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                <title>Chandrayaan 3 update - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Chandrayaan 3 update RSS Feed</description>
                
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                <title>Chandrayaan 3 Update: चांद पर इसरो को मिली बड़ी सफलता, दुनिया में मची खलबली</title>
                                    <description><![CDATA[India Moon Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में प्लाज्मा का पता लगाया है, जो अपेक्षाकृत विरल है। चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे हुए रेडियो एनाटॉमी आॅफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव लोनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर- लैंगमुइर प्रोब (रंभा-एलपी) पेलोड ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3s-rambha-payload-found-rarefied-plasma-on-the-moon/article-51809"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3-update.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India Moon Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में प्लाज्मा का पता लगाया है, जो अपेक्षाकृत विरल है। चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे हुए रेडियो एनाटॉमी आॅफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव लोनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर- लैंगमुइर प्रोब (रंभा-एलपी) पेलोड ने दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के ऊपर सतह के निकट चंद्र प्लाज्मा वातावरण का पहली बार माप किया है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिला है कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा अपेक्षाकृत विरल है। ये मात्रात्मक माप संभावित रूप से उस शोर को कम करने में सहायता करते हैं जो चंद्र प्लाज्मा रेडियो तरंग संचार के दौरान उत्पन्न होते है। Chandrayaan 3 Update</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:<br />
In-situ Scientific Experiments</p>
<p>Radio Anatomy of Moon Bound Hypersensitive Ionosphere and Atmosphere – Langmuir Probe (RAMBHA-LP) payload onboard Chandrayaan-3 Lander has made first-ever measurements of the near-surface Lunar plasma environment over the… <a href="https://t.co/n8ifIEr83h">pic.twitter.com/n8ifIEr83h</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1697193322367136042?ref_src=twsrc%5Etfw">August 31, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि इसके अलावा, वे भविष्य में चंद्र आगंतुकों के लिए उन्नत डिजाइन में योगदान दे सकते हैं। रंभा-एलपी पेलोड एक लैंगमुइर प्रोब है जिसे तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल) द्वारा विकसित किया गया है। यह चंद्रयान-3 लैंडर पर लगा है, जो 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा है। रंभा-एलपी पेलोड को चंद्र प्लाज्मा वातावरण के इन-सीटू माप करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है जो चंद्रमा की सतह के सबसे समीप है और जहां चंद्र प्लाज्मा सबसे घना है। रंभा-एलपी पेलोड चंद्र प्लाज्मा वातावरण में इलेक्ट्रॉन घनत्व, तापमान और विद्युत क्षेत्र की माप करेगा। रंभा-एलपी पेलोड के आंकड़ों के प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा अपेक्षाकृत विरल है। Chandrayaan 3 Update</p>
<p>Chandrayaan-3: चांद की सतह पर मूनडांस, इसरो ने जारी किया वीडियो, देखें….</p>
<p style="text-align:justify;">इसका मतलब है कि अंतरिक्ष के इस क्षेत्र में ज्यादा इलेक्ट्रॉन नहीं हैं। चंद्र प्लाज्मा की विरलता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसी तरीके से प्रभावित करता है जिस तरीके से रेडियो तरंगें अंतरिक्ष के माध्यम से फैलती हैं। रम्भा-एलपी पेलोड द्वारा किया गया माप वैज्ञानिकों को चंद्र प्लाज्मा वातावरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इसरो ने यह भी घोषणा किया कि चंद्रयान-3 इन-सीटू वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि लैंडर पर चंद्र भूकंपीय गतिविधि (आईएलएसए) पेलोड – पहला माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) प्रौद्योगिकी- चंद्रमा पर आधारित उपकरण – ने रोवर और अन्य पेलोड गतिविधियों को रिकॉर्ड किया है। आईएलएसए पेलोड को एलईओएस, बैंगलोर द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे यूआरएससी, बेंगलुरु द्वारा विकसित किया गया है। Chandrayaan 3 Update</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 10:35:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Chandrayaan 3: क्या चंद्रयान-3 को चांद पर एलियन्स होने के मिले सबूत? आइये जानते हैं&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3: वर्ष 1960 को चांद पर पहली बार ह्मूमन क्रू पहुंचा और इसके बाद 5 और अमेरिकी अभियान चांद पर भेजे गए। वर्ष 1972 के बाद यह सिलसिला थम गया और तब से कोई भी इन्सान चंद्रमा की धरती पर नहीं उतरा। यही कारण है कि कई वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए। इस बीच […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/did-chandrayaan-3-find-evidence-of-aliens-on-the-moon-lets-know/article-51725"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3: वर्ष 1960 को चांद पर पहली बार ह्मूमन क्रू पहुंचा और इसके बाद 5 और अमेरिकी अभियान चांद पर भेजे गए। वर्ष 1972 के बाद यह सिलसिला थम गया और तब से कोई भी इन्सान चंद्रमा की धरती पर नहीं उतरा। यही कारण है कि कई वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए। इस बीच अपोलो 11 मिशन यानी चंद्रमा पर सबसे पहले इन्सानों के पहुंचने की रिकॉर्डिंग गायब हो गई। इन रील्स में मूनवॉक से लेकर वापसी की वीडियो थी। aliens</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं कहा जाता है कि इन्हीं टेप्स के गायब होने के बाद कहा गया कि शायद ये टेप में कुछ ऐसा था जो चंद्रमा की असलियत थी। शायद चांद पर बहुत कुछ अलग था या शायद वहां एलियन्स रहते हों। यहां तक कि मूनवॉक करने वाले व्यक्तियों की उनसे मुलाकात हुई। क्योंकि उस दौरान किसी भी चीज का लाइव टेलीकास्ट नहीं होता था, रॉ को ही एडिट करके दिखाया जाता था। यही कारण है कि अमेरिका ने असल टेप छिपाकर उतना ही दिखाया, जितना जरूरी लगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जानें विशेषज्ञों की राय</h4>
<p style="text-align:justify;">साइंटिस्ट व यूएफओ विशेषज्ञ स्कॉट वेरिंग ने दावा किया कि चांद के भीतर जो विशालकाय गड्ढे हैं उन्हीं में एलियन्स की बस्तियां होंगी। उन्होंने अपनी बात को साबित करने के लिए वेरिंग ने कई रॉ वीडियोज का सहरा लिया। आपको बता दें कि बाद में वो वीडियो भी गायब हो गए थे। उनका मानना था कि वर्ष 1972 में आखिरी बार चांद पर जाने के दौरान एलियन्स ने अमेरिका को चेतावनी दी होगी या फिर कुछ ऐसा हुआ होगा जिसके बाद टेप गायब हुए और फिर दोबारा वहां पर नहीं गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या चंद्रयान 3 ने एलियन्स की खोज निकाल पाएगा | Chandrayaan 3</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक नया इतिहास रच दिया, जिसका पूरा देश जश्न मना रहा है। 23 अगस्त बुधवार की शाम को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थीं। जिसके बाद से ही विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान अपने काम में जुटे हुए हैं। चंद्रयान 3 हर रोज खोज अभियान चला रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर कुछ दावे किए जा रहे हैं कि चंद्रयान 3 ने एलियन्स के ठिकानों को खोज निकाला है। आपको बता दें कि अभी तक इस तरह की कोई खबर नहीं। अगर कोई भी इस तरह की खबर आती है तो इसरो मीडिया पर आकर ब्रीफ करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चंद्रयान-3: पहली चुनौती में खरा उतरा, देखें इसरो की जारी की गई तस्वीरें</h3>
<p style="text-align:justify;">इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने सोमवार को रोवर प्रज्ञान की कुछ और झलकियां साझा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने अब एक्स पर फोटो शेयर करते हुए बताया, ‘चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान 27 अगस्त को अपने स्थान से 3 मीटर आगे एक 4 मीटर व्यास वाले क्रेटर के पास पहुंचा। बाद में इसरो द्वारा रोवर को वापस लौटने की कमांड दी गई, जिससे ये सुरक्षित एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ रविवार को इसरो ने तापमान भिन्नता का एक ग्राफ जारी किया था जोकि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे चेस्ट पेलोड के चांद की सतह का था। इसरो की ओर से जारी किए गए ग्राफ में चांद की सतह का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक दिखाई दे रहा है। इसरो के अनुसार पेलोड में तापमान जांचने का यंत्र फिट किया गया है जोकि सतह के नीचे 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हुए हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/the-first-moon-burial-was-that-of-dr-eugene-shoemaker/">दुनिया में एक व्यक्ति जिसकी कब्र है चांद पर, जानें, अब तक कितने लोग पहुंचे चंद्रमा पर</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 11:50:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Update: चांद मामा सिर्फ 150 कि.मी. दूर, कहां तक पहुंचा भारत का चंद्रयान-3 ? देखिए लोकेशन</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Update: भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-update/article-51260"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Update: भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद की कक्षा के एक और गोलाकार चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चांद के और करीब वाली कक्षा में पहुंच गया है। चंद्रयान-3 अब चांद के चौथे आॅर्बिट में प्रवेश कर गया है। चंद्रयान अंतरिक्ष यान अब चंद्रमा की सतह से सिर्फ 163 किमी दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि अब तैयारियों का समय आ गया है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्राओं के लिए तैयार हैं। आज चंद्रयान-3 एक और कक्षा लांघ कर चांद के और करीब पहुंच गया। वहीं 17 अगस्त का दिन मिशन के लिए अहम होगा क्योंकि इस दिन चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर से अलग किया जाएगा।<br />
इसरो ने ट्वीट किया, ‘आज की सफल फायरिंग के बाद चंद्रयान-3 को 153 किमी गुणा 163 किमी की कक्षा में स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही चन्द्रयान-3 चंद्रमा से जुड़ी एक और प्रक्रिया को पूरा कर आगे बढ़ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा, ‘यह तैयारियों का समय है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्रा के लिए तैयार हैं। पांच अगस्त को चन्द्रयान-3 के चंद्र कक्षा में प्रवेश करने के बाद इस अंतरिक्ष यान ने अब तक के चार चरणों को पार कर लिया है और चन्द्रमा के बेहद करीब पहुंच गया है। इसके बाद 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को चांद की सतह पर उतरना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाह होगी। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 आशा के अनुरूप सामान्य तरह से काम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान की यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन आॅपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 14:37:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Chandrayaan 3: चन्द्रयान 3 ने किया ऐसा काम&amp;#8230;सब हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई। Chandrayaan-3 LIVE Updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के एक दिन बाद रविवार रात को अंतरिक्ष यान की कक्षा को चंद्र क्षेत्र के अंदर कम कर दिया। इसरो ने एक अद्यतन ट्वीट में कहा, ”चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक एक योजनाबद्ध कक्षा कटौती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-live-updates/article-50894"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई।</strong> Chandrayaan-3 LIVE Updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के एक दिन बाद रविवार रात को अंतरिक्ष यान की कक्षा को चंद्र क्षेत्र के अंदर कम कर दिया। इसरो ने एक अद्यतन ट्वीट में कहा, ”चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक एक योजनाबद्ध कक्षा कटौती प्रक्रिया से गुजरा।”</p>
<p style="text-align:justify;">इंजनों की रेट्रोफायरिंग ने इसे चंद्रमा की सतह के करीब 170 गुना 4313 किलोमीटर तक ला दिया। आज का युद्धाभ्यास चंद्रयान-3 की कक्षा को धीरे-धीरे बढ़ाकर चंद्र ध्रुवों पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध युद्धाभ्यासों की श्रृंखला में पहला था। चंद्र बाउंड आॅर्बिट कार्रवाई 2230 बजे से 2330 बजे के बीच की गई। Chandrayaan 3</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">The Moon, as viewed by <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan3?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Chandrayaan3</a> spacecraft during Lunar Orbit Insertion (LOI) on August 5, 2023.<a href="https://twitter.com/hashtag/ISRO?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ISRO</a> <a href="https://t.co/xQtVyLTu0c">pic.twitter.com/xQtVyLTu0c</a></p>
<p>— LVM3-M4/CHANDRAYAAN-3 MISSION (@chandrayaan_3) <a href="https://twitter.com/chandrayaan_3/status/1688215948531015681?ref_src=twsrc%5Etfw">August 6, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा, ”जैसे-जैसे मिशन आगे बढ़ रहा है, चंद्रयान-3 की कक्षा को धीरे-धीरे कम करने और इसे चंद्र ध्रुवों पर स्थापित करने के लिए कई युक्तियों की योजना बनाई गई है।”Chandrayaan 3 Mission</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ युक्तियों के बाद, प्रणोदन मॉड्यूल कक्षा में रहते हुए लैंडर से अलग हो जाएगा। इसके बाद, 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सॉफ्ट लैंडिंग की सुविधा के लिए जटिल ब्रेकिंग युद्धाभ्यास की एक श्रृंखला को अंजाम दिया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 की सेहत सामान्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से ”पूरे मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के स्वास्थ्य की लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन आॅपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 11:00:55 +0530</pubDate>
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