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                <title>Gyanvapi Mosque - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Gyanvapi mosque: ज्ञानवापी का मामला अदालत पर छोड़ना बेहतर</title>
                                    <description><![CDATA[Gyanvapi mosque: ज्ञानवापी परिसर का सर्वे आरंभ हो चुका है। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि इस सर्वे की रिपोर्ट के बाद सच सबके सामने आ जाएगा। और इस सर्वे के आधार पर न्यायालय को भी निर्णय सुनाने में सहायता मिलेगी। ज्ञानवापी का मामला काफी लंबे से विवादों में है। इसे लेकर हिंदू व मुस्लिम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/it-is-better-to-leave-the-case-of-gyanvapi-to-the-court/article-50901"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/gyanvapi-mosque.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Gyanvapi mosque: ज्ञानवापी परिसर का सर्वे आरंभ हो चुका है। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि इस सर्वे की रिपोर्ट के बाद सच सबके सामने आ जाएगा। और इस सर्वे के आधार पर न्यायालय को भी निर्णय सुनाने में सहायता मिलेगी। ज्ञानवापी का मामला काफी लंबे से विवादों में है। इसे लेकर हिंदू व मुस्लिम दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। लेकिन अंतिम निर्णय तो न्यायालय को ही करना है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा सर्वे को न्यायहित में अनिवार्य माना है। अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसकी तुरंत सुनवाई को मंजूरी भी दी है, लेकिन सर्वे जारी रहेगा। Gyanvapi mosque</p>
<p style="text-align:justify;">इस विवाद को अदालत के भरोसे छोड़ दिया जाना बेहतर है, लेकिन ऐसे अनेक ऐतिहासिक साक्ष्य हैं, जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का ही एक हिस्सा है, जिस पर मुगल काल में जबरन कब्जा कर मस्जिद खड़ी कर दी गई। कुछ समय पहले जब वजू खाने में शिवलिंग होने की बात सामने आई तब भी दीवारों और स्तंभों पर हिंदू धार्मिक प्रतीकों की बात उजागर हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">देश-विदेश के अनेक पुरातत्व विशेषज्ञों और इतिहासकारों ने भी इस बात को माना है कि ज्ञानवापी, विश्वनाथ मंदिर के हिस्से में ही बनाई गई और ऐतिहासिक शिवलिंग भी इसके नीचे दबा हो सकता है। एक नंदी प्रतिमा भी है, जो मस्जिद की तरफ मुंह करते हुए खड़ी है, जिसके आधार पर हिंदू पक्ष का दावा है कि भीतर शिवलिंग है। ये साक्ष्य कई पुस्तकों से संकलित किए गए हैं। यह बादशाह औरंगजेब की हुकूमत के दस्तावेजों से भी स्पष्ट है कि 1669 में मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था। इस संदर्भ में वाराणसी की जिला अदालत ने दो कोर्ट कमिश्नरों की अध्यक्षता में ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराया था। Gyanvapi mosque Survey</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च अदालत की संविधान पीठ ने भी अयोध्या विवाद का फैसला एएसआई के सर्वे और खुदाई के आधार पर दिया था। एएसआई भारत सरकार की संस्था है और इसके पुरातात्विक निष्कर्षों को अधिकृत और विज्ञान-सम्मत माना जाता रहा है। इलाहाबाद अदालत ने मस्जिद कमेटी की दलीलों को खारिज कर दिया कि सर्वे से मस्जिद को नुकसान पहुंच सकता है। इन दावों को बेदम करार दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष द्वारा खुदाई से ढांचे को होने वाले नुकसान की आशंका जताए जाने पर एएसआई को निर्देश दिया कि सर्वे के अत्याधुनिक तरीके अपनाए जाएं, जिससे इमारत को किसी तरह की क्षति न पहुंचे। एएसआई ने भी अदालत को आश्वस्त किया है कि आजकल बिना फर्श खोदे या दीवारों की ऊपरी परत को खुरचे भी भीतरी जानकारी हासिल करना संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है अयोध्या में खुदाई इसलिए हुई थी क्योंकि विवादित स्थल पर कोई इमारत नहीं थी। सर्वे वैज्ञानिक होगा और किसी भी तरह की खुदाई नहीं की जाएगी। ग्राउंड पेनिट्रेरटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक का इस्तेमाल कर सर्वे किया जाएगा। फोटोग्राफी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। बहरहाल चूंकि न्यायालय के आदेशानुसार सर्वे होगा और इसमें मस्जिद के ढांचे को क्षति न पहुंचे इसकी सावधानी रखी जाएगी, तब एतराज करने की बजाय मुस्लिम पक्ष को सहयोग करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">14 मई, 2022 को जिन वकीलों ने सर्वे में भूमिका अदा की थी, उनके मुताबिक ज्ञानवापी के भीतर पान के पत्ते के आकार की फूल की आकृतियां, त्रिशूल, स्वास्तिक, दीवार पर अंकित श्लोक और 4 तहखाने भी हैं। काफी संख्या में कमल के फूल की कलाकृति पत्थरों पर खुदी दिखी। एक खंभे पर हिंदी में 7 पंक्तियों में कुछ शब्द उकेरे दिखे। छत वाले तीन गुंबदों के अंदर त्रिशंकु शिखरनुमा आकृतियां दिखीं। भीतरी भाग मंदिर-सा लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर से पश्चिम दीवार के कोने पर मंदिर का मलबा पड़ा है, जिसमें देवी-देवताओं की कलाकृतियां और अन्य शिलापट्ट थे। शिलापट्ट पर शेषनाग की आकृति अंकित है। एक और शिलापट्ट पर सिंदूरी रंग की उभरी हुई कलाकृति है। देव-विग्रह में 4 मूर्तियों की आकृतियां थीं। दीपक जलाने की जगह बनी हुई थी। दीवारें, नींव, खंभा, कुंड, गर्भगृह का दरवाजा, वजूखाने की ओर नंदी का मुख, घंटियां आदि की आकृतियां छपी हुई नहीं, उकेरी हुई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अहम प्रश्न यह है कि क्या किसी मस्जिद में ऐसी कलाकृतियां, आकृतियां और संरचनाएं होती हैं? स्कंदपुराण में भी ज्ञानवापी का विस्तृत उल्लेख है। कहा जाता है कि मस्जिद करीब 400 साल या 600 साल अथवा 1000 साल पुरानी है, इस तथ्य पर भी मुस्लिम संगठनों, नेताओं और धर्मगुरुओं में मतैक्य नहीं है। दरअसल दलीलें ये भी दी जा रही हैं कि उपासना स्थल कानून, 1991 के मद्देनजर इस मस्जिद से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। Gyanvapi mosque</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल इसकी अंतिम व्याख्या तो सर्वोच्च अदालत ही करेगी, लेकिन इस कानून की संवैधानिकता पर सवाल करने वाली कुछ याचिकाएं शीर्ष अदालत के ही विचाराधीन हैं। सभी पक्षों को उस निर्णय की भी प्रतीक्षा करनी चाहिए। किसी भी सुव्यवस्थित देश में अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा एक मानवीय जरूरत है। भारत का संविधान इसकी गारंटी देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञानवापी के अलावा मथुरा की शाही मस्जिद का मामला भी ऐसा ही है। ये दोनों हिंदुओं की आस्था के बड़े केंद्र हैं। इनको लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बना रहे तो ये भावी पीढ़ियों के लिए भी तकलीफदेह होगा। होना तो ये चाहिए था कि स्वाधीनता प्राप्त करने के बाद एक निश्चित समयावधि में ऐसे सभी मामलों को सुलझा लिया होता, जिससे कि व्यर्थ के तनाव न पैदा होते। कोई भी फैसला वैज्ञानिक सबूतों और ऐतिहासिक तथ्यों की रोशनी में होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक मीडिया साक्षात्कार में ज्ञानवापी मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि, अगर ज्ञानवापी को मस्जिद कहेंगे तो विवाद तो होगा ही। सरकार ज्ञानवापी विवाद का समाधान चाहती है। वर्तमान स्थितियों में ऐसा नहीं लगता है कि मुस्लिम पक्ष योगी आदित्यनाथ के सुझाव को स्वीकार करेंगे। ज्ञानवापी का प्रकरण चूंकि अदालत की निगरानी में है इसलिए उसका निर्णय तो अब वहीं से होना ठीक रहेगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ.आशीष वशिष्ठ, वरिष्ठ स्तम्भकार एवं स्वतंत्र पत्रकार</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 14:17:27 +0530</pubDate>
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                <title>Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[Gyanvapi Survey: सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) को सर्वे करने की अनुमति दे दी है। यह मामला संवेदनशील है, अदालत ने सर्वे की बात कही है जो वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण है। पुरातत्व विभाग इतिहास की बारीकियों को वैज्ञानिक ढंग तरीके के साथ देखता है। सर्वे को किसी भी वर्ग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/survey-of-gyanvapi-masjid/article-50835"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/gyanvapi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Gyanvapi Survey: सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) को सर्वे करने की अनुमति दे दी है। यह मामला संवेदनशील है, अदालत ने सर्वे की बात कही है जो वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण है। पुरातत्व विभाग इतिहास की बारीकियों को वैज्ञानिक ढंग तरीके के साथ देखता है। सर्वे को किसी भी वर्ग की जीत या हार के रुप में नहीं देखा जा सकता। सर्वे की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। पुरातत्व विभाग सरकारी विभाग है जो तथ्यों को गहराई से देखता है। सभी वर्गों को चाहिए कि जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती या अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक किसी भी तरह की टिप्पणी करने से गुरेज करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री राम चंद्र जन्मभूमि मामले में मुकदमे की पैरवी करने वालों दोनों पक्षों ने जिस तरह से सदभावना का सबूत दिया वह अपने आप में एक मिसाल थी। मुकदमे के सभ्य संबंधित दोनों पक्षों के नेता इकट्ठे अदालत में जाते थे और अदालत के बाहर चाय की दुकानों पर इकट्ठे बैठकर चाय-पानी भी लेते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञानवापी मस्जिद मामले में भी दोनों पक्षों को शांति और प्रेम-प्यार और सदभावना का सबूत देना चाहिए। बिना मतलब की ब्यानबाजी से गुरेज करके पुरातत्व विभाग की निपुन्नणता और निष्पक्षता पर यकीन करते हुए वैज्ञानिक और ऐतिहासिक सच्चाई को जानने के लिए इंतजार करना चाहिए। मंदिर और मस्जिद की सांझ क्या है यह तो अदालत का फैसला बताएगा परंतु यह संदेश तो जरुर जाता है कि पुराने समय में भी अलग-अलग धार्मिक भाईचारों में प्रेम-प्यार और सांझ रही होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भी चंद लोग ही शरारती हैं जो किसी साजिश का हिस्सा बनकर समाज में धार्मिक सांझ और प्रेम-प्यार में विघ्न डालते हैं, नहीं तो मुसलमानों द्वारा कावड़ियों पर फूलों की वर्षा करना और जन्मष्टमी की झांकियों में मुसलमान व्यक्ति का वाहन चलाना ऐसी मिसालें हैं जो स्थानीय स्तर पर भाईचारक सांझ की मजबूती को पेश करती हैं। इसी तरह हिंदू भाईचारे के लोग ईद की बधाइयां देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में सियासत और विदेशी चालों ने धार्मिक मुद्दों को इतना पेचदार और खतरनाक बना दिया है कि धर्म के नाम पर दंगे-फसाद सुनकर दूर-दराज क्षेत्रों में प्रेम-प्यार के साथ रह रहे हिंदू-मुसलमान सिर पकड़ कर बैठ जाते हैं कि धर्मों के नाम पर लड़ाई कहां से आ गई। सियासी नेताओं, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के नेता देश विरोधी ताकतों को कामयाब न होने दें, इसके लिए आपसी प्यार और भाईचा ही सबसे बड़ी ताकत है। Gyanvapi Survey</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Communalism: रोम-रोम में राम और खुदा है, फिर क्यूँ ये समाज जल रहा है !" href="http://10.0.0.122:1245/there-is-ram-and-god-in-every-rome-then-why-this-society-is-on-fire/">Communalism: रोम-रोम में राम और खुदा है, फिर क्यूँ ये समाज जल रहा है !</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 15:37:47 +0530</pubDate>
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