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                <title>Court News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Court News: निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर कोर्ट ने दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[देहरादून (एजेंसी)। Court News:  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिए हैं कि इस मुद्दे का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और अखबारों में प्रकाशन भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि संबंधित निजी स्कूल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/court-issues-directions-on-arbitrary-fees-charged-by-private-schools/article-76135"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/court-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देहरादून (एजेंसी)। </strong>Court News:  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिए हैं कि इस मुद्दे का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और अखबारों में प्रकाशन भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि संबंधित निजी स्कूल अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रख सकें। पूर्व में हुई सुनवाई में अदालत ने प्रदेश के सभी स्कूल एसोसिएशन को पक्षकार बनाने और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">देहरादून के अधिवक्ता जसविन्दर सिंह ने यह जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने याचिका में आरोप लगाया कि देहरादून के कुछ निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा एडमिशन, यूनिफॉर्म, रजिस्ट्रेशन सहित कई तरह के अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। वहीं, सरकार द्वारा वर्ष 2017 में तय किए गए मानकों के अनुसार, स्कूल एक बार प्रवेश के बाद दोबारा एडमिशन शुल्क नहीं ले सकते। कॉशन मनी के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। फीस वृद्धि केवल तीन साल्९ा में एक बार और अधिकतम 10% तक ही की जा सकती है। किसी भी समिति, न्यास, कंपनी या स्कूल को एडमिशन शुल्क या चंदा वसूलने का अधिकार नहीं है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab: इस कार्य में पंजाब पूरे देश में आया सबसे आगे, सीएम मान खुश" href="http://10.0.0.122:1245/punjab-citizens-get-direct-benefits-of-timely-government-services/">Punjab: इस कार्य में पंजाब पूरे देश में आया सबसे आगे, सीएम मान खुश</a></p>
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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 16:39:22 +0530</pubDate>
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                <title>Electoral Bonds: चुनावी बांड पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग से कहा,‘राजनीतिक दलों के चंदे का विवरण रखें</title>
                                    <description><![CDATA[Electoral Bonds Scheme Hearing: उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा कि चुनावी बांड के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का विवरण रखने का काम 2019 के अंतिम आदेश के मुताबिक जारी रखना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि चंदे का विवरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/on-electoral-bonds-the-supreme-court-told-the-election-commission-to-keep-details-of-donations-of-political-parties/article-54386"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/electoral-bonds.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Electoral Bonds Scheme Hearing: उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा कि चुनावी बांड के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का विवरण रखने का काम 2019 के अंतिम आदेश के मुताबिक जारी रखना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि चंदे का विवरण रखने की कोई समय सीमा नहीं है। वह उचित समय पर उसे देखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने चुनाव आयोग के वकील अमित शर्मा से पूछा कि क्या उनके पास अंतरिम आदेश के अनुसार प्रस्तुत किए गए आंकड़ों का विवरण है? वकील ने कहा कि उनके पास केवल सीलबंद लिफाफा है, जो 2019 में जमा किया गया था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने वकील से कहा कि चंदे के विवरण को अपने पास रखें। यह अदालत उचित समय पर उसे देखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वकील ने स्पष्ट किया कि यह 2019 के चुनाव से संबंधित है। इससे संबंधित अंतरिम आदेश शीर्ष अदालत द्वारा पारित किया गया था। । याचिकाकर्ताओं में से एक स्वयंसेवी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह एक सतत अंतरिम आदेश था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आंकड़े इकट्ठा करने का अंतरिम आदेश का जारी रहेगा। संविधान पीठ ने चुनाव आयोग के वकील से कहा, ‘यह 2019 के चुनाव तक ही सीमित नहीं है। आपको आंकड़े जुटाने का काम जारी रखना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं में से एक का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि चुनावी बांड के माध्यम से फंडिंग केवल चुनाव या चुनावी प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि राजनीतिक दलों की फंडिंग में कोई खर्च नियम शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक कंपनी में शेयरधारक यह सुनिश्चित करने के लिए अपना पैसा लगाते हैं कि निगम एमओयू के ढांचे के भीतर काम करता है। और अब एक तरह से पैसे के उपयोग की शक्ति दी गई है, जो एमओयू के साथ असंगत है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर मतदाता नहीं है, नागरिक मतदाता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Nov 2023 14:23:02 +0530</pubDate>
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                <title>Modi Surname Case: सुप्रीम कोर्ट ने ‘मोदी उपनाम’ मानहानि मामले में राहुल की सजा पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Rahul Gandhi Defamation Case: उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मोदी उपनाम आपराधिक मानहानि मामले में दो वर्षों की सजा पर शुक्रवार को रोक लगा दी। गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज किये जाने के बाद निचली अदालत के फैसले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rahul-gandhi-defamation-case-news/article-50793"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Rahul Gandhi Defamation Case: उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मोदी उपनाम आपराधिक मानहानि मामले में दो वर्षों की सजा पर शुक्रवार को रोक लगा दी। गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज किये जाने के बाद निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति पी वी संजय कुमार की शीर्ष अदालत की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। Modi Surname Case</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि निचली अदालत ने (राहुल गांधी को) अपराधिक मानहानि की सजा के तौर पर भारतीय दंड संहिता के तहत निर्धारित अधिकतम दो सालों की सजा देने के पीछे कोई विशेष वजह नहीं बताई। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में सजा और जुर्माने दोनों के प्रावधान हैं। पीठ में गुजरात उच्च न्यायालय के इस संदर्भ में राहुल गांधी की अपील खारिज करने के फैसले पर कहा कि दोषसिद्धि पर रोक को खारिज करने के लिए काफी पन्ने खर्च किए हैं, लेकिन उनके (उच्च न्यायालय के) आदेशों में इन पहलुओं (अधिकतम सजा देने के कारणों) पर विचार नहीं किया गया है। Modi Surname Case</p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने ‘मोदी सरनेम’ यानी मोदी उपनाम की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता गांधी को अपराधिक मानहानि का दोषी ठहराए जाने के खिलाफ दायर उनकी विशेष अनुमति याचिका पर 21 जुलाई को पूर्णेश मोदी और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया था। कांग्रेस नेता के वर्ष 2019 की एक टिप्पणी के मामले में आपराधिक मानहानि का दोषी ठहराए जाने और इसके लिए दो साल की सजा देने के मामले में निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के सात जुलाई के फैसले के खिलाफ 15 जुलाई 2023 को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/right-time-to-drink-water/">Healthy Tips: खाना खाने से पहले और बाद में कब पीना चाहिए पानी, जानिये …</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 14:49:22 +0530</pubDate>
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