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                <title>Aditya-L1 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Aditya-L1 RSS Feed</description>
                
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                <title>Aditya L1 Mission: आदित्य एल 1 ने इसरो को भेजा कुछ खास, वीडियो देख आप भी कहेंगे वाह क्या बात है&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO Solar Mission:  भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल1 ने ऐसा कमाल कर दिया है जिससे पूरी दुनिया तारीफ कर रही है। दरअसल आदित्य एल 1 ने पृथ्वी व चंद्रमा की सेल्फी और तस्वीरें भी ली है। इस बात की जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधार संगठन इसरों ने ट्वीट कर दी है। गौरतलब है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/aditya-l1-sent-something-special-to-isro/article-52072"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/aditya-l1-mission-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO Solar Mission:  भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल1 ने ऐसा कमाल कर दिया है जिससे पूरी दुनिया तारीफ कर रही है। दरअसल आदित्य एल 1 ने पृथ्वी व चंद्रमा की सेल्फी और तस्वीरें भी ली है। इस बात की जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधार संगठन इसरों ने ट्वीट कर दी है। गौरतलब है कि इससे पहले आदित्य एल 1 ने मंगलवार को पृथ्वी की कक्षा से सम्बधित दूसरी प्रक्रिया सफलता पूर्वक पूरी की थी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Aditya-L1 Mission:<br />
👀Onlooker!</p>
<p>Aditya-L1,<br />
destined for the Sun-Earth L1 point,<br />
takes a selfie and<br />
images of the Earth and the Moon.<a href="https://twitter.com/hashtag/AdityaL1?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#AdityaL1</a> <a href="https://t.co/54KxrfYSwy">pic.twitter.com/54KxrfYSwy</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1699663615169818935?ref_src=twsrc%5Etfw">September 7, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है Aditya L – 1 मिशन? Aditya L1 Mission</h4>
<p style="text-align:justify;">Aditya L – 1 सूर्य के लिए अध्ययन के लिए पहली भारतीय अंतरिक्ष आधारित ऑब्जर्वेटरी (वेधशाला) होगी। इसका काम सूरज पर 24 घंटे नजर रखना होगा। धरती और सूरज के सिस्टम के पांच Lagrangian point है। सूर्यान Lagrangian point 1(L 1) के चारों ओर एक हेली ऑर्बिट में तैनात रहेगा। L 1 पॉइंट की धरती से दूरी 1.5 मिलियन किमी है जबकि सूर्य की पृथ्वी से दूरी 150 मिलियन किमी है। एल 1 पॉइंट इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां से सूर्य पर सातों दिन 24 घंटे नजर रखी जा सकती है, ग्रहण के दौरान भी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/alien-seen-roaming-on-chandrayaan-3/">Aliens in Moon: Chandryan-3 पर घूमते नज़र आया ऐलियन?</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">सूर्य की स्टडी से क्या हासिल होगा? Aditya L1 Mission</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल अंतरिक्ष यान 7 पेलोड लेकर जाएगा यह पेलोड और फोटोस्फेयर (प्रकाशनगर), क्रोमोस्पेयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की सबसे भारी परत (कोरोना) का जायजा लेंगे। सूर्य में होने वाली विस्फोटक प्रक्रियाएं पृथ्वी के नजदीकी स्पेस एरिया में दिक्कत कर सकती है और बहुत से उपग्रह को नुकसान हो सकता है। ऐसी प्रक्रियाओं का पता पहले चल जाए तो बचाव के कदम उठा सकते हैं, लेकिन तमाम स्पेस मशीनों को चलाने के लिए स्पेस के मौसम को समझना जरूरी है। इस मिशन से स्पेस के मौसम को भी समझने में मदद मिल सकती है और इससे सौर हवाओं की भी स्टडी की जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 15:59:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Aditya L1 Mission: सूर्यायान की ये तस्वीर को देख दुनिया हो गई हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[Aditya L1 Mission:  इसरो ने सौर मिशन पर भेजे गये आदित्य एल 1 को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। गौरतलब हैं कि शनिवार को इसकी लॉन्चिंग के बाद मंगलवार सुबह इसरो ने ट्वीट करके बताया कि Aditya L1 ने दूसरी बार अपनी कक्षा सफलतापूर्वक बदल ली है। आदित्य एल1 के कक्षा बदलने के आॅपरेशन के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-world-was-surprised-to-see-this-picture-of-suryaan/article-51971"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/aditya-l1-mission.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aditya L1 Mission:  इसरो ने सौर मिशन पर भेजे गये आदित्य एल 1 को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। गौरतलब हैं कि शनिवार को इसकी लॉन्चिंग के बाद मंगलवार सुबह इसरो ने ट्वीट करके बताया कि Aditya L1 ने दूसरी बार अपनी कक्षा सफलतापूर्वक बदल ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदित्य एल1 के कक्षा बदलने के आॅपरेशन के दौरान बेंगलुरु और पोर्ट ब्लेयर में सैटेलाइट के जरिये इसकी टैकिंग की गई है। आदित्य एल-1 अब 245 कि.मी.गुणा 22459 कि.मी. की कक्षा से निकलकर 282 कि.मी. गुणा 40225 कि.मी. में पहुंच चुका है। आदित्य एल1 की यह दूसरी बड़ी सफलता है और उसने सूरज की ओर अपना कदम और आगे बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि 10 सितंबर को अब रात ढाई बजे तीसरी बार फिर आदित्य एल 1 की कक्षा बदली जायेगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Aditya-L1 Mission:<br />
The second Earth-bound maneuvre (EBN#2) is performed successfully from ISTRAC, Bengaluru.</p>
<p>ISTRAC/ISRO’s ground stations at Mauritius, Bengaluru and Port Blair tracked the satellite during this operation.</p>
<p>The new orbit attained is 282 km x 40225 km.</p>
<p>The next… <a href="https://t.co/GFdqlbNmWg">pic.twitter.com/GFdqlbNmWg</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1698810887614992515?ref_src=twsrc%5Etfw">September 4, 2023</a></p></blockquote>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है Aditya L – 1 मिशन?</h4>
<p style="text-align:justify;">Aditya L – 1 सूर्य के लिए अध्ययन के लिए पहली भारतीय अंतरिक्ष आधारित ऑब्जर्वेटरी (वेधशाला) होगी। इसका काम सूरज पर 24 घंटे नजर रखना होगा। धरती और सूरज के सिस्टम के पांच Lagrangian point है। सूर्यान Lagrangian point 1(L 1) के चारों ओर एक हेली ऑर्बिट में तैनात रहेगा। L 1 पॉइंट की धरती से दूरी 1.5 मिलियन किमी है जबकि सूर्य की पृथ्वी से दूरी 150 मिलियन किमी है। एल 1 पॉइंट इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां से सूर्य पर सातों दिन 24 घंटे नजर रखी जा सकती है, ग्रहण के दौरान भी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सूर्य की स्टडी से क्या हासिल होगा?</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल अंतरिक्ष यान 7 पेलोड लेकर जाएगा यह पेलोड और फोटोस्फेयर (प्रकाशनगर), क्रोमोस्पेयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की सबसे भारी परत (कोरोना) का जायजा लेंगे। सूर्य में होने वाली विस्फोटक प्रक्रियाएं पृथ्वी के नजदीकी स्पेस एरिया में दिक्कत कर सकती है और बहुत से उपग्रह को नुकसान हो सकता है। ऐसी प्रक्रियाओं का पता पहले चल जाए तो बचाव के कदम उठा सकते हैं, लेकिन तमाम स्पेस मशीनों को चलाने के लिए स्पेस के मौसम को समझना जरूरी है। इस मिशन से स्पेस के मौसम को भी समझने में मदद मिल सकती है और इससे सौर हवाओं की भी स्टडी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक हमने आपको इसरो के Aditya -L 1 मिशन के बारे में बताया है। वह कब लॉन्च होगा और यह मिशन क्या है, इसके लांच होने तक कि हमने आपको जानकारी दी है। वही इसे पढ़ कर हर किसी के मन में यह सवाल उठेगा कि आखिर सूरज के पास मिशन सुरक्षित कैसे रह सकता है क्योंकि वहां पर इतनी गर्मी है और धरती की कुछ भी वस्तु सूरज के आसपास नहीं रह सकती। तो अब हम आपको बताएंगे कि इस मिशन को सूर्य से कितनी दूरी पर रखा जाएगा ताकि यह सुरक्षित रह सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या सूर्य के Aditya -L 1 रह सकेंगा सुरक्षित</h4>
<p style="text-align:justify;">दरअसल सूरज की सतह से थोड़ा ऊपर का तापमान करीब 5500 डिग्री सेल्सियस रहता है। उसके केंद्र का तापमान अधिकतक 1.50 करोड़ डिग्री सेल्सियस रहता है। ऐसे में किसी यान या स्पेसक्राफ्ट का वहां जाना संभव नहीं है। जानकारी के लिए बता दे की धरती पर इंसानों द्वारा बनाई गई कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो सूरज की गर्मी को बर्दाश्त कर वहां पर सुरक्षित रह सके। ऐसे में यही सवाल उठता है कि आखिर इसरो का यह है Aditya -L 1 कैसे सुरक्षित रह सकेगा।<br />
दरअसल इसरो 2 सितंबर की सुबह 11:50 मिनट पर Aditya -L 1 मिशन लॉन्च कर दिया है। यह भारत की पहली अंतरिक्ष आधारित ऑब्जरवेरी है, Aditya -L 1 सूर्य से इतनी दूर तैनात होंगा कि उसे गर्मी तो लगे लेकिन वह मारा न जाए और न ही वो खराब हो सके। उसे इसी हिसाब से बनाया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है L 1 पॉइंट?</h4>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि लैग्रेंज पॉइंट स्पेस में वो स्थान होता है जहां सूरज और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव उस अभिकेंद्रीय बल के बराबर होता है, जो किसी पिंड के वृत्तीय पथ में गति करने के लिए जरूरी है। यह जगह स्पेसक्राफ्ट के लिए काफी उपयुक्त होती है क्योंकि इस पोजीशन में बने रहने के लिए बहुत कम ईंधन खर्च करना पड़ता है। ‌लैग्रेंज पॉइंट नाम गणित के इटेलियन – फ्रेंच विशेषज्ञ Josephy – Lousi Lagrange के नाम पर रखा गया है दरअसल स्पेस में ऐसे पांच स्पेशल पॉइंट्स होते हैं जहां कोई छोटा पिंड दो बड़े पिंडों के साथ एक स्थिर पैटर्न में परिक्रमा कर सकता है। पांच में से तीन अस्थिर पॉइंट्स – L 1, L 2, और L3 होते हैं जो दो बड़े पिंडों को कनेक्ट करने वाली लाइन पर होते हैं। दो स्थिर पॉइंट्स को L 4 और L 5 कहते हैं, जिसे आप तस्वीर में देख सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सूर्य की स्टडी के लिए क्यों भेजा जा रहा है सूर्ययान?</h4>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि सूर्य हमारा तारा है। उससे ही हमारे सौरमंडल को ऊर्जा यानी एनर्जी मिलती है। इसकी उम्र करीब 450 करोड़ साल मानी जाती है। बिना सौर ऊर्जा के धरती पर जीवन संभव नहीं है। दरअसल सूरज की ग्रेविटी की वजह से ही इस सौरमंडल में सभी ग्रह टिके हुए हैं नहीं तो वह कब का सुदूर गहरे अंतरिक्ष में तैर रहे होते। सूरज का केंद्र यानी कोर में न्यूक्लियर फ्यूजन होता है। इसलिए सूरज के चारों तरफ आग उगलती हुई दिखाई देती है। सतह से थोड़ा ऊपर यानी इसके फोटोस्फेयर का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। सूरज की स्टडी इसलिए ताकि उसकी बदौलत सौर मंडल के बाकी ग्रहों की समझ भी बढ़ सके।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Sep 2023 10:24:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आदित्य-एल1 के लिए इंजीनियरों ने महीनों तक नहीं लगाया परफ्यूम</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु (एजेंसी)। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 (Aditya-L1) की रवानगी हो चुकी है। अगले 4 महीनों में भारत का पहला सूर्य यान पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष से सूर्य का अध्ययन करेगा। इसरो का मानना है कि आदित्य एल-1 करीब पांच वर्षों तक सूर्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/engineers-did-not-apply-perfume-for-months-for-aditya-l1/article-51934"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/aditya-l1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)।</strong> श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 (Aditya-L1) की रवानगी हो चुकी है। अगले 4 महीनों में भारत का पहला सूर्य यान पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष से सूर्य का अध्ययन करेगा। इसरो का मानना है कि आदित्य एल-1 करीब पांच वर्षों तक सूर्य का बारीकी से विश्लेषण करेगा। यह सूर्य से लाखों किलोमीटर जरूर दूर रहेगा, लेकिन आदित्य एल-1 का अध्ययन भारत के आगामी मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदित्य एल-1 के जरिए पहली बार में ही इसरो के वैज्ञानिकों ने सूर्य मिशन के लिए कोई यान भेज लिया? इसके पीछे निसंदेह वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत और लगन है। मिशन के शुरूआती दौर में ऐसी बातें भी थीं, जो आपको सुनने में अजीब लगे लेकिन, इन कामों ने मिशन को सफल बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक, सौर मिशन के मुख्य पेलोड पर काम कर रही टीम के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को परफ्यूम लगाकर आने की सख्त मनाही थी। इसके पीछे वैज्ञानिक वजह है। भारत के पहले सौर मिशन आदित्य एल1 के मुख्य पेलोड का निर्माण करने वाली टीम थी- भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान की टीम। टीम में शामिल थे- वैज्ञानिक और इंजीनियर।</p>
<p style="text-align:justify;">इन लोगों के लिए काम के दौरान परफ्यूम या किसी भी प्रकार की सुगंधित चीज लगाकर आने की मनाही थी। टाइम्स आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा इसलिए क्योंकि इत्र का एक भी कण आदित्य के मुख्य पेलोड – विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) को तैयार करने के शोधकर्ताओं के काम को बाधित कर सकता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आईसीयू से एक लाख गुना साफ कमरा</h3>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने सौर मिशन आदित्य-एल1 (Aditya-L1) के मुख्य पेलोड को तैयार करने के लिए बिल्कुल रोगाणुहीन वातावरण तैयार किया था। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इस दौरान बेहद क्लीनरूम में काम किया, ऐसा रूम कि अस्पताल के आईसीयू से 1 लाख गुना अधिक स्वच्छ। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि काम के दौरान टीम को क्या-क्या परेशानियां या सावधानियां बरतनी पड़ी होंगी। टीम के प्रत्येक सदस्य को संदूषण से बचने के लिए स्पेस मैन जैसे सूट पहनने पड़े और यहां तक कि अल्ट्रासोनिक सफाई से भी गुजरना पड़ा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वजह क्या थी</h3>
<p style="text-align:justify;">वीईएलसी तकनीकी टीम के प्रमुख नागाबुशाना एस ने बताया, “इसे (क्लीनरूम) अस्पताल के आईसीयू से 1 लाख गुना ज्यादा साफ रखना पड़ता था।” हमने उच्च दक्षता वाले पार्टिकुलेट एयर फिल्टर, आइसोप्रोपिल अल्कोहल (99 प्रतिशत केंद्रित) और कठोर प्रोटोकॉल को फॉलो किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बाहरी कण काम में व्यवधान उत्पन्न न करे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="गहलोत ने लोक कलाकारों का योजनाओं का पूरा लाभ लेने का किया आह्वान" href="http://10.0.0.122:1245/gehlot-called-upon-folk-artists-to-take-full-benefit-of-the-schemes/">गहलोत ने लोक कलाकारों का योजनाओं का पूरा लाभ लेने का किया आह्वान</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/engineers-did-not-apply-perfume-for-months-for-aditya-l1/article-51934</link>
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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 13:04:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Aditya-L1 Solar Mission: सूर्य की ओर चला आदित्य एल-1</title>
                                    <description><![CDATA[Aditya-L1 Mission Launch: इसरो ने आज अपना पहला सूर्य मिशन आदित्य एल-1 लॉन्च करके दुनिया में अपना तहलका मचा दिया है। इसरो ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से आदित्य एल 1 को लॉन्च किया गया है। मिशन के पेलोड्स को भारत के कई संस्थानों ने मिलकर तैयार किए है। आदित्य एल-1 को डीप स्पेस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/aditya-l1-mission-launch/article-51846"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/aditya-l1-solar-mission.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aditya-L1 Mission Launch: इसरो ने आज अपना पहला सूर्य मिशन आदित्य एल-1 लॉन्च करके दुनिया में अपना तहलका मचा दिया है। इसरो ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से आदित्य एल 1 को लॉन्च किया गया है। मिशन के पेलोड्स को भारत के कई संस्थानों ने मिलकर तैयार किए है। आदित्य एल-1 को डीप स्पेस में यूरोपियन स्पेस एजेंसी भी ग्राउंड स्पोर्ट देगा।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/93-percent-of-2000-notes-returned/">2000 Rupee Note: 2000 के नोट पर आरबीआई ने दी ऐसी जानकारी जिससे मचा हड़कंप</a></p>
<h4 style="text-align:justify;">सूर्य मिशन की सफलता की कुंजी: एलएएम इंजनों का सुचारू संचालन</h4>
<p style="text-align:justify;">लिक्विड अपोजी मोटर (एलएएम) छोटा लेकिन सबसे शक्तिशाली इंजन ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के 2014 के मार्स आॅर्बिटर मिशन (एमओएम) मंगलयान और 2023 के चंद्रयान-3 की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एलएएम इंजन, जिसका उपयोग कक्षा में उपग्रहों/ अंतरिक्ष यान के कक्षीय समायोजन के लिए किया जाता है, पीएसएलवी-सी57 द्वारा प्रक्षेपित किए जाने वाले पहले सूर्य मिशन आदित्य-एल1 की सफलता की कुंजी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे जनवरी 2024 तक सौर सतह पर उतरने में लगभग 120 दिन (चार महीने) का समय लेगा। एलएएम का सफल संचालन, आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र (एसओआई) से बाहर निकलने के बाद लैग्रेंजियन बिंदु एल1 पर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की कुंजी है। मिशन पांच वर्ष का है और यह सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष-आधारित भारतीय सौर मिशन है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरिक्ष यान को ब्रेक करने के लिए सही समय पर एलएएम को फिर से शुरू करना है क्योंकि यह अपने गंतव्य पर पहुंचकर बंद हो जाता है और इसे एल1 पर वांछित प्रभामंडल कक्षा में निर्देशित करता है। इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा कि आदित्य एल1 मिशन, श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट से कल उड़ान भरेगा और सूर्य का अध्ययन करने की सफलता की कुंजी अंतरिक्ष यान पर एलएएम इंजनों का सुचारू संचालन और बाद में चार महीने तक 15 लाख किमी की यात्रा के बाद लैंडिंग करने के बाद जनवरी 2024 के पहले सप्ताह से इसके द्वारा भेजी जाने वाली लगभग 1,440 तस्वीरों का प्रबंधन करने में निहित है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदित्य-एल1 भारत का पहला सौर मिशन है, जो पृथ्‍वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर एल1 पॉइंट (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु) पर सूर्य को मॉन‍िटर करेगा। इसकी लैंडिंग की सफलता में लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) नाम के छोटे लेकिन शक्तिशाली इंजन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एलएएम का सफल संचालन, आदित्य अंतरिक्ष यान को लैग्रेंजियन बिंदु एल 1 पर प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की कुंजी है।लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी), तिरुवनंतपुरम द्वारा विकसित, एलएएम ने पहले के मिशनों मंगलयान और चंद्रयान-3 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।आदित्य-एल1 मिशन में भी, इसरो मंगलयान और चंद्रयान-3 में उपयोग किए जाने वाले एलएएम का उपयोग करेगा। अंतरिक्ष यान की प्रणोदन प्रणाली में 440 न्यूटन एलएएम इंजन, आठ 22 न्यूटन थ्रस्टर्स और चार 10 न्यूटन थ्रस्टर्स शामिल हैं, जिन्हें अंतरिक्ष यान के अभिविन्यास को सही करने के लिए रुक-रुक कर फायर किया जाएगा क्योंकि यह अंतरिक्ष के विशाल खालीपन को पार करेगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 12:34:13 +0530</pubDate>
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                <title>Mission Suryayaan Date LIVE: अभी-अभी इसरो ने दी बड़ी जानकारी, इस दिन लान्च होगा भारत का &amp;#8216;Suryayaan</title>
                                    <description><![CDATA[Solar Exploration Mission Aditya-L1 Satellite भारत का पहला सौर अन्वेषण मिशन आदित्य-एल1 (Aditya-L1) उपग्रह सूर्य की सतह का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए देश में विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित सात वैज्ञानिक पेलोड ले जाएगा। जानकारी के अनुसार, जो 2 सितंबर (Aditya L1 Launch Date Time:) में लॉन्च किया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mission-suryayaan-date-live/article-51688"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/mission-suryayaan-date-live.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Solar Exploration Mission Aditya-L1 Satellite भारत का पहला सौर अन्वेषण मिशन आदित्य-एल1 (Aditya-L1) उपग्रह सूर्य की सतह का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए देश में विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित सात वैज्ञानिक पेलोड ले जाएगा। जानकारी के अनुसार, जो 2 सितंबर (Aditya L1 Launch Date Time:) में लॉन्च किया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि कि आदित्य एल-1 के साथ 7 पेलोड (नीतभार) भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। ये पेलोड सूरज की प्रकाशमंडल, वर्णमंडल और सबसे बाहरी परत का अध्ययन करेंगे। सात में से चार पेलोड लगातार सूर्य पर नजर रखेंगे जबकि तीन पेलोड परिस्थितियों के हिसाब से कणों और मैग्नेटिक फील्ड का अध्ययन करेंगे। Mission Suryayaan Date LIVE</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि आदित्य-एल1 मिशन के साथ सूर्य का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए सात वैज्ञानिक पेलोड ले जाएगा। इसके अलावा विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) सौर कोरोना और कोरोनल मास इजेक्शन की गतिशीलता का अध्ययन करता है। अंतरिक्ष यान वैद्युत-चुम्बकीय और कण और चुंबकीय क्षेत्र संसूचकों का उपयोग करके फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों (कोरोना) का निरीक्षण करने के लिए सात नीतभार ले जाएगा। विशेष सहूलियत बिंदु एल1 का उपयोग करते हुए, चार नीतभार सीधे सूर्य को देखते हैं और शेष तीन नीतभार लाग्रेंज बिंदु एल1 पर कणों और क्षेत्रों का यथावस्थित अध्ययन करते हैं, इस प्रकार अंतर-ग्रहीय माध्यम में सौर गतिकी के प्रसार प्रभाव का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन प्रदान करते हैं। Mission Suryayaan Date LIVE</p>
<p style="text-align:justify;">सौर अल्ट्रा-वायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (एसयूआईटी) पेलोड अल्ट्रा-वायलेट (यूवी) के निकट सौर प्रकाशमंडल और क्रोमोस्फीयर की तस्वीरें लेता है और यूवी के निकट सौर विकिरण भिन्नता को भी मापता है। आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (एएसपीईएक्स) और प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (पीएपीए) पेलोड सौर पवन और ऊजार्वान आयनों के साथ-साथ उनके ऊर्जा वितरण का अध्ययन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर और हाई एनर्जी एल1 आॅर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर विस्तृत एक्स-रे ऊर्जा रेंज में सूर्य से आने वाली एक्स-रे फ्लेयर्स का अध्ययन करते हैं। मैग्नेटोमीटर पेलोड एल1 बिंदु पर अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र को मापने में सक्षम है। आदित्य-एल1 के विज्ञान पेलोड देश में विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं। वीईएलसी उपकरण भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर में, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे में,एसयूआईटी उपकरण, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद में,एएसपीईएक्स उपकरण, अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम में, पापा पेलोड, सोलेक्स और हेल1ओएस पेलोड यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु में और मैग्नेटोमीटर पेलोड इलेक्ट्रो आॅप्टिक्स सिस्टम प्रयोगशाला, बैंगलोर में विकसित किया गया है। सभी पेलोड इसरो के विभिन्न केंद्रों के निकट सहयोग से विकसित किए गए हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Aug 2023 15:46:18 +0530</pubDate>
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