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                <title>Chandrayaan-3 Moon Mission - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Chandrayaan-3 Moon Mission RSS Feed</description>
                
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                <title>Chandrayaan-3 moon landing: चांद पर कदम, ऐतिहासिक उपलब्धि!</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3 moon landing: चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतर चुका है। अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत जैसे विकासशील देश के लिए चंद्रमा पर पहुंचना एक ऐतिहासिक और अद्भुत उपलब्धि है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। मात्र 20 वर्षों में चंद्रयान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/step-on-the-moon-historic-achievement/article-51568"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-31.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 moon landing: चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतर चुका है। अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत जैसे विकासशील देश के लिए चंद्रमा पर पहुंचना एक ऐतिहासिक और अद्भुत उपलब्धि है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। मात्र 20 वर्षों में चंद्रयान की सफलता भारत की प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता को साबित करती है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में वैज्ञानिकों की कोई कमी नहीं है। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग में पूरी विशेषज्ञता प्राप्त कर ली है। इससे पूर्व भी भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व भर के विभिन्न देशों के विकास के लिए काम किया है। एक विकासशील देश के लिए धन जुटाने के साथ-साथ प्रतिभाओं को अवसर देना कठिन होता है। चंद्रयान-3 की उपलब्धि के बाद भारतीय वैज्ञानिकों व इसरों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल गए हैं। पहले ही इसरो के माध्यम से कई देश अपने सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ चुके हैं, जिससे भारत को आर्थिक रुप से योगदान मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले लंबे समय से अमेरिका का अंतरिक्ष जांच केंद्र नासा विश्व भर के लिए आर्कषण का केंद्र बना हुआ है, लेकिन अब इसरो भी दुनिया के मानचित्र पर आ गया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि अब इसरो एक पर्यटन स्थल भी बन जाएगा। सभी वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं, जिनकी मेहनत और समर्पण रंग लाया है। इसरो को अगली परियोजनाओं के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए ताकि वैज्ञानिक आगामी नई खोजों को सफलतापूर्वक कर सकें। एक समय था जब इसरो के रॉकेटों पहुंचाने के लिए बैल गाड़ियों का प्रयोग किया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के पास सीमित वित्तीय संसाधन थे। फिर भी इसरो ने प्रगति की और चंद्रमा तक पहुंच गया। यह भी बड़ी बात है कि चन्द्रयान-2 भी नाकामी के बावजूद वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी और मेहनत को जारी रखा। रूस जैसे देश की लूना-25 चंद्र परियोजना की विफलता के बावजूद इसरो के वैज्ञानिकों के हौंसले बुलंद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम यह भी साबित करता है कि आत्मविश्वास और साहस बहुत महत्वपूर्ण है, यदि कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया जाए तो प्रगति निश्चित है। यह भी आवश्यक है कि प्रकृति की गहराई को समझने के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। प्रकृति के वरदान को अवश्य खोजा जाए, लेकिन प्रकृति के चक्र को भी साथ-साथ बरकरार रखा जाए। यह विश्व के अन्य ताकतवर देशों के लिए भी आवश्यक है कि प्रकृति के साथ रिश्ता मित्रता व सद्भावना भरा हो। Chandrayaan-3 moon landing</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Brinjal side effects: इन बीमारियों ने कर रखा है अगर शरीर में घर तो इस सब्जी का सेवन जरा सभंलकर कर" href="http://10.0.0.122:1245/brinjal-side-effects/">Brinjal side effects: इन बीमारियों ने कर रखा है अगर शरीर में घर तो इस सब्जी का सेवन जरा सभंलकर कर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 13:06:17 +0530</pubDate>
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                <title>Chandrayaan-3 budget: चंद्रयान मिशन: बजट जानकर चौक जाएंगे आप!</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3 budget: चंद्रयान-3 भारत का मूल मिशन 23 अगस्त 2023 को एक नया इतिहास रच कर आगे बढ़ चुका है। इस घटनाक्रम का लाइव ब्रॉडकास्ट लाइवस्ट्रीम इसरो की वेबसाइट, इसके यूट्यूब चैनल, इसरो के फेसबुक पेज और डीडी नेशनल टीवी चैनल सहित कई प्लेटफार्म पर दिखाया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्रयान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-mission-you-will-be-shocked-to-know-the-budget/article-51566"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandaryan-mision-1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 budget: चंद्रयान-3 भारत का मूल मिशन 23 अगस्त 2023 को एक नया इतिहास रच कर आगे बढ़ चुका है। इस घटनाक्रम का लाइव ब्रॉडकास्ट लाइवस्ट्रीम इसरो की वेबसाइट, इसके यूट्यूब चैनल, इसरो के फेसबुक पेज और डीडी नेशनल टीवी चैनल सहित कई प्लेटफार्म पर दिखाया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्रयान 3 और इसके पहले के लूनर मिशन पर भारत कितने पैसे खर्च कर चुका है?</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत अब तक खर्च चुका है इतने पैसे!</h3>
<p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 budget: दरअसल भारत का चंद्रयान 3 मिशन आश्चर्यजनक रूप से चंद्रयान-2 से ज्यादा किफायती है। बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन 14 जुलाई, 2023 को लांच हुआ था। इसरो के पूर्व चेयरमैन के मुताबिक इस मिशन का जो अप्रूव्ड कॉस्ट है वो लगभग 250 करोड़ है। इसमें लांच व्हीकल की लागत शामिल नहीं है, लेकिन लैंड रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल की लागत शामिल है। इसके अलावा, लांच सर्विस की लागत 365 करोड़ थी। ऐसे में पूरे मिशन की लागत 615 करोड़ या लगभग 75 मिलियन डॉलर के आसपास है। Mission Chandrayaan-3</p>
<h3 style="text-align:justify;">चंद्रयान-2 का बजट</h3>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान 2 तो भारत का सबसे महंगा लूनर मिशन रहा है हालांकि यह असफल हो गया था। जानकारी के मुताबिक मिशन में लैंडर, आॅर्बिटर, रोवर, नेविगेशन और ग्राउंड स्पोर्ट नेटवर्क की लगात 603 करोड़ थी, जबकि जियो-स्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की लागत 375 करोड़ थी, जिससे चंद्रयान-2 का टोटल बजट 978 करोड़ पर पहुंचा था, इसलिए यह लूनर मिशन सबसे महंगा पड़ा। Chandrayaan-3 Latest Update</p>
<h3 style="text-align:justify;">चंद्रयान-1 का बजट</h3>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-1 भारत के चंद्रयान मिशन का पहले लूनर प्रोब था, इसे अक्टूबर सन 2008 में लॉन्च किया गया था और इसने अगस्त सन 2009 तक काम किया था। इस मिशन के साथ ही इसरो चांद की सतह पर पहुंचने वाला पांचवा नेशनल स्पेस एजेंसी बन गया। इस मिशन की लागत का अनुमान लगाया जाए तो 386 करोड रुपए या लगभग 48 मिलियन डॉलर था तो यानी कुल मिलाकर भारत ने चंद्रयान मिशन पर 1,976 करोड़ या लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। Chandrayaan-3 budget</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Saving Account: बचत खाता धारकों के लिए खुशखबरी, यह बैंक दे रहा सेविंग पर ज्यादा ब्याज!" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-for-savings-account-holders-this-bank-is-giving-more-interest-on-savings/">Saving Account: बचत खाता धारकों के लिए खुशखबरी, यह बैंक दे रहा सेविंग पर ज्यादा ब्याज!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 12:17:29 +0530</pubDate>
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                <title>Chandrayaan-3 LIVE Updates: कर लो मेरा ऐतबार चलो, चाँद पर कदम धरो! मात्र 25 किमी दूर चंद्रयान-3, लूना-25 गायब!</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3 LIVE Updates: विक्रम लैंडर ऐतिहासिक दूरी तय करते हुए चांद से मात्र 25 किमी की दूरी पर है, वहीं दूसरी ओर रूस के लूना-25 के मून मिशन की बात करें तो उसमें तकनीकी खराबी के चलते मिशन से भटकने की सूचना है। लूना-25 अपने मिशन से गायब हो चुका है। रूसी एजेंसी द्वारा उससे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trust-me-come-on-step-on-the-moon-chandrayaan-3-luna-25-missing-just-25-km-away/article-51391"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-live-updates.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 LIVE Updates: विक्रम लैंडर ऐतिहासिक दूरी तय करते हुए चांद से मात्र 25 किमी की दूरी पर है, वहीं दूसरी ओर रूस के लूना-25 के मून मिशन की बात करें तो उसमें तकनीकी खराबी के चलते मिशन से भटकने की सूचना है। लूना-25 अपने मिशन से गायब हो चुका है। रूसी एजेंसी द्वारा उससे संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत के चंद्रयान-3 की चांद की सतह पर ऐतिहासिक लैंडिंग के मात्र 3 दिन ही शेष हैं। विक्रम लैंडर (Vikram Lander) ने अपनी ऊंचाई के साथ-साथ गति भी धीमी कर ली है। चंद्रयान-3 एक-एक करके अपने सभी अहम पड़ाव पार करता जा रहा है और अपनी मंजिल तय करने से मात्र 25 किमी दूर है। ऐसे में चंद्रयान-3 रूस के लूना-25 से पहले लैंडिंग कर सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि देर रात 1 बजकर 50 मिनट पर विक्रम लैंडर ने सफलतम डी-बूस्टिंग के जरिए चंद्रयान-3 की रफ्तार और धीमी करने में कामयाबी हासिल की है। चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉड्यूल को छोड़कर दूसरा रास्ता पकड़ चुका था। इसी रास्ते पर वह चांद के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुका है। अब मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरने के लिए लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 23 अगस्त की शाम को वह चांद की सतह पर लैंड कर जाएगा। Chandrayaan-3 LIVE Updates</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो की ताजा जानकारी के अनुसार अभी चंद्रमा पर रात है और 23 अगस्त को वहां सूर्य उदय होगा। चंद्रयान-3 को अब बस चंद्रमा की सतह पर सूर्य के उदय होने का इंतजार है। क्योंकि विक्रम लैंडर सूरज की रोशनी और ताकत का इस्तेमाल करके अपना मिशन कामयाब करेगा। इसी बीच एक चीज समझना बेहद जरूरी हो गया है कि किसी भी स्पेसक्राफ्ट के लिए चांद पर उतरा अत्यंत मुश्किलों भरा है और हजारों चुनौतियों से परिपूर्ण भी। बताया जा रहा है कि चंद्रमा की सतह आसमान है और वहां पर गड्ढों, पत्थरों के अलावा कुछ भी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह की सतह पर लैंडिंग करना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। इसरो के अनुसार चांद पर लैंडिंग के अंतिम कुछ किमी पहले की अपेक्षा अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उस वक्त अंतरिक्षयान के थ्रस्ट से गैस निकलती है। इस गैस की वजह से चांद की सतह पर बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है जो आॅनबोर्ड कंप्यूटर और सेंसर्स को नुकसान पहुंचा सकती है या दिग भ्रमित कर सकती है। साथ ही चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के लिए बहुत ज्यादा र्इंधन की आवश्यकता पड़ती है जिसके जरिए सामने की दिशा में जोर लगाकर चंद्रयान की नीचे उतरने की स्पीड कम की जाती है और ऐसे में इतने र्इंधन के साथ उड़ान भरना खतरे से खाली नहीं हो सकता। और तो और चंद्रमा पर पृथ्वी के मुकाबले वातावरण 8 गुना पतला होने के कारण पैराशूट से भी किसी अंतरिक्ष यान को उतारना खतरों से भरा है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/the-body-gives-these-signals-when-cholesterol-increases/">High Cholesterol: कोलेस्ट्रोल बढ़ने पर शरीर देता है ये संकेत, गलती से भी ना करें नजरअंदाज</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Aug 2023 11:17:56 +0530</pubDate>
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