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                <title>G20 Summit 2023 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>G20 Summit: बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवाज बनेगा जी-20</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व और सदस्यता में वृद्धि का मुद्दा एक अंतराल के बाद पुन: चर्चा में आ गया है। जी-20 की दिल्ली शिखर बैठक से पहले और उसके बाद यूएनएससी के भीतर सुधारों को लेकर जिस तरह से वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया आ रही है, उससे लगता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/g-twenty-will-become-the-voice-of-reform-in-multilateral-institutions/article-52277"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व और सदस्यता में वृद्धि का मुद्दा एक अंतराल के बाद पुन: चर्चा में आ गया है। जी-20 की दिल्ली शिखर बैठक से पहले और उसके बाद यूएनएससी के भीतर सुधारों को लेकर जिस तरह से वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया आ रही है, उससे लगता है वर्ल्ड लीडर इसे लेकर गंभीर है। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">जी-20 समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पीएम मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि ग्लोबल गवर्नेस में ज्यादा लोगों की साझेदारी और प्रतिनिधित्व होना चाहिए। हम यूएनएससी में भारत को परमानेंट मेंबर बनाए जाने का समर्थन करते हैं। बैठक से पहले यूएन चीफ एंटोनियो गुटरेस ने भी कहा कि यूएनएससी की मेंबरशिप का फैसला उनके हाथ में नहीं है, लेकिन वो चाहते हैं कि यूएनएससी में सुधार हो और इसमें भारत भी शामिल हो। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">और अब बैठक के बाद जिस तरह से पाकिस्तान के खास मित्र तुर्किये ने भारत का समर्थन किया है, उससे मामले की गंभीरता को समझा जा सकता हैै। तुर्किये के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने कहा कि अगर भारत जैसा देश यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनता है, तो तुर्किये को गर्व होगा। दुनिया पांच से भी बड़ी है। हम सुरक्षा परिषद में सिर्फ इन पांच को नहीं रखना चाहते है। G20 Summit</p>
<h3>भारत लंबे समय से यूएनएससी की परमानेंट सीट के लिए दावा कर रहा है</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले डेढ-दो दशकों से इस बात की चर्चा लगातार बल पकड़ रही है कि संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में कई बहुपक्षीय संस्थान बदलते हुए भू-राजनीतिक परिदृश्य में तालमेल बैठाने में असफल हुए हैं। ये संस्थान बड़ी शक्तियों के बीच आम सहमति विकसित करने और संघर्ष को रोकने में विफल रहे है। ऐसी ही एक संस्था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिष्द अर्थात यूएनएससी है। ग्लोबल पर्सपेक्टिव में इस स्पेस को भरने के लिए हाल के दौर में कई वैकल्पि समूहों का उभार हुआ है। इनमें से कई ऐसे समूह है, जिनमें भारत न केवल शामिल है, बल्कि अहम भूमिका में है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब चूंकि, जी-20 शिखर बैठक की मेजबानी भारत के पास थी, और भारत लंबे समय से यूएनएससी की परमानेंट सीट के लिए दावा कर रहा है। भारत के अलावा, ब्राजील, जर्मनी और जापान भी स्थायी सदस्यता का दावा कर रहे हैं, लेकिन ‘कॉफी क्लब‘ (यूएनएससी में सुधार का विरोध करने वाले राष्ट्रों का अनौपचारिक समूह) के अड़ियल रूख के कारण इन देशों को परमानेंट सीट नहीं मिल पा रही है। ऐसे में यह पहले से ही तय था कि दिल्ली शिखर बैठक के दौरान भारत इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाएगा। भारत ने ऐसा किया भी।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, 1945 में जिस समय संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी उस समय संयुक्त राष्ट्र में 51 और सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी और छह निर्वाचित अस्थायी कुल 11 सदस्य थे। साल 1965 में महासभा ने संकल्प 1991 पारित कर चार्टर में संशोधन करते हुए अस्थायी सदस्यों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी और सदस्य देशों को भौगालिक आधार पर प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान किया गया। ये बदलाव एक सीमा तक तो उपयोगी साबित हुआ लेकिन पी-5 (पांच परमानेंट सदस्य) की वीटो पावर में संशोधन न किए जाने के कारण सुधार की पूरी कवायद बेकार हो गई ।</p>
<h3>संयुक्त राष्ट्र 1945 में बनाया गया एक ‘फ्रोजेन मैकेनिज्म‘ बन कर रह गया</h3>
<p style="text-align:justify;">यूएनएससी में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व का सवाल और सदस्यता में वृद्धि का मुद्दा यूएन की वार्षिक बैठकों में हमेशा उठता रहा है। भारत सहित दुनिया के कई अन्य देश इस बात की मांग करते आए हैं कि बदलती वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप यूएनएससी में सुधार कर भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी को स्थायी सदस्य बनाया जाए। लेकिन महासभा आज तक किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पायी है। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले छह दशकों से चार्टर में सुधार को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी वॉयस आॅफ द ग्लोबल साउथ समिट में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र 1945 में बनाया गया एक ‘फ्रोजेन मैकेनिज्म‘ बन कर रह गया है। एस. जयशंकर ने तो यहां तक कह दिया है कि यूएनएससी पांच लोगों की तरह है, जो ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठे हैं, और नहीं चाहते कि अन्य लोग उसमें प्रवेश करें। उन्होंने टिकट की कीमत बढ़ाने और अन्य प्रतिबंध जैसी बाधाएं डाल दी है। सच तो यह है कि यूएन में सुधार की भारत की मांग को यूएनएससी की स्थायी सदस्यता पाने की आकांक्षा से जोड़कर देखा जाता रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि अलग-अलग मौकों पर विभिन्न देश संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता दिलाने में भारत को समर्थन का आश्वासन तो देते रहे है, लेकिन वे इस मसले पर गंभीर नहीं हुए है। G20 Summit</p>
<h3>आज भारत 1945 वाला भारत नहीं है | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">जहां तक यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का सवाल है, मैं समझता हूं भारत को इस मामले में ज्यादा लामबंदी की जरूरत नहीं है। क्योंकि आज जहां भारत खड़ा है, वहां उसे यूएनएससी की नहीं बल्कि यूएनएससी को भारत की जरूरत होनी चाहिए। आज भारत 1945 वाला भारत नहीं है। आज वह दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता हैं। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी ताकत और चांद के दक्षिणी धू्रव पर पहलकदमी करने वाला पहला देश बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को गंभीरता से लिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सार्क, आसियान, बिम्सटेक, एससीओ, ईब्सा, ब्रिक्स, क्वाड, जी-20 जैसे संगठन वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं, भारत इन संगठनों में अहम भूमिका में है। ऐसे में यूएनएससी की परमानेंट सीट पर भारत का होने का मतलब यूएनएससी के सम्मान में वृद्धि होना है। दूसरा, जिस तरह से पूरी यूएनएससी पर पी-5 देशों का नियंत्रण है, उसे देखते हुए भी भारत जैसे बड़े देश के लिए यह आकर्षण का कोई खास केन्द्र नहीं होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तक यूएन चार्टर में परिवर्तन कर वीटो प्रक्रिया को वोटिंग प्रकिया में नहीं बदला जाता तब तक सुरक्षा परिषद् से उसकी वास्तविक भूमिका की उम्मीद नहीं की जा सकती है। यूके्रन युद्ध ने इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की बढ़ती हुई अप्रासंगिकता को एक झटके में उजागर कर दिया। पूरी दुनिया गवाह है कि कैसे यूएनएससी के एक परमानेंट मैम्बर (रूस) ने अपने पड़ोसी देश पर आक्रमण किया उसकी क्षेत्रीय अखंडता से खिलवाड़ किया और दुनिया की ‘पुलिस मैन’ कहलाने वाली संस्था मूकदर्शक बनी रही। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">संक्षेप में कहें तो बहुधु्रवीय विश्व व्यवस्था में आज भी कुछ देश इस मुगालते में हैं कि दुनिया उनकी जेब में है, और वे इसको जैसे चाहे चला सकते हैं। लेकिन अब जी-20 के नए अध्यक्ष ब्राजील ने यूएनएससी में सुधार को लेकर किसी रोडमैप तक पहुंचने की बात कही है, उसे देखते हुए लगता है कि निकट भविष्य में शायद यूएनएससी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप व्यवहार करती दिखे। G20 Summit</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एन.के. सोमानी, अंतर्राष्टÑीय मामलों के जानकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Sep 2023 15:28:04 +0530</pubDate>
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                <title>G20 Summit: जी-20 का नेतृत्व एवं भारत के समक्ष चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: जी-20 वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने वाला दुनिया की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। यह वैश्विक स्तर पर आर्थिक मामलों को समझने और परस्पर सहयोग करने में बड़ी भूमिका निभाता है। दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना इसके एजेंडे का अहम बिन्दू है। यह विश्व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/leadership-of-g-twenty-and-challenges-before-india/article-52187"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g-20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: जी-20 वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने वाला दुनिया की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। यह वैश्विक स्तर पर आर्थिक मामलों को समझने और परस्पर सहयोग करने में बड़ी भूमिका निभाता है। दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना इसके एजेंडे का अहम बिन्दू है। यह विश्व की दो-तिहाई से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। विश्व के कुल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 80 फीसदी भागीदारी अकेले जी-20 देशों की रहती है। विश्व की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले इस संगठन की इस साल भारत अध्यक्षता कर रहा है। G20 Summit</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जी-20 का इतिहास | G20 Summit </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जी-20 की स्थापना का विचार 90 के दशक में उस वक्त अस्तित्व में आया जब दुनिया के अलग-अलग कोनों में स्थित विकसित और विकासशील देश आर्थिक एवं वित्तीय रूप से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे थे। पूंजीवादी प्रभाव से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के सामूहिक निराकरण की राह तलाशने के उदेश्य को लेकर जी-20 अस्तित्व में आया। समूह की स्थापना की परिकल्पना वर्ष 1999 के वैश्विक मंदी से निबटने के उपायों के लिए जी-7 देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेट किंग्डम और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">1998 में इस समूह में रूस भी जुड़ गया था और समूह का नाम जी- 7 से जी-8 हो गया। वर्ष 1999 में जर्मनी के कोलोन में जी-8 देशों की बैठक हुई इसमें एशिया के आर्थिक संकट पर चर्चा हुई इसके बाद दुनिया के बीस शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाले देशों को एक मंच पर लाने का फैसला किया गया। अत: 25 सिंतबर, 1999 को औपचारिक रूप से अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में जी-20 की स्थापना की गई। आगे चलकर जी-8 को राजनीतिक और जी-20 को आर्थिक मंच के रूप में स्वीकार किया गया। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">प्रांरभ में जी-20 केवल सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों के वार्षिक सम्मेलनों तक सीमित था। लेकिन जब 2008 की वैश्विक मंदी ने यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में लिया तो सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्क्ष्ज्ञ स्वयं इस संगठन के वार्षिक सम्मेलनों में उपस्थित होकर आर्थिक मुददों पर चर्चा करने लगे। राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्षों की उपस्थिति के कारण 2008 के बाद जी-20 और अधिक प्रासंगिक हो गया। वर्ष 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लेने के कारण रूस को इस समूह से बाहर कर दिया गया। क्रीमिया पर कब्जे की घटना के बाद जी-20 की राजनीतिक इकाई अर्थात जी-8 पुन: जी-7 में बदल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरंभ में जी-20 का एक मात्र उदेश्य केवल मध्यम आय वाले देशों की वित्तीय स्थिति को सुरक्षित करना था। लेकिन बाद में इसके एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण, भ्रष्टाचार विरोध और अन्य वैश्विक चुनौतियां के समाधान को भी शामिल कर लिया गया। हालांकि, अभी तक इसका कोई स्थायी मुख्यालय नहीं है। ऐसे में प्रतिवर्ष जिस देश द्वारा जी-20 शिखर बैठक की अध्यक्षता की जाती है, वही देश अनौपचारिक रूप से इसके मुख्यालय का काम करता है। जहां तक समूह की अध्यक्षता का सवाल है, तो अध्यक्षता का निर्धारण प्रत्येक वर्ष सदस्य देश रोटेशन पद्धति के आधार पर करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कौन-कौन से देश शामिल है: आॅस्ट्रेलिया, चीन, ब्राजिल, कोरिया गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, सउदी अरब, रूस, टर्की, यूनाइटेड किंगडम, अर्जेंटीना, कनाडा, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली, भारत, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका व यूरोपीय संघ शामिल हैं। अब भारत के प्रस्ताव से इस संगठन में अफ्रीकन यूनियन भी स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जी-20 की कार्यप्रणाली और उद्धेश्य: जी-20 की कार्यप्रणाली को दो भागों में विभाजित किया गया है। प्रथम, वित्त ट्रैक और द्वितीय शेरपा ट्रैक। वित्त ट्रैक में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केद्रीय बैंक के गवर्नरों द्वारा वित्तीय मामलों को लेकर विचार-विमर्श और संवाद किया जाता है, जबकि शेरपा ट्रैक के अंतर्गत नेताओं के निजी दूत राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक जी-20 के उद्धेश्यों की बात है जी-20 समूह से जुड़े देश वित्तीय नियमों को बढावा देने और भविष्य के वित्तीय संकटों को रोकने की दिशा में भी प्रयासरत रहते हैं। समूह आर्थिक ढांचे के विकास हेतू तो कार्य करता ही है, साथ ही ग्लोबल परिस्थितियों में आने वाले बदलावों पर भी नजर रखता है। इसके अंतर्गत कृषि, रोेजगार, ऊर्जा, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुददों पर विश्व समुदाय को साथ लेकर काम करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जी-20 की अध्यक्षता और भारत</strong>  | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत की विदेश नीति हालिया दौर में वैश्विक मंच पर नेतृतव के तौर पर विकसित हुई है। इसी कड़ी में 1 दिसंबर, 2022 से भारत जी-20 का नेतृत्व ( अध्यक्षता) कर रहा है। भारत द्वारा तैयार किया गया जी-20 लॉगो भी समूह के प्रति भारत की सोच को प्रदर्शित करता है। भारत द्वारा डिजायन किया गया जी-20 लॉगो भारत के राष्ट्रीय घ्वज के रंगों केसरिया, सफेद, हरे समेत नीले रंग से भी प्रेरित है। यह लॉगो भारत के राष्ट्रीय फूल कमल के साथ पृथ्वी ग्रह की तुलना करता है। जो प्रतिकुल परिस्थितियों में भी विकास का प्रतिनिधित्व करता है। अध्यक्षता के दौरान भारत के छोटे-बड़े शहरों में 200 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत के समक्ष चुनौतियां</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद दुनिया दो भागों में बंट गई है। रूस को जी-20 से बहार करने की मांग भी पश्चिमी देशों द्वारा की जा रही है। अहम बात यह है कि भारत के पश्चिमी देशों और रूस दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध है। जहां एक और वह पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल का आयात जारी रखे हुए है, वहीं दूसरी और भारत लगातार रूस से शांतिपूर्ण समाधान की बात कर रहा है। ऐसे में भारत को न केवल जी-20 को बचाना होगा बल्कि समूह के बहुआयामी एजेंडे की विविध क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग भी कायम करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाजित दुनिया में 20 बड़े नेताओं को सामूहिक घोषणा पत्र के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करना भी सरल कार्य नहीं रहने वाला है। बाली शिखर बैठक के दौरान ऐसा हो चुका है। जहां राष्ट्रपति जोको विडोडी ने संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति के लिए अपने देश की राजनीतिक पूंजी को दाव पर लगा दिया था। ऐसे में भारत को सभी मतभेदों के समाधान तलाशने होंगे और वैश्विक शांति के लिए विभिन्न विचारधाराओं के बीच सेतुओं का निर्माण करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या रहेगा भारत का विजन:</strong> जहां तक भारत के विजन का सवाल है तो भारत को इस अठारवें शिखर सम्मेलन में अपने आधार वाक्य एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य पर धैर्य और गंभीरता से के साथ आगे बढ़ना होगा। भारत को जी-20 की अध्यक्षता के दौरान उन देशों के विचारों को भी सामने लाना होगा जिनका समूह में प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके अलावा जी-20 के अध्यक्ष और विकासशील देशों की तिकड़ी के हिस्से के रूप में भारत से उन मुद्दों को आगे बढ़ाने की उम्मीद भी की जा रही है, जो गरीब देशों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे। भारत की जी-20 की अध्यक्षता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत कितनी कुशलता से देशों के बीच दूरियां पाटने, विवादों को खत्म करने, शांति स्थापित करने, संघर्ष को शांत करने और टूट चुकी आपूर्ति श्रृखलाओं को फिर से बहाल करने के लिए रास्ते और साधन खोज पाता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एन.के. सोमानी, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 10 Sep 2023 16:11:41 +0530</pubDate>
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                <title>G20 Summit 2023: PM Modi और British PM Rishi Sunak ने किया ऐसा काम, चीन, पाकिस्तान में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit 2023: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने शनिवार को ब्रिटेल-भारत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत के बारे में ‘सार्थक बातचीत’ की। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान श्री सुनक ने एक ऐतिहासिक व्यापार सौदा देने की ब्रिटेन की महत्वाकांक्षा दोहराई, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों और श्रमिकों को लाभ होगा और वस्तुओं और सेवाओं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-modi-and-british-pm-rishi-sunak-did-such-a-thing-created-a-stir-in-china-and-pakistan/article-52177"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit-2023-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit 2023: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने शनिवार को ब्रिटेल-भारत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत के बारे में ‘सार्थक बातचीत’ की। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान श्री सुनक ने एक ऐतिहासिक व्यापार सौदा देने की ब्रिटेन की महत्वाकांक्षा दोहराई, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों और श्रमिकों को लाभ होगा और वस्तुओं और सेवाओं दोनों में व्यापार बढ़ेगा। ब्रिटिश उच्चायोग की एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, ‘वे इस बात पर सहमत हुए कि मंत्री और वार्ता दल एफटीए की दिशा में तेजी से काम करना जारी रखेंगे। G20 Summit 2023</p>
<p style="text-align:justify;">नेताओं ने ब्रिटेन और भारत के बीच घनिष्ठ और बढ़ते संबंधों पर विचार किया, जो लोगों के बीच ‘जीवित पुल’ का उदाहरण है। वे इस बात पर सहमत हुए कि अतीत पर निर्माण करना और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना, अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी, व्यापार और नवाचार में आधुनिक साझेदारी को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कई कांसुलर मुद्दों पर भी चर्चा की। प्रधान मंत्री सुनक और प्रधान मंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से फिर से मिलने के अवसर का स्वागत किया और सुनक ने एक सफल जी20 शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए फिर से प्रधान मंत्री मोदी को बधाई दी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/aditya-l1-did-wonders-isro-shared-another-big-good-news/">Aditya L1 News: आदित्य एल 1 ने किया कमाल! इसरो ने शेयर की एक और बड़ी खुशखबरी, जी-20 नेता हुए हैरान</a></p>
<h4>जी 20 नेताओं ने दी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि | G20 Summit 2023</h4>
<p style="text-align:justify;">जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने आये विश्व नेताओं ने आज राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग, इटली की प्रधानमंत्री जिओर्जियो मेलोनी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज़, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव तथा अन्य राष्ट्राध्यक्ष/शासनाध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख राजघाट पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजघाट पहुंचने पर सभी मेहमान नेताओं का अंगवस्त्र पहना कर स्वागत किया गया। सभी नेता एकसाथ बापू की समाधि पर गये और तीन ओर एक साथ दो मिनट का मौन धारण करके खड़े रहे और फिर पुष्पचक्र अर्पित किये। मेहमान नेताओं ने आगंतुक पुस्तिका पर अपने उद्गार भी व्यक्त किये।</p>
<p style="text-align:justify;">राजघाट से लौट कर सभी नेता भारत मंडपम पहुंचे जहां पर जी-20 शिखर सम्मेलन में आखिरी सत्र ‘एक भविष्य’ में शिरकत करेंगे और इसके बाद शिखर सम्मेलन का समापन होगा। शिखर सम्मेलन में दो सत्र एक पृथ्वी एक परिवार की थीम पर कल आयोजित किये गये थे। शिखर सम्मेलन का संयुक्त दस्तावेज ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ कल जारी हो चुका है जो सर्वसम्मति से जारी किया गया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/pm-modi-and-british-pm-rishi-sunak-did-such-a-thing-created-a-stir-in-china-and-pakistan/article-52177</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Sep 2023 11:26:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G20 Summit 2023 Live: जी 20 नेताओं ने दी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। G20 Summit 2023 Live: जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने आये विश्व नेताओं ने आज राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/g20-leaders-paid-tribute-to-mahatma-gandhi/article-52174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit-2023-live.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। G20 Summit 2023 Live: जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने आये विश्व नेताओं ने आज राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग, इटली की प्रधानमंत्री जिओर्जियो मेलोनी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव तथा अन्य राष्ट्राध्यक्ष/शासनाध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख राजघाट पहुंचे। G20 Summit 2023 Live</p>
<p style="text-align:justify;">राजघाट पहुंचने पर सभी मेहमान नेताओं का अंगवस्त्र पहना कर स्वागत किया गया। सभी नेता एकसाथ बापू की समाधि पर गये और तीन ओर एक साथ दो मिनट का मौन धारण करके खड़े रहे और फिर पुष्पचक्र अर्पित किये। मेहमान नेताओं ने आगंतुक पुस्तिका पर अपने उद्गार भी व्यक्त किये। राजघाट से लौट कर सभी नेता भारत मंडपम पहुंचे जहां पर जी-20 शिखर सम्मेलन में आखिरी सत्र ‘एक भविष्य’ में शिरकत करेंगे और इसके बाद शिखर सम्मेलन का समापन होगा। शिखर सम्मेलन में दो सत्र एक पृथ्वी एक परिवार की थीम पर कल आयोजित किये गये थे। शिखर सम्मेलन का संयुक्त दस्तावेज ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ कल जारी हो चुका है जो सर्वसम्मति से जारी किया गया। G20 Summit 2023 Live</p>
<h3 style="text-align:justify;">जी20 के प्रति साझा प्रतिबद्धता जताते हुए आया भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका-अमेरिका का संयुक्त वक्तव्य</h3>
<p style="text-align:justify;">हम, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के नेताओं ने विश्व के लिए साझा समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में जी20 के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिए शनिवार को यहां एक साझा बयान जारी किया। जी 20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली आए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडे, ब्राजील के राष्ट्रपति लूइज़ इंसियो लूला दा सिल्वा, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद इन देशों में जी20 के लिए अपने साझी प्रतिबद्धता जतायी। इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है , ‘जी20 के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए नई दिल्ली में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के अवसर पर हमने मुलाकात की।’</p>
<p style="text-align:justify;">जी20 का अगला सम्मेलन ब्राजील , उसके बाद दक्षिण अफ्रीका और उससे अगला अमेरिका की अध्यक्षता में होगा। साझाा बयान में कहा गया है, ‘जी20 की वर्तमान और अगली तीन अध्यक्षताओं के रूप में हम वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की जी20 अध्यक्षता की ऐतिहासिक प्रगति पर आगे काम करेंगे। इस भावना को ध्यान में रखते हुए, विश्व बैंक के अध्यक्ष के साथ, हम बेहतर, बड़े और अधिक प्रभावी बहुपक्षीय विकास बैंकों के निर्माण के प्रति जी20 की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं। ’</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया है, ‘बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपने लोगों को समर्थन देने के लिए, यह प्रतिबद्धता उन कार्यों पर ज़ोर देती है जो जी20 के माध्यम से एक साथ मिलकर किए जा सकते हैं।’</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/g20-leaders-paid-tribute-to-mahatma-gandhi/article-52174</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Sep 2023 10:35:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G20 Summit 2023: 4100 करोड़ का खर्च, 29 देशों का जुटान, आखिर जी-20 सम्मेलन से देश को क्या मिलेगा?</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit 2023: G-20 को लेकर पूरा देश खुशियां मना रहा है और इससे अलग-अलग तरीके की चीजे निकल कर सामने आ रही है। वहीं अगर सुरक्षा व्यवस्था की बात की जाए तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े प्रबंध किए गए हैं। जमीन से लेकर आसमान तक की सुरक्षा की जा रही है। यहां पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/expenditure-of-rs-4100-crore-mobilization-of-29-countries-what-will-the-country-get-from-the-g-20-conference/article-52144"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit-2023-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit 2023: G-20 को लेकर पूरा देश खुशियां मना रहा है और इससे अलग-अलग तरीके की चीजे निकल कर सामने आ रही है। वहीं अगर सुरक्षा व्यवस्था की बात की जाए तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े प्रबंध किए गए हैं। जमीन से लेकर आसमान तक की सुरक्षा की जा रही है। यहां पर 29 देश के नेता प्रतिनिधि करने पहुंच चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन क्या आपको पता है कि G-20 में होने वाले सम्मेलन में कितना खर्च लगने वाला है और कितना लग चुका है, अगर नहीं तो हम बताते हैं कि इसमें कितना खर्च हो चुका है। दरअसल G20 सम्मेलन को लेकर 10 करोड़ यानी की 4100 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान लगाया गया है। वहीं 29 देशों के नेताओं का जुटान और क़रीब 10 डॉलर यानी 4100 करोड़ रुपए खर्च के अनुमान के बीच एक सवाल सभी भारतीयों के मन में है, कि आखिर दिल्ली में हो रहे G20 की मीटिंग से भारत को क्या मिलेगा? वो भी तब, जब चीन और रूस के राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर रहें हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/pm-modi-just-said-such-a-thing-on-the-stage-of-g-20-applause-started/">G20 Summit India: पीएम मोदी ने जी-20 के मंच पर अभी-अभी कह दी ऐसी बात… बजने लगी तालियां</a></p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल पिछले साल G20 की मेजबानी मिलने के बाद से ही भारत सरकार इसकी तैयारियों में जुट गई थी। जानकारी के मुताबिक इसकी तैयारी को लेकर देश के 50 से अधिक शहरों में करीब 200 बैठकों का आयोजन किया गया।<br />
G20 विश्व के 20 सबसे ताकतवर देशों का एक समूह है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक, कूटनीतिक और पर्यावरण के मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है, साथ ही इसका हल निकालने की कोशिश करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं बैठक के कुछ ही घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन बातें उजागर की है उन्होंने कहा कि G20 के एक्शन प्लान के सतत विकास लक्षण में बड़ी तेजी आएगी जो भविष्य की दिशा को निर्धारित करेगा। माना जा रहा है कि G20 महासम्मेलन में तीन विषयों पर सभी नेता बात करेंगे यह विषय है वन अर्थ, वन फैमली ओर वन फ्यूचर। वन अर्थ में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण जैसे पर्यावरण जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएंगी। और अगर वन फ्यूचर की बात की जाए तो ऐसे बड़े मुद्दों पर जितने नेता विदेश से आएंगे सब इस पर बातचीत करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">G20 से भारत को क्या मिलेगा?</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">दुनिया में भारत की छवि मजबूत होंगी।</li>
<li style="text-align:justify;">दुनिया के देशों में नेतृत्व की भावना बदलेंगी।</li>
<li style="text-align:justify;">निवेश आने की संभावना।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Sep 2023 14:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G20 Summit: जी-20 की मेजबानी और भारत की बढ़ती अहमियत</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: नई दिल्ली में 9 से 10 सितम्बर को जी-20 सम्मेलन हो रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सम्मेलन की मेजबानी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ रही लोकप्रियता का संकेत है। बेशक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति वलादीमीर पुतिन द्वारा इस सम्मेलन में न पहुंचने संबंधी चर्चा ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/g-20-hosting-and-indias-growing-importance/article-52066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: नई दिल्ली में 9 से 10 सितम्बर को जी-20 सम्मेलन हो रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सम्मेलन की मेजबानी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ रही लोकप्रियता का संकेत है। बेशक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति वलादीमीर पुतिन द्वारा इस सम्मेलन में न पहुंचने संबंधी चर्चा ने कई शंकाए खड़ी कर दी थी परंतु अब चीन द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि वह भारत की मेजबानी का समर्थन करता है। जिनपिंग की जगह वहां के प्रधानमंत्री ली कियांग भाग ले रहे हैं और इसी तरह रुस के प्रतिनिधि भी आ रहे हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">चर्चा यह रही है कि शी जिनपिंग ज्यादातर उन सम्मेलनों में ही हिस्सा लेते हैं जहां वह हॉवी रहे सकें और अपना एंजेडा सेट कर सकें। अगर इस चर्चा को भी सही मान लिया जाए तो यह भी भारत के लिए प्राप्ति वाली बात है कि जी-20 जैसे संगठन में भारत का इतना स्थान बन गया है कि भारत विरोधी एंजेडे के लिए कोई और देश अपनी कामयाबी की उम्मीद नहीं रखता। रुस के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति के अपने अर्थ हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर भारत को विकसित पश्चिम देशों के साथ मिलकर चलने का मौका मिलेगा। चीन और रुस के राष्ट्रपति के ना आने के कारण कुछ भी हो परंतु भारत को मेजबानी मिलने का समर्थन मिलना इस बात का सबूत है कि भारत की सिद्धांतक पहुंच और समर्था को हर कोई स्वीकार कर रहा है। बेशक यह सम्मेलन सीधे तौर पर भारत-चीन संबंधों को रेखांकित करने वाला मंच नहीं है। फिर भी इस बात की उम्मीद करनी जरुर बनती है कि चीन के किसी नेता के आने या ना आने से भारत को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन की अनुपस्थिति की वजह यूक्रेन के साथ रुस का युद्ध भी माना जा रहा है। ऐसे हालातों में रुस की भारत से दूरी का कोई मुद्दा नहीं रह जाता है। सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मन सहित कई ताकतवार देश भाग ले रहे हैं। इन हालातों में यह सम्मेलन भारत के लिए काफी उपलब्धियों भरा रहने के आसार हैं। यह भी उम्मीद करनी चाहिए कि भारत द्वारा समेलन के माध्यम से विश्व को नई दिशा देने का प्रयत्न करेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Delhi G20 Summit: 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने में भारत और आसियान में सहयोग जरूरी: पीएम" href="http://10.0.0.122:1245/delhi-g20-summit/">Delhi G20 Summit: 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने में भारत और आसियान में सहयोग जरूरी: पीएम</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/g-20-hosting-and-indias-growing-importance/article-52066</link>
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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 13:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G20 Summit: जी-20 सम्मेलन से नए विश्व की संरचना संभव</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: हिंसा, आतंक एवं युद्ध से संत्रस्त दुनियाभर की नजरें 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में होने वाले जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं। यह सम्मेलन इसलिए भी खास है कि भारत इस साल जी-20 का अध्यक्ष होते हुए दुनिया को नई दिशाएं एवं नए आयाम दिए हैं। सम्मेलन ऐसे समय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/structure-of-new-world-possible-through-conference/article-52017"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g-20-summit.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: हिंसा, आतंक एवं युद्ध से संत्रस्त दुनियाभर की नजरें 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में होने वाले जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं। यह सम्मेलन इसलिए भी खास है कि भारत इस साल जी-20 का अध्यक्ष होते हुए दुनिया को नई दिशाएं एवं नए आयाम दिए हैं। सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान की तनातनी और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण को लेकर असुरक्षा एवं अशांति की चिंताओं से घिरी हुई है। हालांकि जी-20 सुरक्षा संबंधी मुद्दों का नहीं, आर्थिक मुद्दों का मंच है, लेकिन सुरक्षा, शांति एवं युद्धमिुक्त से होकर ही आर्थिक उन्नति के रास्ते खुलते हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा चिंताओं ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को जिस तरह प्रभावित कर रखा है, जी-20 देशों के लिए इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना संभव नहीं है। जी-20 के सदस्य देशों की संयुक्त रूप से दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 85 फीसदी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 75 फीसदी की भागीदारी है। इस मंच के अध्यक्ष होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक उन्नति के लिए शांति का सन्देश दिया है, उनका कहना है कि ‘यह युग युद्ध का नहीं है’ सन्देश फिर दुनिया को देने की जरूरत है। चीन की विस्तारवादी नीतियों पर अंकुश के लिए भी सम्मेलन में निर्णायक रूपरेखा एवं दिशाएं तय होनी चाहिए। जाहिर है, दिल्ली शिखर सम्मेलन में जो भी फैसले किए जाएंगे, पूरी दुनिया के लिए महत्त्वपूर्ण होंगे एवं उसी से नई विश्व संरचना संभव होगी।</p>
<h3>विश्व इतिहास के अगले पृष्ठ सचमुच में स्वर्णिम होंगे | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">समूची दुनिया युद्ध नहीं चाहती, अहिंसा एवं शांति की तेजस्विता ही विश्वजनमत की सबसे बड़ी अपेक्षा है, अब अहिंसा कायरता नहीं है बल्कि उन्नत एवं आदर्श विश्व संरचना का आधार है। अब एक दौर अहिंसा का चले, उसकी तेजस्विता का चले तो विश्व इतिहास के अगले पृष्ठ सचमुच में स्वर्णिम होंगे, जी-20 के माध्यम से आर्थिक उन्नति के रास्ते कपोतों के मुंह में गेहूं की बाली लिये होंगे। लेकिन इसकी सबसे बड़ी बाधा चीन एवं रूस पर निर्णय एवं निर्णायक रूपरेखा को तैयार करना ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दूसरे देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों पर सबकी नजरें टिकी थीं, पर दोनों सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। इससे सम्मेलन के उद्देश्यों और संभावनाओं पर खास असर नहीं पड़ेगा। जब अमरीका, ब्रिटेन, आॅस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया जैसे बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं तो दुनिया की मौजूदा चुनौतियों से निपटने की कोई न कोई दिशा जरूर उभरेगी। इसकी संभावनाएं इसलिए भी बढ़ गई हैं, क्योंकि भारत ने नीदरलैंड्स, मिस्र, स्पेन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश समेत नौ ऐसे देशों को भी आमंत्रित किया है, जो जी-20 के सदस्य नहीं हैं।</p>
<h3>मोदी ने दुनिया को एक परिवार बनाने की ओर कदम बढ़ाये हैं | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत ने सारी वसुधा को अपना परिवार मानते हुए ही जी-20 के अध्यक्षीय दायित्व को संभाला है। आज से एक सदी पूर्व अमरीका के शिकागो में सर्वधर्म सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों को ‘बहिनों और भाइयों’ के रूप में सम्बोधित कर स्वामी विवेकानंद ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ की भारतीय भावना का ही विचार तो दिया था, जिसे सुनकर वहां उपस्थित सभी प्रतिनिधि आश्चर्यचकित रह गये और इस संबोधन से गद्गद् होकर बहुत देर तक करतल ध्वनि करते रहे। आज भी मोदी उसी वसुधैव कुटुम्बकम मंत्र को जी-20 का उद्घोष एवं लोगों बनाकर दुनिया को एक परिवार बनाने की ओर कदम बढ़ाये हैं, लेकिन इन राहों में चीन एवं रूस जैसे महत्वाकांक्षी देश कांटे बो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, दुनिया के देशों को यह समझना होगा कि इस वक्त चीन और रूस, दोनों ही अपने हिसाब से दुनिया को संचालित करना चाहते हैं। दोनों की मंशा अपने पड़ोसी देशों की संप्रभुता को नष्ट करने की है और साथ ही, इस सरासर अन्यायपूर्ण व अमानवीय कृत्य में वे जी-20 जैसे मंचों का समर्थन भी चाहते हैं। कैसे भुला दिया जाए कि पुतिन यूक्रेन के खिलाफ बाकायदा युद्ध लड़ रहे हैं, तो चीन ताइवान व भारतीय इलाकों पर लगातार गिद्ध दृष्टि गड़ाकर बैठा है? इसके बावजूद दुनिया में निरंतर सशक्त होते भारत को न तो निराश होना चाहिए और न हार मानकर बैठ जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत को अपनी परम्परा से मिली ऊर्जा से दुनिया में शांति, सुख एवं समृद्धि की कामना एवं प्रयत्न करते रहना हैं। इतिहास साक्षी है कि सभी प्राणियों के सुख-शांति की कामना करने वाले हमारे पूर्वजों ने कहीं भी राजनैतिक सत्ता की प्राप्ति का लक्ष्य रखकर आक्रमण नहीं किया, किसी देश पर अतिक्रमण नहीं किया, किसी देश की सीमाओं पर कब्जा नहीं किया। यदि कहीं संघर्ष की स्थिति आई थी तो लक्ष्य रहा सज्जनों का परित्राण और दुष्टों का विनाश।</p>
<h3>जी-20 में चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग आ रहे हैं | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त जहां कहीं वे गये, वहां अपने सद्व्यवहार और ज्ञान के बल पर उन्होंने भाईचारे और भारतीय संस्कृति की पताका ही लहराई न कि सत्ता के मद में किसी पर आक्रमण किया। आज भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट के लिए अकेले चीनी राष्ट्रपति जिम्मेदार हैं। एकाधिक ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे यह सिद्ध किया जा सकता है कि भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग आ रहे हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि जोड़ने-जुड़ने के शिखर मंच पर चीन की ओर से तोड़ने-टूटने की बातें नहीं होंगी। निश्चित ही भारत ने अपनी अध्यक्षता में जी-20 को और ज्यादा समावेशी मंच बनाया है, अनेक नये देशों को इस मंच से जोड़ा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रयासों से अफ्रीकी संघ भी जी-20 से जुड़ा, जबकि पहले इस मंच पर अफ्रीका के लोगों की आवाज नहीं थी। वैश्विक आर्थिक संकट से उबरने के लिए 1999 में जब जी-20 का गठन किया गया था तो शुरूआत में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और प्रमुख बैंक गवर्नर ही सम्मेलन में बुलाए जाते थे। दिल्ली सम्मेलन में पहली बार करीब 40 देशों के राष्ट्राध्यक्ष व कई वैश्विक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं, निश्चित ही यह सम्मेलन अनूठा एवं विलक्षण होगा और भारत ने इसकी गरिमा के अनुकूल तैयारियां भी भव्य एवं अद्वितीय की है।</p>
<h3>पुतिन यूक्रेन के साथ युद्ध की वजह से आने में असमर्थ हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए यह सम्मेलन सदस्य देशों के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के आधार तलाशने के प्रयास तेज करने का अच्छा मौका है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के साथ युद्ध की वजह से आने में असमर्थ हैं। इसके पीछे उनकी कोई गहरी कूटनीति नहीं है। बावजूद इसके देखने वाले रूस-चीन के शीर्ष नेताओं की जी-20 को गंभीरता से न लेने एवं उनकी बेरूखी का कोई तो मतलब निकालेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा इसलिए भी होगा, क्योंकि जी-20 में शांतिप्रिय पश्चिमी देशों का वर्चस्व हैै। इसके अलावा, शांति के पक्षधर और पंचशील की बुनियाद रखने वाले युद्ध विरोधी भारत के पास इसकी अध्यक्षता है, जिसे लेकर शुरू से चीन असहज है। उसकी असहजता का कारण उसकी विस्तारवादी गतिविधियों एवं कूटनीति पर पानी फिरना है। भारत के विरोध में वह अलग-थलग है। कूटनीति के जानकार मानते हैं कि शी जिनपिंग ने अपने देश का नया नक्शा ऐसे समय में यूं ही नहीं जारी कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के नए नक्शे में कई देशों की सीमाओं का उल्लंघन है। चीन ने केवल भारत के अरुणाचल समेत कुछ इलाकों को ही अपने नये नक्शे में नहीं दिखाया है बल्कि मलेशिया, फिलीपींस, विएतनाम को भी अपने नक्शे में दिखाया है। भारत ने इस पर अपना एतराज जाहिर किया है। सत्य तो यह है कि भारतीय संस्कृति एवं राजनीति की सुदीर्घ यात्रा में विश्व-कल्याण और मानव-कल्याण की भावना सदैव सक्रिय रही है। इस संस्कृति के अंतर्गत उपलब्ध संपूर्ण वाङ्मय में वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना अंत:सलिला सरिता के समान सदा प्रवहमान रही है। इसमें व्यक्ति की अपेक्षा समष्टि को, देश के साथ संपूर्ण विश्व को प्रधानता दी गई है। जी-20 दिल्ली सम्मेलन में विश्व-परिवार की भावना को ही बल दिया जायेगा। G20 Summit</p>
<p style="text-align:right;"><strong> ललित गर्ग, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 13:18:42 +0530</pubDate>
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                <title>3 दिन के लिए दिल्ली &amp;#8216;लॉक&amp;#8217;! जानें क्या खुलेगा, क्या रहेगा बंद!</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारत देश की राजधानी दिल्ली विश्व के सबसे बड़े आयोजन की तैयारी में है। 9 -10 सितंबर को होने वाले दो दिवसीय जी20 सम्मेलन की सारी तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। इस समय भारत पर पूरी दुनिया की नजरें गड़ी हैं, हो भी क्यों ना, पहली बार जी-20 सम्मेलन की मेजबानी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lockdown-in-delhi-for-three-days/article-51874"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/lockdown-news.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारत देश की राजधानी दिल्ली विश्व के सबसे बड़े आयोजन की तैयारी में है। 9 -10 सितंबर को होने वाले दो दिवसीय जी20 सम्मेलन की सारी तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। इस समय भारत पर पूरी दुनिया की नजरें गड़ी हैं, हो भी क्यों ना, पहली बार जी-20 सम्मेलन की मेजबानी जो कर रहा है। इस अवस्था में दिल्ली में 3 दिन लॉकडाउन जैसी स्थिति रहेगी। स्कूल, दफ्तर, मॉल, बाजार सहित कई चीजें ऐसी हैं जो इन दिनों तक बंद रहेंगी। 8 सितंबर को सुबह 5 बजे से 10 सितंबर को रात 11:59 बजे तक नई दिल्ली का पूरा क्षेत्र ‘नियंत्रित क्षेत्रह्ण माना जाएगा। Delhi Lockdown</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जी20 शिखर सम्मेलन 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में बने नए कन्वेंशन सेंटर भारत मंडप में आयोजित होगा। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधि राजघाट, राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा भी जाएंगे। जी20 सम्मेलन के चलते ट्रैफिक पर असर पड़ सकता है। 7 सितंबर से 10 सितंबर तक नई दिल्ली में यातायात में कुछ बदलाव हो सकते हैं। कुछ सड़कें बंद हो सकती हैं और पार्किंग प्रतिबंधित हो सकती है। हालांकि, मेट्रो सेवाएं बाधित नहीं होंगी। Delhi Lockdown</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवायजरी के अनुसार, दिनांक 07 सिंतबर को रात 11:59 बजे तक सभी प्रकार के माल वाहन, वाणिज्यिक वाहन, अंतरराज्यीय बसें और स्थानीय सिटी बसें जैसे दिल्ली परिवहन निगम (डी.टी.सी) बसें और दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डी.आई.एम.टी.एस) बसों को मथुरा रोड, (आश्रम चौक से आगे) भैरों रोड, पुराना किला रोड और प्रगति मैदान सुरंग के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नई दिल्ली जिले के संपूर्ण क्षेत्र को दिनांक 08.09.2023 के 05:00 बजे से 10.09.2023 को 23:59 बजे तक ह्यनियंत्रित क्षेत्रह्ण माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, स्थानीय निवासियों, अधिकृत वाहनों और आपातकालीन वाहनों को नई दिल्ली जिले की सडकों पर यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी। रिंग रोड (महात्मा गांधी मार्ग) के अंदर के पूरे क्षेत्र को दिनांक 08.09.2023 के 05:00 बजे से 10.09.2023 को 23:59 बजे तक विनियमित क्षेत्र माना जाएगा। केवल स्थानीय निवासियों, अधिकृत वाहनों, आपातकालीन वाहनों और हवाई अड्डे, पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों की ओर जाने वाले यात्रियों के वाहनों को रिंग रोड से आगे नई दिल्ली जिले की तरफ सड़कों पर जाने की अनुमति होगी। Delhi Lockdown</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा सामान्य यातायात (एनएच-48 को छोड़कर) नई दिल्ली नगर निगम क्षेत्र के बाहर प्रभावित नहीं होगा। सभी मेडिकल स्टोर, किराना स्टोर, दूध के बूथ और सब्जी और फल की दुकानें नई दिल्ली सहित पूरे दिल्ली में खुली रहेंगी। सरकारी कर्मचारी, मीडियाकर्मी, चिकित्सा पेशेवर और पैरामेडिक्स को ‘नियंत्रित क्षेत्र’ में अपनी निजी वाहनों के साथ-साथ सरकारी वाहनों का उपयोग करने की अनुमति होगी। रिंग रोड और रिंग रोड से आगे दिल्ली की सीमाओं की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाणिज्यिक वाहनों और बसों को सामान्य यातायात की अनुमति होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशनों और आईएसबीटी के लिए यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाया जाएगा क्योंकि ये सभी शिखर सम्मेलन के दौरान भी चालू रहेंगे। नई दिल्ली जिले के भीतर स्थानीय निवासी और अधिकृत वाहनों को जाने की अनुमति होगी। होटलों, अस्पतालों और नई दिल्ली में अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए हाउसकीपिंग, कैटरिंग, वेस्ट मैनेजमेंट आदि से संबंधित वाहनों को सत्यापन के बाद अनुमति दी जाएगी। 9 सितंबर को सुबह 5 बजे से 10 सितंबर को रात 11 बजे तक सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर चढ़ने और उतरने की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="निगम की कचरा उठाने वाली ट्रॉली ने बच्चे को लिया चपेट में" href="http://10.0.0.122:1245/municipal-corporation-garbage-collection-trolley-driver-hits-an-innocent-child-in-indira-nagar/">निगम की कचरा उठाने वाली ट्रॉली ने बच्चे को लिया चपेट में</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 20:06:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>G20 Summit India: दिल्ली बनेगा खालिस्तान&amp;#8217;, मेट्रो स्टेशनों पर लिखे गए नारे</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस विभाग में हड़कम्प, आरोपी की कर रही तलाश Delhi News: जी20 सम्मेलन से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर लिख दिया गया है कि ‘खालिस्तान भारत का हिस्सा है और देश विरोधी नारे लिखे हंै। ‘ इस घटना की वजह से दिल्ली पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। दिल्ली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/delhi-banega-khalistan-slogans-written-at-metro-stations/article-51653"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/g20-summit-india.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में हड़कम्प, आरोपी की कर रही तलाश</h3>
<p style="text-align:justify;">Delhi News: जी20 सम्मेलन से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर लिख दिया गया है कि ‘खालिस्तान भारत का हिस्सा है और देश विरोधी नारे लिखे हंै। ‘ इस घटना की वजह से दिल्ली पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। दिल्ली पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। घटना से खुफिया एजेंसियों की भी नींदें उड़ गई हैं। G20 Summit India</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार दिल्ली के 5 मेट्रो स्टेशनों के पास खालिस्तानी समर्थक विवादास्पद स्लोगन लिखे गए हैं। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सहित स्थानीय जिलों की टीमों को सतर्क कर दिया गया है। इसके साथ ही मेट्रो स्टेशन के पास दीवारों पर प्रधानमंत्री से संबंधित भी कई स्लोगन लिखे गए हैं। भारत विरोधी स्लोगन पूरी तरह से आपत्तिजनक हैं। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की जांच में लगी हुई है। अभी तक घटना के पीछे किसका हाथ है, इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है। G20 Summit India</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली के शिवाजी पार्क मेट्रो स्टेशन, नांगलोई मेट्रो स्टेशन, मादीपुर, पश्चिम विहार और उद्योग विहार महाराज सूरजमल स्टेडियम की दीवारों पर स्लोगन लिखे गए हैं। इसके साथ ही गवर्नमेंट सर्वोदय बाल विद्यालय नांगलोई और पंजाबी बाग की दीवारों पर भी स्लोगन लिखे गए हैं। दिल्ली मेट्रो की दीवार पर श्लोगन लिखा है- ‘दिल्ली बनेगा खालिस्तान एसएफजे, मोदी इंडिया कमिटेड जेनोसाइड आफ सिख, खालिस्तान एसएफजे रेफरेंडम जिंदाबाद’। बता दें कि 12 दिन बाद दिल्ली में जी20 समिट शुरू होने वाला है। जी20 सम्मेलन की तैयारियों को लेकर सभी तरह की तैयारियों को अंतिम चरण में चल रही हैं। लेकिन उससे पहले यह घटना होना चिंतनीय है। दिल्ली पुलिस, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, आईबी, सीबीआई, रॉ व अन्य खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">In more than 5 metro stations somebody has written ‘Delhi Banega Khalistan and Khalistan Zindabad’. Delhi Police is taking legal action against this: Delhi Police <a href="https://t.co/T6U5myjZyv">pic.twitter.com/T6U5myjZyv</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1695684057647153633?ref_src=twsrc%5Etfw">August 27, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि राजधानी दिल्ली में 8 से 10 सितंबर के बीच सिर्फ आवश्यक सेवा वाले वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी इसके अलावा मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य किसी भी वजह से घर से बाहर निकलने पर पाबंदी होगी। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए निर्धारित रास्ते का इस्तेमाल किया जाएगा। 8-10 सितंबर तक दिल्ली में आवाजाही के लिए मेट्रो ही सबसे बेहतर विकल्प हो सकेगा। इस दौरान कुछ मेट्रो स्टेशन भी बंद रह सकते हैं। इन 3 दिनों के लिए घर के राशनों, सभी जरूरी सेवाओं की दुकानें खुली रहेंगी जैसे किराना स्टोर, सब्जी, दूध, दवा की आपूर्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। जी20 सम्मेलन को देखते हुए गैर जरूरी गतिविधियों पर ही रोक लगाई गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">Office रहेंगे बंद</h3>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली की सड़कों पर इन 3 दिन यातायात बाधित रहेगा, जिससे कर्मचारियों को असुविधा न हो इसके लिए दिल्ली और केंद्र सरकार ने सभी निजी आॅफिस, सरकारी कार्यालय बंद रखने का आदेश दिया है। कुछ संस्थान में घर पर रहकर ही काम करने को प्रोत्साहित किया गया है। इस दौरान कार्यालयों के साथ ही दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूलों को भी बंद रखने का आदेश जारी किया गया है, इनमें एमसीडी के स्कूल भी बंद रहेंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Aug 2023 18:37:00 +0530</pubDate>
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