<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/moon-mission/tag-26665" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>moon mission - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/26665/rss</link>
                <description>moon mission RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Moon Mission: क्या आपको पता है कि चंद्रमा पर मानव ने कब रखा पहला कदम, नहीं तो ये खबर पढ़ों&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Moon Mission:  20 जुलाई 1969 को अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने। यह उपलब्धि नासा के अपोलो-11 मिशन का हिस्सा थी। आर्मस्ट्रॉन्ग ने चंद्रमा की सतह पर उतरते हुए कहा That’s one small step for man, one giant leap for mankind.उनके साथ बज एल्ड्रिन भी चंद्रमा की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/do-you-know-when-man-first-stepped-on-the-moon-if-not-then-read-this-news/article-73637"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/moon-mission.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Moon Mission:  20 जुलाई 1969 को अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने। यह उपलब्धि नासा के अपोलो-11 मिशन का हिस्सा थी। आर्मस्ट्रॉन्ग ने चंद्रमा की सतह पर उतरते हुए कहा That’s one small step for man, one giant leap for mankind.उनके साथ बज एल्ड्रिन भी चंद्रमा की सतह पर उतरे, जबकि तीसरे सदस्य माइकल कॉलिंस कमांड मॉड्यूल में रहे। अपोलो-11 मिशन 16 जुलाई 1969 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ और 20 जुलाई को चंद्रमा की सतह पर ईगल लूनर मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग हुई। इस मिशन ने अमेरिका को तत्कालीन अंतरिक्ष दौड़ में सोवियत संघ पर बढ़त दिलाई। Moon Mission</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहली महिला पीएम बनीं सिरीमावो |</h3>
<p style="text-align:justify;">20 जुलाई 1960 को सिरीमावो बंडारनायके ने श्रीलंका (तब सीलोन) की प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, जिससे वह दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित महिला प्रधानमंत्री बनीं। वह अपने पति एस. डब्ल्यू. आर. डी. बंडारनायके की 1959 में हुई हत्या के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं और उनकी पार्टी श्रीलंका फ्रीडम पार्टी की कमान संभाली। 1960 के आम चुनावों में उनकी पार्टी को बहुमत मिला और उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला। सिरीमावो का कार्यकाल राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने शिक्षा, धर्म और समाजवाद पर आधारित नीतियों को बढ़ावा दिया। उन्होंने बौद्ध धर्म को विशेष स्थान दिया और संयुक्त राष्ट्र और गुटनिरपेक्ष आंदोलन में श्रीलंका की प्रभावशाली भूमिका निभाई। तीन बार (1960-65, 1970-77, और 1994-2000) देश की प्रधानमंत्री बनीं सिरीमावो एक अंतरराष्ट्रीय पहचान वाली नेता थीं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/do-you-know-when-man-first-stepped-on-the-moon-if-not-then-read-this-news/article-73637</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/do-you-know-when-man-first-stepped-on-the-moon-if-not-then-read-this-news/article-73637</guid>
                <pubDate>Sun, 20 Jul 2025 14:11:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-07/moon-mission.jpg"                         length="39776"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 को लेकर इसरों ने किया बड़ा खुलासा, पूरी दुनिया सकते में&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3: 23 अगस्त का वो दिन जब चंद्रयान-3 ने संसार में इतिहास रच दिया था। वहीं आज इसरों ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि जब 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, तो उसने चंद्रमा की धूल और चट्टानों का एक गुच्छा उड़ा दिया था, जिससे लैंडर के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-made-a-big-revelation-regarding-chandrayaan-3-the-whole-world-is-shocked/article-54216"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/chandrayaan-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3: 23 अगस्त का वो दिन जब चंद्रयान-3 ने संसार में इतिहास रच दिया था। वहीं आज इसरों ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि जब 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, तो उसने चंद्रमा की धूल और चट्टानों का एक गुच्छा उड़ा दिया था, जिससे लैंडर के चारों ओर एक उज्ज्वल क्षेत्र बन गया, जैसा कि अपेक्षित था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/dont-throw-away-onion-peels-considering-them-as-garbage-make-onion-shampoo-and-toner-your-hair-will-become-long-till-knees/">Hair Growth: कचरा समझ कर न फेके प्याज के छिलके…बनाए Onion Shampoo और Toner, घुटनों तक हो जाएंगे लंबे बाल</a></p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही विक्रम नीचे उतरा और बाद में चंद्रमा की सतह पर उतरा, उसने अपने अवतरण चरण के थ्रस्टर्स को सक्रिय कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पर्याप्त मात्रा में चंद्र सतही एपि-रेगोलिथ (चंद्र मिट्टी या रेजोलिथ) सामग्री का उत्सर्जन हुआ, जिससे निर्माण हुआ। जिसे वैज्ञानिक अब “परावर्तन विसंगति” या ‘इजेक्टा हेलो’ कह रहे हैं। इसरो ने शुक्रवार को कहा कि ‘23 अगस्त को उतरते समय, चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल ने चंद्र सामग्री का एक शानदार ‘इजेक्टा हेलो’ उत्पन्न किया। एनआरएससी (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 2.06 टन चंद्र एपि-रेजोलिथ को लैंडिंग साइट के आसपास 108.4 वर्ग मीटर के क्षेत्र में विस्थापित और विस्थापित किया गया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Results:<br />
On August 23, 2023, as it descended, the Chandrayaan-3 Lander Module generated a spectacular ‘ejecta halo’ of lunar material.</p>
<p>Scientists from NRSC/ISRO estimate that about 2.06 tonnes of lunar epiregolith were ejected and displaced over an area of 108.4 m²…</p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1717797476403646918?ref_src=twsrc%5Etfw">October 27, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/this-vegetable-will-solve-your-uric-acid-problem-in-a-jiffy/">How To Reduce Uric Acid: ये सब्जी चुटकियों में दूर कर देगी आपकी यूरिक एसिड की समस्या!</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना की जांच करने के लिए, वैज्ञानिकों ने चंद्रयान -2 आॅर्बिटर पर आॅर्बिटर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) का रुख किया। उन्होंने विक्रम की लैंडिंग से कुछ घंटे पहले और बाद में प्राप्त उच्च-रिजॉल्यूशन पंचक्रोमैटिक इमेजरी की तुलना की। परिणाम ‘इजेक्टा हेलो’ का एक विस्तृत लक्षण वर्णन था, जो लैंडर को घेरने वाले एक अनियमित उज्ज्वल पैच के रूप में दिखाई दिया। यह खोज ऐसी घटनाओं के दौरान चंद्र सामग्रियों के व्यवहार पर प्रकाश डालती है और चंद्र भूविज्ञान पर शोध और समझ के लिए नए रास्ते खोलती है। इसके अलावा, अनुभवजन्य संबंधों का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लैंडिंग घटना के दौरान लगभग 2.06 टन चंद्र एपिरेगोलिथ को बाहर निकाला गया था। यह जानकारी चंद्र लैंडिंग में शामिल बलों और गतिशीलता और चंद्र सतह पर उनके प्रभाव के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/cardamom-is-very-beneficial-in-controlling-high-blood-pressure-know-its-benefits/">High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी फायदेमंद है यह मसाला</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/isro-made-a-big-revelation-regarding-chandrayaan-3-the-whole-world-is-shocked/article-54216</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/isro-made-a-big-revelation-regarding-chandrayaan-3-the-whole-world-is-shocked/article-54216</guid>
                <pubDate>Fri, 27 Oct 2023 16:20:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-10/chandrayaan-3-1.jpg"                         length="33498"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Russia Luna-25 Moon Mission: चांद से आई ‘बुरी खबर’ मिशन हुआ फेल&amp;#8230;?</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3 Landing LIVE: Russia के Luna-25 पर अंतरिक्ष से आई बुरी खबर, टूट गया Putin का सपना….. Russia Luna-25 Moon Mission: रूस ने 50 वर्षों के बाद दूसरी बार मून मिशन लॉन्च किया था, जिसको 21 अगस्त को चांद की सतह पर उतरना था। लेकिन रोस्कोस्मोस के अनुसार लूना-25 स्टेशन चंद्रमा से टकरा गया, जिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-bad-news-mission-from-the-moon-failed/article-51401"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/russia-luna-25-moon-mission.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 Landing LIVE: Russia के Luna-25 पर अंतरिक्ष से आई बुरी खबर, टूट गया Putin का सपना…..</h3>
<p style="text-align:justify;">Russia Luna-25 Moon Mission: रूस ने 50 वर्षों के बाद दूसरी बार मून मिशन लॉन्च किया था, जिसको 21 अगस्त को चांद की सतह पर उतरना था। लेकिन रोस्कोस्मोस के अनुसार लूना-25 स्टेशन चंद्रमा से टकरा गया, जिस कारण रूस का मिशन फेल हो गया है। गौरतलब हैं कि रूस ने 11 अगस्त को लूना-25 को लॉन्च किया गया था। Russia Luna-25 Moon Mission</p>
<h3 style="text-align:justify;">मात्र 25 किमी दूर चंद्रयान-3</h3>
<p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 Moon Mission:  विक्रम लैंडर ऐतिहासिक दूरी तय करते हुए चांद से मात्र 25 किमी की दूरी पर है,  चंद्रयान-3 एक-एक करके अपने सभी अहम पड़ाव पार करता जा रहा है और अपनी मंजिल तय करने से मात्र 25 किमी दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि देर रात 1 बजकर 50 मिनट पर विक्रम लैंडर ने सफलतम डी-बूस्टिंग के जरिए चंद्रयान-3 की रफ्तार और धीमी करने में कामयाबी हासिल की है। चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉड्यूल को छोड़कर दूसरा रास्ता पकड़ चुका था। इसी रास्ते पर वह चांद के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुका है। अब मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरने के लिए लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 23 अगस्त की शाम को वह चांद की सतह पर लैंड कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो की ताजा जानकारी के अनुसार अभी चंद्रमा पर रात है और 23 अगस्त को वहां सूर्य उदय होगा। चंद्रयान-3 को अब बस चंद्रमा की सतह पर सूर्य के उदय होने का इंतजार है। क्योंकि विक्रम लैंडर सूरज की रोशनी और ताकत का इस्तेमाल करके अपना मिशन कामयाब करेगा। इसी बीच एक चीज समझना बेहद जरूरी हो गया है कि किसी भी स्पेसक्राफ्ट के लिए चांद पर उतरा अत्यंत मुश्किलों भरा है और हजारों चुनौतियों से परिपूर्ण भी। बताया जा रहा है कि चंद्रमा की सतह आसमान है और वहां पर गड्ढों, पत्थरों के अलावा कुछ भी नहीं है। इस तरह की सतह पर लैंडिंग करना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के अनुसार चांद पर लैंडिंग के अंतिम कुछ किमी पहले की अपेक्षा अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उस वक्त अंतरिक्षयान के थ्रस्ट से गैस निकलती है। इस गैस की वजह से चांद की सतह पर बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है जो आॅनबोर्ड कंप्यूटर और सेंसर्स को नुकसान पहुंचा सकती है या दिग भ्रमित कर सकती है। साथ ही चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के लिए बहुत ज्यादा र्इंधन की आवश्यकता पड़ती है जिसके जरिए सामने की दिशा में जोर लगाकर चंद्रयान की नीचे उतरने की स्पीड कम की जाती है और ऐसे में इतने र्इंधन के साथ उड़ान भरना खतरे से खाली नहीं हो सकता। और तो और चंद्रमा पर पृथ्वी के मुकाबले वातावरण 8 गुना पतला होने के कारण पैराशूट से भी किसी अंतरिक्ष यान को उतारना खतरों से भरा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-bad-news-mission-from-the-moon-failed/article-51401</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/the-bad-news-mission-from-the-moon-failed/article-51401</guid>
                <pubDate>Sun, 20 Aug 2023 15:13:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-08/russia-luna-25-moon-mission.jpg"                         length="58752"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Update: चांद मामा सिर्फ 150 कि.मी. दूर, कहां तक पहुंचा भारत का चंद्रयान-3 ? देखिए लोकेशन</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Update: भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-update/article-51260"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Update: भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद की कक्षा के एक और गोलाकार चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चांद के और करीब वाली कक्षा में पहुंच गया है। चंद्रयान-3 अब चांद के चौथे आॅर्बिट में प्रवेश कर गया है। चंद्रयान अंतरिक्ष यान अब चंद्रमा की सतह से सिर्फ 163 किमी दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि अब तैयारियों का समय आ गया है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्राओं के लिए तैयार हैं। आज चंद्रयान-3 एक और कक्षा लांघ कर चांद के और करीब पहुंच गया। वहीं 17 अगस्त का दिन मिशन के लिए अहम होगा क्योंकि इस दिन चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर से अलग किया जाएगा।<br />
इसरो ने ट्वीट किया, ‘आज की सफल फायरिंग के बाद चंद्रयान-3 को 153 किमी गुणा 163 किमी की कक्षा में स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही चन्द्रयान-3 चंद्रमा से जुड़ी एक और प्रक्रिया को पूरा कर आगे बढ़ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा, ‘यह तैयारियों का समय है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्रा के लिए तैयार हैं। पांच अगस्त को चन्द्रयान-3 के चंद्र कक्षा में प्रवेश करने के बाद इस अंतरिक्ष यान ने अब तक के चार चरणों को पार कर लिया है और चन्द्रमा के बेहद करीब पहुंच गया है। इसके बाद 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को चांद की सतह पर उतरना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाह होगी। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 आशा के अनुरूप सामान्य तरह से काम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान की यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन आॅपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-update/article-51260</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-update/article-51260</guid>
                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 14:37:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-08/chandrayaan-3-11.jpg"                         length="46482"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan-3 vs Luna-25: चंद्रयान-3 या लूना-25: कौन बेहतर? देखें फर्क&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[एक 40 दिन में चाँद पर पहुंचेगा, दूसरे को लगेंगे बस 10 दिन नई दिल्ली। Chandrayaan-3 vs Luna-25: भारत ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए 14 जुलाई को चंद्रयान-3 लॉन्च किया। इसी के लगभग एक महीने बाद, 11 अगस्त को रूस ने अपना मून मिशन ‘लूना-25’ लॉन्च कर दिया। बताया जा रहा है कि चंद्रयान-3 को चांद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-or-luna-25-which-is-better-see-the-difference/article-51157"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-vs-luna-25.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">एक 40 दिन में चाँद पर पहुंचेगा, दूसरे को लगेंगे बस 10 दिन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Chandrayaan-3 vs Luna-25: भारत ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए 14 जुलाई को चंद्रयान-3 लॉन्च किया। इसी के लगभग एक महीने बाद, 11 अगस्त को रूस ने अपना मून मिशन ‘लूना-25’ लॉन्च कर दिया। बताया जा रहा है कि चंद्रयान-3 को चांद की यात्रा पूरी करने में 40 दिन लगेंगे वहीं रूस का लूना-25 सिर्फ 10 दिनों में पहुंच जाएगा। बहुत से लोग यह सोचने लगे कि ऐसा क्यों है? जवाब मिला कि लूना-25 को एक हाई-पावर रॉकेट आगे बढ़ाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, चंद्रयान-3 आगे बढ़ने के लिए चांद और धरती के गुरुत्वाकर्षण बल का प्रयोग करता है। भारत और रूस, दोनों का मकसद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करना है। चांद की रेस में लूना-25 खरगोश की रफ्तार से बढ़ रहा है। दोनों मिशन का लक्ष्य भले ही एक हो, मगर लूना-25 और चंद्रयान-3 में काफी अंतर है। आइए, समझते हैं कि भारत और रूस के ये महत्वाकांक्षी मून मिशन एक-दूसरे से किस तरह भिन्न हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्णनीय है कि भारत का चंद्रयान-3 ग्रेविटेशनल फोर्सेज पर ज्यादा निर्भर है। लॉचिंग के बाद इसे पृथ्वी की दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया। यह उसी रास्ते पर चक्कर काटता रहा, जब तक इसरो के वैज्ञानिकों ने कुछ मैनूवर्स के जरिए चंद्रयान-3 का आॅर्बिट नहीं बढ़ाया। धीरे-धीरे चंद्रयान-3 को धरती से दूर धकेला गया और फिर इसे चांद की कक्षा की ओर गाइड किया गया। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद, ठीक उसी तरह अब धीरे-धीरे चंद्रयान-3 को चांद की ओर धकेला जा रहा है। भारत ने पहले के चंद्रमा मिशनों- चंद्रयान 1 (2008) और चंद्रयान-2 (2019) में भी यही तरीका अपनाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">लूना-25 में हाई-पावर रॉकेट लगा है जो ज्यादा र्इंधन ले जा सकता है। रूस ने इसमें सोयुज 2.1 रॉकेट लगाया है। ये 46.3 मीटर लंबा है। 10.3 मीटर व्यास वाले इस रॉकेट का वजन 313 टन है। चार चरणों के इस रॉकेट ने ‘लूना-25’ लैंडर को धरती के बाहर एक गोलाकार कक्ष में छोड़ दिया। यह इसे चांद की सतह तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त बल देता है। सोयुज रॉकेट की वजह से लूना-25 को धरती की कक्षा में इंतजार नहीं करना पड़ा।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/the-latest-picture-of-chandrayaan-3-showed-the-ocean-of-storm-you-will-also-be-surprised-to-see/">Chandrayaan-3 की ताजा तस्वीर में दिखा तूफान का महासागर, देखकर आप भी हो जाएंगे हैरान</a></p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सतह पर 23 अगस्त, 2023 को सॉफ्ट लैंडिंग करने की उम्मीद है। रूस का लूना-25 उससे दो दिन पहले, 21 अगस्त को चांद की सतह पर उतर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लूना-25 के लैंडर को करीब साल भर तक चांद की सतह पर रहकर स्टडी करना है। वहीं,चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर की मिशन लाइन चंद्रमा के एक दिन के बराबर (धरती के 14 दिन) है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी इसलिए है क्योंकि उन्हें लगता है यहां पर बर्फ जमा हो सकती है। ऐसा हुआ तो उससे र्इंधन, आॅक्सीजन और पीने का पानी निकाला जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लूना-25 में रोवर और लैंडर हैं। इसके लैंडर का वजन 800 किलो है। लूना-25 पहले सॉफ्ट लैंडिंग की प्रैक्टिस करेगा। 1976 के बाद रूस ने अब मून पर यान भेजा है। सिर्फ तीन देश ही ऐसे हैं जो चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने में कामयाब रहे हैं: सोवियत संघ, अमेरिका और चीन। भारत और रूस का टार्गेट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले उतरने का है। 1976 में लॉन्च किया गया लूना-24 चांद की करीब 170 ग्राम मिट्टी लेकर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लौटा था। अंतरिक्ष विज्ञानी व्लादिमीर सार्डिन का कहना है कि ‘लूना-25’ मिशन की सफलता की संभावना 50 फीसदी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-or-luna-25-which-is-better-see-the-difference/article-51157</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-or-luna-25-which-is-better-see-the-difference/article-51157</guid>
                <pubDate>Sun, 13 Aug 2023 15:30:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-08/chandrayaan-3-vs-luna-25.jpg"                         length="49218"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        