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                <title>Supreme Court News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Supreme Court News RSS Feed</description>
                
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                <title>Supreme Court: मुफ्त की सुविधाएं देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-विकास के लिए कहां से आएगा पैसा?</title>
                                    <description><![CDATA[Freebies Case Supreme Court: नई दिल्ली। चुनावी वादों के रूप में घोषित की जा रही मुफ्त योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि सरकारों को अल्पकालिक लाभ बाँटने के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। Supreme […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-supreme-court-is-strict-on-providing-freebies-asking-where-will-the-money-for-development-come-from/article-81468"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india-22.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Freebies Case Supreme Court: नई दिल्ली। चुनावी वादों के रूप में घोषित की जा रही मुफ्त योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि सरकारों को अल्पकालिक लाभ बाँटने के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने टिप्पणी की कि अनेक राज्य पहले से ही राजस्व घाटे और बढ़ते ऋण के दबाव में हैं, फिर भी वे नई-नई मुफ्त योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं। न्यायालय ने प्रश्न उठाया कि यदि लगातार नकद अंतरण, मुफ्त बिजली अथवा अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाती रहेंगी, तो विकास परियोजनाओं और आधारभूत संरचना के लिए संसाधन कहाँ से आएँगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि कल्याणकारी योजनाएँ आवश्यक हो सकती हैं, विशेषकर उन वर्गों के लिए जो शिक्षा और बुनियादी जीवन सुविधाओं से वंचित हैं। किंतु बिना समुचित वित्तीय आकलन के व्यापक स्तर पर मुफ्त सुविधाओं का वितरण आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत के समक्ष एक प्रकरण में तमिलनाडु सरकार द्वारा कुछ उपभोक्ता वर्गों के लिए विद्युत शुल्क में रियायत देने की योजना पर भी चर्चा हुई। इस निर्णय के विरुद्ध विद्युत वितरण कंपनियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, यह कहते हुए कि इससे उन पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने यह भी पूछा कि चुनावों से ठीक पूर्व ऐसी योजनाओं की घोषणाएँ क्यों की जाती हैं। पीठ ने संकेत दिया कि सभी राजनीतिक दलों तथा नीति-निर्माताओं को दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि राज्य का दायित्व है कि वह जरूरतमंदों की सहायता करे, परंतु समानांतर रूप से रोजगार के अवसरों का विस्तार और उत्पादनशील अर्थव्यवस्था का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। Supreme Court</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:34:52 +0530</pubDate>
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                <title>Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व यूजीसी को जारी किया नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[UGC Equality Rules 2026: नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ के विरुद्ध दायर दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इन याचिकाओं की सुनवाई पहले से लंबित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-issues-notice-to-the-center-and-the-ugc/article-81181"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">UGC Equality Rules 2026: नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ के विरुद्ध दायर दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इन याचिकाओं की सुनवाई पहले से लंबित मामलों के साथ संयुक्त रूप से की जाए, ताकि पूरे विषय पर एक साथ विचार हो सके। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि नए नियमों की कुछ धाराएं समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। विशेष आपत्ति इस बात पर जताई गई है कि ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की परिभाषा को सीमित दायरे में रखा गया है, जिससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शिकायत दर्ज कराने में विधिक संरक्षण नहीं मिल पाता। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में निहित समानता के अधिकार से मेल नहीं खाती।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं के अनुसार, नियमों की वर्तमान संरचना उच्च शिक्षा परिसरों में संतुलन के बजाय विभाजन की भावना उत्पन्न कर सकती है। उनका तर्क है कि किसी भी प्रकार की भेदभाव-रोधी व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए। Supreme Court</p>
<h3>न्यायालय ने जनवरी 2026 में इन नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई थी</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व जनवरी 2026 में न्यायालय ने इन नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई थी। उस समय न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि कुछ प्रावधानों की भाषा स्पष्ट नहीं है और उनके संभावित दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा गया था तथा नियमों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया गया था। फिलहाल, वर्ष 2012 के पूर्ववर्ती नियम प्रभावी रहेंगे, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया बाधित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि यूजीसी ने 13 जनवरी को नए नियम अधिसूचित किए थे। इनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता सहित विभिन्न आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकना और समान अवसर सुनिश्चित करना बताया गया था। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने इसे असंतुलित बताते हुए विरोध दर्ज कराया और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अब सर्वोच्च न्यायालय सभी संबंधित याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करेगा, जिसके परिणाम पर उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा निर्भर करेगी। Supreme Court</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 17:03:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार-बैंकों को जारी किया नोटिस, जानें क्या है मामला?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली स्थित एक प्रतिष्ठित पंचसितारा होटल की नीलामी से जुड़े प्रकरण पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया और दिवाला संहिता (आईबीसी) के अनुपालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। यह मामला एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय के समक्ष आया है, जिसमें आरोप लगाया गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-supreme-court-has-issued-notices-to-the-government-and-banks-what-is-the-case-about/article-80968"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। दिल्ली स्थित एक प्रतिष्ठित पंचसितारा होटल की नीलामी से जुड़े प्रकरण पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया और दिवाला संहिता (आईबीसी) के अनुपालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। यह मामला एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय के समक्ष आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि संपत्ति के मूल्य निर्धारण और ऋण वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा। Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि संपत्ति के मूल्यांकन में एकरूपता और निष्पक्षता अनिवार्य है। न्यायालय ने यह जानना चाहा कि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मूल्यांकन की पद्धति क्या है और क्या वह आम नागरिकों के मामलों से भिन्न तो नहीं है। पीठ ने कहा कि यदि किसी ऋणी के पास बकाया राशि चुकाकर संपत्ति बचाने का अवसर है, तो उसे विधिसम्मत मौका मिलना चाहिए, परंतु संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी होनी आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने केंद्र सरकार से संबंधित होटल समूह के विरुद्ध की गई कार्यवाही, मूल्यांकन रिपोर्ट तथा दिवाला प्रक्रिया के सभी चरणों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही संबंधित बैंकों और कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया कि ऋण वसूली के दौरान संपत्ति का मूल्य जानबूझकर कम आंका गया, जिससे सार्वजनिक धन को क्षति पहुंच सकती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संसाधनों और बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोपरि है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र और संबंधित पक्षों के उत्तरों के आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी। यह प्रकरण कॉरपोरेट ऋण निपटान और संपत्ति नीलामी में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Supreme Court News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट अरावली पहाड़ियों के स्वत, संज्ञान मामले पर सुनवाई करेगा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय अरावली पहाड़ियों की परिभाषा से संबंधित मुद्दों से जुड़े मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि अरावली को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी भौगोलिक सीमा और परिभाषा को लेकर है। पहाड़ियों की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-supreme-court-will-hear-the-suo-motu-case-regarding-the-aravalli-hills/article-79774"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/supreme-court-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय अरावली पहाड़ियों की परिभाषा से संबंधित मुद्दों से जुड़े मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि अरावली को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी भौगोलिक सीमा और परिभाषा को लेकर है। पहाड़ियों की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण कई बार निर्माण कार्यों और खनन को लेकर नियमों का उल्लंघन होता है। इससे पहले, न्यायालय ने अरावली में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के खिलाफ निर्णय लिया था। न्यायालय का मानना था कि इस तरह का निषेध अवैध खनन गतिविधियों को जन्म दे सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 12:50:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>CJI Appointment: भारत को जल्द मिलने वाला है नया मुख्य न्यायाधीश, गवई ने नियुक्त किया अपना उत्तराधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[CJI Appointment:नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। इस औपचारिक प्रक्रिया के साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के अंतिम चरण की एक प्रमुख प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी की है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/india-will-soon-have-a-new-chief-justice-gavai-has-appointed-his-successor/article-77373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/justice-surya-kant.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">CJI Appointment:नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। इस औपचारिक प्रक्रिया के साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के अंतिम चरण की एक प्रमुख प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी की है। CJI Appointment News</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायिक परंपरा के अनुसार, वर्तमान मुख्य न्यायाधीश ही अपने उत्तराधिकारी के नाम की अनुशंसा करते हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत वरिष्ठता क्रम में अगले स्थान पर हैं और वे 23 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति गवई के सेवानिवृत्त होने के बाद भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। सरकारी अधिसूचना जारी होने के पश्चात न्यायमूर्ति सूर्यकांत लगभग 14 महीने (फरवरी 2027 तक) इस पद पर कार्य करेंगे। ज्ञात हो कि उन्हें मई 2019 में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">स्रोतों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश गवई ने अपनी अनुशंसा की प्रति व्यक्तिगत रूप से न्यायमूर्ति सूर्यकांत को सौंप दी है। यह प्रक्रिया केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के उस पत्र के जवाब में की गई, जिसमें परंपरानुसार उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश मांगी गई थी। यदि उनकी नियुक्ति औपचारिक रूप से मंजूर होती है, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत हरियाणा से आने वाले पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे। मुख्य न्यायाधीश गवई ने अपने वक्तव्य में न्यायमूर्ति सूर्यकांत की निष्ठा, निष्पक्षता और नेतृत्व क्षमता पर पूर्ण विश्वास जताया है। CJI Appointment News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 11:50:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में वकील का हंगामा, पुलिस ने लिया हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[CJI BR Gavai Court Controversy: नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब अधिवक्ता राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हंगामा खड़ा कर दिया। आरोप है कि वकील ने अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली और न्यायालय के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lawyer-creates-ruckus-in-supreme-court-police-detains-him/article-76597"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/supreme-court-of-india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">CJI BR Gavai Court Controversy: नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब अधिवक्ता राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हंगामा खड़ा कर दिया। आरोप है कि वकील ने अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली और न्यायालय के प्रति असंयमित व्यवहार प्रदर्शित किया। Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">घटना उस समय हुई जब पीठ वकीलों के विभिन्न मामलों की मेंशनिंग सुन रही थी। इसी बीच अधिवक्ता राकेश किशोर अचानक भड़क उठे और कोर्ट कक्ष में नारे लगाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’ का नारा लगाया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने स्थिति में शांत और संयमित रवैया अपनाते हुए कहा कि, “कोर्ट की कार्यवाही किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होगी। हम ऐसे कृत्यों से प्रभावित नहीं होते।” इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित वकील को हिरासत में लेकर सुप्रीम कोर्ट परिसर स्थित डीसीपी कार्यालय ले जाया, जहाँ उनसे पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिकारियों, सचिवालय और सुरक्षा प्रभारी से तत्काल बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। संगठन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “एक वकील द्वारा न्यायालय के प्रति असंयमित आचरण अत्यंत निंदनीय है। यह न केवल मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्तियों की गरिमा का अनादर है, बल्कि बार और बेंच के बीच पारस्परिक सम्मान की परंपरा को भी ठेस पहुँचाता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में इस कृत्य को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता के विश्वास पर सीधा आघात बताया। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह इस घटना का स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही आरंभ करे, ताकि यह संदेश जाए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ संयम और अनुशासन की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है, विशेष रूप से न्यायालय के अधिकारियों यानी वकीलों के लिए। Supreme Court News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 15:20:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Supreme Court firecracker ban: दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme Court firecracker ban: नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को सही तरीके से लागू न किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित पक्षों से परामर्श कर एक व्यावहारिक और ठोस नीति तैयार करे, जिससे आदेश का प्रभावी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/a-pan-india-policy-on-firecrackers-should-be-made-supreme-court/article-76219"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/supreme-court-of-india-22.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Supreme Court firecracker ban: नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को सही तरीके से लागू न किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित पक्षों से परामर्श कर एक व्यावहारिक और ठोस नीति तैयार करे, जिससे आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी प्रतिबंध का दुष्परिणाम नकारात्मक रूप में भी सामने आ सकता है। उदाहरण देते हुए अदालत ने कहा कि जैसे बिहार में खनन पर रोक ने अवैध खनन माफिया को जन्म दिया, वैसे ही पटाखों पर नियंत्रण के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्रीन पटाखों (पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाजी) का निर्माण सीमित स्तर पर किया जा सकता है, किंतु इन्हें दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में न तो बेचा जाएगा और न ही प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र से आग्रह किया कि वह राज्य सरकारों, पटाखा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के साथ मिलकर दीर्घकालिक समाधान निकाले।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को तय की गई है। इससे पूर्व 12 सितंबर को भी सर्वोच्च न्यायालय ने वायु प्रदूषण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर दिल्ली-एनसीआर के लोगों को शुद्ध वायु का अधिकार है, तो देश के अन्य शहरों के नागरिकों को भी यह समान रूप से मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा था कि पिछले वर्ष अमृतसर यात्रा के दौरान उन्हें वहां की वायु गुणवत्ता दिल्ली से भी अधिक खराब लगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि पटाखों पर रोक लगानी है तो यह केवल राजधानी तक सीमित न रहकर पूरे देश में लागू होनी चाहिए। Supreme Court News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 14:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Delhi Riots Case Update: दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद व शरजील इमाम की ज़मानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आई बड़ी अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कार्यकर्ताओं उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर की ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी है। अब यह मामला 22 सितंबर को फिर से विचाराधीन होगा। इस पर सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति मनमोहन की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-supreme-court-has-issued-a-major-update-regarding-the-bail-granted-to-umar-khalid-and-sharjeel-imam-in-the-delhi-riots-case/article-75928"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/supreme-court-of-india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कार्यकर्ताओं उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर की ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी है। अब यह मामला 22 सितंबर को फिर से विचाराधीन होगा। इस पर सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ कर रही है। ये सभी आरोपी वर्ष 2020 से ही न्यायिक हिरासत में हैं और उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से नकारा है। Delhi Riots Case News</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में, 2 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नौ आरोपियों की ज़मानत याचिकाएँ खारिज करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के अंतर्गत सुरक्षित है, लेकिन इसका उपयोग हिंसा या अव्यवस्था फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि नागरिकों को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, किंतु इस अधिकार पर ‘उचित प्रतिबंध’ लगाए जा सकते हैं ताकि सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम सहित जिन लोगों की ज़मानत खारिज हुई है उनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतहर खान, अब्दुल खालिद सैफी और शादाब अहमद शामिल हैं। अब सबकी निगाहें 22 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब सर्वोच्च न्यायालय यह तय करेगा कि आरोपियों को राहत मिलेगी या नहीं। Delhi Riots Case News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 15:46:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court: दिव्यांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आया ये बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[दिव्यांगों का मजाक उड़ाने वालों को मांगनी पड़ेगी माफी नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अथवा गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का मज़ाक उड़ाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्टैंडअप कलाकार समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-courts-big-decision-regarding-disabled-people/article-75044"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/disabled-supreme.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">दिव्यांगों का मजाक उड़ाने वालों को मांगनी पड़ेगी माफी</h3>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अथवा गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का मज़ाक उड़ाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्टैंडअप कलाकार समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने यूट्यूब चैनलों पर सार्वजनिक रूप से माफी माँगें। Supreme Court News Today</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने टिप्पणी की कि हास्य-व्यंग्य के नाम पर किसी की पीड़ा का उपहास करना न तो सामाजिक दृष्टि से उचित है और न ही विधि की दृष्टि से। साथ ही स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि किसी की शारीरिक अक्षमता या रोग को हंसी का विषय बनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि कलाकारों द्वारा की जाने वाली माफी केवल औपचारिक न हो, बल्कि उसमें सच्ची भावना परिलक्षित हो ताकि समाज में सकारात्मक संदेश पहुँच सके। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी इन कलाकारों ने तुरंत खेद व्यक्त करने के बजाय सफाई देने का प्रयास किया, जिसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया गया।</p>
<h3>केंद्र सोशल मीडिया मंचों के लिए स्पष्ट और सुदृढ़ नीतियाँ बनाए</h3>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सोशल मीडिया मंचों के लिए स्पष्ट और सुदृढ़ नीतियाँ बनाए, जिनमें सभी पक्षकारों—कंटेंट निर्माता, प्लेटफ़ॉर्म संचालक, सरकारी संस्थाएँ और आम नागरिक—की राय सम्मिलित हो। न्यायालय ने कहा कि जब सोशल मीडिया आय का माध्यम बन चुका है, तो इसके साथ ज़िम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने सभी संबंधित कॉमेडियनों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से हलफ़नामा दाख़िल करने को कहा है, जिसमें यह उल्लेख हो कि वे अपने मंच का उपयोग दिव्यांगजनों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए कैसे करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि एक फाउंडेशन ने याचिका दायर कर यह मुद्दा उठाया था कि कुछ स्टैंडअप कलाकारों ने अपने कार्यक्रमों और वीडियो में ‘स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी’ से पीड़ितों तथा नेत्रहीनों का मज़ाक उड़ाया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल अमानवीय है, बल्कि समाज के संवेदनशील वर्गों को हंसी का पात्र बनाकर उनके सम्मान को ठेस पहुँचाती है। Supreme Court News Today</p>
<p><a title="School Holiday: राजस्थान में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, 19 जिलों में स्कूल बंद" href="http://10.0.0.122:1245/heavy-rain-warning-in-rajasthan-schools-closed-in-19-districts/">School Holiday: राजस्थान में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, 19 जिलों में स्कूल बंद</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:03:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Supreme court News: नई ओबीसी सूची पर सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme court News: नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की नयी सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-courts-big-decision-on-the-new-obc-list/article-74002"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/supreme-court-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Supreme court News: नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की नयी सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि इस मामले में यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने यह कहते हुए कि आरक्षण कार्यपालिका की कार्यप्रणाली का एक हिस्सा है, उच्च न्यायालय के उस आदेश को प्रथम दृष्टया गलत बताया और उस पर रोक लगा दी। पीठ ने कहा, ‘यह आश्चर्यजनक है! उच्च न्यायालय इस तरह कैसे रोक लगा सकता है? आरक्षण कार्यपालिका के कार्यों का हिस्सा है। पीठ ने आगे कहा, ‘जो भी हो, आयोग (ओबीसी) ने कुछ कार्यप्रणाली अपनाई है, जो सही हो सकती है या गलत, इसका फैसला उच्च न्यायालय करेगा। प्रथम दृष्टया आदेश गलत है। हम आदेश पर रोक लगाते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उच्च न्यायालय को 6-8 सप्ताह के भीतर इस मामले पर फैसला सुनाने का निर्देश दे सकती है। पीठ ने कहा, ‘हम मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करेंगे कि वह एक विशेष पीठ का गठन करें, जिसमें विद्वान न्यायाधीश, (अध्यक्षता करने वाले को छोड़कर) सभी शामिल हों। पश्चिम बंगाल सरकार ने नयी ओबीसी सूची पर रोक लगाने वाले 17 जून के उच्च न्यायालय के आदेश की वैधता को चुनौती दी है। राज्य ने यह नयी सूची मई 2024 में उच्च न्यायालय द्वारा ओबीसी सूची में 77 समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द करने के बाद तैयार की थी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 17:23:52 +0530</pubDate>
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                <title>Nurse Nimisha Priya hanging Case: नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट का आज आएगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Nurse Nimisha Priya hanging Case: नई दिल्ली। यमन में हत्या के आरोप में मृत्युदंड की सजा पा चुकी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में भारत का सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा। यह याचिका “सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल” नामक संगठन की ओर से दायर की गई है, जिसमें भारत सरकार से अनुरोध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-will-give-its-verdict-today-on-the-hanging-of-nurse-nimisha-priya/article-73388"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/supreme-court-of-india-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nurse Nimisha Priya hanging Case: नई दिल्ली। यमन में हत्या के आरोप में मृत्युदंड की सजा पा चुकी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में भारत का सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा। यह याचिका “सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल” नामक संगठन की ओर से दायर की गई है, जिसमें भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह निमिषा की जान बचाने के लिए राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप करे। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ इस संवेदनशील याचिका पर विचार करेगी। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि निमिषा वर्ष 2008 से यमन में रह रही हैं और एक निजी चिकित्सालय में नर्स के रूप में कार्य कर रही थीं। यमन की एक अदालत ने निमिषा प्रिया को अपने व्यवसायिक साझेदार तलाल अब्दो मेहदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए 16 जुलाई को फांसी देने का आदेश दिया है। आरोप है कि हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उसे एक टैंक में फेंक दिया गया था।</p>
<h3>निमिषा के परिजनों ने कहा है कि उन्होंने किसी की हत्या नहीं की</h3>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, निमिषा के परिजनों ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उन्होंने किसी की हत्या नहीं की, बल्कि वह केवल अपना ज़ब्त पासपोर्ट वापस पाना चाहती थीं। उन्होंने दावा किया कि निमिषा ने तलाल को केवल बेहोशी का इंजेक्शन दिया था, लेकिन अधिक मात्रा देने से उसकी आकस्मिक मृत्यु हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में शीघ्र राजनयिक हस्तक्षेप करने की अपील की है। केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि विदेश मंत्रालय इस विषय पर गंभीरतापूर्वक काम कर रहा है और निमिषा के परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। निमिषा ने यमन की सर्वोच्च अदालत में अपनी फांसी की सज़ा के खिलाफ अपील भी दायर की थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति से दया याचना भी की, परंतु वह भी स्वीकृत नहीं हो सकी। Supreme Court</p>
<p><a title="Delhi Double Murder: दिल्ली में एक अत्यंत दुखद और चौंकाने वाली घटना ने सबको झकझोर दिया!" href="http://10.0.0.122:1245/in-delhi-two-friends-killed-each-other-by-stabbing-each-other-with-knives/">Delhi Double Murder: दिल्ली में एक अत्यंत दुखद और चौंकाने वाली घटना ने सबको झकझोर दिया!</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jul 2025 10:48:44 +0530</pubDate>
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                <title>Supreme Court News: ईडी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Supreme Court News: उच्चतम न्यायालय ने शराब दुकानों के लाइसेंस जारी करने से संबंधित कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में तमिलनाडु राज्य विपणन निगम के खिलाफ धन शोधन जांच पर रोक लगाते हुए वीरवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संविधान का उल्लंघन करके सारी सीमाएं लांघ रहा है। मुख्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-made-a-strong-comment-on-ed/article-71254"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/supreme-court-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Supreme Court News: उच्चतम न्यायालय ने शराब दुकानों के लाइसेंस जारी करने से संबंधित कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में तमिलनाडु राज्य विपणन निगम के खिलाफ धन शोधन जांच पर रोक लगाते हुए वीरवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संविधान का उल्लंघन करके सारी सीमाएं लांघ रहा है। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति आॅगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर कथित 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले में ईडी जांच की अनुमति देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने केंद्रीय एजेंसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से कहा, ‘आपका ईडी सारी हदें पार कर रहा है। आपका कार्यालय किसी निगम पर छापेमारी कैसे कर सकता है? आप देश के संघीय ढांचे का पूरी तरह उल्लंघन कर रहे हैं। शीर्ष न्यायालय ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद करेगा। Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">तमिलनाडु सरकार ने ईडी ओर से सरकारी शराब खुदरा विक्रेता तमिलनाडु राज्य विपणन निगम के परिसरों में जांच के दौरान की गई छापेमारी की वैधता को चुनौती दी थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने 23 अप्रैल, 2025 को राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी और ईडी की कार्रवाई को हरी झंडी दे दी थी। उच्च न्यायालय ने ईडी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी। उच्च न्यायालय ने निगम द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था कि चेन्नई में तलाशी के दौरान ईडी ने उसके कर्मचारियों और अधिकारियों को परेशान किया था। Supreme Court News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा अध्यक्ष की चाची के निधन पर किया शोक व्यक्त" href="http://10.0.0.122:1245/cm-nayab-singh-saini-expressed-condolences-on-the-demise-of-the-assembly-speakers-aunt/">मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा अध्यक्ष की चाची के निधन पर किया शोक व्यक्त</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 May 2025 16:02:09 +0530</pubDate>
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