ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान करता है। सख्त सजाएं देंगे, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे जैसे शब्द घिस-पिट चुके हैं। महज सजाएं देना ही मामले का हल नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार व माहौल बनाने की भी बड़ी आश्यकता है। कर्मचारियों-अधिकारियों में काम के प्रति जिम्मेवारी, लगन व सेवा भावना होनी चाहिए। जब डॉक्टर या मेडीकल अधिकारी यह समझेंगे कि उसकी छोटी सी लापरवाही या बुरे व्यवहार से किसी मरीज की जान जा सकती है और सही तरीके से काम करने पर किसी की जिंदगी बचा सकती है, तब यह सोच कभी भी गलती करने का मौका ही नहीं देगी। इससे सेवाएं बेहतर बनेंगी व राष्ट का विकास होगा।</h4>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Feb 2020 21:22:45 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में नकली दवाओं के जाल में फंस रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[यह निर्विवाद है कि व्यक्ति मामूली बीमार होते ही सीधा एलोपैथी के अस्पताल जाना ज्यादा पसंद करता है ताकि तुरंत आराम मिल सके। इन असपतालों में अंग्रेजी दवाओं से चिकित्सा की जाती है। आजकल भारत सरकार और राज्य सरकारों ने हालाँकि अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दे रखी है। मगर सरकारी अस्पतालों की बदहाली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-patient-is-trapped-in-the-fake-medicines-traps-india/article-5041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/fack-medisal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह निर्विवाद है कि व्यक्ति मामूली बीमार होते ही सीधा एलोपैथी के अस्पताल जाना ज्यादा पसंद करता है ताकि तुरंत आराम मिल सके। इन असपतालों में अंग्रेजी दवाओं से चिकित्सा की जाती है। आजकल भारत सरकार और राज्य सरकारों ने हालाँकि अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दे रखी है। मगर सरकारी अस्पतालों की बदहाली और असाध्य रोगों के इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। दोनों ही स्थानों पर अंग्रेजी दवाइयों का बोलबाला है। ये दवाइयां आम आदमी की समझ से बाहर है। स्वास्थ्य पर इनके दुष्प्रभाव से हम वाकिफ नहीं है। दवाइयों की कीमत भी गरीब के लिए जानलेवा है। बाजार में कैसी कैसी दवाइयां और उनकी किस्में है इसका पता या तो डॉक्टर को है या केमिस्ट को। आम आदमी को तो खरीदने से ही मतलब है। अंग्रेजी दवाइयों के इस मकड़जाल में पूरा देश फंसा हुआ है। इस भ्रमजाल से निकलने का रास्ता अभी नहीं मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंग्रेजी दवाइयों का गड़बड़झाला भारत में शुरू से ही रहा है। इसके वर्चस्व को तोड़ने की गंभीर कोशिश कभी नहीं हुई जिसके फलस्वरूप इनके दाम मनमाने तरीके से निर्धारित हुए। आम आदमी के समझ से बाहर होने के कारण अंग्रेजी दवाइयों ने खौफनाक ढंग से देश के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया। इस जनद्रोह में विदेशी के साथ देशी कम्पनियाँ भी शामिल थी जिन्हे राजतन्त्र का परोक्ष समर्थन शामिल था। इस दौरान नकली और घाटियां दवाइयों का बाजार भी खूब फला फुला। एक रुपए में बनने वाली टेबलेट 100 रुपयों में बेचीं गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन रक्षक दवाइयों के दाम आसमान को छूने लगे। राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने इस लूट के खिलाफ कभी जोरदार आवाज बुलंद नहीं की। दवा कम्पनियाँ अपने राजनीतिक आकाओं के हित साधने लगी। यही नहीं घटिया और नकली दवाओं का बाजार भी खूब गर्म हुआ। मानव स्वास्थ्य के साथ सरेआम खिलवाड़ हुआ। बड़ी संख्यां में लोग मौत के मुहं में समां गए तब जाकर राज की निंद्रा टूटी। मगर आपाधापी की कारवाही के आगे कुछ नहीं हुआ। नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद इस गड़बड़झाले को समझने का प्रयास अवश्य हुआ। दवाइयां कुछ हद तक सस्ती हुई मगर अभी भी आसमान काले रंग से रंगा हुआ है। इसे समझने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में किसी आयोग के गठन की जरुरत है जो देख और समझ कर दवा बाजार के गड़बड़झाले के चक्रव्यूह में सेंध लगा सके। सबसे पहले दवाओं के तिलिस्म को समझने की जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में लगभग 200 बिलियन डालर का घटिया और नकली दवाओं एवं वैक्सीन का धंधा है। एशिया में बिकने वाली 30 प्रतिशत दवाएँ नकली या घटिया हैं। भारत में बिकने वाली हर पाँच गोलियों के पत्तों में में से एक नकली है। इन दवाइयों से हर वर्ष लगभग 5 प्रतिशत धनहानि देश को होती है और ये धंधा बेरोकटोक चल रहा है और असली दवाइयों के व्यापार से भी ज्यादा तरक्की कर रहा है। दो वर्ष पहले के एक सर्वे से पता चला है कि एशिया घटिया और नकली दवाइयों का सबसे बड़ा उत्पादक है। नकली दवाइयों और वैक्सीनों से हर वर्ष लगभग 10 लाख लोग काल के गाल में समा जाते है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की माने तो भारत में 5 प्रतिशत दवाएँ चोर दरवाजे वाली एवं ०.3 प्रतिशत नकली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में 10,500 दवा कंपनियां हैं, लेकिन 1400 दवा कंपनियां ही डब्ल्यूएचओ जीएमपी सटीर्फाइड हैं।दवा एक केमिकल होता है। रसायन होता है। दवा कंपनियां अपने मुनाफा एवं विपरण में सहुलियत के लिए इन रसायनों को अलग से अपना ब्रांड नाम देती है। जैसे पारासेटामल एक साल्ट अथवा रसायन का नाम है लेकिन कंपनिया इसे अपने हिसाब से ब्रांड का नाम देती हैं और फिर उसकी मार्केंटिंग करती है। ब्रांड का नाम ए हो अथवा बी अगर उसमें पारासेटामल साल्ट है तो इसका मतलब यह है कि दवा पारासेटामल ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दवाओं के दुष्प्रभावों का अध्ययन करने वाली संस्था फामार्कोपिया कमीशन ने 105 तरह की दवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन दवाओं से आप किडनी लीवर और हार्ट के गंभीर मरीज बन सकते हैं। ये दवाएं ऐसी हैं जिन्हें हम सामान्यतौर पर खाते रहते हैं और डॉक्टर से कई बार पूछने की जहमत तक नहीं उठाते। फार्मा कंपनियों को भी अब सिगरेट पैकेट की तरह वैधानिक चेतावनी दवाओं के लिए भी जारी करनी पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jul 2018 02:18:25 +0530</pubDate>
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                <title>CMO अफिस के पीछे कुत्ते नोचते मिले मरीज का शव, मंत्री विज ने दिए जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अम्बाला। भिवानी के चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में बुधवार को मिले मरीज के शव के मामले में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जांच के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि यहां के बंसीलाल अस्पताल में 6 दिन से लापता एक मरीज का शव सीएमओ अॉफिस के पीछे मिला था, जिसे कुत्ते नोच रहे थे। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-body-patient-who-was-missing-dog-behind-cmo-office-inquiry-ordered-vij/article-4018"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/dedbody-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बाला। </strong>भिवानी के चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में बुधवार को मिले मरीज के शव के मामले में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जांच के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि यहां के बंसीलाल अस्पताल में 6 दिन से लापता एक मरीज का शव सीएमओ अॉफिस के पीछे मिला था, जिसे कुत्ते नोच रहे थे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने डीजी हेल्थ को मामले की जांच करने के आदेश दे दिए हैं। उनका कहना है कि सभी जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मामले में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी</h3>
<p style="text-align:justify;">पढ़िए क्या था पूरा मामला- जानकारी के अनुसार झज्जर जिले के गोरिया गांव के 75 वर्षिय श्योताज को शुगर की बीमारी के चलते 28 मई को चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के दौरान 30 मई की शाम श्योताज ने खाना खाया और खाना खाकर वह बैड से उठ कर घूमने के लिए बाहर गया। काफी देर तक जब श्योताज वापस अपने बैड पर नहीं आए तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरु की, कापफी तलाशने के बाद भी श्योताज का कुछ पता नहीं चला।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके चलते परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई। छह दिन बाद मिला शव- बुधवार को मृतक श्योताज का शव अस्पताल परिसर में मिला। जिसे कुत्ते नौच रहे थे। शव काफी दिनों तक पडा रहने के कारण शव से बदबू उठी तो आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन का ध्यान गया जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच की। शव के पास अस्पताल के बैड की चद्दर होने पर आशंका जताई गई कि ये मरीज है। ये कहना था सीएमओ का- सीएमओ डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता का कहना था कि सुरक्षा गार्ड आउटसोर्सिंग के तहत लगे हैं। उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 13:56:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भाजपा नेता ने रोकी एम्बुलैंस, मरीज की मौत!</title>
                                    <description><![CDATA[फतेहाबाद (विजय बजाज)। फतेहाबाद में बीजेपी नेता और नगर परिषद के प्रधान दर्शन नागपाल पर गंभीर आरोप लगे हैं। दर्शन नागपाल पर मरीज को ले जा रही एंबुलेंस को आधे घंटे तक रोककर रखने का आरोप लगा है। एंबुलेंस में जो मरीज था, उसकी मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने शहर पुलिस को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bjp-leader-stops-ambulance-patient-death/article-2964"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/accident-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद (विजय बजाज)।</strong> फतेहाबाद में बीजेपी नेता और नगर परिषद के प्रधान दर्शन नागपाल पर गंभीर आरोप लगे हैं। दर्शन नागपाल पर मरीज को ले जा रही एंबुलेंस को आधे घंटे तक रोककर रखने का आरोप लगा है। एंबुलेंस में जो मरीज था, उसकी मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने शहर पुलिस को लिखित शिकायत देकर नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल व दो अन्य लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। मामले में नप प्रधान ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि एंबुलेंस ने गाड़ी के पीछे टक्कर मारी थी, मरीज होने के कारण एंबुलेंस को रोका नहीं गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस को दी लिखित शिकायत में सीता राम सोनी और अरूण सोनी ने आरोप लगाया कि शनिवार शाम को चाचा नवीन कुमार की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद खुद व चाचा कृष्ण कुमार, भंवर, राजेंद्र कुमार सिवाच अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने जांच पड़ताल कर उन्हें डॉ. बंसल के पास ले जाने के लिए कहा। एंबुलेंस में देवीलाल मार्केट में स्थित डॉ. बंसल के अस्पताल की तरफ रवाना हो गए। लालबत्ती चौक पर नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल की गाड़ी आगे आ गई और एंबुलेंस के साथ टच कर गई। इसके बाद दर्शन नागपाल के करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस को रोके रखा जिससे मरीज पहुंचने में लेट हो गया और उसकी मौत हो गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">प्रधान दर्शन नागपाल ने कहा कि</h2>
<p style="text-align:justify;">वहीं इस मामले मे नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल ने बताया कि उनकी गाड़ी को एबुलैंस ने टक्कर मारी थी। इसके बाद उनकी ओर से एबुलेंस को नहीं रोका गया। मरीज को अस्पताल में जब एंबुलैंस ने छोड़ दिया उसके बाद उनकी ओर से एंबुलेंस चालक से बात की गई।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र ने बताया कि पुलिस को दर्शन नागपाल के खिलाफ शिकायत मिली है। दोनों पक्षों को थाने में बुलाया गया है। जांच मे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनकी ओर से कार्रवाई की जाएगी।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2017 09:39:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अस्पताल में गंदगी के ढ़ेर, कैसे स्वस्थ होंगे मरीज?</title>
                                    <description><![CDATA[लापरवाही: मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए भी नहीं साफ जगह बरनाला(जसवीर सिंह)। बरनाला के डिप्टी कमिश्नर की ओर से चाहे शहर को सुंदर बनाने हित सार्वजनिक स्थानों पर बाल पेंटिंग के द्वारा शहर को सुंदर बनाने का निमंत्रण दिया जा रहा है परंतु दूसरी ओर लोगों को रोग मुक्त करने वाले शहर के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dirt-in-the-hospital-how-will-the-patient-be-healthy/article-2346"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/hospital.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">लापरवाही: मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए भी नहीं साफ जगह</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला(जसवीर सिंह)।</strong> बरनाला के डिप्टी कमिश्नर की ओर से चाहे शहर को सुंदर बनाने हित सार्वजनिक स्थानों पर बाल पेंटिंग के द्वारा शहर को सुंदर बनाने का निमंत्रण दिया जा रहा है परंतु दूसरी ओर लोगों को रोग मुक्त करने वाले शहर के सरकारी स्वास्थ्य विभागों में ही जगह-जगह लगे गंदगी के ढ़ेर बीमारियां बांटते नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बात स्थानीय सिविल अस्पताल की है जिसके वार्ड नंबर 2 और 3 के आस-पास मरीजों के परिजनों के आराम करने हित बनाऐ गए पार्कों में इस समय वृक्षों/पौधों की कटाई के बाद टहनियां, पत्ते, पार्क में से उखाड़ा गया घास-फूस और अस्पताल के मुख्य बड़े पार्क में वृक्षों की टूटी टहनियां ढ़ेरियों के रूप में पड़ी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सीवरेज बंद होने के कारण पार्क में भरा बदबूदार पानी</h2>
<p style="text-align:justify;">मरीजों के परिजनों की ओर से बचा खाना, दवाओं के खाली पत्ते, पैकेट दूध के खाली लिफाफे उचित जगह पर फेंकने की बजाय पार्कों के कोनों में ही फेंक दिए जाते हैं, जिसके चलते धीरे-धीरे गंदगी का ढेर लग जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा वार्ड नंबर 2 के पिछली ओर सीवरेज बंद होने के कारण सीवरेज का बदबूदार पानी वार्ड के पार्क में भर जाने के कारण अभी भी वार्ड के आसपास खड़ा है, जिस कारण मरीजों को अपना इलाज करवाने में परेशानी आ रही है। सिविल सर्जन के दफ़्तर की ओर जाते रास्ते में भी कूड़े का ढेर पड़ा है।</p>
<h2>सिविल सर्जन कार्यालय की ओर जाते रास्ते में भी लगे हैं कूड़े के ढ़ेर</h2>
<p>अपने मरीजों की देख-रेख के लिए रुक हरजीत सिंह, दलजीत सिंह, अशोक कुमार, पवन चंद, मलकीत कौर, शिंदो आदि ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से अपने मरीजों की देख-रेख के लिए सिविल अस्पताल में मरीजों के साथ हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल के ब्लॉक हुए सीवरेज के चलते पार्क में जमा हुए गंदे बदबूदार पानी ने उनके मरीजों को और बीमार कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि तकरीबन 4 दिन पहले पार्क के आसपास लगे वृक्षों और पार्क के घास-फूस की कटाई की गई थी जो अभी तक उठा कर किसी उचित जगह पर नहीं फेंका गया, जिसके चलते न सिर्फ गंदगी बढ़ रही है बल्कि मच्छर -मक्खियां भी पैदा हो रही हैं, जो बीमारियों का कारण बनतीं हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अस्पताल में हों सफाई के पुख्ता प्रबंध</h2>
<p style="text-align:justify;">परिजनों ने कहा कि अस्पतालों में लोग अपने इलाज के लिए आते हैं, परंतु अस्पताल खुद ही अपने इलाज का इंतजार रहा है। मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल में साफ-सफाई के पुख़्ता प्रबंध किए जाने चाहिए जिससे मरीज जल्दी तंदरुस्त हो सकें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">स्वच्छता की ओर ध्यान दें डीसी: कलालमाजरा</h2>
<p style="text-align:justify;">उक्त समस्या बाबत देहाती मजदूर सभा के जिला जनरल सचिव भोला सिंह कलाल माजरा ने कहा कि महंगा इलाज करवाने में असमर्थ ज्यादातर जरूरतमंद परिवार ही सिविल अस्पताल में अपने इलाज हित आते हैं, जो अपना इलाज गंदगी भरे माहौल में करवाने के लिए मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भय सताता रहता है कि एक बीमारी का इलाज करवाने के चक्कर में गंदगी के चलते दूसरी बीमारी में न ले जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा उपायुक्त की ओर से शहर की सुंदरता के साथ-साथ सिविल अस्पताल की सुंदरता और स्वच्छता की ओर भी ध्यान देना चाहिए। उक्त मामले के बारे में सीएमओ संपूर्ण सिंह के साथ संपर्क करने पर उन्होंने बात करना मुनासिब नहीं समझा।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dirt-in-the-hospital-how-will-the-patient-be-healthy/article-2346</link>
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 20:27:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मंत्री के दौरे ने बिगाड़ा कैंसर मरीजों का स्वास्थ्य</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल का शांत माहौल हुआ सियासी रैली में तब्दील स्वास्थ्य मंत्री से मिलने के लिए कांग्रेसी मरीजों से होते रहे धक्का-मुक्की संगरूर (गुरप्रीत सिंह)। आज संगरूर के कैंसर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म महेन्द्रा का दौरा कैंसर मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गया। मंत्री को मिलने के लिए पहुंचे कांग्रेसियों कोे मरीजों की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/health-minister-brahma-mahindra-visited-the-hospital/article-2077"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/hosptal.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">अस्पताल का शांत माहौल हुआ सियासी रैली में तब्दील</h2>
<h2 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री से मिलने के लिए कांग्रेसी मरीजों से होते रहे धक्का-मुक्की</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर (गुरप्रीत सिंह)।</strong> आज संगरूर के कैंसर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म महेन्द्रा का दौरा कैंसर मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गया। मंत्री को मिलने के लिए पहुंचे कांग्रेसियों कोे मरीजों की हालत पर बिल्कुल भी तरस नहीं आया और घंटा भर अस्पताल में कांग्रेसी कार्यकर्ता मंत्री के ‘दर्शन’ करने के लिए एक दूसरे के पैर कुचलते रहे और धक्का-मुक्की होते रहे। मंत्री के पास अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाले जल्दबाजों के कारण संख्या में मरीजों को भी धक्का-मुक्की का शिकार होना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">मौके से प्राप्त जानकारी अनुसार आज स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म महेन्द्रा ने संगरूर के होमी भाबा कैंसर अस्पताल में मरीजों का हाल-चाल जानने व अस्पताल की कारगुजारी की समीक्षा करने के लिए आना था, किन्तु स्वास्थ्य मंत्री का दौरा मरीजों के स्वास्थ्य को और बिगाड़ गया। आज करीब सुबह 11 बजे के करीब स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में आना था, जिस कारण सुबह से ही सरकारी अस्पताल को एक अलग रूप दिया हुआ था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जगह- जगह लहरा रहे थे स्वागती झंडे</h2>
<p style="text-align:justify;">जगह- जगह स्वागती झंडे लहरा रहे थे और भारी संख्या में पुलिस बल अस्पताल के बाहर अपनी ड्यूटी पर तैनात था। सरकारी अस्पताल के बड़ी संख्या में डॉक्टर सीनियर मेडिकल अधिकारी के साथ मंत्री के स्वागत की तैयारियों में जुटे हुए थे। होमी भाबा कैंसर अस्पताल का सारा स्टाफ भी पूरी तरह तैयार था।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, हल्के के कांग्रेसियों को मंत्री के आने की भिनक लगते ही, उन्होंने फूलों के हार व बुक्के लेकर अस्पताल में पहुंचना शुरू कर दिया। शहर के बड़ी संख्या में समाज सेवी संगठनों, धार्मिक संगठनों के नुमाइंदों के अतिरिक्त अन्य बुद्धिजीवि भी मंत्री से मिलने के लिए बेताब थे। कैंसर अस्पताल में दवाई लेने व टैस्ट करवाने के लिए सैंकड़े मरीज भी अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कांग्रेसियों व समर्थकों में एकदम से मच गई अफरा-तफरी</h2>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही मंत्री की गाड़ी कैंसर अस्पताल के बाहर आकर रुकी तो कांग्रेसियों व समर्थकों में एकदम से अफरा-तफरी मच गई। मंत्री को गाड़ी से उतरते ही कांग्रेसियों ने बुरी तरह घेर लिया और उन्हें दो कदम चलना भी मुश्किल कर दिया। मंत्री के आस-पास अचानक भीड़ कारण पुलिस ने धक्केमार कर उन्हें इधर- उधर किया, किन्तु समर्थक कहां मानने वाले थे और वह मंत्री के साथ ही अस्पताल में दाखिल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल में काफी भीड़ एकत्रित हो गई, जिस कारण वहां मौजूद भारी संख्या में कैंसर मरीज बुरी तरह घबरा गए। कई मरीजों के नाक में सांस व नाली लटक रही थी और कई मरीजों के आपरेशन किए हुए थे,</p>
<p style="text-align:justify;">किन्तु भीड़ धक्का-मुक्की करती हुई मंत्री के साथ ही रही। इसके बाद अस्पताल के एक कमरे में मंत्री को बिठाया गया तो वहां हल्का विधायक विजयइंद्र सिंगला, डिप्टी कमीश्नर अमर प्रताप सिंह तथा अन्य कांग्रेसी नेता मौजूद थे। कमरे में दाखिल होने के लिए भी कांग्रेसी एक-दूसरे से धक्का-मुक्की करते हुए देखे गए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कांग्रेसियों का जारी रहा शोर-शराबा</h2>
<p style="text-align:justify;">भीड़ से तंग आए जिला पुलिस प्रमुख अस्पताल से बाहर जाकर खड़े हो गए। होमी भाबा कैंसर अस्पताल के मुख्य डॉक्टर अंबूमणी स्वास्थ्य मंत्री को एक वर्ष की कारगुजारी बारे विस्तार पूर्वक बता रहे थे, किन्तु कांग्रेसियों का शोर-शराबा जारी रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल में मौजूद कैंसर के मरीज गांव सहजड़ा के करनैल सिंह ने बताया कि वह आज सुबह दवाई लेने के लिए यहां आया है। आते समय उसे थकावट अधिक हो गई और उसे बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली, जिस कारण वह नीचे फर्श पर ही लेट गया। धूरी से आए मरीज हरनेक सिंह ने बताया कि उसे कैंसर हो गया था। उसका आॅपरेशन हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज यहां वह चैकअप करवाने के लिए आया था। इसके अतिरिक्त भारी संख्या में महिला मरीज, जिनमें ज्यादातर बुजुर्ग थी, भी अपनी- अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे। एक घंटे बाद जब मंत्री अस्पताल से रवाना हुए तो मरीजों ने चैन की सांस ली और अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं जारी की।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/health-minister-brahma-mahindra-visited-the-hospital/article-2077</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 00:19:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AC में ब्लास्ट से लगी आग</title>
                                    <description><![CDATA[मुश्किल से बचाई गई मरीजों की जान जोधपुर (सच कहूँ न्यूज)। जोधपुर के सबसे बड़े अस्पताल के एक्यूट वार्ड में वीरवार सुबह एसी में धमाका हो गया। धमाके के साथ ही वार्ड में आग लग गई और वहां भर्ती मरीजों और परिजनों में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार शहर के मथुरा दास माथुर यानि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/fire-in-ac-at-hospital/article-1498"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/fire-1-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मुश्किल से बचाई गई मरीजों की जान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जोधपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जोधपुर के सबसे बड़े अस्पताल के एक्यूट वार्ड में वीरवार सुबह एसी में धमाका हो गया। धमाके के साथ ही वार्ड में आग लग गई और वहां भर्ती मरीजों और परिजनों में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार शहर के मथुरा दास माथुर यानि एमडीएम अस्पताल के इस एसी ब्लास्ट के बाद वार्ड में धुंआ भर गया और बिजली गुल होने लोगों में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। एक्यूट वार्ड में लगी आग से अस्पताल के अन्य हिस्सों में भी धुंआ भर गया, ऐसे में फायरब्रिगेड को मौके पर बुलाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल पहुंची एक दमकल के जरिए वार्ड में आग पर काबू पाया गया। अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड और नर्सिंग स्टाफ ने इस पूरे घटनाक्रम में मुस्तैदी से काम किया और बड़ी आपदा से लोगों को बचा लिया। एक्यूट वार्ड में भर्ती मरीजों को भी अफरा-तफरी में तत्काल बाहर निकाला गया। समय रहते वहां सभी मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर उनकी जान बचाई जा सकी। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो कुछ मिनट की देरी भी ब्लास्ट के बाद लगी आग के चलते इन मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। हालांकि समय रहते आग पर काबू पाने और मरीजों को मौके से हटाने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/fire-in-ac-at-hospital/article-1498</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 07:47:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एक और डॉक्टर का तबादला, मरीज बढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है अबोहर का सिविल अस्पताल नहीं हो सके चार मरीजों के आॅप्रेशन, निराश वापिस लौटे डॉ. सुमित लूना का फाजिल्का अस्पताल में स्थानांतरण अबोहर (सुधीर अरोड़ा)। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्थानीय सिविल अस्पताल में मरीजों को उस समय एक ओर झटका लगा जब अस्पताल में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/doctor-transferred-patient-grew/article-1276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/marij.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है अबोहर का सिविल अस्पताल</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नहीं हो सके चार मरीजों के आॅप्रेशन, निराश वापिस लौटे</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>डॉ. सुमित लूना का फाजिल्का अस्पताल में स्थानांतरण</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सुधीर अरोड़ा)।</strong> डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्थानीय सिविल अस्पताल में मरीजों को उस समय एक ओर झटका लगा जब अस्पताल में आॅप्रेशन के समय बेहोशी का इंजेक्शन लगाने वाले डॉक्टर सुमित लूना का भी फाजिल्का अस्पताल में स्थानांतरण हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि डॉ. लूना ने इस अस्पताल से तबादले के लिए पहले ही आॅनलाइन अर्जी दी हुई थी, जिसकी मंजूरी मिलते ही उनका फाजिल्का स्थानांतरण कर दिया गया। अस्पताल में 4 आॅप्रेशन केस हल नहीं हो सके और मरीजों को बिना आॅप्रेशन करवाए ही वापिस घर लौटना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस अस्पताल में सिजेरियन डिलिवरी के अलावा पथरी, हिरणियां, बच्चेदानी, आर्थो आदि संबंधी हर रोज 4-5 आॅप्रेशन की औसत थी, इसके अलावा एक माह में परिवार नियोजन मंगलवार और गुरूवार को 30 आॅप्रेशन किए जाते हैं, उधर दिल रोग मॉहिर डॉ .पुनीत चुचरा का भी अस्पताल से स्थानांतरण किए जाने के निर्देश आ चुके हैं, जिनके जाने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विभाग को करवाया अवगत, समस्या ज्यों की त्यों</h2>
<p style="text-align:justify;">सिविल अस्पताल के इंचार्ज डॉ. लाल चंद ठुकराल ने बताया कि डॉक्टरों के स्थानांतरण से मरीजों को भारी परेशानी तो आएगी ही परन्तु सरकार के निदेर्शों पर उनको रिलीव करना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सिजेरियन डिलिवरी मामलों के समय मरीजों की बेहोशी की हालत को सुधारने वाले डॉक्टर को बुलाने के लिए अस्पताल अपने तौर पर खर्च करेगा, जबकि अन्य आॅप्रेशनों के लिए मरीजों को अपने स्तर पर दो हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह कई बार स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों की कमी से अवगत करवा चुके हैं परन्तु समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बिजली समस्या से परेशान मरीज</h2>
<p style="text-align:justify;">बुधवार शाम 6 बजे से अस्पताल में बिजली गुल रहने से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गत दिवस तेज आंधी के कारण अस्पताल की होट लाइन सुविधा ठप्प हो गई, जिस कारण स्टाफ के अलावा मरीजों को भी खासी परेशानी झेलनी पड़ी। अस्पताल में दौरा किया गया तो वार्ड में भर्ती मरीजों के परिंजन हाथ वाले पंखों से हवा करते दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा मरीजों को पीने के पानी की आपूर्ति भी नहीं हो सकी। सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉ. लालचंद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कल शाम बिजली बंद होने की सूचना बिजली विभाग के एक्सईएन मलकीत सिंह सिद्धू को दे दी गई थी, परंतु अधिकारियों ने वीरवार दोपहर तक कोई संतोष जनक जवाब नहीं दिया, परंतु फिर भी जरनरेटर के सहारे मरीजों को सुविधा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/doctor-transferred-patient-grew/article-1276</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 23:40:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पीजीआई में हड़ताल, मरीज परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[अनुबंधित कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने को लेकर विरोध अस्पताल में सफाई व्यवस्था चरमराई सड़कों पर उतरकर की जमकर नारेबाजी महिलाओं ने भी लिया प्रदर्शन में हिस्सा रोहतक (सच कहूँ न्यूज)। पीजीआइ में तीसरे दिन भी अनुबंधित कर्मचारियों की हड़ताल जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने उग्र तेवर दिखाए। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को सड़कों पर उतरकर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/strike-in-pgi-patient-upset/article-1239"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/pgi.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">अनुबंधित कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने को लेकर विरोध</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>अस्पताल में सफाई व्यवस्था चरमराई</strong></li>
<li><strong>सड़कों पर उतरकर की जमकर नारेबाजी</strong></li>
<li><strong>महिलाओं ने भी लिया प्रदर्शन में हिस्सा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पीजीआइ में तीसरे दिन भी अनुबंधित कर्मचारियों की हड़ताल जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने उग्र तेवर दिखाए। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को सड़कों पर उतरकर जमकर नारेबाजी की। हड़ताल से मरीज और आम लोगों को पीजीआई में ओपीडी और इमरजेंसी में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुबंधित कर्मचारियों ने हड़ताल के तीसरे दिन जुलूस निकाला। इस दौरान महिलाओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। बता दें कि पीजीआइएमएस में 65 बेयररों और स्वीपर के रूप में कार्यरत 13 अनुबंधित कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिए जाने के कारण विजय पार्क में धरना-प्रदर्शन और हड़ताल जारी है। इन्हें समर्थन के लिए अन्य अनुबंधित कर्मचारी भी मैदान में कूद पड़े हैं, जिस कारण पीजीआइ की रणवीर सिंह ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ रहा हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि रणवीर सिंह ओपीड़ी के सभी विभागों में प्रतिदिन छह हजार मरीजों के कार्ड बनाए जाते हैं। जिसके लिए पीजीआइ कर्मी और अनुबंधित कर्मी मिलकर कार्ड बनाते हैं लेकिन अनुबंधित कर्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण कार्ड बनाने और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाधित हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/strike-in-pgi-patient-upset/article-1239</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 02:00:31 +0530</pubDate>
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